#धर्म और ज्योतिषी

KamalKishorAwasthi Bolkar App
Top Speaker,Level 55
सुनिए KamalKishorAwasthi जी का जवाब
Unknown
10:57
जय श्री राम मैं कमल किशोर अवस्थी राधेश्याम रामायण राम कथा भाग 2 चौथ के ऑडियो के साथ उपस्थित हो और सभी लोगों से राम कथा सुनने के लिए आग्रह करता हूं करबद्ध निवेदन करता हूं और अभिलंब राम कथा पुष्प वाटिका प्रसंग वापस आता हूं श्री गुरु चरण सरोज रज निज मन मुकुर सुधारी वर्णों रघुबर बिमल जसु जो दायक फल चारि करते-करते भ्रमण जब खूनी शाम को गुरु के भय से शीघ्र ही लौटे लक्ष्मण साथ छोड़ते नहीं प्रेमी बालक वृद्ध लौटाए रघुनाथ तूने दे देकर सौगंध गुरु समीप पहुंचे जब कहिए तब समाचार नीति नीति करने लगे दोनों राजकुमारों कुछ कथा सुननी इतिहास ऊपर कुछ ब्रह्म ज्ञान व अध्ययन किया जब रात पहरों बीत गई तो गुरु ने उठकर सहन किया उस समय दबाने लगे दोनों ही राम लखन ना करे गुरु ने जब वादा किया यदि को तब रामचंद्र सोए जागरूक अब रामचंद्र के चरणों को डालने लगे लक्ष्मण सबका रामू ने बार-बार सो जा वही लक्ष्मण भैया प्रभु चरणों में धारण कर थोड़े सबसे पीछे सुनते अरुण सीता की धुन फूटे सबसे पहले श्री गुरु के जगने पहले ही कोशल्या नंदन जागे कर चुके नीति के कार्य से सिख गुरु मेरे गांव की सुमन जागे दुनिया के शीर्ष गणों देखो यहां हूं चार्ट पर चरणों में यह गुरु आश्रम के देवाव्रता कैसा प्रिय उदाहरण है बचपन है जिनका तमला जीवन बनाऊंगी का सद्गुरु जिन्होंने पाया आज गांव की कहानी बड़ों की सीता की गुरुजनों की सेवा सैयम जिन्होंने तनुजा रुतबा बड़ा भूमि का गम खाना मौन रहना संकट को सहन करना यह गुण विनोद जी मंगल हुआ भूमि का कैदी का ही पालन जग में है आदमी पर इतनी सफल हुए जो जग बन गया उनका है राम नाम मन में मन भर में पर्यटन ऐसा है जन्म उसने कहा डंका बजा उन्हीं का प्रातकाल मंगल समय गुरु आज्ञा अनुसार पुष्पों को लेने चले दोनों राजकुमार श्री गुरु पूजा में पुष्पों की रीति नीति आवश्यकता थी वह ब्राह्मण भी इस निमित्त मुनिवर किया गया कि वह खास बाग तिलेश्वर का ताला जवाब पर फूलों से माली से पूछ लगे चुने फूलों को दोनों दोनों में चलता था शीतल मंद पवन भूली रे डाली डाली थी मुनियों का मन भी मोहित हो ऐसी सुगंध मतवाली रवि से फव्वारे चिड़ियाघर मछली घर में लुभाते के सावन भादो की एक बार मन को सुनना तो बनाते थे तब मैं भी एक ब्रेड चावल इतना गिरा हुआ उसके समीप ऊंचे पर गिरिजा मंदिर का बना हुआ बाग बाग की बाग में फैली हुई बहारों फूल भूलकर फूल भी लुटा रहे थे प्यार गेंदा गुलाब मूर्तियां जूही गुलमेंहदी गुलाबाच गुलनार दाऊदी दुपहरिया मा रे बाप के प्रति हजारा हरिद्वार कलिंगा अपनी सुतिया मोड तेरी करने का मिनी सदाबहार मानती माधवी जवानी केवड़ा मोगरा पप्पीय नारंगा चंपा सूर्यमुखी झीलिमिली मारुति नौरंगा चांदनी तुम उधना नाला जलतरंग चमेली चौरंगा गुरु प्यारी गुलज़ार दो गुड़हल गुड़ चीनी घुल पंछी अकेला तेरे बढ़ाने होरी हनुमान गुण केली कुंज कम अलबेला नीले पीले चावल गोरे चितकबरी रंग बिरंगा के हम नाम गिनाए गए क्या क्या के फूल हजारों रंगों के पौधे के अधिकारियों ने कब उठे हुए सब मिले हुए बीजेपी गजब डालियों में सब उठे हुए सब खुले हुए इधर फूल लगे मिथिला के मेहमान उधर बात जो रह गई चुनरी कर दिया दारू दिया ताल के एक समय जब देश से पीड़ित होता था तब मिथिला पति ने अपने हाथों से धरती को रोता था उस समय के भीतर से कल के नीचे कन्या निकली आनंद भी सुने भरनी को पृथ्वी में से कमला निकली या ऋषि यों के 2 दिनों से बंद कर धारिणी दुर्गा निकली या भक्तों के आराधन को जगदंबा जग जग यानी के लिए उचित समय जानकी नाम उनका श्री जनक राज ने उतारा था इसी कारण कहलाई प्रगति की हलकारे द्वारा जो जो यह बढ़ने लगी बढ़ने लगा प्रताप खेल खेल में 1 दिन उठा लिया सोचा तू बोलो मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की जय हो

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