#मनोरंजन

bolkar speaker

मकर संक्रांति के पर्व की शुरुआत कैसे हुई?

Makar Sankranti Ke Parv Shuruat Kaise Hui
Ashok Bolkar App
Top Speaker,Level 55
सुनिए Ashok जी का जवाब
कृषक👳💦
4:33
मित्रों आप सभी को मकर सक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं परम पूज्य आचार्य जीवन आनंद जी चेतन बता रहा है मकर सक्रांति का रहस्य मकर सक्रांति यह मानव जगत को मत पंथ संप्रदाय छुआछूत आदि के विघटनकारी संक्रमण से छुड़ाकर ईश्वर और धर्म के नाम पर एकात्मता किसने में जोड़ने वाला देश काल के तत्वदर्शी अध्यात्म विज्ञान वासियों द्वारा चलाया हुआ सतयुग प्रवर्तक पर रामायण का इतिहास है माघ मकर गति रवि जब होई तीरथ पति जाए सब कोई देव दनुज किन्नर नर श्रेणी मध्य जी सादर शक्ल त्रिवेणी हुए ऋषि मुनि समाजा बाय जॉन तीरथ राजा ब्राह्मण निरूपण धर्म विधि तत्व विभाग कहीं भक्ति भगवान के संयुक्त ज्ञान विराज मकर सक्रांति के शुभ पर्व पर प्रयागराज में ब्रह्म निरूपण छात्रों तथा विश्व रूप ब्रह्म का प्रत्यक्ष यथार्थ दर्शन निरूपण प्रयोगात्मक प्रक्रियाओं से कराए जाने के कारण प्रयागराज का नाम प्रयागराज हुआ ब्रह्म नाम यह प्रत्यक्ष देखने वाले विश्वरूप परमात्मा का ही है आगे पीछे दाहिनी भाई और ऊपर नीचे व्यापक चर्चा में अखंड दिख रहा है यदि उपरोक्त उपनिषद मंत्र में दर्शाए अनुसार 10 रूपी ब्रह्म का दिव्य दृष्टि 30 अप्रैल प्रत्यक्षीकरण की रीति से दर्शन लक्ष्य नहीं हुआ तो वर्तमान के सामान ईश्वर और धर्म के नाम पर सैकड़ों और हजारों मत पंथ संप्रदाय और जातिवादी चूत यारी विनाशकारी राग दोस्त निर्माण होकर फसलों को विषमता से नरसंहार होने लगता है हरि व्यापक सर्वत्र समाना व्याप्त है सम सर्वत्र परमात्मा यह देखकर आत्माराम नहीं त्याग त्याग है वह पावे परमा गति गीता का यह सिद्धांत भूल जाने से आसुरी राक्षसी दृश्य देखने लगता है यह संसार के मनुष्य तुम एक विचार के बनो एक विचार से बोलो तुम्हारे मन में एक ही ईश्वर का ज्ञान प्राप्त करें इस प्रकार साथियों की लोग एकमत रहकर अपने कार सिद्ध कर दे रहे उसी प्रकार तुम भी अपने परम सुख शांति के लिए एक मत से कार्य करते रहो अपनी सभी की प्रार्थना एक होना अपने विचार का स्थान एक होना अपने सभी के विचार एक ही रहे मैं दे अपना सबका ध्यान भी एक होना चाहिए मैं तुम सभी को एक ही सर्वोपरि स्टोपा कहता हूं हम सब एक ही साहित्य के एक ही देव परमात्मा खुदा भगवान का पूजन सोकर हमसे करें जिससे भूत करें कर्म देश में सब व्याप्त हो उसको शो कर्म के द्वारा बाजे वह ज्ञान गए यही गीता का सिद्धांत है जब तक विश्वरूप ही ब्रह्म का दर्शन लक्षण होगा तब तक सो धर्म के अनुसार भक्ति होना संभव नहीं है जाने भी नैना हुए प्रतीत बिन प्रति तो हो ही नहीं प्रीत प्रीत बिना नहीं भक्ति धरना जिमी खा गए सेजल के चिकनाई परमात्मा दर्शन तत्व विभाग के आधार पर प्रत्यक्षीकरण में देखा करो ना चाहिए अनिल अनल जल गगन रहा है इन पांचों में विश्वास है देखो S8 और कहीं है बे थे जो मैं यहां नहीं है सक्रांति के पर तिल और गुड़ के लड्डू बनाने का दहेज दिल इसलिए और गुड़ मिठास का प्रतीक है सर्वांग योग अध्याय 5 में घी के साथ मिला देखो बस तुम्हें गुण साथ में है यह तत्व विभाग और गुण विभाग विश्वरूप खुदा परमात्मा गांठ की पहचान और भक्ति योग समझाया जाता था जिसकी आज भी विश्व मात्र में एकात्मता के प्रेम की जरूरत है सादर नर्मदे हर धन्यवाद
Mitron aap sabhee ko makar sakraanti kee haardik shubhakaamanaen param poojy aachaary jeevan aanand jee chetan bata raha hai makar sakraanti ka rahasy makar sakraanti yah maanav jagat ko mat panth sampradaay chhuaachhoot aadi ke vighatanakaaree sankraman se chhudaakar eeshvar aur dharm ke naam par ekaatmata kisane mein jodane vaala desh kaal ke tatvadarshee adhyaatm vigyaan vaasiyon dvaara chalaaya hua satayug pravartak par raamaayan ka itihaas hai maagh makar gati ravi jab hoee teerath pati jae sab koee dev danuj kinnar nar shrenee madhy jee saadar shakl trivenee hue rshi muni samaaja baay jon teerath raaja braahman niroopan dharm vidhi tatv vibhaag kaheen bhakti bhagavaan ke sanyukt gyaan viraaj makar sakraanti ke shubh parv par prayaagaraaj mein brahm niroopan chhaatron tatha vishv roop brahm ka pratyaksh yathaarth darshan niroopan prayogaatmak prakriyaon se karae jaane ke kaaran prayaagaraaj ka naam prayaagaraaj hua brahm naam yah pratyaksh dekhane vaale vishvaroop paramaatma ka hee hai aage peechhe daahinee bhaee aur oopar neeche vyaapak charcha mein akhand dikh raha hai yadi uparokt upanishad mantr mein darshae anusaar 10 roopee brahm ka divy drshti 30 aprail pratyaksheekaran kee reeti se darshan lakshy nahin hua to vartamaan ke saamaan eeshvar aur dharm ke naam par saikadon aur hajaaron mat panth sampradaay aur jaativaadee choot yaaree vinaashakaaree raag dost nirmaan hokar phasalon ko vishamata se narasanhaar hone lagata hai hari vyaapak sarvatr samaana vyaapt hai sam sarvatr paramaatma yah dekhakar aatmaaraam nahin tyaag tyaag hai vah paave parama gati geeta ka yah siddhaant bhool jaane se aasuree raakshasee drshy dekhane lagata hai yah sansaar ke manushy tum ek vichaar ke bano ek vichaar se bolo tumhaare man mein ek hee eeshvar ka gyaan praapt karen is prakaar saathiyon kee log ekamat rahakar apane kaar siddh kar de rahe usee prakaar tum bhee apane param sukh shaanti ke lie ek mat se kaary karate raho apanee sabhee kee praarthana ek hona apane vichaar ka sthaan ek hona apane sabhee ke vichaar ek hee rahe main de apana sabaka dhyaan bhee ek hona chaahie main tum sabhee ko ek hee sarvopari stopa kahata hoon ham sab ek hee saahity ke ek hee dev paramaatma khuda bhagavaan ka poojan sokar hamase karen jisase bhoot karen karm desh mein sab vyaapt ho usako sho karm ke dvaara baaje vah gyaan gae yahee geeta ka siddhaant hai jab tak vishvaroop hee brahm ka darshan lakshan hoga tab tak so dharm ke anusaar bhakti hona sambhav nahin hai jaane bhee naina hue prateet bin prati to ho hee nahin preet preet bina nahin bhakti dharana jimee kha gae sejal ke chikanaee paramaatma darshan tatv vibhaag ke aadhaar par pratyaksheekaran mein dekha karo na chaahie anil anal jal gagan raha hai in paanchon mein vishvaas hai dekho s8 aur kaheen hai be the jo main yahaan nahin hai sakraanti ke par til aur gud ke laddoo banaane ka dahej dil isalie aur gud mithaas ka prateek hai sarvaang yog adhyaay 5 mein ghee ke saath mila dekho bas tumhen gun saath mein hai yah tatv vibhaag aur gun vibhaag vishvaroop khuda paramaatma gaanth kee pahachaan aur bhakti yog samajhaaya jaata tha jisakee aaj bhee vishv maatr mein ekaatmata ke prem kee jaroorat hai saadar narmade har dhanyavaad

और जवाब सुनें

bolkar speaker
मकर संक्रांति के पर्व की शुरुआत कैसे हुई?Makar Sankranti Ke Parv Shuruat Kaise Hui
Rajendra Malkhat Bolkar App
Top Speaker,Level 33
सुनिए Rajendra जी का जवाब
Self student
3:28
नमस्कार दोस्तों आपका प्रश्न है कि मकर सक्रांति के पीछे पर्व की शुरुआत कैसे हुई थी तो दोस्तों जब इस त्यौहार के बारे में बात आती है कैसे और किसने शुरुआत की तो इस सिलसिले में एक महत्वपूर्ण नाम आता है बाबा गोरखनाथ दोस्तों नवभारत टाइम्स डॉट कॉम के एक पोस्ट के अनुसार हम इसकी जानकारी लेते हैं दोस्तों पुरानी कथाओं के अनुसार जब खिलजी ने आक्रमण किया तो लगातार संघर्षरत रहने के चलते नाथ योगी भोजन तक नहीं कर पाते थे इसके पीछे कारण यह था कि आक्रमण के चलते योगियों के पास भोजन बनाने का भी समय नहीं रहता था वह अपनी भूमि को बताने के लिए संघर्ष करते रहते थे और अफसर ही भूखे रह जाते थे किसी के साथ आक्रमण में नाथ योगी भूखे ही संघर्ष रहते थे बाबा गोरखनाथ ने इस समस्या का हल निकालने की सूची लेकिन यह भी ध्यान रखना था कि ज्यादा समय भी ना लगे तब बाबा गोर दाल चावल और सब्जी को एक एक साथ पकाने की सलाह दी थी दोस्तों बाबा गोरखनाथ का बताया हुआ यह व्यंजन नाथ योगियों को बेहद पसंद आया इसे बनाने में काफी कम समय लगा कम समय तो लगता ही था साथ ही काफी स्वादिष्ट और त्वरित उंजा देने वाला भी होता था कहा जाता है कि बाबा नहीं इस व्यंजन को खिचड़ी का नाम दिया था तू तो कहता था कि फटाफट तैयार होने वाले इस व्यंजन से नाथ योगियों को भूख की परेशानी से राहत मिल गई इसके अलावा वह खिलजी के आतंक को दूर करने में भी सक्षम हो गए इसके बाद से ही गोरखपुर में मकर सक्रांति के दिन को बताओ विजय दर्शन पर्व के रूप में भी बनाते हैं दोस्तों मकर सक्रांति के अवसर पर गोरखनाथ मंदिर के पास खिचड़ी मेले का आयोजन किया जाता है इस मेले की शुरुआत बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी का भोग लगाकर होती है इसके बाद प्रसाद स्वरूप पूरे मेले में खिचड़ी का वितरण भी किया जाता है दोस्तों ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक खिचड़ी का मुख्य तक चावल और चंद्रमा के प्रभाव में होता है इस दिन खिचड़ी में डाली जाने वाली उड़द की दाल का संबंध शनिदेव से माना जाता है वही हल्दी का संबंध गुरु ग्रह से और हरी सब्जियों का संबंधित बुध से माना जाता है वहीं खिचड़ी में पढ़ने वाले की का संबंध सूर्य देवता से होता है इसके अलावा भी से शुक्र और मंगल भी प्रभावित होते हैं यही वजह है कि मकर सक्रांति पर खिचड़ी खाने से आरोग्य में वृद्धि होती है मकर सक्रांति पर तिल और तिलकुट खाने की भी परंपरा है ज्योतिष कारणों के मुताबिक तेल का सीधा संबंध नीचे की मकर सक्रांति के दिन तिल और तिलकुट खाने का रिवाज है इससे शनि राहु और केतु से संबंधित सारे दोष दूर हो जाते हैं दोस्तों इस मौके पर जहां कई जगहों पर खिचड़ी खाने की परंपरा है तो कुछ वहीं से कॉपर तिलकुट को प्रवाहित करने का भी रिवाज है मान्यता है कि ऐसा करने से व्यक्ति को हर तरह के कष्टों से मुक्ति मिल जाती है दोस्तों मकर सक्रांति की आराधना का पर्व है प्रकृति की आराधना का पर्व है जो सूर्य के उत्तरायण होने के उपलक्ष में मनाया जाता है यही कारण है कि कड़ाके की ठंड में लोग सूर्योदय से पूर्व स्नान करके सूर्य को अर्घ्य देते हैं इसके बाद तिलाठी यानी तिल के पौधे का डंठल जलाकर खुद को गर्म करते हैं और पहले दही चूड़ा तिलवानी तिल का लड्डू खाते हैं तो दोस्तों इस प्रकार से मनाया जाता है मकर सक्रांति का पर्व आशा करते हैं आपको अच्छा लगा होगा धन्यवाद
Namaskaar doston aapaka prashn hai ki makar sakraanti ke peechhe parv kee shuruaat kaise huee thee to doston jab is tyauhaar ke baare mein baat aatee hai kaise aur kisane shuruaat kee to is silasile mein ek mahatvapoorn naam aata hai baaba gorakhanaath doston navabhaarat taims dot kom ke ek post ke anusaar ham isakee jaanakaaree lete hain doston puraanee kathaon ke anusaar jab khilajee ne aakraman kiya to lagaataar sangharsharat rahane ke chalate naath yogee bhojan tak nahin kar paate the isake peechhe kaaran yah tha ki aakraman ke chalate yogiyon ke paas bhojan banaane ka bhee samay nahin rahata tha vah apanee bhoomi ko bataane ke lie sangharsh karate rahate the aur aphasar hee bhookhe rah jaate the kisee ke saath aakraman mein naath yogee bhookhe hee sangharsh rahate the baaba gorakhanaath ne is samasya ka hal nikaalane kee soochee lekin yah bhee dhyaan rakhana tha ki jyaada samay bhee na lage tab baaba gor daal chaaval aur sabjee ko ek ek saath pakaane kee salaah dee thee doston baaba gorakhanaath ka bataaya hua yah vyanjan naath yogiyon ko behad pasand aaya ise banaane mein kaaphee kam samay laga kam samay to lagata hee tha saath hee kaaphee svaadisht aur tvarit unja dene vaala bhee hota tha kaha jaata hai ki baaba nahin is vyanjan ko khichadee ka naam diya tha too to kahata tha ki phataaphat taiyaar hone vaale is vyanjan se naath yogiyon ko bhookh kee pareshaanee se raahat mil gaee isake alaava vah khilajee ke aatank ko door karane mein bhee saksham ho gae isake baad se hee gorakhapur mein makar sakraanti ke din ko batao vijay darshan parv ke roop mein bhee banaate hain doston makar sakraanti ke avasar par gorakhanaath mandir ke paas khichadee mele ka aayojan kiya jaata hai is mele kee shuruaat baaba gorakhanaath ko khichadee ka bhog lagaakar hotee hai isake baad prasaad svaroop poore mele mein khichadee ka vitaran bhee kiya jaata hai doston jyotish shaastr ke mutaabik khichadee ka mukhy tak chaaval aur chandrama ke prabhaav mein hota hai is din khichadee mein daalee jaane vaalee udad kee daal ka sambandh shanidev se maana jaata hai vahee haldee ka sambandh guru grah se aur haree sabjiyon ka sambandhit budh se maana jaata hai vaheen khichadee mein padhane vaale kee ka sambandh soory devata se hota hai isake alaava bhee se shukr aur mangal bhee prabhaavit hote hain yahee vajah hai ki makar sakraanti par khichadee khaane se aarogy mein vrddhi hotee hai makar sakraanti par til aur tilakut khaane kee bhee parampara hai jyotish kaaranon ke mutaabik tel ka seedha sambandh neeche kee makar sakraanti ke din til aur tilakut khaane ka rivaaj hai isase shani raahu aur ketu se sambandhit saare dosh door ho jaate hain doston is mauke par jahaan kaee jagahon par khichadee khaane kee parampara hai to kuchh vaheen se kopar tilakut ko pravaahit karane ka bhee rivaaj hai maanyata hai ki aisa karane se vyakti ko har tarah ke kashton se mukti mil jaatee hai doston makar sakraanti kee aaraadhana ka parv hai prakrti kee aaraadhana ka parv hai jo soory ke uttaraayan hone ke upalaksh mein manaaya jaata hai yahee kaaran hai ki kadaake kee thand mein log sooryoday se poorv snaan karake soory ko arghy dete hain isake baad tilaathee yaanee til ke paudhe ka danthal jalaakar khud ko garm karate hain aur pahale dahee chooda tilavaanee til ka laddoo khaate hain to doston is prakaar se manaaya jaata hai makar sakraanti ka parv aasha karate hain aapako achchha laga hoga dhanyavaad

bolkar speaker
मकर संक्रांति के पर्व की शुरुआत कैसे हुई?Makar Sankranti Ke Parv Shuruat Kaise Hui
Nita mehar Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए Nita जी का जवाब
Unknown
0:19

bolkar speaker
मकर संक्रांति के पर्व की शुरुआत कैसे हुई?Makar Sankranti Ke Parv Shuruat Kaise Hui
vijay singh Bolkar App
Top Speaker,Level 22
सुनिए vijay जी का जवाब
Social worker in india
1:17
मेरे सभी पूर्ण कर परिवार के मित्रों को मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं और आपके सवाल का उत्तर बता रहा हूं जो ध्यान से सुनो हमारे सनातन धर्म में मकर संक्रांति का बहुत ही महत्व है जो पौष मास में जब सूर्य अपने पुत्र शनि की राशि मकर में प्रवेश करते हैं तभी इस पर्व को मनाया जाता है इस दिन जब होता प्रधान और स्नान का विशेष महत्व है सूर्य जब मकर राशि में प्रवेश करेंगे तो 5 ग्रह का संयोग बनेगा जिसमें सूर्य बुध गुरु चंद्रमा शनि भी शामिल रहेंगे विशेष संयोग बन रहे हैं तो इस पर्व को शुभ बना रहे हैं मकर संक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर अपने पुत्र शनि की राशि में मकर में प्रवेश करते हैं इसलिए माना जाता है कि इस दिन सूर्य अपने पुत्र शनि से मिलने के लिए खुद उनके घर आते हैं इस वजह से इस खास दिन को मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है धन्यवाद दोस्तों खुश रहो
Mere sabhee poorn kar parivaar ke mitron ko makar sankraanti kee haardik shubhakaamanaen aur aapake savaal ka uttar bata raha hoon jo dhyaan se suno hamaare sanaatan dharm mein makar sankraanti ka bahut hee mahatv hai jo paush maas mein jab soory apane putr shani kee raashi makar mein pravesh karate hain tabhee is parv ko manaaya jaata hai is din jab hota pradhaan aur snaan ka vishesh mahatv hai soory jab makar raashi mein pravesh karenge to 5 grah ka sanyog banega jisamen soory budh guru chandrama shani bhee shaamil rahenge vishesh sanyog ban rahe hain to is parv ko shubh bana rahe hain makar sankraanti ke din soory dhanu raashi se nikalakar apane putr shani kee raashi mein makar mein pravesh karate hain isalie maana jaata hai ki is din soory apane putr shani se milane ke lie khud unake ghar aate hain is vajah se is khaas din ko makar sankraanti ke naam se jaana jaata hai dhanyavaad doston khush raho

bolkar speaker
मकर संक्रांति के पर्व की शुरुआत कैसे हुई?Makar Sankranti Ke Parv Shuruat Kaise Hui
Raghvendra  Tiwari Pandit Ji Bolkar App
Top Speaker,Level 22
सुनिए Raghvendra जी का जवाब
Unknown
2:05
हेलो फ्रेंड्स नमस्कार जैसा कि आपका प्रश्न है मकर संक्रांति पर्व की शुरुआत कैसे हुई ऐसा कहा जाता है ऐसा माना जाता है कि मकर संक्रांति शुरुआत जो है वह इसी दिन जो है यशोदा जी ने श्रीकृष्ण की प्राप्ति के लिए जो है व्रत रखा था साथी इसी दिन फ्रेंड मां गंगा भागीरथ की के पीछे जो है चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होते हुए गंगासागर में जाकर मिल गई थी और यही वजह कि हर साल मकर संक्रांति के दिन जो है गंगासागर में भारी भीड़ भीड़ भी होती है फ्रेंड जिसे नहावन के नाम से भी जाना जाता है यानी कि आपने सुना होगा कि जब खिचड़ी जाती है तब स्नान भी किया जाता है नहावन भी लगता है वहां का मेला भी लगता है जैसे कि हमारे यहां इलाहाबाद संगम पर लगेगा या फिर हरिद्वार में लगा संगम उसे कहा जाता है फ्रेंड जहां पर दो या दो से अधिक नदियों का जो है मिलान होता हो उसे संगम कहते हैं तो पिछली बार तो यहां पर लगा था फ्रेंड इलाहाबाद में और अबकी बार जो है वह वह कुंभ है नहावन जो है वह हरिद्वार में लग रहा है और यह जो है इसमें स्नान करने से फ्रेंड इंसान की जो सारी बात होती है जो उनके अंदर जो है दुर्व्यवहार होते हैं उन सभी दुर्व्यवहार का नाश होता है एक अच्छे विचार की प्राप्ति होती है फ्रेंड एक अच्छे संस्कार की प्राप्ति होती है एक अच्छे हैं मर्यादा में रहने का जो है सौभाग्य प्राप्त होता है इंसान को और सब कुछ जो है यहां स्नान करने से उसका यह फल मिल जाता है धमकी धमकी और कैसी है जो है वह हमें उसकी प्राप्ति होती है और हमारे अंदर जो कोई दुर्गुण होते हैं भूत की समाप्ति हो जाती है आशा है कि आप सभी को है जवाब पसंद आया होगा शुक्रिया
Helo phrends namaskaar jaisa ki aapaka prashn hai makar sankraanti parv kee shuruaat kaise huee aisa kaha jaata hai aisa maana jaata hai ki makar sankraanti shuruaat jo hai vah isee din jo hai yashoda jee ne shreekrshn kee praapti ke lie jo hai vrat rakha tha saathee isee din phrend maan ganga bhaageerath kee ke peechhe jo hai chalakar kapil muni ke aashram se hote hue gangaasaagar mein jaakar mil gaee thee aur yahee vajah ki har saal makar sankraanti ke din jo hai gangaasaagar mein bhaaree bheed bheed bhee hotee hai phrend jise nahaavan ke naam se bhee jaana jaata hai yaanee ki aapane suna hoga ki jab khichadee jaatee hai tab snaan bhee kiya jaata hai nahaavan bhee lagata hai vahaan ka mela bhee lagata hai jaise ki hamaare yahaan ilaahaabaad sangam par lagega ya phir haridvaar mein laga sangam use kaha jaata hai phrend jahaan par do ya do se adhik nadiyon ka jo hai milaan hota ho use sangam kahate hain to pichhalee baar to yahaan par laga tha phrend ilaahaabaad mein aur abakee baar jo hai vah vah kumbh hai nahaavan jo hai vah haridvaar mein lag raha hai aur yah jo hai isamen snaan karane se phrend insaan kee jo saaree baat hotee hai jo unake andar jo hai durvyavahaar hote hain un sabhee durvyavahaar ka naash hota hai ek achchhe vichaar kee praapti hotee hai phrend ek achchhe sanskaar kee praapti hotee hai ek achchhe hain maryaada mein rahane ka jo hai saubhaagy praapt hota hai insaan ko aur sab kuchh jo hai yahaan snaan karane se usaka yah phal mil jaata hai dhamakee dhamakee aur kaisee hai jo hai vah hamen usakee praapti hotee hai aur hamaare andar jo koee durgun hote hain bhoot kee samaapti ho jaatee hai aasha hai ki aap sabhee ko hai javaab pasand aaya hoga shukriya

bolkar speaker
मकर संक्रांति के पर्व की शुरुआत कैसे हुई?Makar Sankranti Ke Parv Shuruat Kaise Hui
anuj ji Bolkar App
Top Speaker,Level 22
सुनिए anuj जी का जवाब
Unknown
0:25
कृषि क्रांति के प्रवाह की शुरुआत इसलिए कहा जाता है कि उस दिन यश यशोदा जी ने श्री कृष्ण की प्राप्ति के लिए व्रत रखा था हाथी इस दिन मां गंगा भागीरथ पीछे चलकर कपिल मुनि आश्रम से होते हुए ना सागर में जो मिली इसी कारण हर साल मकर सक्रांति मनाई जाती है
Krshi kraanti ke pravaah kee shuruaat isalie kaha jaata hai ki us din yash yashoda jee ne shree krshn kee praapti ke lie vrat rakha tha haathee is din maan ganga bhaageerath peechhe chalakar kapil muni aashram se hote hue na saagar mein jo milee isee kaaran har saal makar sakraanti manaee jaatee hai

bolkar speaker
मकर संक्रांति के पर्व की शुरुआत कैसे हुई?Makar Sankranti Ke Parv Shuruat Kaise Hui
Archana Mishra Bolkar App
Top Speaker,Level 22
सुनिए Archana जी का जवाब
Housewife
1:35
हेलो दोस्तों आप सभी बोलकर आपके जो भी मेरे मित्र हैं जो भी सब लोग हैं उनको मकर संक्रांति की ढेर सारी शुभकामनाएं मेरे तरफ से हैप्पी मकर संक्रांति आप लोगों का प्रश्न है मकर संक्रांति के पर्व की शुरुआत कैसे हुई थी तो मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी को मनाया जाता है यह शुरू से ही ऐसा मनाते हैं इस दिन सूर्य भगवान मकर राशि में प्रवेश करते हैं और अपने पुत्र से मिलने शनिदेव से जाते हैं तो इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते इसलिए मकर संक्रांति मनाई जाती है और मकर संक्रांति इस जन बोलते हैं कि माता यशोदा जी ने व्रत रखा था जब उनके कोई बच्चे नहीं थे तो कृष्ण जी को पाने के लिए बच्चों को पाने के लिए व्रत रखा था और इसी दिन मकर संक्रांति के दिन ही पहले भागीरथी की जटाओं से गंगा मां होती हुई आई थी और गंगासागर में मिल गई थी जाकर इसी दिन गंगा जी का मतलब यहां धरती पर आना हुआ था इसलिए दिन बहुत शुभ होता है और यदि मकर संक्रांति के रूप में मनाया जाता है इस दिन मैं दानिश नान की बहुत मानता होती है इस दिन लोग खिचड़ी खाते हैं तिल गुड़ के लड्डू खाते हैं और दान पुण्य करते हैं और बहुत सारे जगह पर अमल मनाया जाता है इसी दिन लोहड़ी मनाई जाती है खिचड़ी बनाई जाती है इसीलिए यह संक्रांति मनाई जाती है दिन बहुत शुभ होता है धन्यवाद
Helo doston aap sabhee bolakar aapake jo bhee mere mitr hain jo bhee sab log hain unako makar sankraanti kee dher saaree shubhakaamanaen mere taraph se haippee makar sankraanti aap logon ka prashn hai makar sankraanti ke parv kee shuruaat kaise huee thee to makar sankraanti ka parv 14 janavaree ko manaaya jaata hai yah shuroo se hee aisa manaate hain is din soory bhagavaan makar raashi mein pravesh karate hain aur apane putr se milane shanidev se jaate hain to is din soory makar raashi mein pravesh karate isalie makar sankraanti manaee jaatee hai aur makar sankraanti is jan bolate hain ki maata yashoda jee ne vrat rakha tha jab unake koee bachche nahin the to krshn jee ko paane ke lie bachchon ko paane ke lie vrat rakha tha aur isee din makar sankraanti ke din hee pahale bhaageerathee kee jataon se ganga maan hotee huee aaee thee aur gangaasaagar mein mil gaee thee jaakar isee din ganga jee ka matalab yahaan dharatee par aana hua tha isalie din bahut shubh hota hai aur yadi makar sankraanti ke roop mein manaaya jaata hai is din main daanish naan kee bahut maanata hotee hai is din log khichadee khaate hain til gud ke laddoo khaate hain aur daan puny karate hain aur bahut saare jagah par amal manaaya jaata hai isee din lohadee manaee jaatee hai khichadee banaee jaatee hai iseelie yah sankraanti manaee jaatee hai din bahut shubh hota hai dhanyavaad

bolkar speaker
मकर संक्रांति के पर्व की शुरुआत कैसे हुई?Makar Sankranti Ke Parv Shuruat Kaise Hui
Brahma Prakash Mishra Bolkar App
Top Speaker,Level 22
सुनिए Brahma जी का जवाब
Asst. Teacher
1:58
नमस्कार मदन प्रकाश मिश्र आपका मन करे पर हार्दिक स्वागत करता हूं आपका प्रश्न है मकर संक्रांति के पर्व की शुरुआत कैसे हुई तो मित्र मकर संक्रांति को पंजाब में लोहड़ी उत्तराखंड में उत्तर आईडी गुजरात में उत्तरायण तमिल में पोंगल और गढ़वाल में खिचड़ी संक्रांत के नाम से जाना जाता है मान्यता है कि इस दिन लाखों श्रद्धालु गंगा और पावन नदियों में स्नान कर दान करते हैं और मकर संक्रांति के दिन भगवान विष्णु ने पृथ्वी लोक पर असुरों का वध कर उनके सिरों को काटकर मंदिर पर्वत पर गाड़ दिया था तभी से भगवान विष्णु की इस जीत को मकर संक्रांति पर्व के रूप में मनाया जाता है इसके अतिरिक्त कुछ अन्य भी पौराणिक कथाएं हैं इनमें से एक कथा जो की महाभारत में मिलती है उसके अनुसार महाभारत युद्ध के महान योद्धा और कौरवों की सेना के सेनापति गंगापुत्र भीष्म पितामह को इच्छा तू का वरदान था तथा अर्जुन के बाद लगाने के बाद उन्होंने इस दिन की महत्ता को जानते हुए अपनी मृत्यु के लिए इस दिन को निर्धारित किया विशन जानते थे कि सूर्य दक्षिणायन होने पर व्यक्ति को मोक्ष प्राप्त नहीं होता और उसे इस मृत्युलोक में पुनः जन्म लेना पड़ता है महाभारत युद्ध के बाद जब सूर्य उत्तरायण हुआ तभी भीष्म पितामह ने प्राण त्याग इसके अतिरिक्त एक कथा और प्रचलित है कि संक्रांति के दिन ही मां गंगा स्वर्ग से अवतरित होकर राजा भगीरथ के पीछे-पीछे कपिल मुनि के आश्रम से होती हुई गंगासागर तक पहुंची थी इस धरती पर अवतरित होने के बाद राजा भागीरथ ने गंगा के पावन जल से अपने पूर्वजों का तर्पण किया था इस दिन पर गंगासागर पर नदी के किनारे भव्य मेले का आयोजन किया जाता है इसलिए भी मकर संक्रांति को मनाया जाता है मित्र जवाब अच्छा लगा हो तो कृपया सब्सक्राइब लाइक शेयर और कमेंट करके जरूर बताएं धन्यवाद
Namaskaar madan prakaash mishr aapaka man kare par haardik svaagat karata hoon aapaka prashn hai makar sankraanti ke parv kee shuruaat kaise huee to mitr makar sankraanti ko panjaab mein lohadee uttaraakhand mein uttar aaeedee gujaraat mein uttaraayan tamil mein pongal aur gadhavaal mein khichadee sankraant ke naam se jaana jaata hai maanyata hai ki is din laakhon shraddhaalu ganga aur paavan nadiyon mein snaan kar daan karate hain aur makar sankraanti ke din bhagavaan vishnu ne prthvee lok par asuron ka vadh kar unake siron ko kaatakar mandir parvat par gaad diya tha tabhee se bhagavaan vishnu kee is jeet ko makar sankraanti parv ke roop mein manaaya jaata hai isake atirikt kuchh any bhee pauraanik kathaen hain inamen se ek katha jo kee mahaabhaarat mein milatee hai usake anusaar mahaabhaarat yuddh ke mahaan yoddha aur kauravon kee sena ke senaapati gangaaputr bheeshm pitaamah ko ichchha too ka varadaan tha tatha arjun ke baad lagaane ke baad unhonne is din kee mahatta ko jaanate hue apanee mrtyu ke lie is din ko nirdhaarit kiya vishan jaanate the ki soory dakshinaayan hone par vyakti ko moksh praapt nahin hota aur use is mrtyulok mein punah janm lena padata hai mahaabhaarat yuddh ke baad jab soory uttaraayan hua tabhee bheeshm pitaamah ne praan tyaag isake atirikt ek katha aur prachalit hai ki sankraanti ke din hee maan ganga svarg se avatarit hokar raaja bhageerath ke peechhe-peechhe kapil muni ke aashram se hotee huee gangaasaagar tak pahunchee thee is dharatee par avatarit hone ke baad raaja bhaageerath ne ganga ke paavan jal se apane poorvajon ka tarpan kiya tha is din par gangaasaagar par nadee ke kinaare bhavy mele ka aayojan kiya jaata hai isalie bhee makar sankraanti ko manaaya jaata hai mitr javaab achchha laga ho to krpaya sabsakraib laik sheyar aur kament karake jaroor bataen dhanyavaad

bolkar speaker
मकर संक्रांति के पर्व की शुरुआत कैसे हुई?Makar Sankranti Ke Parv Shuruat Kaise Hui
Meghsinghchouhan Bolkar App
Top Speaker,Level 33
सुनिए Meghsinghchouhan जी का जवाब
student
0:32
आकाशवाणी की मकर संक्रांति के पूर्व की शुरुआत कैसे हुई तो 1902 से 14 फरवरी को मनाया जा रहा है त्यौहार काशी हिंदू विश्वविद्यालय के ज्योति शास्त्री गणेश मिश्रा के अनुसार 14 जनवरी को मकर संक्रांति पहली बार 1902 में मनाई गई थी इससे पहले 18वीं सदी से 12 और 13 जंगम आ जाते थे वर्ष 1964 में मोटरसाइकिल पहली बार 15 जनवरी को मनाई गई थी धन्यवाद
Aakaashavaanee kee makar sankraanti ke poorv kee shuruaat kaise huee to 1902 se 14 pharavaree ko manaaya ja raha hai tyauhaar kaashee hindoo vishvavidyaalay ke jyoti shaastree ganesh mishra ke anusaar 14 janavaree ko makar sankraanti pahalee baar 1902 mein manaee gaee thee isase pahale 18veen sadee se 12 aur 13 jangam aa jaate the varsh 1964 mein motarasaikil pahalee baar 15 janavaree ko manaee gaee thee dhanyavaad

अन्य लोकप्रिय सवाल जवाब

  • मकर संक्रांति के पर्व की शुरुआत कैसे हुई मकर संक्रांति के पर्व की शुरुआत
URL copied to clipboard