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कुण्डलिनी जागरण के बारे में बताइए?

Kundalini Jagran Ke Bare Mei Bataiye
Ashok Bolkar App
Top Speaker,Level 55
सुनिए Ashok जी का जवाब
कृषक👳💦
7:59
कुंडलिनी चक्र सात प्रकार के होते हैं जिनमें से पहला है मूलाधार चक्र का क्या करें जो कि गोदा और लिंग के बीच चार पंखुड़ियों वाला क्या करें आधार चक्रवती तो 99% लोगों की चेतना इसी चक्र पर अटकी रहती है और वे इस चक्र में रहकर मर जाते हैं जिनके जीवन में संभोग और निंदा की प्रधानता है उनकी ऊर्जा इसी चक्र के आसपास एकत्रित रहती है वित्त मंत्री ने की विधि मनुष्य में जी रहा है इसलिए लोग निंद्रा और समरूप पर संयम रखते हुए इस चक्र पर लगातार ध्यान लगाने से एक चक्र जागृत होने लगता है इसको जागृत करने का दूसरा नियम है या मोर नियम का पालन करते हुए साथ में रहना इस चक्र के जाग्रत होने पर व्यक्ति के भीतर वीरता निर्भीकता और आनंद का भाव जागृत हो जाता है सिद्धियां प्राप्त करने के लिए वीर निर्भीकता और जागरूकता का होना आवश्यक है दूसरा है स्वाधिष्ठान चक्र चक्र है जो लिंग मूल से चार अंगुल टू परिस्थितियां हैं अगर आपकी उर्जा इस जानकारी एकत्रित है तो आपके जीवन में बहुत प्रमोद मनोरंजन घूमना फिरना और मौज मस्ती करने की प्रधानता रहेगी यह सब करती हुई आपका जीवन कब व्यतीत हो जाएगा आपको पता भी नहीं चलेगा और हाथ खाली रह जाएंगे इसका मंत्र कैसे जागृत करें जीवन में मनोरंजन भी जरूरी है लेकिन मनोरंजन मनोरंजन भी व्यक्ति की चेतना को बेहोशी में धकेल ता है फिल्म सच्ची नहीं होती लेकिन उस से जोड़कर आप जो अनुभव करते हैं मैं आपके बेहोश जीवन जीने का प्रमाण है नाटक और मनोरंजन सच नहीं होते इसके जागृत होने पर क्रूरता अग्रवाल समाज आज्ञा अविश्वास आदि दुर्गुणों का नाश होता है सिद्धियां प्राप्त करने के लिए जरूरी है कि उक्त सारे दुर्गुणों समाप्त हो तभी से आपका द्वार खटखटा चक्र चक्र चक्र के अंतर्गत मणिपुर नामक तीसरा चक्र है जो 10 कमल पंक्तियों से युक्त व्यक्ति की चेतना यहां एकत्रित है उसे काम करने की धुन सी लगी रहती है ऐसे लोगों को करनी होगी कहते हैं यह लोग दुनिया का हर कार्य करने के लिए तैयार रहते हैं इसका मंत्रम इसे कैसे जागृत करें आपके कार्य को सकारात्मक आयाम देने के लिए इस चक्र पर ध्यान लगाएंगे पेड़ से सक्रिय होने से तृष्णा ईर्ष्या चुगली लाजवाब है गुरु नाम हो या दी तथा एकल की कमी दूर हो जाते हैं यह शक्ति प्रदान करता है करने के लिए आत्मानं होना जरूरी है आसमान होने के लिए अनुरोध करना जरूरी है कि आप शरीर नहीं आत्मा आत्मा शक्ति आत्मबल और आत्म सम्मान के साथ जीवन का कोई भी लक्ष्य दुर्लभ नहीं होता है अनाहत चक्र में स्थित स्वर्ण वर्ण का द्वादश दल कमल की पंखुड़ियों से युक्त स्वर्ण अक्षरों से सुशोभित चक्र अनाहत चक्र अगर आपकी उर्जा अनाहत में सक्रिय तो आप एक सृजनशील व्यक्ति होंगे और कुछ ना कुछ नया करने की सोचते हैं आप चित्रकार कवि कहानीकार इंजीनियर आदि हो सकते इसका मंत्र है कि हम ऐसे कैसे जागृत करें और ध्यान लगाने से यह चक्र जागृत होने लगता है खासकर रात्रि को सोने से पूर्व इस चक्र पर ध्यान लगाने से यह अभ्यास जागृत होने लगता है और सुषुम्ना इस चक्र को बेचकर ऊपर घमंड करने लगती है के सक्रिय होने पर लिख दा कपाट हिंसा कुतर्क चिंता में दम बा विवेक और अहंकार समाप्त हो जाते हैं इस चक्र के जाग्रत होने से व्यक्ति के भीतर प्रेम और संवेदना का जागरण होता है इसके जागृत होने पर व्यक्ति के समय ज्ञान श्वेता ही प्रकट होने लगता है व्यक्ति अत्यंत आत्मविश्वास शारीरिक रूप से जिम्मेदार एवं भावनात्मक रूप से संतुलित व्यक्तित्व बन जाता है ऐसा व्यक्ति अत्यंत ऐसी एवं बिना किसी स्वार्थ के मानवता प्रेमी एवं सर प्रिय बन जाता है 516 पंखुड़ियों वाला है सामान्य तौर पर यदि आपकी उर्जा इस चक्र के आस पास एकत्रित है तो आप अति शक्तिशाली होने का मंत्र हम कैसे जागृत करें कंठ में संयम करने और ध्यान लगाने से चक्र जागृत होने लगता है इसके जागृत होने पर 16 कलाओं और 16 मोतियों का ज्ञान हो जाता है इसके जागृत होने से जहां भूख और प्यास को रोका जा सकता है मई मौसम के प्रभाव को भी रोका जा सकता है भूमध्य यानी कि दोनों आंखों की बीच वृकुटी में आज्ञा चक्र सामान्य तौर पर इस व्यक्ति की ऊर्जा या ज्यादा सक्रिय व्यक्ति बौद्धिक रूप से संपन्न संवेदनशील और तेज दिमाग का बन जाता है लेकिन वह सब कुछ जानने के बावजूद भी मोहन रहता है इस बहुत जिद्दी भी कहते हैं इसका मंत्र है बिल्कुल ठीक है मत ध्यान लगाते हुए साक्षी भाव में रहने से यह चक्र जागृत होने लगता है यहां अपार शक्तियां और सिद्धियां ने बात करती है इस आज्ञा चक्र का जागरण वाले से यह सभी शक्तियां जाग पड़ती है और व्यक्ति एक सिद्ध पुरुष बन जाता है 7 बार चक्र की स्थिति मस्तिष्क के मध्य भाग में जवान छोटी रखते हैं यदि व्यक्ति यम नियम का पालन करते हुए यहां तक पहुंच गया है तो वह आनंद में शरीर में स्थित हो गया है ऐसे व्यक्ति को संसार सन्यास और सिद्धियों से कोई मतलब नहीं रहता है मूलाधार से होते हुए संस्था तारक पहुंचा जा सकता है लगातार ध्यान करते रहने से यह चक्र जागृत हो जाता है और व्यक्ति परमहंस के पद को प्राप्त कर लेता है इसका प्रभाव शरीर संरचना में इस स्थान पर अनेक महत्वपूर्ण विद्युतीय और जेबी विद्युत का संग्रह है यही मोक्ष का द्वार है धन्यवाद

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कुण्डलिनी जागरण के बारे में बताइए?Kundalini Jagran Ke Bare Mei Bataiye
DR.OM PRAKASH SHARMA Bolkar App
Top Speaker,Level 44
सुनिए DR.OM जी का जवाब
Principal, RSRD COLLEGE OF COMMERCE AND ARTS
0:36
कृष्ण की कुंडली जागरण क्या है कुंडलिनी जागरण के विषय में बहुत शांति है अधिकांश लोग यह समझते हैं कि कुंडली जागरण का तात्पर्य आत्मज्ञान प्राप्त हो जाना परमात्मा में विलीन हो जाना और ध्यान की गहराई में उतर के सामाजिक जो जाना वर्तनी हमारे साथ केंद्र शरीर के भीतर हैं जिन्हें हम सत्य कहते हैं मूलाधार स्वाधिष्ठान मणिपुर अनाहत विशुद्ध आज्ञा आशीष द्वारका मंदिर

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