#भारत की राजनीति

bolkar speaker

किन किन परिस्थितियों में मनुष्य की मति भ्रष्ट हो जाती है?

Kin Kin Paristhitiyon Mein Manushya Ki Mati Bhrasht Ho Jati Hai
shabnam khatun Bolkar App
Top Speaker,Level 33
सुनिए shabnam जी का जवाब
Student
1:24
हेलो जो आज आपके सवाल है कि किन किन परिस्थितियों में मनुष्य की मति भ्रष्ट हो जाती है बहुत सताती है जब इंसान का दिमाग काम नहीं करता है उसे कुछ भी समझ नहीं आता है दिमाग पूरा ही मतलब है ऐसा लगता है कि हां काम करना बंद कर दिया है ऐसे कुछ भी बोले ना डिसीजन ला कुछ काम करने के बाद आती है या फिर खुद की जान पर बन आती है अगर कोई ब्लैकमेल कर रहा होता है या फिर कोई अगर आपको टॉर्चर कर रहा होता है पब्लिक को बताना दे अवेलेबल मार ना दे जान सच आपको आपकी फैमिली को तो यहां पर क्या होता है कि आपकी जो मती है और भ्रष्ट हो जाती है आप कुछ भी नहीं समझ पाती हूं जो भी करवाते आप ऑफ कर लेते हैं आपको कुछ भी समझ नहीं आता है जब घर में खाना नहीं होता है पैसे नहीं होते तब भी इंसान का दिमाग काम नहीं करता तो करता ना कुछ भी काम नहीं है कोई भी कुछ भी काम कर रहा है तो वह कर लेंगे तो सब जगह स्पेशली इंसान का जो दिमाग में यह सब सिचुएशन में काम करना बंद कर देता क्योंकि जरूरत इतना ज्यादा बढ़ जाता है कि इंसान को सिर्फ और सिर्फ ऐसा लगता है कि नहीं जल्द से जल्द यह काम पहले पूरा हुसैन के बदले में कोई भी काम करने के लिए तैयार है तो यह सचिन इंसान की भी दिमाग है और जब रतिया स्टोरी
Helo jo aaj aapake savaal hai ki kin kin paristhitiyon mein manushy kee mati bhrasht ho jaatee hai bahut sataatee hai jab insaan ka dimaag kaam nahin karata hai use kuchh bhee samajh nahin aata hai dimaag poora hee matalab hai aisa lagata hai ki haan kaam karana band kar diya hai aise kuchh bhee bole na diseejan la kuchh kaam karane ke baad aatee hai ya phir khud kee jaan par ban aatee hai agar koee blaikamel kar raha hota hai ya phir koee agar aapako torchar kar raha hota hai pablik ko bataana de avelebal maar na de jaan sach aapako aapakee phaimilee ko to yahaan par kya hota hai ki aapakee jo matee hai aur bhrasht ho jaatee hai aap kuchh bhee nahin samajh paatee hoon jo bhee karavaate aap oph kar lete hain aapako kuchh bhee samajh nahin aata hai jab ghar mein khaana nahin hota hai paise nahin hote tab bhee insaan ka dimaag kaam nahin karata to karata na kuchh bhee kaam nahin hai koee bhee kuchh bhee kaam kar raha hai to vah kar lenge to sab jagah speshalee insaan ka jo dimaag mein yah sab sichueshan mein kaam karana band kar deta kyonki jaroorat itana jyaada badh jaata hai ki insaan ko sirph aur sirph aisa lagata hai ki nahin jald se jald yah kaam pahale poora husain ke badale mein koee bhee kaam karane ke lie taiyaar hai to yah sachin insaan kee bhee dimaag hai aur jab ratiya storee

और जवाब सुनें

bolkar speaker
किन किन परिस्थितियों में मनुष्य की मति भ्रष्ट हो जाती है?Kin Kin Paristhitiyon Mein Manushya Ki Mati Bhrasht Ho Jati Hai
Archana Mishra Bolkar App
Top Speaker,Level 22
सुनिए Archana जी का जवाब
Housewife
1:11
हेलो एवरीवन स्वागत है आपका आपका प्रश्न एक किन किन परिस्थितियों में मनुष्य की मति भ्रष्ट हो जाती है और फ्रेंड से बहुत सारी ऐसी स्थिति ना आती हैं कि जब मनुष्य जो बुद्धि है या मती है पर भ्रष्ट हो जाती है तो सबसे पहला है जब इंसान जिंदा होता है जब इंसान हो तभी गुस्सा होता है तो उसकी बुद्धि एकदम फिट हो जाती है उसे समझ में नहीं आता है कि वह क्या बोल रहा है क्या कर रहा है क्या कह रहा है तो गुस्से से इंसान की मति भ्रष्ट होती है और दूसरा जगह किसी लोभ लालच में पड़ जाता है ज्यादा लालची हो जाता तभी उसकी मति भ्रष्ट हो जाती है और वह जब अपना मन खराब हो जाता है चोरी चोरी करने लगता है उसकी भी मति भ्रष्ट हो जाती है तो ऐसे बहुत सारे कारण हैं जिनसे इंसानों की मति भ्रष्ट हो जाती है इंसानों को हमेशा सदाचार के रास्ते पर चलना चाहिए जिससे उनकी बुद्धि भ्रष्ट ना हो और उनका दिमाग सही से काम करें उन्हें अच्छे अच्छी किताबें पढ़ना चाहिए अच्छे अच्छे लोगों के बीच में इसमें चाहिए ऑरेंज अच्छी संगत में रहना चाहिए जिससे कि उनकी मति भ्रष्ट ना हो वह गुस्सा इत्यादि करने से भी इंसान की मति भ्रष्ट हो जाती है धन्यवाद
Helo evareevan svaagat hai aapaka aapaka prashn ek kin kin paristhitiyon mein manushy kee mati bhrasht ho jaatee hai aur phrend se bahut saaree aisee sthiti na aatee hain ki jab manushy jo buddhi hai ya matee hai par bhrasht ho jaatee hai to sabase pahala hai jab insaan jinda hota hai jab insaan ho tabhee gussa hota hai to usakee buddhi ekadam phit ho jaatee hai use samajh mein nahin aata hai ki vah kya bol raha hai kya kar raha hai kya kah raha hai to gusse se insaan kee mati bhrasht hotee hai aur doosara jagah kisee lobh laalach mein pad jaata hai jyaada laalachee ho jaata tabhee usakee mati bhrasht ho jaatee hai aur vah jab apana man kharaab ho jaata hai choree choree karane lagata hai usakee bhee mati bhrasht ho jaatee hai to aise bahut saare kaaran hain jinase insaanon kee mati bhrasht ho jaatee hai insaanon ko hamesha sadaachaar ke raaste par chalana chaahie jisase unakee buddhi bhrasht na ho aur unaka dimaag sahee se kaam karen unhen achchhe achchhee kitaaben padhana chaahie achchhe achchhe logon ke beech mein isamen chaahie orenj achchhee sangat mein rahana chaahie jisase ki unakee mati bhrasht na ho vah gussa ityaadi karane se bhee insaan kee mati bhrasht ho jaatee hai dhanyavaad

bolkar speaker
किन किन परिस्थितियों में मनुष्य की मति भ्रष्ट हो जाती है?Kin Kin Paristhitiyon Mein Manushya Ki Mati Bhrasht Ho Jati Hai
Shipra Bolkar App
Top Speaker,Level 44
सुनिए Shipra जी का जवाब
Self Employed
0:12
साले के किन परिस्थितियों में मनुष्य के मती फर्स्ट हो जाते हैं निश्चित तौर पर कभी भी अगर मनुष्य लोग और मुंह के ग्रसित हो जाता है उसके अधीन आ जाता है तो उसकी मति भ्रष्ट हो जाती है आपका दिन शुभ रहे थे निवास
Saale ke kin paristhitiyon mein manushy ke matee pharst ho jaate hain nishchit taur par kabhee bhee agar manushy log aur munh ke grasit ho jaata hai usake adheen aa jaata hai to usakee mati bhrasht ho jaatee hai aapaka din shubh rahe the nivaas

bolkar speaker
किन किन परिस्थितियों में मनुष्य की मति भ्रष्ट हो जाती है?Kin Kin Paristhitiyon Mein Manushya Ki Mati Bhrasht Ho Jati Hai
rohit paste Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए rohit जी का जवाब
Unknown
1:04
मनुष्य की मति भ्रष्ट होने के कुछ सामान्य सामान्य कारण हो सकते हैं जैसे कि अगर अचानक से ढेर सारा पैसा मिल जाए तो मति भ्रष्ट हो सकती है अगर अचानक से पैसा पूरा चला जाए और वह कंगाल हो जाए अगर कुछ क्रोध के कारण वह करो ज्यादा बढ़ जाए तो उससे मति भ्रष्ट हो सकते हैं या कुछ शारीरिक कंट्रोल ना होने के कारण ही मति भ्रष्ट हो सकती है यह सामने वाला आप पर किस तरह से आप को उकसाने के लिए किसी भी कारण से सामने कीजिए तैयार हुआ हो और आप अगर कुछ अच्छे में फंस जाए तो भी आपकी मति भ्रष्ट हो सकती है
Manushy kee mati bhrasht hone ke kuchh saamaany saamaany kaaran ho sakate hain jaise ki agar achaanak se dher saara paisa mil jae to mati bhrasht ho sakatee hai agar achaanak se paisa poora chala jae aur vah kangaal ho jae agar kuchh krodh ke kaaran vah karo jyaada badh jae to usase mati bhrasht ho sakate hain ya kuchh shaareerik kantrol na hone ke kaaran hee mati bhrasht ho sakatee hai yah saamane vaala aap par kis tarah se aap ko ukasaane ke lie kisee bhee kaaran se saamane keejie taiyaar hua ho aur aap agar kuchh achchhe mein phans jae to bhee aapakee mati bhrasht ho sakatee hai

bolkar speaker
किन किन परिस्थितियों में मनुष्य की मति भ्रष्ट हो जाती है?Kin Kin Paristhitiyon Mein Manushya Ki Mati Bhrasht Ho Jati Hai
Laxmi devi sant Bolkar App
Top Speaker,Level 22
सुनिए Laxmi जी का जवाब
Life coach
2:58
आपका प्रश्न है किन किन परिस्थितियों में मनुष्य की मति भ्रष्ट हो जाती है तो अगर आप बहुत एंगर करते हैं हारे छोटी-छोटी बातों पर तो यहां आपकी मति भ्रष्ट होने की पूरी संभावना है चिल्ला रहा है ना तो बस उसे आप गेम की तरह कैसे हो सकता आपको अपने मन में बोलना है यह मुझसे मेरी एनर्जी नहीं ले सकता अगर यह सीखा और मैं ठीक ही तो मतलब कि मेरी अंग्रेजी को खींच लेगा क्योंकि यह जर्नी एनर्जी की हानि होती है यह जिंदगी एनर्जी की जिंदगी हम तो यहां आपको क्या करना है कि कोई भी आपसे अगर करें गुस्सा करें तो बस अपने मन में बोला कि मैं यह गेम जीत गए मैं अपनी एनर्जी से शिफ्ट नहीं करी मुझे जितना भी बुरा बोलेगा इसके एनर्जी ड्रेन होगी मेरी नहीं लेकिन अगर मैंने इसे जवाब दिया तो यह मेरी एनर्जी ले लेगा और मेरी एनर्जी ड्रिंक जाएगी इस तरीके से अपनी जिंदगी में एक गेम बना कर खेलेंगे कोई भी अटेंड करेगा ना तो फिर धीरे-धीरे वह हैंगर आपके अंदर से खत्म हो जाएगा गेम की तरह लेंगे यहां आपके आपके शांत होना शुरू हो जाएगा चाहे वह आप पर हंड्रेड परसेंट हो भी क्यों न हो जाए कुछ भी बुरा बोल रही कुछ भी पर आप समझ लेना कि वह आपकी एनर्जी खींचना चाहता है इसलिए वह आपका मुंह खुलवाना चाहता है लेकिन आप अंदर जानते हो कि मैं अपनी मर्जी से नहीं दूंगी ठीक है नहीं देना मुझे और ना ही मुझे तो कुछ बोलना तो आप कहेंगे ठीक होने लगेगा दूसरा यह होता है कि किसी भी चीज में शक करना जी हां बहुत सारे लोग हैं जो अपनी रिलेशनशिप में शक करते हैं शक करने से क्या होता है तो उनकी मति भ्रष्ट हो जाती है एक चीज में सब करते हैं तो वह खुद को तो हट करते हैं और उस इंसान को भी याद करते हैं जो कि प्योर इंसान होता है जो अपने अंदर यह बदलाव लाना कि हम शक ना करें क्योंकि सभी लोग एक एनर्जी कोई गलत नहीं है आप सीडी लेवल में फिजिकल लेवल से देखेंगे तो आपको सब गलत खुद गलत है आपके अंदर आया तो गलत आप हुए बाहर वाला इंसान नहीं तीसरा होता है कि आप अपने जितने भी चाहने वाले हैं उन्हें याद करके रखते हैं याद करके मतलब तुम्हें यहां नहीं जाना वहां नहीं जाना मतलब आपने उनके तरफ पूरा रूल फिक्स कर लिया आपने उन्हें कभी आज रात वाली जिंदगी जीने ही नहीं रही है तो ऐसे में भी आपकी मति भ्रष्ट हो जाती है और इसीलिए आप अपने साथ बुरा करते हैं लेकिन सामने वाली एनर्जी के साथ भी बुरा करते हो अगर आप ध्यान से देखें तो सब में आप ही रहते हैं लेकिन आप हर एनर्जी मतलब आप खुद ही को तकलीफ पहुंचा दें किसी पर रोक-टोक लगाने मतलब आप खुद ही पर रोक रोक लगा रहे हैं वह हर कोई आंखें होती है लेकिन अगर आपने ध्यान से नहीं देखा देखने की जो एक्चुअली में जैसे देखना चाहिए रियालिटी तो आपको हर चीज में बुराई नजर आएगी एंड नजर आएगा जेल से नजर आएगी और पूरा कचरा पड़ा रहेगा ऐसे में आपकी मति भ्रष्ट हो जाएगी
Aapaka prashn hai kin kin paristhitiyon mein manushy kee mati bhrasht ho jaatee hai to agar aap bahut engar karate hain haare chhotee-chhotee baaton par to yahaan aapakee mati bhrasht hone kee pooree sambhaavana hai chilla raha hai na to bas use aap gem kee tarah kaise ho sakata aapako apane man mein bolana hai yah mujhase meree enarjee nahin le sakata agar yah seekha aur main theek hee to matalab ki meree angrejee ko kheench lega kyonki yah jarnee enarjee kee haani hotee hai yah jindagee enarjee kee jindagee ham to yahaan aapako kya karana hai ki koee bhee aapase agar karen gussa karen to bas apane man mein bola ki main yah gem jeet gae main apanee enarjee se shipht nahin karee mujhe jitana bhee bura bolega isake enarjee dren hogee meree nahin lekin agar mainne ise javaab diya to yah meree enarjee le lega aur meree enarjee drink jaegee is tareeke se apanee jindagee mein ek gem bana kar khelenge koee bhee atend karega na to phir dheere-dheere vah haingar aapake andar se khatm ho jaega gem kee tarah lenge yahaan aapake aapake shaant hona shuroo ho jaega chaahe vah aap par handred parasent ho bhee kyon na ho jae kuchh bhee bura bol rahee kuchh bhee par aap samajh lena ki vah aapakee enarjee kheenchana chaahata hai isalie vah aapaka munh khulavaana chaahata hai lekin aap andar jaanate ho ki main apanee marjee se nahin doongee theek hai nahin dena mujhe aur na hee mujhe to kuchh bolana to aap kahenge theek hone lagega doosara yah hota hai ki kisee bhee cheej mein shak karana jee haan bahut saare log hain jo apanee rileshanaship mein shak karate hain shak karane se kya hota hai to unakee mati bhrasht ho jaatee hai ek cheej mein sab karate hain to vah khud ko to hat karate hain aur us insaan ko bhee yaad karate hain jo ki pyor insaan hota hai jo apane andar yah badalaav laana ki ham shak na karen kyonki sabhee log ek enarjee koee galat nahin hai aap seedee leval mein phijikal leval se dekhenge to aapako sab galat khud galat hai aapake andar aaya to galat aap hue baahar vaala insaan nahin teesara hota hai ki aap apane jitane bhee chaahane vaale hain unhen yaad karake rakhate hain yaad karake matalab tumhen yahaan nahin jaana vahaan nahin jaana matalab aapane unake taraph poora rool phiks kar liya aapane unhen kabhee aaj raat vaalee jindagee jeene hee nahin rahee hai to aise mein bhee aapakee mati bhrasht ho jaatee hai aur iseelie aap apane saath bura karate hain lekin saamane vaalee enarjee ke saath bhee bura karate ho agar aap dhyaan se dekhen to sab mein aap hee rahate hain lekin aap har enarjee matalab aap khud hee ko takaleeph pahuncha den kisee par rok-tok lagaane matalab aap khud hee par rok rok laga rahe hain vah har koee aankhen hotee hai lekin agar aapane dhyaan se nahin dekha dekhane kee jo ekchualee mein jaise dekhana chaahie riyaalitee to aapako har cheej mein buraee najar aaegee end najar aaega jel se najar aaegee aur poora kachara pada rahega aise mein aapakee mati bhrasht ho jaegee

bolkar speaker
किन किन परिस्थितियों में मनुष्य की मति भ्रष्ट हो जाती है?Kin Kin Paristhitiyon Mein Manushya Ki Mati Bhrasht Ho Jati Hai
Ganga Asati Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए Ganga जी का जवाब
Unknown
0:43
क्या कोई बहुत अपना करीबी खत्म हो जाए या फिर उसको अपने प्यार में धोखा मिले सिर्फ अपनी वाइफ के द्वारा गर्लफ्रेंड के द्वारा सूचना मिली वह जिस सब्जेक्ट में पास होने की उम्मीद लगा कर बैठा है फिर हो जाए या फिर वह अपने जो कॉल करो चालू करें हैं वह अचानक से फेल हो जाए इन सब परिस्थितियों में मनुष्य की मति भ्रष्ट हो जाती है गलत राह में चला जाता है या फिर गरीब ही एक ऐसी चीज है जिसमें किसी भी इंसान की उन्नति और तीव्र हो जाती है कि वह कुछ भी करने को रेडी हो जाता है क्योंकि उसके पास कोई और ऑप्शन ही नहीं पता करने के लिए
Kya koee bahut apana kareebee khatm ho jae ya phir usako apane pyaar mein dhokha mile sirph apanee vaiph ke dvaara garlaphrend ke dvaara soochana milee vah jis sabjekt mein paas hone kee ummeed laga kar baitha hai phir ho jae ya phir vah apane jo kol karo chaaloo karen hain vah achaanak se phel ho jae in sab paristhitiyon mein manushy kee mati bhrasht ho jaatee hai galat raah mein chala jaata hai ya phir gareeb hee ek aisee cheej hai jisamen kisee bhee insaan kee unnati aur teevr ho jaatee hai ki vah kuchh bhee karane ko redee ho jaata hai kyonki usake paas koee aur opshan hee nahin pata karane ke lie

bolkar speaker
किन किन परिस्थितियों में मनुष्य की मति भ्रष्ट हो जाती है?Kin Kin Paristhitiyon Mein Manushya Ki Mati Bhrasht Ho Jati Hai
Sanjay Kumar Bolkar App
Top Speaker,Level 33
सुनिए Sanjay जी का जवाब
Unknown
1:01
मुझे कुछ कंडीशन तो ऐसी होती है ऐसी परिस्थितियां होती है जिसमें मनुष्य की कीमत होती है वह भ्रष्ट हो जाती है जब भी किसी तरह की विषम परिस्थितियों के सामने आती है उसका दिमाग काम करना बंद कर देता है इस तरह के उसकी मति भ्रष्ट हो जाती है हो सकता है बाकी की तरह का अहंकार में लिप्त हो जाए उसको छोटी ही सफलता मिल जाए और उस सफलता से फूला नहीं समा रहा हो उस में अहंकार कर लेगा एंड कार करने के बाद भी ऐसा होता है कि जो बुद्धि होती है वह बुरी तरीके से कार्य करने लगती है भ्रष्ट हो जाती है और ऐसा कहा जाता है कि विनाश काले विपरीत बुद्धि इस तरह से आप कह सकते हैं कि जब भी विनाश का समय आता है तब उसकी बुद्धि होती है वह भ्रष्ट हो जाती है इसके अलावा अगर हम कह सकते हैं कि कोई व्यक्ति अगर काफी देर तक गुस्से में हूं तो गुस्सा जब वह करेगा तब भी उसकी जो बुद्धि होगी वह काम करना बंद हो जाएगी धन्यवाद
Mujhe kuchh kandeeshan to aisee hotee hai aisee paristhitiyaan hotee hai jisamen manushy kee keemat hotee hai vah bhrasht ho jaatee hai jab bhee kisee tarah kee visham paristhitiyon ke saamane aatee hai usaka dimaag kaam karana band kar deta hai is tarah ke usakee mati bhrasht ho jaatee hai ho sakata hai baakee kee tarah ka ahankaar mein lipt ho jae usako chhotee hee saphalata mil jae aur us saphalata se phoola nahin sama raha ho us mein ahankaar kar lega end kaar karane ke baad bhee aisa hota hai ki jo buddhi hotee hai vah buree tareeke se kaary karane lagatee hai bhrasht ho jaatee hai aur aisa kaha jaata hai ki vinaash kaale vipareet buddhi is tarah se aap kah sakate hain ki jab bhee vinaash ka samay aata hai tab usakee buddhi hotee hai vah bhrasht ho jaatee hai isake alaava agar ham kah sakate hain ki koee vyakti agar kaaphee der tak gusse mein hoon to gussa jab vah karega tab bhee usakee jo buddhi hogee vah kaam karana band ho jaegee dhanyavaad

bolkar speaker
किन किन परिस्थितियों में मनुष्य की मति भ्रष्ट हो जाती है?Kin Kin Paristhitiyon Mein Manushya Ki Mati Bhrasht Ho Jati Hai
Meghsinghchouhan Bolkar App
Top Speaker,Level 33
सुनिए Meghsinghchouhan जी का जवाब
student
0:22
जी आप का सवाल है कि किन किन परिस्थितियों में मनुष्य की मति भ्रष्ट हो जाते हैं तो पहला तो लोग अगर भक्ति ज्यादा लोग करते हैं और फिर ज्यादा क्रोध हो गया इसमें व्यक्ति की हमेशा मति भ्रष्ट हो जाती है धन्यवाद
Jee aap ka savaal hai ki kin kin paristhitiyon mein manushy kee mati bhrasht ho jaate hain to pahala to log agar bhakti jyaada log karate hain aur phir jyaada krodh ho gaya isamen vyakti kee hamesha mati bhrasht ho jaatee hai dhanyavaad

bolkar speaker
किन किन परिस्थितियों में मनुष्य की मति भ्रष्ट हो जाती है?Kin Kin Paristhitiyon Mein Manushya Ki Mati Bhrasht Ho Jati Hai
पुरुषोत्तम सोनी Bolkar App
Top Speaker,Level 33
सुनिए पुरुषोत्तम जी का जवाब
साहित्यकार, समीक्षक, संपादक पूर्व अधिकारी विजिलेंस
1:48
मनुष्य के मस्तिक का भ्रष्ट हो जाती है जब मनुष्य को अपनी ताकत पर घमंड होता है और वह अनावश्यक रुप से कमजोर आदमी पर अपनी ताकत का इस्तेमाल कर जाता है वहां पर उसके मति भ्रष्ट हो जाती है जब किसी मनुष्य के पास इतनी ताकत हो इतना दम भी हो जाए इतना पाखंडी हो जाए कि उसे दूसरे की बहन बेटी और अपनी बहन बेटी पर कोई अंतर न समझ में आए और उसके साथ वह बुरी निगाह रखे तो यह समझ में उसके मति भ्रष्ट हो जाती है जो व्यक्ति ईश्वर को हाजिर नाजिर जानकारी कार्य नगर के भगवान को यह समझे कि मतलब भगवान भगवान नहीं होता और अपने कोई भगवान मान बैठे और लोगों को सताना शुरू कर दे माफ करना शुरू कर दो वहां पर उसके पति से होती है और वहां पर उसके नाक के कार्यक्रम शुरू हो जाते हैं कहते हैं कि जयराम दारुण दुख दे हैं बाकी मति आगे हर ले तो उसके मतीजा भर जाती है उसी मती के हारने के कारण ही देखिए अच्छी खासी मंत्रा जो है उसने द्रोपदी को धीमा को भड़का हुआ उसके भरत की माता के कई का दिमाग को उसने भड़का दिया भड़काने के बाद उसने राजा दशरथ से तीन वरदान मांग ले तीन वरदान मांगने के बाद देखिए महाराजा दशरथ की मृत्यु हो गई और उस काम को बंद घमंड भी जाना पड़ गया भारत ने राज सिंहासन स्वीकार नहीं किया मंत्रा को तमाम मारा पीटा कि उसकी बेज्जती कर के राज से भगा दिया गया और माता के कई जो है वह भी विधवा हो गए तो यह दुष्परिणाम होते हैं कुमति के इसलिए तुम अच्छे बच्चे हमेशा सदाचार बनिए विनम्र बनिए लोगों की सेवा की मदद कीजिए अगर आपके अंदर शक्ति और सामर्थ्य है क्षमा करने की प्रवृत्ति डालिए इन सब चीजों से आप का मन है तो खुली तो होगा गरीबों की मदद करेंगे आप तो आप दिन पर दिन और शक्तिशाली बनने के
Manushy ke mastik ka bhrasht ho jaatee hai jab manushy ko apanee taakat par ghamand hota hai aur vah anaavashyak rup se kamajor aadamee par apanee taakat ka istemaal kar jaata hai vahaan par usake mati bhrasht ho jaatee hai jab kisee manushy ke paas itanee taakat ho itana dam bhee ho jae itana paakhandee ho jae ki use doosare kee bahan betee aur apanee bahan betee par koee antar na samajh mein aae aur usake saath vah buree nigaah rakhe to yah samajh mein usake mati bhrasht ho jaatee hai jo vyakti eeshvar ko haajir naajir jaanakaaree kaary nagar ke bhagavaan ko yah samajhe ki matalab bhagavaan bhagavaan nahin hota aur apane koee bhagavaan maan baithe aur logon ko sataana shuroo kar de maaph karana shuroo kar do vahaan par usake pati se hotee hai aur vahaan par usake naak ke kaaryakram shuroo ho jaate hain kahate hain ki jayaraam daarun dukh de hain baakee mati aage har le to usake mateeja bhar jaatee hai usee matee ke haarane ke kaaran hee dekhie achchhee khaasee mantra jo hai usane dropadee ko dheema ko bhadaka hua usake bharat kee maata ke kaee ka dimaag ko usane bhadaka diya bhadakaane ke baad usane raaja dasharath se teen varadaan maang le teen varadaan maangane ke baad dekhie mahaaraaja dasharath kee mrtyu ho gaee aur us kaam ko band ghamand bhee jaana pad gaya bhaarat ne raaj sinhaasan sveekaar nahin kiya mantra ko tamaam maara peeta ki usakee bejjatee kar ke raaj se bhaga diya gaya aur maata ke kaee jo hai vah bhee vidhava ho gae to yah dushparinaam hote hain kumati ke isalie tum achchhe bachche hamesha sadaachaar banie vinamr banie logon kee seva kee madad keejie agar aapake andar shakti aur saamarthy hai kshama karane kee pravrtti daalie in sab cheejon se aap ka man hai to khulee to hoga gareebon kee madad karenge aap to aap din par din aur shaktishaalee banane ke

bolkar speaker
किन किन परिस्थितियों में मनुष्य की मति भ्रष्ट हो जाती है?Kin Kin Paristhitiyon Mein Manushya Ki Mati Bhrasht Ho Jati Hai
Shruti Yadav Bolkar App
Top Speaker,Level 33
सुनिए Shruti जी का जवाब
Student
1:19
सवाल यह है कि किन किन परिस्थितियों में मनुष्य की मति भ्रष्ट हो जाती है मनुष्य द्वारा किए जाने वाले दूर व्यसन व क्रोध मनुष्य की बुद्धि को भ्रष्ट कर देते हैं जिस कारण मनुष्य गलत कामों की ओर अग्रसर हो जाता है मनुष्य के इसी गुण को तमोगुण कहते हैं अर्थात तमोगुण की चपेट में आने वाले मनुष्य का विनाश निश्चित है मनुष्य को अपना जीवन सुखमय बनाने के लिए सात्विक गुणों को धारण करना चाहिए जीवन में शालीनता लाना सुधार करना मैं जीवन को दूर वचनों से बचाना बचा कर रखने का नाम ही सतोगुण है भजन ओ परदेसी का संगीत आर्य का भजनों के माध्यम से अपने विचार रखते हुए कहती हैं कि आप केवल जन्म देने मात्र से ही नारी मां नहीं बन जाती जो नारी मां बच्चों का निर्माण करती है वही माता आ कहलाने के लायक है बताया जाता है कि वेदों में मां के बच्चों का पहला गुरु बताया गया इसलिए जरूरी है कि माता है बच्चों को अच्छी शिक्षा देकर उनका निर्माण करें आज माता द्वारा बच्चे का निर्माण ना करने की वजह से परिवारों में अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है कई विकट परिस्थितियों में मनुष्य की मति भ्रष्ट हो जाती है और वह सही सोचने लायक नहीं रहता उसे जल्दबाजी में जो सही लगता है वह वही करता है
Savaal yah hai ki kin kin paristhitiyon mein manushy kee mati bhrasht ho jaatee hai manushy dvaara kie jaane vaale door vyasan va krodh manushy kee buddhi ko bhrasht kar dete hain jis kaaran manushy galat kaamon kee or agrasar ho jaata hai manushy ke isee gun ko tamogun kahate hain arthaat tamogun kee chapet mein aane vaale manushy ka vinaash nishchit hai manushy ko apana jeevan sukhamay banaane ke lie saatvik gunon ko dhaaran karana chaahie jeevan mein shaaleenata laana sudhaar karana main jeevan ko door vachanon se bachaana bacha kar rakhane ka naam hee satogun hai bhajan o paradesee ka sangeet aary ka bhajanon ke maadhyam se apane vichaar rakhate hue kahatee hain ki aap keval janm dene maatr se hee naaree maan nahin ban jaatee jo naaree maan bachchon ka nirmaan karatee hai vahee maata aa kahalaane ke laayak hai bataaya jaata hai ki vedon mein maan ke bachchon ka pahala guru bataaya gaya isalie jarooree hai ki maata hai bachchon ko achchhee shiksha dekar unaka nirmaan karen aaj maata dvaara bachche ka nirmaan na karane kee vajah se parivaaron mein anek samasyaon ka saamana karana pad sakata hai kaee vikat paristhitiyon mein manushy kee mati bhrasht ho jaatee hai aur vah sahee sochane laayak nahin rahata use jaldabaajee mein jo sahee lagata hai vah vahee karata hai

bolkar speaker
किन किन परिस्थितियों में मनुष्य की मति भ्रष्ट हो जाती है?Kin Kin Paristhitiyon Mein Manushya Ki Mati Bhrasht Ho Jati Hai
Aditya Dangayach  Bolkar App
Top Speaker,Level 22
सुनिए Aditya जी का जवाब
Student
1:50
मैं करता जानना चाहते हैं कि किन किन परिस्थितियों में मनुष्य की बुद्धि भ्रष्ट हो जाती है लेकिन उनकी वजह से कई प्रकार की परिस्थितियां होती है अक्सर पति से काम लेना भूल जाता है ऐसी परिस्थिति कौन सी होती है तो हम उसको समझने की कोशिश करेंगे लेकिन अगर हम नोटिस करें तरह से अधिकतर वह परिस्थिति होती है जिनमें हमने अपने मन से काम लिया बस के दो प्रकार के मूर्ति या दो प्रकार की भर्ती हम कह सकते हैं जिसको हम बंद करते हैं जिससे जिसको हम पुद्दी कहते हैं ऐसे दिमाग से करते हैं वह हमारे पति होता है जो जो का मंदिर से करते हो हमारे तरीके से मन होता है और जो हमारे मनोज अधिकतर हमारे भावनाओं के संचालित लेकिन हम यह जानते हैं कि कभी कबार हमारी बाहों में आकर हम कुछ गलत कार्य कर सकते हैं जिस पर हमारा कोई रोक-टोक नहीं रहता लेकिन अगर हम किसी कार्य को करने से पहले गर्म दिमाग लगाते हैं सही से करेंगे अभी कि उसमें कुछ गड़बड़ हो रही होगी लेकिन सच में ऐसा ही होता है तो वह कार्य जो अक्सर अपने मन से करते हैं बिना समझे बिना उसके अंदर कुछ होती लगा है फिर अपना दिमाग में सभी चीजों में मुख्यमंत्री को चेताया कि उसके शरीर पर भावनाएं ज्यादा हावी हो जाती है उसके दिमाग की वजह से काफी ज्यादा जाता है और बहुत बड़ी गलती कर बैठते हैं कि हमें बाद में पछताना पड़ता है ऐसी गलती होती जिसमें हमारा भी हो जाता है कि किसी भी कार्य करते टाइम अगर हम अपने मन को ज्यादा महत्व देंगे तो हमारी बुद्धि भ्रष्ट हो जाएगा मेरा जवाब पसंद आया होगा इसी प्रकार सवालों के जवाब से धन्यवाद
Main karata jaanana chaahate hain ki kin kin paristhitiyon mein manushy kee buddhi bhrasht ho jaatee hai lekin unakee vajah se kaee prakaar kee paristhitiyaan hotee hai aksar pati se kaam lena bhool jaata hai aisee paristhiti kaun see hotee hai to ham usako samajhane kee koshish karenge lekin agar ham notis karen tarah se adhikatar vah paristhiti hotee hai jinamen hamane apane man se kaam liya bas ke do prakaar ke moorti ya do prakaar kee bhartee ham kah sakate hain jisako ham band karate hain jisase jisako ham puddee kahate hain aise dimaag se karate hain vah hamaare pati hota hai jo jo ka mandir se karate ho hamaare tareeke se man hota hai aur jo hamaare manoj adhikatar hamaare bhaavanaon ke sanchaalit lekin ham yah jaanate hain ki kabhee kabaar hamaaree baahon mein aakar ham kuchh galat kaary kar sakate hain jis par hamaara koee rok-tok nahin rahata lekin agar ham kisee kaary ko karane se pahale garm dimaag lagaate hain sahee se karenge abhee ki usamen kuchh gadabad ho rahee hogee lekin sach mein aisa hee hota hai to vah kaary jo aksar apane man se karate hain bina samajhe bina usake andar kuchh hotee laga hai phir apana dimaag mein sabhee cheejon mein mukhyamantree ko chetaaya ki usake shareer par bhaavanaen jyaada haavee ho jaatee hai usake dimaag kee vajah se kaaphee jyaada jaata hai aur bahut badee galatee kar baithate hain ki hamen baad mein pachhataana padata hai aisee galatee hotee jisamen hamaara bhee ho jaata hai ki kisee bhee kaary karate taim agar ham apane man ko jyaada mahatv denge to hamaaree buddhi bhrasht ho jaega mera javaab pasand aaya hoga isee prakaar savaalon ke javaab se dhanyavaad

bolkar speaker
किन किन परिस्थितियों में मनुष्य की मति भ्रष्ट हो जाती है?Kin Kin Paristhitiyon Mein Manushya Ki Mati Bhrasht Ho Jati Hai
Rahul kumar Bolkar App
Top Speaker,Level 44
सुनिए Rahul जी का जवाब
Unknown
1:05
परिस्थितियों में मनुष्य की मति भ्रष्ट हो जाती है काफी महत्वपूर्ण दोस्तों का सवाल है कि काफी परिस्थितियां ऐसी हो जाती है जिसमें मनुष्य कीजिए दोस्तों को भ्रष्ट हो जाती है जैसे कि आप देखेंगे कि मैं तनाव में हो जाता है तो उसे कुछ चीजों को सूझबूझ नहीं रहती और ऐसी स्थिति में जो मनुष्य की वह भ्रष्ट हो जाती है ऐसे भी उसके मति भ्रष्ट हो जाती है वह गलत काम करने में लग जाता है दूसरा ही हो जाती हैं जिनकी वजह बता भी नहीं सकते उनके चलते भी उनकी जो मरते हो ब्लास्ट हो जाती है चाहे वह पारिवारिक मसले क्यों ना हो इस चीज को लेकर जब मनुष्य तनाव में आ जाता है उसकी कोई नहीं सुनता तो ऐसे समय में भी वह गलत कदम उठा लेता है और उसकी मति भ्रष्ट हो जाती है कोई व्यक्ति जो है महिला के प्रेम प्रसंग में इतने बावले हो जाते हैं उनके सुसाइड कर लेते हैं तुम मति भ्रष्ट तो कई कारणों से हुई जाती है
Paristhitiyon mein manushy kee mati bhrasht ho jaatee hai kaaphee mahatvapoorn doston ka savaal hai ki kaaphee paristhitiyaan aisee ho jaatee hai jisamen manushy keejie doston ko bhrasht ho jaatee hai jaise ki aap dekhenge ki main tanaav mein ho jaata hai to use kuchh cheejon ko soojhaboojh nahin rahatee aur aisee sthiti mein jo manushy kee vah bhrasht ho jaatee hai aise bhee usake mati bhrasht ho jaatee hai vah galat kaam karane mein lag jaata hai doosara hee ho jaatee hain jinakee vajah bata bhee nahin sakate unake chalate bhee unakee jo marate ho blaast ho jaatee hai chaahe vah paarivaarik masale kyon na ho is cheej ko lekar jab manushy tanaav mein aa jaata hai usakee koee nahin sunata to aise samay mein bhee vah galat kadam utha leta hai aur usakee mati bhrasht ho jaatee hai koee vyakti jo hai mahila ke prem prasang mein itane baavale ho jaate hain unake susaid kar lete hain tum mati bhrasht to kaee kaaranon se huee jaatee hai

bolkar speaker
किन किन परिस्थितियों में मनुष्य की मति भ्रष्ट हो जाती है?Kin Kin Paristhitiyon Mein Manushya Ki Mati Bhrasht Ho Jati Hai
Chetan Chandrawanshi Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए Chetan जी का जवाब
Finding a part time job
1:10
देखें ऐसी कोई परिस्थिति नहीं है जिसमें एक साधारण क्या कह तो नॉर्मल इंसान की बुद्धि भ्रष्ट हो जा स्थिति वह खुद तय करता है वह अगर उसी स्थिति को झेलने के काबिल नहीं है और उसको जल्दी कोशिश भी नहीं करेगा तब उसकी बुद्धि भ्रष्ट हो वरना भगवान ने अभी तक ऐसी कोई स्थिति ने बनाई यह किसी भी जीव जंतु को हौसला होने पर उसके साहस होने पर भी उसको बुद्धि भ्रष्ट कर ले तो अपने ऊपर विश्वास रखिए अपने नशा हनुमान जी और आगे बढ़ते रहेंगे जीवन में चोट तो लगती रहती है और चलते चलते कि नहीं हो जाती है सिर्फ का जो पालन था वह भी बहुत मीठा होता है धन्यवाद
Dekhen aisee koee paristhiti nahin hai jisamen ek saadhaaran kya kah to normal insaan kee buddhi bhrasht ho ja sthiti vah khud tay karata hai vah agar usee sthiti ko jhelane ke kaabil nahin hai aur usako jaldee koshish bhee nahin karega tab usakee buddhi bhrasht ho varana bhagavaan ne abhee tak aisee koee sthiti ne banaee yah kisee bhee jeev jantu ko hausala hone par usake saahas hone par bhee usako buddhi bhrasht kar le to apane oopar vishvaas rakhie apane nasha hanumaan jee aur aage badhate rahenge jeevan mein chot to lagatee rahatee hai aur chalate chalate ki nahin ho jaatee hai sirph ka jo paalan tha vah bhee bahut meetha hota hai dhanyavaad

bolkar speaker
किन किन परिस्थितियों में मनुष्य की मति भ्रष्ट हो जाती है?Kin Kin Paristhitiyon Mein Manushya Ki Mati Bhrasht Ho Jati Hai
Deven  Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए Deven जी का जवाब
Valuepreneur Adventurer Life Explorer Dreamer
2:56
किन किन परिस्थितियों में मनुष्य की मध्य प्रदेश हो जाती है मति भ्रष्ट होने का मतलब यह होता है कि हम लोग अननेसेसरी ऐसी चीज करते कि जिसका नुकसान होता है खुद को भी और दूसरों को बोलते मति भ्रष्ट और ना आवे मति भ्रष्ट होने वाला जो इंसान होता है तो सोचे कि उसको सही में पता नहीं मैंने उसके माइंड के ऊपर उसका करो ही नहीं हो जो चीज कर रहा है उसको उसके कौन सी प्रिंसेस भी नहीं पता है और उस तरीके की मूर्खता में इंसान तब आता है जब वह अपने माइंड को जानता ही नहीं है कि माइंड तो आपका इसलिए बना हुआ है कि आपको तो वह असीम शक्ति दे सकता है आपको क्या से क्या नहीं बना सकता है महिला ने उन्हें यह चीज मेरे बातों पर बीजू कीजिए कि आपको इतनी इतनी शक्ति है कि आपको एक बहुत डिलीवरी आदमी बना सकता है बहुत सक्सेसफुल पर्सन बना सकता है बिजनेसमैन बना सकता है अच्छे स्टूडेंट बना सकता है कि नेता बना सकता है कुछ भी बना सकता है पूरा खेली वहीं का है और यह चीज बनाने के लिए उस माइंड को हमें बहुत अच्छी फिटिंग करनी होती है हेलो स्माइल को ऐसे ट्रेन किया जाता है क्योंकि ऑन ट्रेन और ट्रेन ऐसे दो ही टाइप के माइंड होते हैं और एंट्रेनमेंट क्या होता है कि जो हम जिंदगी में चल रहे हैं वह चल रहा है अब अब सीधी बातें की कोई इंसान ऐसा है कि जो अच्छे कंपनी के साथ रह रहा है अच्छी किताबें पढ़ रहा है उसको बचपन से बहुत अच्छी चीज दिखाई गई है उसकी स्कूलिंग अच्छी हुई है या फिर उसके आसपास उसके दोस्त अच्छे उसके मां-बाप ने उसको अच्छी चीजें बताइए या फिर उसने अपने आप तो खुद एक काम किया क्या अच्छाई क्या होती है और कैसे आगे बढ़ा जाता है कैसे इस असीम शक्तियों को पाया जाता है तो अब जाके माइंड खुलता है आपका और आप क्या चीजें करना चाहिए क्या नहीं करना चाहिए पता होता है लेकिन मति भ्रष्ट वाला इंसान जो होता है वह इन सब चीजों से तो नहीं जाता है अनफॉर्चूनेटली हमें हम जब एक ऐसी परिस्थिति में होते कि जहां पर मां-बाप पढ़े-लिखे नहीं आजूबाजू की व्यवस्था ठीक नहीं है कोई इस टाइप का आइडियल सीनियर भी नहीं कि जहां पर आपके ब्रेन को एक अच्छा न रीसमेंट मिल सके तो ऐसे केस में आप खुद के ऊपर भी काम अगर नहीं कर रहे हो अगर ऐसे कैसे तो सीधी बात आपको कुछ क्यों पर काम करना पड़ेगा कभी तो यह समझना पड़ेगा कि अच्छी चीज क्या होती है तो अगर वह भी नहीं कर रहे हो आप तब तो फिर ऐसा है कि कोई ऐसी चीज बताना वाली स्थिति जब मैं लाइफ में आ जाएगी तब आपकी मति भ्रष्ट हो जाएगा ना आप खुद को संभाल नहीं पाओगे रेप क्यों होते हैं मॉडल्स की होते हैं साइकोपैथ पीपल क्यों तैयार होते हैं लोग ऐसी हालत बेहूदा हरकतें क्यों करते क्योंकि माइंड के अंदर विदं नाम की चीज ही नहीं है इसके वजह से मनुष्य की मृत्यु हो जाती है और यह ने ऐसा भी नहीं है कि आप बहुत पढ़े लिखे हो तो यह नहीं होगा पढ़े लिखे होने के बाद भी होता है 20 दिन नाम की चीज नहीं होती
Kin kin paristhitiyon mein manushy kee madhy pradesh ho jaatee hai mati bhrasht hone ka matalab yah hota hai ki ham log ananesesaree aisee cheej karate ki jisaka nukasaan hota hai khud ko bhee aur doosaron ko bolate mati bhrasht aur na aave mati bhrasht hone vaala jo insaan hota hai to soche ki usako sahee mein pata nahin mainne usake maind ke oopar usaka karo hee nahin ho jo cheej kar raha hai usako usake kaun see prinses bhee nahin pata hai aur us tareeke kee moorkhata mein insaan tab aata hai jab vah apane maind ko jaanata hee nahin hai ki maind to aapaka isalie bana hua hai ki aapako to vah aseem shakti de sakata hai aapako kya se kya nahin bana sakata hai mahila ne unhen yah cheej mere baaton par beejoo keejie ki aapako itanee itanee shakti hai ki aapako ek bahut dileevaree aadamee bana sakata hai bahut saksesaphul parsan bana sakata hai bijanesamain bana sakata hai achchhe stoodent bana sakata hai ki neta bana sakata hai kuchh bhee bana sakata hai poora khelee vaheen ka hai aur yah cheej banaane ke lie us maind ko hamen bahut achchhee phiting karanee hotee hai helo smail ko aise tren kiya jaata hai kyonki on tren aur tren aise do hee taip ke maind hote hain aur entrenament kya hota hai ki jo ham jindagee mein chal rahe hain vah chal raha hai ab ab seedhee baaten kee koee insaan aisa hai ki jo achchhe kampanee ke saath rah raha hai achchhee kitaaben padh raha hai usako bachapan se bahut achchhee cheej dikhaee gaee hai usakee skooling achchhee huee hai ya phir usake aasapaas usake dost achchhe usake maan-baap ne usako achchhee cheejen bataie ya phir usane apane aap to khud ek kaam kiya kya achchhaee kya hotee hai aur kaise aage badha jaata hai kaise is aseem shaktiyon ko paaya jaata hai to ab jaake maind khulata hai aapaka aur aap kya cheejen karana chaahie kya nahin karana chaahie pata hota hai lekin mati bhrasht vaala insaan jo hota hai vah in sab cheejon se to nahin jaata hai anaphorchoonetalee hamen ham jab ek aisee paristhiti mein hote ki jahaan par maan-baap padhe-likhe nahin aajoobaajoo kee vyavastha theek nahin hai koee is taip ka aaidiyal seeniyar bhee nahin ki jahaan par aapake bren ko ek achchha na reesament mil sake to aise kes mein aap khud ke oopar bhee kaam agar nahin kar rahe ho agar aise kaise to seedhee baat aapako kuchh kyon par kaam karana padega kabhee to yah samajhana padega ki achchhee cheej kya hotee hai to agar vah bhee nahin kar rahe ho aap tab to phir aisa hai ki koee aisee cheej bataana vaalee sthiti jab main laiph mein aa jaegee tab aapakee mati bhrasht ho jaega na aap khud ko sambhaal nahin paoge rep kyon hote hain modals kee hote hain saikopaith peepal kyon taiyaar hote hain log aisee haalat behooda harakaten kyon karate kyonki maind ke andar vidan naam kee cheej hee nahin hai isake vajah se manushy kee mrtyu ho jaatee hai aur yah ne aisa bhee nahin hai ki aap bahut padhe likhe ho to yah nahin hoga padhe likhe hone ke baad bhee hota hai 20 din naam kee cheej nahin hotee

bolkar speaker
किन किन परिस्थितियों में मनुष्य की मति भ्रष्ट हो जाती है?Kin Kin Paristhitiyon Mein Manushya Ki Mati Bhrasht Ho Jati Hai
nav kishor aggarwal Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए nav जी का जवाब
Service
1:25
नमस्कार आपका सवाल है कि किन किन परिस्थितियों में मनुष्य की मति भ्रष्ट हो जाती है अच्छा सवाल है दोस्त आपका लेकर काफी सारी परिस्थितियां ऐसी होगी जिससे मनुष्य अपना मानसिक संतुलन खो देता है उसका दिमाग काम करना बंद कर देता है और उसे घमंड हो जाता है तो वह परिस्थितियों होते हैं कि कभी भी किसी इंसान के पास जरूरत से ज्यादा और वक्त से पहले पैसा आ जाना या उसे कोई ऐसी पोस्ट मिल जाती है जिससे कि वह जिसका वह हकदार ही नहीं है जिसके वह योग्य नहीं है लेकिन फिर भी उसे वह पद प्राप्त हो जाता है या फिर उसका समाज में नाम हो जाता है उसके संगठन के बदले लग जाते हैं तो यह सब परिस्थितियां ऐसी होती है जो इंसान के अंदर घमंड पैदा कर देती और इंसान भाव खाने लग जाता है घमंडी हो जाता है और वह दूसरों को अपने से नीचा दिखने लग जाता है वह हर इंसान की बेज्जती करने लग जाता था वह छोटा उसे बड़ा हो फिर भी उसे घमंड के मारे और कुछ सूझता नहीं है तो यह सब चीजें होती हैं जो इंसान की मति भ्रष्ट कर देती है और मैं समझता हूं कि इंसान को इन परिस्थितियों में भी अपनों पर काबू रखना चाहिए यह तो सब किस्मत की बात होती कि पैसा मिल जाए पद मिल जाए सामाजिक प्रतिष्ठा मिल जाए यह सब कर्मों के फल है और अगर मिल भी जाते हैं किस्मत से तो कभी भी घमंड नहीं करना चाहिए हमेशा छोटे बड़े को एक बराबर से मिलने पर सबकी इज्जत फर्नीचर सबसे प्यार से व्यवहार करना चाहिए धन्यवाद
Namaskaar aapaka savaal hai ki kin kin paristhitiyon mein manushy kee mati bhrasht ho jaatee hai achchha savaal hai dost aapaka lekar kaaphee saaree paristhitiyaan aisee hogee jisase manushy apana maanasik santulan kho deta hai usaka dimaag kaam karana band kar deta hai aur use ghamand ho jaata hai to vah paristhitiyon hote hain ki kabhee bhee kisee insaan ke paas jaroorat se jyaada aur vakt se pahale paisa aa jaana ya use koee aisee post mil jaatee hai jisase ki vah jisaka vah hakadaar hee nahin hai jisake vah yogy nahin hai lekin phir bhee use vah pad praapt ho jaata hai ya phir usaka samaaj mein naam ho jaata hai usake sangathan ke badale lag jaate hain to yah sab paristhitiyaan aisee hotee hai jo insaan ke andar ghamand paida kar detee aur insaan bhaav khaane lag jaata hai ghamandee ho jaata hai aur vah doosaron ko apane se neecha dikhane lag jaata hai vah har insaan kee bejjatee karane lag jaata tha vah chhota use bada ho phir bhee use ghamand ke maare aur kuchh soojhata nahin hai to yah sab cheejen hotee hain jo insaan kee mati bhrasht kar detee hai aur main samajhata hoon ki insaan ko in paristhitiyon mein bhee apanon par kaaboo rakhana chaahie yah to sab kismat kee baat hotee ki paisa mil jae pad mil jae saamaajik pratishtha mil jae yah sab karmon ke phal hai aur agar mil bhee jaate hain kismat se to kabhee bhee ghamand nahin karana chaahie hamesha chhote bade ko ek baraabar se milane par sabakee ijjat pharneechar sabase pyaar se vyavahaar karana chaahie dhanyavaad

bolkar speaker
किन किन परिस्थितियों में मनुष्य की मति भ्रष्ट हो जाती है?Kin Kin Paristhitiyon Mein Manushya Ki Mati Bhrasht Ho Jati Hai
munendra singh tomar Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए munendra जी का जवाब
Student
2:01
आपका सवाल है कि किन किन परिस्थितियों में मनुष्य कीमत भ्रष्ट हो जाती है हमारा मानना है कि मनुष्य की जो मौत होती है जो भ्रष्ट तभी होती है तो वह अपनी एक एकाग्रता होती है वह भंग करते और मनुष्य अगर अच्छे समाज में बैठक करें और अच्छे लोगों से मिले अच्छे लोगों से अच्छी शिक्षा दें तो उसकी मत कभी भ्रष्ट नहीं हो सकती अगर सामने वाला उसका सम्मान ना करें तो उसकी मृत्यु होते भ्रष्ट हो सकती घर में जाए घर में कई लड़ाई लड़ाई उसे विवाद हो और कई बातों से ऐसी बातें मन जाति को मनुष्य का जो जो मत होते वह भ्रष्ट हो जाती है घर में जाए अच्छे संस्कार दें जो उसके माता-पिता अच्छी शिक्षा दें और उनके बच्चे हैं पापा पापा कहते हैं अच्छा बोले पिता पिता की बात कर रहा हूं मैं जो उनके बच्चे हैं अच्छा करके बोले और अच्छी अगर समाज में बैठे तुम मनुष्य की जो मत है वह बातें भ्रष्ट नहीं हो सकती तो हमारा मानना है कि अगर अच्छे संस्कार और अच्छी शिक्षा होगी तो मनुष्य कीमत कभी भ्रष्ट नहीं होगी और अगर उसके संस्कार उसके गुण अवगुण हो गए तो उसके मत हर वक्त और हर समय भ्रष्ट रहेगी अच्छे लोगों के साथ वह बिहेवियर नहीं करेगा और जो दूसरे लोग हैं विपक्षी लोग हैं वह भी उसके साथ अच्छा व्यवहार नहीं करेंगे हमारा मानना है कि व्यवहार नहीं करेंगे और उसकी जो मत है भ्रष्ट हो जाती है और बहुत बहुत सही और ऐसे ऐसे घर की तो परिस्थितियां होती वह पता नहीं कब आपातकालीन में बदलने आए और पता नहीं कब कोई ना कोई घटना घटित हो जाए जिससे आदमी के जो मत है वो हमारी भ्रष्ट हो सकती है
Aapaka savaal hai ki kin kin paristhitiyon mein manushy keemat bhrasht ho jaatee hai hamaara maanana hai ki manushy kee jo maut hotee hai jo bhrasht tabhee hotee hai to vah apanee ek ekaagrata hotee hai vah bhang karate aur manushy agar achchhe samaaj mein baithak karen aur achchhe logon se mile achchhe logon se achchhee shiksha den to usakee mat kabhee bhrasht nahin ho sakatee agar saamane vaala usaka sammaan na karen to usakee mrtyu hote bhrasht ho sakatee ghar mein jae ghar mein kaee ladaee ladaee use vivaad ho aur kaee baaton se aisee baaten man jaati ko manushy ka jo jo mat hote vah bhrasht ho jaatee hai ghar mein jae achchhe sanskaar den jo usake maata-pita achchhee shiksha den aur unake bachche hain paapa paapa kahate hain achchha bole pita pita kee baat kar raha hoon main jo unake bachche hain achchha karake bole aur achchhee agar samaaj mein baithe tum manushy kee jo mat hai vah baaten bhrasht nahin ho sakatee to hamaara maanana hai ki agar achchhe sanskaar aur achchhee shiksha hogee to manushy keemat kabhee bhrasht nahin hogee aur agar usake sanskaar usake gun avagun ho gae to usake mat har vakt aur har samay bhrasht rahegee achchhe logon ke saath vah biheviyar nahin karega aur jo doosare log hain vipakshee log hain vah bhee usake saath achchha vyavahaar nahin karenge hamaara maanana hai ki vyavahaar nahin karenge aur usakee jo mat hai bhrasht ho jaatee hai aur bahut bahut sahee aur aise aise ghar kee to paristhitiyaan hotee vah pata nahin kab aapaatakaaleen mein badalane aae aur pata nahin kab koee na koee ghatana ghatit ho jae jisase aadamee ke jo mat hai vo hamaaree bhrasht ho sakatee hai

bolkar speaker
किन किन परिस्थितियों में मनुष्य की मति भ्रष्ट हो जाती है?Kin Kin Paristhitiyon Mein Manushya Ki Mati Bhrasht Ho Jati Hai
Rahul chaudhary Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए Rahul जी का जवाब
Unknown
1:03
का सवाल है कि किन किन परिस्थितियों में मनुष्य की मति भ्रष्ट हो जाती है कि मनुष्य की मति भ्रष्ट होने के कई कारण हो सकते हैं जिनके मैं कुछ आपको प्रैक्टिकल जो लगभग सभी लोगों पर अप्लाई होते हैं उनके बारे में बता देता हूं पहला कारण है कि आप अत्यधिक गुस्से में उस समय आपको कोई डिसीजन नहीं लेना चाहिए दूसरा यह जवाब बहुत खुश हूं तो ऐसा डिसीजन भी नहीं लेना चाहिए जिसे आप पूरा करने में बाद में आपको बहुत तकलीफ हो कई बार परिस्थितियां ऐसी बन जाती है कि मनुष्य को यह नहीं पता चलने यह नहीं पता चल पाता कि अब उसे किस राह जाना चाहिए तो उस स्थिति में आपको शांति से बैठ कर सोच विचार करना चाहिए कि कौन सी स्थिति की तरफ जान मेरे लिए फायदेमंद हो सकता है तो यह दो मुख्य बातें हैं एक तो आप यदि अत्यधिक गुस्से में हो तो कोई फैसला ना ले यदि खुशी में हूं तो भी कोई फैसला ना लें धन्यवाद
Ka savaal hai ki kin kin paristhitiyon mein manushy kee mati bhrasht ho jaatee hai ki manushy kee mati bhrasht hone ke kaee kaaran ho sakate hain jinake main kuchh aapako praiktikal jo lagabhag sabhee logon par aplaee hote hain unake baare mein bata deta hoon pahala kaaran hai ki aap atyadhik gusse mein us samay aapako koee diseejan nahin lena chaahie doosara yah javaab bahut khush hoon to aisa diseejan bhee nahin lena chaahie jise aap poora karane mein baad mein aapako bahut takaleeph ho kaee baar paristhitiyaan aisee ban jaatee hai ki manushy ko yah nahin pata chalane yah nahin pata chal paata ki ab use kis raah jaana chaahie to us sthiti mein aapako shaanti se baith kar soch vichaar karana chaahie ki kaun see sthiti kee taraph jaan mere lie phaayademand ho sakata hai to yah do mukhy baaten hain ek to aap yadi atyadhik gusse mein ho to koee phaisala na le yadi khushee mein hoon to bhee koee phaisala na len dhanyavaad

bolkar speaker
किन किन परिस्थितियों में मनुष्य की मति भ्रष्ट हो जाती है?Kin Kin Paristhitiyon Mein Manushya Ki Mati Bhrasht Ho Jati Hai
Shyam sundar Nai Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए Shyam जी का जवाब
नोकरी
0:20
किन किन परिस्थितियों में मनुष्य की मति भ्रष्ट हो जाती है विनाश काले विपरीत बुद्धि जब व्यक्ति का विनाश का समय आता है तब मनुष्य की मती होते हैं वह भ्रष्ट हो जाते हैं धन्यवाद

bolkar speaker
किन किन परिस्थितियों में मनुष्य की मति भ्रष्ट हो जाती है?Kin Kin Paristhitiyon Mein Manushya Ki Mati Bhrasht Ho Jati Hai
pawan pandit Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए pawan जी का जवाब
Unknown
0:15

bolkar speaker
किन किन परिस्थितियों में मनुष्य की मति भ्रष्ट हो जाती है?Kin Kin Paristhitiyon Mein Manushya Ki Mati Bhrasht Ho Jati Hai
Avdhesh Tiwari Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए Avdhesh जी का जवाब
Business
1:07
जी बहुत ही अच्छा प्रश्न पूछा है आपने कि मनुष्य की मती कब और किन परिस्थितियों में भ्रष्ट हो जाती है मैं आपको सबसे बड़ा रीजन बताता हूं इस बात का क्यों किया जीवन के अनुभव और आपके ऊपर गुजर भी परिस्थितियां आपको बहुत कुछ सिखा देती हैं अगर कोई व्यक्ति खाली है खाली है इन द सेंस कि वह कोई कार्य नहीं कर रहा है अगर आप घर पर हैं किस जॉब में नहीं है जेंट्स हैं लेकिन अपना समय अच्छे अच्छे कार्यों में नहीं लगा रहे हैं कुछ सीखने में नहीं लगा रहे तो यह मानी आपकी मति भ्रष्ट हो चुकी है बेहतर होगा कि अपने आप को अधिक से अधिक आप व्यस्त रखें जितना आप खुद को व्यस्त रखेंगे मैं समझता हूं आपका बुद्धि विकसित होगा भ्रष्ट होने जैसी कोई चीज मैं समझता नहीं की होती है लेकिन अगर आप समय को नष्ट करेंगे तो यह मानी है कि समय भी आप को नष्ट कर ही देगा भाई उम्मीद तो आप मेरा जवाब पसंद आया होगा पसंद आया है तो सब्सक्राइब करें थैंक यू सो मच

bolkar speaker
किन किन परिस्थितियों में मनुष्य की मति भ्रष्ट हो जाती है?Kin Kin Paristhitiyon Mein Manushya Ki Mati Bhrasht Ho Jati Hai
Ashvani Patel Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए Ashvani जी का जवाब
Student
1:24

bolkar speaker
किन किन परिस्थितियों में मनुष्य की मति भ्रष्ट हो जाती है?Kin Kin Paristhitiyon Mein Manushya Ki Mati Bhrasht Ho Jati Hai
Jeet Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए Jeet जी का जवाब
Unknown
1:27

अन्य लोकप्रिय सवाल जवाब

  • किन किन परिस्थितियों में मनुष्य की मति भ्रष्ट हो जाती है मनुष्य की मति किन परिस्थितियों में भ्रष्ट हो जाती है
URL copied to clipboard