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किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं?

Kisaanon Kee Krshi Kaanoonon Ko Sarakaar Se Vaapas Lene Kee Jid Ko Aap Kaise Samajhate Hain
Rakesh Kumar Yadav Bolkar App
Top Speaker,Level 77
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👨‍🏫 Teacher.
1:39
देखिए अगर हम में कृषि कानून की बात करें तो जब से देश आजाद हुआ है चाहे इसके पहले भी इस बात पर भी हमें गौर करना चाहिए कि क्या कृषि कानून नहीं था तो किसानों के हित में बात नहीं होती थी या किसानों को काम नहीं चलता था अगर मान लेते हैं कि यह किसान यह कानून नहीं चाहते हैं तो सरकार केस में क्या स्वार्थ है कि वह खुद इसे कानून को थोपना चाहती है दूसरी आपकी प्रार्थना है कि इसमें जो सरकार के जीत लेने वाली बात तो आप यह हम समझते हैं कि किसी संगठन को खड़ा करना कितना मुश्किल होता है सरकारी समय यह बात कह रही है कि एक या डेढ़ साल के लिए हम इस कानून को नहीं लगाएंगे या नहीं लागू करेंगे तो समाधान नहीं है क्योंकि अगर किसान इस समय अपने जीत से हट जाते हैं और वापस अपने घरों पाए जाते हैं अपने खेती बारी में लग जाते हैं और फिर सरकार जो है डेढ़ साल के बाद उस कानून को फिर लागू करती है तो उस समय फिर आंदोलन करना यह काफी मुश्किल काम होता है इसलिए किसान संगठन यह चाहते हैं कि जो भी चीजें है रफा दफा इस समय हो जाए क्योंकि उनका संगठन नहीं तुम्हें मजबूत है और सभी इस समय जो है अनशन पर या धरना प्रदर्शन स्थल पर हैं तो इसलिए मुझे लगता है कि किसान जो है यह सरकार से यह वापस लेने के लिए जिद पर अड़े हुए हैं क्योंकि वह चाहते हैं कि इस चीज को जड़ से खत्म किया जाए कि आने वाले दिनों में किसी तरह का परेशानी ना हो
Dekhie agar ham mein krshi kaanoon kee baat karen to jab se desh aajaad hua hai chaahe isake pahale bhee is baat par bhee hamen gaur karana chaahie ki kya krshi kaanoon nahin tha to kisaanon ke hit mein baat nahin hotee thee ya kisaanon ko kaam nahin chalata tha agar maan lete hain ki yah kisaan yah kaanoon nahin chaahate hain to sarakaar kes mein kya svaarth hai ki vah khud ise kaanoon ko thopana chaahatee hai doosaree aapakee praarthana hai ki isamen jo sarakaar ke jeet lene vaalee baat to aap yah ham samajhate hain ki kisee sangathan ko khada karana kitana mushkil hota hai sarakaaree samay yah baat kah rahee hai ki ek ya dedh saal ke lie ham is kaanoon ko nahin lagaenge ya nahin laagoo karenge to samaadhaan nahin hai kyonki agar kisaan is samay apane jeet se hat jaate hain aur vaapas apane gharon pae jaate hain apane khetee baaree mein lag jaate hain aur phir sarakaar jo hai dedh saal ke baad us kaanoon ko phir laagoo karatee hai to us samay phir aandolan karana yah kaaphee mushkil kaam hota hai isalie kisaan sangathan yah chaahate hain ki jo bhee cheejen hai rapha dapha is samay ho jae kyonki unaka sangathan nahin tumhen majaboot hai aur sabhee is samay jo hai anashan par ya dharana pradarshan sthal par hain to isalie mujhe lagata hai ki kisaan jo hai yah sarakaar se yah vaapas lene ke lie jid par ade hue hain kyonki vah chaahate hain ki is cheej ko jad se khatm kiya jae ki aane vaale dinon mein kisee tarah ka pareshaanee na ho

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किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं?Kisaanon Kee Krshi Kaanoonon Ko Sarakaar Se Vaapas Lene Kee Jid Ko Aap Kaise Samajhate Hain
Trilok Sain Bolkar App
Top Speaker,Level 33
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Motivational Speaker Public Speaker Life Coach Youtuber
0:52
प्रश्न है कि किसानों की कृषि कानून को सरकार ने वापस लेने की जिसको आप क्या समझते हैं देखिए किसान की परिभाषा क्या है वहां पर जितने भी किसान गए हुए हैं उनमें से 90% किसानों को किसान बिल के बारे में कोई जानकारी नहीं है सिर्फ किसान नेताओं की है जो अपने आप को किसानों के हितेषी कहते हैं अब क्या उनको भी कानून के बारे में पता है या नहीं है इसकी भी कोई सटीकता नहीं है इसलिए उन नेताओं को पहले तो समझना चाहिए कि किसी कानून है क्या फिर किसानों को वह समझाएं फिर इसका विरोध करें तो अलग बात है या रिसेट नेता है वह चाहते हैं किसानों के नेता की कानून वापस हूं लेकिन आम किसान को तो अभी तक समझ नहीं आया कि कृषि कानून से उसका फायदा क्या होगा और नुकसान क्या होगा शनिवार
Prashn hai ki kisaanon kee krshi kaanoon ko sarakaar ne vaapas lene kee jisako aap kya samajhate hain dekhie kisaan kee paribhaasha kya hai vahaan par jitane bhee kisaan gae hue hain unamen se 90% kisaanon ko kisaan bil ke baare mein koee jaanakaaree nahin hai sirph kisaan netaon kee hai jo apane aap ko kisaanon ke hiteshee kahate hain ab kya unako bhee kaanoon ke baare mein pata hai ya nahin hai isakee bhee koee sateekata nahin hai isalie un netaon ko pahale to samajhana chaahie ki kisee kaanoon hai kya phir kisaanon ko vah samajhaen phir isaka virodh karen to alag baat hai ya riset neta hai vah chaahate hain kisaanon ke neta kee kaanoon vaapas hoon lekin aam kisaan ko to abhee tak samajh nahin aaya ki krshi kaanoon se usaka phaayada kya hoga aur nukasaan kya hoga shanivaar

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किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं?Kisaanon Kee Krshi Kaanoonon Ko Sarakaar Se Vaapas Lene Kee Jid Ko Aap Kaise Samajhate Hain
Umesh Upaadyay Bolkar App
Top Speaker,Level 33
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Life Coach | Motivational Speaker
6:17
पुनीत जी सवाल पूछने के लिए धन्यवाद और सभी को नमस्ते वे आपके सभा ने किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की इज्जत को आप कैसे समझते हैं देखें थोड़ा इसको समझ लेते हैं बेकार पर और कोई भी अब बेल होता है जो वह संसद में पास होता है और पास कौन कहता है कि भाई हमारे जो मैंने चलोगे आज सांसद हैं और वह उसको बहुमत से पारित करते हैं बात करते हैं और वह पहले निचली सभा में जाते हैं लोकसभा में उसके बाद राज्यसभा में जाते हुए पारित होता है जब मैं कृषि बिल की बात करते हैं सुधारों की बात करते हैं तो यह बेल भी इसी तरह पास हुआ था हालांकि बात यह है कि यह कोविड-19 में हुआ था मैं तो इसको थोड़ी अफरा-तफरी में बात करा दिया गया था लेकिन फिर भी मैं तो लेटी थी और मैं पास हो गया था ओके यह बिल कोई ऐसी बात नहीं है कि बीजेपी यह पहली बार लेकर आ रही है यह फिर से पहले भी ऐसा आया हुआ है किताब से बीजेपी ने उसमें थी और मेजोरिटी में नहीं थी तो बीजेपी ने इसका विरोध किया था लेकिन अब ए डेफिनिटी वह है जो किसानों को लाभ देंगे और उसी के लिए इसको बनाया गया है अच्छा अब जब मंत्रियों ने इस को पास कर दिया और कुछ राज्यों में पढ़ना बिलग्राम दिल्ली की बात करें दिल्ली में तो इसकी इसको लेकर अभी भी भरी गई थी और शुरू भी हो गया था इस पर अमल करना वह बाद में जाकर क्या हुआ पता नहीं है लेकिन काम शुरु हो गया था यह सारा मामला शुरू हुआ है पंजाब से खबर किसान किसान जो आप देखेंगे जो आंदोलन में पिछले करीब करीब 2 महीने से ज्यादा से खड़े हैं डरते हैं हम देखेंगे पंजाब के हैं और थोड़े हरियाणा के हो सकते हैं तो मेजॉरिटी भाई इससे अच्छा और क्या उनको ऐसा प्रदर्शन करना चाहिए उनको ऐसा प्रोटेस्ट करना चाहिए जी देखे डेमो कैसी है तो वह डेफिनिटी अपनी बात रख सकते हैं अगर कायदे से रहते हैं तो कोई दिक्कत वाली बात नहीं है वह सरकार के साथ बात करना चाहते थे बात चल रही थी कई राउंड आफ डिस्कशन आइसिंग 9011 राउंड रजिस्ट्रेशन हो चुके थे और सरकार ने ठीक है हम इस बिल को इसी तरीके से जिस तरीके से हैं हम इसको अभी मान्य नहीं करते हैं हम इसको डेढ़ साल के लिए रोक देते हैं तुझे जो आखरी वार्तालाप थी किसानों के साथ 26 जनवरी से पहले हुई थी कि मैं यह सब बिल को हम अभी पारित नहीं करते परिजन उसे हम इसको इंप्लीमेंट नहीं करते हैं इस पर रोक लगाते थे तो यहां से तो ठीक से बात फिर भी किसानों ने जनों का रैली निकालना उचित समझा 26 जनवरी को उसके बाद जो उनको अप्रूवल मिले थे कि मैं आप यहां से यहां रैली निकाली है इस तरीके के से निकालिए इतने लोग हो सकते हैं इतनी ट्रैक्टर हो सकते हैं लेकिन उन लोगों ने उसका उल्लंघन किया उस जगह पर चले गए जहां पर उनको नहीं जाना था इतने लोग आ गए अपनी प्रेक्टिस आगे जितने की जरूरत नहीं थी उस तरह के काम की है उन्होंने जिस की आवश्यकता नहीं थी अब जब सरकार बोले कि आप यह जगह छोड़ दो खाली कर दो क्योंकि यह देखो हम उससे बिलकुल एक जैसा है उस तरीके से हम नहीं इंप्लीमेंट करेंगे डेढ़ साल के लिए तो कुछ नहीं होने वाला तो कायदे से देखा जाए तो किसानों को वापस चले जाना चाहिए लेकिन अगर बात खाली किसानों की होती तो शायद ऐसा हो जाता लेकिन लगता नहीं है कि बात खाली किसानों की है कई जगह से यह शोर से से इंफॉर्मेशन आ रही है यह आपको भी पता होगा कि इसमें आप खालिस्तानी ग्रुप या बाहर की फंडिंग और बहुत सारे लोग मिले हुए हैं जो किसी न किसी तरीके से चाहते हैं कि भाई भारत की छवि खराब हो और जो प्रेजेंट गवर्नमेंट है उसको अनस्टेबल कर दें यह अधिक तेजी से देखा जाए जो भी आप देखते हैं तो वह मोदी विरोधी होती है कोई सा भी देख लीजिए और बाद में पता लगता है तो और इनो हम सबको समझ आता है सही है ऐसा नहीं था ओके आज ही सारी बातें हैं और तू यह बेसिकली है कि देश में जो शांति बनी हुई थी या बन सकती है जो सरकार काम कर रही है जिस तरीके से चीजें आगे बढ़ रही है उसको किसी भी तरीके से चर्चा करके डगमगा देना हिला देना तोड़ देना ना काम कर देना यही सारी बातें हैं अब अगर किसान को आंदोलन भी करना है तो कायदे से कर रहे हैं बातचीत हो रही है तो उसमें कोई दिक्कत परेशानी नहीं है और अगर सरकार ने मान भी लिया कि चलो अब हम डेढ़ साल तक ऐसा नहीं करते तो किसानों को अपने घर चले जाना चाहिए वापस चलो छोड़ो बाद में देखा जाएगा जब भी एलिमेंट होती है तो और तब तक सरकार सोचेगी भी किए तो क्या किया जाए इसका प्रारूप बदला जाएगा क्या किया जाए हो सकता है वह किसान नेताओं को भी आम करें और इसको रिव्यू करें और दोबारा से इनोवा इसको आप आ पारित करने का आप की पेशकश करें ताकि किसी भी पार्टी को कोई नुकसान ना हो और तो अब ऐसे में अड़े रहना और यह सारे सारे काम करना यह बात सही नहीं है यह किसानों के लिए सही नहीं है देश के लिए सही नहीं है देश की संपत्ति के लिए शाइनिंग देश की छवि के लिए सही नहीं है 26 जनवरी को जो किया गया जो लाल किले पर हुआ वह भी सही नहीं था नहीं तो यह सारी बातें सही नहीं है अकेले खड़ा होना चाहिए लड़ना चाहिए बात करना चाहिए लेकिन इसका मतलब यह थोड़ी ना होता है कि आप जरूर कुछ भी कर ले आप मनमानी कर ले यह सब गलत है ना आप दंगा फसाद करने व पुरुष है वह भी तो इंपॉर्टेंट होता है और इसके पीछे की नियत और मंशा अगर साफ होती तो चीजें ऐसी नहीं होती लेकिन उसमें लग रहा है कि कहीं ना कहीं कोई ना कोई पार्टी आया कोई न कोई ग्रुप अपनी रोटियां सेकने में लगा हुआ है खाली किसान की बात होती तो शायद ऐसा मन से हमको देखने को नहीं मिलता तुमको देखने को मिला है और पूरे विश्व में हमारी छवि भी खराब हो रही है जो कि सही नहीं है
Puneet jee savaal poochhane ke lie dhanyavaad aur sabhee ko namaste ve aapake sabha ne kisaanon kee krshi kaanoonon ko sarakaar se vaapas lene kee ijjat ko aap kaise samajhate hain dekhen thoda isako samajh lete hain bekaar par aur koee bhee ab bel hota hai jo vah sansad mein paas hota hai aur paas kaun kahata hai ki bhaee hamaare jo mainne chaloge aaj saansad hain aur vah usako bahumat se paarit karate hain baat karate hain aur vah pahale nichalee sabha mein jaate hain lokasabha mein usake baad raajyasabha mein jaate hue paarit hota hai jab main krshi bil kee baat karate hain sudhaaron kee baat karate hain to yah bel bhee isee tarah paas hua tha haalaanki baat yah hai ki yah kovid-19 mein hua tha main to isako thodee aphara-tapharee mein baat kara diya gaya tha lekin phir bhee main to letee thee aur main paas ho gaya tha oke yah bil koee aisee baat nahin hai ki beejepee yah pahalee baar lekar aa rahee hai yah phir se pahale bhee aisa aaya hua hai kitaab se beejepee ne usamen thee aur 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khaalee kar do kyonki yah dekho ham usase bilakul ek jaisa hai us tareeke se ham nahin impleement karenge dedh saal ke lie to kuchh nahin hone vaala to kaayade se dekha jae to kisaanon ko vaapas chale jaana chaahie lekin agar baat khaalee kisaanon kee hotee to shaayad aisa ho jaata lekin lagata nahin hai ki baat khaalee kisaanon kee hai kaee jagah se yah shor se se imphormeshan aa rahee hai yah aapako bhee pata hoga ki isamen aap khaalistaanee grup ya baahar kee phanding aur bahut saare log mile hue hain jo kisee na kisee tareeke se chaahate hain ki bhaee bhaarat kee chhavi kharaab ho aur jo prejent gavarnament hai usako anastebal kar den yah adhik tejee se dekha jae jo bhee aap dekhate hain to vah modee virodhee hotee hai koee sa bhee dekh leejie aur baad mein pata lagata hai to aur ino ham sabako samajh aata hai sahee hai aisa nahin tha oke aaj hee saaree baaten hain aur too yah besikalee hai ki desh mein jo shaanti banee huee thee ya ban sakatee hai jo sarakaar kaam kar rahee hai 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किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं?Kisaanon Kee Krshi Kaanoonon Ko Sarakaar Se Vaapas Lene Kee Jid Ko Aap Kaise Samajhate Hain
pushpanjali patel Bolkar App
Top Speaker,Level 33
सुनिए pushpanjali जी का जवाब
Student with micro finance bank employee
1:45
वाले किसानों की कृषि कारण सरकार से वापस लेने के लिए से आप क्या समझते हैं नमस्कार रहते होंगे कुछ किसानों के सपोर्ट में होंगे लेकिन दोनों ही है लेकिन मैं किसानों के सपोर्ट में ज्यादा बोलना चाहिए क्योंकि आप खुश नहीं रहेंगे इनको दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा तो फिर यह बहुत ज्यादा प्रभाव पर ध्यान देने की आवश्यकता है और उनको उचित मूल्य मिले ताकि वह अच्छे से काम कर सके और किसान हमारे खुश रहें क्योंकि किसान और मुझे नहीं लगता कि वह मांग मांग कर रहे हैं और और अगर किसान ही अन्नदाता ही खुश नहीं रहेंगे और वहीं से दुखी रहेंगे और आंखों में आए दिन हो रहे थे और इतने किसानों की मौत भी हो गई तो इसके जिम्मेदार पर ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता है और इसको जल्दी से कैसे भी करके तो नहीं कह सकते लेकिन हम जल्दी से आओ कुछ बातें कर देनी चाहिए ताकि औरों को अगर आप भी चाहते हैं तो कुछ ना कुछ उन को अच्छी तरीके से समझा कि उनको समझ में आए और वह किसे कहते हैं सवाल का जवाब पसंद आएगा और आप लोग को चाहिए दूसरों को भी खुश रखे सामान को स्नेह के लिए बहुत-बहुत
Vaale kisaanon kee krshi kaaran sarakaar se vaapas lene ke lie se aap kya samajhate hain namaskaar rahate honge kuchh kisaanon ke saport mein honge lekin donon hee hai lekin main kisaanon ke saport mein jyaada bolana chaahie kyonki aap khush nahin rahenge inako dikkaton ka saamana karana padega to phir yah bahut jyaada prabhaav par dhyaan dene kee aavashyakata hai aur unako uchit mooly mile taaki vah achchhe se kaam kar sake aur kisaan hamaare khush rahen kyonki kisaan aur mujhe nahin lagata ki vah maang maang kar rahe hain aur aur agar kisaan hee annadaata hee khush nahin rahenge aur vaheen se dukhee rahenge aur aankhon mein aae din ho rahe the aur itane kisaanon kee maut bhee ho gaee to isake jimmedaar par jyaada dhyaan dene kee aavashyakata hai aur isako jaldee se kaise bhee karake to nahin kah sakate lekin ham jaldee se aao kuchh baaten kar denee chaahie taaki auron ko agar aap bhee chaahate hain to kuchh na kuchh un ko achchhee tareeke se samajha ki unako samajh mein aae aur vah kise kahate hain savaal ka javaab pasand aaega aur aap log ko chaahie doosaron ko bhee khush rakhe saamaan ko sneh ke lie bahut-bahut

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किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं?Kisaanon Kee Krshi Kaanoonon Ko Sarakaar Se Vaapas Lene Kee Jid Ko Aap Kaise Samajhate Hain
vikas Singh Rajput Bolkar App
Top Speaker,Level 44
सुनिए vikas जी का जवाब
Unknown
6:55
आपका सवाल है किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जीत को आप कैसे समझते हैं देखें मैं आपको बता देना चाहता हूं यह जो आंदोलनकारी आंदोलन कर रहे हैं इनमें बहुत कम संख्या में किसान मौजूद हैं अगर आंदोलनकारियों का आंकड़ा उठा कर देखेंगे तो सिर्फ पूरे भारत से मात्र 6 फ़ीसदी लोग ही आंदोलन कर रहे हैं 6 फ़ीसदी में भी शायद 12 परसेंट की शान है यानी आप समझ गए होंगे कि यह आंदोलन कांग्रेस पार्टी का है सपा बसपा आम आदमी पार्टी का है विपत्ति पॉलिटिकल पार्टियों का है तीनों कृषि कानून के माध्यम से किसानों को पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त हुई है अपना अनाज अपनी इच्छा से कहीं भी किसी को भी कितने भी दाम में बेच सकते हैं अब आंदोलनकारी यह कह रहे हैं कि मंडी खत्म हो रही है भाई साहब मंडी खत्म नहीं हो रही है अगर किसानों की इच्छा है कि अब मंडी में ही बेचेंगे तो आप मंडी में बेचे अगर कोई व्यापारी आया वह कह रहा है कि मंडी में 18:30 ₹100 क्विंटल दाम है मैं आपको साढे ₹19 क्विंटल एडवांस पेमेंट दूंगा आप अनाज किसको दोगे मंडी में दोगे या बिजनेसमैन को दोगे बिजनेसमैन को दोगे कि नहीं जहां हमें अधिक दाम मिलेगा वहां पर हम अनाज देंगे यह जो आंदोलन है के टुकड़े गैंग का आंदोलन का आंदोलन है शाहीन बाग वालों का आंदोलन है पंछियों का आंदोलन है कांग्रेस विचारधारा वाले लोगों का आंदोलन है मैं भी एक किसान का बेटा हूं उत्तर प्रदेश से बिलॉन्ग करता हूं मुझे पता है 2014 के पहले क्या स्थिति थी जो बिचौलिया होते थे वह किसानों का अनाज लेकर और सरकारी रेट में बेच देते थे और किसानों को तो पता ही नहीं था दूसरे राज्यों के किसानों को पता ही नहीं था कि मंडी भी होती है मंडी में भी हम अनाज भेज सकते हैं लेकिन जब से भाजपा की सरकार बनी है सभी राज्यों के लोग मंडी में अनाज बेचने यह बहुत बड़ी बात है पंजाब और हरियाणा के किसान बहुत पहले से मंडियों में अनाज देते आ रहे हैं और इस बार और ज्यादा संख्या में उन्होंने अनाज बेचा मंडियों में किसानों को दिक्कत नहीं है इन राज्यों के बिचौलियों को दिक्कत है पहले बिचौलिया क्या करते थे दूसरे राज्यों से सस्ते दाम पर अनाज खरीदे थे और अपने राज्य यानी पंजाब हरियाणा में मंडियों में मांगे दाम पर बेच देते थे अब क्या है इस तीस तीनो कृषि कानून के माध्यम से किसान अपना अनाज मंडियों में भी बैठता है और उससे अधिक मूल्य पर भी भेज सकता है अब पंजाब और हरियाणा के बिचौलियों बिचौलियों की जो दुकान है वह बंद हो जाएगी बस वही लोग आंदोलन कर रहे हैं तीनों कृषि कानून वापस नहीं होगा क्योंकि तीनों कृषि कानून के माध्यम से देश के किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने जा रही है उनको उनका अधिकार मिलने जा रहा है वह अपने फसल का भाव खुद से टाइप करेंगे और यही चीज डॉ राजीव दीक्षित साहब बोलते थे भारतीय जनता पार्टी ने डॉ राजीव दीक्षित साहब के सपने को पूरा किया है किसानों के सपने को पूरा किया है भारत के सपने को पूरा किया है आंदोलनकारी कितना दिन आंदोलन कर लेंगे आंदोलन ज्यादा दिन तक नहीं कर पाएंगे आंदोलनकारियों ने तिरंगे का अपमान किया है भारतीय संविधान के खिलाफ जाकर इन लोगों ने गलत गतिविधि को अंजाम दिया है लेकिन मैं गारंटी के साथ बोल सकता हूं वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है जो भी गलत किया है जिसने भी तिरंगे का मान किया है जितने भी महिला पुलिस को घेर कर मारा है जिसने भी पत्थरबाजी की है जो बचेगा नहीं कारावास के अंदर होगा और कारावास के अंदर होना चाहिए भारतवासियों 2020 का समय कोरोनावायरस काउंट में निकल गया 2021 चालू हुआ उसके पहले से इन लोगों ने आंदोलन शुरू कर दिया अभी उत्तराखंड में कल एक प्राकृतिक आपदाएं उससे न जाने कितना नुकसान हो गया है अगर यह आंदोलनकारी भारत से प्रेम करते भारतीय सच में होते तो यह कभी आंदोलन करते ही नहीं क्योंकि देश पहले इतना परेशानियों का सामना कर चुका है अभी भी परेशानियों का सामना करता है यह लोग आंदोलन कर रहे हैं आंदोलन करके चक्का जाम कर रहे हैं वो गरीबों का नुकसान होता है 50 क्विंटल अनाज बेचने वाला किसान है उसका सुबह से शाम तक का टाइम अपने घर के रोटी रोटी की व्यवस्था करने में भी जाता है उसके पास इतना समय नहीं आंदोलन करने का और जो रिक्शा चालक है जो गरीब लोग हैं इस आंदोलन से बहुत प्रभावित हुए हैं बड़ा नुकसान हुआ है उनका तो इसलिए राकेश टिकैत जी से बोलना चाहता हूं इस आंदोलन को खत्म करिए यह क्रिस्टी कानून किसानों के हित में है
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bolkar speaker
किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं?Kisaanon Kee Krshi Kaanoonon Ko Sarakaar Se Vaapas Lene Kee Jid Ko Aap Kaise Samajhate Hain
RAJIV KUMAR YADAV Bolkar App
Top Speaker,Level 11
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Student
1:47
आपने हमसे पूछा है कि किसानों की कृषि कानून को सरकार वापस लेने की विधि से आप क्या समझते हैं तो यह कृषि कानून जो सरकार के द्वारा बनाए गए हैं तीन विरुपाक्ष किए गए हैं जिसमें से युवा बिंदु किसानों के हित में नहीं है और तो सरकार को यह मानना चाहिए कि जो किसान के हित में जो बिल नहीं हो तो उस दिन वह हम नहीं ला सकते हैं ऐसे बिल को सरकार को तुरंत वापस लेना चाहिए जिसके लिए किसान में इतने दिनों से रहकर जो अपना आंदोलन कर रहे हैं कितने किसान अपनी जान गवां चुके हैं तो सरकार को सख्त समझने की जरूरत होती है कि उन्हें ये हमको वापस लेना चाहिए क्योंकि यदि हम किसानों के हित में जो कानून नहीं है वह वापस करते हैं तो जहां तक हो इसमें किसान की बहुत परेशानियां होती है किसान को परेशानियों को समझते हुए सरकार से यह हम जरूर इतना कह सकते हैं कि सरकार 1992 विचार कर वापस जरूर लेना चाहिए यदि उसमें लगेगी सर कानून जो किसी की हित में हो तो तो नहीं मान सकते लेकिन यदि कानून किसानों के हित में नहीं तो उसे सरकार को यह फर्ज है कि सरकार को वापस लेने हम किसान की जिद नहीं समझते हैं क्योंकि सरकार को बात माननी चाहिए थी कि किसान इतने दिन से आंदोलन कर रहे हैं तो काम को हम वापस क्यों नहीं ले रहे हैं इस पर विचार तो करना जरूरी है
Aapane hamase poochha hai ki kisaanon kee krshi kaanoon ko sarakaar vaapas lene kee vidhi se aap kya samajhate hain to yah krshi kaanoon jo sarakaar ke dvaara banae gae hain teen virupaaksh kie gae hain jisamen se yuva bindu kisaanon ke hit mein nahin hai aur to sarakaar ko yah maanana chaahie ki jo kisaan ke hit mein jo bil nahin ho to us din vah ham nahin la sakate hain aise bil ko sarakaar ko turant vaapas lena chaahie jisake lie kisaan mein itane dinon se rahakar jo apana aandolan kar rahe hain kitane kisaan apanee jaan gavaan chuke hain to sarakaar ko sakht samajhane kee jaroorat hotee hai ki unhen ye hamako vaapas lena chaahie kyonki yadi ham kisaanon ke hit mein jo kaanoon nahin hai vah vaapas karate hain to jahaan tak ho isamen kisaan kee bahut pareshaaniyaan hotee hai kisaan ko pareshaaniyon ko samajhate hue sarakaar se yah ham jaroor itana kah sakate hain ki sarakaar 1992 vichaar kar vaapas jaroor lena chaahie yadi usamen lagegee sar kaanoon jo kisee kee hit mein ho to to nahin maan sakate lekin yadi kaanoon kisaanon ke hit mein nahin to use sarakaar ko yah pharj hai ki sarakaar ko vaapas lene ham kisaan kee jid nahin samajhate hain kyonki sarakaar ko baat maananee chaahie thee ki kisaan itane din se aandolan kar rahe hain to kaam ko ham vaapas kyon nahin le rahe hain is par vichaar to karana jarooree hai

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किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं?Kisaanon Kee Krshi Kaanoonon Ko Sarakaar Se Vaapas Lene Kee Jid Ko Aap Kaise Samajhate Hain
Vicky Kumar Bolkar App
Top Speaker,Level 11
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अभी हम पढ़ाई करते हैं
0:51
नमस्कार मैं विकी बोल रहा हूं मैं बताना चाहूंगा कि जो किसानों का कानून है जिनको हम तो नुकसान भी समझ सकते क्योंकि यदि गई कि सरकार इसको तो भाग को नुकसान हो सकता है बहुत और अनार पर नाम भी हो सकता है यदि उसको इज्जत है उसका पूरे दुनिया में नाम है उन नीचे हो सकता है तो यही अच्छा होगा कि कहते हैं उनको जिनसे यह हो सकता है कि दोनों कुछ कुछ अलग ब्लॉक कर के कानून को पारित कर दो और कुछ जो कानून अच्छी नहीं उसको हटा दिया जो उसमें अच्छा है उसको लागू करके रखें
Namaskaar main vikee bol raha hoon main bataana chaahoonga ki jo kisaanon ka kaanoon hai jinako ham to nukasaan bhee samajh sakate kyonki yadi gaee ki sarakaar isako to bhaag ko nukasaan ho sakata hai bahut aur anaar par naam bhee ho sakata hai yadi usako ijjat hai usaka poore duniya mein naam hai un neeche ho sakata hai to yahee achchha hoga ki kahate hain unako jinase yah ho sakata hai ki donon kuchh kuchh alag blok kar ke kaanoon ko paarit kar do aur kuchh jo kaanoon achchhee nahin usako hata diya jo usamen achchha hai usako laagoo karake rakhen

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किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं?Kisaanon Kee Krshi Kaanoonon Ko Sarakaar Se Vaapas Lene Kee Jid Ko Aap Kaise Samajhate Hain
Sreenivas Tutorials Bolkar App
Top Speaker,Level 11
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Self employed, Computer teacher
2:11
रानी के बाद से किसानों की हालत में कोई खास सुधार नहीं हुआ है कई किसान अपनी खेती बाड़ी को छोड़कर बेसहारों की तरफ पलायन कर चुके हैं जब भी चुनाव का माहौल आता है तो यह दावा करता है कि वह या तो किसानों को कर्ज मुहैया करवाया गया उनकी कर्जमाफी करवाएगा तो यह हर साल हमें देखने को मिलता है अब पिछले कई दिनों से जो किसान आंदोलन चल रहा है वह किसान कानूनों के विरोध में शुरुआत में तो ऐसा लग रहा था कि यह किसान के पक्ष में हो रहे हैं किसानों द्वारा किया जा रहा है लेकिन 26 जनवरी को जिस तरीके से हिंसा का प्रदर्शन हुआ उसे यह गाना जो है पूरी तरह से मिट गई कीजिए किसानों के लिए किसानों द्वारा किया जाना माना आंदोलन है जिस तरीके से हिंसा का प्रदर्शन होना ने किया एक आम नागरिकों के प्रति पुलिसकर्मी या फिर हमारे राष्ट्रीय संपत्ति को नुकसान पहुंचाना यह काम किसान नहीं कर सकते और इससे पहले भी कई बार जो मौजूदा सरकार की जो नियम और कानून है नए कानून ने उनका विरोध भी इसी तरीके से हुआ है ना तो हम समझते हैं कि यह जो कानून है किसी कानून की जीत वापस लेने की जिद में जिस तरीके से खड़े हुए हैं यह किसानों का आंदोलन ना होकर महज एक राजनीतिक स्टंट लगता है कि सरकार इन सभी कानूनों के ऊपर में बातचीत करने को तैयार है लोगों की परेशानी सुनने को तैयार है तो तब भी क्यों जिद पर अड़े हुए हैं अब जनता जहां तक है वह उनका साथ दे रही है पिछले कई महीनों से उनका मांस मुख्य जो सड़क है वह बंद पड़ी है लेकिन फिर भी में किसानों का साथ दे रहे हैं मुझे लगता है कि किसानों को शुरू से सोचना चाहिए कि उनकी आठ में कोई और है उन का गलत इस्तेमाल कर रहा है उनकी जो मांगे हैं उनको सही ढंग से प्रस्तुत किया जाना चाहिए और उनकी हालत बेहतर हो हम उनके लिए भगवान से प्रार्थना करेंगे धन्यवाद
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bolkar speaker
किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं?Kisaanon Kee Krshi Kaanoonon Ko Sarakaar Se Vaapas Lene Kee Jid Ko Aap Kaise Samajhate Hain
ravi Bolkar App
Top Speaker,Level 11
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Unknown
0:56
कृषि कानूनों पर किसानों का जो कहना है उसके हिसाब से कम से कम एक गारंटी चाहते हैं किसान जो कि कानून में बदलाव से ही संभव है तो कम से कम एमएसपी पर हो जाना चाहिए था किसानों के हित में तो बहुत ही बेहतर रहता और रही बात किसानों को लग रहा है कि हमारे जमीन का निजीकरण हो जाएगा तो हमारे हाथ से कुछ हमारे हाथ में कुछ बचेगा ही नहीं इस कारण वह जीत पर लगे हुए हैं सरकार ने 2 साल तक कानून को स्थगित तो किया है विश्लेषण करने के लिए इसलिए किसानों को भी थोड़ा सा समय देना चाहिए सरकार सरकार इस बारे में पूरा समर्थन करेगी और कानून में जरूर कुछ बदलाव करेगी इसलिए किसानों को अब जिद छोड़ देना चाहिए धन्यवाद
Krshi kaanoonon par kisaanon ka jo kahana hai usake hisaab se kam se kam ek gaarantee chaahate hain kisaan jo ki kaanoon mein badalaav se hee sambhav hai to kam se kam emesapee par ho jaana chaahie tha kisaanon ke hit mein to bahut hee behatar rahata aur rahee baat kisaanon ko lag raha hai ki hamaare jameen ka nijeekaran ho jaega to hamaare haath se kuchh hamaare haath mein kuchh bachega hee nahin is kaaran vah jeet par lage hue hain sarakaar ne 2 saal tak kaanoon ko sthagit to kiya hai vishleshan karane ke lie isalie kisaanon ko bhee thoda sa samay dena chaahie sarakaar sarakaar is baare mein poora samarthan karegee aur kaanoon mein jaroor kuchh badalaav karegee isalie kisaanon ko ab jid chhod dena chaahie dhanyavaad

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किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं?Kisaanon Kee Krshi Kaanoonon Ko Sarakaar Se Vaapas Lene Kee Jid Ko Aap Kaise Samajhate Hain
harshit kumar Bolkar App
Top Speaker,Level 11
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Unknown
2:58
देखें सबसे पहले तो अगर हम पॉलिटिकल एंगल से इसे देखें तो 2014 में जब मोदी गवर्नमेंट आई थी उसके बाद बाद से लेकर 6 साल तक उन्होंने कई सारे विवादित बिल को पास की हर दिल के बाद काफी प्रदर्शन हुआ लेकिन उन्होंने कभी भी बैक आउट नहीं किया आप जैसे सीए वाला देखो 370 वाला देखो हर्बल के बाद ऐसा हुआ था लेकिन यह जो है अब आप यह कह सकते हो कि कम से कम 5 लोगों में तो इन्होंने डेढ़ साल तक का अपने आखिर उन्होंने कहा कि ठीक है हम डेढ़ साल तक हम लोग को हम रख देते स्टैंड बाय पर पहला कारण तो यह हो गया है कि हां मोदी गवर्नमेंट के पास फुल मेजॉरिटी है और वह एरोगेंस है इस चीज पर वह डिस्कशन नहीं करना चाहती है वह खुद ही सब लोगों पास करती है दूसरी बात है कि गवर्नमेंट को पता है कि अगर मैं अगर गवर्नमेंट इस बिल को नहीं जाती है तो जो कृषि क्षेत्र है जो एग्रीकल्चर सेक्टर है वह बहुत ही लॉस में जाते रहेगा वह देश की इकोनॉमी को और भी दूं तू आ सकता है अब आप जैसे कि देखो गेहूं की जिम में बात की पंजाब में होता है कि गेहूं और वहां पर चावल होते हैं तो ठीक है उन्हें तो एमएसपी मिल जाता है क्योंकि सरकार उनसे सारे उपज को खरीद लेती है क्योंकि सरकार को बांटना होता है गरीबों में अब अपने सुनाओ का फूड सिक्योरिटी एक्ट के तहत गेंहू चावल फ्री में बैठना होता है तो सरकार पंजाब हरियाणा और मध्य प्रदेश जैसे स्टेट से खरीद लेती है बाकी स्टेट की बात करें जैसे कि बिहार बिहार में आप देखोगे तो एम एस पी पर बहुत ही कम फसल बिकता है क्योंकि गवर्नमेंट यहां पर प्रोक्योर्ड नहीं करती है जैसे कि मैं बात करता हूं मक्के की मक्के की एमएसपी जो है वह ₹24 है बट आप पूरे बिहार में घूम लो तो कहीं भी मक्का बारह सौ से 13 साल से ज्यादा नहीं बिकता है अब बात कर लो बाजरे की उसकी एमएसपी है ₹2000 इक्कीस सौ के आसपास लेकिन कहीं भी पूरे बिहार या फिर कहीं पर भी ज्ञान नहीं बिकता है यह फारवर्ड को बहुत ही ज्यादा लॉस कर रहा है अब इस फिल्म में जैसे कि है कि मैं फॉर एग्जांपल मक्के को ही लेता हूं इस बिल के तहत आप जो है दूसरे पर मेरे को अपना सामान भेज सकते हैं मक्के अभी जो मक्का है अपने देश में काफी होता है बिहार में खास करके लेकिन मक्के की जो खपत है अपने देश में वह कम है एस कंपेयर्ड टो अमेरिका एंड वेस्टर्न कंट्रीज अपने देश में मक्के की खपत होती है जिसे मुर्गा को मुर्गा होता है या फिर वह छोटे-छोटे जो होते हैं उनके लिए चारा बनता है उसमें काम आता है तो इसलिए इसका रेट बहुत कम होता है लेकिन इसका डिमांड मेडिकल जैसे देश में बहुत ज्यादा होता है जहां पर आपने सुना होगा कौन हो गए सब लोग बहुत खाते हैं तो आप ही बताओ इस बिल से क्या फायदा होगा कि नहीं होगा तो गवर्नमेंट कल से तो सही है अब और भी बात कर लो सिर्फ कहीं से होते हैं काम होते हैं कहीं कुछ भी होता है तो यह अभी गवर्नमेंट के प्रेशर में रहते हैं अब आप आप ही एक बात बताओ जो किसानों की इस जिद है कि सरकार एमएसपी पर खरीद ले अगर एमएसपी पर फसल ऐसे हैं इससे फसल है जिसके की एमएसपी सरकार तय करती है तो क्या सभी फसल को सरकार खरीद सकती है इतना पैसा है सरकार पर और
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किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं?Kisaanon Kee Krshi Kaanoonon Ko Sarakaar Se Vaapas Lene Kee Jid Ko Aap Kaise Samajhate Hain
Amit Singh Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए Amit जी का जवाब
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1:37
रितिका जी का अनुरोध सवाली किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की चीज को आप कैसे समझते हैं तो आपको बहुत-बहुत धन्यवाद रितिका जी कि आपने मुझे इस तरह का अनुदित और पूछा तो देखिए जहां तक मैं समझता हूं कि जो सरकारी सरकार ने किसानों की मांगें मनवाने के लिए समर्थन मूल्य गारंटी एमएसपीसी कमरे पर उनका नाचना खरीदा जाए तो यही कारण है कि किसानों को इसके लिए मुझे धरना प्रदर्शन कर रही लेकिन मेरे को यह बात बिल्कुल जमती नहीं है क्योंकि देखे किसान जो होता है किसान कोई राजनीति नहीं करते यानी क्यों किसी राजनीति मिले तो एक सीधा साधा इंसान हूं जो केवल अपनी कृषि संबंधित क्रियाओं से मतलब रखते हैं कि दुनिया के वालों को विशेषकर राजनीति तो मतलब ही नहीं रखता और विशेषकर आप देखते होंगे कि मतलब जो पंजाब के किसान मतलब आंदोलन करें बाकी भारत के किसी भी राज्य मतलब जो आंदोलन नहीं कर रहे हैं क्योंकि वहां पर जो मिले पंजाब में वहां पर कांग्रेस की सरकार में हो सकता है कि यह मालूम मोदी सरकार के खिलाफ कोई ना कोई साजिश रची जा रही हो चलो थोड़ी हम से कुछ मतलब नहीं है लेकिन मतलब पंजाबी किसानों को इस चीज से परेशानी हो रही बाकी मतलब पूरे भारत में एक से बढ़कर एक किसान ने उन्हें कोई परेशानी हो तो हमारी सबसे तेज नहीं शादी रची जा रही है तो तू मेरे को यह नहीं ठीक लगता है कि मुझे इस तरह से किसानों मतलब जो राजनीति कर रहे हैं तुम ही कर दो सवाल का जवाब अच्छा लगा होगा धन्यवाद
Ritika jee ka anurodh savaalee kisaanon kee krshi kaanoonon ko sarakaar se vaapas lene kee cheej ko aap kaise samajhate hain to aapako bahut-bahut dhanyavaad ritika jee ki aapane mujhe is tarah ka anudit aur poochha to dekhie jahaan tak main samajhata hoon ki jo sarakaaree sarakaar ne kisaanon kee maangen manavaane ke lie samarthan mooly gaarantee emesapeesee kamare par unaka naachana khareeda jae to yahee kaaran hai ki kisaanon ko isake lie mujhe dharana pradarshan kar rahee lekin mere ko yah baat bilkul jamatee nahin hai kyonki dekhe kisaan jo hota hai kisaan koee raajaneeti nahin karate yaanee kyon kisee raajaneeti mile to ek seedha saadha insaan hoon jo keval apanee krshi sambandhit kriyaon se matalab rakhate hain ki duniya ke vaalon ko visheshakar raajaneeti to matalab hee nahin rakhata aur visheshakar aap dekhate honge ki matalab jo panjaab ke kisaan matalab aandolan karen baakee bhaarat ke kisee bhee raajy matalab jo aandolan nahin kar rahe hain kyonki vahaan par jo mile panjaab mein vahaan par kaangres kee sarakaar mein ho sakata hai ki yah maaloom modee sarakaar ke khilaaph koee na koee saajish rachee ja rahee ho chalo thodee ham se kuchh matalab nahin hai lekin matalab panjaabee kisaanon ko is cheej se pareshaanee ho rahee baakee matalab poore bhaarat mein ek se badhakar ek kisaan ne unhen koee pareshaanee ho to hamaaree sabase tej nahin shaadee rachee ja rahee hai to too mere ko yah nahin theek lagata hai ki mujhe is tarah se kisaanon matalab jo raajaneeti kar rahe hain tum hee kar do savaal ka javaab achchha laga hoga dhanyavaad

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किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं?Kisaanon Kee Krshi Kaanoonon Ko Sarakaar Se Vaapas Lene Kee Jid Ko Aap Kaise Samajhate Hain
Rishabh Sengar Bolkar App
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2:23
यश्मिता ने प्रश्न पूछा है कि किसानों की कृषि का कानूनों को सरकार से वापस लेने की विधि को आप कैसे समझते हैं सफल सॉरी फॉर लेट रिप्लाई भेजना कि किसानों को कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिसको आप कैसे समझते थे कि किसानों के लिए हो सकता है उनके मन में भ्रम और चिंताएं हैं सरकार के प्रति उनका अविश्वास जो वह विश्वास ना करना चाहती हूं कि गवर्मेंट उनको एश्योंरेंस दे रही है आश्वासन दे रही है कि एमएसपी खत्म नहीं होगा या मंडी का प्राइवेटाइजेशन नहीं होगा या उसमें कोई भी जो कंट्रक्शन फार्मिंग रिलेटेड लोग हैं उससे किसानों का शोषण नहीं होगा इसमें बहुत सारी बातें हैं कमेंट अपनी तरीक तरफ से काफी चीजें क्लियर करने की कोशिश कर रही है बर्थडे कम्युनिकेशन और ट्रस्ट क्या आप दोनों के बीच में जो है वह कहीं ना कहीं परिलक्षित होता है और जो कुछ पिछले कुछ तीनों में हुआ वह सब उसका ही नतीजा था कि कि किसानों में कहीं ना कहीं आप विश्वास है इसीलिए मैं उनकी से जीत नहीं समझूंगा जीवन का अधिकार है कि वे विरोध कर सकें हां लेकिन वॉलपेपर और चुके हैं कि वे इन कानून काले कानूनों को वापस ही करवाएंगे तो मुझे लगता है इसमें गवर्मेंट और मर्ज के बीच में एक कंप्रिहेंसिव वाले डायलॉग होना बहुत जरूरी है लेकिन डायलॉग कुछ कनक्लूसिव निकले उसमें वह बहुत जरूरी है और मैसेजेस नहीं समझूंगा मैं इसे समझूंगा कि जब भी किसी की जीविका के ऊपर उसे खतरा मंडराता दिखता है तो स्वाभाविक है कि वह लोग आंदोलन करेंगे मैं किसानों को गलत नहीं ठहरा रहा हूं हां पर हो सकता है कि उनके अंदर कुछ भी मत हो या भ्रम वहीं कहां का लेखा कानूनों को लेकर जो कि किसान इसे काले कानून करेंगे और सरकार इसे ऐतिहासिक बता रही है देखना है कि जिसके की होती है लेकिन अंत में सदैव जीत सत्य की ही होती है सत्य विचलित जरूर हो सकता है किंतु पराजित नहीं आप देखते हैं सत्य किसके पक्ष में है सत्ता पक्ष में सत्य के साथ है यदि सांसद के साथ है इसका फैसला हम आप नहीं कर सकते इसलिए स्कूल जिद कहना मैं समझूंगा थोड़ी जल्दबाजी होगा बहुत-बहुत धन्यवाद
Yashmita ne prashn poochha hai ki kisaanon kee krshi ka kaanoonon ko sarakaar se vaapas lene kee vidhi ko aap kaise samajhate hain saphal soree phor let riplaee bhejana ki kisaanon ko krshi kaanoonon ko sarakaar se vaapas lene kee jisako aap kaise samajhate the ki kisaanon ke lie ho sakata hai unake man mein bhram aur chintaen hain sarakaar ke prati unaka avishvaas jo vah vishvaas na karana chaahatee hoon ki gavarment unako eshyonrens de rahee hai aashvaasan de rahee hai ki emesapee khatm nahin hoga ya mandee ka praivetaijeshan nahin hoga ya usamen koee bhee jo kantrakshan phaarming rileted log hain usase kisaanon ka shoshan nahin hoga isamen bahut saaree baaten hain kament apanee tareek taraph se kaaphee cheejen kliyar karane kee koshish kar rahee hai barthade kamyunikeshan aur trast kya aap donon ke beech mein jo hai vah kaheen na kaheen parilakshit hota hai aur jo kuchh pichhale kuchh teenon mein hua vah sab usaka hee nateeja tha ki ki kisaanon mein kaheen na kaheen aap vishvaas hai iseelie main unakee se jeet nahin samajhoonga jeevan ka adhikaar hai ki ve virodh kar saken haan lekin volapepar aur chuke hain ki ve in kaanoon kaale kaanoonon ko vaapas hee karavaenge to mujhe lagata hai isamen gavarment aur marj ke beech mein ek kamprihensiv vaale daayalog hona bahut jarooree hai lekin daayalog kuchh kanakloosiv nikale usamen vah bahut jarooree hai aur maisejes nahin samajhoonga main ise samajhoonga ki jab bhee kisee kee jeevika ke oopar use khatara mandaraata dikhata hai to svaabhaavik hai ki vah log aandolan karenge main kisaanon ko galat nahin thahara raha hoon haan par ho sakata hai ki unake andar kuchh bhee mat ho ya bhram vaheen kahaan ka lekha kaanoonon ko lekar jo ki kisaan ise kaale kaanoon karenge aur sarakaar ise aitihaasik bata rahee hai dekhana hai ki jisake kee hotee hai lekin ant mein sadaiv jeet saty kee hee hotee hai saty vichalit jaroor ho sakata hai kintu paraajit nahin aap dekhate hain saty kisake paksh mein hai satta paksh mein saty ke saath hai yadi saansad ke saath hai isaka phaisala ham aap nahin kar sakate isalie skool jid kahana main samajhoonga thodee jaldabaajee hoga bahut-bahut dhanyavaad

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किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं?Kisaanon Kee Krshi Kaanoonon Ko Sarakaar Se Vaapas Lene Kee Jid Ko Aap Kaise Samajhate Hain
BHASKAR TIWARI Bolkar App
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Student
2:57
नमस्कार जैसा कि प्लस में है किसानों के कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जीत हो आप क्या समझते हैं तो देखिए इसके दोपहर हुए हैं एक तो अगर हम किसानों के दृष्टिकोण से देखें तो वह उनके लिए नियम नहीं है उनके लिए अच्छा नहीं है और यदि हम सरकार के दृष्टिकोण से देखें तो हमारे देश के लिए या चाय हमारे किसानों के लिए अच्छा है लेकिन यह जो वास्तविकता है वह इस प्रकार से जैसे कि अगर तीनों कानून बनाया है कि सरकार ने जिसमें कि पहला है आवश्यक वस्तु भंडारण कांटेक्ट फार्मिंग दूसरा है और तीसरा जो है कृषि उत्पाद व्यापार और वाणिज्य ने किया पहला अधिनियम है उसमें यह है कि कोई भी चोलिया व्यापारी आया किसी भी आवश्यक वस्तु को वह जितनी मात्रा में इकट्ठा करना चाहा इकट्ठा कर लिया और जब और दाम उसके बड़े तू उसको बेचना शुरू किया तो इसमें ज्यादा समस्या उन किसान वर्ग के लोगों को ही होगा या फिर जो सामान्य वर्ग के लोग हैं उनको वह समय वह वस्तु पर चेंज करने में समस्या होगी जो कि बहुत ही काट ली मिलेगा उन लोगों को दूसरा हुआ कांटेक्ट फार्मिंग कांटेक्ट फार्मिंग में यह हुआ कि जैसे कोई बड़ी-बड़ी कंपनियां ही चाय बिस्किट कंपनी नया चिप्स कंपनी आया वह 24 10 गांवों को सेलेक्ट कर लिया और कहा कि आप इसमें गेहूं किया आलू की खेती करिए और हम इतने दाम पर इसको खरीद लेंगे आप से हम तो थोड़ा अच्छा है लेकिन इसमें जो राम का जो चाहे खरीदारी का जो गारंटी नहीं है मैं गारंटी इसलिए नहीं है कि अगर मान लीजिए कि यहां किसान खेती की है और उत्पादन हुआ वह कंपनी आया ही नहीं लेने के लिए तो इसकी भी गारंटी नहीं है और तीसरा हुआ कृषि उत्पाद व्यापार और वाणिज्य का मतलब यह हुआ कि अगर हम यूपी में है यूपी में किसी चीज का प्रोडक्शन कर रहे हैं तो हम ले जाकर के भारत के किसी भी कोने में हम भी सकते हैं पिया सही है यह तीसरा और दूसरा दोनों सही है लेकिन जो इसका पहला जो नियम है जो आवश्यक वस्तु का भंडारण वाला यह सही नहीं है इसलिए किसान इसका विरोध कर रहा है और कांटेक्ट फार्मिंग का विरोध इसलिए कर रहा है कि इसमें जो एमएसपी है और सरकार के द्वारा निर्धारित नहीं की जा रही है इसकी गारंटी नहीं मिल पा रही इसलिए किसान भी परेशान हैं और जो तीसरा है कृषि उत्पाद व्यापार और वाणिज्य इसमें या है कि जो किसान उत्पादित करके वह कहां लेकर जाएगा बेचने के लिए उसका तो खुद से यहां नहीं भेज पाते हैं मंडी बना है मंडी का कोई मतलब नहीं हो पाता है मंडी में लोग खरीदते ही नहीं है किसान की उत्पादों को तू क्या करें इसीलिए इन सभी चीजों को अपना देखते हुए इसका विरोध किया जा रहा है धन्यवाद
Namaskaar jaisa ki plas mein hai kisaanon ke krshi kaanoonon ko sarakaar se vaapas lene kee jeet ho aap kya samajhate hain to dekhie isake dopahar hue hain ek to agar ham kisaanon ke drshtikon se dekhen to vah unake lie niyam nahin hai unake lie achchha nahin hai aur yadi ham sarakaar ke drshtikon se dekhen to hamaare desh ke lie ya chaay hamaare kisaanon ke lie achchha hai lekin yah jo vaastavikata hai vah is prakaar se jaise ki agar teenon kaanoon banaaya hai ki sarakaar ne jisamen ki pahala hai aavashyak vastu bhandaaran kaantekt phaarming doosara hai aur teesara jo hai krshi utpaad vyaapaar aur vaanijy ne kiya pahala adhiniyam hai usamen yah hai ki koee bhee choliya vyaapaaree aaya kisee bhee aavashyak vastu ko vah jitanee maatra mein ikattha karana chaaha ikattha kar liya aur jab aur daam usake bade too usako bechana shuroo kiya to isamen jyaada samasya un kisaan varg ke logon ko hee hoga ya phir jo saamaany varg ke log hain unako vah samay vah vastu par chenj karane mein samasya hogee jo ki bahut hee kaat lee milega un logon ko doosara hua kaantekt phaarming kaantekt phaarming mein yah hua ki jaise koee badee-badee kampaniyaan hee chaay biskit kampanee naya chips kampanee aaya vah 24 10 gaanvon ko selekt kar liya aur kaha ki aap isamen gehoon kiya aaloo kee khetee karie aur ham itane daam par isako khareed lenge aap se ham to thoda achchha hai lekin isamen jo raam ka jo chaahe khareedaaree ka jo gaarantee nahin hai main gaarantee isalie nahin hai ki agar maan leejie ki yahaan kisaan khetee kee hai aur utpaadan hua vah kampanee aaya hee nahin lene ke lie to isakee bhee gaarantee nahin hai aur teesara hua krshi utpaad vyaapaar aur vaanijy ka matalab yah hua ki agar ham yoopee mein hai yoopee mein kisee cheej ka prodakshan kar rahe hain to ham le jaakar ke bhaarat ke kisee bhee kone mein ham bhee sakate hain piya sahee hai yah teesara aur doosara donon sahee hai lekin jo isaka pahala jo niyam hai jo aavashyak vastu ka bhandaaran vaala yah sahee nahin hai isalie kisaan isaka virodh kar raha hai aur kaantekt phaarming ka virodh isalie kar raha hai ki isamen jo emesapee hai aur sarakaar ke dvaara nirdhaarit nahin kee ja rahee hai isakee gaarantee nahin mil pa rahee isalie kisaan bhee pareshaan hain aur jo teesara hai krshi utpaad vyaapaar aur vaanijy isamen ya hai ki jo kisaan utpaadit karake vah kahaan lekar jaega bechane ke lie usaka to khud se yahaan nahin bhej paate hain mandee bana hai mandee ka koee matalab nahin ho paata hai mandee mein log khareedate hee nahin hai kisaan kee utpaadon ko too kya karen iseelie in sabhee cheejon ko apana dekhate hue isaka virodh kiya ja raha hai dhanyavaad

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किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं?Kisaanon Kee Krshi Kaanoonon Ko Sarakaar Se Vaapas Lene Kee Jid Ko Aap Kaise Samajhate Hain
G Dewasi Bolkar App
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Unknown
2:11
विकी नो डाउट जो किसानों की जिद है वह काफी सही भी है क्योंकि हर कोई सबसे पहले अपने बारे में सोचता है ठीक है ऐसे ही किसानों को लग रहा है कि एक बार अगर यह कृषि कानून है इसका लोग यूज़ करने लग गए इसके बाद क्या होगा कि यह किसान अगर दूसरे स्टेट में अपनी अनाज और फसल को बेचने जाएगा तो क्या होगा जो प्राइवेट कंपनीज होती है जो कॉरपोरेट वर्ल्ड होता है वह किसानों के बीच में काफी ज्यादा कंपटीशन क्रिएट कर सकता है अभी से होगा क्या कि जो अनाज की रेट होती है जो फर्स्ट फ्लोर की रेट रेट होती है काफी कम हो जाएगी और जो किसान है उन अच्छा रेट नहीं मिल पाएगा यह उन्हें सबसे बड़ा डाउट लगता है कि बात सही भी है क्योंकि लिखिए जो प्राइवेट कंपनीज होती है इनका काम क्या होता है यह प्राइस को कम करा देती है जो भी है उसको खरीदती है इसलिए कंपटीशन क्रिएट करती है हर किसी के बीच में और आज के समय देखिए हमारे देश में पॉपुलेशन भी काफी बढ़ चुकी है जिस वजह से हर फील्ड के अंदर कॉन्पिटिशन है इसलिए कॉन्पिटिशन भी फेस करना चाहिए यह गलत नहीं होता है और वही देखिए सरकार भी ना तो फिर कर रही है कि एक डेढ़ साल अगर यह कृषि कानून आपके लिए यूज़फुल नहीं होता है तब इस कानून को वापस ले लेंगे और मेरे हिसाब से लेकर किसानों को एक बार ट्राई करके देख लेना चाहिए क्योंकि क्या पता इससे किसानों को काफी ज्यादा प्रॉफिट हो जाए क्योंकि आपको पता है सरकार की एप्रोच किया इसके पीछे सरकार की इसके पीछे एप्रो चाहिए कि जो चाइना है जो चाइना पूरे वर्ल्ड में एग्रीकल्चर सबसे ज्यादा एक्सपोर्ट करता है उसे रिप्लेस करने की क्योंकि चाइना की जो चैन है इस बार कोरोनावायरस की वजह से ब्रेक हो चुकी है तू हमारी गवर्नमेंट चाहती है कि इंडिया के जो किसान है 1 तरीके से इंडिया में भी और इंडिया के बाहर भी एक्सपोर्ट कर पाए और काफी जो कम रेट में अगर एक्सपोर्ट कर पाएंगे तो इससे क्या होगा कि इंडिया की जो ज्यादा फसल है उसे लोग खरी देखें और इसे देखिए अगर किसानों से ज्यादा क्वांटिटी में कोई चीज ली जाएगी तो किसानों को भी फायदा होगा इसलिए देखिए सरकार की यह पुरुष है तो मुझे लगता है एक बार किसानों को ट्राई करके देखना चाहिए बाकी देखिए किसानों की जो जीत वह भी सही है क्योंकि उन्हें थोड़ा डर लग रहा है क्योंकि नया कानून है उन्हें पता नहीं है जिस वजह से देखी मेरा ओपिनियन है मैं भी आपको यह गलत भी लग सकता है तब कमेंट करके मुझे बताइएगा धन्यवाद
Vikee no daut jo kisaanon kee jid hai vah kaaphee sahee bhee hai kyonki har koee sabase pahale apane baare mein sochata hai theek hai aise hee kisaanon ko lag raha hai ki ek baar agar yah krshi kaanoon hai isaka log yooz karane lag gae isake baad kya hoga ki yah kisaan agar doosare stet mein apanee anaaj aur phasal ko bechane jaega to kya hoga jo praivet kampaneej hotee hai jo koraporet varld hota hai vah kisaanon ke beech mein kaaphee jyaada kampateeshan kriet kar sakata hai abhee se hoga kya ki jo anaaj kee ret hotee hai jo pharst phlor kee ret ret hotee hai kaaphee kam ho jaegee aur jo kisaan hai un achchha ret nahin mil paega yah unhen sabase bada daut lagata hai ki baat sahee bhee hai kyonki likhie jo praivet kampaneej hotee hai inaka kaam kya hota hai yah prais ko kam kara detee hai jo bhee hai usako khareedatee hai isalie kampateeshan kriet karatee hai har kisee ke beech mein aur aaj ke samay dekhie hamaare desh mein populeshan bhee kaaphee badh chukee hai jis vajah se har pheeld ke andar konpitishan hai isalie konpitishan bhee phes karana chaahie yah galat nahin hota hai aur vahee dekhie sarakaar bhee na to phir kar rahee hai ki ek dedh saal agar yah krshi kaanoon aapake lie yoozaphul nahin hota hai tab is kaanoon ko vaapas le lenge aur mere hisaab se lekar kisaanon ko ek baar traee karake dekh lena chaahie kyonki kya pata isase kisaanon ko kaaphee jyaada prophit ho jae kyonki aapako pata hai sarakaar kee eproch kiya isake peechhe sarakaar kee isake peechhe epro chaahie ki jo chaina hai jo chaina poore varld mein egreekalchar sabase jyaada eksaport karata hai use riples karane kee kyonki chaina kee jo chain hai is baar koronaavaayaras kee vajah se brek ho chukee hai too hamaaree gavarnament chaahatee hai ki indiya ke jo kisaan hai 1 tareeke se indiya mein bhee aur indiya ke baahar bhee eksaport kar pae aur kaaphee jo kam ret mein agar eksaport kar paenge to isase kya hoga ki indiya kee jo jyaada phasal hai use log kharee dekhen aur ise dekhie agar kisaanon se jyaada kvaantitee mein koee cheej lee jaegee to kisaanon ko bhee phaayada hoga isalie dekhie sarakaar kee yah purush hai to mujhe lagata hai ek baar kisaanon ko traee karake dekhana chaahie baakee dekhie kisaanon kee jo jeet vah bhee sahee hai kyonki unhen thoda dar lag raha hai kyonki naya kaanoon hai unhen pata nahin hai jis vajah se dekhee mera opiniyan hai main bhee aapako yah galat bhee lag sakata hai tab kament karake mujhe bataiega dhanyavaad

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किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं?Kisaanon Kee Krshi Kaanoonon Ko Sarakaar Se Vaapas Lene Kee Jid Ko Aap Kaise Samajhate Hain
Raghvendra  Tiwari Pandit Ji Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए Raghvendra जी का जवाब
Unknown
2:59
हेलो सर नमस्कार जैसा कि आपका प्रश्न किसानों की कृषि कानून को सरकार से वापस लेने की जीत को आप कैसे समझते हैं यह मेरी नजर में दोनो तरफा जो है एक तानाशाही है क्योंकि किसान भी कह रहे हैं कि हम नहीं हटेंगे आप चाहे गोलियां मार दो झापड़ लाठी-डंडे प्रसाद और सरकार भी बोल रही है कि हम इस कानून को वापस नहीं लेंगे तो दिखी फ्रेंड लड़ाई जो होती है वह दो कंडीशन की तरफ होती है जैसे कि दोपहर में होते हो कहीं न कहीं किसी न किसी अच्छे कार्ड को जो है झुकना ही पड़ता है तब जो है लड़ाई पहचान तो होती है यहां देख रहे हैं कि 2 बच्चे कहां रहे हैं और दोनों जो है अपने में जो है इस प्रकार के तानाशाही रुको दिखा रहे हैं प्रकट कर रहे हैं दोनों चाहते हैं कि हम नीचे नहीं गिरेंगे सरकार यह सोचकर करें किधर हो जो है नीचे गिर जाती है वह बिल वापस ले लेती है तो विपक्ष वाले उनको जो है तरह-तरह के जुड़े सवाल उठाएंगे कि आप सरकार हो करके जो हैं जनता से गिर गए या फिर अगर कोई क्वेश्चन जो है सरकार के ऊपर बहुत सारे सरकार जो है सवालों के घेरे में आ जाएगी जो कि सरकार नहीं चाहती कि हम सवालों के घेरे में आए दूसरी तरफ जो किसान है उन्हें भी कहीं-कहीं जो है सरकार की जो है बातों को मानना चाहिए और सरकार जो है उनको भी कहीं दिख अपनी बातों को जो है सर किसानों के पक्ष रखना चाहिए कोई दूसरा रास्ता निकालना चाहिए क्योंकि जिस तरीके से 26 जून को आपने देखा है कि कांड हुआ है यह देश को एक शर्मसार करने वाली घटना है और आपने कल की डेट में अभी देखा है कि दिल्ली में जो है एकदम का धमाका भी हुआ तो यह क्यों हुआ करेंगे हिंदुस्तानी कैसा रिश्ता जो की एकता का प्रतीक माना जाता था लेकिन आज क्या हो गया है कि आज हमारी एकता जो है वह खंडित हो गई है खंडित हो गई इसलिए जो दूसरे देश है तो हम पर आक्रमण करने के लिए हावी हो गए हैं तो यह कोई नहीं समझता है जिसे हमारा घर है यह देश हमारा घर है फिर एग्जांपल में आपको दे रहा हूं कि हमारा घर होता है अगर हम बार इंसान को जो है अपने यहां बुलाएंगे या फिर अपना घर जो है छोड़ने की कोशिश करेंगे उसका फायदा जो है तीसरा शिकार बड़े आराम से उठा लेता है मोहित जी सर आज हमारे घर हमारे देश की हो गई है कि यहां पर लोग जो है अपना खुद ही तो है एक दूसरे के प्रति जो है वह विरोधी हो गए हैं और खुद ही जो है एक दूसरे के प्रति मारपीट करने को तैयार है इसका तीसरा पशु फायदा उठा लेगा फ्रेंड आता है जवाब पसंद आया होगा नमस्कार
Helo sar namaskaar jaisa ki aapaka prashn kisaanon kee krshi kaanoon ko sarakaar se vaapas lene kee jeet ko aap kaise samajhate hain yah meree najar mein dono tarapha jo hai ek taanaashaahee hai kyonki kisaan bhee kah rahe hain ki ham nahin hatenge aap chaahe goliyaan maar do jhaapad laathee-dande prasaad aur sarakaar bhee bol rahee hai ki ham is kaanoon ko vaapas nahin lenge to dikhee phrend ladaee jo hotee hai vah do kandeeshan kee taraph hotee hai jaise ki dopahar mein hote ho kaheen na kaheen kisee na kisee achchhe kaard ko jo hai jhukana hee padata hai tab jo hai ladaee pahachaan to hotee hai yahaan dekh rahe hain ki 2 bachche kahaan rahe hain aur donon jo hai apane mein jo hai is prakaar ke taanaashaahee ruko dikha rahe hain prakat kar rahe hain donon chaahate hain ki ham neeche nahin girenge sarakaar yah sochakar karen kidhar ho jo hai neeche gir jaatee hai vah bil vaapas le letee hai to vipaksh vaale unako jo hai tarah-tarah ke jude savaal uthaenge ki aap sarakaar ho karake jo hain janata se gir gae ya phir agar koee kveshchan jo hai sarakaar ke oopar bahut saare sarakaar jo hai savaalon ke ghere mein aa jaegee jo ki sarakaar nahin chaahatee ki ham savaalon ke ghere mein aae doosaree taraph jo kisaan hai unhen bhee kaheen-kaheen jo hai sarakaar kee jo hai baaton ko maanana chaahie aur sarakaar jo hai unako bhee kaheen dikh apanee baaton ko jo hai sar kisaanon ke paksh rakhana chaahie koee doosara raasta nikaalana chaahie kyonki jis tareeke se 26 joon ko aapane dekha hai ki kaand hua hai yah desh ko ek sharmasaar karane vaalee ghatana hai aur aapane kal kee det mein abhee dekha hai ki dillee mein jo hai ekadam ka dhamaaka bhee hua to yah kyon hua karenge hindustaanee kaisa rishta jo kee ekata ka prateek maana jaata tha lekin aaj kya ho gaya hai ki aaj hamaaree ekata jo hai vah khandit ho gaee hai khandit ho gaee isalie jo doosare desh hai to ham par aakraman karane ke lie haavee ho gae hain to yah koee nahin samajhata hai jise hamaara ghar hai yah desh hamaara ghar hai phir egjaampal mein aapako de raha hoon ki hamaara ghar hota hai agar ham baar insaan ko jo hai apane yahaan bulaenge ya phir apana ghar jo hai chhodane kee koshish karenge usaka phaayada jo hai teesara shikaar bade aaraam se utha leta hai mohit jee sar aaj hamaare ghar hamaare desh kee ho gaee hai ki yahaan par log jo hai apana khud hee to hai ek doosare ke prati jo hai vah virodhee ho gae hain aur khud hee jo hai ek doosare ke prati maarapeet karane ko taiyaar hai isaka teesara pashu phaayada utha lega phrend aata hai javaab pasand aaya hoga namaskaar

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किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं?Kisaanon Kee Krshi Kaanoonon Ko Sarakaar Se Vaapas Lene Kee Jid Ko Aap Kaise Samajhate Hain
Ramvriksh Bolkar App
Top Speaker,Level 33
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CivilEngineer
2:00
मित्रों नमस्कार बोलकर परिवार के सदस्य सदस्यों भाई बहन और उनके परिवार जनों को नमस्कार प्रश्न है कि किसानों की कृषि कानूनों को सरकार को वापस से वापस देने की जिद को आप कैसे समझते हैं देखिए पहले तो यह किसानों को पता नहीं है कि किसान के लिए कानून क्या है या क्या बना है और यह जो जिद है किसानों की या किसानों क्या है मतलब किसान नेताओं की अच्छी नहीं क्योंकि मांग जब आप किसी के सामने रखते हैं सरकार के सरकार पावर में होती तो उसको देखना पड़ता है सारी चीजें देखने पड़ते हैं उस मार्ग से किसी तरह की छाती तो नहीं हो रही है या जो भी है यह मांग जायज है कि नाजायज है कहां तक यह सही रहेगी यह सरकार इस पर विचार विमर्श करती क्योंकि सरकार के पास तमाम तंत्र होते हैं पढ़े-लिखे लोग होते हैं आईएसओ कर रहे होते हैं तो मैं इस प्रकार जिद सरकार के सामने जीत के किसान नेताओं की नहीं चल पाएगी थोड़ा मुश्किल है वह शालीनता से मिल बैठकर सरकार से अपनी मांग मनवा ए आया नया कानून विचार कानून बनाने पर सरकार नए सिरे से विचार कर सकती है यह हो सकता है और यदि कोई काम ना होता भरा है आज तक ना होता है हमारी जीत हो जाए आपकी जीत हो या किसानों के युद्ध हो तो हमें जान तक लगा कि यह सवाल आपको अच्छा लगा होगा प्रश्न का उत्तर लाइक और सब्सक्राइब अवश्य कीजिएगा धन्यवाद
Mitron namaskaar bolakar parivaar ke sadasy sadasyon bhaee bahan aur unake parivaar janon ko namaskaar prashn hai ki kisaanon kee krshi kaanoonon ko sarakaar ko vaapas se vaapas dene kee jid ko aap kaise samajhate hain dekhie pahale to yah kisaanon ko pata nahin hai ki kisaan ke lie kaanoon kya hai ya kya bana hai aur yah jo jid hai kisaanon kee ya kisaanon kya hai matalab kisaan netaon kee achchhee nahin kyonki maang jab aap kisee ke saamane rakhate hain sarakaar ke sarakaar paavar mein hotee to usako dekhana padata hai saaree cheejen dekhane padate hain us maarg se kisee tarah kee chhaatee to nahin ho rahee hai ya jo bhee hai yah maang jaayaj hai ki naajaayaj hai kahaan tak yah sahee rahegee yah sarakaar is par vichaar vimarsh karatee kyonki sarakaar ke paas tamaam tantr hote hain padhe-likhe log hote hain aaeeeso kar rahe hote hain to main is prakaar jid sarakaar ke saamane jeet ke kisaan netaon kee nahin chal paegee thoda mushkil hai vah shaaleenata se mil baithakar sarakaar se apanee maang manava e aaya naya kaanoon vichaar kaanoon banaane par sarakaar nae sire se vichaar kar sakatee hai yah ho sakata hai aur yadi koee kaam na hota bhara hai aaj tak na hota hai hamaaree jeet ho jae aapakee jeet ho ya kisaanon ke yuddh ho to hamen jaan tak laga ki yah savaal aapako achchha laga hoga prashn ka uttar laik aur sabsakraib avashy keejiega dhanyavaad

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किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं?Kisaanon Kee Krshi Kaanoonon Ko Sarakaar Se Vaapas Lene Kee Jid Ko Aap Kaise Samajhate Hain
Laxmi devi sant Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए Laxmi जी का जवाब
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2:58
आपका प्रश्न है किसानों की कृषि कानून को सरकार से वापस लेने की जिसको आप क्या समझते हैं तो 26 जनवरी में आपने देखा कि तिरंगे झंडे उसे अपमान किया गया और दिल्ली के लाल किला को कितना नुकसान पहुंचाया गया जहां तक कि हमारी भारत में जो की झांकियां निकलती है उन सब को कितना नुकसान बताएं इसे समझ में आया है कि इससे कोशिश इस आंदोलन में किसानों के बीच में भारत के भारत को नुकसान पहुंचाने वाले लोग बैठे हैं और किसान भी बता रहे हैं कि मंडिया बन जाएंगे यह हो जाएगा वह हो जाएगा तब आए हम क्या करें जो में कोई बता रहे हम सुन रहे हैं हम खुद नहीं कर रहे हम खुद जांच नहीं कर रहे हैं हम खुद उसमें उस बिल के बारे में पढ़े नहीं उसमें रिचार्ज नहीं कर रहे क्या कर रहे हैं चार लोगों ने चार बातें बताइए हमें सुनने और उस चीज को शेयर कर दें कि गलत है मैं किसी बुरा नहीं कह रही हूं सच बता रही हूं वो गलत गलत अफवाह निकली यहां किसानों को प्रॉफिट इसलिए है क्योंकि उनकी सभी आंखें जो सड़कों में तू ही नुकसान होता था ₹100000 उन्होंने लगाया लेकिन अभी नहीं हुआ तो दिक्कत होगी इसलिए यह है कि बिल के पारित होने से किसानों ने लगाया तो कम से कम इतना तो मिलती है इतना तु मिल जाए कम से कम की मेहनत तो थोड़ी बहुत प्रॉफिट है उनकी मेहनत का बिल के बारे में अच्छे बढ़िया जी बहुत अच्छे से लिखा है अफवाह मत सुनिए क्योंकि अगर आप अपना ही सुनेंगे तो यह करो और रही बात किसानों के बीच में 5 लोग बैठे हैं तो वह किसान तू बहुत ही कम हो गई मुझे तो नहीं लगता लेकिन फिर भी अगर है उसमें से बहुत लोगों को मालूम ही नहीं है किसान दिल में है क्या क्या लिखा हुआ है तो इतना ही कहूंगी कि जो भारत को नुकसान पहुंचा रहा है वह किसान हुई है और मैंने जो वीडियो देखा था कि पुलिस वाले वगैरह आया अपनी ड्यूटी निभाने अपने भारत की रक्षा के लिए आया और उस पर अटैक किया गया वह भी तो किसी का बेटा है किसी उसकी भी शादी होगी यह कुछ भी ना सोचे समझे उस पर अटैक किया गया उससे उस पर जानलेवा हमला किया गया कितनी पुलिस वालों को घायल किया गया जो कि कोई ना कोई ना काल में उन्हें भी तो सकता था लेकिन फिर भी उन्होंने आप लोगों की जान लेने पर उतारू है यह तो गलत है तो मुझे नहीं लगता कि यह जो विरोध कर रहे हैं यह सही है और किसान भी सबके लिए सही है लेकिन दिल में किसी को कोई नुकसान नहीं है इस चीज को अगर सभी लोग अच्छे से समझ लेंगे और देखेंगे कि भारत में ग्रो हो रही है तो भारत की ग्रोथ को रोकने के लिए हो रहा है
Aapaka prashn hai kisaanon kee krshi kaanoon ko sarakaar se vaapas lene kee jisako aap kya samajhate hain to 26 janavaree mein aapane dekha ki tirange jhande use apamaan kiya gaya aur dillee ke laal kila ko kitana nukasaan pahunchaaya gaya jahaan tak ki hamaaree bhaarat mein jo kee jhaankiyaan nikalatee hai un sab ko kitana nukasaan bataen ise samajh mein aaya hai ki isase koshish is aandolan mein kisaanon ke beech mein bhaarat ke bhaarat ko nukasaan pahunchaane vaale log baithe hain aur kisaan bhee bata rahe hain ki mandiya ban jaenge yah ho jaega vah ho jaega tab aae ham kya karen jo mein koee bata rahe ham sun rahe hain ham khud nahin kar rahe ham khud jaanch nahin kar rahe hain ham khud usamen us bil ke baare mein padhe nahin usamen richaarj nahin kar rahe kya kar rahe hain chaar logon ne chaar baaten bataie hamen sunane aur us cheej ko sheyar kar den ki galat hai main kisee bura nahin kah rahee hoon sach bata rahee hoon vo galat galat aphavaah nikalee yahaan kisaanon ko prophit isalie hai kyonki unakee sabhee aankhen jo sadakon mein too hee nukasaan hota tha ₹100000 unhonne lagaaya lekin abhee nahin hua to dikkat hogee isalie yah hai ki bil ke paarit hone se kisaanon ne lagaaya to kam se kam itana to milatee hai itana tu mil jae kam se kam kee mehanat to thodee bahut prophit hai unakee mehanat ka bil ke baare mein achchhe badhiya jee bahut achchhe se likha hai aphavaah mat sunie kyonki agar aap apana hee sunenge to yah karo aur rahee baat kisaanon ke beech mein 5 log baithe hain to vah kisaan too bahut hee kam ho gaee mujhe to nahin lagata lekin phir bhee agar hai usamen se bahut logon ko maaloom hee nahin hai kisaan dil mein hai kya kya likha hua hai to itana hee kahoongee ki jo bhaarat ko nukasaan pahuncha raha hai vah kisaan huee hai aur mainne jo veediyo dekha tha ki pulis vaale vagairah aaya apanee dyootee nibhaane apane bhaarat kee raksha ke lie aaya aur us par ataik kiya gaya vah bhee to kisee ka beta hai kisee usakee bhee shaadee hogee yah kuchh bhee na soche samajhe us par ataik kiya gaya usase us par jaanaleva hamala kiya gaya kitanee pulis vaalon ko ghaayal kiya gaya jo ki koee na koee na kaal mein unhen bhee to sakata tha lekin phir bhee unhonne aap logon kee jaan lene par utaaroo hai yah to galat hai to mujhe nahin lagata ki yah jo virodh kar rahe hain yah sahee hai aur kisaan bhee sabake lie sahee hai lekin dil mein kisee ko koee nukasaan nahin hai is cheej ko agar sabhee log achchhe se samajh lenge aur dekhenge ki bhaarat mein gro ho rahee hai to bhaarat kee groth ko rokane ke lie ho raha hai

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किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं?Kisaanon Kee Krshi Kaanoonon Ko Sarakaar Se Vaapas Lene Kee Jid Ko Aap Kaise Samajhate Hain
डॉ0 सीता शुक्ला Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए डॉ0 जी का जवाब
Unknown
2:49
हर्ष कुशवाहा जी आपने बहुत ही सुंदर रचना किया है आप स्वस्थ रहें और प्रसन्न रहें और भी हमारे जितने मित्र हैं वह भी स्वस्थ रहें और प्रसन्न रहें तू मित्र आपका प्रश्न है किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं हमारा देश कृषि प्रधान देश है तो उसकी अर्थव्यवस्था पर ध्यान देकर कानून बनाए गए किसान हमारा अन्नदाता है दिन रात में परिश्रम करता है उनके पति कैसे गलत होता जा सकता है कोई भी अच्छी कार जब होता है तो कुछ प्रधान डालने के लिए उत्पन्न हो ही जाती है यहां पर हो रहा है कि कुछ ऐसा कि नेता जो है वह हमारे भोले भाले किसानों को भड़काने में लगे हैं और उनको अपनी राजनीति में उन किसानों को मोहरा बनाकर वह अपने को चमकाने के लिए वह अपनी रोटियां सेक रहे हैं और कुछ लोग तो कौवा कान ले गया वाली कहावत सिद्ध कर रहे उन्हें पता तो कुछ भी नहीं है और वह आंदोलन कर रहे हैं किसान फोटो कार्यों से ही कहा था मैं मिलता है वह तो सपरिवार दिन दास परिश्रम करते रहते हैं और उन्हें कहां अब फुर्सत है यह सब आंदोलन करने कि उन्हें तो कानून की इतनी अधिक जानकारी भी नहीं होती है और वह जो भी विरोधी आंदोलन कर रहे हैं उन्हें भी 5 साल में इस कानून की सही से जानकारी उन्हें भी सबको नहीं है कोर्ट से मांग करने में लगे हैं और तो सभी कानून रोक लगाएगी जब कोई कानून मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करेगा तो मित्र मेरे अनुसार तो यह राशि कानूनों के सरकार से वापस लेने की जीत का कोई औचित्य नहीं है यह सब हमारे प्रधानमंत्री जी ने यह कृषि सुधार के लिए ही है विधेयक पारित किए हैं जिससे किसान अपनी आप आए हो 2022 तक उसको दोगुना कर सके और किसानों को अधिक विकल्प एमएलए खाद्यान्न कीमत को लेकर प्रतिस्पर्धा रहेगी और वह निजी निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा तो किसान अधिकतर किसानों के पास बहुत जमीन बहुत ही कम है और उनकी उपाधि भी बहुत ही कम होती है इससे उन्हें कीमत भी कम मिलती है तो ऐसे किसान यदि एक साथ संगठन में कार्य करेंगे तो उन्हें लागत भी लगेगी और संगठनों से खरीददार करके सीधे उनकी उपज को खरीद सकते हैं इस प्रकार से आधुनिक टेक्नालॉजी भी मिलेगी और उनके उत्पाद की अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंचेंगे तो इस प्रकार से यह तो जो भी आंदोलन हो रहा है बिल्कुल ही ठाक है और इससे बहुत बड़ा नुकसान भी हो रहा है लोगों को छोटे आ रही है सब आ रही है काफी शारीरिक नुकसान भी हो रहा है वह आर्थिक नुकसान भी हो रहा है तो यह सब बिल्कुल भी गलत है और ऐसा नहीं करना चाहिए धर्मेंद्र
Harsh kushavaaha jee aapane bahut hee sundar rachana kiya hai aap svasth rahen aur prasann rahen aur bhee hamaare jitane mitr hain vah bhee svasth rahen aur prasann rahen too mitr aapaka prashn hai kisaanon kee krshi kaanoonon ko sarakaar se vaapas lene kee jid ko aap kaise samajhate hain hamaara desh krshi pradhaan desh hai to usakee arthavyavastha par dhyaan dekar kaanoon banae gae kisaan hamaara annadaata hai din raat mein parishram karata hai unake pati kaise galat hota ja sakata hai koee bhee achchhee kaar jab hota hai to kuchh pradhaan daalane ke lie utpann ho hee jaatee hai yahaan par ho raha hai ki kuchh aisa ki neta jo hai vah hamaare bhole bhaale kisaanon ko bhadakaane mein lage hain aur unako apanee raajaneeti mein un kisaanon ko mohara banaakar vah apane ko chamakaane ke lie vah apanee rotiyaan sek rahe hain aur kuchh log to kauva kaan le gaya vaalee kahaavat siddh kar rahe unhen pata to kuchh bhee nahin hai aur vah aandolan kar rahe hain kisaan photo kaaryon se hee kaha tha main milata hai vah to saparivaar din daas parishram karate rahate hain aur unhen kahaan ab phursat hai yah sab aandolan karane ki unhen to kaanoon kee itanee adhik jaanakaaree bhee nahin hotee hai aur vah jo bhee virodhee aandolan kar rahe hain unhen bhee 5 saal mein is kaanoon kee sahee se jaanakaaree unhen bhee sabako nahin hai kort se maang karane mein lage hain aur to sabhee kaanoon rok lagaegee jab koee kaanoon maulik adhikaaron ka ullanghan karega to mitr mere anusaar to yah raashi kaanoonon ke sarakaar se vaapas lene kee jeet ka koee auchity nahin hai yah sab hamaare pradhaanamantree jee ne yah krshi sudhaar ke lie hee hai vidheyak paarit kie hain jisase kisaan apanee aap aae ho 2022 tak usako doguna kar sake aur kisaanon ko adhik vikalp emele khaadyaann keemat ko lekar pratispardha rahegee aur vah nijee nivesh ko bhee badhaava milega to kisaan adhikatar kisaanon ke paas bahut jameen bahut hee kam hai aur unakee upaadhi bhee bahut hee kam hotee hai isase unhen keemat bhee kam milatee hai to aise kisaan yadi ek saath sangathan mein kaary karenge to unhen laagat bhee lagegee aur sangathanon se khareedadaar karake seedhe unakee upaj ko khareed sakate hain is prakaar se aadhunik teknaalojee bhee milegee aur unake utpaad kee antararaashtreey baajaar mein pahunchenge to is prakaar se yah to jo bhee aandolan ho raha hai bilkul hee thaak hai aur isase bahut bada nukasaan bhee ho raha hai logon ko chhote aa rahee hai sab aa rahee hai kaaphee shaareerik nukasaan bhee ho raha hai vah aarthik nukasaan bhee ho raha hai to yah sab bilkul bhee galat hai aur aisa nahin karana chaahie dharmendr

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किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं?Kisaanon Kee Krshi Kaanoonon Ko Sarakaar Se Vaapas Lene Kee Jid Ko Aap Kaise Samajhate Hain
Manish Bhati Bolkar App
Top Speaker,Level 22
सुनिए Manish जी का जवाब
Life coach, professional counsellor & Relationship expert. Fitness & Motivational Coach
2:11
तेरा का सिद्धांत का कौशल बचने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद आपने मुझे इस लायक समझा इसके लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद जैसा कि मैंने पोस्ट ने किसानों की याचिका में सरकार से वापस लेने की टीम को क्या समझ लेना बहुत अच्छा किया किसानों किसानों ने अपने बदलाव नहीं करना चाहते हैं उनकी जरूरत दे दी है उस पर ट्रांसफर उन्होंने अचानक विचार दिन अच्छा लगा लेकिन हमारे सरकार हमारे कुछ सोचा तो जैसे कि हमारी सरकार आप दान दो ना कर जिद में प्राइवेट करती दारू गवर्नमेंट से प्राइवेट सेक्टर को मुलायम की रजामंदी नहीं है तो मैं नहीं करना चाहिए किसानों की सूची बनाएं और देखा लेकिन किसानों की बात सही है इन किसानों में भी काफी ज्यादा ही राजनीति चल रही इस वजह से किसान फालतू में परेशान हो रही है सबने सबने 26 जनवरी में देखा कहा जाए तो किसान 2 महीने से ऊपर हो गए वह बैठे उनकी जिद सरकार को मान लेनी चाहिए मैं उनको बोलता हूं उनके भी बोल बच्चन के ब्लडी से फालतू में सर्दी की ठंड में 2 महीने बहुत बड़ी बात है ठीक है फिर भी मैं सरकार से गुजारिश करूंगा और सबसे करूंगा कि किसानों को सपोर्ट सपोर्ट करें और मैन बाद में यही चाहता हूं कि उनकी साथ राजनीति ना करें क्योंकि वह हमारे लिए कमाते हैं हमारे लिए कमाने का मतलब है हमारे लिए नाजीवाद के तुम सब खाते हैं उनके साथ में मिलकर आप राजनीति करो अपना देश चला दो हमारे देश में ऑलरेडी इतना करेक्शन हो चुका है कि की एक-एक लोग करप्शन के हाथों देख चुका है तो पता ही नहीं चलता कि सामने से भी आदेश जितने भी किसानों की फोटो बेला चुरा कर लाया गया इनकी मांगे को बताई गई है लेकिन इसमें भी करप्शन चालू है तो मैं यही चाहता हूं ऐसा ना करें मैसेज धन्यवाद
Tera ka siddhaant ka kaushal bachane ke lie bahut-bahut dhanyavaad aapane mujhe is laayak samajha isake lie aapaka bahut-bahut dhanyavaad jaisa ki mainne post ne kisaanon kee yaachika mein sarakaar se vaapas lene kee teem ko kya samajh lena bahut achchha kiya kisaanon kisaanon ne apane badalaav nahin karana chaahate hain unakee jaroorat de dee hai us par traansaphar unhonne achaanak vichaar din achchha laga lekin hamaare sarakaar hamaare kuchh socha to jaise ki hamaaree sarakaar aap daan do na kar jid mein praivet karatee daaroo gavarnament se praivet sektar ko mulaayam kee rajaamandee nahin hai to main nahin karana chaahie kisaanon kee soochee banaen aur dekha lekin kisaanon kee baat sahee hai in kisaanon mein bhee kaaphee jyaada hee raajaneeti chal rahee is vajah se kisaan phaalatoo mein pareshaan ho rahee hai sabane sabane 26 janavaree mein dekha kaha jae to kisaan 2 maheene se oopar ho gae vah baithe unakee jid sarakaar ko maan lenee chaahie main unako bolata hoon unake bhee bol bachchan ke bladee se phaalatoo mein sardee kee thand mein 2 maheene bahut badee baat hai theek hai phir bhee main sarakaar se gujaarish karoonga aur sabase karoonga ki kisaanon ko saport saport karen aur main baad mein yahee chaahata hoon ki unakee saath raajaneeti na karen kyonki vah hamaare lie kamaate hain hamaare lie kamaane ka matalab hai hamaare lie naajeevaad ke tum sab khaate hain unake saath mein milakar aap raajaneeti karo apana desh chala do hamaare desh mein olaredee itana karekshan ho chuka hai ki kee ek-ek log karapshan ke haathon dekh chuka hai to pata hee nahin chalata ki saamane se bhee aadesh jitane bhee kisaanon kee photo bela chura kar laaya gaya inakee maange ko bataee gaee hai lekin isamen bhee karapshan chaaloo hai to main yahee chaahata hoon aisa na karen maisej dhanyavaad

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किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं?Kisaanon Kee Krshi Kaanoonon Ko Sarakaar Se Vaapas Lene Kee Jid Ko Aap Kaise Samajhate Hain
Naman Singh Patel Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए Naman जी का जवाब
Student & Social worker
2:53
नमस्कार जैसा की निधि जी आपका सवाल है कि किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं तो मैं इस गीत को जिद नहीं मानता यह किसानों का अधिकार है जो किसान आज से नहीं यह तीन कानून जो सरकार के द्वारा लाए गए यह किसान विरोधी कानून हैं और इन कानूनों के विरोध में किसान प्रदर्शन कर रहे हैं इसे वापस लेने की मांग कर रहे हैं और जो 12 दौर की वार्ता किसान और सरकार के बीच में हुई है सभी किसान नेताओं के द्वारा सरकार को पॉइंट वाइज इन कानूनों गलतियां इन कानूनों के दुष्प्रभाव को बताया गया है और अगर किसान नेताओं की माने को सरकार के पास उनके इस सवालों का कोई जवाब नहीं था इसका मतलब यह है कि यह तीनों कानून किसान के विरोध में है किसान विरोधी हैं और किसान और कृषि को निचले स्तर पर लाने का काम करेंगे देखिए इन तीनों कृषि कानूनों को छोड़ें तो एमएसपी की गारंटी कृषि को अच्छा बनाने के लिए सरकार से किसान हमेशा मांग करते रहे हैं मोहन सालों से मांग करते रहे देखिए यह दो-तीन कृषि कानून है और किसानों के द्वारा एमएसपी की गारंटी की का मांग की जा रही है यहां मांग मेरे विचार में जो कि आपने मुझसे पूछा है यह मेरे विचार में बहुत ही जायज मांग रहे हैं क्योंकि आज अगर आप किसान केस और पढ़ना भी देखें तो किसान के चहेते किसान की कद्र करने वाले किसान के विचार रखने वाले या एक आम नागरिक की तरह भी सोचे तो इन कानूनों के दुष्प्रभाव अगर आप इन कानूनों को पढ़ें तो आपको पता चलेंगे देखिए जो भी आज से पहले तक किसान आंदोलन चल रहा था जो 26 तारीख की घटना हुई और जो उसके बाद कुछ घटनाएं हुई हैं वह आश्चर्यजनक तो है ही पर सरकार पर सवालिया निशान खड़ा करती है कि क्या सरकार किसानों के इस आंदोलन से डर गई है क्या किसानों की आवाज को दबाया जा रहा है अब तो मेरा यही निवेदन है और मैं यही समझता हूं कि यह तीनों कानून को रद्द करने की मांग बिल्कुल भी जायज है धन्यवाद
Namaskaar jaisa kee nidhi jee aapaka savaal hai ki kisaanon kee krshi kaanoonon ko sarakaar se vaapas lene kee jid ko aap kaise samajhate hain to main is geet ko jid nahin maanata yah kisaanon ka adhikaar hai jo kisaan aaj se nahin yah teen kaanoon jo sarakaar ke dvaara lae gae yah kisaan virodhee kaanoon hain aur in kaanoonon ke virodh mein kisaan pradarshan kar rahe hain ise vaapas lene kee maang kar rahe hain aur jo 12 daur kee vaarta kisaan aur sarakaar ke beech mein huee hai sabhee kisaan netaon ke dvaara sarakaar ko point vaij in kaanoonon galatiyaan in kaanoonon ke dushprabhaav ko bataaya gaya hai aur agar kisaan netaon kee maane ko sarakaar ke paas unake is savaalon ka koee javaab nahin tha isaka matalab yah hai ki yah teenon kaanoon kisaan ke virodh mein hai kisaan virodhee hain aur kisaan aur krshi ko nichale star par laane ka kaam karenge dekhie in teenon krshi kaanoonon ko chhoden to emesapee kee gaarantee krshi ko achchha banaane ke lie sarakaar se kisaan hamesha maang karate rahe hain mohan saalon se maang karate rahe dekhie yah do-teen krshi kaanoon hai aur kisaanon ke dvaara emesapee kee gaarantee kee ka maang kee ja rahee hai yahaan maang mere vichaar mein jo ki aapane mujhase poochha hai yah mere vichaar mein bahut hee jaayaj maang rahe hain kyonki aaj agar aap kisaan kes aur padhana bhee dekhen to kisaan ke chahete kisaan kee kadr karane vaale kisaan ke vichaar rakhane vaale ya ek aam naagarik kee tarah bhee soche to in kaanoonon ke dushprabhaav agar aap in kaanoonon ko padhen to aapako pata chalenge dekhie jo bhee aaj se pahale tak kisaan aandolan chal raha tha jo 26 taareekh kee ghatana huee aur jo usake baad kuchh ghatanaen huee hain vah aashcharyajanak to hai hee par sarakaar par savaaliya nishaan khada karatee hai ki kya sarakaar kisaanon ke is aandolan se dar gaee hai kya kisaanon kee aavaaj ko dabaaya ja raha hai ab to mera yahee nivedan hai aur main yahee samajhata hoon ki yah teenon kaanoon ko radd karane kee maang bilkul bhee jaayaj hai dhanyavaad

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किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं?Kisaanon Kee Krshi Kaanoonon Ko Sarakaar Se Vaapas Lene Kee Jid Ko Aap Kaise Samajhate Hain
Pt. Rakesh  Chaturvedi ( Tally Trainer | Tax - Investment -Consultant | Bolkar App
Top Speaker,Level 33
सुनिए Pt. जी का जवाब
Tally Trainer | Tax - Investment -Consultant |
2:05
दोस्तों जैसा कि वर्षा सिंह जी ने मुझसे व्यक्तिगत प्रश्न पूछा है कि किसानों को की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं तो दोस्तों दोनों ही एक प्रकार से जिद पर अड़े हुए हैं लेकिन यह जो किसान बिल है 100 में से मेरे ख्याल से 90% जनता को पता ही नहीं है इसमें है क्या जो झंडा उठाकर किसान तैसी बिल का विरोध कर रहे हैं उनसे पूछ ले तो वह भी नहीं बता पाते नेता से पूछे वह भी नहीं बता पाते तो पहले सरकार को टीवी के माध्यम से अखबार के माध्यम से रेडियो के माध्यम से इसके बारे में भी चर्चा करवानी चाहिए जिससे की आम जनता को पता चल सके जहां तक बात किसानों की जिद की है तो वह जो किसान हैं क्या किसान यूपी में नहीं है क्या किसान बिहार में किन राज्यों में नहीं है लेकिन यह जो किसान जिनको दिक्कत आ रही है बड़े किसान हैं जो किसान के नाम पर खेती बहुत सारे किसानों से करवाते हैं वह विदेशों में आप किसान आंदोलन में भी इसका उदाहरण देख सकते हैं सारी सुविधाएं वहां उपलब्ध है तो उनको इसका नुकसान हो जाएगा बहुत सारे दलाल सक्रिय हैं मार्केट में मैंने देखे हैं हमारे कुछ लाइंस भी हैं फोन पर ही बात करते हैं कि इतना गेहूं प्रक्रिया ट्रांसफर कर दो मोटी कमाई है करोड़ों रुपए साल में कमा लेते हैं लेकिन किसान गरीब का गरीब ही रह जाता है कि क्रीमी के साले उसको सरकार को कुछ भी बनानी चाहिए इनकम टैक्स में जैसे अभी कृषि किया है बिल्कुल मुफ्त है उसको डायरा रखना चाहिए 1000000 20 लाख तक के बाद इनकम टैक्स लगेगा क्रीमी लेयर से कम से कम टैक्स वसूला जाए तभी फायदा हो पाएगा धन्यवाद
Doston jaisa ki varsha sinh jee ne mujhase vyaktigat prashn poochha hai ki kisaanon ko kee krshi kaanoonon ko sarakaar se vaapas lene kee jid ko aap kaise samajhate hain to doston donon hee ek prakaar se jid par ade hue hain lekin yah jo kisaan bil hai 100 mein se mere khyaal se 90% janata ko pata hee nahin hai isamen hai kya jo jhanda uthaakar kisaan taisee bil ka virodh kar rahe hain unase poochh le to vah bhee nahin bata paate neta se poochhe vah bhee nahin bata paate to pahale sarakaar ko teevee ke maadhyam se akhabaar ke maadhyam se rediyo ke maadhyam se isake baare mein bhee charcha karavaanee chaahie jisase kee aam janata ko pata chal sake jahaan tak baat kisaanon kee jid kee hai to vah jo kisaan hain kya kisaan yoopee mein nahin hai kya kisaan bihaar mein kin raajyon mein nahin hai lekin yah jo kisaan jinako dikkat aa rahee hai bade kisaan hain jo kisaan ke naam par khetee bahut saare kisaanon se karavaate hain vah videshon mein aap kisaan aandolan mein bhee isaka udaaharan dekh sakate hain saaree suvidhaen vahaan upalabdh hai to unako isaka nukasaan ho jaega bahut saare dalaal sakriy hain maarket mein mainne dekhe hain hamaare kuchh lains bhee hain phon par hee baat karate hain ki itana gehoon prakriya traansaphar kar do motee kamaee hai karodon rupe saal mein kama lete hain lekin kisaan gareeb ka gareeb hee rah jaata hai ki kreemee ke saale usako sarakaar ko kuchh bhee banaanee chaahie inakam taiks mein jaise abhee krshi kiya hai bilkul mupht hai usako daayara rakhana chaahie 1000000 20 laakh tak ke baad inakam taiks lagega kreemee leyar se kam se kam taiks vasoola jae tabhee phaayada ho paega dhanyavaad

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किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं?Kisaanon Kee Krshi Kaanoonon Ko Sarakaar Se Vaapas Lene Kee Jid Ko Aap Kaise Samajhate Hain
Sanjay Kumar Bolkar App
Top Speaker,Level 33
सुनिए Sanjay जी का जवाब
Cricket Enthusiast | Educationist | YouTuber | Channel Name~ Sanjay kumar (Cricket Secret), Sanjay Kumar
6:58
अनु की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं यह इसमें है क्या कि आपने देखा होगा कि जो दिल्ली में वहां पर बारिश है वहां पर किसान आंदोलन कर रहे हैं जिससे कि जो किसी कानून लाए गए हैं सरकार के द्वारा पिछले साल और कानूनों को वापस ले लिया जाए अब इसमें आपको यह समझना होगा कि जो भी किसान है जो भी आंदोलन कर रहे हैं यह मुख्यतः तीन जगहों से आते हैं एक है पंजाब एक है हरियाणा और एक है पश्चिमी उत्तर प्रदेश रीजन से ही जितने भी किसान हैं यह आंदोलन करने के लिए आए हैं और अगर आप लोकेशन देखेंगे तो दिल ही की लोकेशन इन तीनों जगहों से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिकांश जो जिले हैं वह आपके दिल्ली एनसीआर में आ जाते हैं साथ में पहले दिल ही पड़ता है फिर हरियाणा पड़ता है फिर पंजाब पड़ता है यहां से जो किसानों की दूरी है वह बहुत ज्यादा नहीं है अब दूसरी बात अगर हम ध्यान दें तो यह जितने भी किसान हैं इस इलाके से आते हैं जहां पर जो किसानों की हालात हैं वह ठीक है पूरे देश के अलावा यानी कि जितने भी इस देश में किसान है उसमें अगर सबसे ज्यादा हष्ट पुष्ट हो या सबसे ज्यादा बड़े किसानों की बात करें जिनके पास से जो जो थे वह भी बड़ा है और उनकी जो माली हालत है वह ठीक है तो यह यही किसान है हम इसके पीछे का रीजन क्या है इसके पीछे का जो रीजन यह है कि जो हमारे देश में हरित क्रांति हुई तो उस समय यहां पर बहुत ज्यादा तरह से हरित क्रांति का सपोर्ट हो गया और यहां पर जो भी किसान थे उनकी उपज भी काफी ज्यादा बढ़ गई इस वजह से हरित क्रांति का ज्यादा फायदा हुआ था यहां की किसानों को हुआ था और इतने सरकार ने भी काफी सहयोग किया था और किसानों ने खुद से भी काफी ज्यादा मेहनत की थी और इस वजह से क्या हुआ कि यहां सिर्फ किसान थे वह काफी मालामाल भी हुए मालामाल आप नहीं कर सकते फिर भी कर सकते हैं ठीक-ठाक उनकी माली हालत हो गई थी तो यह जो कि राजा के साथ है तो हमेशा अगर आप किसानों को यही सोचते हैं कि उनकी माली हालत ठीक नहीं है तो ऐसा नहीं है कि किसानों की माली हालत है वह काफी अच्छी है और इस आंदोलन में आप देख रहे होंगे कि कोई भी किसान होता है तो इतना आसान नहीं होता है उसके लिए कोई आंदोलन करना क्योंकि यह जो किसान हैं उनके लिए काफी आसान है इसका जो सबसे बड़ा कारण है वह यही है कि इनकी माली हालत है वह ठीक है और ट्रैक्टर लेकर आते हैं करीब 70 दिन से ऊपर हो गए हैं इस आंदोलन को तो इतना आसान नहीं है कि हर किसान इतना कर सके और दिल्ली में जाकर वहां पर बॉर्डर पर बैठकर वहां पर अनशन या आंदोलन कर सकें अब जो अगली बात है वह मिनिमम सपोर्ट प्राइस होती है एमएसटी एमएसटी को लेकर के काफी ज्यादा बवाल मचा हुआ है जो पहले कि किसी कानून थे उसमें भी किसी तरह की एम एस टी एम एस पी के बारे में नहीं बताया गया था कि जो किसान होंगे उनको मिशन सपोर्ट प्राइस दिया जाएगा फिर भी यह व्यवस्था चलती आ रही है और मंडी की जो व्यवस्था है वह चलती आ रही है अगर आप कहें तो झुम्मंडी की व्यवस्था है उसका जो सबसे ज्यादा फायदा उठाने वाले किसान है वह हरियाणा पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ही किसान हैं और शुरू से ही उनके यहां की व्यवस्था है अब इसके लिए अगर आप देखना चाहे कुछ स्टैटिसटिक्स है उसमें यह बताया गया है कि जो पंजाब और हरियाणा का क्षेत्र है मुख्यता यहां पर जो मुख्य दो फसलें हैं वह है गेहूं और चावल अब इन्हीं के हिसाब से अगर आप देखें तो अगर हम बात करते हैं गेहूं की तुझे हूं अगर पूरे देश में एमएसपी पर ग्रेट के एमपी के रेट पर सरकार लेती है तो उसे 88 परसेंट जो गेहूं है वह आता है हरियाणा और पंजाब से और पूरे 88 पर्सेंट हो मतलब जो हरियाणा पंजाब में जितना भी बुवाई आपका सकते हैं जितना भी उत्पादन होता है गेहूं और चावल का तो पूरा का पूरा उसका 30% जो है वह सरकार खरीद लेती है और एक अन्य आंकड़े के हिसाब से अगर ग्राम चावल की बात करते हैं तो 70 परसेंट चावल जो इन राज्यों में गाया जाता है वहीं पर सरकार खरीद लेती है तो इनकी जो पूरी तरह की अर्थव्यवस्था है वही ही इसकी पर चल रही है अब सरकार क्या चाहती है कि यहां पर प्राइवेट प्लेयर ओं को भी लाया जाए हालांकि सरकार ने इसमें किसी भी तरह से यह नहीं कहा है कि एमएसपी को खत्म कर दिया जाएगा लेकिन किसानों का कहना है कि इसमें जो लिखा है कि एमएसपी को एमएसपी के बारे में कुछ जिक्र ही नहीं है तो उनका मानना है कि अगर यह कानून आते हैं तो इससे क्या होगा कि जो उनका पंचानवे परसेंट और 88 और इस तरह से जितना भी आराम से वह किसानी कर ले जा रहे हैं और उनका असर भी जा रहा है और किसान सरकारी खरीद लेती है फ़ूड कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया ही खरीद लेती है तो वह उसमें जरूर कमी आएगी तो यही सबसे बड़ी बात है और यह कानून अचानक से लाया गया जिस वजह से उनमें काफी दहशत है और इससे एक बात और के सामने आती है कि जो वहां की मंडी का भाव मंडी होती है तो मंडी में भी बीच के प्लेयर होते हैं और वह किसान और मंडी के बीच में सुलह करवा कर और किसानों से जो मंडी होती है उतनी वह बीच में कमाई करते हैं कि दलाल होते हैं तो वह भी वहां पर मंडी भी काफी ज्यादा समय से चल रही है उनका भी कुछ ना कुछ फायदा होगा इसमें और किसान की सरकार क्या चाह रही है कि प्राइवेट प्लेयर चलाया जाए ठुकराल देखा जाए तो इस सरकार का फैसला सोच रहे हैं कि अगर हमारा यह वोट नहीं मिलेगा हमको तो हमारे सामने दिक्कत हो जाएगी इस वजह से यह मेल दिक्कत आ रही है और एक बात करी अभी कल आया था इकोनॉमिक सर्वे उसने यह भी बताया गया कि जितने भी बड़े राज्य हैं उन बड़े राज्यों में पहले हमें एशियाई कीर कार्ड की बात कर ले तो एफसीआई के रिकॉर्ड के हिसाब से अन्य राज्यों में जहां पर गेहूं और चावल उगाए जाते हैं उसमें से बड़े राज्यों में पश्चिम बंगाल अकरम चावल की बात करते हैं पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश यही राज्य है जहां पर 4 लोग आ जाते हैं उनकी बात करें तो आंध्र प्रदेश और तेलंगाना भी है गेहूं की हम बात करते हैं तो इसमें बड़े राज्यों में मध्य प्रदेश और उत्तर देती होते हैं तो अगर हम बात करें यह जरूर राज्य हैं पंजाब और हरियाणा यहां पर 35 परसेंट पूरे देश का जितना एनएससी पर खरीदा जाता है उसका पति पत्नी हाथ से ही जाता है और चावल की बात करें तो 23:00 पर्सेंट जाता है तू यह थोड़ा मिला बस तू कहने की बात है कि भले ही यह अच्छी राज्य है जिसमें सबसे ज्यादा कमाई होती है उन लोगों को लेकिन फिर भी यह एक बड़ा पोषण देते हैं और सरकार चाहती कि टाइटलर से आ जाए धन्यवाद
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किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं?Kisaanon Kee Krshi Kaanoonon Ko Sarakaar Se Vaapas Lene Kee Jid Ko Aap Kaise Samajhate Hain
TechVR ( Vikas RanA) Bolkar App
Top Speaker,Level 11
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IT Professional
2:53
दोस्तों किसी को कष्ट किया किसानों की कृषि कानूनों को सरकार को वापस लेने बीज को कैसे समझते हैं जैसे तुम जो इतने बजे तक आसान है लेकिन जो आपने देखा होगा 26 जनवरी के दिन किसानों ने ही है क्या किया तो इसीलिए इस पर कानून जो काफी टाइम से नहीं लागू हुआ था उसको भारतीय जनता पार्टी या उनके प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में को बहाल किया गया और लागू करने के लिए फिलहाल पंजाब में लागू नहीं हुआ था इसके बावजूद भी कुछ से बिचौलिए थे जब कुछ खालिस्तानी समर्थक संबंध हो तो कुछ बीच में कैसे बोलो ने किसान भी हैं जो सिर्फ एक अपने भाइयों के जातक अपने जोशी के सुनाया जाए उसके सपोर्ट के लिए आ गए थे और उसी के पीछे इसको कोई नहीं जानता है वह अपनी-अपनी सिटी के लिए कुछ कुछ ऐसे गिने चुने लोग बीच में आ रहे हैं जो अपने आप को आगे अपने अपने चीजों को बढ़ावा दे रहे हैं किसानों को वर्क सारे हैं जो लोगों को भड़का रहे हैं जिसके सर ऊपर में लिखा है कि दिल्ली पुलिस के साथ किस तरह से मारपीट हुई उनकी बाद में तोड़ दी गई उन पर हर तरह से बाहर किया उसने कुछ हमारे काका फिल्म जवान घायल हुए लेकिन जब उनकी बारी पति ने किया है जमीन को पीटा गया कुछ आया तो यह मुल्ले तेरा चेहरा जब पुलिस के ऊपर इस तरह से निकलता बाकी कुछ पत्रकार भी हैं जो उस चीज को बढ़ावा दे रहे हैं झूठी अफवाहें फैला रहे हैं क्योंकि यह तहसील की जीत बन चुके हैं जय किसान आंदोलन जो हार की जीत बन चुकी है नहीं हम वापस करा दे देंगे लेकिन को किस पद में बिना मतलब के इन्होंने दिलों को मॉडिफाई करके बताएंगे ऐसा होगा वैसा होगा जैसा होगा फिर आना होगा तब खाना खाना है इतना बिजी हैं कि हां कर लिया जाता है तब भी गवर्नमेंट बदनाम हो इसी का फायदा विपक्षी पार्टियां बहुत आराम से उठा रहे हैं तो इनको और ज्यादातर हम तो चाहते हैं कि यह मुद्दा खत्म ही ना हो और ऐसे मुद्दे वजह से हम वापिस राजनीति में आप तो दिल में कोई उसमें था उस चीज को 9:00 मुद्दा बनाकर रखा जैसे खाली स्थान और के बीच में फिल्में बहुत सारी चीजें मत होना चाहिए अगर होता तो ठीक है ना केवल मत सुनो नहीं सरकार आगे बंद कर देगी मैं तो सिर्फ यह बोलना चाहूंगा अगर आपने लोड ब्लॉक कर दिया इस तरह से करके रखना तो उसका कोई फायदा है नहीं अपने देश को साथ लेकर जा रहा करता हूं आपको आपके सवाल का जवाब मिल गया तो लाइक और सब्सक्राइब धन्यवाद
Doston kisee ko kasht kiya kisaanon kee krshi kaanoonon ko sarakaar ko vaapas lene beej ko kaise samajhate hain jaise tum jo itane baje tak aasaan hai lekin jo aapane dekha hoga 26 janavaree ke din kisaanon ne hee hai kya kiya to iseelie is par kaanoon jo kaaphee taim se nahin laagoo hua tha usako bhaarateey janata paartee ya unake pradhaanamantree jee ke netrtv mein ko bahaal kiya gaya aur laagoo karane ke lie philahaal panjaab mein laagoo nahin hua tha isake baavajood bhee kuchh se bichaulie the jab kuchh khaalistaanee samarthak sambandh ho to kuchh beech mein kaise bolo ne kisaan bhee hain jo sirph ek apane bhaiyon ke jaatak apane joshee ke sunaaya jae usake saport ke lie aa gae the aur usee ke peechhe isako koee nahin jaanata hai vah apanee-apanee sitee ke lie kuchh kuchh aise gine chune log beech mein aa rahe hain jo apane aap ko aage apane apane cheejon ko badhaava de rahe hain kisaanon ko vark saare hain jo logon ko bhadaka rahe hain jisake sar oopar mein likha hai ki dillee pulis ke saath kis tarah se maarapeet huee unakee baad mein tod dee gaee un par har tarah se baahar kiya usane kuchh hamaare kaaka philm javaan ghaayal hue lekin jab unakee baaree pati ne kiya hai jameen ko peeta gaya kuchh aaya to yah mulle tera chehara jab pulis ke oopar is tarah se nikalata baakee kuchh patrakaar bhee hain jo us cheej ko badhaava de rahe hain jhoothee aphavaahen phaila rahe hain kyonki yah tahaseel kee jeet ban chuke hain jay kisaan aandolan jo haar kee jeet ban chukee hai nahin ham vaapas kara de denge lekin ko kis pad mein bina matalab ke inhonne dilon ko modiphaee karake bataenge aisa hoga vaisa hoga jaisa hoga phir aana hoga tab khaana khaana hai itana bijee hain ki haan kar liya jaata hai tab bhee gavarnament badanaam ho isee ka phaayada vipakshee paartiyaan bahut aaraam se utha rahe hain to inako aur jyaadaatar ham to chaahate hain ki yah mudda khatm hee na ho aur aise mudde vajah se ham vaapis raajaneeti mein aap to dil mein koee usamen tha us cheej ko 9:00 mudda banaakar rakha jaise khaalee sthaan aur ke beech mein philmen bahut saaree cheejen mat hona chaahie agar hota to theek hai na keval mat suno nahin sarakaar aage band kar degee main to sirph yah bolana chaahoonga agar aapane lod blok kar diya is tarah se karake rakhana to usaka koee phaayada hai nahin apane desh ko saath lekar ja raha karata hoon aapako aapake savaal ka javaab mil gaya to laik aur sabsakraib dhanyavaad

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किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं?Kisaanon Kee Krshi Kaanoonon Ko Sarakaar Se Vaapas Lene Kee Jid Ko Aap Kaise Samajhate Hain
Nidu Rajput       Bolkar App
Top Speaker,Level 33
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Student Computer Science Education
2:11
आ जाना चाहते हैं कि किसानों की कृषि कानून को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझा सकते हैं देखिए एक रूल बना बनाया था सरकार ने कि अगर किसानों का गेहूं या आना जो भी है वह कहीं नहीं दिख रहा है तो वह सरकार को आ कर भेज सकते हैं लास्ट ईयर जो गेहूं का रेट था वह अट्ठारह सौ रुपे कुंटल था और उसी रुपे कुंटल सरकार ने उसे खरीदा था लेकिन अब जो है अब सरकार का जो वह रूल था उसको उन्होंने नियम जो था उसको बिल्कुल बंद कर दिया है कि अगर किसान चाहे कि वह अपने रेटों पर गवर्नमेंट को यह बेचना चाहता है अपना नाम तो भेज नहीं पायेगा जो भेजने की जो तिथि है मतलब जितना भी अमाउंट खोलेंगे कितने रुपे कुंटल आपको लेना है तो वह गवर्नमेंट निर्धारित करेगी पहले निर्धारित राधा सरकार किसान लेकिन अब निर्धारित करें कि गवर्नमेंट क्योंकि गवर्नमेंट ने अब उस नियम को प्राइवेट कर दिया है और फिर उन्हें वह जो प्राइवेट वाला नियम है वह किसानों से अनाज को कितने भी दामों पर खरीद सकता है और फिर उसे बढ़ा चढ़ाकर जनता को बेचेगा जो किसान है वह इस रोल को एग्री नहीं कर रहे हैं वह चाहते हैं कि जो हमारा पहला वाला रोल था नियम था गवर्नमेंट का वही हमें वापस करो नया जो नियम आया है वह हम नहीं लेंगे तो यह है पहले किसानों के पास अथॉरिटी होती थी वो अपने रेट खुद बनाते थे और खुद उन्हीं दिनों से वह जनता को भेजते थे और अगर जनता नहीं खरीद पा दी थी तो फिर वह गवर्नमेंट को उसी रेट पर भेज देते थे गवर्नमेंट ने उन्हें बिल्कुल फ्री कर रखा था कि जो भी लेटा पिलाएंगे अगर जनता नहीं लेती है किसानों से तो वह गवर्नमेंट को उसी रेट पर भेज दें जो रेट पहले होता था वह किसानों का होता था लेकिन अब जो है अब इस यह जो रुलाया है इसमें जो रेट होगा वह गवर्नमेंट का होगा धन्यवाद
Aa jaana chaahate hain ki kisaanon kee krshi kaanoon ko sarakaar se vaapas lene kee jid ko aap kaise samajha sakate hain dekhie ek rool bana banaaya tha sarakaar ne ki agar kisaanon ka gehoon ya aana jo bhee hai vah kaheen nahin dikh raha hai to vah sarakaar ko aa kar bhej sakate hain laast eeyar jo gehoon ka ret tha vah atthaarah sau rupe kuntal tha aur usee rupe kuntal sarakaar ne use khareeda tha lekin ab jo hai ab sarakaar ka jo vah rool tha usako unhonne niyam jo tha usako bilkul band kar diya hai ki agar kisaan chaahe ki vah apane reton par gavarnament ko yah bechana chaahata hai apana naam to bhej nahin paayega jo bhejane kee jo tithi hai matalab jitana bhee amaunt kholenge kitane rupe kuntal aapako lena hai to vah gavarnament nirdhaarit karegee pahale nirdhaarit raadha sarakaar kisaan lekin ab nirdhaarit karen ki gavarnament kyonki gavarnament ne ab us niyam ko praivet kar diya hai aur phir unhen vah jo praivet vaala niyam hai vah kisaanon se anaaj ko kitane bhee daamon par khareed sakata hai aur phir use badha chadhaakar janata ko bechega jo kisaan hai vah is rol ko egree nahin kar rahe hain vah chaahate hain ki jo hamaara pahala vaala rol tha niyam tha gavarnament ka vahee hamen vaapas karo naya jo niyam aaya hai vah ham nahin lenge to yah hai pahale kisaanon ke paas athoritee hotee thee vo apane ret khud banaate the aur khud unheen dinon se vah janata ko bhejate the aur agar janata nahin khareed pa dee thee to phir vah gavarnament ko usee ret par bhej dete the gavarnament ne unhen bilkul phree kar rakha tha ki jo bhee leta pilaenge agar janata nahin letee hai kisaanon se to vah gavarnament ko usee ret par bhej den jo ret pahale hota tha vah kisaanon ka hota tha lekin ab jo hai ab is yah jo rulaaya hai isamen jo ret hoga vah gavarnament ka hoga dhanyavaad

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किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं?Kisaanon Kee Krshi Kaanoonon Ko Sarakaar Se Vaapas Lene Kee Jid Ko Aap Kaise Samajhate Hain
Meghsinghchouhan Bolkar App
Top Speaker,Level 33
सुनिए Meghsinghchouhan जी का जवाब
student
1:04
जया प्रेस वाले की किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद तो अब कैसे समझते हैं तो उसे कर वापिस नहीं ले मेरे को तो यह समझ में नहीं आया कि इस इनो कानून में किसानों का क्या नुकसान है इसमें सजेशन ओं का फायदा हो अगर वह पहले वाले कानूनों से किसानों का फायदा होता तो 70 सालों में किसान फिर वह कर्ज माफी बिजली बिल यूरिया सस्ती दो रोजाना धरना प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं क्योंकि इस कानूनों में सोनू को आगे बढ़ने का मौका नहीं दिया था अब यह दिल कानून आए हैं इस पर एक बार टेस्ट करके देख लेते तो अच्छा होता मेरे ख्याल से आपका एमी का मतलब भी वापिस लेने का कोई मतलब ही नहीं है
Jaya pres vaale kee kisaanon kee krshi kaanoonon ko sarakaar se vaapas lene kee jid to ab kaise samajhate hain to use kar vaapis nahin le mere ko to yah samajh mein nahin aaya ki is ino kaanoon mein kisaanon ka kya nukasaan hai isamen sajeshan on ka phaayada ho agar vah pahale vaale kaanoonon se kisaanon ka phaayada hota to 70 saalon mein kisaan phir vah karj maaphee bijalee bil yooriya sastee do rojaana dharana pradarshan kyon kar rahe hain kyonki is kaanoonon mein sonoo ko aage badhane ka mauka nahin diya tha ab yah dil kaanoon aae hain is par ek baar test karake dekh lete to achchha hota mere khyaal se aapaka emee ka matalab bhee vaapis lene ka koee matalab hee nahin hai

bolkar speaker
किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं?Kisaanon Kee Krshi Kaanoonon Ko Sarakaar Se Vaapas Lene Kee Jid Ko Aap Kaise Samajhate Hain
pawan Bolkar App
Top Speaker,Level 11
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Government services (8814983819)
2:58
देखिए मैं दो बातों को विशेष रुप से ध्यान दूंगा पहला तो यह है कि किसानों को जो कृषि कानून में क्लोज दिए उन क्लोज को बहुत गहराई से पढ़ना चाहिए और भारत सरकार को भी उन क्लोज को समझाने की पूरी पूरी कोशिश करनी चाहिए क्योंकि कृषि कानूनों में लोग कांटेक्ट फार्मिंग को लेकर मुद्दा उठा रहे हैं तो उसको मैं क्लियर कर देता हूं कांटेक्ट फॉर्मिंग जो होगी वह आपकी एक सीजन की फसल से लेकर यानी कि मिनिमम आप 6 महीने और मैक्सिमम 5 साल तक कर सकते हो और उस कांटेक्ट फॉर्मिंग के दौरान आपका जब मन चाहे आप कांटेक्ट तोड़ सकते हो आप जब मन चाहे आप कांटेक्ट तोड़ सकते हो और जब आपकी कॉन्टेक्ट्स आर्मी के बाद जवाब फसल उगा देते हो और उसका जो आउटपुट होता है उस आउटपुट में जैसे भी रिजल्ट आए जो भी रिजल्ट आया अभी रिजल्ट आया वह तो सामने वाला है उसके ऊपर बाध्य होगा आपके ऊपर कोई बात नहीं होगा जो था इसके अंदर भूमिका की लेनदेन काया भूमि के ऊपर कोई भी बैंक लोन का किसी भी तरह का कोई भी प्रावधान दूसरे के ऊपर नहीं होगा क्योंकि 2 की भूमि किसान की है और किसान को बाध्य नहीं किया जा सकता कुंठित फार्मिंग का जो पॉइंट है उसमें सरकार गलत नहीं है क्योंकि आप का मन है तो आप कांटेक्ट फार्मिंग गुरु आपका मन नहीं है तो आप जैसा प्रोसेसिंग चल रहा है वैसा वैसा करूं इसमें क्या मिस्टेक है दूसरा कानून में सरकार ने ओपन कर दिया है पूरी दुनिया के लिए पूरी इंडिया के लिए सॉरी एक किसान जहां पर भी है वह कहीं भी पर भी भेज सकता है वर्षों से भारत का किसान जो है केवल एपीएमसी इंप्लीमेंटेड रहा है एपीएमसी को अपना सामान बेचने के लिए बाध्य है यह जगजाहिर है हम सब जानते हैं अब सरकार ने क्या किया है कि एपीएमसी के अलावा एपीएमसी तो रहेगी उसके अलावा भी इतनी जगह आपके लिए मार्केट ओपन कर दिया या प्राइवेट को बेचना चाहते हैं उसको भेजो आप डायरेक्ट कस्टमर को भेजना चाहते हो आप उसको भेजो आप डायरेक्ट इंडस्ट्री के अंदर या किसी कारखाने के अंदर फैक्ट्री के अंदर ले जाकर बेचना चाहते हो आप डायरेक्ट वहां भेजो आपके लिए एक ऑप्शन ओपन कर दिया भाई आप जहां भेजना चाहते हो भेज सकते इसके साथ-साथ सरकार भी आपका आई एम एस भी जारी रखेगी और msp1 मिनिमम है और सरकार कह रही है कि मिनिमम पर ध्यान मत दो आप मैक्सिमम पर जाओगे कितना और मिल सकता है और आकर मार्केट में नई प्ले रहेंगे तो आपको और ज्यादा बेनिफिट होगा और ज्यादा बेनिफिट होगा और ज्यादा के रेगुलेशन साइट जो है वह भंडारण को लेकर थोड़ा सरकार को ध्यान रखना चाहिए
Dekhie main do baaton ko vishesh rup se dhyaan doonga pahala to yah hai ki kisaanon ko jo krshi kaanoon mein kloj die un kloj ko bahut gaharaee se padhana chaahie aur bhaarat sarakaar ko bhee un kloj ko samajhaane kee pooree pooree koshish karanee chaahie kyonki krshi kaanoonon mein log kaantekt phaarming ko lekar mudda utha rahe hain to usako main kliyar kar deta hoon kaantekt phorming jo hogee vah aapakee ek seejan kee phasal se lekar yaanee ki minimam aap 6 maheene aur maiksimam 5 saal tak kar sakate ho aur us kaantekt phorming ke dauraan aapaka jab man chaahe aap kaantekt tod sakate ho aap jab man chaahe aap kaantekt tod sakate ho aur jab aapakee kontekts aarmee ke baad javaab phasal uga dete ho aur usaka jo aautaput hota hai us aautaput mein jaise bhee rijalt aae jo bhee rijalt aaya abhee rijalt aaya vah to saamane vaala hai usake oopar baadhy hoga aapake oopar koee baat nahin hoga jo tha isake andar bhoomika kee lenaden kaaya bhoomi ke oopar koee bhee baink lon ka kisee bhee tarah ka koee bhee praavadhaan doosare ke oopar nahin hoga kyonki 2 kee bhoomi kisaan kee hai aur kisaan ko baadhy nahin kiya ja sakata kunthit phaarming ka jo point hai usamen sarakaar galat nahin hai kyonki aap ka man hai to aap kaantekt phaarming guru aapaka man nahin hai to aap jaisa prosesing chal raha hai vaisa vaisa karoon isamen kya mistek hai doosara kaanoon mein sarakaar ne opan kar diya hai pooree duniya ke lie pooree indiya ke lie soree ek kisaan jahaan par bhee hai vah kaheen bhee par bhee bhej sakata hai varshon se bhaarat ka kisaan jo hai keval epeeemasee impleemented raha hai epeeemasee ko apana saamaan bechane ke lie baadhy hai yah jagajaahir hai ham sab jaanate hain ab sarakaar ne kya kiya hai ki epeeemasee ke alaava epeeemasee to rahegee usake alaava bhee itanee jagah aapake lie maarket opan kar diya ya praivet ko bechana chaahate hain usako bhejo aap daayarekt kastamar ko bhejana chaahate ho aap usako bhejo aap daayarekt indastree ke andar ya kisee kaarakhaane ke andar phaiktree ke andar le jaakar bechana chaahate ho aap daayarekt vahaan bhejo aapake lie ek opshan opan kar diya bhaee aap jahaan bhejana chaahate ho bhej sakate isake saath-saath sarakaar bhee aapaka aaee em es bhee jaaree rakhegee aur msp1 minimam hai aur sarakaar kah rahee hai ki minimam par dhyaan mat do aap maiksimam par jaoge kitana aur mil sakata hai aur aakar maarket mein naee ple rahenge to aapako aur jyaada beniphit hoga aur jyaada beniphit hoga aur jyaada ke reguleshan sait jo hai vah bhandaaran ko lekar thoda sarakaar ko dhyaan rakhana chaahie

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किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं?Kisaanon Kee Krshi Kaanoonon Ko Sarakaar Se Vaapas Lene Kee Jid Ko Aap Kaise Samajhate Hain
Basant rai  Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए Basant जी का जवाब
Gread-1Teacher (Guzetted teacher)
2:16
हाय दोस्तों सृष्टि राजपूत जी ने एक बहुत ही अच्छा सवाल पूछा कि किसानों की कृषि कानूनों को लेकर सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं सृष्टि जी आपका जवाब भारत एक कृषि प्रधान देश है जिसमें संपूर्ण जनसंख्या का लगभग 70% भारतीय किसान इस किसान आंदोलन को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि किसान आंदोलन के नाम पर इनका स्वागत कुछ अलग ही 26 जनवरी को किसान परेड की अनुमति लेकर पुलिस के साथ मुठभेड़ करना साथ ही दिल्ली में लाल किले पर किसी धर्म विशेष का झंडा फहराना ऐसा देखकर मुझे घिन आती है मुझे लगता है कि भारत को वैश्विक मंच पर अपमानित करने की उम्मीद से किसान आंदोलन किया गया पंजाब एवं हरियाणा के अलावा दूसरे प्रदेशों में किसान आंदोलन अब किसान आंदोलन से कुछ लेना-देना ही नहीं वहां पर भी तो किसान है क्या पंजाबी हरियाणा में किसान है सरकार की बात करें तो सरकार ने कह दिया कि लिखित रूप में एमएसडी खतना करने की गारंटी दी है परंतु फसल की फिक्स नहीं की जा सकती क्योंकि सभी किसानों की फसल एक जैसी नहीं होती इसलिए उनका भाग अलग-अलग दोस्तों
Haay doston srshti raajapoot jee ne ek bahut hee achchha savaal poochha ki kisaanon kee krshi kaanoonon ko lekar sarakaar se vaapas lene kee jid ko aap kaise samajhate hain srshti jee aapaka javaab bhaarat ek krshi pradhaan desh hai jisamen sampoorn janasankhya ka lagabhag 70% bhaarateey kisaan is kisaan aandolan ko dekhakar aisa prateet hota hai ki kisaan aandolan ke naam par inaka svaagat kuchh alag hee 26 janavaree ko kisaan pared kee anumati lekar pulis ke saath muthabhed karana saath hee dillee mein laal kile par kisee dharm vishesh ka jhanda phaharaana aisa dekhakar mujhe ghin aatee hai mujhe lagata hai ki bhaarat ko vaishvik manch par apamaanit karane kee ummeed se kisaan aandolan kiya gaya panjaab evan hariyaana ke alaava doosare pradeshon mein kisaan aandolan ab kisaan aandolan se kuchh lena-dena hee nahin vahaan par bhee to kisaan hai kya panjaabee hariyaana mein kisaan hai sarakaar kee baat karen to sarakaar ne kah diya ki likhit roop mein emesadee khatana karane kee gaarantee dee hai parantu phasal kee phiks nahin kee ja sakatee kyonki sabhee kisaanon kee phasal ek jaisee nahin hotee isalie unaka bhaag alag-alag doston

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किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं?Kisaanon Kee Krshi Kaanoonon Ko Sarakaar Se Vaapas Lene Kee Jid Ko Aap Kaise Samajhate Hain
vijay singh Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए vijay जी का जवाब
Social worker in india
1:54
प्रिय मेरे फोन पर परिवार के सदस्य नैंसी जी ने बहुत ही अच्छा सवाल किया है जो आपके सवाल का उत्तर यह है कि हमारे देश के कृषि प्रधान है जो ज्यादातर लोग कृषि पर ही निर्भर रहते हैं जो कृषि हमारे जीवन का आधार है कृषि से हमारा देश का अन्नदाता अपना पेट भी भरते हैं और दूसरे का भी पेट भरते हैं लेकिन हमारे देश की कुछ नासमझ लोगों की वजह से हमारे देश के अन्नदाता परेशान हैं जो हमारे देश में कृषि को इतना जख्म दिया है दिल से हमारे देश के अन्नदाता कर के बहुत से आत्महत्या के लिए भी मजबूर हो रहे हैं क्योंकि हमारे देश के किसानों को समय पर बिजली नहीं मिलती है और डीजल पेट्रोल की महंगाई और खाद बीज का महंगा मिलना और किसानों को नुकसान हो रहा है किसानों हमारे देश की सरकार से मदद नहीं मिल रही है और अब तो हद ही कर दी हमारे देश की सरकारों ने तो देश में तीन काले कानून बनाए हैं जो हमारे देश के अन्नदाता की कमर तोड़ने का कानून है जो कि इस कानून में एमएससी की कोई गारंटी नहीं है और इन बिलों में निजीकरण को बढ़ावा देना का कानून है जिन से किसानों को उपज का सही रेट नहीं मिलेगा और हमारे देश के अन्नदाता की कमजोर करने का षड्यंत्र है जो इन बिलों को जोरदार विरोध करना और इन ब्लॉक को वापिस करवाना हमारे देश के गरीब मजदूर अंधा तो का साथ देना जरूरी है तभी यह बिल वापस होंगे धन्यवाद जी
Priy mere phon par parivaar ke sadasy nainsee jee ne bahut hee achchha savaal kiya hai jo aapake savaal ka uttar yah hai ki hamaare desh ke krshi pradhaan hai jo jyaadaatar log krshi par hee nirbhar rahate hain jo krshi hamaare jeevan ka aadhaar hai krshi se hamaara desh ka annadaata apana pet bhee bharate hain aur doosare ka bhee pet bharate hain lekin hamaare desh kee kuchh naasamajh logon kee vajah se hamaare desh ke annadaata pareshaan hain jo hamaare desh mein krshi ko itana jakhm diya hai dil se hamaare desh ke annadaata kar ke bahut se aatmahatya ke lie bhee majaboor ho rahe hain kyonki hamaare desh ke kisaanon ko samay par bijalee nahin milatee hai aur deejal petrol kee mahangaee aur khaad beej ka mahanga milana aur kisaanon ko nukasaan ho raha hai kisaanon hamaare desh kee sarakaar se madad nahin mil rahee hai aur ab to had hee kar dee hamaare desh kee sarakaaron ne to desh mein teen kaale kaanoon banae hain jo hamaare desh ke annadaata kee kamar todane ka kaanoon hai jo ki is kaanoon mein emesasee kee koee gaarantee nahin hai aur in bilon mein nijeekaran ko badhaava dena ka kaanoon hai jin se kisaanon ko upaj ka sahee ret nahin milega aur hamaare desh ke annadaata kee kamajor karane ka shadyantr hai jo in bilon ko joradaar virodh karana aur in blok ko vaapis karavaana hamaare desh ke gareeb majadoor andha to ka saath dena jarooree hai tabhee yah bil vaapas honge dhanyavaad jee

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किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं?Kisaanon Kee Krshi Kaanoonon Ko Sarakaar Se Vaapas Lene Kee Jid Ko Aap Kaise Samajhate Hain
Daulat Ram sharma Shastri Bolkar App
Top Speaker,Level 22
सुनिए Daulat जी का जवाब
Retrieved sr tea . social activist,
4:57
जहां पर तुम यह कह रहे हो ना वहां पर मेरे विचार से तो दोनों में ही हर दर्द होता है आप एक निष्पक्ष भारती की तरह से विचार करें आप किसी पूर्वाग्रह से होकर के भी करें क्योंकि दर्शक आप देख रहे हैं कि किसानों को भी यह न सोचे कि आम जनों की चिंता है आमजन तो आज परेशान हैं क्योंकि यह दोनों ही अपनी जिद पर हैं ना कि सामना तो सरकार अपने लेख से हटाना चाहती है भाई किसानों की जुदाई मांगी है उनको पूरा कर देंगे दी है और यदि बिल वापस लेनी है तो बिल वापस कर दिए जाएं ले लिया जाए लेकिन कि सरकार भी नहीं सोचना किसान दूसरे किसान भी यदि सोचने की भी सरकार को क्या नुकसान हो रहा बताइए आप सरकारी नुमाइंदे यह सरकारी मंत्री गणमान्य नेतागण यह तो हवाई जनसंपर्क करते हैं लिखो जाते जाते हैं इनको सब काम करके तो क्यों पूरी होती है यह तो रास्ता जाम करके बैठ कर के साथ लेकिन किसानों को भी आम जनों के हितों को सोचना चाहिए आज तुम सोचो यह रास्ता जाम हो गया बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे मजदूर मजदूरी नहीं कर पा रहे हैं टैक्सी वाले टैक्स से नहीं चला पा रहे हैं जो छोटे-मोटे दुकानदार थे बिचारे बहुत दुकानदारी नहीं कर पा रहे हैं तो इस रास्ते जाम करने से आम नागरिक कोई परेशानी होती है सरकारों को नहीं होती है नेताओं को नहीं होती है क्यों लेता हूं बस बहुत सारी चिंताएं इसलिए उनको क्या फर्क पड़ता है मैं यह कहना चाहता हूं यदि किसानों में दम है तुम ने इन नेताओं नेताओं की सुविधाओं को रुकी नेताओं को गिराप कीजिए आम जनता को परेशान मत कीजिए लेकिन दुर्भाग्य इस बात का है कि कोई किसी को मारने का भला नहीं है कोई किसी की राय को स्वीकार नहीं करता है सच्चाई यह है कि कुछ तो दो चीज नहीं है कुछ खिलाड़ी होती हैं यह बच्चे बदतर बनती जा रही है ना तो सरकार में इतनी दम है कि रास्ता खुल पा सकती है और ना किसान इमानदारी से रास्ता खोलना चाहते हैं ना सरकार इनकी मांगे पूरी करना चाहती है किसान मांग मांग से पीछे हटना चाहते हैं कोई किसान हटना भी चाहे तुम को विपक्षी दल वाले नहीं आने देते हैं बोल को ज्यादा कर पक्का करते रहते हैं क्योंकि विपक्ष में तो काम ही है जो विपक्ष सर तुम सोचो जनता के दिल को ना जीत सका जो खुद वोट प्राप्त ना कर सका जो अपनी जमानत नहीं बचा सके जो मोदी से 2019 के चुनाव में अकेले मोदी ने इनको पराजित कर दिया बीजेपी की बात नहीं कर रहा हूं मैं बीजेपी और कांग्रेस सब यह सब एक से ही हैं यह सब पॉलीटिकल पार्टीज तो एक ही रंग की है इनके प्राणी अलग अलग है बाकी की नीतियां ऐसी हैं सभी लूटने खाने वाले कमाने खाने वाले नेतागण हैं बाकी अकेले मोदी ने बीजेपी को तीन चपरासी तक जाती क्योंकि दर्शक विपक्ष के लोकप्रिय कार्य नहीं थे लोकप्रिय नेता नहीं नीतियां नहीं थी जनता ने उन का विश्वास नहीं किया इसलिए को हरा दिया अब इनके पास बैठे ठाले काम किया है यह किसानों को भड़काने का काम कर रहे हैं आप क्या सोच रहे हैं 26 जनवरी को जो कार्य किए गए थे उसमें किसानों किसान तो देश का भला वाला है 22:00 तक है लेकिन किसानों के बीच में किसानों को कंधे पर बंदूक रखकर के फिर विपक्षी दल वालों ने यह सारा कार्य करवाए थे आज भी किसानों को हो भोजन पानी की व्यवस्था करवाएं दुर्भाग्य इस बात का है भारत का जो नेता वर्ग है जो सप्ताह भर का हो जब विपक्ष का हो यह सभी मेरे विचार से शायद भारतीयों की परिस्थितियों को कठिनाइयों को बढ़ा रहे हैं भारत में तुम देख लो किसका दर्द महंगाई बढ़ रही है एक तो करो ना सुंदर बंगाल के कारण से लॉकडाउन आदि के कारण से बेरोजगारी महंगाई बढ़ गई है और आम नागरिक नित रोज का परेशान है रास्ते जा मुंह से ज्यादा परेशान है इन रास्ते जाऊं में तोड़फोड़ करते हैं आग लगाते हैं दिल्ली में जो कांड हुआ था भारत आबादी करंट था देश के झंडे के साथ में चाहिए अब यह तो कहते हैं किसान कहते हैं बीजेपी वालों ने कराया है बीजेपी वाले कहते हैं किसानों ने किया है या विपक्षी नेताओं ने कराया बल्कि देश का झंडे का अपमान तो हुआ आप यह तो क्यों नहीं महसूस करते हो लेकिन दुर्भाग्य इस बात का है कि वे में भांग घुली हुई है मैं सोचा हूं ऐसे प्रजा तुमसे तो बेटी कम से कम 1 राजाओं के राजा से तेज क्या पर डंडे का भय रहता था जहां लाइंस आर्डर देते थे या न्याय होता था लेकिन इस प्रजातंत्र में क्या फायदा सरकार इनको राजस्थानी सकती है किसान छोड़ना चाहते नहीं परिणाम स्वरुप गरीब विवाह से मजदूर परेशान है आम नागरिक दुखी है
Jahaan par tum yah kah rahe ho na vahaan par mere vichaar se to donon mein hee har dard hota hai aap ek nishpaksh bhaaratee kee tarah se vichaar karen aap kisee poorvaagrah se hokar ke bhee karen kyonki darshak aap dekh rahe hain ki kisaanon ko bhee yah na soche ki aam janon kee chinta hai aamajan to aaj pareshaan hain kyonki yah donon hee apanee jid par hain na ki saamana to sarakaar apane lekh se hataana chaahatee hai bhaee kisaanon kee judaee maangee hai unako poora kar denge dee hai aur yadi bil vaapas lenee hai to bil vaapas kar die jaen le liya jae lekin ki sarakaar bhee nahin sochana kisaan doosare kisaan bhee yadi sochane kee bhee sarakaar ko kya nukasaan ho raha bataie aap sarakaaree numainde yah sarakaaree mantree ganamaany netaagan yah to havaee janasampark karate hain likho jaate jaate hain inako sab kaam karake to kyon pooree hotee hai yah to raasta jaam karake baith kar ke saath lekin kisaanon ko bhee aam janon ke hiton ko sochana chaahie aaj tum socho yah raasta jaam ho gaya bachche skool nahin ja pa rahe majadoor majadooree nahin kar pa rahe hain taiksee vaale taiks se nahin chala pa rahe hain jo chhote-mote dukaanadaar the bichaare bahut dukaanadaaree nahin kar pa rahe hain to is raaste jaam karane se aam naagarik koee pareshaanee hotee hai sarakaaron ko nahin hotee hai netaon ko nahin hotee hai kyon leta hoon bas bahut saaree chintaen isalie unako kya phark padata hai main yah kahana chaahata hoon yadi kisaanon mein dam hai tum ne in netaon netaon kee suvidhaon ko rukee netaon ko giraap keejie aam janata ko pareshaan mat keejie lekin durbhaagy is baat ka hai ki koee kisee ko maarane ka bhala nahin hai koee kisee kee raay ko sveekaar nahin karata hai sachchaee yah hai ki kuchh to do cheej nahin hai kuchh khilaadee hotee hain yah bachche badatar banatee ja rahee hai na to sarakaar mein itanee dam hai ki raasta khul pa sakatee hai aur na kisaan imaanadaaree se raasta kholana chaahate hain na sarakaar inakee maange pooree karana chaahatee hai kisaan maang maang se peechhe hatana chaahate hain koee kisaan hatana bhee chaahe tum ko vipakshee dal vaale nahin aane dete hain bol ko jyaada kar pakka karate rahate hain kyonki vipaksh mein to kaam hee hai jo vipaksh sar tum socho janata ke dil ko na jeet saka jo khud vot praapt na kar saka jo apanee jamaanat nahin bacha sake jo modee se 2019 ke chunaav mein akele modee ne inako paraajit kar diya beejepee kee baat nahin kar raha hoon main beejepee aur kaangres sab yah sab ek se hee hain yah sab poleetikal paarteej to ek hee rang kee hai inake praanee alag alag hai baakee kee neetiyaan aisee hain sabhee lootane khaane vaale kamaane khaane vaale netaagan hain baakee akele modee ne beejepee ko teen chaparaasee tak jaatee kyonki darshak vipaksh ke lokapriy kaary nahin the lokapriy neta nahin neetiyaan nahin thee janata ne un ka vishvaas nahin kiya isalie ko hara diya ab inake paas baithe thaale kaam kiya hai yah kisaanon ko bhadakaane ka kaam kar rahe hain aap kya soch rahe hain 26 janavaree ko jo kaary kie gae the usamen kisaanon kisaan to desh ka bhala vaala hai 22:00 tak hai lekin kisaanon ke beech mein kisaanon ko kandhe par bandook rakhakar ke phir vipakshee dal vaalon ne yah saara kaary karavae the aaj bhee kisaanon ko ho bhojan paanee kee vyavastha karavaen durbhaagy is baat ka hai bhaarat ka jo neta varg hai jo saptaah bhar ka ho jab vipaksh ka ho yah sabhee mere vichaar se shaayad bhaarateeyon kee paristhitiyon ko kathinaiyon ko badha rahe hain bhaarat mein tum dekh lo kisaka dard mahangaee badh rahee hai ek to karo na sundar bangaal ke kaaran se lokadaun aadi ke kaaran se berojagaaree mahangaee badh gaee hai aur aam naagarik nit roj ka pareshaan hai raaste ja munh se jyaada pareshaan hai in raaste jaoon mein todaphod karate hain aag lagaate hain dillee mein jo kaand hua tha bhaarat aabaadee karant tha desh ke jhande ke saath mein chaahie ab yah to kahate hain kisaan kahate hain beejepee vaalon ne karaaya hai beejepee vaale kahate hain kisaanon ne kiya hai ya vipakshee netaon ne karaaya balki desh ka jhande ka apamaan to hua aap yah to kyon nahin mahasoos karate ho lekin durbhaagy is baat ka hai ki ve mein bhaang ghulee huee hai main socha hoon aise praja tumase to betee kam se kam 1 raajaon ke raaja se tej kya par dande ka bhay rahata tha jahaan lains aardar dete the ya nyaay hota tha lekin is prajaatantr mein kya phaayada sarakaar inako raajasthaanee sakatee hai kisaan chhodana chaahate nahin parinaam svarup gareeb vivaah se majadoor pareshaan hai aam naagarik dukhee hai

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किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं?Kisaanon Kee Krshi Kaanoonon Ko Sarakaar Se Vaapas Lene Kee Jid Ko Aap Kaise Samajhate Hain
Ashok Bolkar App
Top Speaker,Level 44
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कृषक👳💦
2:34
विकी दोस्तों किसानों की दो प्रमुख मांगे हैं एक तो एमएसपी की गारंटी दी जाए और उस पर ऐसा कोई कानून बनाया जाए कि कोई भी एमएसपी से कम रेट में किसान का अनाज नहीं खरीद सके तो ऐसा करने से किसान का शोषण रुकेगा और दूसरी मां ने तीनों कानूनों को वापस लिया जाए तो देखिए सर सरकार ने किसानों का अनाज मंडी से बाहर करने की खुली छूट दी है कोई भी पैन कार्ड धारक किसान का मंडी से बाहर अनाज खरीद सकता है तो ऐसे में पैन कार्ड धारक से मतलब है जो भी कोई टैक्स देने वाला व्यक्ति तो फिर जो मंडी में व्यापारी है तो वह सरकार को टैक्स देते हैं तो फिर भी मंडी में क्यों किसान का नाच खरीदेंगे तो धीरे-धीरे माननीय खत्म हो जाए और आवश्यक वस्तु अधिनियम जो है तो तेरे हम फसलें हैं दलहनी फसलें हैं आलू प्याज जैसी सब्जियां हैं तो इनका भंडार करने की सरकार ने खुली छूट दे दी है तो देखिए किसानों का अनाज या जो सब्जी है तो फसल आने पर 10 या ₹12 किलो में बिकती हैं तो इससे क्या है कि जब बड़े बड़े व्यापारी इसका भंडारण करेंगे तो फिर भेज इसे अधिक से अधिक मूल्य पर भेजेंगे तो इससे किसान को कोई फायदा नहीं है और जनता को भी कोई फायदा नहीं है इस सिर्फ व्यापारियों को ही लाभ होने वाला है तो इस हिसाब से यह तीनों कानून व्यापारियों को ही लाभ पहुंचाते पूंजी पतियों को क्योंकि किसान तो भंडारण कर नहीं सकता तो इस हिसाब से सरकार को इन तीनों कानूनों को वापस ले लेना चाहिए अब सरकार कह रही है कि हम डेढ़ साल के लिए रोक लगा देते हैं तो देखिए दोस्तों जब कोई भी बीमारी है तो आप उसका इलाज नहीं कर रहा है उसे जड़ से खत्म नहीं कर रहा है उसको कुछ समय के लिए अटका रहा है तो बीमारी बढ़ती जाएगी तो ऐसे में किसान का यूनुस खान है और सरकार का भी मुस्कान है आने वाले चुनाव में कोई भी किसान बीजेपी को सपोर्ट नहीं करेगा
Vikee doston kisaanon kee do pramukh maange hain ek to emesapee kee gaarantee dee jae aur us par aisa koee kaanoon banaaya jae ki koee bhee emesapee se kam ret mein kisaan ka anaaj nahin khareed sake to aisa karane se kisaan ka shoshan rukega aur doosaree maan ne teenon kaanoonon ko vaapas liya jae to dekhie sar sarakaar ne kisaanon ka anaaj mandee se baahar karane kee khulee chhoot dee hai koee bhee pain kaard dhaarak kisaan ka mandee se baahar anaaj khareed sakata hai to aise mein pain kaard dhaarak se matalab hai jo bhee koee taiks dene vaala vyakti to phir jo mandee mein vyaapaaree hai to vah sarakaar ko taiks dete hain to phir bhee mandee mein kyon kisaan ka naach khareedenge to dheere-dheere maananeey khatm ho jae aur aavashyak vastu adhiniyam jo hai to tere ham phasalen hain dalahanee phasalen hain aaloo pyaaj jaisee sabjiyaan hain to inaka bhandaar karane kee sarakaar ne khulee chhoot de dee hai to dekhie kisaanon ka anaaj ya jo sabjee hai to phasal aane par 10 ya ₹12 kilo mein bikatee hain to isase kya hai ki jab bade bade vyaapaaree isaka bhandaaran karenge to phir bhej ise adhik se adhik mooly par bhejenge to isase kisaan ko koee phaayada nahin hai aur janata ko bhee koee phaayada nahin hai is sirph vyaapaariyon ko hee laabh hone vaala hai to is hisaab se yah teenon kaanoon vyaapaariyon ko hee laabh pahunchaate poonjee patiyon ko kyonki kisaan to bhandaaran kar nahin sakata to is hisaab se sarakaar ko in teenon kaanoonon ko vaapas le lena chaahie ab sarakaar kah rahee hai ki ham dedh saal ke lie rok laga dete hain to dekhie doston jab koee bhee beemaaree hai to aap usaka ilaaj nahin kar raha hai use jad se khatm nahin kar raha hai usako kuchh samay ke lie ataka raha hai to beemaaree badhatee jaegee to aise mein kisaan ka yoonus khaan hai aur sarakaar ka bhee muskaan hai aane vaale chunaav mein koee bhee kisaan beejepee ko saport nahin karega

bolkar speaker
किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं?Kisaanon Kee Krshi Kaanoonon Ko Sarakaar Se Vaapas Lene Kee Jid Ko Aap Kaise Samajhate Hain
Er.Awadhesh kumar Bolkar App
Top Speaker,Level 66
सुनिए Er.Awadhesh जी का जवाब
Unknown
2:56
स्मिता जी के द्वारा यह रिक्वेस्ट प्रश्न है कि किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जीत को आप कैसे समझते हैं मैं जीत की बात करूं तो किसानों की जो जिद नहीं है उनका विश्वास है कि उनके साथ गलत हो रहा है वह गलत अपने हक की लड़ाई को मांग रहे कि हमें जो पहले था वही दो मत ज्यादा कुछ दो तुम्हें इसी माध्यम से आप को समझाना चाहता हूं कि जो भी एक आज पहले तो केवल बॉर्डर तक ही सीमित था जो आपका गाजीपुर बॉर्डर है वहां पर ही सीमित था लेकिन अब देखा जाए तो पूरी प्रदेश में हर प्रदेश में स्थिति बहुत ज्यादा बदल रही है किसानों को समर्थन देने के लिए बहुत सारे लोग चाहे यूपी हो बिहार हो राजस्थान व मध्यप्रदेश से कई प्रदेश के लोग अब धीरे-धीरे इकट्ठा हो रहे उनका समर्थन करें इसी तरह कल आपने देखा होगा कि बिहार राज्य के पटना शहर में मानव श्रृंखला बनाकर सबसे बड़ी मानव श्रृंखला बनाकर किसानों का समर्थन किया गया है और उन्होंने कहा जाए कि वहां की जो गठबंधन सरकार थी कई पार्टियां बीजेपी को छोड़ कई पार्टियां वहां की मानव श्रृंखला में सम्मिलित रही है और किसानों को की हौसला बढ़ाने के लिए कही कि हां एक गलत है और किसानों की बात सुनी चाहिए और सरकार को जो वापस लेना चाहिए पता पूरी तरह से कानून को रद्द करना चाहिए तुम्हें बस एक जिद नहीं मानूंगा मैं बस आपसे यही कहना चाहूंगा और इस्मिता जी आपको यह कहना है कि ईद नहीं है यह हम अपने हक की लड़ाई है जो हमें गलत होता जा रहा है क्योंकि हम एक लोकतंत्र में रह रहे हमारे पास संविधान है हम हमें पूरा अधिकार है कि हमें हमारे साथ जो गलत हो रहा है उसके लिए हम पर्सनली एक आदमी के साथ भी गलत है वह संविधान के थ्रू लड़ सकता है संविधान के धूप बता सकता है कि हां मेरे साथ गलत हो रहा है और संविधान ही उसे हक की लड़ाई देता है किसी तरह किसानों की यहां तो किसान समुदाय की बात हो रही है जिससे हमें अनूप जाया जाता है मिलता है और हम किसानों के द्वारा ही सस्ते अनाज पाते हैं क्योंकि वह ज्यादा से ज्यादा इससे अच्छी और जाति देते हैं और हम भी उसका सुख मिलता है और सबसे बड़ी बात है कि हमारा जो भारत देश है वह किसान प्रधान देश है और किसान प्रधान देश में रहते हुए भी ऐसी स्थिति है जो हम आप सभी जानते हैं कि कहीं ना कहीं गलत हो रहा है और उसके साथ हर एक नागरिक के साथ गलत हो रहा है उनके साथ गलत होगा तो आपके साथ भी गलत होगा तो एक बात और मैं इसी से कहूंगा कि जी तो नहीं है उनका विश्वास है उनका भरोसा है उनके साथ गलत हो रहा है वह अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं उसमें सभी को सहयोग करना
Smita jee ke dvaara yah rikvest prashn hai ki kisaanon kee krshi kaanoonon ko sarakaar se vaapas lene kee jeet ko aap kaise samajhate hain main jeet kee baat karoon to kisaanon kee jo jid nahin hai unaka vishvaas hai ki unake saath galat ho raha hai vah galat apane hak kee ladaee ko maang rahe ki hamen jo pahale tha vahee do mat jyaada kuchh do tumhen isee maadhyam se aap ko samajhaana chaahata hoon ki jo bhee ek aaj pahale to keval bordar tak hee seemit tha jo aapaka gaajeepur bordar hai vahaan par hee seemit tha lekin ab dekha jae to pooree pradesh mein har pradesh mein sthiti bahut jyaada badal rahee hai kisaanon ko samarthan dene ke lie bahut saare log chaahe yoopee ho bihaar ho raajasthaan va madhyapradesh se kaee pradesh ke log ab dheere-dheere ikattha ho rahe unaka samarthan karen isee tarah kal aapane dekha hoga ki bihaar raajy ke patana shahar mein maanav shrrnkhala banaakar sabase badee maanav shrrnkhala banaakar kisaanon ka samarthan kiya gaya hai aur unhonne kaha jae ki vahaan kee jo gathabandhan sarakaar thee kaee paartiyaan beejepee ko chhod kaee paartiyaan vahaan kee maanav shrrnkhala mein sammilit rahee hai aur kisaanon ko kee hausala badhaane ke lie kahee ki haan ek galat hai aur kisaanon kee baat sunee chaahie aur sarakaar ko jo vaapas lena chaahie pata pooree tarah se kaanoon ko radd karana chaahie tumhen bas ek jid nahin maanoonga main bas aapase yahee kahana chaahoonga aur ismita jee aapako yah kahana hai ki eed nahin hai yah ham apane hak kee ladaee hai jo hamen galat hota ja raha hai kyonki ham ek lokatantr mein rah rahe hamaare paas sanvidhaan hai ham hamen poora adhikaar hai ki hamen hamaare saath jo galat ho raha hai usake lie ham parsanalee ek aadamee ke saath bhee galat hai vah sanvidhaan ke throo lad sakata hai sanvidhaan ke dhoop bata sakata hai ki haan mere saath galat ho raha hai aur sanvidhaan hee use hak kee ladaee deta hai kisee tarah kisaanon kee yahaan to kisaan samudaay kee baat ho rahee hai jisase hamen anoop jaaya jaata hai milata hai aur ham kisaanon ke dvaara hee saste anaaj paate hain kyonki vah jyaada se jyaada isase achchhee aur jaati dete hain aur ham bhee usaka sukh milata hai aur sabase badee baat hai ki hamaara jo bhaarat desh hai vah kisaan pradhaan desh hai aur kisaan pradhaan desh mein rahate hue bhee aisee sthiti hai jo ham aap sabhee jaanate hain ki kaheen na kaheen galat ho raha hai aur usake saath har ek naagarik ke saath galat ho raha hai unake saath galat hoga to aapake saath bhee galat hoga to ek baat aur main isee se kahoonga ki jee to nahin hai unaka vishvaas hai unaka bharosa hai unake saath galat ho raha hai vah apane hak kee ladaee lad rahe hain usamen sabhee ko sahayog karana

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किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं?Kisaanon Kee Krshi Kaanoonon Ko Sarakaar Se Vaapas Lene Kee Jid Ko Aap Kaise Samajhate Hain
Sonu Malviya Bolkar App
Top Speaker,Level 11
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Study
1:19

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किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं?Kisaanon Kee Krshi Kaanoonon Ko Sarakaar Se Vaapas Lene Kee Jid Ko Aap Kaise Samajhate Hain
DINESH SHEKHAWAT Bolkar App
Top Speaker,Level 11
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Privet sector
2:58
नैंसी गहलोत और अंशुल मालवीय जी के द्वारा अनुरोध सवाल है कि किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की विधि को आप कैसे समझते हैं देखिए दोस्तों वैसे तो मैं भी किसान का ही बैठा हूं और यह जो नई किसी कानून बिल पारित किए गए हैं यह अगर सही मायने में देखा जाए तो किसानों के लिए काफी हद तक फायदेमंद होंगे क्योंकि अभी तक जो किसान जो भी कुछ होता है जो भी कुछ फसल उगाता है उसको एक सीमित दायरे में ही भेज सकता है लेकिन अब तो यह बिल बनाए गए हैं इन में किसानों को काफी राइट्स दिए गए हैं और मतलब अपनी जो फसल है वह एक राज्य से दूसरे राज्य में भेज सकता है उसको पूरी आजादी रहेगी और दूसरा एक कांटेक्ट फॉर्मिंग है उसका भी मतलब काफी हद तक फायदेमंद होगा मतलब जो भी उस अपनी जो जो फसल होगा आएगा उसका कांटेक्ट होगा और केवल फसल का ही कांटेक्ट होगा ऐसा नहीं है कि जमीन का होगा यह हो ही नहीं सकता और कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग में बहुत ही सेफ्टी दी गई है किसानों को ऐसा नहीं है कि केवल फॉर्मेलिटी है मतलब पूरा सेफ्टी रखा गया है और जो भी मतलब किसान इसी तरह से मतलब एक व्यापारी के तौर पर काम करेगा और इससे क्या होगा कि किसानों की जो अभी तक जो स्थिति है उसमें उससे मतलब ज्यादा कुछ विकास हो नहीं पा रहा था वही की मजबूरी में उसको एक को एक सीमित दायरे में ही अपनी फसल को दिखाना पड़ा था लेकिन अब जो यह बिल पारित हुए इनसे पूरी उनको आजादी रहेगी और मतलब जो भी जो फसल है वह भी उनकी तरह से व्यापार के रूप में उसका जो फसल है उसका अपना वह अच्छा दाम अपनी इच्छा से अपने अच्छे दाम पर बिक सकता है और जिस तरीके से अभी आप लोगों ने देखा होगा कि सभी जनवरी पर यह जो लाल किले पर एक विशेष धर्म का झंडा फहराया गया है इससे लगता तो नहीं है कि यह किसान आंदोलन है तो अगर इतने ही यह सानू के लिए फायदेमंद नहीं होता तो पूरे देश से किसान वहां मिलते हैं लेकिन कुछ ही राज्यों के किसान वहां पर हैं धन्यवाद दोस्तों
Nainsee gahalot aur anshul maalaveey jee ke dvaara anurodh savaal hai ki kisaanon kee krshi kaanoonon ko sarakaar se vaapas lene kee vidhi ko aap kaise samajhate hain dekhie doston vaise to main bhee kisaan ka hee baitha hoon aur yah jo naee kisee kaanoon bil paarit kie gae hain yah agar sahee maayane mein dekha jae to kisaanon ke lie kaaphee had tak phaayademand honge kyonki abhee tak jo kisaan jo bhee kuchh hota hai jo bhee kuchh phasal ugaata hai usako ek seemit daayare mein hee bhej sakata hai lekin ab to yah bil banae gae hain in mein kisaanon ko kaaphee raits die gae hain aur matalab apanee jo phasal hai vah ek raajy se doosare raajy mein bhej sakata hai usako pooree aajaadee rahegee aur doosara ek kaantekt phorming hai usaka bhee matalab kaaphee had tak phaayademand hoga matalab jo bhee us apanee jo jo phasal hoga aaega usaka kaantekt hoga aur keval phasal ka hee kaantekt hoga aisa nahin hai ki jameen ka hoga yah ho hee nahin sakata aur kontraikt phaarming mein bahut hee sephtee dee gaee hai kisaanon ko aisa nahin hai ki keval phormelitee hai matalab poora sephtee rakha gaya hai aur jo bhee matalab kisaan isee tarah se matalab ek vyaapaaree ke taur par kaam karega aur isase kya hoga ki kisaanon kee jo abhee tak jo sthiti hai usamen usase matalab jyaada kuchh vikaas ho nahin pa raha tha vahee kee majabooree mein usako ek ko ek seemit daayare mein hee apanee phasal ko dikhaana pada tha lekin ab jo yah bil paarit hue inase pooree unako aajaadee rahegee aur matalab jo bhee jo phasal hai vah bhee unakee tarah se vyaapaar ke roop mein usaka jo phasal hai usaka apana vah achchha daam apanee ichchha se apane achchhe daam par bik sakata hai aur jis tareeke se abhee aap logon ne dekha hoga ki sabhee janavaree par yah jo laal kile par ek vishesh dharm ka jhanda phaharaaya gaya hai isase lagata to nahin hai ki yah kisaan aandolan hai to agar itane hee yah saanoo ke lie phaayademand nahin hota to poore desh se kisaan vahaan milate hain lekin kuchh hee raajyon ke kisaan vahaan par hain dhanyavaad doston

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किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं?Kisaanon Kee Krshi Kaanoonon Ko Sarakaar Se Vaapas Lene Kee Jid Ko Aap Kaise Samajhate Hain
Aarti Mishra Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए Aarti जी का जवाब
Teacher
1:41
किसानों की कृषि कानून को सरकार से वापस लेने की जिद को आप क्या समझते हैं यह प्रश्न मुझसे किया गया है तो सबसे पहले यह प्रश्न करने के लिए आप सभी का धन्यवाद कि आपने मुझे इस लायक समझा दूसरा कि यह जो किसान कानून आया है इसके विषय में अधिकतर किसानों को कोई जानकारी ही नहीं है जो किसान गरीब है और जो सिर्फ किस खेती पर ही निर्भर है उन्हें कुछ इस तरह से डराया गया है कि आप की फसलों का जो पूरा मूल्य है वह आपको नहीं मिलेगा सरकार आपकी कोई मदद नहीं करेगी तो कुछ इस तरह की अफवाह है उनकी कानों में डाल दी गई है जो कि गलत है और यह सब सिर्फ जो मिडिलमैन है जिन्हें बीच में कुछ ना कुछ खाने के लिए मिलता था लेकिन इस कानून की वजह से उन्हें नहीं मिलेगा तो यह उनके द्वारा बनाया गया यह जो फर्जी क्या सकते हैं जो अफवाह फैला दी है और जिस कारण बिचारे भोले भाले से जो किसान हैं वह उनके चंगुल में फंस गए हैं और वह धरना वगैरह का कार्य कर रहे हैं आपको यह बता देना चाहती हूं कि जो हमारी सरकार जो अभी वर्तमान सरकार चल रही है वह कभी भी किसानों की हित का नहीं सोचेगी उन्होंने हमेशा सबको प्रोत्साहन ही दिया है तो आप इस विषय में बिल्कुल भी चिंता ना करें कि ऐसा कोई कानून आएगा जिससे आप की फसलों की आपको पूर्ण मूल्य नहीं मिलेंगे इसलिए सरकार पर भरोसा रखें बाकी आप खुद ही समझदार है थैंक यू
Kisaanon kee krshi kaanoon ko sarakaar se vaapas lene kee jid ko aap kya samajhate hain yah prashn mujhase kiya gaya hai to sabase pahale yah prashn karane ke lie aap sabhee ka dhanyavaad ki aapane mujhe is laayak samajha doosara ki yah jo kisaan kaanoon aaya hai isake vishay mein adhikatar kisaanon ko koee jaanakaaree hee nahin hai jo kisaan gareeb hai aur jo sirph kis khetee par hee nirbhar hai unhen kuchh is tarah se daraaya gaya hai ki aap kee phasalon ka jo poora mooly hai vah aapako nahin milega sarakaar aapakee koee madad nahin karegee to kuchh is tarah kee aphavaah hai unakee kaanon mein daal dee gaee hai jo ki galat hai aur yah sab sirph jo midilamain hai jinhen beech mein kuchh na kuchh khaane ke lie milata tha lekin is kaanoon kee vajah se unhen nahin milega to yah unake dvaara banaaya gaya yah jo pharjee kya sakate hain jo aphavaah phaila dee hai aur jis kaaran bichaare bhole bhaale se jo kisaan hain vah unake changul mein phans gae hain aur vah dharana vagairah ka kaary kar rahe hain aapako yah bata dena chaahatee hoon ki jo hamaaree sarakaar jo abhee vartamaan sarakaar chal rahee hai vah kabhee bhee kisaanon kee hit ka nahin sochegee unhonne hamesha sabako protsaahan hee diya hai to aap is vishay mein bilkul bhee chinta na karen ki aisa koee kaanoon aaega jisase aap kee phasalon kee aapako poorn mooly nahin milenge isalie sarakaar par bharosa rakhen baakee aap khud hee samajhadaar hai thaink yoo

bolkar speaker
किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं?Kisaanon Kee Krshi Kaanoonon Ko Sarakaar Se Vaapas Lene Kee Jid Ko Aap Kaise Samajhate Hain
neelam mishra Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए neelam जी का जवाब
Job
2:33
गुड मॉर्निंग फ्रेंड्स एक मित्र ने सवाल पूछा है किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जीत को आप क्या समझते हैं तो दोस्तों मैं जहां तक मुझसे पूछा जाए तो मैं बिल्कुल गलत समझते क्योंकि जो वहां पर किसान बैठे हैं आ जाओ यह सारी चीजें हो रही हैं हड़ताल हो रही है और बाकी सब जो मार्च में बैठे हुए हैं तो दोस्तों क्या उन सारे किसानों से पूछा जाए तो क्या उन्हें पता है कि किस चीज के लिए हम बैठे हैं क्या चाहते हैं वह नहीं वहां पर जो कुछ दबंग लोग हैं कुछ जो नेता है नेता लोग हैं कुछ लोग जो किसान के लीडर उन लोगों की एक दिन उनका अपना एक स्वार्थ है जो और सब को लेकर और सबको इतनी परेशानियों में डाल रखा है बाकी कोई भी कानून कृषि और किसानों के लिए कृषि कानून कोई भी किसानों के उनके लिए ऐसा नहीं बनाया कि उनका उससे और नहीं तो उनको हित में ही देखकर बनाया गया है लेकिन यह कुछ लोगों की जीत कुछ दबंग की जीत कुछ राष्ट्रीय नेताओं की जीत के आगे यह सारे लोग पीसने हैं और इसे सब को परेशानी हो रही है तो मैं बिल्कुल इसको गलत समझती हूं ऐसा कुछ भी नहीं होना चाहिए क्योंकि सरकार एक की भलाई के बारे में नहीं सोच सकती उसको पूरे देश की भलाई के बारे में सोचना होता है और वह जो फैसला करेगी तो यह जरूरी नहीं है कि वह फैसला हर व्यक्ति के लिए सहयोग कुछ फैसला जो पूरे देश को देखकर अगर कोई फैसला लिया जाएगा तो उस में कुछ लोगों को वह नुकसान भी दे सकता है तो एक इंसान एक फैमिली का जो मुखिया होता है उसमें चार 10 लोग होते हैं वह 10 लोगों को खुश नहीं रख सकता है तो फिर 1:00 पीएम से हम कैसे उम्मीद लगा सकते हैं कि वह पूरे देश की खुशी के बारे में ही सोचे कुछ उसके फैसले ऐसे भी होंगे जो सबको तकलीफ देंगे लेकिन वो अच्छा होगा तो इस चीज को समझना चाहिए बट अगर कोई नहीं समझ रहा है तो इसमें मैं बिल्कुल इस चीज को गलत समझती हूं पर मुझसे पूछा जाए ऐसा नहीं होना चाहिए अपनी सीमा में रहकर ही कोई चीज करनी चाहिए यह सारी चीजें जो हो रही हो गलत हो रहे हैं और क्या यह सारे जो वहां पर बैठे हैं किसान को मालूम है क्यों किस लिए लड़ रहे हैं बिल्कुल नहीं उनको खुद नहीं मालूम है कौन इसलिए वहां लाया गया है और क्या हो रहा है कुछ नहीं बस वह खड़े हैं लोगों का पीछे बस यही हो रहा है इसमें सब अपने जो राष्ट्रीय नेता आए हैं नेता लोग हैं जो दबंग लीडर लोग हैं वह अपना अपना बस रोटियां सेक रहे हैं उसके पीछे आम जनता परेशान हो रहे हैं धन्यवाद दोस्तों ऐसा है मेरा जवाब आपको पसंद आएगा अगर पसंद आए तो लाइक और कमेंट करिए और स्क्रीन शॉट
Gud morning phrends ek mitr ne savaal poochha hai kisaanon kee krshi kaanoonon ko sarakaar se vaapas lene kee jeet ko aap kya samajhate hain to doston main jahaan tak mujhase poochha jae to main bilkul galat samajhate kyonki jo vahaan par kisaan baithe hain aa jao yah saaree cheejen ho rahee hain hadataal ho rahee hai aur baakee sab jo maarch mein baithe hue hain to doston kya un saare kisaanon se poochha jae to kya unhen pata hai ki kis cheej ke lie ham baithe hain kya chaahate hain vah nahin vahaan par jo kuchh dabang log hain kuchh jo neta hai neta log hain kuchh log jo kisaan ke leedar un logon kee ek din unaka apana ek svaarth hai jo aur sab ko lekar aur sabako itanee pareshaaniyon mein daal rakha hai baakee koee bhee kaanoon krshi aur kisaanon ke lie krshi kaanoon koee bhee kisaanon ke unake lie aisa nahin banaaya ki unaka usase aur nahin to unako hit mein hee dekhakar banaaya gaya hai lekin yah kuchh logon kee jeet kuchh dabang kee jeet kuchh raashtreey netaon kee jeet ke aage yah saare log peesane hain aur ise sab ko pareshaanee ho rahee hai to main bilkul isako galat samajhatee hoon aisa kuchh bhee nahin hona chaahie kyonki sarakaar ek kee bhalaee ke baare mein nahin soch sakatee usako poore desh kee bhalaee ke baare mein sochana hota hai aur vah jo phaisala karegee to yah jarooree nahin hai ki vah phaisala har vyakti ke lie sahayog kuchh phaisala jo poore desh ko dekhakar agar koee phaisala liya jaega to us mein kuchh logon ko vah nukasaan bhee de sakata hai to ek insaan ek phaimilee ka jo mukhiya hota hai usamen chaar 10 log hote hain vah 10 logon ko khush nahin rakh sakata hai to phir 1:00 peeem se ham kaise ummeed laga sakate hain ki vah poore desh kee khushee ke baare mein hee soche kuchh usake phaisale aise bhee honge jo sabako takaleeph denge lekin vo achchha hoga to is cheej ko samajhana chaahie bat agar koee nahin samajh raha hai to isamen main bilkul is cheej ko galat samajhatee hoon par mujhase poochha jae aisa nahin hona chaahie apanee seema mein rahakar hee koee cheej karanee chaahie yah saaree cheejen jo ho rahee ho galat ho rahe hain aur kya yah saare jo vahaan par baithe hain kisaan ko maaloom hai kyon kis lie lad rahe hain bilkul nahin unako khud nahin maaloom hai kaun isalie vahaan laaya gaya hai aur kya ho raha hai kuchh nahin bas vah khade hain logon ka peechhe bas yahee ho raha hai isamen sab apane jo raashtreey neta aae hain neta log hain jo dabang leedar log hain vah apana apana bas rotiyaan sek rahe hain usake peechhe aam janata pareshaan ho rahe hain dhanyavaad doston aisa hai mera javaab aapako pasand aaega agar pasand aae to laik aur kament karie aur skreen shot

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किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं?Kisaanon Kee Krshi Kaanoonon Ko Sarakaar Se Vaapas Lene Kee Jid Ko Aap Kaise Samajhate Hain
RAJESH KUMAR PANDEY Bolkar App
Top Speaker,Level 33
सुनिए RAJESH जी का जवाब
Director of Study Gateway+
1:36
प्रश्न यह है कि किसानों की कृषि कानून को सरकार से वापस लेने की जीत को आप कैसे समझते हैं जो बजट पास हुआ है उसमें सरकार ने अपनी मंशा साफ कर दिए आप सब बजट देख सकते हैं आज नेपाल महादेव छाया हुआ है या मीडिया सोशल मीडिया वॉच न्यूज ओं हर जगह बैठ बारे में शासन है तो सरकार ने साफ कर दिया कि औरों के लिए सरकार ने पैकेज की घोषणा भी कर दिया तो इस तरह से सरकार किसानों के लिए ही है किसानों के गंज नहीं है नहीं तो ऐसा काम नहीं करती और राजनीति समय इतनी गंदी हो गई है कि आजकल सिर्फ आजकल मतलब यह है कि सिर्फ किसानों के लिए गरीब के लिए हमेशा वोट मांगे गए हैं इनके लिए काम को जल्दी करता नहीं है लेकिन वोट के लिए सिर्फ बने हुए किसान और गरीब सिर्फ विरोध के लिए बने हैं जो सरकार प्रिंट में चल रही है उसके विरोध में किसानों को उठा जाओ किसानों को उठा दो गरीब लोगों को उठा दो कि किसान भाइयों के लिए कर रही है वह सारी सरकार के लिए यह कह कर रही है तमाम तरह की अटकलें फैला दो सोशल मीडिया के द्वारा और इधर उधर गलत न्यूज़ पहला दो और उसका शराब देती रहें बिल्कुल होगा गवर्नमेंट कभी भी किसानों के बिल नहीं जा सकती है चक्का जाम करके ठीक है कि आजादी की लड़ाई नहीं है यह फर्जी लड़ाई है चक्का जाम कर दो लाल किले पर चले जाओ झंडा पारा दो सरकारी बसों को तोड़कर नुकसान पहुंचा दो यह सब गलत है
Prashn yah hai ki kisaanon kee krshi kaanoon ko sarakaar se vaapas lene kee jeet ko aap kaise samajhate hain jo bajat paas hua hai usamen sarakaar ne apanee mansha saaph kar die aap sab bajat dekh sakate hain aaj nepaal mahaadev chhaaya hua hai ya meediya soshal meediya voch nyooj on har jagah baith baare mein shaasan hai to sarakaar ne saaph kar diya ki auron ke lie sarakaar ne paikej kee ghoshana bhee kar diya to is tarah se sarakaar kisaanon ke lie hee hai kisaanon ke ganj nahin hai nahin to aisa kaam nahin karatee aur raajaneeti samay itanee gandee ho gaee hai ki aajakal sirph aajakal matalab yah hai ki sirph kisaanon ke lie gareeb ke lie hamesha vot maange gae hain inake lie kaam ko jaldee karata nahin hai lekin vot ke lie sirph bane hue kisaan aur gareeb sirph virodh ke lie bane hain jo sarakaar print mein chal rahee hai usake virodh mein kisaanon ko utha jao kisaanon ko utha do gareeb logon ko utha do ki kisaan bhaiyon ke lie kar rahee hai vah saaree sarakaar ke lie yah kah kar rahee hai tamaam tarah kee atakalen phaila do soshal meediya ke dvaara aur idhar udhar galat nyooz pahala do aur usaka sharaab detee rahen bilkul hoga gavarnament kabhee bhee kisaanon ke bil nahin ja sakatee hai chakka jaam karake theek hai ki aajaadee kee ladaee nahin hai yah pharjee ladaee hai chakka jaam kar do laal kile par chale jao jhanda paara do sarakaaree bason ko todakar nukasaan pahuncha do yah sab galat hai

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किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं?Kisaanon Kee Krshi Kaanoonon Ko Sarakaar Se Vaapas Lene Kee Jid Ko Aap Kaise Samajhate Hain
rohit paste Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए rohit जी का जवाब
Unknown
1:34
सरकार बनने वाले थे और भारत के इंसान के हित के लिए लेती है हमेशा लगता है लेकिन कुछ कुछ जो इलाके रहते हैं जैसे कि हरेक राज्य अलग अलग उत्पादित करता है महाराष्ट्र जैसे कि मुझे लगता है ज्यादा से ज्यादा उसका उत्पादन करता है गन्ने का और उसके बाद गुजरात गेहूं का उत्पादन करता है उत्तर प्रदेश में गेहूं का उत्पादन करता है हर एक राज्य के कुछ ना कुछ खासियत होती है उसी तरह अगर कोई बिल पास हो गया तो उसमें किस राज्य का फायदा होता है तो किसी को थोड़ा नुकसान होता है या किसी कुछ बहुत ज्यादा नुकसान होने की संभावना रहती है लेकिन सबके हित में काम करने के लिए सरकार को अब इसी तरह से फैसला लेना जरूरी होता है कुछ कारणों की वजह से कुछ राज्यों के वेस्ले गलत बन सकते हैं इसलिए यह आंदोलन हो सकता है और हो रहा है लेकिन हर हर वक्त कुछ आंदोलन करके ही या कुछ तहस-नहस भारत का नुकसान करके ही कानून नहीं बदले सकते या कुछ अच्छे कानून को भी कुछ गलत लोगों के कारणों से बदला जा रहा है ऐसा भी होता है
Sarakaar banane vaale the aur bhaarat ke insaan ke hit ke lie letee hai hamesha lagata hai lekin kuchh kuchh jo ilaake rahate hain jaise ki harek raajy alag alag utpaadit karata hai mahaaraashtr jaise ki mujhe lagata hai jyaada se jyaada usaka utpaadan karata hai ganne ka aur usake baad gujaraat gehoon ka utpaadan karata hai uttar pradesh mein gehoon ka utpaadan karata hai har ek raajy ke kuchh na kuchh khaasiyat hotee hai usee tarah agar koee bil paas ho gaya to usamen kis raajy ka phaayada hota hai to kisee ko thoda nukasaan hota hai ya kisee kuchh bahut jyaada nukasaan hone kee sambhaavana rahatee hai lekin sabake hit mein kaam karane ke lie sarakaar ko ab isee tarah se phaisala lena jarooree hota hai kuchh kaaranon kee vajah se kuchh raajyon ke vesle galat ban sakate hain isalie yah aandolan ho sakata hai aur ho raha hai lekin har har vakt kuchh aandolan karake hee ya kuchh tahas-nahas bhaarat ka nukasaan karake hee kaanoon nahin badale sakate ya kuchh achchhe kaanoon ko bhee kuchh galat logon ke kaaranon se badala ja raha hai aisa bhee hota hai

bolkar speaker
किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं?Kisaanon Kee Krshi Kaanoonon Ko Sarakaar Se Vaapas Lene Kee Jid Ko Aap Kaise Samajhate Hain
Manju Bolkar App
Top Speaker,Level 88
सुनिए Manju जी का जवाब
Unknown
5:47
आप सब को मेरा प्यार भरा नमस्कार तो प्रश्न जो है मुझ से अनुरोध किया गया है काफी लोगों ने मुझसे इस प्रश्न का अनुरोध किया है तो चलिए बात करते हैं किसान की कृषि कानून को लेकर तो मेरे विचार में प्रकट करना चाहूंगी फिर देखिए आज माहौल इतना अच्छा नहीं है यह कानून को लेकर और लोग सड़क पर आ गए हैं जो किसान है वह दुखी है तो मेरे ख्याल से एक तो कानून वापस ले लेना चाहिए सरकार ने अपनी जिद छोड़ कर वापस ले लेना चाहिए दूसरा इस कानून जो बना है मतलब जो विधायक में काफी सारे सुधार होनी चाहिए कि यह देखने में तो ऐसा लगता है कि काफी किसानों को फायदा करेगा लेकिन जब आप देखेंगे इसमें काफी सारे छोड़ है जैसे कि पहले विधायक ने यह कह रहा है कि आवश्यक वस्तु अधिनियम मतलब एसेंशियल कमोडिटीज अमेंडमेंट बिल 2020 और तू जहां पर यह है अब बता रहा है कि किसान को एक अधिकार दिया जा रहा है कि जो आवश्यक वस्तुओं का किसान अपने भंडारण कर सकता है पहले ऐसा नहीं होता तो पहले नहीं कर सकता नहीं कर सकता था लेकिन अभी कर सकता है कि तहत कर सकता है यह नियम बताया गया है लेकिन यहां पर ही जो है भंडारण करने के लिए जगह होनी चाहिए और संसाधनों की सुरक्षा भी देख नीचे क्या आपको लगता है कि किसान के पास इतनी जगह होगी कि जो अपने उत्पाद है उसको भंडारण कर सकते हैं और उसको चीजों को नष्ट ना होने से बचाए रख सकते हैं तो यह काम तो है मिडिल मैन कर्ता था मतलब डीलर्स करते थे तो व्यापारी करते थे तो यहां पर भोली है किसान के पास इतनी जगह उपलब्ध नहीं है और सरकार कोई मदद नहीं करे कोई जगह उपलब्ध करके दे नहीं रही है तू यहां पर यही कि किसानों को भंडारण करने से फायदा क्या होगा उन चीजों का नष्ट ना हो ना हो इस तरह के प्रबंध करने के लिए भी क्या किसान सक्षम है वह तो अपनी रोजी रोटी के लिए देखिए और इतना मेहनत करता है और जैसे उत्पाद होता है वह कोशिश करता कि बेचने की कोशिश करते भंडारण करके करेगा क्या तो यह देखिए यह पहला विधायक में झूल आपको समझ में आ गया होगा दूसरा जो है कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के ऊपर है मतलब मूल्य आश्वासन दिया जाता है जहां पर होता ऐसा है कि जब किसी भी कमेटी की किसी भी चीज की जो वॉल्यूम बढ़ जाती है तो अब मान लीजिए आगे हूं ₹25 किलो बिक रहा है तो उससे उसकी मत की सोच कर और सुनना शुरू कर देते हैं लेकिन यह गेहूं के बीज बोने के पहले ही कीमत तय की जाती है तो यहां पर किसान को फायदा हो रहा है लेकिन यहां पर भी एक फूल है जो कॉन्ट्रैक्ट पर काफी सारे पेपर होते हैं सिग्नेचर होते तो किसान क्या सक्षम है यह सब जानकारी हासिल करके मतलब जो कॉन्ट्रैक्ट पर लिखा है वह समझने लायक भाषा में होती है क्या किसान समझ पाएगा यह एक दूसरा यह कि अगर मान लीजिए मार्केट में जब कटाई होती है मान लीजिए कि मान के चलते कि गेंहू की बात करते हैं और जैसे कि गेहूं की कटाई होगी तो अगर मान लीजिए उसकी कीमत मार्केट में बिक रहा है तो थी जो कॉन्ट्रैक्ट में लिखा है ₹25 तो किसान को भी ₹25 में बेचना पड़ेगा उसे उसकी उसके उसने साइन किया है कॉन्ट्रैक्ट में तो ऐसे घाटा हो सकता है तो यहां पर थोड़ी बोले तो दिखे इस तरह से किसान फस जाता है घर कांटेक्ट फोन पानी में चले जाता है कल मार्केट में रेट कम हो रहा है तू ठीक है वह फायदा हो रहा है किसान को लेकिन अगर मार्केट में रेट बढ़ गया तू बेच नहीं सकता कहीं और नहीं सकता क्योंकि पहले से कॉन्ट्रैक्ट दिया हुआ है तो यहां पर कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग एक तरह से फायदेमंद है या नुकसान भी दे सकता है तो इसमें भी थोड़े बहुत तो सुधार होनी चाहिए औरत इतरात नाम जो अमेंडमेंट बिल है वह है कृषि उत्पादन और व्यापार और वाणिज्य के बारे में इंदल फार्मर्स पड़ी उस ट्रेड एंड कमर्स प्रमोशन के बारे में बिल है यहां पर क्या है जी के यहां पर जो किसान है वह स्वतंत्र हैं अपने उत्पाद को मंडी में ना भेजते हुए अब कहीं भी देश में कहीं भी जाकर भेज सकता है तो क्या आज तक किसान अपने उत्पाद को कहीं और नहीं देता देख रहे थे कि अगर देखेंगे अगर आप डाटा देखेंगे तो 6% ही जो है किसान जो है मंडी में बैठा था कि वह अपने हिसाब से बाहर जा कर भेजता था 94% तो यह बिना बिल के चल रहा था 2 दिन लाने की जरूरत क्या है एक तो एक था और जून और मैं ऐसे ही विधायक लाने की जरूरत तो बिल्कुल ही महसूस नहीं हो रही थी लेकिन अगर हम एक कानून बन गया है लेकिन किसान इससे खुश नहीं है तो यह कानून वापस ले लेना चाहिए मेरे या फिर इसमें जो झोल दिखाई दिया जैसे मैंने आपको समझाया है जो झूल है उसे सुधार लाना चाहिए उसमें बदलाव लाना चाहिए और एक तो एमएसपी जो है यह पिक देना चाहिए यही किसान का कहना है कि जो एमएसपी है उसको तय की जाए फिक्स हो जाए जैसे की एमआरपी जो हम चीजें खरीदने जाते हैं एमआरपी से खरीदते हैं वैसे किसान जो उत्पाद करता है उस पर कोई मिनिमम प्राइस पिक नहीं होता है कुछ लोग हैं वह कम कीमत में खरीद लेते हैं कुछ लोग हैं ज्यादा कीमत में फेमस फ्रीफिक्स किया जाना यह समझ के दिमाग से तो मेरे ख्याल से जो दिमाग से उसे मान लेना चाहिए नहीं अगर किसान खुश नहीं है इस दिल से तो सरकार को जो छोड़कर यह वापस ले लेना चाहिए मेरे हिसाब से आपका क्या विचार है जरूर मुझे बताइएगा
Aap sab ko mera pyaar bhara namaskaar to prashn jo hai mujh se anurodh kiya gaya hai kaaphee logon ne mujhase is prashn ka anurodh kiya hai to chalie baat karate hain kisaan kee krshi kaanoon ko lekar to mere vichaar mein prakat karana chaahoongee phir dekhie aaj maahaul itana achchha nahin hai yah kaanoon ko lekar aur log sadak par aa gae hain jo kisaan hai vah dukhee hai to mere khyaal se ek to kaanoon vaapas le lena chaahie sarakaar ne apanee jid chhod kar vaapas le lena chaahie doosara is kaanoon jo bana hai matalab jo vidhaayak mein kaaphee saare sudhaar honee chaahie ki yah dekhane mein to aisa lagata hai ki kaaphee kisaanon ko phaayada karega lekin jab aap dekhenge isamen kaaphee saare chhod hai jaise ki pahale vidhaayak ne yah kah raha hai ki aavashyak vastu adhiniyam matalab esenshiyal kamoditeej amendament bil 2020 aur too jahaan par yah hai ab bata raha hai ki kisaan ko ek adhikaar diya ja raha hai ki jo aavashyak vastuon ka kisaan apane bhandaaran kar sakata hai pahale aisa 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bhandaaran karake karega kya to yah dekhie yah pahala vidhaayak mein jhool aapako samajh mein aa gaya hoga doosara jo hai kontraikt phaarming ke oopar hai matalab mooly aashvaasan diya jaata hai jahaan par hota aisa hai ki jab kisee bhee kametee kee kisee bhee cheej kee jo volyoom badh jaatee hai to ab maan leejie aage hoon ₹25 kilo bik raha hai to usase usakee mat kee soch kar aur sunana shuroo kar dete hain lekin yah gehoon ke beej bone ke pahale hee keemat tay kee jaatee hai to yahaan par kisaan ko phaayada ho raha hai lekin yahaan par bhee ek phool hai jo kontraikt par kaaphee saare pepar hote hain signechar hote to kisaan kya saksham hai yah sab jaanakaaree haasil karake matalab jo kontraikt par likha hai vah samajhane laayak bhaasha mein hotee hai kya kisaan samajh paega yah ek doosara yah ki agar maan leejie maarket mein jab kataee hotee hai maan leejie ki maan ke chalate ki genhoo kee baat karate hain aur jaise ki gehoon kee kataee hogee to agar maan leejie usakee keemat 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sakata hai to kya aaj tak kisaan apane utpaad ko kaheen aur nahin deta dekh rahe the ki agar dekhenge agar aap daata dekhenge to 6% hee jo hai kisaan jo hai mandee mein baitha tha ki vah apane hisaab se baahar ja kar bhejata tha 94% to yah bina bil ke chal raha tha 2 din laane kee jaroorat kya hai ek to ek tha aur joon aur main aise hee vidhaayak laane kee jaroorat to bilkul hee mahasoos nahin ho rahee thee lekin agar ham ek kaanoon ban gaya hai lekin kisaan isase khush nahin hai to yah kaanoon vaapas le lena chaahie mere ya phir isamen jo jhol dikhaee diya jaise mainne aapako samajhaaya hai jo jhool hai use sudhaar laana chaahie usamen badalaav laana chaahie aur ek to emesapee jo hai yah pik dena chaahie yahee kisaan ka kahana hai ki jo emesapee hai usako tay kee jae phiks ho jae jaise kee emaarapee jo ham cheejen khareedane jaate hain emaarapee se khareedate hain vaise kisaan jo utpaad karata hai us par koee minimam prais pik nahin hota hai kuchh log hain vah kam keemat mein khareed lete hain kuchh log hain jyaada keemat mein phemas phreephiks kiya jaana yah samajh ke dimaag se to mere khyaal se jo dimaag se use maan lena chaahie nahin agar kisaan khush nahin hai is dil se to sarakaar ko jo chhodakar yah vaapas le lena chaahie mere hisaab se aapaka kya vichaar hai jaroor mujhe bataiega

bolkar speaker
किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं?Kisaanon Kee Krshi Kaanoonon Ko Sarakaar Se Vaapas Lene Kee Jid Ko Aap Kaise Samajhate Hain
lyadav Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए lyadav जी का जवाब
Unknown
2:46
किसानों की कृषि कानूनों को वापस लेने की जिद कह सकते हैं या मोदी जी की जीत कह सकते हैं या भक्तों का फैलाया हुआ भ्रम कह सकते हैं लेकिन हम मेन मुद्दों पर बात करते हैं जो सबसे ज्यादा इंपोर्टेंट है सबसे पहली बात तो किसानों को उनके एमएसपी की सही कीमत नहीं मिलती है और सरकार नहीं देती है उसके बाद पेट्रोल और डीजल डीजल के भाव इस कदर बढ़ा देना जो सीधे तौर पर किसानों को प्रभावित करते हैं उसके बाद भी कुछ लोग मुंहफट यह कह रहे हैं कि किसानों को सही कीमत इसलिए नहीं मिलती क्योंकि बिचौलिए उसे खा जाते हैं इसीलिए कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग जरूरी है एक बात आप बताइए सरकार जिसकी है वहीं इसके लिए जिम्मेदार होगा या कोई और कैसे बिचौलिए कीमत को प्रभावित कर पाते हैं क्या सरकार नजर नहीं रखती यूं तो हर योजनाओं का ढिंढोरा चिल्ला चिल्ला कर पीटा जाता है पर कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग काबिल तो इतनी जल्दी पास करा लिया बिना किसी को बताए क्या सरकार द्वारा कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग को बताने के लिए कोई ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाया गया सरकार की तरफ से कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग तो पहले भी होती थी पर सच बात तो यह है कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग और एमएसपी के समय के बीच में किसानों को एक बार फिर लूट लिया जाएगा जब तक कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग पूरा लागू होगा सरकार को एमएसपी ना देने का सबसे बड़ा फायदा तो यह है कि वह वह ज्यादा कीमत देने से बच जाएगी और कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के नाम पर मोलभाव भी किया जाएगा उनके साथ कॉन्ट्रैक्ट पूरा होगा या नहीं होगा नियम शर्ते कुछ भी तय नहीं है बात आती है समाधान कि हम क्या कर सकते हैं सबसे बड़ी बात सरकार को डायरेक्ट कंपनियों से आर्डर लेकर कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के लिए मंडियों को पूर्वानुमान के अनुसार तैयार रखना होगा जिसमें सरकार भविष्य की जरूरतों और पूर्वानुमान के आधार पर फसलों को उदास सकती है उस अनुसार बीज दे सकती है खाद और बीजों पर सब्सिडी दे सकती है खाद एवं बीज पर सब्सिडी देना सरकार के लिए ही फायदेमंद होगा सरकार एमएसपी के निर्धारण के लिए एक आदर्श ग्राम बना सकती है जहां पर वह खर्चों का विश्लेषण कर खुद से
Kisaanon kee krshi kaanoonon ko vaapas lene kee jid kah sakate hain ya modee jee kee jeet kah sakate hain ya bhakton ka phailaaya hua bhram kah sakate hain lekin ham men muddon par baat karate hain jo sabase jyaada importent hai sabase pahalee baat to kisaanon ko unake emesapee kee sahee keemat nahin milatee hai aur sarakaar nahin detee hai usake baad petrol aur deejal deejal ke bhaav is kadar badha dena jo seedhe taur par kisaanon ko prabhaavit karate hain usake baad bhee kuchh log munhaphat yah kah rahe hain ki kisaanon ko sahee keemat isalie nahin milatee kyonki bichaulie use kha jaate hain iseelie kontraikt phaarming jarooree hai ek baat aap bataie sarakaar jisakee hai vaheen isake lie jimmedaar hoga ya koee aur kaise bichaulie keemat ko prabhaavit kar paate hain kya sarakaar najar nahin rakhatee yoon to har yojanaon ka dhindhora chilla chilla kar peeta jaata hai par kontraikt phaarming kaabil to itanee jaldee paas kara liya bina kisee ko batae kya sarakaar dvaara kontraikt phaarming ko bataane ke lie koee trening prograam chalaaya gaya sarakaar kee taraph se kontraikt phaarming to pahale bhee hotee thee par sach baat to yah hai kontraikt phaarming aur emesapee ke samay ke beech mein kisaanon ko ek baar phir loot liya jaega jab tak kontraikt phaarming poora laagoo hoga sarakaar ko emesapee na dene ka sabase bada phaayada to yah hai ki vah vah jyaada keemat dene se bach jaegee aur kontraikt phaarming ke naam par molabhaav bhee kiya jaega unake saath kontraikt poora hoga ya nahin hoga niyam sharte kuchh bhee tay nahin hai baat aatee hai samaadhaan ki ham kya kar sakate hain sabase badee baat sarakaar ko daayarekt kampaniyon se aardar lekar kontraikt phaarming ke lie mandiyon ko poorvaanumaan ke anusaar taiyaar rakhana hoga jisamen sarakaar bhavishy kee jarooraton aur poorvaanumaan ke aadhaar par phasalon ko udaas sakatee hai us anusaar beej de sakatee hai khaad aur beejon par sabsidee de sakatee hai khaad evan beej par sabsidee dena sarakaar ke lie hee phaayademand hoga sarakaar emesapee ke nirdhaaran ke lie ek aadarsh graam bana sakatee hai jahaan par vah kharchon ka vishleshan kar khud se

bolkar speaker
किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं?Kisaanon Kee Krshi Kaanoonon Ko Sarakaar Se Vaapas Lene Kee Jid Ko Aap Kaise Samajhate Hain
lyadav Bolkar App
Top Speaker,Level 11
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Unknown
2:46
किसानों की कृषि कानूनों को वापस लेने की जिद कह सकते हैं या मोदी जी की जीत कह सकते हैं या भक्तों का फैलाया हुआ भ्रम कह सकते हैं लेकिन हम मेन मुद्दों पर बात करते हैं जो सबसे ज्यादा इंपोर्टेंट है सबसे पहली बात तो किसानों को उनके एमएसपी की सही कीमत नहीं मिलती है और सरकार नहीं देती है उसके बाद पेट्रोल और डीजल डीजल के भाव इस कदर बढ़ा देना जो सीधे तौर पर किसानों को प्रभावित करते हैं उसके बाद भी कुछ लोग मुंहफट यह कह रहे हैं कि किसानों को सही कीमत इसलिए नहीं मिलती क्योंकि बिचौलिए उसे खा जाते हैं इसीलिए कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग जरूरी है एक बात आप बताइए सरकार जिसकी है वहीं इसके लिए जिम्मेदार होगा या कोई और कैसे बिचौलिए कीमत को प्रभावित कर पाते हैं क्या सरकार नजर नहीं रखती यूं तो हर योजनाओं का ढिंढोरा चिल्ला चिल्ला कर पीटा जाता है पर कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग काबिल तो इतनी जल्दी पास करा लिया बिना किसी को बताए क्या सरकार द्वारा कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग को बताने के लिए कोई ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाया गया सरकार की तरफ से कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग तो पहले भी होती थी पर सच बात तो यह है कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग और एमएसपी के समय के बीच में किसानों को एक बार फिर लूट लिया जाएगा जब तक कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग पूरा लागू होगा सरकार को एमएसपी ना देने का सबसे बड़ा फायदा तो यह है कि वह वह ज्यादा कीमत देने से बच जाएगी और कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के नाम पर मोलभाव भी किया जाएगा उनके साथ कॉन्ट्रैक्ट पूरा होगा या नहीं होगा नियम शर्ते कुछ भी तय नहीं है बात आती है समाधान कि हम क्या कर सकते हैं सबसे बड़ी बात सरकार को डायरेक्ट कंपनियों से आर्डर लेकर कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के लिए मंडियों को पूर्वानुमान के अनुसार तैयार रखना होगा जिसमें सरकार भविष्य की जरूरतों और पूर्वानुमान के आधार पर फसलों को उदास सकती है उस अनुसार बीज दे सकती है खाद और बीजों पर सब्सिडी दे सकती है खाद एवं बीज पर सब्सिडी देना सरकार के लिए ही फायदेमंद होगा सरकार एमएसपी के निर्धारण के लिए एक आदर्श ग्राम बना सकती है जहां पर वह खर्चों का विश्लेषण कर खुद से
Kisaanon kee krshi kaanoonon ko vaapas lene kee jid kah sakate hain ya modee jee kee jeet kah sakate hain ya bhakton ka phailaaya hua bhram kah sakate hain lekin ham men muddon par baat karate hain jo sabase jyaada importent hai sabase pahalee baat to kisaanon ko unake emesapee kee sahee keemat nahin milatee hai aur sarakaar nahin detee hai usake baad petrol aur deejal deejal ke bhaav is kadar badha dena jo seedhe taur par kisaanon ko prabhaavit karate hain usake baad bhee kuchh log munhaphat yah kah rahe hain ki kisaanon ko sahee keemat isalie nahin milatee kyonki bichaulie use kha jaate hain iseelie kontraikt phaarming jarooree hai ek baat aap bataie sarakaar jisakee hai vaheen isake lie jimmedaar hoga ya koee aur kaise bichaulie keemat ko prabhaavit kar paate hain kya sarakaar najar nahin rakhatee yoon to har yojanaon ka dhindhora chilla chilla kar peeta jaata hai par kontraikt phaarming kaabil to itanee jaldee paas kara liya bina kisee ko batae kya sarakaar dvaara kontraikt phaarming ko bataane ke lie koee trening prograam chalaaya gaya sarakaar kee taraph se kontraikt phaarming to pahale bhee hotee thee par sach baat to yah hai kontraikt phaarming aur emesapee ke samay ke beech mein kisaanon ko ek baar phir loot liya jaega jab tak kontraikt phaarming poora laagoo hoga sarakaar ko emesapee na dene ka sabase bada phaayada to yah hai ki vah vah jyaada keemat dene se bach jaegee aur kontraikt phaarming ke naam par molabhaav bhee kiya jaega unake saath kontraikt poora hoga ya nahin hoga niyam sharte kuchh bhee tay nahin hai baat aatee hai samaadhaan ki ham kya kar sakate hain sabase badee baat sarakaar ko daayarekt kampaniyon se aardar lekar kontraikt phaarming ke lie mandiyon ko poorvaanumaan ke anusaar taiyaar rakhana hoga jisamen sarakaar bhavishy kee jarooraton aur poorvaanumaan ke aadhaar par phasalon ko udaas sakatee hai us anusaar beej de sakatee hai khaad aur beejon par sabsidee de sakatee hai khaad evan beej par sabsidee dena sarakaar ke lie hee phaayademand hoga sarakaar emesapee ke nirdhaaran ke lie ek aadarsh graam bana sakatee hai jahaan par vah kharchon ka vishleshan kar khud se

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किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं?Kisaanon Kee Krshi Kaanoonon Ko Sarakaar Se Vaapas Lene Kee Jid Ko Aap Kaise Samajhate Hain
Sandeep Goyal Chandigarh  Bolkar App
Top Speaker,Level 11
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Tabla player artist and music home tutor
3:00
नमस्कार यह सवाल मुझसे कई बार पूछा गया तो अलग लोगों ने मुझसे यह सवाल पूछा तो मैं कोशिश करूंगा वैसे मेरे पास कोई जवाब नहीं है क्या मैं कहना भी नहीं चाहते इसके बारे में क्योंकि ऐसी बात नहीं करनी चाहिए पब्लिक की देखो जी भेड़ चाल है राजनीति है ठीक है तू कौन सच्चा है कौन झूठा है किसी के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता मगर हां ताली आपको पता है दोनों हाथों से बजती है एक हाथ से कभी नहीं बजती तो अगर सरकार कुछ सोच ही रही कुछ अच्छा ही सोच रही होगी पहले के जमाने में होता तो आपको पता है राजा जो होता है वह प्रजा के लिए कभी गलत नहीं सोचता था ठीक है तो वहीं दूसरी बात जनता ने ही वोट देकर के माननीय प्रधानमंत्री जी को बिठाया था ठीक है तो आज अगर उन्होंने कोई कानून बनाया तो आज लोग उनके खिलाफ हो गए कल को लोग ही थे उनको भी थाने वाले पद पर बिठाया की है तो आप जैसा वह कर रहे हैं तब इनको करने दीजिए बाकी क्या है क्या नहीं इसके बारे में ज्यादा कुछ नहीं कहूंगा मगर हां जैसा कि इस सवाल के उत्तर में किसी भाई ने कहा था कि ना तो किसान लोगों को पता है इसके बारे में जो कुछ भी है नेता लोग ही कर रहे हैं ठीक है उनको थोड़ी ना कुछ जानकारी है किसानों को क्या होगा ऐसे क्या नहीं होता अगर उनको इतना पता होता तो इतना बवाल क्यों खड़ा होता राजनीति हदीस में कुछ भी हो सकता है अब काम किसी और ने किया नाम हुआ बदनाम किसानों का अब मीडिया भी पूरी सच्चाई नहीं उगलती है ठीक है कोई कुछ बोलता है कोई कुछ बोलता है अब क्या कहीं पैसे कैमरे में चीजें तस्वीरें कैद होती है वह भी नहीं बोलती अब कुछ लोग कहते हैं कि ट्रैक्टरों से किसानों ने किसानों को किसानों ने पुलिस वालों को कुचलने की कोशिश की मारा-पीटा कोफ्तगरी वीडियो में दिखाया भी गया
Namaskaar yah savaal mujhase kaee baar poochha gaya to alag logon ne mujhase yah savaal poochha to main koshish karoonga vaise mere paas koee javaab nahin hai kya main kahana bhee nahin chaahate isake baare mein kyonki aisee baat nahin karanee chaahie pablik kee dekho jee bhed chaal hai raajaneeti hai theek hai too kaun sachcha hai kaun jhootha hai kisee ke baare mein kuchh nahin kaha ja sakata magar haan taalee aapako pata hai donon haathon se bajatee hai ek haath se kabhee nahin bajatee to agar sarakaar kuchh soch hee rahee kuchh achchha hee soch rahee hogee pahale ke jamaane mein hota to aapako pata hai raaja jo hota hai vah praja ke lie kabhee galat nahin sochata tha theek hai to vaheen doosaree baat janata ne hee vot dekar ke maananeey pradhaanamantree jee ko bithaaya tha theek hai to aaj agar unhonne koee kaanoon banaaya to aaj log unake khilaaph ho gae kal ko log hee the unako bhee thaane vaale pad par bithaaya kee hai to aap jaisa vah kar rahe hain tab inako karane deejie baakee kya hai kya nahin isake baare mein jyaada kuchh nahin kahoonga magar haan jaisa ki is savaal ke uttar mein kisee bhaee ne kaha tha ki na to kisaan logon ko pata hai isake baare mein jo kuchh bhee hai neta log hee kar rahe hain theek hai unako thodee na kuchh jaanakaaree hai kisaanon ko kya hoga aise kya nahin hota agar unako itana pata hota to itana bavaal kyon khada hota raajaneeti hadees mein kuchh bhee ho sakata hai ab kaam kisee aur ne kiya naam hua badanaam kisaanon ka ab meediya bhee pooree sachchaee nahin ugalatee hai theek hai koee kuchh bolata hai koee kuchh bolata hai ab kya kaheen paise kaimare mein cheejen tasveeren kaid hotee hai vah bhee nahin bolatee ab kuchh log kahate hain ki traiktaron se kisaanon ne kisaanon ko kisaanon ne pulis vaalon ko kuchalane kee koshish kee maara-peeta kophtagaree veediyo mein dikhaaya bhee gaya

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किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं?Kisaanon Kee Krshi Kaanoonon Ko Sarakaar Se Vaapas Lene Kee Jid Ko Aap Kaise Samajhate Hain
Say Something Sanidhya Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए Say जी का जवाब
Unknown
2:52
किसान देश का अन्नदाता है और वह बिल्कुल भी मूर्ख नहीं है और वह सरकार को यह साबित करना चाहता है कि अगर तुम हमारे खिलाफ को चलाओगे हमसे बिना पूछे तो हम उसे सहन नहीं करेंगे और इसीलिए वह डटे हुए हैं ठंडी बहुत ही कड़क ठंड में दिल्ली की बॉर्डर पर सिंह यूथ सिंह बॉर्डर पर गाजियाबाद में दूसरी बॉर्डर पर और किसान पंजाब हरियाणा के किसान तो दिल्ली आने के 4 महीने पहले से भी प्रोटेक्ट कर रहे थे और काफी लंबी लड़ाई है और किसान तैयार हैं अभी इनसाइट टिक टैक जो किसान नेता है उन्होंने बोला भी है कि हम अक्टूबर तक तैयार हैं ब्रिटिश करने के लिए डटे रहने के लिए बॉर्डर पर सरकारों का दाना पानी बिजली की व्यवस्था इंटरनेट की व्यवस्था से बंद कर रही है लेकिन वह हार नहीं मान रहे हैं तो देखते हैं और इस बार अंतरराष्ट्रीय कलाकारों से अंतरराष्ट्रीय वशिष्ठ अंतरराष्ट्रीय कलाकारों कलाकारों से और दूसरे अन्य पर्सनालिटी से लोगों से भी इन फैक्ट कनाडा के प्राइम मिनिस्टर जस्टिन टेडो ने ट्वीट कर आए किसानों के समर्थन में और काफी सारे कलाकारों ने भी ट्वीट कराएं ह्यूमन राइट्स वॉच करके इंटरनेशनल एनजीओ है जिन्होंने भी ट्वीट करा है तो भारत के ऊपर इंटरनेशनल प्रेशर भी बिल्डो रहा है तो सरकार को सोचना पड़ेगा इस बारे में कि कैसे किसानों की समस्याओं का समाधान करें किसान चाहते हैं कि अगर उनके सेवर में कोई बुलाए तो वह उनसे समझाइश करके उनसे उनके साथ डिस्कस करके आए जो कि फ़िलहाल नहीं हो रहा है तो किसान ट्रैक्टर में किसान लेटे हुए रहेंगे और अभी फिलहाल किसानों की तरफ से आंदोलन कम से कम 6 महीने और चलेगा जैसा कि राकेश ट्रैक्टर जी ने बताया आगे क्या होगा यह देखना रोचक होगा लेकिन वही है कि किसान देश के अन्नदाता हैं वह इतनी भारी ठंड में सड़कों पर सो रहे हैं बिना किसी दीवार के बिना किसी छात्र के और आंकड़ों के अनुसार डेढ़ सौ से 200 के किसान मर चुके हैं इस भारी ठंड की वजह से तो वह भी ध्यान रखा जाए सरकार बहुत ही नासमझी का काम कर रही किसान की बात ना सुनकर और सब देख ही रहे हैं कि क्या हो रहा है किशनपुरा
Kisaan desh ka annadaata hai aur vah bilkul bhee moorkh nahin hai aur vah sarakaar ko yah saabit karana chaahata hai ki agar tum hamaare khilaaph ko chalaoge hamase bina poochhe to ham use sahan nahin karenge aur iseelie vah date hue hain thandee bahut hee kadak thand mein dillee kee bordar par sinh yooth sinh bordar par gaajiyaabaad mein doosaree bordar par aur kisaan panjaab hariyaana ke kisaan to dillee aane ke 4 maheene pahale se bhee protekt kar rahe the aur kaaphee lambee ladaee hai aur kisaan taiyaar hain abhee inasait tik taik jo kisaan neta hai unhonne bola bhee hai ki ham aktoobar tak taiyaar hain british karane ke lie date rahane ke lie bordar par sarakaaron ka daana paanee bijalee kee vyavastha intaranet kee vyavastha se band kar rahee hai lekin vah haar nahin maan rahe hain to dekhate hain aur is baar antararaashtreey kalaakaaron se antararaashtreey vashishth antararaashtreey kalaakaaron kalaakaaron se aur doosare any parsanaalitee se logon se bhee in phaikt kanaada ke praim ministar jastin tedo ne tveet kar aae kisaanon ke samarthan mein aur kaaphee saare kalaakaaron ne bhee tveet karaen hyooman raits voch karake intaraneshanal enajeeo hai jinhonne bhee tveet kara hai to bhaarat ke oopar intaraneshanal preshar bhee bildo raha hai to sarakaar ko sochana padega is baare mein ki kaise kisaanon kee samasyaon ka samaadhaan karen kisaan chaahate hain ki agar unake sevar mein koee bulae to vah unase samajhaish karake unase unake saath diskas karake aae jo ki filahaal nahin ho raha hai to kisaan traiktar mein kisaan lete hue rahenge aur abhee philahaal kisaanon kee taraph se aandolan kam se kam 6 maheene aur chalega jaisa ki raakesh traiktar jee ne bataaya aage kya hoga yah dekhana rochak hoga lekin vahee hai ki kisaan desh ke annadaata hain vah itanee bhaaree thand mein sadakon par so rahe hain bina kisee deevaar ke bina kisee chhaatr ke aur aankadon ke anusaar dedh sau se 200 ke kisaan mar chuke hain is bhaaree thand kee vajah se to vah bhee dhyaan rakha jae sarakaar bahut hee naasamajhee ka kaam kar rahee kisaan kee baat na sunakar aur sab dekh hee rahe hain ki kya ho raha hai kishanapura

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किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं?Kisaanon Kee Krshi Kaanoonon Ko Sarakaar Se Vaapas Lene Kee Jid Ko Aap Kaise Samajhate Hain
Yogi Prashant Nath Bolkar App
Top Speaker,Level 22
सुनिए Yogi जी का जवाब
Business Owner
2:04

bolkar speaker
किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं?Kisaanon Kee Krshi Kaanoonon Ko Sarakaar Se Vaapas Lene Kee Jid Ko Aap Kaise Samajhate Hain
अमित सिंह बघेल Bolkar App
Top Speaker,Level 55
सुनिए अमित जी का जवाब
सामाजिक कार्यकर्ता, मोटिवेशनल स्पीकर 
3:55
देखिए यह प्रश्न मुझसे कई लोगों ने अनूदित किया है कि किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जीत को आप कैसे समझ मेरे समझने के बाद अगर मैं बताऊं लेकिन किसान को अगर किसी चीज में भी तकलीफ है तो उस चीज को भी देखिए वापस ले लेना चाहिए कि एक किसान ने जो चीज होता है उस चीज को हम और आप लेते हैं इस्तेमाल करते हैं आज हम रोटी खा रहे हैं तो किसानों के बदौलत खा रहे हैं वो किसान है वह मतलब अन्नदाता है मैं यही कहना चाहता हूं देखिए क्या है कि देश की जो किसान हैं देश के किसान की में बात कर रहा हूं लगभग कई महीनों से इतनी ठंडी में समझ लीजिए कि ठंड है दिल्ली बॉर्डर में बैठे हुए कई लोगों ने किसान आंदोलन पर दिखी बहुत सवाल उठाएं आंदोलन को लेकर कई नेताओं के विवादित क्या है कि बयान पाकिस्तान और खालिस्तान लिख भी देखिए ढूंढा गया है इसमें मैं क्या है कि भारत में ज्यादातर जो संख्या है वह छोटे किसानों की है ऐसे में दिखे वह इतने संपन्न नहीं है कि मंजू तक आसानी से पहुंच पाए तो यही वजह है कि वह अपने जो अनाज हो आढ़तियों के औने पौने दाम पर बेचे जाते हैं तो ऐसी स्थिति में दिखे सरकार को चाहिए कि मंडी या जो है किसानों तक लाई जाए ना कि उन्हें मंडियों के पास जाना पड़े तो अगर मंडियां नजदीक होगी तो दिखे किसान को फसल की जो कीमत है वह सही मिलेगी एमएसपी की डिलीवरी जो रेट में है वह इजाफा भी देखे होगा देखिए मैं यही बोलना चाहता हूं कि जो यह आंदोलन के क्या है कि कई सकारात्मक पहलू रहे हैं पहले जो किसान एक दूसरे से मतभेद रखते थे वह भी एक मंच पर साथ आ गए एक बड़ी दिखी सफलता है दिखी खालिस्तानी फंडिंग और पाकिस्तानी वार्निंग के नाम पर आप दोनों को बदनाम करने की कोशिश की गई है लेकिन जो किसान है वह डीके रही है वह ऐसा इसलिए कर पाए क्योंकि यह पूरा मोमेंट किसानों के लिए किसानों का ही बनाया हुआ है जो किसान आंदोलन में है वह अपना दिखी सब कुछ दांव पर लगा कर आए हैं तो देखिए मुझे नहीं लगता कानून के सस्पेंशन से कमाने के लिए किसानों ने इस दौरान क्या है कि आंदोलन के नाम पर किसी भी राजनीतिक और धार्मिक संस्थाओं को भी लाभ नहीं लेने दिया देखिए मैं बोलना चाहता आंदोलन के इतिहास में यह दिखे बेहद कमी देखा जाता है आज की डेट में दिखी अभी आप खुद देख लीजिए अब यह देखिए 26 जनवरी था कितनी बड़ी अफवाह फैला दी गई है कि तिरंगा हटाके उन्होंने अपना झंडा लगे नहीं ऐसा कुछ नहीं है तिरंगा उसी जगह जहां था वहीं लगा था उन्होंने जो एक किसान का झंडा होती तो बगल में अपना झंडा गाड़ा था तो यहां राजनीति रोटी से की जा रही है तो आप लोग अफवाह ना पहले तो मैं यही कहूंगा कि जैसे कि प्रश्न आप खुद ही रहेंगे किसानों की किसानों को सरकार से वापस लेने की जिद आप कैसे समझते हैं मैं यही समझता हूं कि किसान को जो हक चाहिए उनको वह हक दे दिया जाए किसान को देखकर परेशान न किया जाए किसान हमें रोटी देती है अनाज हम जो आज इतनी आवाज में बुलंदी आवाज में बोल रहे हैं वह किसान के बदौलत आज उन्होंने अनाज बोला है मैंने रोटी खाई है तब जाकर मैं इस प्रश्न का आंसर दे रहा हो तो किसान को परेशान न किया जाए मैं यही कहूंगा जहां उनको लाभ मीनू को पूरा लाभ दिया जाए जय हिंद जय भारत
Dekhie yah prashn mujhase kaee logon ne anoodit kiya hai ki kisaanon kee krshi kaanoonon ko sarakaar se vaapas lene kee jeet ko aap kaise samajh mere samajhane ke baad agar main bataoon lekin kisaan ko agar kisee cheej mein bhee takaleeph hai to us cheej ko bhee dekhie vaapas le lena chaahie ki ek kisaan ne jo cheej hota hai us cheej ko ham aur aap lete hain istemaal karate hain aaj ham rotee kha rahe hain to kisaanon ke badaulat kha rahe hain vo kisaan hai vah matalab annadaata hai main yahee kahana chaahata hoon dekhie kya hai ki desh kee jo kisaan hain desh ke kisaan kee mein baat kar raha hoon lagabhag kaee maheenon se itanee thandee mein samajh leejie ki thand hai dillee bordar mein baithe hue kaee logon ne kisaan aandolan par dikhee bahut savaal uthaen aandolan ko lekar kaee netaon ke vivaadit kya hai ki bayaan paakistaan aur khaalistaan likh bhee dekhie dhoondha gaya hai isamen main kya hai ki bhaarat mein jyaadaatar jo sankhya hai vah chhote kisaanon kee hai aise mein dikhe vah itane sampann nahin hai ki manjoo tak aasaanee se pahunch pae to yahee vajah hai ki vah apane jo anaaj ho aadhatiyon ke aune paune daam par beche jaate hain to aisee sthiti mein dikhe sarakaar ko chaahie ki mandee ya jo hai kisaanon tak laee jae na ki unhen mandiyon ke paas jaana pade to agar mandiyaan najadeek hogee to dikhe kisaan ko phasal kee jo keemat hai vah sahee milegee emesapee kee dileevaree jo ret mein hai vah ijaapha bhee dekhe hoga dekhie main yahee bolana chaahata hoon ki jo yah aandolan ke kya hai ki kaee sakaaraatmak pahaloo rahe hain pahale jo kisaan ek doosare se matabhed rakhate the vah bhee ek manch par saath aa gae ek badee dikhee saphalata hai dikhee khaalistaanee phanding aur paakistaanee vaarning ke naam par aap donon ko badanaam karane kee koshish kee gaee hai lekin jo kisaan hai vah deeke rahee hai vah aisa isalie kar pae kyonki yah poora moment kisaanon ke lie kisaanon ka hee banaaya hua hai jo kisaan aandolan mein hai vah apana dikhee sab kuchh daanv par laga kar aae hain to dekhie mujhe nahin lagata kaanoon ke saspenshan se kamaane ke lie kisaanon ne is dauraan kya hai ki aandolan ke naam par kisee bhee raajaneetik aur dhaarmik sansthaon ko bhee laabh nahin lene diya dekhie main bolana chaahata aandolan ke itihaas mein yah dikhe behad kamee dekha jaata hai aaj kee det mein dikhee abhee aap khud dekh leejie ab yah dekhie 26 janavaree tha kitanee badee aphavaah phaila dee gaee hai ki tiranga hataake unhonne apana jhanda lage nahin aisa kuchh nahin hai tiranga usee jagah jahaan tha vaheen laga tha unhonne jo ek kisaan ka jhanda hotee to bagal mein apana jhanda gaada tha to yahaan raajaneeti rotee se kee ja rahee hai to aap log aphavaah na pahale to main yahee kahoonga ki jaise ki prashn aap khud hee rahenge kisaanon kee kisaanon ko sarakaar se vaapas lene kee jid aap kaise samajhate hain main yahee samajhata hoon ki kisaan ko jo hak chaahie unako vah hak de diya jae kisaan ko dekhakar pareshaan na kiya jae kisaan hamen rotee detee hai anaaj ham jo aaj itanee aavaaj mein bulandee aavaaj mein bol rahe hain vah kisaan ke badaulat aaj unhonne anaaj bola hai mainne rotee khaee hai tab jaakar main is prashn ka aansar de raha ho to kisaan ko pareshaan na kiya jae main yahee kahoonga jahaan unako laabh meenoo ko poora laabh diya jae jay hind jay bhaarat

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किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं?Kisaanon Kee Krshi Kaanoonon Ko Sarakaar Se Vaapas Lene Kee Jid Ko Aap Kaise Samajhate Hain
VIKRAM  Bolkar App
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2:58
नमस्कार दोस्तों मैं यह सवाल देख पा रहा हूं किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिसको आप कैसे समझते हैं अगर आप तो बृहद तौर पर बहुत बड़े दौर पर देखें ऊपर से मैं कहता हूं जिसको हम लोग हेलीकॉप्टर यू कहते हैं और बर्ड आई व्यू आप गौर करेंगे कि कुछ खास तरह की किसान इस प्रदर्शन में शामिल है और कुछ खास तरह के किसान जिद कर रहे हैं और किसान लूटी आपका सकते हैं बिचौलिया जो जिद कर रहे हैं इस तीनों कानून को वापस लेने के बाद आप मैं आपको बताऊंगा कि आपके गांव में आपके आसपास में अगर आप 10 किसान को जानते हैं तो आप उनसे पर्सनली कभी पास पॉसिबल हो तो बात करें वह आपको बताएंगे कि किसान 70 या 75 सालों से 20 रहा है इस व्यवस्था के तहत इस व्यवस्था के तहत वह व्यवस्था जिसके द्वारा वह जो उठ जाता है उसे उसकी वास्तविक कीमत इसमें उदाहरण देता हूं आपको किसान आलू बेचता है ₹5 किलो और हम अभी खरीद रहे हैं अच्छा ले सकते तो आप समझ सकते हैं कि यह बीच का 5 से 40 जो होता है एक इंसान को कभी नहीं मिलता तो कमाई कौन करता है तो कमाई वह करता है जो आपको डायरेक्ट आलू बेच रहा है बीच में मंडियों में कमाई होती है अगर अगर आप गौर करें तो अस्सी परसेंट जो कमाई है वो किसान को छोड़कर बाकी सब को जा रही है तो लाभ यह है कि जो लोग किसानी नहीं कर रहे हैं क्या जो खेती नहीं कर रहे हैं वह ज्यादा पैसे बना रहे हैं और जो कर रहे हो बहुत कम बना पा रहे हैं और विचार ऐसी तकलीफ में पिछले 75 सालों से भारत में विश्व है या पुरानी बात नहीं करूंगा अंग्रेजों के समय क्या होता था अभी की बात करो जब भारत एक हम जिस भारत गणतंत्र देश में रहते हैं और करेंगे अगर 3 महीने से किसान आंदोलन कर रहे हैं और वह इस कानून के आगे जीत है बिल्कुल काम नहीं कर रहे हैं आप अपने आसपास के मंडियों में जा कर देखिए अगर आपको गौर करना होगा तो आप समझ पाएंगे कि कई सब्जियां कई और जो स्टेपल फूड है या बाकी जो चीजें हैं मार्केट में किसी भी चीज की कमी नहीं है इससे क्या पता चलता है कि किसान जो विरोध कर रहा है वह विरोध एक्चुअली में नहीं कर रहा है तो 90% किसान खुशी है और बिल्कुल इस कानून को मानते हैं पसंद कर रहे हैं और उनके लिए बेनिफिशियल है ग्राउंड लेवल पर बिचौलिए जून को सबसे ज्यादा नुकसान है इस कानून से क्योंकि किसान अपना माल कहीं भी भेज सकता है वह बहुत परेशान है एक योजनाबद्ध तरीके से इस सारे प्रकरण को फैला के रखा है यह किसान विरोधी है लास्ट में यह कहना चाहूंगा आप गौर करेंगे भारत की आबादी में 5% हिस्सा नहीं है किसानों में सरदारों का और देखेंगे सारे सरदारी विरोध कर रहे हैं साथ में यह भी देखेंगे वह किसान mercedes-benz वाले हैं ना कि बिल्कुल गरीब किसान
Namaskaar doston main yah savaal dekh pa raha hoon kisaanon kee krshi kaanoonon ko sarakaar se vaapas lene kee jisako aap kaise samajhate hain agar aap to brhad taur par bahut bade daur par dekhen oopar se main kahata hoon jisako ham log heleekoptar yoo kahate hain aur bard aaee vyoo aap gaur karenge ki kuchh khaas tarah kee kisaan is pradarshan mein shaamil hai aur kuchh khaas tarah ke kisaan jid kar rahe hain aur kisaan lootee aapaka sakate hain bichauliya jo jid kar rahe hain is teenon kaanoon ko vaapas lene ke baad aap main aapako bataoonga ki aapake gaanv mein aapake aasapaas mein agar aap 10 kisaan ko jaanate hain to aap unase parsanalee kabhee paas posibal ho to baat karen vah aapako bataenge ki kisaan 70 ya 75 saalon se 20 raha hai is vyavastha ke tahat is vyavastha ke tahat vah vyavastha jisake dvaara vah jo uth jaata hai use usakee vaastavik keemat isamen udaaharan deta hoon aapako kisaan aaloo bechata hai ₹5 kilo aur ham abhee khareed rahe hain achchha le sakate to aap samajh sakate hain ki yah beech ka 5 se 40 jo hota hai ek insaan ko kabhee nahin milata to kamaee kaun karata hai to kamaee vah karata hai jo aapako daayarekt aaloo bech raha hai beech mein mandiyon mein kamaee hotee hai agar agar aap gaur karen to assee parasent jo kamaee hai vo kisaan ko chhodakar baakee sab ko ja rahee hai to laabh yah hai ki jo log kisaanee nahin kar rahe hain kya jo khetee nahin kar rahe hain vah jyaada paise bana rahe hain aur jo kar rahe ho bahut kam bana pa rahe hain aur vichaar aisee takaleeph mein pichhale 75 saalon se bhaarat mein vishv hai ya puraanee baat nahin karoonga angrejon ke samay kya hota tha abhee kee baat karo jab bhaarat ek ham jis bhaarat ganatantr desh mein rahate hain aur karenge agar 3 maheene se kisaan aandolan kar rahe hain aur vah is kaanoon ke aage jeet hai bilkul kaam nahin kar rahe hain aap apane aasapaas ke mandiyon mein ja kar dekhie agar aapako gaur karana hoga to aap samajh paenge ki kaee sabjiyaan kaee aur jo stepal phood hai ya baakee jo cheejen hain maarket mein kisee bhee cheej kee kamee nahin hai isase kya pata chalata hai ki kisaan jo virodh kar raha hai vah virodh ekchualee mein nahin kar raha hai to 90% kisaan khushee hai aur bilkul is kaanoon ko maanate hain pasand kar rahe hain aur unake lie beniphishiyal hai graund leval par bichaulie joon ko sabase jyaada nukasaan hai is kaanoon se kyonki kisaan apana maal kaheen bhee bhej sakata hai vah bahut pareshaan hai ek yojanaabaddh tareeke se is saare prakaran ko phaila ke rakha hai yah kisaan virodhee hai laast mein yah kahana chaahoonga aap gaur karenge bhaarat kee aabaadee mein 5% hissa nahin hai kisaanon mein saradaaron ka aur dekhenge saare saradaaree virodh kar rahe hain saath mein yah bhee dekhenge vah kisaan mairchaidais-bainz vaale hain na ki bilkul gareeb kisaan

bolkar speaker
किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं?Kisaanon Kee Krshi Kaanoonon Ko Sarakaar Se Vaapas Lene Kee Jid Ko Aap Kaise Samajhate Hain
Laxmi Ahirwar  Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए Laxmi जी का जवाब
Unknown
2:00
मेगा गोयल आप ने सवाल किया है कि किसानों की कृषि कानून को सरकार से वापस लेने की जीत को आप कैसे समझते हैं सबसे पहले तो मैं आपको धन्यवाद देना चाहूंगी कि आपने मुझे इस सवाल का जवाब देने के लायक समझा जो अभी रस्सी कानून बिल जारी किया गया था उसमें उसके बारे में अधिकतर किसानों को तो मालूम ही नहीं है जो किसान वहां पर रहे हैं उनमें से 90% किसानों को तो पता भी नहीं है कि कृषि बिल क्या है और इसके क्या फायदे एवं नुकसान है यह जिद तो किसानों के बड़े-बड़े नेता जो खुद को किसानों का हितैषी यानी कि उनके लिए अच्छा चाहने वाला कहते हैं उनकी जीत है कि किसान किसान दिल वापस लिया जाए लेकिन अभी यह पूरा कंफर्म नहीं है कि जो किसान नेता हैं उनको भी इस किसान बिल्कुल सही जानकारी है इसलिए मैं कहना चाहूंगी कि उन किसान नेताओं को भी इसके बारे में पहले तो अच्छे से जानकारी हासिल कर लेनी चाहिए कि यह नियम हमारे लिए अच्छा है या बुरा है फिर उसी के अनुसार निर्णय लें और अपने अधीन छोटे-छोटे किसानों को भी समझा और तभी सभी किसान मिलजुल कर एक सटीक फैसला लें धन्यवाद
Mega goyal aap ne savaal kiya hai ki kisaanon kee krshi kaanoon ko sarakaar se vaapas lene kee jeet ko aap kaise samajhate hain sabase pahale to main aapako dhanyavaad dena chaahoongee ki aapane mujhe is savaal ka javaab dene ke laayak samajha jo abhee rassee kaanoon bil jaaree kiya gaya tha usamen usake baare mein adhikatar kisaanon ko to maaloom hee nahin hai jo kisaan vahaan par rahe hain unamen se 90% kisaanon ko to pata bhee nahin hai ki krshi bil kya hai aur isake kya phaayade evan nukasaan hai yah jid to kisaanon ke bade-bade neta jo khud ko kisaanon ka hitaishee yaanee ki unake lie achchha chaahane vaala kahate hain unakee jeet hai ki kisaan kisaan dil vaapas liya jae lekin abhee yah poora kampharm nahin hai ki jo kisaan neta hain unako bhee is kisaan bilkul sahee jaanakaaree hai isalie main kahana chaahoongee ki un kisaan netaon ko bhee isake baare mein pahale to achchhe se jaanakaaree haasil kar lenee chaahie ki yah niyam hamaare lie achchha hai ya bura hai phir usee ke anusaar nirnay len aur apane adheen chhote-chhote kisaanon ko bhee samajha aur tabhee sabhee kisaan milajul kar ek sateek phaisala len dhanyavaad

bolkar speaker
किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं?Kisaanon Kee Krshi Kaanoonon Ko Sarakaar Se Vaapas Lene Kee Jid Ko Aap Kaise Samajhate Hain
nav kishor aggarwal Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए nav जी का जवाब
Service
1:05
नमस्कार दीक्षा जी आपने मुझसे सवाल किया कि किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं दिखे दीक्षा जी मैं पहले आपको यह बताना चाहूंगा कि यह जिद नहीं है यह हक की लड़ाई है अगर हम किसी व्यक्ति को उसके हक से वंचित करते हैं उसका हक छीन ते तो यदि वह व्यक्ति अपनी लड़ाई लड़ता है तो उसे हम जीत नहीं कर सकते उसे हम संघर्ष कह सकते हैं और इस वक्त श्रीमान नरेंद्र मोदी हमारे भारत के प्रधानमंत्री या माननीय प्रधानमंत्री और उन्होंने जो यह किसानों के खिलाफ कानून बनाया है यह मैं समझता हूं मेरी नजर में बहुत ही गलत है और इससे गरीब आदमी की रोजी-रोटी मारी जाएगी महंगाई बढ़ जाएगी और काफी हद तक यह कानून बनाते हैं और किसान इसके लिए जो संघर्ष करें मैं समझता हूं वह काफी हद तक सही है और आगे भी यह संघर्ष चलता रहेगा यदि यह कानून जल्दी वापस ना लिए गए तो क्योंकि आने वाले यदि यह कानून पास हो जाते हैं तो आने वाले समय में आमा निकले बहुत मुश्किलें खड़ी हो जाएंगी और हालात बिगड़ जाएंगे धन्यवाद
Namaskaar deeksha jee aapane mujhase savaal kiya ki kisaanon kee krshi kaanoonon ko sarakaar se vaapas lene kee jid ko aap kaise samajhate hain dikhe deeksha jee main pahale aapako yah bataana chaahoonga ki yah jid nahin hai yah hak kee ladaee hai agar ham kisee vyakti ko usake hak se vanchit karate hain usaka hak chheen te to yadi vah vyakti apanee ladaee ladata hai to use ham jeet nahin kar sakate use ham sangharsh kah sakate hain aur is vakt shreemaan narendr modee hamaare bhaarat ke pradhaanamantree ya maananeey pradhaanamantree aur unhonne jo yah kisaanon ke khilaaph kaanoon banaaya hai yah main samajhata hoon meree najar mein bahut hee galat hai aur isase gareeb aadamee kee rojee-rotee maaree jaegee mahangaee badh jaegee aur kaaphee had tak yah kaanoon banaate hain aur kisaan isake lie jo sangharsh karen main samajhata hoon vah kaaphee had tak sahee hai aur aage bhee yah sangharsh chalata rahega yadi yah kaanoon jaldee vaapas na lie gae to kyonki aane vaale yadi yah kaanoon paas ho jaate hain to aane vaale samay mein aama nikale bahut mushkilen khadee ho jaengee aur haalaat bigad jaenge dhanyavaad