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हजारी प्रसाद का जीवन परिचय?

Hazari Prasad Ka Jeevan Parichay
Chandan Kumar bharati Bolkar App
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Teacher
2:22
हेलो गुड मॉर्निंग आपका ब्रोकर में स्वागत है आपका प्रार्थना किया जारी प्रसाद का जीवनी परिचय बतलाई हजारी प्रसाद द्विवेदी का जन्म 1960 ईस्वी में भारत दुबे की छपरा बलिया उत्तर प्रदेश में हुआ था त्रिवेदी जी का साहित्य कर्म भारतवर्ष के संस्कृति इतिहास की रक्षा आतंक प्रेरित है संस्कृति प्राकृतिक बांग्ला आदि भाषाओं के साहित्य के साथ इतिहास संस्कृत धर्म-दर्शन और आधुनिक ज्ञान-विज्ञान की व्यापकता गहनता में बैठकर उनका मानवतावादी आलोचना की क्षमता लेकर प्रकट किया गया है या प्रकट हुआ है इनकी प्रमुख रचनाएं हैं अशोक के फूल कल्पनात्मक विचार विजेता कुट्टनाद विचार प्रवाह और फिर अनामदास का पोथा उपन्यास इन कथा सूरत साहित्य कबीर मध्य का ऋणी बोध का स्वरूप नाथ संप्रदाय कालिदास की लाइट योजना हिंदी साहित्य बहुत चीजें वह आदिकाल के लिए गए हुए थे त्रिवेदी जी को अनूपपुर पर साहित्य अकैडमी पुरस्कार भी सरकार द्वारा सम्मानित किया गया था इनको पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था लखनऊ विश्वविद्यालय द्वारा डिप्टी की उपाधि भी उन्हें मिली थी उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय शांतिनिकेतन विश्वविद्यालय चंडीगढ़ विश्वविद्यालय में प्रोफेसर और प्रशासनिक पदों पर भी रहे सन् 1989 में दिल्ली में उनका निधन हो गया हजारी प्रसाद त्रिवेदी ग्रंथावली शैली में प्रस्तुत निबंध में लिखने वाला कार का बारूद उसको पर है इसी के साथ अपनी वाणी को विराम देता ट्रेन चार्ट
Helo gud morning aapaka brokar mein svaagat hai aapaka praarthana kiya jaaree prasaad ka jeevanee parichay batalaee hajaaree prasaad dvivedee ka janm 1960 eesvee mein bhaarat dube kee chhapara baliya uttar pradesh mein hua tha trivedee jee ka saahity karm bhaaratavarsh ke sanskrti itihaas kee raksha aatank prerit hai sanskrti praakrtik baangla aadi bhaashaon ke saahity ke saath itihaas sanskrt dharm-darshan aur aadhunik gyaan-vigyaan kee vyaapakata gahanata mein baithakar unaka maanavataavaadee aalochana kee kshamata lekar prakat kiya gaya hai ya prakat hua hai inakee pramukh rachanaen hain ashok ke phool kalpanaatmak vichaar vijeta kuttanaad vichaar pravaah aur phir anaamadaas ka potha upanyaas in katha soorat saahity kabeer madhy ka rnee bodh ka svaroop naath sampradaay kaalidaas kee lait yojana hindee saahity bahut cheejen vah aadikaal ke lie gae hue the trivedee jee ko anoopapur par saahity akaidamee puraskaar bhee sarakaar dvaara sammaanit kiya gaya tha inako padm bhooshan se sammaanit kiya gaya tha lakhanoo vishvavidyaalay dvaara diptee kee upaadhi bhee unhen milee thee unhonne kaashee hindoo vishvavidyaalay shaantiniketan vishvavidyaalay chandeegadh vishvavidyaalay mein prophesar aur prashaasanik padon par bhee rahe san 1989 mein dillee mein unaka nidhan ho gaya hajaaree prasaad trivedee granthaavalee shailee mein prastut nibandh mein likhane vaala kaar ka baarood usako par hai isee ke saath apanee vaanee ko viraam deta tren chaart

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हजारी प्रसाद का जीवन परिचय?Hazari Prasad Ka Jeevan Parichay
Vaishnavi Pandey Bolkar App
Top Speaker,Level 22
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Student / Artist
1:07
नमस्कार आप ने प्रश्न किया है हजारी प्रसाद द्विवेदी जी का जीवन परिचय तो हजारी प्रसाद द्विवेदी जी का जन्म 1960 में हुआ था बलिया जिले के दुबे का छपरा नामक गांव में इनके पिता का नाम पंडित अनमोल दुबे था और इनके शिक्षा की बात करें तो इन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय से ज्योतिष आचार्य की उपाधि प्राप्त की थी 1929 में इन्होंने डी लिट की उपाधि तथा ना कि 57 में पद्म भूषण सम्मान के रूप में प्राप्त किया था साहित्य के अहम बात करें तो वे निबंधकार आलोचक उपन्यासकार थे और उनकी भाषा शुद्ध परिष्कृत एवं परिमार्जित खड़ी बोली थी कि धर्म बात करें तो विवेचनात्मक विवेचनात्मक आलोचनात्मक भावनात्मक और आत्मरक्षा हिंदी साहित्य जगत में द्विवेदी जी को एक विद्वान समालोचक निबंधकार एवं आत्मकथा सीता के रूप में जाना जाता है द्विवेदी जी की मृत्यु 1979 में हो गई धन्यवाद
Namaskaar aap ne prashn kiya hai hajaaree prasaad dvivedee jee ka jeevan parichay to hajaaree prasaad dvivedee jee ka janm 1960 mein hua tha baliya jile ke dube ka chhapara naamak gaanv mein inake pita ka naam pandit anamol dube tha aur inake shiksha kee baat karen to inhonne kaashee hindoo vishvavidyaalay se jyotish aachaary kee upaadhi praapt kee thee 1929 mein inhonne dee lit kee upaadhi tatha na ki 57 mein padm bhooshan sammaan ke roop mein praapt kiya tha saahity ke aham baat karen to ve nibandhakaar aalochak upanyaasakaar the aur unakee bhaasha shuddh parishkrt evan parimaarjit khadee bolee thee ki dharm baat karen to vivechanaatmak vivechanaatmak aalochanaatmak bhaavanaatmak aur aatmaraksha hindee saahity jagat mein dvivedee jee ko ek vidvaan samaalochak nibandhakaar evan aatmakatha seeta ke roop mein jaana jaata hai dvivedee jee kee mrtyu 1979 mein ho gaee dhanyavaad

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हजारी प्रसाद का जीवन परिचय?Hazari Prasad Ka Jeevan Parichay
Meghsinghchouhan Bolkar App
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student
0:27
आप ने सवाल पूछा है कि हजारी प्रसाद का जीवन परिचय तो हजारी प्रसाद द्विवेदी का जन्म 20 अगस्त सन 1960 ईस्वी में बलिया जिले के दुबे का छपरा नामक ग्राम में हुआ था उसके पिता का नाम अनमोल दुबे तथा माता का नाम श्रीमती ज्योतिष कलीदेवी था उसकी शिक्षा अक्षरों में संस्कृत में हुई थी
Aap ne savaal poochha hai ki hajaaree prasaad ka jeevan parichay to hajaaree prasaad dvivedee ka janm 20 agast san 1960 eesvee mein baliya jile ke dube ka chhapara naamak graam mein hua tha usake pita ka naam anamol dube tatha maata ka naam shreematee jyotish kaleedevee tha usakee shiksha aksharon mein sanskrt mein huee thee

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हजारी प्रसाद का जीवन परिचय?Hazari Prasad Ka Jeevan Parichay
Deepak Perwani7017127373 Bolkar App
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Job
1:43
हजारी प्रसाद का जीवन परिचय का सारे हजारी प्रसाद द्विवेदी जी का जन्म 19 अगस्त 1960 ईस्वी में उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में हुआ आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी प्रसिद्ध निबंधकार उपन्यासकार और प्रसिद्ध आलोचक के नाम से जाने जाते हैं आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी जी की प्रमुख रचनाएं कुछ इस प्रकार है पारिवारिक परंपरा के अनुसार उन्होंने सबसे पहले संस्कृत भाषा का अध्ययन किया था क्योंकि उनका जन्म ब्राह्मण परिवार में हुआ था उसके बाद उन्होंने काशी विश्वविद्यालय से ज्योतिष आचार्य की परीक्षा होती है कि कुछ दिनों बाद शांति निकेतन चलेगा निर्देशक के पद पर कार्य करते रहें उन्होंने काशी विश्वविद्यालय के हिंदी अध्यक्ष पद पर कार्य की भारत सरकार ने उन्हें पद्मभूषण अलंकार से सम्मानित किया कुछ दिनों तक इन्होंने चंडीगढ़ विश्वविद्यालय के हिंदी पद पर भी कार्यक्रम इन की प्रमुख रचनाओं के बात करते हैं प्रमुख रचनाएं बाणभट्ट की आत्मकथा अशोक के फूल है यह इनकी जो है निबंध आलोक पर्व कोटल पुनर्नवा विचार प्रवाह कल्प लता इत्यादि की रचनाएं हैं इनका जीवन जो है काफी कठिन परिस्थितियों में गुजरा था उनके दो पिता थे वह अनमोल दुबे और माता ज्योति कली थी शांतिनिकेतन में जो है मुलाकात रविंद्र नाथ टैगोर से हुई थी रविंद्र नाथ टैगोर जो है हिंदी साहित्य के बहुत बड़े विद्वान कलाकार थे और आखरी में 19 मई 1979 को में उनका स्वर्गवास हो गया
Hajaaree prasaad ka jeevan parichay ka saare hajaaree prasaad dvivedee jee ka janm 19 agast 1960 eesvee mein uttar pradesh ke baliya jile mein hua aachaary hajaaree prasaad dvivedee prasiddh nibandhakaar upanyaasakaar aur prasiddh aalochak ke naam se jaane jaate hain aachaary hajaaree prasaad dvivedee jee kee pramukh rachanaen kuchh is prakaar hai paarivaarik parampara ke anusaar unhonne sabase pahale sanskrt bhaasha ka adhyayan kiya tha kyonki unaka janm braahman parivaar mein hua tha usake baad unhonne kaashee vishvavidyaalay se jyotish aachaary kee pareeksha hotee hai ki kuchh dinon baad shaanti niketan chalega nirdeshak ke pad par kaary karate rahen unhonne kaashee vishvavidyaalay ke hindee adhyaksh pad par kaary kee bhaarat sarakaar ne unhen padmabhooshan alankaar se sammaanit kiya kuchh dinon tak inhonne chandeegadh vishvavidyaalay ke hindee pad par bhee kaaryakram in kee pramukh rachanaon ke baat karate hain pramukh rachanaen baanabhatt kee aatmakatha ashok ke phool hai yah inakee jo hai nibandh aalok parv kotal punarnava vichaar pravaah kalp lata ityaadi kee rachanaen hain inaka jeevan jo hai kaaphee kathin paristhitiyon mein gujara tha unake do pita the vah anamol dube aur maata jyoti kalee thee shaantiniketan mein jo hai mulaakaat ravindr naath taigor se huee thee ravindr naath taigor jo hai hindee saahity ke bahut bade vidvaan kalaakaar the aur aakharee mein 19 maee 1979 ko mein unaka svargavaas ho gaya

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हजारी प्रसाद का जीवन परिचय?Hazari Prasad Ka Jeevan Parichay
Shruti Yadav Bolkar App
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3:00
सवाल ये है कि हजारी प्रसाद का जीवन परिचय आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का जन्म 20 अगस्त 1950 ईस्वी में बलिया जिले के दुबे के छपरा नामक ग्राम में हुआ उनके पिता का नाम श्री अनमोल दुबे एवं माता का नाम श्रीमती ज्योति कला देवी हां था उनकी शिक्षा का प्रारंभ कब से हुआ इंटर की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद इन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय से ज्योतिष शास्त्र साहित्य में आचार्य की उपाधि प्राप्त की 1940 ईस्वी में हिंदी एवं संस्कृत के अध्यापक के रूप में शांति निकेतन चले गए यही इन्हें विश्वकवि रवींद्रनाथ टैगोर की सानिध्य मिला और साहित्य सृजन की ओर अभिमुख हो गए सन 1956 ईस्वी में काशी हिंदू विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में अध्यक्ष नियुक्त हुए कुछ समय तक पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ में हिंदी विश्व भाग्य के रूप में भी कार्य किया 19 49 ईसवी में लखनऊ विश्वविद्यालय मिनेमिन्नी लेख तथा सन् 1957 में भारत सरकार ने पद्म भूषण की उपाधि से विभूषित किया 19 मई 1979 को इनका देवाफन हो गया आज द्विवेदी जी ने बाल्यकाल से ही श्री ब्योमकेश शास्त्री की कविता लिखने की कला सीखनी आरंभ कर दी और शांति निकेतन पहुंचकर उनकी प्रतिभा और अधिक निखरने लगी कवींद्र रवींद्र ने कहा उन पर विशेष प्रभाव पड़ा बांग्ला साहित्य से बहुत प्रभावित थे कि उच्च कोटि के शोधकर्ता निबंधकार उपन्यास का एवं आलोचक थे सिद्ध साहित्य जैन साहित्य एवं अपभ्रंश साहित्य को प्रकाश मिलाकर तथा भक्ति साहित्य पर उच्चस्तरीय समीक्षात्मक व्रत एक ग्रंथों की रचना करके उन्होंने हिंदी साहित्य की महान सेवा की वैसे तो वैसे तो द्वेदी अनेक विषयों पर उत्कृष्ट कोटि के निबंध एवं नवीन शैली पर आधारित उपन्यासों की रचना की है पर विशेष रूप से व्यक्तित्व एवं भावनात्मक निबंध की रचना करने में यह अद्वितीय रहे दिवेदी जी उत्तर प्रदेश ग्रंथ अकादमी के अध्यक्ष हिंदी संस्थान के उपाध्यक्ष भी रहे हैं तभी पर तो पृष्ठ आलोचनात्मक कार्य करने का कारण इन्हें मंगला प्रसाद पारितोषिक प्राप्त हुआ इसके साथ ही सुर साहित्य पर इंदौर साहित्य समिति ने स्वर्ण पदक प्रदान किया इन्होंने शांतिनिकेतन में हिंदी प्राध्यापक के रूप में 18 नवंबर 1930 को अपने करियर की शुरुआत की थी उन्होंने 1940 में विश्व भारती भवन के कार्यालय में निदेशक के रूप में पदोन्नति प्रदान की अपने कार्यकारी जीवन में इनकी मुलाकात रविंद्र नाथ टैगोर से शांतिनिकेतन में हुई उन्होंने 1950
Savaal ye hai ki hajaaree prasaad ka jeevan parichay aachaary hajaaree prasaad dvivedee ka janm 20 agast 1950 eesvee mein baliya jile ke dube ke chhapara naamak graam mein hua unake pita ka naam shree anamol dube evan maata ka naam shreematee jyoti kala devee haan tha unakee shiksha ka praarambh kab se hua intar kee pareeksha utteern karane ke baad inhonne kaashee hindoo vishvavidyaalay se jyotish shaastr saahity mein aachaary kee upaadhi praapt kee 1940 eesvee mein hindee evan sanskrt ke adhyaapak ke roop mein shaanti niketan chale gae yahee inhen vishvakavi raveendranaath taigor kee saanidhy mila aur saahity srjan kee or abhimukh ho gae san 1956 eesvee mein kaashee hindoo vishvavidyaalay ke hindee vibhaag mein adhyaksh niyukt hue kuchh samay tak panjaab vishvavidyaalay chandeegadh mein hindee vishv bhaagy ke roop mein bhee kaary kiya 19 49 eesavee mein lakhanoo vishvavidyaalay mineminnee lekh tatha san 1957 mein bhaarat sarakaar ne padm bhooshan kee upaadhi se vibhooshit kiya 19 maee 1979 ko inaka devaaphan ho gaya aaj dvivedee jee ne baalyakaal se hee shree byomakesh shaastree kee kavita likhane kee kala seekhanee aarambh kar dee aur shaanti niketan pahunchakar unakee pratibha aur adhik nikharane lagee kaveendr raveendr ne kaha un par vishesh prabhaav pada baangla saahity se bahut prabhaavit the ki uchch koti ke shodhakarta nibandhakaar upanyaas ka evan aalochak the siddh saahity jain saahity evan apabhransh saahity ko prakaash milaakar tatha bhakti saahity par uchchastareey sameekshaatmak vrat ek granthon kee rachana karake unhonne hindee saahity kee mahaan seva kee vaise to vaise to dvedee anek vishayon par utkrsht koti ke nibandh evan naveen shailee par aadhaarit upanyaason kee rachana kee hai par vishesh roop se vyaktitv evan bhaavanaatmak nibandh kee rachana karane mein yah adviteey rahe divedee jee uttar pradesh granth akaadamee ke adhyaksh hindee sansthaan ke upaadhyaksh bhee rahe hain tabhee par to prshth aalochanaatmak kaary karane ka kaaran inhen mangala prasaad paaritoshik praapt hua isake saath hee sur saahity par indaur saahity samiti ne svarn padak pradaan kiya inhonne shaantiniketan mein hindee praadhyaapak ke roop mein 18 navambar 1930 ko apane kariyar kee shuruaat kee thee unhonne 1940 mein vishv bhaaratee bhavan ke kaaryaalay mein nideshak ke roop mein padonnati pradaan kee apane kaaryakaaree jeevan mein inakee mulaakaat ravindr naath taigor se shaantiniketan mein huee unhonne 1950

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हजारी प्रसाद का जीवन परिचय?Hazari Prasad Ka Jeevan Parichay
TechVR ( Vikas RanA) Bolkar App
Top Speaker,Level 22
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IT Professional
1:27
आई होप आप सब ठीक होंगे प्रश्न पूछा गया हजारी प्रसाद का जीवन परिचय लिखिए आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का जन्म 20 अगस्त सन 1960 में बलिया के जिले दुबे का छपरा नाम ग्राम में हुआ था इनके पिता का नाम श्री अनमोल दुबे एवं माता का नाम श्रीमती ज्योति ज्योति कली देवी था उनकी शिक्षा परिणाम संस्कृत में हुआ इंटर की परीक्षा इंटर की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय की समाज की और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के नाम से जानते हैं वहां से ज्योतिष तथा साहित्य में आचार्य की उपाधि प्राप्त की सन 1940 ईस्वी में हिंदी गम संस्कृत अध्यापक के रूप में शांति निकेतन चले गए यही इन्हें भी सूखा के रवि रविंद्र नाथ टैगोर का सानिध्य मिला और साहित्य सृजन की ओर अभिमुख होगी जानकी उसकी तरफ हो गए 1956 में काशी हिंदू विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अध्यक्ष नियुक्त हुए उसमें तक पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ में हिंदी विभाग विभाग अध्यक्ष के रूप में कार्य किया सन् 1949 में जाने की 2019 में लखनऊ विश्वविद्यालय मैंने डिलीट तथा सन् 1957 में उन्हें भारत सरकार में पद्म भूषण की उपाधि और सभी विभूषित किया था 19 मई 1989 जाने की 999 का देहांत हो गया था कुछ इनके बारे में उनका जीवन परिचय आशा करता हूं आपको पसंद आया हो तो लाइक और सब्सक्राइब करें धन्यवाद
Aaee hop aap sab theek honge prashn poochha gaya hajaaree prasaad ka jeevan parichay likhie aachaary hajaaree prasaad dvivedee ka janm 20 agast san 1960 mein baliya ke jile dube ka chhapara naam graam mein hua tha inake pita ka naam shree anamol dube evan maata ka naam shreematee jyoti jyoti kalee devee tha unakee shiksha parinaam sanskrt mein hua intar kee pareeksha intar kee pareeksha utteern karane ke baad unhonne kaashee hindoo vishvavidyaalay kee samaaj kee aur banaaras hindoo vishvavidyaalay ke naam se jaanate hain vahaan se jyotish tatha saahity mein aachaary kee upaadhi praapt kee san 1940 eesvee mein hindee gam sanskrt adhyaapak ke roop mein shaanti niketan chale gae yahee inhen bhee sookha ke ravi ravindr naath taigor ka saanidhy mila aur saahity srjan kee or abhimukh hogee jaanakee usakee taraph ho gae 1956 mein kaashee hindoo vishvavidyaalay ke hindee vibhaag ke adhyaksh niyukt hue usamen tak panjaab vishvavidyaalay chandeegadh mein hindee vibhaag vibhaag adhyaksh ke roop mein kaary kiya san 1949 mein jaane kee 2019 mein lakhanoo vishvavidyaalay mainne dileet tatha san 1957 mein unhen bhaarat sarakaar mein padm bhooshan kee upaadhi aur sabhee vibhooshit kiya tha 19 maee 1989 jaane kee 999 ka dehaant ho gaya tha kuchh inake baare mein unaka jeevan parichay aasha karata hoon aapako pasand aaya ho to laik aur sabsakraib karen dhanyavaad

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हजारी प्रसाद का जीवन परिचय?Hazari Prasad Ka Jeevan Parichay
Rajendra Malkhat Bolkar App
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Self student
2:39
कल तो आपका प्रश्न है हजारी प्रसाद का जीवन परिचय क्या दोस्तों आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी जी का जन्म 20 अगस्त सन 1960 ईस्वी बलिया जिला दुबे का झोपड़ा नामक ग्राम में हुआ था उनके पिता जी का नाम श्री अनमोल दुबे एवं माता का नाम श्रीमती ज्योति कली देवी था इनकी शिक्षक प्रारंभ संस्कृत इंटर की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद इन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय जो आज हम बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के नाम से जानते हैं जो 30 तथा साहित्य में आचार्य की उपाधि प्राप्त की सन 1940 ईस्वी में हिंदी एवं संस्कृत के अध्यापक के रूप में शांति निकेतन चले गए यही इन्हें विश्वकवि रवींद्रनाथ टैगोर का सानिध्य मिला और साहित्य सृजन की ओर अभिमुख हो गई सन 1956 ईस्वी में काशी हिंदू विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में अध्यक्ष नियुक्त हुए कुछ समय तक पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ में हिंदी विभागाध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया सन् 1949 ईस्वी में लखनऊ विश्वविद्यालय ने इन हिंदी लिटरेचर तथा सन 1957 ईस्वी में भारत सरकार ने इसे पद्म विभूषण की उपाधि से विभूषित किया 19 मई 1979 को उनका देहावसान हो गया था वह तो उनका साहित्य जो पिक्चर है वह इस प्रकार से हैं द्विवेदी जी ने बाल्यकाल से ही श्री एवं के शास्त्री से कविता लिखने की कला सीखनी आरंभ कर दी थी शांतिनिकेतन पहुंचकर उनकी प्रतिभा और और अधिक बिखरने लगी कवींद्र रवींद्र का देने पर विशेष प्रभाव पड़ा बांग्ला साहित्य से भी यह बहुत प्रभावित थे यह उच्च कोटि के शोधकर्ता निबंधकार उपन्यासकार एवं आलोचक के सिद्ध साहित्य साहित्य एवं अमृत साहित्य को प्रकाश मिलाकर तथा भक्ति साहित्य का उच्चस्तरीय समीक्षा धमक ग्रंथों की रचना करके उन्होंने हिंदी साहित्य की महान सेवा की वैसे तो द्विवेदी जी ने अनेक विषयों पर उत्कृष्ट कोटि के निबंधन एवं नवीन शैली पर आधारित उपन्यासों की रचना की विशेष रूप से व्यक्ति के उन भावात्मक निबंधों की रचना करने में यह अद्वितीय रहे दिवेदी जी उत्तर प्रदेश ग्रंथ अकादमी के अध्यक्ष और हिंदी संस्थान के उपाध्यक्ष भी रहे कबीरपुर उत्कृष्ट आलोचनात्मक कार्य करने के कारण ने मंगला प्रसाद मंगला प्रसाद पारितोषिक प्राप्त हुआ इनके साथ ही सुर साहित्य पर इंदौर साहित्य समिति ने स्वर्ण पदक भी प्रदान किया था धन्यवाद
Kal to aapaka prashn hai hajaaree prasaad ka jeevan parichay kya doston aachaary hajaaree prasaad dvivedee jee ka janm 20 agast san 1960 eesvee baliya jila dube ka jhopada naamak graam mein hua tha unake pita jee ka naam shree anamol dube evan maata ka naam shreematee jyoti kalee devee tha inakee shikshak praarambh sanskrt intar kee pareeksha utteern karane ke baad inhonne kaashee hindoo vishvavidyaalay jo aaj ham banaaras hindoo vishvavidyaalay ke naam se jaanate hain jo 30 tatha saahity mein aachaary kee upaadhi praapt kee san 1940 eesvee mein hindee evan sanskrt ke adhyaapak ke roop mein shaanti niketan chale gae yahee inhen vishvakavi raveendranaath taigor ka saanidhy mila aur saahity srjan kee or abhimukh ho gaee san 1956 eesvee mein kaashee hindoo vishvavidyaalay ke hindee vibhaag mein adhyaksh niyukt hue kuchh samay tak panjaab vishvavidyaalay chandeegadh mein hindee vibhaagaadhyaksh ke roop mein bhee kaary kiya san 1949 eesvee mein lakhanoo vishvavidyaalay ne in hindee litarechar tatha san 1957 eesvee mein bhaarat sarakaar ne ise padm vibhooshan kee upaadhi se vibhooshit kiya 19 maee 1979 ko unaka dehaavasaan ho gaya tha vah to unaka saahity jo pikchar hai vah is prakaar se hain dvivedee jee ne baalyakaal se hee shree evan ke shaastree se kavita likhane kee kala seekhanee aarambh kar dee thee shaantiniketan pahunchakar unakee pratibha aur aur adhik bikharane lagee kaveendr raveendr ka dene par vishesh prabhaav pada baangla saahity se bhee yah bahut prabhaavit the yah uchch koti ke shodhakarta nibandhakaar upanyaasakaar evan aalochak ke siddh saahity saahity evan amrt saahity ko prakaash milaakar tatha bhakti saahity ka uchchastareey sameeksha dhamak granthon kee rachana karake unhonne hindee saahity kee mahaan seva kee vaise to dvivedee jee ne anek vishayon par utkrsht koti ke nibandhan evan naveen shailee par aadhaarit upanyaason kee rachana kee vishesh roop se vyakti ke un bhaavaatmak nibandhon kee rachana karane mein yah adviteey rahe divedee jee uttar pradesh granth akaadamee ke adhyaksh aur hindee sansthaan ke upaadhyaksh bhee rahe kabeerapur utkrsht aalochanaatmak kaary karane ke kaaran ne mangala prasaad mangala prasaad paaritoshik praapt hua inake saath hee sur saahity par indaur saahity samiti ne svarn padak bhee pradaan kiya tha dhanyavaad

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हजारी प्रसाद का जीवन परिचय?Hazari Prasad Ka Jeevan Parichay
Saloni vishwkarma   Bolkar App
Top Speaker,Level 11
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Unknown
1:41
नमस्कार दोस्तों आपका क्वेश्चन है हजारी प्रसाद जी का जीवन परिचय तो सबसे पहले मैं आपको बता दूं कि जब हजारी प्रसाद द्वेदी थे उनका पूरा नाम आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी था इनका जो जन्म हुआ था सन में से 7 ईसवी में बलिया जिले के दुबे का छपरा नामक किसी गांव में हुआ था इनके पिता का नाम श्री अनुज द्विवेदी था और उनकी माता का नाम श्रीमती ज्योतिषमति था कि शिक्षा का प्रारंभ संस्कृत से हुआ था और इंटर की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद इन्होंने काशी विश्वविद्यालय में से ज्योतिष चैनल साहित्य में आचार्य की उपाधि प्राप्त की थी सन 1940 में हिंदी एवं संस्कृत के अध्यापक के रूप में शांति निकेतन चले गए यही इन्हें विश्वकवि रवींद्रनाथ टैगोर थे इनका सानिध्य मिला और साहित्य सृजन की हो रही है अभी खो गए 1949 में लखनऊ विश्वविद्यालय में निकली और अनुसूचित भारत सरकार ने पदम भूषण की उपाधि से विभूषित किया था और उनका निधन हुआ था वह 18 मई सन 1919 ईस्वी में हुआ था और मैं आपको इनकी रचनाएं यानी की कृतियां बता दूं तुम्हें थोड़ा बहुत ही जानती हूं निबंध में है जो मैंने 55 से ही याद किया था तो उसमें से जो है विचार और वितर्क कल्पना अशोक के फूल को टच साहित्य के साथी कल्प कल्प लता विचार प्रवाह आलोक करवा दी यही समय जानती हो मैं बहुत ज्यादा लंबा था इसलिए मैंने आदमी के बारे में मुझे बस इतना ही पता है
Namaskaar doston aapaka kveshchan hai hajaaree prasaad jee ka jeevan parichay to sabase pahale main aapako bata doon ki jab hajaaree prasaad dvedee the unaka poora naam aachaary hajaaree prasaad dvivedee tha inaka jo janm hua tha san mein se 7 eesavee mein baliya jile ke dube ka chhapara naamak kisee gaanv mein hua tha inake pita ka naam shree anuj dvivedee tha aur unakee maata ka naam shreematee jyotishamati tha ki shiksha ka praarambh sanskrt se hua tha aur intar kee pareeksha utteern karane ke baad inhonne kaashee vishvavidyaalay mein se jyotish chainal saahity mein aachaary kee upaadhi praapt kee thee san 1940 mein hindee evan sanskrt ke adhyaapak ke roop mein shaanti niketan chale gae yahee inhen vishvakavi raveendranaath taigor the inaka saanidhy mila aur saahity srjan kee ho rahee hai abhee kho gae 1949 mein lakhanoo vishvavidyaalay mein nikalee aur anusoochit bhaarat sarakaar ne padam bhooshan kee upaadhi se vibhooshit kiya tha aur unaka nidhan hua tha vah 18 maee san 1919 eesvee mein hua tha aur main aapako inakee rachanaen yaanee kee krtiyaan bata doon tumhen thoda bahut hee jaanatee hoon nibandh mein hai jo mainne 55 se hee yaad kiya tha to usamen se jo hai vichaar aur vitark kalpana ashok ke phool ko tach saahity ke saathee kalp kalp lata vichaar pravaah aalok karava dee yahee samay jaanatee ho main bahut jyaada lamba tha isalie mainne aadamee ke baare mein mujhe bas itana hee pata hai

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हजारी प्रसाद का जीवन परिचय?Hazari Prasad Ka Jeevan Parichay
Raghvendra  Tiwari Pandit Ji Bolkar App
Top Speaker,Level 22
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Unknown
2:45
हेलो सर नमस्कार जैसा कि आपका प्रश्न है हजारी प्रसाद का जीवन परिचय लिखित फ्रेंड हजारी प्रसाद आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का जन्म जो है वह 20 अगस्त 1960 ईस्वी में बलिया जिले के दुबे का छपरा नामक ग्राम में हुआ था इनके पिता का नाम श्री अनमोल दुबे तथा माता का नाम श्रीमती ज्योति कला देवी था इनकी शिक्षा का प्रारंभ जो है फ्रेंड वह संस्कृत किससे हुआ इंटर की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय जो आज हम बनारस यूनिवर्सिटी यूनिवर्सिटी हिंदू विश्वविद्यालय के नाम से जानते हैं फ्रेंड से ज्योतिष कथा साहित्य में आचार्य की उपाधि प्राप्त की सन 1940 में हिंदी एवं संस्कृत के अध्यापक के रूप में शांतिनिकेतन चले गए फ्रेंड यहां इन्हें विश्वकवि रवींद्रनाथ टैगोर के सानिध्य में रहने का अवसर प्राप्त सुबह और इन्हीं के जो है वह साथ रहने लगे सन 1956 में काशी हिंदू विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में यह अध्यक्ष नियुक्त कर दिए गए कुछ समय तक पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ में हिंदू हिंदी विभाग अध्यक्ष के रूप में भी इन्होंने कार्य किया और 1949 में लखनऊ विश्वविद्यालय में इन्हें डिलीट की जो है उपाधि से सम्मानित किया गया और 1957 ईस्वी में भारत सरकार के द्वारा इन्हें पद्म भूषण की उपाधि से विभूषित किया गया और 19 मई 1979 में इनका जो है देहांत हो गया फ्रेंड इनकी जो प्रमुख है कृतियां हैं वह आपको बताना चाहता हूं कि जैसे कि इनका निबंध जो लिखा है निबंध इन्होंने लिखा है कि जैसे विचार और वितर्क कल्पना अशोक के फूल कुटिज साहित्य के साथी कल्प लता विचार प्रवाह आलोक पर्व आदि इनकी जो है निबंध हैं और इनकी जो उपन्यास है वह भी आप सभी को बताना चाहता हूं कि उनके उपन्यास है पुनर्विवाह बाणभट्ट की आत्मकथा चारुचंद्र लेख अनामदास का पोथा आज इनकी जो है साहित्य है इनकी जो है यह बहुत ही प्रसिद्ध जो है कवि थे उनकी जो भाषा शैली थी फ्रेंड को एक गढवी साथ में थी आलोचनात्मक थी और भावात्मक थी हास्य व्यंगात्मक से ली थी और उधर से ली थी इनकी जो सहेली थी वो बहुत ही अच्छी थी फ्रेंड तो आशा फ्रेंड की आप सभी को यह जानकारी पसंद आई होगी धन्यवाद दें

bolkar speaker
हजारी प्रसाद का जीवन परिचय?Hazari Prasad Ka Jeevan Parichay
DR.OM PRAKASH SHARMA Bolkar App
Top Speaker,Level 44
सुनिए DR.OM जी का जवाब
Principal, RSRD COLLEGE OF COMMERCE AND ARTS
2:31
यानी प्रसाद का जीवन परिचय दें शादी उत्तर प्रदेश में जन्मे पंडित परिवार में जन्मे कविता जोशी पंडित परिवार से जन्मे थे इनकी माता की विधि प्रकांड विद्वान शिक्षा संस्कृत और विद्यमान पूजा पाठ से संबंधित पंडित सपरिवार श्री हजारी प्रसाद द्विवेदी बहुत ज्यादा शिक्षा ग्रहण नहीं कर पाए थे लेकिन उन्होंने अपनी कृतियों से देश की आजादी के लिए संघर्ष किया और अपनी खुद की शादी अपनी गज की विभिन्न विधाओं पर इन्होंने रचना और उनकी रचनाएं एक दिन लोग भी हैं इनको उस युग का सितारा कहा जाता था नहीं मानना है कि हजारी प्रसाद द्विवेदी का जब व्यक्ति को उस समय पूरे हिंदुस्तान को एक ऐसी मानो एक साइट का सूरज ललित कला का भाव पक्ष कला पक्ष साहित्य का जो करते हैं वह बहुत ही विशिष्ट उन्होंने खड़ी बोली के साथ-साथ संस्कृत भाषा हिंदी भाषा में जो है चंपा मेथी बिल्कुल वह शब्दार्थ चमत्कारिक संभाल जो साइट के माध्यम से देश को चमक को किस दिशा में ले जाने वाले और इनका जो महानतम कार्य था हिंदी साहित्य में विशेष सुधार करते हुए उसका परचम लहराना

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हजारी प्रसाद का जीवन परिचय?Hazari Prasad Ka Jeevan Parichay
Archana Mishra Bolkar App
Top Speaker,Level 22
सुनिए Archana जी का जवाब
Housewife
0:40
हेलो दीवानी छोटा थे आपका आपका प्रश्न हजारी प्रसाद का जीवन परिचय बताइए तो फ्रेंड्स हजार आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का जन्म श्रावण शुक्ल एकादशी संवत 1964 तदनुसार 19 अगस्त 19 अगस्त 1997 को उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के आरा छपरा बलिया नामक गांव में हुआ था इनके पिता का नाम श्री अनमोल दुबे जी और माता का नाम श्रीमती जी था इनका परिवार ज्योतिष विद्या के लिए प्रसिद्ध था धन्यवाद

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  • हजारी प्रसाद द्विवेदी कौन थे, हजारी प्रसाद द्विवेदी के बारे में बताएं,
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