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Er.Awadhesh kumar Bolkar App
Top Speaker,Level 66
सुनिए Er.Awadhesh जी का जवाब
Unknown
2:35
अब प्रश्न है कि क्या कारण है कि स्वामी विवेकानंद बहुत ही कम उम्र में इस दुनिया को अलविदा कह गए तो दिखे फ्रेंड एक भी हम कह सकते हैं कि जिन की कितनी उम्र होती है उसके हिसाब से इस दुनिया में अपना कार्य कर कर पाते हैं लेकिन कर दिखा जाति इन के मरने का कारण जो है वह सही ढंग से प्रस्तुत नहीं किया गया और आपको यह भी बता दें कि इनका एक कारण था मृत्यु का कारण भी हो सकता है कि उनकी जो दिमाग की जरूरत थी वह क्या होती है कि फट गई थी और फटने की वजह से उनकी मृत्यु हो गई थी तो आपको बता दें कि इनका जन्म जो था 12 जनवरी 18 सो 63 ईस्वी में कोलकाता कोलकाता में हुआ था उनका घर का नाम नरेंद्र जो था वह काफी तीव्र बुद्धि वाले थे और उन्होंने रामकृष्ण परमहंस की प्रशंसा सुनी और उनकी ही उद्देश्य से यह क्या किया कि उनकी पहचान बनना चाहते थे और रामकृष्ण जी की पहचान गए थे और वही सिर्फ वही उनके शिष्य है और कहा जाता है कि 25 वर्ष में ही गेरुआ वस्त्र धारण कर लिया था और उनकी मृत्यु 1920 में हुई थी और उनके मरने का कुछ ठोस सबूत नहीं बताया जाता है बस यह है कि उनकी दिमाग की चुनौतियों फट गई थी और सबसे बड़ी बात आपको बता दें कि स्वामी विवेकानंद को 21 10 तक 130 से अधिक बीमारी का लक्षण था और बीमारियों से ग्रसित है उसमें से एक दिन निद्रा रोग से ग्रसित विदाउट बहुत सारे ऐसे परेशानियां थी इन्हें जो पूरी रूप से तो नहीं बताया गया बस यही है कि इनका इन्हें 31 तरह की बीमारियां थी और इसी वजह से बहुत ज्यादा परेशान रहते थे और आपको बता दें कि इनका मृत्यु के बारे में पहले ही भविष्यवाणी कर रखी थी और वह 40 वर्षों तक जीवित नहीं रहेंगे इस प्रकार उन्होंने महासमाधि लेकर अपनी भविष्यवाणी को पूरा किया पदक स्वामी विवेकानंद ने अपनी अपनी खुद एक भविष्यवाणी कर दी थी कि मैं 40 वर्ष से अधिक नहीं जीवित रहूंगा और इनकी से पहले ही मृत्यु हो गई
Ab prashn hai ki kya kaaran hai ki svaamee vivekaanand bahut hee kam umr mein is duniya ko alavida kah gae to dikhe phrend ek bhee ham kah sakate hain ki jin kee kitanee umr hotee hai usake hisaab se is duniya mein apana kaary kar kar paate hain lekin kar dikha jaati in ke marane ka kaaran jo hai vah sahee dhang se prastut nahin kiya gaya aur aapako yah bhee bata den ki inaka ek kaaran tha mrtyu ka kaaran bhee ho sakata hai ki unakee jo dimaag kee jaroorat thee vah kya hotee hai ki phat gaee thee aur phatane kee vajah se unakee mrtyu ho gaee thee to aapako bata den ki inaka janm jo tha 12 janavaree 18 so 63 eesvee mein kolakaata kolakaata mein hua tha unaka ghar ka naam narendr jo tha vah kaaphee teevr buddhi vaale the aur unhonne raamakrshn paramahans kee prashansa sunee aur unakee hee uddeshy se yah kya kiya ki unakee pahachaan banana chaahate the aur raamakrshn jee kee pahachaan gae the aur vahee sirph vahee unake shishy hai aur kaha jaata hai ki 25 varsh mein hee gerua vastr dhaaran kar liya tha aur unakee mrtyu 1920 mein huee thee aur unake marane ka kuchh thos saboot nahin bataaya jaata hai bas yah hai ki unakee dimaag kee chunautiyon phat gaee thee aur sabase badee baat aapako bata den ki svaamee vivekaanand ko 21 10 tak 130 se adhik beemaaree ka lakshan tha aur beemaariyon se grasit hai usamen se ek din nidra rog se grasit vidaut bahut saare aise pareshaaniyaan thee inhen jo pooree roop se to nahin bataaya gaya bas yahee hai ki inaka inhen 31 tarah kee beemaariyaan thee aur isee vajah se bahut jyaada pareshaan rahate the aur aapako bata den ki inaka mrtyu ke baare mein pahale hee bhavishyavaanee kar rakhee thee aur vah 40 varshon tak jeevit nahin rahenge is prakaar unhonne mahaasamaadhi lekar apanee bhavishyavaanee ko poora kiya padak svaamee vivekaanand ne apanee apanee khud ek bhavishyavaanee kar dee thee ki main 40 varsh se adhik nahin jeevit rahoonga aur inakee se pahale hee mrtyu ho gaee

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Shruti Yadav Bolkar App
Top Speaker,Level 33
सुनिए Shruti जी का जवाब
Student
1:02
सवाल है कि क्या कारण है कि स्वामी विवेकानंद बहुत ही कम उम्र में दुनिया को अलविदा कह गए स्वामी विवेकानंद को 71 से अधिक बीमारियां थीं जिनमें से एक बीमारी उनका निद्रा रोग से ग्रसित होना भी था अपने जीवन के अंतिम दिन स्वामी विवेकानंद ने अपने शिष्यों के बीच शुक्ल यजुर्वेद की व्याख्या की थी और कहा कि यह समझने के लिए कि इस विवेकानंद ने तक क्या किया है हमें एक और विवेकानंद चाहिए उनके शिष्यों के अनुसार जीवन के अंतिम दिन 4 जुलाई उन्नीस सौ दो को भी उन्होंने अपने ध्यान करने की दिनचर्या को नहीं बदला और प्रातः दो-तीन घंटे तक ध्यान किया और ध्यान अवस्था में ही अपने ब्रह्मानंद को भेद कर महा समाधि ले ली थी उनके निधन की वजह तीसरी बार दिल का दिल का दौरा पड़ा था उनकी अंत्येष्टि बेलूर में गंगा के तट पर चंदन की चिता पर की गई थी गंगा तट की दूसरी ओर उनके गुरु रामकृष्ण परमहंस की 16 वर्ष पूर्व अंतिम संस्कार हुआ था अपनी मृत्यु के समय विवेकानंद 39 वर्ष थी
Savaal hai ki kya kaaran hai ki svaamee vivekaanand bahut hee kam umr mein duniya ko alavida kah gae svaamee vivekaanand ko 71 se adhik beemaariyaan theen jinamen se ek beemaaree unaka nidra rog se grasit hona bhee tha apane jeevan ke antim din svaamee vivekaanand ne apane shishyon ke beech shukl yajurved kee vyaakhya kee thee aur kaha ki yah samajhane ke lie ki is vivekaanand ne tak kya kiya hai hamen ek aur vivekaanand chaahie unake shishyon ke anusaar jeevan ke antim din 4 julaee unnees sau do ko bhee unhonne apane dhyaan karane kee dinacharya ko nahin badala aur praatah do-teen ghante tak dhyaan kiya aur dhyaan avastha mein hee apane brahmaanand ko bhed kar maha samaadhi le lee thee unake nidhan kee vajah teesaree baar dil ka dil ka daura pada tha unakee antyeshti beloor mein ganga ke tat par chandan kee chita par kee gaee thee ganga tat kee doosaree or unake guru raamakrshn paramahans kee 16 varsh poorv antim sanskaar hua tha apanee mrtyu ke samay vivekaanand 39 varsh thee

G Dewasi Bolkar App
Top Speaker,Level 22
सुनिए G जी का जवाब
Unknown
1:50
व्हिच इज ऑफ स्वामी विवेकानंद जी पूरे वर्ल्ड में ट्रेवल कर रहे थे जब वह हमारे देश की जो संस्कृति है हमारे देश का जो धर्म है वह सभी को बता रहे थे सभी को एकता का संदेश दे रहे थे उस टूर के दौरान 31 बीमारियां हो चुकी थी जिसमें शुगर था मलेरिया था उनके शरीर के अंदर पथरी हो चुकी थी काफी दिन खाना ना खाने की वजह से उनके जो लेंस थे वह भी डैमेज हो चुके थे प्लस उनका जो पाचन तंत्र था वह भी खराब हो चुका था और देखिए आप सोच कर देखिए एक इंसानी शरीर के अंदर अगर 31 बीमारियां होती है तो शरीर की क्या हालत हो सकती है और इसके दौरान भी स्वामी विवेकानंद जी पूरे वर्ल्ड में ट्रैवल करते रहे और जब अंत में लिखी हो जब मित्र गए तो वहां पर उन्होंने एक बात बोली सबको कि मुझे अब वापस अपने देश में जाना है अब मैं यहां पर ज्यादा दिन नहीं रुक सकता हूं क्योंकि मैं चाहता हूं कि मेरी जो मृत्यु है मेरे जो गुरु थे उनकी वहां पर जगह पर हो जाते उनकी मृत्यु यहां पर भी मैं अब प्राण को सौंपना चाहता हूं उन्होंने यह सब को बोला था और आपको विश्वास नहीं होगा उन्होंने उस दिन सभी लोगों को एग्जाम डेट बताई थी इस 4 जुलाई को मेरी मृत्यु है इसलिए मैं वापस अपने देश जा रहा और जब वह अपने देश में गए जब वह इंडिया वापस आए तब आप विश्वास नहीं करोगे 1902 में 4 जुलाई में उनकी हार्ड अटैक की वजह से मृत्यु हो गई अपने कि इतने महान लोग इतनी जल्दी दुनिया छोड़कर क्यों जाते हैं इसका रीजन मुझे भी नहीं पता है क्योंकि ऐसे ही ठीक रामानुजन जी के साथ हुआ था आपको पता है पूरे वर्ल्ड के काफी मैथमेटिक्स मतलब काफी ज्यादा आप क्या क्योंकि इंटेलिजेंट थे मैथमेटिक्स में उनकी भी काफी कम उम्र में मृत्यु हो गई थी अब एक इसका रीजन मुझे नहीं पता है क्यों होता है लेकिन स्वामी विवेकानंद जी का हार्ड अटैक की वजह से वह दुनिया को अलविदा क्या कहते धन्यवाद
Vhich ij oph svaamee vivekaanand jee poore varld mein treval kar rahe the jab vah hamaare desh kee jo sanskrti hai hamaare desh ka jo dharm hai vah sabhee ko bata rahe the sabhee ko ekata ka sandesh de rahe the us toor ke dauraan 31 beemaariyaan ho chukee thee jisamen shugar tha maleriya tha unake shareer ke andar patharee ho chukee thee kaaphee din khaana na khaane kee vajah se unake jo lens the vah bhee daimej ho chuke the plas unaka jo paachan tantr tha vah bhee kharaab ho chuka tha aur dekhie aap soch kar dekhie ek insaanee shareer ke andar agar 31 beemaariyaan hotee hai to shareer kee kya haalat ho sakatee hai aur isake dauraan bhee svaamee vivekaanand jee poore varld mein traival karate rahe aur jab ant mein likhee ho jab mitr gae to vahaan par unhonne ek baat bolee sabako ki mujhe ab vaapas apane desh mein jaana hai ab main yahaan par jyaada din nahin ruk sakata hoon kyonki main chaahata hoon ki meree jo mrtyu hai mere jo guru the unakee vahaan par jagah par ho jaate unakee mrtyu yahaan par bhee main ab praan ko saumpana chaahata hoon unhonne yah sab ko bola tha aur aapako vishvaas nahin hoga unhonne us din sabhee logon ko egjaam det bataee thee is 4 julaee ko meree mrtyu hai isalie main vaapas apane desh ja raha aur jab vah apane desh mein gae jab vah indiya vaapas aae tab aap vishvaas nahin karoge 1902 mein 4 julaee mein unakee haard ataik kee vajah se mrtyu ho gaee apane ki itane mahaan log itanee jaldee duniya chhodakar kyon jaate hain isaka reejan mujhe bhee nahin pata hai kyonki aise hee theek raamaanujan jee ke saath hua tha aapako pata hai poore varld ke kaaphee maithametiks matalab kaaphee jyaada aap kya kyonki intelijent the maithametiks mein unakee bhee kaaphee kam umr mein mrtyu ho gaee thee ab ek isaka reejan mujhe nahin pata hai kyon hota hai lekin svaamee vivekaanand jee ka haard ataik kee vajah se vah duniya ko alavida kya kahate dhanyavaad

Umesh Upaadyay Bolkar App
Top Speaker,Level 33
सुनिए Umesh जी का जवाब
Life Coach | Motivational Speaker
2:40
जी बिल्कुल सत्य है बहुत कम उम्र में ही आज स्वामी विवेकानंद जी का निधन हो गया था कि वह पुण्यात्मा थी जिसको बहुत पहले आ शायद पहली मुलाकात में या उससे भी पहले जानते तो थे श्री रामकृष्ण परमहंस की हां यह लो ऐसा साजन आएगा मेरे पास और इनो उनके साथ समय बिताएं का उनको पता था विवेकानंद के बारे में अब जमीन के उम्र की बात करते हैं तो जी ऐसा है कि इन्होंने जो काम करना था वह इन्होंने अपना काम किया और हर एक इंसान का इंसान मैं तो यहां पर तो इंसान इंसान से बहुत बढ़-चढ़कर हैं उनका एक रोल होता है उनको बोले निभाना होता है उनको वह मैसेज देना होता है वह किसी पर पैसे किसी काम से आते हैं इस पृथ्वी पर और काम होने के बाद वह चले जाते हैं अच्छा लिखे जाते हैं शरीर चला जाता है तो यह लो अब इसके लिए उनका जो मास्टर था वह पूरा हुआ जो वह प्रचार प्रसार करना चाहते थे और उनको बताना चाहते थे भारत के बारे में बताना चाहते थे लोगों को जागरूक करना चाहते थे इसके लिए जरूरी नहीं है कि आपको एक बहुत लंबी उम्र या यूं ही चाहिए होगी अगर आप इंटेंसली थोड़े समय में ही वो काम कर जाते हैं तो फिर लंबे समय की जरूरत नहीं होती है यही काम आ विवेकानंद जी ने किया और आज तक हम को जानते हैं और आने वाले समय में भी लोग उनको जान जानेंगे तो युवा वर्ग के लिए उनके लिए उनके पास बहुत महत्वपूर्ण मैसेज था यह नो हिंदू राष्ट्र के लिए उन्होंने बोला उन्होंने बताया कि रहा हूं सही तरीके से यह जीवन कैसे जीना चाहिए यह युवावस्था ही तो है जिसमें एक इंसान के पास हुआ के बाद बहुत शक्ति होती है था होता है कि लोग उनके सपने होते हैं अरमान होते हैं और वह चाहे तो अगर इसको सही दिशा दे दे तो जो करना चाहे वह कर सकते हैं वह हासिल कर सकते हैं तो इस तरीके के हैं वह इंसान थे और उन्होंने अपने समय में जो भी समय उन्होंने अवैध ईट किया है इस धरती पर उन्होंने उसका सदुपयोग किया भ्रमण किया है मैसेज पहुंचाया और हम सब के पास तो मैसेज आया था क्या और हम उनको रोल मॉडल 740 सीख लेने वाला था ना समझते हैं जिनसे हमें सीख लेना चाहिए और जीवन में उतारना चाहिए
Jee bilkul saty hai bahut kam umr mein hee aaj svaamee vivekaanand jee ka nidhan ho gaya tha ki vah punyaatma thee jisako bahut pahale aa shaayad pahalee mulaakaat mein ya usase bhee pahale jaanate to the shree raamakrshn paramahans kee haan yah lo aisa saajan aaega mere paas aur ino unake saath samay bitaen ka unako pata tha vivekaanand ke baare mein ab jameen ke umr kee baat karate hain to jee aisa hai ki inhonne jo kaam karana tha vah inhonne apana kaam kiya aur har ek insaan ka insaan main to yahaan par to insaan insaan se bahut badh-chadhakar hain unaka ek rol hota hai unako bole nibhaana hota hai unako vah maisej dena hota hai vah kisee par paise kisee kaam se aate hain is prthvee par aur kaam hone ke baad vah chale jaate hain achchha likhe jaate hain shareer chala jaata hai to yah lo ab isake lie unaka jo maastar tha vah poora hua jo vah prachaar prasaar karana chaahate the aur unako bataana chaahate the bhaarat ke baare mein bataana chaahate the logon ko jaagarook karana chaahate the isake lie jarooree nahin hai ki aapako ek bahut lambee umr ya yoon hee chaahie hogee agar aap intensalee thode samay mein hee vo kaam kar jaate hain to phir lambe samay kee jaroorat nahin hotee hai yahee kaam aa vivekaanand jee ne kiya aur aaj tak ham ko jaanate hain aur aane vaale samay mein bhee log unako jaan jaanenge to yuva varg ke lie unake lie unake paas bahut mahatvapoorn maisej tha yah no hindoo raashtr ke lie unhonne bola unhonne bataaya ki raha hoon sahee tareeke se yah jeevan kaise jeena chaahie yah yuvaavastha hee to hai jisamen ek insaan ke paas hua ke baad bahut shakti hotee hai tha hota hai ki log unake sapane hote hain aramaan hote hain aur vah chaahe to agar isako sahee disha de de to jo karana chaahe vah kar sakate hain vah haasil kar sakate hain to is tareeke ke hain vah insaan the aur unhonne apane samay mein jo bhee samay unhonne avaidh eet kiya hai is dharatee par unhonne usaka sadupayog kiya bhraman kiya hai maisej pahunchaaya aur ham sab ke paas to maisej aaya tha kya aur ham unako rol modal 740 seekh lene vaala tha na samajhate hain jinase hamen seekh lena chaahie aur jeevan mein utaarana chaahie

Sanjay Kumar Bolkar App
Top Speaker,Level 33
सुनिए Sanjay जी का जवाब
𝔖𝔱𝔲𝔡𝔢𝔫𝔱 | 𝔈𝔡𝔲𝔠𝔞𝔱𝔦𝔬𝔫𝔦𝔰𝔱
1:11
क्या कारण है कि स्वामी विवेकानंद बहुत ही कम उम्र में दुनिया को अलविदा कह गए तो बहुत ही कम उम्र में चले गए थे वह मात्र 39 वर्ष की अवस्था में 19 से 2 ईसवी में और 12 जनवरी 1988 को पैदा हुए थे कि कम होने का उनका कुछ है जो संबंध है वह इस बात से है कि उनका जो ब्रांड था उसका हेमरेज हो गया एंड ब्रेन हेमरेज से उनकी मौत हो गई थी यानी कि रक्त का थक्का जो है उनके दिमाग में जम गया था और ऐसा कहा जाता है कि जिनका दिमाग बहुत ज्यादा चलता है खासतौर पर जिनका दिमाग थोड़ा बड़ा कर सकते हैं या इनके दिमाग में न्यू राज की संख्या काफी ज्यादा होती है और जो आम तौर पर अपने दिमाग का यूज किसी भी सामान्य पुरुष से ज्यादा या किसी भी सामान्य व्यक्ति से ज्यादा कर लेता है तो उसको इस तरह के समस्याओं का सामना भविष्य करना सेट पड़ सकता है जितने भी बड़े लोग होते हैं जो मतलब काफी ज्यादा वैज्ञानिक हो या कोई भी ऑन नहीं हो जो काफी ज्यादा एक्टिव होता है जिनका में उनके साथ में अब देखिए किसी ने किसी तरह की किसी तरह की मृत्यु की होती है और खासतौर पर जब स्वामी विवेकानंद की मृत्यु हुई थी उसमें बस समाधि और ध्यान व्यवस्था में थे धन्यवाद
Kya kaaran hai ki svaamee vivekaanand bahut hee kam umr mein duniya ko alavida kah gae to bahut hee kam umr mein chale gae the vah maatr 39 varsh kee avastha mein 19 se 2 eesavee mein aur 12 janavaree 1988 ko paida hue the ki kam hone ka unaka kuchh hai jo sambandh hai vah is baat se hai ki unaka jo braand tha usaka hemarej ho gaya end bren hemarej se unakee maut ho gaee thee yaanee ki rakt ka thakka jo hai unake dimaag mein jam gaya tha aur aisa kaha jaata hai ki jinaka dimaag bahut jyaada chalata hai khaasataur par jinaka dimaag thoda bada kar sakate hain ya inake dimaag mein nyoo raaj kee sankhya kaaphee jyaada hotee hai aur jo aam taur par apane dimaag ka yooj kisee bhee saamaany purush se jyaada ya kisee bhee saamaany vyakti se jyaada kar leta hai to usako is tarah ke samasyaon ka saamana bhavishy karana set pad sakata hai jitane bhee bade log hote hain jo matalab kaaphee jyaada vaigyaanik ho ya koee bhee on nahin ho jo kaaphee jyaada ektiv hota hai jinaka mein unake saath mein ab dekhie kisee ne kisee tarah kee kisee tarah kee mrtyu kee hotee hai aur khaasataur par jab svaamee vivekaanand kee mrtyu huee thee usamen bas samaadhi aur dhyaan vyavastha mein the dhanyavaad

Archana Mishra Bolkar App
Top Speaker,Level 22
सुनिए Archana जी का जवाब
Housewife
1:06
हेलो फ्रेंड स्वागत है आपका आपका प्रश्न है क्या कारण है कि स्वामी विवेकानंद बहुत ही कम और मैं इस दुनिया को अलविदा कह गए थे उस एंड सम सभी को पता है कि स्वामी विवेकानंद जी बहुत कम हो रही दुनिया को अलविदा कह गए थे उनकी मृत्यु हो गई थी खाली 39 वर्ष के थे 39 वर्ष में उनकी मृत्यु हो गई थी और उनकी मौत का कारण था ब्रेन हेमरेज हो ना उनके दिमाग में खून का थक्का जम गया था उन्हें ब्रेन हेमरेज हो गया था इसलिए उनकी मौत हो गई थी तो जो इंसान एक सीमा से ज्यादा अपने दिमाग का इस्तेमाल करना है तो उसके हो सकता है उसके दिमाग में उसकी इस प्रकार की बीमारियां हो जाती है ब्रेन हेमरेज वगैरह जो बहुत सारे बड़े बड़े वैज्ञानिक लोग होते हैं तो बहुत सारे लोगों में से सुनने को मिल जाता है क्यों नहीं ब्रेन हेमरेज हो गया दिमाग की समस्या हो गई आम इंसानों से बहुत ज्यादा दिमाग इस्तेमाल करते हैं इसलिए उनको इस प्रकार की बीमारियां हो जाती हैं तो वे स्वामी विवेकानंद जी तो बहुत ज्यादा विद्यमान थे बहुत ज्यादा उनके पास ज्ञान था लेकिन 9 कमरों में उनकी मौत हो गई क्योंकि उनको ब्रेन हेमरेज हो गया था धन्यवाद
Helo phrend svaagat hai aapaka aapaka prashn hai kya kaaran hai ki svaamee vivekaanand bahut hee kam aur main is duniya ko alavida kah gae the us end sam sabhee ko pata hai ki svaamee vivekaanand jee bahut kam ho rahee duniya ko alavida kah gae the unakee mrtyu ho gaee thee khaalee 39 varsh ke the 39 varsh mein unakee mrtyu ho gaee thee aur unakee maut ka kaaran tha bren hemarej ho na unake dimaag mein khoon ka thakka jam gaya tha unhen bren hemarej ho gaya tha isalie unakee maut ho gaee thee to jo insaan ek seema se jyaada apane dimaag ka istemaal karana hai to usake ho sakata hai usake dimaag mein usakee is prakaar kee beemaariyaan ho jaatee hai bren hemarej vagairah jo bahut saare bade bade vaigyaanik log hote hain to bahut saare logon mein se sunane ko mil jaata hai kyon nahin bren hemarej ho gaya dimaag kee samasya ho gaee aam insaanon se bahut jyaada dimaag istemaal karate hain isalie unako is prakaar kee beemaariyaan ho jaatee hain to ve svaamee vivekaanand jee to bahut jyaada vidyamaan the bahut jyaada unake paas gyaan tha lekin 9 kamaron mein unakee maut ho gaee kyonki unako bren hemarej ho gaya tha dhanyavaad

Rahul kumar Bolkar App
Top Speaker,Level 44
सुनिए Rahul जी का जवाब
Unknown
0:47
क्या कारण है कि स्वामी विवेकानंद बहुत ही कम उम्र में दुनिया को छोड़कर बाबा साहेब डॉ अंबेडकर को ले लीजिए दुनिया के अंदर आते हैं दोस्तों और यही कारण है कि जो महान काम करते हैं और उन्होंने विश्व को वह संदेश दे डाला कि आज तक किसी ने नहीं दिया
Kya kaaran hai ki svaamee vivekaanand bahut hee kam umr mein duniya ko chhodakar baaba saaheb do ambedakar ko le leejie duniya ke andar aate hain doston aur yahee kaaran hai ki jo mahaan kaam karate hain aur unhonne vishv ko vah sandesh de daala ki aaj tak kisee ne nahin diya

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