#धर्म और ज्योतिषी

bolkar speaker

क्या आध्यात्मिक जीवन से ही रोग भय और चिंता का निवारण संभव है?

Kya Adhyatmik Jeevan Se Hi Rog Bhay Aur Chinta Ka Nivaran Sambhav Hai
charu seth Bolkar App
Top Speaker,Level 88
सुनिए charu जी का जवाब
Think and speak
2:48
पूछा गया क्या अध्यात्मिक जीवन से ही रोग भय और चिंता का निवारण संभव है देखने तीनो चीज़ अपने आपने बिल्कुल खिलाड़ियों की परिभाषा पहले बताई जाए और उसके बाद उसका निवारण बताया जाए कि शुरुआत कैसे लाते कहां से हो रूप से धार्मिक जीवन का कोई हाथ कलेक्शन नहीं है कि आप अगर आध्यात्मिक जीवन में चले जाएंगे तो भी आप निरोगी रह सकते हैं बिल्कुल नहीं आप योगा कर लीजिए और अपने जीवन में कुछ जो हमारे खाने पीने की चीज है अगर वह आपकी बॉडी पर बहुत ज्यादा इफेक्टिव है तो उन पर रोक लगा दीजिए अपनी जीभ को थोड़ा सा कंट्रोल करें तो आप लोगों के लिए आध्यात्मिक जीवन होता है पारिवारिक जीवन को त्याग ना उसके बाद उस जीवन में जानना चाहते हैं तो उसके लिए आपको ध्यान रखना पड़ेगी बात आती है कि ऐसी चीज है रूप लेता है भूतों से डर लग रहा है अपनों से डर लग रहा है आजकल तो लोगों से अपने भविष्य के पास नौकरी नहीं है और कोई काम नहीं है तो हमारे पास बहुत सारा पैसा है राजनीति की परिभाषा रूप होते हैं कि आपका भ्रम है जीवन से जुड़ा हुआ है उसमें जाने की तो कोई जरूरत नहीं है आपको इतने इतने सक्षम हो डर के आगे जीत है जो यह फूड बोला जाता है अपने आप को जितने में चाहिए और कोशिश कीजिए क्यों तेरे को आप खत्म कर सकें जो जिसमें पायदान पर आ जाए अलग-अलग रूप की होती है इस बात की होती है कि मर जाऊं मेरे पीछे का क्या हुआ पिक चाहिए होती है कि मेरे बच्चे हैं उनकी शादी नहीं हो रही है तुम की शादी कैसे करो उसने अध्यात्मिक जीवन कुछ नहीं कर सकता है अगर आपको किसी चीज की चिंता है अपने पर विश्वास करें आगे बढ़ी है उस चीज का निवारण के लिए और चिंता पर बीजेपी ने पूछा कभी जीवन में जाने की कोई जरूरत नहीं है पारिवारिक जीवन में अपने साथ बनकर अपने परिवार के साथ बंद कर दो

और जवाब सुनें

bolkar speaker
क्या आध्यात्मिक जीवन से ही रोग भय और चिंता का निवारण संभव है?Kya Adhyatmik Jeevan Se Hi Rog Bhay Aur Chinta Ka Nivaran Sambhav Hai
Rakesh Kumar Yadav Bolkar App
Top Speaker,Level 77
सुनिए Rakesh जी का जवाब
👨‍🏫 Teacher.
3:42
रचना है कि क्या आध्यात्मिक जीवन से ही रोग भय और चिंता का निवारण संभव है तो हम इस पर यही कहेंगे कि हम सभी इस बात से भलीभांति अवगत हैं कि मनुष्य जीवन कोरोनावायरस इन ता बहुत ही नकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं और मैंने पढ़ा था एक हैं परमहंस योगानंद जी बताते हैं कि तीनों परेशानियों से बचने के लिए यह आध्यात्मिक जीवन की पूरा जोर लगा लो तो उन्होंने एक किताब में की है और वह लिखते हैं और औषधियां शरीर की कोशिकाओं का केवल बाहर की भौतिक संरचना पर प्रभाव डालती है वह कोशिकाओं के जीवन तत्व या आंतरिक और उत्तरांचल में कोई परिवर्तन नहीं लाते आने की स्थितियों में रोग का निवारण तब तक संभव नहीं होता जब तक कि ऐश्वर्या की आरोग्य कार्य शक्ति भीतर से शरीर के जीवाणुओं या ज्ञान आत्मा प्राणशक्ति के असंतुलन को ठीक नहीं कर देती मतलब कि प्राणशक्ति जड़ सृष्टि और परमात्मा के बीच की कड़ी और बहनों की होकर या इंद्रियों को शांत आकर्षण जगत को प्रकट करती है अंतर्मुखी को जाने पर यह चेतना को ईश्वर के सदा संतुष्ट कारी परमानंद की ओर खींचती है क्रियायोग मनुष्य को किस प्रकार सकारात्मक रूप से प्रभावित करता है या परमहंस जी को एक कथा के माध्यम से स्पष्ट किया था दो व्यक्ति अलग-अलग कमरों में ध्यान कर रहे थे भारतीय कमरे में एक टेलीफोन था और दोनों कमरों में टेलीफोन बजा एक व्यक्ति ने बहुत ही खाट के साथ चाय से कहा मैं इतनी गहराई से ध्यान करूंगा कि मैं टेलीफोन की घंटी सुनाई नहीं सकूंगा यह सच है कि बाहरी छोर के बावजूद आप अपने अंदर में ध्यान लगाने में सफल हो सकते हैं परंतु या व्यर्थ में अपने कार्य को जटिल बना रहा है ऐसे व्यक्ति का एक है ज्ञान योगी की तुलना की जा सकती है जो दृष्टि ध्वनि अकाउंट और आसपास रूपी टेलीफोन ओं का अंतहीन संदेशों की अपेक्षा करते हुए प्राण शक्ति के बाहर और खिंचाव की उपेक्षा करते हुए ईश्वर पर ध्यान की चेष्टा करता है मैंने पढ़ा उसमें कि यह टेलीफोन का करकट कोलाहल की अपेक्षा करने की अपनी शक्ति के बारे में कोई भ्रम नहीं था उसने बुद्धिमानी से फोन का लॉक निकाल दिया और उसकी तुलना एक क्रिया योगी से की जा सकती है जो ध्यान के दौरान संवेदी बाधाओं को रोकने के लिए प्राण शक्ति को इंद्रियों से हटा देता है फिर वह उसको प्रभाव से वापस उत्तर केंद्र की ओर मुड़ता है प्राणायाम के वैज्ञानिक योगी अंतर्मुखी प्राणशक्ति को सफल होता है और हर्षिता तथा विषय में फंसी प्राण परिवारों के प्रमुख ही बना देता है हम सभी जानते हैं कि हम में से प्रत्येक के लिए मेरी प्रार्थना है कि आज से आप घर के लिए सर्वोच्च प्रयास करेंगे और उस प्रयास करते आगे आप तब तक नहीं करेंगे जब तक या प्रभु में स्थापित नहीं हो जाते यदि आप प्रभु से प्रेम करते हैं तो आप क्रिया का आध्यात्मिक का आया भक्ति और निष्ठा के साथ अभ्यास करेंगे प्रभु को क्रिया योग और प्रार्थना का निरंतर खोजे क्योंकि भगवत गीता का उदाहरण देते हुए महावतार बाबाजी से एक बार कहा था कि इस धर्म का थोड़ा सा भी अभ्यास यानी जन्म मृत्यु के चक्र में निहित महान वैसे तुम्हारी रक्षा करेंगे तो देखा जाता है कि आध्यात्मिक जीवन से ही भय और चिंता का निवारण संभव है अगर आप ऐसा इसको आजमाना चाहते हैं तो आप बेशक आजमा सकते हैं

bolkar speaker
क्या आध्यात्मिक जीवन से ही रोग भय और चिंता का निवारण संभव है?Kya Adhyatmik Jeevan Se Hi Rog Bhay Aur Chinta Ka Nivaran Sambhav Hai
Umesh Upaadyay Bolkar App
Top Speaker,Level 33
सुनिए Umesh जी का जवाब
Life Coach | Motivational Speaker
5:57

bolkar speaker
क्या आध्यात्मिक जीवन से ही रोग भय और चिंता का निवारण संभव है?Kya Adhyatmik Jeevan Se Hi Rog Bhay Aur Chinta Ka Nivaran Sambhav Hai
Dukh kaise mite? Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए Dukh जी का जवाब
Unknown
2:29

अन्य लोकप्रिय सवाल जवाब

  • आध्यात्मिक जीवन कैसे अपनाए, आध्यात्मिक जीवन से क्या क्या सम्भव है
URL copied to clipboard