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Trilok Sain Bolkar App
Top Speaker,Level 33
सुनिए Trilok जी का जवाब
Motivational Speaker Public Speaker Life Coach Youtuber
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कोई कैसे अपने चिंतन में इतना विलीन हो जाता है कि वह समस्या से बाहर निकलने के लिए मौत का रास्ता चुनता है तो दर्शन मनुष्य का दिमाग जितना सोचता है उतना ही रह जाता है तू जब भी समस्या के बारे में सोचता तो उसको पूरी दुनिया समस्या लगती है उसे ऐसा लगता है कि मेरे जीवन में दुख ही दुख है मेरे अलावा इस दुनिया में कोई दुखी नहीं है मेरे पास कोई रास्ता नहीं है और पक्षी मृत्यू ही मतलब एक अंतिम उपाय अपने दिमाग को संकुचित कर लेता है और इस प्रकार का रास्ता अपना नेता है जो कि गलत है
Koee kaise apane chintan mein itana vileen ho jaata hai ki vah samasya se baahar nikalane ke lie maut ka raasta chunata hai to darshan manushy ka dimaag jitana sochata hai utana hee rah jaata hai too jab bhee samasya ke baare mein sochata to usako pooree duniya samasya lagatee hai use aisa lagata hai ki mere jeevan mein dukh hee dukh hai mere alaava is duniya mein koee dukhee nahin hai mere paas koee raasta nahin hai aur pakshee mrtyoo hee matalab ek antim upaay apane dimaag ko sankuchit kar leta hai aur is prakaar ka raasta apana neta hai jo ki galat hai

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