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आत्मबोध और तत्वबौद्ध क्या होता है?

Aatmabodh Aur Tatvabauddh Kya Hota Hai
Ashok Bolkar App
Top Speaker,Level 55
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कृषक👳💦
2:56
आत्मबोध और तत्वज्ञान की दो धाराएं हिमालय से निकलने वाली पतित पावनी गंगा और तरनतारन यमुना की तरह आत्मबोध का अर्थ है अपने उद्गम स्वरूप उत्तरदायित्व एवं लक्ष्य को समझना तदनुसार दृष्टिकोण एवं क्रियाकलाप का निर्धारण करना तत्वों का अर्थ है शरीर उसको उपयोग एवं अंत के संबंध में वस्तुस्थिति से परिचित होना सांसारिक पदार्थों एवं संबंधित व्यक्तियों के साथ जुड़े हुए संबंधों में घुसी हुई भ्रांतियों का निराकरण करना तथा इनके संबंध में बरती जाने वाली नीति का नए सिरे से मूल्यांकन आत्मबोध और उसके काम आने वाले पदार्थों एवं प्राणियों के साथ उचित तालमेल 9 को तत्व कहते हैं ठीक तरह जान लिया जाए तो समझना चाहिए कि ज्ञानसाधना का उद्देश्य पूरा हो गया हर दिन हर रात नई मौत का सूत्र आज बहुत और तत्व की दोनों मात्राओं का प्रयोजन पूरा करता है प्रातः काल नींद खुलते ही हर रोज यह भावना जागृत करनी चाहिए कि आज हमारा नवीनतम जन्म हुआ है और सोते समय तक एक रोज के लिए ही है और आदर्श रीति नीति अपनाते हुए जिया जाए इसके लिए सही है त्याग से लेकर रात को सोते समय तक का कार्यक्रम बनाना चाहिए जिसमें आज के लिए तनिक भी गुंजाइश ना तू रिश्तेदार आए अजीब का उपार्जन नित्यकर्म पारिवारिक उत्तरदायित्व का निर्वाह लोक कल्याण के लिए अधिकतम योगदान उपासना स्वाध्याय आदि के लिए क्रियाकलापों का अमूल्य समय करते हुए इस प्रकार निर्धारण करना चाहिए जिसमें आलस्य प्रमाद के लिए कोई गुंजाइश नारायण विश्राम के लिए रात्रि का समय पर्याप्त है जल्दी सोने और जल्दी उठने की आदत डाली जाना चाहिए समय कहे क्षण विवाह बाद ना जाने पावे और उसका उपयोग नर्तक कामों में नहीं करना चाहिए जीवन को सार्थक बनाने वाले निर्भय की उचित आवश्यकता पूरी करने वाले कार्यों की प्रमुखता रहे मनोरंजन की थकान दूर करने के लिए बीच-बीच में थोड़ा-थोड़ा उचित अवकाश देने के लिए गुंजाइश रखी जा सकती है किंतु गुप्ता पाला घूमने में बेकार समय नाकाम आना पड़े इसकी समुचित सतर्कता बरतनी चाहिए समय ही जीवन है धर्म की संपत्ति है इस मंत्र को पूरी तरह ध्यान में रखा जाए धन्यवाद

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आत्मबोध और तत्वबौद्ध क्या होता है?Aatmabodh Aur Tatvabauddh Kya Hota Hai
Archana Mishra Bolkar App
Top Speaker,Level 22
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Housewife
0:47
हेलो दोस्तों स्वागत है आपका आपका प्रश्न आती है और तब तो बहुत क्या होता है तो फ्रेंड आत्मबोध है होता है जब किसी व्यक्ति को अपने आत्मा का बोध हो जाता है कि जीवन की सच्चाई का पता चल जाता है कि यह जीवन में सब कुछ मोह माया है और यह जीवन एक दिन नष्ट हो जाता है और आत्मा ही अमर होती है और तत्व होता है जब किसी चीज का हम उपयोग करते हैं और उस चीज के उपयोग से में संतुष्टि प्राप्त होती है या किसी सामान को उपयोग करने में जो संतुष्टि मिलती है वह तत्व होता है दर्द होता है तो आत्मबोध आत्मा का ज्ञान होता है और तत्व बोध किसी सामान्य ज्ञान होता है यह किसी वस्तु का ज्ञान होता है बस उसे अंतर है धन्यवाद

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आत्मबोध और तत्वबौद्ध क्या होता है?Aatmabodh Aur Tatvabauddh Kya Hota Hai
neelam mishra Bolkar App
Top Speaker,Level 22
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I am nurse
2:42
नमस्कार गुड गुड आफ्टरनून दोस्तों आप लोग कैसे हैं अनिल मिश्रा आप सभी का स्वागत करती हूं भारत के नंबर वन सवाल जगह पर पूर्ण करें दोस्तों सवाल है कि आज बुधवार तक वह क्या होता है तो जानते हैं हाथ में वोट के बारे में तो आज मूड का मतलब होता है शादी करना है आप बहुत का स्वयं को जानना अपने आप को जानना प्राचीन भारत के समय दोस्तों इसका बहुत बड़ा प्रभाव था और यह जो है अपने आपको जानने की प्रक्रिया है उसको की आत्मा को मिलते हैं दोस्तों आत्मबोध आदि शंकराचार्य के द्वारा रचित एक एक किताब का भी नाम है और उसका नाम है आदमी को तो उसमें बताया गया है कि आज वह क्या है और कैसे किया जाता है तो खुद को जानने के लिए अपने आत्मा को जाने के लिए अपने आप को पहचानने के लिए किस तरह से साधना करनी चाहिए यह सारी चीजें शंकराचार्य में कुछ और दूसरा तो बहुत कड़ी मेहनत तपस्या करने और वह साधना के बाद अपने आप को अपने आत्मा को अपने मन को आदमी जान पाता है आत्मा का ज्ञान होता है उसे उसको कहते हैं और दोस्तों बहुत गुस्सा है दोस्तों आत्मा और परमात्मा के बीच के जान को तत्वज्ञान तक वह खा जाता है तब तो बहुत खा जाता है तो दोस्तों अब तो होश में तो हो जाता है कि जिसे हम रात्रि का जो ज्ञान होता राती जिसे सोने के बाद क्या होता है हमारे शरीर के साथ हमारी इंद्रियां का कौन सा ऐसा पाठ होता है जो चलता रहता है कई सारे जो ज्ञान होते हैं वह कब तुम उन में आते हैं तब तो गोद में यह संसार का बोध संसार के बारे में क्या न जाना पद परमात्मा के बारे में वोट कब तक तो बहुत कहा जाता है और इस सृष्टि का सारा तत्व क्या है संसार का ज्ञान क्या है हमारे मंदिरों का उद्देश्य क्या है मानव निर्माण का उद्देश्य क्या है मनु निर्माण का रहस्य क्या है हमारे आत्मा के रहस्य से हमें परिचय करवाने वाले बोध होता तो होता जाता है या पांच तरह के होते हैं इसमें 5 भाग होते हैं पहला होता है प्रकृति दूसरा तीसरा चौथा पांचवा परमात्मा इस तरह से इसके 5 रूप होते हैं पांचू का हमेशा बोध उत्पन्न हो जाता है उस तत्व के बारे में हम जान लेते हैं जब तक नहीं होता तो बहुत करते हैं तो दोस्तों यह बात में बहुत और तब तो आपको जानकारी सही लगे तो लाइक और कमेंट जरूर करें धन्यवाद दोस्तों

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आत्मबोध और तत्वबौद्ध क्या होता है?Aatmabodh Aur Tatvabauddh Kya Hota Hai
DR.OM PRAKASH SHARMA Bolkar App
Top Speaker,Level 44
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Principal, RSRD COLLEGE OF COMMERCE AND ARTS
2:38
आप लोग और तरबूज क्या होता है प्रातकाल आंख खुलते ही आप बोध की साधना आरंभ होती है जागते ही पालथी मारकर बिस्तर पर बैठ जाएं तथा यह दिन इतने दिन की तरह मानकर रोमांचित प्रार्थना करें ही सर्वशक्तिमान भगवान हमें ऐसी शक्ति देना जिससे हम सुर दुर्लभ मनुष्य जीवन को सार्थक कर सकें यह जीवन 8400000 योनियों में भ्रमण करने के बाद भगवान ने हमें उपहार स्वरूप प्रदान किया है जागरण के साथ ही चिंतन के आधार पर इस जीवन के उद्देश्य रूप रुपयों को चंदे उसी के अनुसार अपनी गतिविधियां निर्धारित करें हर दिन नया दिन हर रात नई मौत पर पुत्री आत्मबोध और तरबूज की साधना व्यवहारिक जीवन को प्रभावित करने वाली यही पुत्र स्तरीय साधना यह भाव चित्रात्मक प्रगति की दिशा में आगे बढ़ने में सहायक हैं इसका उल्लंघन आत्म चिंतन आत्म शोधक हाथ निर्माण विहार विकास के चारों चरणों की पूर्ति के लिए अति महत्वपूर्ण है रात की 20:00 से 9:30 साधना को तत्व बोध के नाम से जानते हैं तो टीचर में विचार करना चाहिए कि नींद एक प्रकार की मृत्यु है जो नया जन्म सुबह उठते समय परमेश्वर के अनुकंपा से हमें प्राप्त हुआ था वह पूर्ण हो रहा है उसने जनकी ने जीवन की पूरे दिन की गतिविधियों की आत्मा समीक्षा तो सोते समय करनी चाहिए दिन भर के कार्यों का मूल्यांकन करें की निंदा की मृत्यु की गोद में निश्चिंत होकर जा रहे जिस डेसीमल शरीर प्राप्त हुआ था उसकी पूर्ति में पूरी निष्ठा से कार्य किया है इस प्रकार आप संतोष से परिपूर्ण शांति चित्र गहरी निंद्रा में सोच रखेंगे ना करवटें बदलने की जरूरत पड़ेगी और ना ही नींद की गोलियां खाने की किस प्रकार अपना जन्म मृत्यु किसकी भावात्मक भावना पर कल्पना पंथी रहनी चाहिए आत्मज्ञान का निश्चय ही उदय होता है अभ्यास के साथ जब हमें भावना गहरी होती जाती तो आसानी से समझ में आने लगता है कि मनुष्य जीवन ईश्वर का सबसे सुदानी और उसके साथियों की दिशा में कुछ विशिष्ट कार्य करने की आस्था जागृत होती है यही तो ध्यान योग की साधना है इसके लिए किसी भी आर्टिस्ट में की आवश्यकता कहां है वीडियो समेत स्टैंड में हालत में बिना देते हैं मिटा देते हैं बेबी इसकी आवश्यकता से कहीं अधिक रात को तो बिस्तर पर लेट कर आंख बंद करने के बाद नींद आने तक का समय ही पर्याप्त है

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आत्मबोध और तत्वबौद्ध क्या होता है?Aatmabodh Aur Tatvabauddh Kya Hota Hai
Gopal rana Bolkar App
Top Speaker,Level 11
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Sales executive
0:35
रागिनी बैटरी का प्रश्न क्या आत्मबोध और तब तो बहुत जाता है आत्मा और परमात्मा से संपर्क करना होता है आज बोध का मतलब वही तत्वों का शाब्दिक अर्थ होता है जियो और सर जी दोनों के बारे में आत्मचिंतन करना और उसकी कल्याण के बारे में सूचना तत्व बोध कराता है धन्यवाद

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