#धर्म और ज्योतिषी

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व्रत वा उपवास रखने के धार्मिक वा वैज्ञानिक कारण क्या है?

Vrat Va Upavas Rakhne Ke Dharmik Va Vaigyanik Karan Kya Hai
KamalKishorAwasthi Bolkar App
Top Speaker,Level 55
सुनिए KamalKishorAwasthi जी का जवाब
घर पर ही रहता हूं बैटरी बनाने का कार्य करता हूं और मोबाइल रिचार्ज इत्यादि
1:44
सवाल है बृत्व उपवास रखने के धार्मिक व वैज्ञानिक कारण क्या है देखिए उपवास रखने की हमारी परंपराएं सदियों पुरानी और आस्था से जुड़ी हैं कुछ लोग इन्हें अंधविश्वास मानते हैं जबकि आज भी बहुत से लोग इन परंपराओं को निभा रहे हैं अगर परंपराओं का अध्ययन करें तो आप पाएंगे कि ऋषि-मुनियों और पूर्वजों ने गहन अध्ययन के बाद इंसान के लाभ के लिए इनको शुरू किया था यह परंपराएं ईश्वर के प्रति आस्था को बढ़ाती है बहुत सी बीमारियों और समस्याओं से भी बचाती है इसे वैज्ञानिक भी प्रमाणित कर चुके हैं हिंदू धर्म में व्रत रखने का बहुत महत्व है लोग अपनी श्रद्धा और आस्था के अनुसार अलग-अलग देवी-देवताओं मानती लोग सप्ताह में 1 दिन या 5 मौकों पर अपने इश्क के लिए व्रत रखती हैं धार्मिक मान्यता के अनुसार व्रत रखने से देवी देवता प्रसन्न होते हैं कष्टों और परेशानियों को दूर करके मनु कामनाओं को पूर्ण करते हैं सप्ताह में 1 दिन व्रत रखना वैज्ञानिक दृष्टि से भी फायदेमंद है आयुर्वेद के अनुसार व्रत रखने से पाचन क्रिया को आराम मिलता है जिससे पाचन तंत्र ठीक रहता है शरीर के हानिकारक तत्व बाहर निकल जाते हैं जिसके शरीर और सेहत ठीक रहती है धन्यवाद
Savaal hai brtv upavaas rakhane ke dhaarmik va vaigyaanik kaaran kya hai dekhie upavaas rakhane kee hamaaree paramparaen sadiyon puraanee aur aastha se judee hain kuchh log inhen andhavishvaas maanate hain jabaki aaj bhee bahut se log in paramparaon ko nibha rahe hain agar paramparaon ka adhyayan karen to aap paenge ki rshi-muniyon aur poorvajon ne gahan adhyayan ke baad insaan ke laabh ke lie inako shuroo kiya tha yah paramparaen eeshvar ke prati aastha ko badhaatee hai bahut see beemaariyon aur samasyaon se bhee bachaatee hai ise vaigyaanik bhee pramaanit kar chuke hain hindoo dharm mein vrat rakhane ka bahut mahatv hai log apanee shraddha aur aastha ke anusaar alag-alag devee-devataon maanatee log saptaah mein 1 din ya 5 maukon par apane ishk ke lie vrat rakhatee hain dhaarmik maanyata ke anusaar vrat rakhane se devee devata prasann hote hain kashton aur pareshaaniyon ko door karake manu kaamanaon ko poorn karate hain saptaah mein 1 din vrat rakhana vaigyaanik drshti se bhee phaayademand hai aayurved ke anusaar vrat rakhane se paachan kriya ko aaraam milata hai jisase paachan tantr theek rahata hai shareer ke haanikaarak tatv baahar nikal jaate hain jisake shareer aur sehat theek rahatee hai dhanyavaad

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व्रत वा उपवास रखने के धार्मिक वा वैज्ञानिक कारण क्या है?Vrat Va Upavas Rakhne Ke Dharmik Va Vaigyanik Karan Kya Hai
Rahul kumar Bolkar App
Top Speaker,Level 44
सुनिए Rahul जी का जवाब
Unknown
1:42
क्या व्रत या उपवास रखने के धार्मिक में वैज्ञानिक कारण क्या है दोस्तों धार्मिक कारण ही वैज्ञानिक कारण है कारण यह है कि वह क्या हुआ जो भी आप एक दिन जो आपके शरीर को आराम मिलता है क्योंकि आपके अंदर का जो सिस्टम काम करता है उसको भी आराम मिलता है यही कारण है कि इससे जो आपका शरीर स्वस्थ रहता है और साथ ही साथ आपको किसी भी स्टेशन में मालिक कभी भूखा रहना पड़ जाए तो उस चीज से भी आपको लड़ने और मैं मदद करता है तो भारत के प्रधानमंत्री रहे श्री लाल बहादुर शास्त्री जी ने देश के अंदर काफी ज्यादा दिक्कत होने लग गई थी उन्होंने चेक कीजिए जिससे क्या होगा कि आपके घर का एक टाइम का खाना बचेगा साथ ही साथ जब आपके घर का जो खाना बचेगा आपके मोहल्ले में कितना बचेगा और जब मान लेगा यदि आप कॉल करेंगे सही तरीके से गांव शहर और जिला राज्य और देश भर में पहुंचे जब आप लोगों को तो लालू शास्त्री जी जो कि हमारे भारत के प्रधानमंत्री रहे थे प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति करता हूं कि उन्होंने देश की जनता को एक ऐसी अच्छी बात भी बताई थी हम जानते हैं कि वह किशोर क्रियाएं हैं हमारे धर्म के अंदर हमारे देश और संस्कृति के मध्य जो है काफी ज्यादा को जानना होगा इस चीज को कि उपवास एक बहुत ही अच्छा धार्मिक तक उसे साथ जोड़ा गया एक वैज्ञानिक कारण धन्यवाद
Kya vrat ya upavaas rakhane ke dhaarmik mein vaigyaanik kaaran kya hai doston dhaarmik kaaran hee vaigyaanik kaaran hai kaaran yah hai ki vah kya hua jo bhee aap ek din jo aapake shareer ko aaraam milata hai kyonki aapake andar ka jo sistam kaam karata hai usako bhee aaraam milata hai yahee kaaran hai ki isase jo aapaka shareer svasth rahata hai aur saath hee saath aapako kisee bhee steshan mein maalik kabhee bhookha rahana pad jae to us cheej se bhee aapako ladane aur main madad karata hai to bhaarat ke pradhaanamantree rahe shree laal bahaadur shaastree jee ne desh ke andar kaaphee jyaada dikkat hone lag gaee thee unhonne chek keejie jisase kya hoga ki aapake ghar ka ek taim ka khaana bachega saath hee saath jab aapake ghar ka jo khaana bachega aapake mohalle mein kitana bachega aur jab maan lega yadi aap kol karenge sahee tareeke se gaanv shahar aur jila raajy aur desh bhar mein pahunche jab aap logon ko to laaloo shaastree jee jo ki hamaare bhaarat ke pradhaanamantree rahe the pradhaanamantree ne raashtrapati karata hoon ki unhonne desh kee janata ko ek aisee achchhee baat bhee bataee thee ham jaanate hain ki vah kishor kriyaen hain hamaare dharm ke andar hamaare desh aur sanskrti ke madhy jo hai kaaphee jyaada ko jaanana hoga is cheej ko ki upavaas ek bahut hee achchha dhaarmik tak use saath joda gaya ek vaigyaanik kaaran dhanyavaad

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व्रत वा उपवास रखने के धार्मिक वा वैज्ञानिक कारण क्या है?Vrat Va Upavas Rakhne Ke Dharmik Va Vaigyanik Karan Kya Hai
T P Singh Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए T जी का जवाब
Business
4:58
आप ने प्रश्न किया है कि व्रत या उपवास रखने के धार्मिक व वैज्ञानिक कारण क्या है बहुत अच्छा प्रश्न है देखिए व्रत कहें या हम उपवास कहें इन दोनों के धार्मिक कारण भी बहुत सारे हैं और वैज्ञानिक कारण भी बहुत सारे और भारतीय दर्शन को व्यापार की संस्कृति या भारतीय परंपरा को आप कितना समृद्ध मानेंगे कि हजारों लाखों वर्ष पूर्व हमारे ऋषि-मुनियों ने हमारे पूर्वजों ने जो व्रत रखने की परंपरा शुरू करें आज विज्ञान भी उस बात को मान रहा है कि हां व्रत या उपवास रखने से शरीर को बहुत ज्यादा फायदे होते हैं हालांकि भारत के अंत लोग श्रद्धा और भक्ति के लिए और अपनी मनोकामना ओं की पूर्ति के लिए व्रत रखते हैं लेकिन व्रत को वैज्ञानिक रूप से भी परखा गया है और विज्ञान भी कहता है कि व्रत उपवास रखना फायदेमंद है और अध्यात्म भी कहता है कि व्रत और उपवास रखना लाभकारी होता है इसका मूल उद्देश्य वैज्ञानिक रूप से यह है कि इससे हमारा शरीर स्वस्थ हो जाए शरीर शुद्ध हो जाए अगर हम आध्यात्मिक रूप से बात करें तो आध्यात्मिक रूप से व्रत रखने से मन और आत्मा को नियंत्रित किया जाता है मन और आत्मा दोनों नियंत्रण में आ जाते हैं अलग-अलग तिथियों और अलग-अलग तरह के दिन आपके मन को और आपके शरीर को अलग-अलग तरह से यह व्रत उपवास प्रभावित करते अलग-अलग तिथियों के हिसाब से अलग-अलग दिनों के हिसाब से आपका जो मन है वह विभिन्न प्रकार से प्रभावित होता है और इसी को ध्यान में रखकर के हमारे ऋषि-मुनियों ने हमारे पूर्वजों ने बुजुर्गों ने अलग-अलग तिथियों और दिनों को उपवास और व्रत का विधान बताया है कि किस तिथि का हमारे शरीर पर और हमारे मन पर क्या असर होगा इस दिन का हमारे मन पर श्री प्रत्याशा असर पड़ेगा और उस को ध्यान में रखकर व्रत और उपवास के नियम बनाए हैं विपक्षी विशेष तिथियों या दिनों को व्रत उपवास रखने से शरीर और मन तो शुद्ध होता ही है साथ ही इससे मनचाही इच्छा भी पूरी होती है ऐसा हमारे शास्त्र कहते हैं व्रतों में सबसे अधिक महत्वपूर्ण जो व्रत माने गए हैं वह है एकादशी पूर्णिमा अमावस्या और नवरात्रि व्रत सामान्य तौर पर पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा पवित्र माने जाते हैं कहते हैं कि एकादशी का नियमित रूप से व्रत रखे तो उसके मन की चंचलता समाप्त होती है साथ ही धन और आरोग्य की भी प्राप्ति होती है अगर कोई व्यक्ति पूर्णिमा अमावस्या का व्रत रखता है क्योंकि यह व्रत बहुत मोहम्मद मोहन माने जाते हैं पूर्णिमा और अमावस्या का व्रत रखने से मनुष्य के शरीर में हार्मोन की समीक्षा ठीक होती जाती है कई सारी मानसिक बीमारियां है वह भी इससे निजात पा लेते हैं इसके अलावा साल में दो बार क्योंकि रितु की संध्या भी पड़ती है एक बार गर्मी शुरू होने से पहले एक बार सर्दी शुरू होने के पहले और उस समय शरीर की धातुओं को संतुलित करने के लिए नवरात्रि के व्रत का विधान एक वास्तविक नवरात्रि है और दूसरी शारदीय नवरात्रि और उस समय मौसम के बदलने पर हमारे शरीर पर हमारे मन पर कोई असर न पड़े इसलिए नवरात्रि के व्रत का विधान किया गया वर्ष में अगर कोई व्यक्ति केवल दोनों नवरात्रों में 99 दिन का उपवास रखता है तो उसके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है इसके अलावा स्थल घर भी व्यक्ति स्वस्थ रह सकता है इसके वैज्ञानिक कारण भी और वैज्ञानिक कारण में यह भी बताया गया है कि हम निरंतर जब खाना खाते रहते हैं प्रतिदिन खाना खाते रहते हैं जो हमारे शरीर की आंतों पर हमारे आमाशय पर हमारे उस पर बहुत ज्यादा बोझ पड़ता है तो जब हम व्रत रखते हैं उपवास रखते हैं तो हमारे शरीर को हमारी ग्रंथियों को हमारे शरीर के अंगों को आराम मिलता है और वह अपनी वास्तविक स्थिति में फिर से आ जाते हैं रिश्ते हमारा शरीर सही क्रियाओं से सही तरीके से काम करने लगता है तो आप इससे अंदाजा लगा सकते हैं कि वैज्ञानिक और धार्मिक दोनों महत्व है व्रत और उपवास का कितने महत्वपूर्ण है और मैं प्रणाम करना चाहता हूं अपने मां ऋषि यों को बुजुर्गों को जिन्होंने इतने वर्षों पहले इतनी बड़ी ज्ञान की बातें कही है धन्यवाद
Aap ne prashn kiya hai ki vrat ya upavaas rakhane ke dhaarmik va vaigyaanik kaaran kya hai bahut achchha prashn hai dekhie vrat kahen ya ham upavaas kahen in donon ke dhaarmik kaaran bhee bahut saare hain aur vaigyaanik kaaran bhee bahut saare aur bhaarateey darshan ko vyaapaar kee sanskrti ya bhaarateey parampara ko aap kitana samrddh maanenge ki hajaaron laakhon varsh poorv hamaare rshi-muniyon ne hamaare poorvajon ne jo vrat rakhane kee parampara shuroo karen aaj vigyaan bhee us baat ko maan raha hai ki haan vrat ya upavaas rakhane se shareer ko bahut jyaada phaayade hote hain haalaanki bhaarat ke ant log shraddha aur bhakti ke lie aur apanee manokaamana on kee poorti ke lie vrat rakhate hain lekin vrat ko vaigyaanik roop se bhee parakha gaya hai aur vigyaan bhee kahata hai ki vrat upavaas rakhana phaayademand hai aur adhyaatm bhee kahata hai ki vrat aur upavaas rakhana laabhakaaree hota hai isaka mool uddeshy vaigyaanik roop se yah hai ki isase hamaara shareer svasth ho jae shareer shuddh ho jae agar ham aadhyaatmik roop se baat karen to aadhyaatmik roop se vrat rakhane se man aur aatma ko niyantrit kiya jaata hai man aur aatma donon niyantran mein aa jaate hain alag-alag tithiyon aur alag-alag tarah ke din aapake man ko aur aapake shareer ko alag-alag tarah se yah vrat upavaas prabhaavit karate alag-alag tithiyon ke hisaab se alag-alag dinon ke hisaab se aapaka jo man hai vah vibhinn prakaar se prabhaavit hota hai aur isee ko dhyaan mein rakhakar ke hamaare rshi-muniyon ne hamaare poorvajon ne bujurgon ne alag-alag tithiyon aur dinon ko upavaas aur vrat ka vidhaan bataaya hai ki kis tithi ka hamaare shareer par aur hamaare man par kya asar hoga is din ka hamaare man par shree pratyaasha asar padega aur us ko dhyaan mein rakhakar vrat aur upavaas ke niyam banae hain vipakshee vishesh tithiyon ya dinon ko vrat upavaas rakhane se shareer aur man to shuddh hota hee hai saath hee isase manachaahee ichchha bhee pooree hotee hai aisa hamaare shaastr kahate hain vraton mein sabase adhik mahatvapoorn jo vrat maane gae hain vah hai ekaadashee poornima amaavasya aur navaraatri vrat saamaany taur par pooree duniya mein sabase jyaada pavitr maane jaate hain kahate hain ki ekaadashee ka niyamit roop se vrat rakhe to usake man kee chanchalata samaapt hotee hai saath hee dhan aur aarogy kee bhee praapti hotee hai agar koee vyakti poornima amaavasya ka vrat rakhata hai kyonki yah vrat bahut mohammad mohan maane jaate hain poornima aur amaavasya ka vrat rakhane se manushy ke shareer mein haarmon kee sameeksha theek hotee jaatee hai kaee saaree maanasik beemaariyaan hai vah bhee isase nijaat pa lete hain isake alaava saal mein do baar kyonki ritu kee sandhya bhee padatee hai ek baar garmee shuroo hone se pahale ek baar sardee shuroo hone ke pahale aur us samay shareer kee dhaatuon ko santulit karane ke lie navaraatri ke vrat ka vidhaan ek vaastavik navaraatri hai aur doosaree shaaradeey navaraatri aur us samay mausam ke badalane par hamaare shareer par hamaare man par koee asar na pade isalie navaraatri ke vrat ka vidhaan kiya gaya varsh mein agar koee vyakti keval donon navaraatron mein 99 din ka upavaas rakhata hai to usake shareer kee rog pratirodhak kshamata badhatee hai isake alaava sthal ghar bhee vyakti svasth rah sakata hai isake vaigyaanik kaaran bhee aur vaigyaanik kaaran mein yah bhee bataaya gaya hai ki ham nirantar jab khaana khaate rahate hain pratidin khaana khaate rahate hain jo hamaare shareer kee aanton par hamaare aamaashay par hamaare us par bahut jyaada bojh padata hai to jab ham vrat rakhate hain upavaas rakhate hain to hamaare shareer ko hamaaree granthiyon ko hamaare shareer ke angon ko aaraam milata hai aur vah apanee vaastavik sthiti mein phir se aa jaate hain rishte hamaara shareer sahee kriyaon se sahee tareeke se kaam karane lagata hai to aap isase andaaja laga sakate hain ki vaigyaanik aur dhaarmik donon mahatv hai vrat aur upavaas ka kitane mahatvapoorn hai aur main pranaam karana chaahata hoon apane maan rshi yon ko bujurgon ko jinhonne itane varshon pahale itanee badee gyaan kee baaten kahee hai dhanyavaad

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व्रत वा उपवास रखने के धार्मिक वा वैज्ञानिक कारण क्या है?Vrat Va Upavas Rakhne Ke Dharmik Va Vaigyanik Karan Kya Hai
pushpanjali patel Bolkar App
Top Speaker,Level 33
सुनिए pushpanjali जी का जवाब
Student with micro finance bank employee
1:03
आने वाले प्रत्येक व्यक्ति के धार्मिक लाभ है क्या कारण क्या है या उपवास रखना धार्मिक और वैज्ञानिक तुमसे अच्छा माना जाता है जैसे कि धार्मिक वजह थी कि भगवान और इस पर प्रसन्न होते हैं जिनकी वजह से लोग व्रत या उपवास रखती है और अब वैज्ञानिक कारण से देखा जाए तो वैज्ञानिक दृष्टि से अगर आप रास्ते में एक बार रखती की प्रक्रिया को जो है आराम मिलता है जैसे कि हमारी बॉडी गोरिला की जरूरत होती है और हम हमेशा खाती रहती हैं जिसकी वजह से मेरे पास नहीं रहती है और जिस प्रकार हम डेली काम करते हैं और हमें आराम की जरूरत होती है उसे क्या कहते पाचन क्रिया को भी जरूरत होती है जिसकी वजह से आपके पाचन क्रिया सही होगी जैसे कोई नहीं होता है
Aane vaale pratyek vyakti ke dhaarmik laabh hai kya kaaran kya hai ya upavaas rakhana dhaarmik aur vaigyaanik tumase achchha maana jaata hai jaise ki dhaarmik vajah thee ki bhagavaan aur is par prasann hote hain jinakee vajah se log vrat ya upavaas rakhatee hai aur ab vaigyaanik kaaran se dekha jae to vaigyaanik drshti se agar aap raaste mein ek baar rakhatee kee prakriya ko jo hai aaraam milata hai jaise ki hamaaree bodee gorila kee jaroorat hotee hai aur ham hamesha khaatee rahatee hain jisakee vajah se mere paas nahin rahatee hai aur jis prakaar ham delee kaam karate hain aur hamen aaraam kee jaroorat hotee hai use kya kahate paachan kriya ko bhee jaroorat hotee hai jisakee vajah se aapake paachan kriya sahee hogee jaise koee nahin hota hai

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व्रत वा उपवास रखने के धार्मिक वा वैज्ञानिक कारण क्या है?Vrat Va Upavas Rakhne Ke Dharmik Va Vaigyanik Karan Kya Hai
Trilok Sain Bolkar App
Top Speaker,Level 33
सुनिए Trilok जी का जवाब
Motivational Speaker Public Speaker Life Coach Youtuber
0:39
कस्बे की पर्चियां उपास के धार्मिक वैज्ञानिक कारण क्या है कारण तो यही स्वास्थ्य की दृष्टि से अयोध्या मंदिर जाते हैं आप पसंद करते हैं चौथ व्रत रखेंगे तो आपका मन बिल्कुल बिल्कुल शांत रहेगा और आप खुद को नींद नहीं आएगी लेकिन वह भी व्रत रखते हैं क्योंकि व्रत रखने से जो सेल है जो अंदर की जो पोस्ट किया है वह बच जाती अपने आप ही जिससे बीमारी होने का चांस कम हो जाता है तो इसलिए जो लोग व्रत रखते हैं वह ज्यादा स्वस्थ रहते हैं धन्यवाद
Kasbe kee parchiyaan upaas ke dhaarmik vaigyaanik kaaran kya hai kaaran to yahee svaasthy kee drshti se ayodhya mandir jaate hain aap pasand karate hain chauth vrat rakhenge to aapaka man bilkul bilkul shaant rahega aur aap khud ko neend nahin aaegee lekin vah bhee vrat rakhate hain kyonki vrat rakhane se jo sel hai jo andar kee jo post kiya hai vah bach jaatee apane aap hee jisase beemaaree hone ka chaans kam ho jaata hai to isalie jo log vrat rakhate hain vah jyaada svasth rahate hain dhanyavaad

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