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व्यक्ति के मन में नकारात्मक भावनाएं क्यों होती है?

Vyakti Ke Man Mein Nakaratmak Bhavnaein Kyun Hoti Hai
shabnam khatun Bolkar App
Top Speaker,Level 33
सुनिए shabnam जी का जवाब
Student
1:07
आज आप का सवाल है कि व्यक्ति के मन में नकारात्मक भावनाएं क्यों होती है हम भी काम करते हैं हमारे मन में जीना चाहिए चलता है चेक कितना भी पॉजिटिव हो रखे थोड़ा बहुत मिलने का मन में चलता है कि अगर यह गलत हो जाए या फिर इतना अच्छा कैसे हो सकता है हमारे साथ या फिर हमेशा अच्छा ही हमारे साथ इस चीज की भी उम्मीद कैसे रख सकते तो यही सब कारण है जिसकी वजह से हमारे मन में नेगेटिव थी जो नकारात्मक भावनाएं आती है लेकिन कुछ लोग क्या होते हैं करने के टिप्स हर इंसान के मन में आती है लेकिन उसे ओवर कम करना और उसे मतलब अवॉइड करना कि नहीं छोड़ो अभी रे मन में तो देखते हैं अगर बुरा हुआ अच्छा हुआ जो होगा तब कर लेंगे अभी नहीं कर पाते तो खुद को वेलकम करना वैसे सब थॉट्स को वेलकम करना समझाना खुद को यहां पर बहुत जरूरी होता है
Aaj aap ka savaal hai ki vyakti ke man mein nakaaraatmak bhaavanaen kyon hotee hai ham bhee kaam karate hain hamaare man mein jeena chaahie chalata hai chek kitana bhee pojitiv ho rakhe thoda bahut milane ka man mein chalata hai ki agar yah galat ho jae ya phir itana achchha kaise ho sakata hai hamaare saath ya phir hamesha achchha hee hamaare saath is cheej kee bhee ummeed kaise rakh sakate to yahee sab kaaran hai jisakee vajah se hamaare man mein negetiv thee jo nakaaraatmak bhaavanaen aatee hai lekin kuchh log kya hote hain karane ke tips har insaan ke man mein aatee hai lekin use ovar kam karana aur use matalab avoid karana ki nahin chhodo abhee re man mein to dekhate hain agar bura hua achchha hua jo hoga tab kar lenge abhee nahin kar paate to khud ko velakam karana vaise sab thots ko velakam karana samajhaana khud ko yahaan par bahut jarooree hota hai

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व्यक्ति के मन में नकारात्मक भावनाएं क्यों होती है?Vyakti Ke Man Mein Nakaratmak Bhavnaein Kyun Hoti Hai
Nidhi Singh Bolkar App
Top Speaker,Level 33
सुनिए Nidhi जी का जवाब
Unknown
4:07
ऐसे क्या क्वेश्चन पूछा कि जो व्यक्ति है उसके मन में जो नेगेटिव भावनाएं क्यों आती रहती है देखिए जब कोई इंसान की मन में या कोई इंसान के अंदर नेगेटिव भावना आने लग गए नकारात्मक भावनाएं आने लगती है तो उस इंसान को समझ जाना चाहिए कि वह इंसान है उसका मन खा लिया अगर आपने उसको समय पर कंट्रोल नहीं किया तो देखो बहुत ज्यादा वह कंप्लीटेड हो जाएगा मतलब धीरे-धीरे काम कर रहे हो दो दिन भर रहे हो तो फिर वह आपकी जो डेली रूटीन है उसमें शामिल हो जाएगा तो आपको कभी भी ऐसा काम नहीं करना है नेगेटिव का जो आपके डेली रूटीन में शामिल हो और वह सबसे ज्यादा आपको ही नुकसान करेगा और किसी को नहीं नुकसान करेगा तो मैं आपको यह सजेशन देना चाहती हूं कि अगर आप किसी भी इंसान के अंदर नेगेटिव भावना आती है तो उसको समझ जाना चाहिए कि उसका जो मन है वह खाली है उसको व्यस्त रख कोई भी काम है उसको आपको अपने आप को व्यस्त रखने की आपको गलत टाइम ना मिले कुछ मतलब गलत चीज गलत होता है मन में या नेगेटिव मैक्सिमम काम करने से देखिए बहुत सारे रीजन है कि इंसान के मन में नेगेटिव थॉट्स में आप शुरू से लेकर अगर आप म्यूजिक सुबह उठते हैं लोग पहले सबसे पहले कुछ नहीं किया मेडिकेशन नहीं किया कुछ नहीं किया सबसे पहले क्या करेंगे लोग सोशल मीडिया चेक करेंगे क्या हुआ उसकी लाइफ में क्या हो रहा है और सोशल मीडिया जो है वह फैसला एकदम फिर जो उसका मन है जो अगर आप पहले ही दे दोगे उसे ही तो वह उसी में घूमता रहेगा यह करेगा और वह नेगेटिव चीज पर ज्यादा ही फोकस करेगा उसके बाद आप न्यूज़ चालू करो या फिर न्यूज़पेपर पढ़ो तो उसमें मैक्सिमम नेगेटिव ही देता कि नेगेटिव यह हुआ वह हुआ तो आप क्या करो कि आप सुबह उठो कम 6:00 बजे उठाओ या कितने बजे नहीं हो तो आप सबसे पहले जाओ आधा घंटा अपने लिए निकालो किसी भी इंसान को इंसान आधा घंटा निकालो मेडिटेशन करो और जितना अच्छा थॉट्स है अपने अंदर करो कि मैं एक अच्छी आत्माओं मेरे मतलब मैं लाइफ में सब कुछ अजीब कर सकता हूं या कर सकती हूं या फिर भगवान ने मेरे को सब कुछ दिया है सबसे प्यारी शरीर भी है बहुत कुछ दिया है अब मेरी रिस्पांसिबिलिटी है कि मैं किस को क्या देता हूं इतना अच्छा आप सो सकते हो आप भेज एवरीथिंग अपने अंदर डाल होगा कि आप अपने अंदर डालते हो तो आपका जो सबकॉन्शियस माइंड है आपका वर्क करने लगेगा अगर आप ना भी चाहोगे तो फिर वह ऐसा बन जाएगा आप ऊपर 21 दिन तक ट्राई करो और आप देखोगे कि आपकी लाइफ जो है वह बहुत ज्यादा चेंज हो गई है और आप चाहकर भी नेगेटिव नहीं सोचता तो हर इंसान को आप लाइफ में यह करना चाहिए अगर हर इंसान है अगर करने लगे बस आधा घंटा और 14 घंटे 15 घंटे दूसरों के साथ बिताता है दूसरों में खुशी दूर से अगर बस आधा घंटा एक घंटा अपने लिए निकालें और अच्छे थॉट्स अपने लिए क्रिएट करें डन उसके जो लाइफ है वह बहुत ज्यादा चेंज हो जाएगी और उसे कभी भी अकेलापन नहीं महसूस होगा क्योंकि वह खुद में कंप्लीट होगा तो हर इंसान को अपने लाइफ में यह करना चाहिए अगर किसी को भी कुछ भी काम करना है सबको सचिव करना या कुछ भी इतना तो एक घंटा तो अपने लिए बनता ही है और हर इंसान को एक घंटा अपने लिए देना चाहिए और बाकी सारे घंटे आप किसी को भी दो तो हर इंसान अगर यह करने लगे तो उसे बहुत सारे देखोगे कि मैक्सिमम डिप्रेशन का कैसा रहा है 1 घंटे अपने लिए निकालें अपने को समझ जाए तो वह डिप्रेशन की कैसे जो है वह भी बहुत ज्यादा कम होने लगेंगे और वह हर इंसान अपने में खुश खुश रहेगा और नेगेटिव भावना है वह भी कम हो जाएगी थैंक यू
Aise kya kveshchan poochha ki jo vyakti hai usake man mein jo negetiv bhaavanaen kyon aatee rahatee hai dekhie jab koee insaan kee man mein ya koee insaan ke andar negetiv bhaavana aane lag gae nakaaraatmak bhaavanaen aane lagatee hai to us insaan ko samajh jaana chaahie ki vah insaan hai usaka man kha liya agar aapane usako samay par kantrol nahin kiya to dekho bahut jyaada vah kampleeted ho jaega matalab dheere-dheere kaam kar rahe ho do din bhar rahe ho to phir vah aapakee jo delee rooteen hai usamen shaamil ho jaega to aapako kabhee bhee aisa kaam nahin karana hai negetiv ka jo aapake delee rooteen mein shaamil ho aur vah sabase jyaada aapako hee nukasaan karega aur kisee ko nahin nukasaan karega to main aapako yah sajeshan dena chaahatee hoon ki agar aap kisee bhee insaan ke andar negetiv bhaavana aatee hai to usako samajh jaana chaahie ki usaka jo man hai vah khaalee hai usako vyast rakh koee bhee kaam hai usako aapako apane aap ko vyast rakhane kee aapako galat taim na mile kuchh matalab galat cheej galat hota hai man mein ya negetiv maiksimam kaam karane se dekhie bahut saare reejan hai ki insaan ke man mein negetiv thots mein aap shuroo se lekar agar aap myoojik subah uthate hain log pahale sabase pahale kuchh nahin kiya medikeshan nahin kiya kuchh nahin kiya sabase pahale kya karenge log soshal meediya chek karenge kya hua usakee laiph mein kya ho raha hai aur soshal meediya jo hai vah phaisala ekadam phir jo usaka man hai jo agar aap pahale hee de doge use hee to vah usee mein ghoomata rahega yah karega aur vah negetiv cheej par jyaada hee phokas karega usake baad aap nyooz chaaloo karo ya phir nyoozapepar padho to usamen maiksimam negetiv hee deta ki negetiv yah hua vah hua to aap kya karo ki aap subah utho kam 6:00 baje uthao ya kitane baje nahin ho to aap sabase pahale jao aadha ghanta apane lie nikaalo kisee bhee insaan ko insaan aadha ghanta nikaalo mediteshan karo aur jitana achchha thots hai apane andar karo ki main ek achchhee aatmaon mere matalab main laiph mein sab kuchh ajeeb kar sakata hoon ya kar sakatee hoon ya phir bhagavaan ne mere ko sab kuchh diya hai sabase pyaaree shareer bhee hai bahut kuchh diya hai ab meree rispaansibilitee hai ki main kis ko kya deta hoon itana achchha aap so sakate ho aap bhej evareething apane andar daal hoga ki aap apane andar daalate ho to aapaka jo sabakonshiyas maind hai aapaka vark karane lagega agar aap na bhee chaahoge to phir vah aisa ban jaega aap oopar 21 din tak traee karo aur aap dekhoge ki aapakee laiph jo hai vah bahut jyaada chenj ho gaee hai aur aap chaahakar bhee negetiv nahin sochata to har insaan ko aap laiph mein yah karana chaahie agar har insaan hai agar karane lage bas aadha ghanta aur 14 ghante 15 ghante doosaron ke saath bitaata hai doosaron mein khushee door se agar bas aadha ghanta ek ghanta apane lie nikaalen aur achchhe thots apane lie kriet karen dan usake jo laiph hai vah bahut jyaada chenj ho jaegee aur use kabhee bhee akelaapan nahin mahasoos hoga kyonki vah khud mein kampleet hoga to har insaan ko apane laiph mein yah karana chaahie agar kisee ko bhee kuchh bhee kaam karana hai sabako sachiv karana ya kuchh bhee itana to ek ghanta to apane lie banata hee hai aur har insaan ko ek ghanta apane lie dena chaahie aur baakee saare ghante aap kisee ko bhee do to har insaan agar yah karane lage to use bahut saare dekhoge ki maiksimam dipreshan ka kaisa raha hai 1 ghante apane lie nikaalen apane ko samajh jae to vah dipreshan kee kaise jo hai vah bhee bahut jyaada kam hone lagenge aur vah har insaan apane mein khush khush rahega aur negetiv bhaavana hai vah bhee kam ho jaegee thaink yoo

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व्यक्ति के मन में नकारात्मक भावनाएं क्यों होती है?Vyakti Ke Man Mein Nakaratmak Bhavnaein Kyun Hoti Hai
Daulat Ram sharma Shastri Bolkar App
Top Speaker,Level 22
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Retrieved sr tea . social activist,
1:27
व्यक्ति के मन में नकारात्मक विचार इसलिए आते हैं क्योंकि जैसी जो संगत में बैठता है जैसा साहित्य पड़ता है वैसे ही उसके विचार बन जाते हैं आप अच्छे लोगों की संगत में बैठेंगे अच्छा साहित्य पड़ेंगे अच्छी पिक्चर देखेंगे तो निश्चित रूप से आप को पॉजिटिव विचार बनेंगे आप समाज के आप समाज और परिवार के लिए कल्याणकारी बनेंगे अपना भी ध्यान रखेंगे अपनों का भी ध्यान रखेंगे और जिम्मेदारी महसूस कर पाएंगे जमीदार बनेंगे और यदि गंदे लोगों के साथ शिव कार्तिकेय लोगों के साथ न श्रेणियों के साथ ज्वारी और सरकारी गंदे लोगों के साथ बैठेंगे गंदा साहित्य पड़ेंगे गंदी पिक्चरें देखेंगे तो निश्चित रूप से आपके विचार भी नकारात्मक हो जाएंगे क्योंकि आप जैसा कुछ देख रहे हैं जैसा कुछ फील कर रहे हैं वैसा ही आप गंदे विचार बन जाते हैं इसलिए यह कहते हैं बेटे कम खाओ लेकिन अच्छा खाओ कम ₹10 का नक्शा पहनो कम दोस्त रखो लेकिन अच्छे मित्र को कम पढ़ो लेकिन अच्छा साहित्य पढ़ो जैसी जिसकी प्रवृत्ति होती है वह वैसे ही व्यक्तियों का चयन कर लेता है और वैसे ही उसके विचार बनते हुए चले जाते हैं यह सब आप पर डिपेंड है
Vyakti ke man mein nakaaraatmak vichaar isalie aate hain kyonki jaisee jo sangat mein baithata hai jaisa saahity padata hai vaise hee usake vichaar ban jaate hain aap achchhe logon kee sangat mein baithenge achchha saahity padenge achchhee pikchar dekhenge to nishchit roop se aap ko pojitiv vichaar banenge aap samaaj ke aap samaaj aur parivaar ke lie kalyaanakaaree banenge apana bhee dhyaan rakhenge apanon ka bhee dhyaan rakhenge aur jimmedaaree mahasoos kar paenge jameedaar banenge aur yadi gande logon ke saath shiv kaartikey logon ke saath na shreniyon ke saath jvaaree aur sarakaaree gande logon ke saath baithenge ganda saahity padenge gandee pikcharen dekhenge to nishchit roop se aapake vichaar bhee nakaaraatmak ho jaenge kyonki aap jaisa kuchh dekh rahe hain jaisa kuchh pheel kar rahe hain vaisa hee aap gande vichaar ban jaate hain isalie yah kahate hain bete kam khao lekin achchha khao kam ₹10 ka naksha pahano kam dost rakho lekin achchhe mitr ko kam padho lekin achchha saahity padho jaisee jisakee pravrtti hotee hai vah vaise hee vyaktiyon ka chayan kar leta hai aur vaise hee usake vichaar banate hue chale jaate hain yah sab aap par dipend hai

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व्यक्ति के मन में नकारात्मक भावनाएं क्यों होती है?Vyakti Ke Man Mein Nakaratmak Bhavnaein Kyun Hoti Hai
Rahul kumar Bolkar App
Top Speaker,Level 44
सुनिए Rahul जी का जवाब
Unknown
1:58
व्यक्ति के मन में नकारात्मक भावनाएं क्यों होती है दोस्तों जब व्यक्ति खुद दुखी होता है दूसरों को खुशी देते हैं और उसको एक जलन सील भावना पैदा होती है इस दौरान जो है उसके नकारात्मक जो भाव उत्पन्न हो जाते हैं इसके अतिरिक्त यदि कोई व्यक्ति अकेला रहता है और उसके कोई साथी नहीं है या फिर समाज के द्वारा उसे अपमानित किया जाता है तो ऐसे व्यक्ति के साथ ही जो है ऐसी घटनाएं हो जाती है और नकारात्मक भावनाएं सोचने लग जाता है तो कोई चीज पाने की चाहत होती है दोस्तों जब जब पैदा होते हैं इंसान के बाद जब जब वह मनुष्य जो है तो किसी चीज की लालसा रखता है वह सेना मिल रही हो तो अन्यथा वह आपके मन से आप निकाल भी सकते हैं क्योंकि अब हम हैं या कोई और व्यक्ति है तो हम एक दूसरे को सम्मान और इज्जत देनी चाहिए दूसरी बात यह है कि सब के साथ प्यार मोहब्बत के साथ रहे तो मेरे हिसाब से नफरत हमारे मध्य में नहीं आएंगे तो यदि आप ऐसा करते करते तो फिर जरूर होगा यानी कि आज 9 जनवरी है प्रवासी दिवस पर आज का ही आप कौन राजस्थान की न्यूज़ बता दूं कि सीकर जिला राजस्थान के अंदर पड़ता है और यहां पर एक लड़के ने अपने कजन को ब्लेड से उसका गला रेत कर हत्या कर दी और पीछे था कि जोकर जनता यानी कि चाचा का जो लड़का था उसका पिता यानी कि उसका चाचा लड़के का भी कमजोर था और उसका बदला देखे उसने कितने सालों बाद लिए लगभग 15 16 साल बाद उसने एक-एक बदला लिया और उसने अपने जो चाचा का जो लड़का था उसकी हत्या कर दी जबकि उसके चाचा के लड़के से तो कुछ ज्यादा कुछ संपर्क ही नहीं थे
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व्यक्ति के मन में नकारात्मक भावनाएं क्यों होती है?Vyakti Ke Man Mein Nakaratmak Bhavnaein Kyun Hoti Hai
BK. SHYAAM. KARWA Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए BK. जी का जवाब
Unknown
1:06
गुड मॉर्निंग नमस्कार आपने पसंद किया है व्यक्ति के मन में नकारात्मक भावनाएं क्यों होती तो देखी मैंने आपको बताना चाहूंगा कि इसका मुख्य कारण होता है महोदय श्री हम लोग उसी जलन महसूस करते हैं तभी हमारे लल्ला का नंबर पर लोगों की खुशी हमसे देखी नहीं जाती है दीवाने हरीश के बताएं क्योंकि हम वैसे नहीं कर सकते हैं जैसे सामने वाला कर रहा हूं इसलिए भावना को दूर करने के लिए हमें ही करना चाहिए तथा योग्य ध्यान करते हैं तो हमें भी पता चल जाता है कि मैं अपने दैनिक जीवन किस प्रकार जुलाई में लोगों को ग्रुप में देना है क्या कार्य करता है वह कर देगी और लोकेश के साथ अच्छा व्यवहार रखेंगे जाती लोगों से चलेंगे मैसेज नहीं करेंगे तो नकारात्मक सोच में डूब जाएंगे जब तुम लोगों से चलेंगे और उनके चलेंगे तब तक नहीं कर सकते धन्यवाद
Gud morning namaskaar aapane pasand kiya hai vyakti ke man mein nakaaraatmak bhaavanaen kyon hotee to dekhee mainne aapako bataana chaahoonga ki isaka mukhy kaaran hota hai mahoday shree ham log usee jalan mahasoos karate hain tabhee hamaare lalla ka nambar par logon kee khushee hamase dekhee nahin jaatee hai deevaane hareesh ke bataen kyonki ham vaise nahin kar sakate hain jaise saamane vaala kar raha hoon isalie bhaavana ko door karane ke lie hamen hee karana chaahie tatha yogy dhyaan karate hain to hamen bhee pata chal jaata hai ki main apane dainik jeevan kis prakaar julaee mein logon ko grup mein dena hai kya kaary karata hai vah kar degee aur lokesh ke saath achchha vyavahaar rakhenge jaatee logon se chalenge maisej nahin karenge to nakaaraatmak soch mein doob jaenge jab tum logon se chalenge aur unake chalenge tab tak nahin kar sakate dhanyavaad

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व्यक्ति के मन में नकारात्मक भावनाएं क्यों होती है?Vyakti Ke Man Mein Nakaratmak Bhavnaein Kyun Hoti Hai
Dr.Pragya Tiwari Bolkar App
Top Speaker,Level 66
सुनिए Dr.Pragya जी का जवाब
Medical student (future doctor)
0:48
देखिए यह हमारे ऊपर डिपेंड करता है कि हमें नकारात्मक सोच रहे हैं या फिर सकारात्मक सोच रहे हैं लेकिन कभी-कभी क्या होता है कि हम बार-बार जब किसी चीज में फेल होते हैं तू हमारा जो कॉन्फिडेंस लेवल है वह काफी कम हो जाता है जिसके कारण हमारी सोच जो है वह काफी सागर नकारात्मक हो जाती है हमें ऐसा लगता है कि अभी तक हम फेल होते रहे हैं मतलब कि हमारे साथ हमेशा बुरा ही होता है और फिर हम नकारात्मक सोच लेना इसलिए व्यक्ति को हमेशा पॉजिटिव थिंकिंग रखना चाहिए और मोटिवेशनल जो वीडियोस है कौन है जो लोग मोटिवेशनल स्पीच देते हैं उन्हें सुनते रहना चाहिए जैसे कि उनका कॉन्फिडेंस लेवल लो ना हो और वे लाइफ में कुछ अच्छा कर पाए और सकारात्मक सोच हमेशा रखता है
Dekhie yah hamaare oopar dipend karata hai ki hamen nakaaraatmak soch rahe hain ya phir sakaaraatmak soch rahe hain lekin kabhee-kabhee kya hota hai ki ham baar-baar jab kisee cheej mein phel hote hain too hamaara jo konphidens leval hai vah kaaphee kam ho jaata hai jisake kaaran hamaaree soch jo hai vah kaaphee saagar nakaaraatmak ho jaatee hai hamen aisa lagata hai ki abhee tak ham phel hote rahe hain matalab ki hamaare saath hamesha bura hee hota hai aur phir ham nakaaraatmak soch lena isalie vyakti ko hamesha pojitiv thinking rakhana chaahie aur motiveshanal jo veediyos hai kaun hai jo log motiveshanal speech dete hain unhen sunate rahana chaahie jaise ki unaka konphidens leval lo na ho aur ve laiph mein kuchh achchha kar pae aur sakaaraatmak soch hamesha rakhata hai

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व्यक्ति के मन में नकारात्मक भावनाएं क्यों होती है?Vyakti Ke Man Mein Nakaratmak Bhavnaein Kyun Hoti Hai
Divya Singh  Bolkar App
Top Speaker,Level 22
सुनिए Divya जी का जवाब
Mentor teacher at DoE, Delhi
4:57
नमस्कार प्रश्न है व्यक्ति के मन में नकारात्मक भावनाएं क्यों होती हैं मेरे विचार में नकारात्मक भावनाएं किसी भी व्यक्ति के मन में तब आती हैं जब है खाली समय ज्यादा बिताता है और व्यस्त कम रहता है क्योंकि व्यस्त रहने में जो शरीर की हमारी ऊर्जा का जो प्रयोग होता है तो मुझे लगता है कि जैसे कि क्या था ना बहता पानी साफ होता है और रुका हुआ पानी गंदा हो जाता है तो उसी प्रकार से जब हम कार्यरत रहते हैं क्योंकि शरीर की एक आवश्यकता है श्रम करना जब हम श्रम करते हैं मेहनत करते हैं व्यस्त रहते हैं तो हमारे मस्तिष्क में भी और शरीर में भी कुछ एक आवागमन लगा रहता है ऊर्जा का जो है आदान-प्रदान होता रहता है नई ऊर्जा का संचार होता है तो वह ऊर्जा जो है जो प्रवाहित होती है तो वह कहीं ना कहीं उस में नेगेटिव एनर्जी बाहर भी निकलती है ओ पॉजिटिव एनर्जी ज्यादा अगेन कर पाते हैं और एक कारण तो यह हुआ व्यस्त रहना व्यस्त रखना खुद को और शारीरिक श्रम करना भी क्योंकि अगर हम व्यस्त हैं तो उसमें देखिए दोनों पहलू हैं व्यस्त हैं तो मानसिक तौर से भी अगर आप व्यस्त हैं तो आप कुछ अच्छा काम में अगर आप व्यस्त हैं अपने तो आपका जो मस्तिष्क है वह भी कुछ सोच रहा है तुझे ब्रेन होता है जो मैं माइंड होता है इसमें भी हम देखे तो इसका फूड क्या है फिंकिंग विचार का फूड थॉट प्रोसेस अगर हम कुछ सोच रहे हैं कुछ ऑन कर रहे हैं कुछ नया सीख रहे हैं कुछ कार्य कर रहे हैं तो हमारा मस्तिष्क का गलत प्रयोग हो रहा है तो उसको फूड मिल रहा है तो वहां पर भी ऊर्जा का संचार हो रहा है तो नेगेटिव ऊर्जा बाहर कहीं ना कहीं निकल रही है और अच्छी ऊर्जा का संचार हो और जो हम कर रहे हैं तो शरीर में से टॉक्सिक के रूप में जो टॉक्सिंस जो बनते हैं शरीर के अंदर और विषैले पदार्थों पसीने के रूप में और गैसेस के रूप में या कहीं ना कहीं बाहर जो है वह शरीर से निकलते हैं और हम देखते भी हैं कि जो जितना लैश्रम करते हैं उनकी शरीर एकदम उनका फिट रहता है मस्तिष्क में जो कार्य है रखते हैं व्यस्त हैं उनके विचार भी कहीं ना कहीं बेहतर हम देख पाते हैं कि होते हैं हालांकि इसमें अपवाद भी हैं हो सकता है कुछ लोग मेरे उत्तर से सहमत भी ना हो पर एक डिफरेंस तो देखा है कि जो लोग काम काम करते हैं शरीर का गर्म कम करते हैं वह बैठे-बैठे कुछ ना कुछ कुंठा है उनके मन में होती हैं बैठे-बैठे दूसरों में कमियां ढूंढते रहते हैं और वह कमियां ढूंढ ना ईर्ष्या करना जब हम शर्म नहीं करते तो हमारे शरीर में जो टॉक सिंह से वह निकल नहीं पाते तो कहीं ना कहीं वहां भी एक ओ नेगेटिव एनर्जी हमारी बॉडी के अंदर भरी होती है और उस नेगेटिव एनर्जी के कारण विचार भी कहीं ना कहीं वैसे ही आने लगते हैं तो दूसरों से ही से अभाव हो जाता है कुंठा होती है लगता है कि इनकी वजह से ही हम परेशान हैं और जब लगता है कि हम दूसरे की वजह से परेशान है तो कहीं ना क्रीम कैसे दोगे तो उसको कुछ लोग समाप्त करने की या उसको अपने रास्ते से हटा देने की या उससे किनारा कर लेने की भी सोचते हैं इससे रिश्तो में भी खटास आती है तो खटास कैसे आती है यह तो प्रश्न है नहीं लेकिन यह भावनाएं होती क्यों है तो मुझे मेरी समझ में यह भावनाएं कम श्रम करना कम व्यस्त रहना पहला कारण हुआ और दूसरा कारण इसका वही है कि जब हम कुछ नया नहीं सीख रहे होते हैं तो भी मुझे लगता है कि नेगेटिव जो है वह पिंकी कुमारी आने की फीलिंग हमारे अंदर आ जाती है जैसे कि मैं उदाहरण देना चाहूंगा कोई स्त्री है महिला है या कोई भी व्यक्ति हो सकता है वह महिला का उदाहरण इसलिए दे रही या किसी लड़की का डिस्प्ले दे रही हो कि कई बार बहुत एंबिशियस लड़कियां होती बट शादी हो जाने पर या इधर की कुछ ऐसी परिस्थितियां कि जब उनकी पढ़ाई को रोक दिया जाए एंबिशन को अचीव करने ना दिया जाए जहां वह जाना चाहती हो उसकी वजह कोई दूसरा ऑप्शन उनको चुनने को कहा जाता है यह हमारे भारतीय समाज में प्रैक्टिस होते ताकि वह घर को सुचारू रूप से चला पाए तो प्राइवेट आती है तो जब उसके सीखने सिखाने का प्रोसेस रुक जाता है तो ऐसे बहुत से उदाहरण है हमारे पास जो हम जीवन में देखते कि वहां पर वह कहीं ना कहीं इरिटेट रहती हैं परेशान रहती हैं और जो परेशान रहते तो नेगेटिव बूटी की भर जाती है अपने अंदर लगता है कि कुछ कमी महसूस हो रही है उसका कारण दूसरे लोग दिखने लगते हैं फिर उनसे हमें परेशानी या बुरा फील होता है कि इनकी वजह से हम आगे नहीं बढ़ पाई जीवन में या हम दूसरों को अपने से आगे बढ़ता हुआ देख कर तो लगता है कि इससे बेहतर तो हम कर सकते थे लेकिन इन कारणों से हम नहीं कर पाए तो उससे फिर कहीं एक सभा होने लगता है तो मुझे ऐसा लगता है कि जो व्यक्ति कुछ नया सीख नहीं रहा होता कुछ नया कर नहीं रहा होता जब नयापन नहीं होता तो उसमें नकारात्मक भावनाएं धन्यवाद
Namaskaar prashn hai vyakti ke man mein nakaaraatmak bhaavanaen kyon hotee hain mere vichaar mein nakaaraatmak bhaavanaen kisee bhee vyakti ke man mein tab aatee hain jab hai khaalee samay jyaada bitaata hai aur vyast kam rahata hai kyonki vyast rahane mein jo shareer kee hamaaree oorja ka jo prayog hota hai to mujhe lagata hai ki jaise ki kya tha na bahata paanee saaph hota hai aur ruka hua paanee ganda ho jaata hai to usee prakaar se jab ham kaaryarat rahate hain kyonki shareer kee ek aavashyakata hai shram karana jab ham shram karate hain mehanat karate hain vyast rahate hain to hamaare mastishk mein bhee aur shareer mein bhee kuchh ek aavaagaman laga rahata hai oorja ka jo hai aadaan-pradaan hota rahata hai naee oorja ka sanchaar hota hai to vah oorja jo hai jo pravaahit hotee hai to vah kaheen na kaheen us mein negetiv enarjee baahar bhee nikalatee hai o pojitiv enarjee jyaada agen kar paate hain aur ek kaaran to yah hua vyast rahana vyast rakhana khud ko aur shaareerik shram karana bhee kyonki agar ham vyast hain to usamen dekhie donon pahaloo hain vyast hain to maanasik taur se bhee agar aap vyast hain to aap kuchh achchha kaam mein agar aap vyast hain apane to aapaka jo mastishk hai vah bhee kuchh soch raha hai tujhe bren hota hai jo main maind hota hai isamen bhee ham dekhe to isaka phood kya hai phinking vichaar ka phood thot proses agar ham kuchh soch rahe hain kuchh on kar rahe hain kuchh naya seekh rahe hain kuchh kaary kar rahe hain to hamaara mastishk ka galat prayog ho raha hai to usako phood mil raha hai to vahaan par bhee oorja ka sanchaar ho raha hai to negetiv oorja baahar kaheen na kaheen nikal rahee hai aur achchhee oorja ka sanchaar ho aur jo ham kar rahe hain to shareer mein se toksik ke roop mein jo toksins jo banate hain shareer ke andar aur vishaile padaarthon paseene ke roop mein aur gaises ke roop mein ya kaheen na kaheen baahar jo hai vah shareer se nikalate hain aur ham dekhate bhee hain ki jo jitana laishram karate hain unakee shareer ekadam unaka phit rahata hai mastishk mein jo kaary hai rakhate hain vyast hain unake vichaar bhee kaheen na kaheen behatar ham dekh paate hain ki hote hain haalaanki isamen apavaad bhee hain ho sakata hai kuchh log mere uttar se sahamat bhee na ho par ek dipharens to dekha hai ki jo log kaam kaam karate hain shareer ka garm kam karate hain vah baithe-baithe kuchh na kuchh kuntha hai unake man mein hotee hain baithe-baithe doosaron mein kamiyaan dhoondhate rahate hain aur vah kamiyaan dhoondh na eershya karana jab ham sharm nahin karate to hamaare shareer mein jo tok sinh se vah nikal nahin paate to kaheen na kaheen vahaan bhee ek o negetiv enarjee hamaaree bodee ke andar bharee hotee hai aur us negetiv enarjee ke kaaran vichaar bhee kaheen na kaheen vaise hee aane lagate hain to doosaron se hee se abhaav ho jaata hai kuntha hotee hai lagata hai ki inakee vajah se hee ham pareshaan hain aur jab lagata hai ki ham doosare kee vajah se pareshaan hai to kaheen na kreem kaise doge to usako kuchh log samaapt karane kee ya usako apane raaste se hata dene kee ya usase kinaara kar lene kee bhee sochate hain isase rishto mein bhee khataas aatee hai to khataas kaise aatee hai yah to prashn hai nahin lekin yah bhaavanaen hotee kyon hai to mujhe meree samajh mein yah bhaavanaen kam shram karana kam vyast rahana pahala kaaran hua aur doosara kaaran isaka vahee hai ki jab ham kuchh naya nahin seekh rahe hote hain to bhee mujhe lagata hai ki negetiv jo hai vah pinkee kumaaree aane kee pheeling hamaare andar aa jaatee hai jaise ki main udaaharan dena chaahoonga koee stree hai mahila hai ya koee bhee vyakti ho sakata hai vah mahila ka udaaharan isalie de rahee ya kisee ladakee ka disple de rahee ho ki kaee baar bahut embishiyas ladakiyaan hotee bat shaadee ho jaane par ya idhar kee kuchh aisee paristhitiyaan ki jab unakee padhaee ko rok diya jae embishan ko acheev karane na diya jae jahaan vah jaana chaahatee ho usakee vajah koee doosara opshan unako chunane ko kaha jaata hai yah hamaare bhaarateey samaaj mein praiktis hote taaki vah ghar ko suchaaroo roop se chala pae to praivet aatee hai to jab usake seekhane sikhaane ka proses ruk jaata hai to aise bahut se udaaharan hai hamaare paas jo ham jeevan mein dekhate ki vahaan par vah kaheen na kaheen iritet rahatee hain pareshaan rahatee hain aur jo pareshaan rahate to negetiv bootee kee bhar jaatee hai apane andar lagata hai ki kuchh kamee mahasoos ho rahee hai usaka kaaran doosare log dikhane lagate hain phir unase hamen pareshaanee ya bura pheel hota hai ki inakee vajah se ham aage nahin badh paee jeevan mein ya ham doosaron ko apane se aage badhata hua dekh kar to lagata hai ki isase behatar to ham kar sakate the lekin in kaaranon se ham nahin kar pae to usase phir kaheen ek sabha hone lagata hai to mujhe aisa lagata hai ki jo vyakti kuchh naya seekh nahin raha hota kuchh naya kar nahin raha hota jab nayaapan nahin hota to usamen nakaaraatmak bhaavanaen dhanyavaad

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व्यक्ति के मन में नकारात्मक भावनाएं क्यों होती है?Vyakti Ke Man Mein Nakaratmak Bhavnaein Kyun Hoti Hai
Archana Mishra Bolkar App
Top Speaker,Level 22
सुनिए Archana जी का जवाब
Housewife
1:04
नमस्कार आपका प्रश्न है व्यक्ति के मन में हमेशा नकारात्मक भावनाएं क्यों आती हैं तो इसका जवाब यह है कि हमारा मन नकारात्मक और सकारात्मक दोनों चीजें सोचता है लेकिन मैं सकारात्मक कम सोचता है और हमारे दिल दिमाग में ऐसा ही होता है कि वह नकारात्मक भावनाएं ज्यादा सोचता है क्योंकि सकारात्मक भावनाएं कम सोचता है नकारात्मक भावनाएं मेरा दिमाग ज्यादा सोचने लगता है जब भी कोई कहीं बाहर जाएगा तो अच्छा सोचने की वजह दिमाग बुरा सोचने लगता है यह हमें अपने मस्तिष्क से अंदर से होता है और यह नकारात्मक भावनाएं इसलिए आती है क्योंकि मेरा दिमाग में तो पति चलता रहता है वह एक जगह स्थाई नहीं रहता और मन में विचार हमेशा आते रहते हैं शरीर चाहे सो जाए लेकिन दीमक हमेशा चलता रहता है और वह ज्यादातर नेगेटिव बातें ही सोचता है बल्कि ऐसा नहीं होना चाहिए पर मेरे दिमाग की आदत होती है बे पॉजिटिव से ज्यादा नेगेटिव बातें सोचता है तो आपको जवाब अच्छे लगे तो लाइक कीजिएगा धन्यवाद
Namaskaar aapaka prashn hai vyakti ke man mein hamesha nakaaraatmak bhaavanaen kyon aatee hain to isaka javaab yah hai ki hamaara man nakaaraatmak aur sakaaraatmak donon cheejen sochata hai lekin main sakaaraatmak kam sochata hai aur hamaare dil dimaag mein aisa hee hota hai ki vah nakaaraatmak bhaavanaen jyaada sochata hai kyonki sakaaraatmak bhaavanaen kam sochata hai nakaaraatmak bhaavanaen mera dimaag jyaada sochane lagata hai jab bhee koee kaheen baahar jaega to achchha sochane kee vajah dimaag bura sochane lagata hai yah hamen apane mastishk se andar se hota hai aur yah nakaaraatmak bhaavanaen isalie aatee hai kyonki mera dimaag mein to pati chalata rahata hai vah ek jagah sthaee nahin rahata aur man mein vichaar hamesha aate rahate hain shareer chaahe so jae lekin deemak hamesha chalata rahata hai aur vah jyaadaatar negetiv baaten hee sochata hai balki aisa nahin hona chaahie par mere dimaag kee aadat hotee hai be pojitiv se jyaada negetiv baaten sochata hai to aapako javaab achchhe lage to laik keejiega dhanyavaad

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व्यक्ति के मन में नकारात्मक भावनाएं क्यों होती है?Vyakti Ke Man Mein Nakaratmak Bhavnaein Kyun Hoti Hai
VIKRAM  Bolkar App
Top Speaker,Level 11
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Coach with entrepreneur mindset...sharing my experiences.
2:56
सवाल है व्यक्ति के मन में नकारात्मक भावनाएं क्यों होती है और मैं मानता हूं कि नकारात्मक भावनाएं हूं ना किसी भी चीज के लिए अच्छा भी है क्योंकि जब आप डिसीजन मेकिंग करते हैं ऐसे मैं आपको उदाहरण देता हूं आपने दिल्ली से मुंबई जाना है तो आपने यह डिसीजन लेना है कि दिल्ली से मुंबई जाने का रास्ता क्या उदाहरण में आपको दे रहा हूं कि हम कैसे जाएंगे फ्लाइट से जाएंगे ट्रेन से जाएंगे बस से जाएंगे तो अभी कोर्णाक ऑल है तो करना काल में आप क्या चाहेंगे किस तरीके से जाने के लिए बस से जाएंगे ट्रेन से चाहेंगे और कोई भी पैदल भी एक ऑप्शन हो सकता है तो आप उसका पॉजिटिव ही देखते हैं उसका नेगेटिव भी देखते हैं तो आप पॉजिटिव हमेशा देखते हैं पर नकारात्मकता भी आएंगी कि आप लाइफ में जा रहे हैं जहां पर बहुत ही कन्जेस्टेड तरीके से लोग बैठे हुए हैं और हो सकता है आप के बगल में कोई व्यक्ति हो जो संक्रमित हो और आपको इंफेक्शन फैला दें तो यह क्या हुआ एक नकारात्मक का भाव आया तो नकारात्मक का भाव आना गलत नहीं है जब भी आप नकारात्मक का भाव आता है तो आप उससे बचने के उपाय करते हैं जिसको हम बोलते हैं पूर्व एक्टिव होना तो आप प्रोएक्टिव या आप जो बोलते प्रीवेंटिव मेजरस आफ लेते हैं कैसे लेते हैं आपने देखा कि मौसम ठंडा हो रहा है तो आपने स्वेटर निकालकर पहन लिया तो क्या है आपको डर हुआ मौसम ठंडा हो गया है आप को सर्दी हो जाएगी खांसी हो जाएगी यह नकारात्मकता है तो आप बचने के लिए क्या किया आपने अच्छे स्वेटर और जैकेट पहन लिए आपको नहीं हुआ तो नकारात्मक का भाव होना नखरा तब तक खराब नहीं है आपने यह समझना है कि आप जब कोई डिसीजन लेते हैं कोई भी कार्य मैं आपको एग्जांपल दिया एक स्वेटर का एक छोटा ट्रेवल का आपको हर समय पॉजिटिव और नेगेटिव सकारात्मकता और नकारात्मक दोनों को तुलना करना है और तुलना करके आपको डिसीजन लेना है कौन सा डिवीजन आपके लिए सही है तो बिल्कुल आना खाता की भावना कि मैं जो बोलूंगा कि यह मेरे हिसाब से यह गलत नहीं है दोनों को वे करना चाहिए और एक छोटा सा कॉशन है क्या आप ऐसा ना सोचे कि मैं रोड पर निकला और एक गाड़ी आएगी मुझे धक्का मार देगी तो फिर धक्का मार देगी तो मैं यह हो जाएगा तो छोड़ चला जाऊंगा चोट लग जाएगा खून निकल जाएगा बजाएगा फैक्चर हो जाएगा हॉस्पिटल में जगह नहीं मिलेगा तो आप बहुत स्मार्ट समझते गए तो वैसे भी नहीं होना आपने नकारात्मकता के बारे में प्रैक्टिस मैच लेने हैं पर आपने यह भी सोचना है आप एक जनरल को फॉलो करें जब रोड में लोग चलते हैं तो 10000 लोगों में से 1 लोग का एक्सीडेंट होता है बाकी 9999 लोग जो है वह सही सकुशल अपने घर वापस चले जाते हैं तो आपने यह देखना है कि जनरलाइज्ड क्या है और हम उतनी ज्यादा न सोचें उसी में फर्स्ट किनारा जाए ऐसा मेरा मानना तो इसके लिए मैं यह कहना चाहता था आपका बहुत-बहुत धन्यवाद थैंक यू
Savaal hai vyakti ke man mein nakaaraatmak bhaavanaen kyon hotee hai aur main maanata hoon ki nakaaraatmak bhaavanaen hoon na kisee bhee cheej ke lie achchha bhee hai kyonki jab aap diseejan meking karate hain aise main aapako udaaharan deta hoon aapane dillee se mumbee jaana hai to aapane yah diseejan lena hai ki dillee se mumbee jaane ka raasta kya udaaharan mein aapako de raha hoon ki ham kaise jaenge phlait se jaenge tren se jaenge bas se jaenge to abhee kornaak ol hai to karana kaal mein aap kya chaahenge kis tareeke se jaane ke lie bas se jaenge tren se chaahenge aur koee bhee paidal bhee ek opshan ho sakata hai to aap usaka pojitiv hee dekhate hain usaka negetiv bhee dekhate hain to aap pojitiv hamesha dekhate hain par nakaaraatmakata bhee aaengee ki aap laiph mein ja rahe hain jahaan par bahut hee kanjested tareeke se log baithe hue hain aur ho sakata hai aap ke bagal mein koee vyakti ho jo sankramit ho aur aapako imphekshan phaila den to yah kya hua ek nakaaraatmak ka bhaav aaya to nakaaraatmak ka bhaav aana galat nahin hai jab bhee aap nakaaraatmak ka bhaav aata hai to aap usase bachane ke upaay karate hain jisako ham bolate hain poorv ektiv hona to aap proektiv ya aap jo bolate preeventiv mejaras aaph lete hain kaise lete hain aapane dekha ki mausam thanda ho raha hai to aapane svetar nikaalakar pahan liya to kya hai aapako dar hua mausam thanda ho gaya hai aap ko sardee ho jaegee khaansee ho jaegee yah nakaaraatmakata hai to aap bachane ke lie kya kiya aapane achchhe svetar aur jaiket pahan lie aapako nahin hua to nakaaraatmak ka bhaav hona nakhara tab tak kharaab nahin hai aapane yah samajhana hai ki aap jab koee diseejan lete hain koee bhee kaary main aapako egjaampal diya ek svetar ka ek chhota treval ka aapako har samay pojitiv aur negetiv sakaaraatmakata aur nakaaraatmak donon ko tulana karana hai aur tulana karake aapako diseejan lena hai kaun sa diveejan aapake lie sahee hai to bilkul aana khaata kee bhaavana ki main jo boloonga ki yah mere hisaab se yah galat nahin hai donon ko ve karana chaahie aur ek chhota sa koshan hai kya aap aisa na soche ki main rod par nikala aur ek gaadee aaegee mujhe dhakka maar degee to phir dhakka maar degee to main yah ho jaega to chhod chala jaoonga chot lag jaega khoon nikal jaega bajaega phaikchar ho jaega hospital mein jagah nahin milega to aap bahut smaart samajhate gae to vaise bhee nahin hona aapane nakaaraatmakata ke baare mein praiktis maich lene hain par aapane yah bhee sochana hai aap ek janaral ko pholo karen jab rod mein log chalate hain to 10000 logon mein se 1 log ka ekseedent hota hai baakee 9999 log jo hai vah sahee sakushal apane ghar vaapas chale jaate hain to aapane yah dekhana hai ki janaralaijd kya hai aur ham utanee jyaada na sochen usee mein pharst kinaara jae aisa mera maanana to isake lie main yah kahana chaahata tha aapaka bahut-bahut dhanyavaad thaink yoo

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व्यक्ति के मन में नकारात्मक भावनाएं क्यों होती है?Vyakti Ke Man Mein Nakaratmak Bhavnaein Kyun Hoti Hai
Dukh kaise mite Bolkar App
Top Speaker,Level 11
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Unknown
2:52
जय श्री कृष्णा आप पूजा के भक्ति के मन में नकार संभावना क्यों होती है हरे कृष्ण हरे कार्तम भावना जब होती है जब आप अपने आप को अकेला जानते हैं और इस अन्य किसी मनुष्य को अकेला नहीं छोड़ा उन्होंने अपने सपने का विधान बनाया है कि सपने में आके आज्ञा देते उद्देश्य थे उन्होंने भक्ति और प्रार्थना का विधान बना जिसे हम से जुड़ जाते हैं हरे कृष्ण हरे कृष्ण हरे कृष्ण हरे तो मनुष्य इतने भी मनुष्य है धरती पर किसी को हक नहीं छोड़ा 8400000 योनियों में तो अपने कर्मों का दुख भोगने के लिए ही उनको शिवानी मिली है लेकिन मनुष्य जीवन में ऐसा नहीं है मनुष्य जीवन में पूर्व जन्म के आधार कार्ड फल होते हैं बताते हैं लेकिन इससे जुड़ जाते हैं तू में भोगने पड़ते हैं वह सब हो जाते हैं हरे कृष्ण हरे कृष्ण हरे कृष्ण से कैसे जुड़ा जाए यह मैंने वो को लेकर काफी अपलोड किए हैं उन्हें आप एक-एक करके ध्यानपुर सुने हालांकि 10 मिनट में पूरी बात नहीं कर सकता क्योंकि वह 10 मिनट में ऑडियो अपलोड हो जाता है मैंने तो काफी ऑडियो क्लिप से आप पूरा ध्यानपुर सुने और आपको मालूम हो जाएगा कि ना खाते में चार क्यों आते यह नकाश में तमोगुण है उसके कारण आते हैं और पूरे देने का अगर किसी के पास ज्यादा तभी आपके जकार्ता विचार आते हैं तो उस लिए धाकड़ तांबे छाले मिटाने के लिए भक्ति करनी पड़ती है हरे कृष्णा हरे कृष्ण भक्ति से बात करते हैं हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण हरे कृष्ण तो मैंने काफी ऑडियो क्लिप अपलोड केवल आप ध्यान पूर्वक सुने अपना जीवन सफल बनाएं आप सुधीर हैं दूसरों को सुखी करने की सामर्थ हासिल करें स्वस्थ मनुष्य में संयोगिता है हरे कृष्ण हरे कृष्ण देखो मनुष्य शरीर से भगवान जैसे बन जाते हैं लोग इस मनुष्य सही सागर भक्ति नहीं करते हैं तो प्रगति तीनों गुण तो घूम आते रहेंगे और सभी बूथ बनाए गए कोई प्रेत बढ़ाएंगे 2400000 रोड में घूमते रहेंगे कभी कुत्ता कभी बिल्ली कूची कूची शरीफ मिलता रहेगा और लेकिन भक्ति करेंगे तो मानसी को सारी पुनम शेरी पालन करके तो आप निश्चित भगवान जैसे बन जाएंगे हरे कृष्ण हरे कृष्ण तो पूरा ऑडियो उसमें देखें वह कुलेश्वरी कसनी कसनी कसनी कसनी कसनी कसनी
Jay shree krshna aap pooja ke bhakti ke man mein nakaar sambhaavana kyon hotee hai hare krshn hare kaartam bhaavana jab hotee hai jab aap apane aap ko akela jaanate hain aur is any kisee manushy ko akela nahin chhoda unhonne apane sapane ka vidhaan banaaya hai ki sapane mein aake aagya dete uddeshy the unhonne bhakti aur praarthana ka vidhaan bana jise ham se jud jaate hain hare krshn hare krshn hare krshn hare to manushy itane bhee manushy hai dharatee par kisee ko hak nahin chhoda 8400000 yoniyon mein to apane karmon ka dukh bhogane ke lie hee unako shivaanee milee hai lekin manushy jeevan mein aisa nahin hai manushy jeevan mein poorv janm ke aadhaar kaard phal hote hain bataate hain lekin isase jud jaate hain too mein bhogane padate hain vah sab ho jaate hain hare krshn hare krshn hare krshn se kaise juda jae yah mainne vo ko lekar kaaphee apalod kie hain unhen aap ek-ek karake dhyaanapur sune haalaanki 10 minat mein pooree baat nahin kar sakata kyonki vah 10 minat mein odiyo apalod ho jaata hai mainne to kaaphee odiyo klip se aap poora dhyaanapur sune aur aapako maaloom ho jaega ki na khaate mein chaar kyon aate yah nakaash mein tamogun hai usake kaaran aate hain aur poore dene ka agar kisee ke paas jyaada tabhee aapake jakaarta vichaar aate hain to us lie dhaakad taambe chhaale mitaane ke lie bhakti karanee padatee hai hare krshna hare krshn bhakti se baat karate hain hare krshn hare krshn krshn hare krshn to mainne kaaphee odiyo klip apalod keval aap dhyaan poorvak sune apana jeevan saphal banaen aap sudheer hain doosaron ko sukhee karane kee saamarth haasil karen svasth manushy mein sanyogita hai hare krshn hare krshn dekho manushy shareer se bhagavaan jaise ban jaate hain log is manushy sahee saagar bhakti nahin karate hain to pragati teenon gun to ghoom aate rahenge aur sabhee booth banae gae koee pret badhaenge 2400000 rod mein ghoomate rahenge kabhee kutta kabhee billee koochee koochee shareeph milata rahega aur lekin bhakti karenge to maanasee ko saaree punam sheree paalan karake to aap nishchit bhagavaan jaise ban jaenge hare krshn hare krshn to poora odiyo usamen dekhen vah kuleshvaree kasanee kasanee kasanee kasanee kasanee kasanee

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व्यक्ति के मन में नकारात्मक भावनाएं क्यों होती है?Vyakti Ke Man Mein Nakaratmak Bhavnaein Kyun Hoti Hai
Ekta Sahni Bolkar App
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Unknown
2:17
नमस्कार आपका प्रश्न है व्यक्ति के मन में नकारात्मक इन एक्टिव भावनाएं क्यों होती हैं तो नेगेटिव थॉट्स व्यक्ति के मन में किसी न किसी दर्द की वजह से ही आते हैं तो बिजनेस में लॉस हो रहा है तो उसको पैसे का डाल रहे हैं या दोस्तों का लॉस हो रहा है तो उस तो रिश्तो का डर है या कुछ भी बच्चे के साथ बच्चे का भविष्य बनाना है तो उसका डर है तो सबको लेकर उसके अंदर नेगेटिव दोस्ती पहले आते हैं अच्छे थॉट्स पास में आते हैं अगर हमारा बच्चा सबसे अच्छी मिल नहीं रहा है हर शाम को खेलने के आज छोटा है हमें अब बाहर गए हमें दिख नहीं रहा है हालांकि हो सकता है वह अपनी और प्ले कर रहा हूं लेकिन हमारे मन में ना अब बचा नहीं दिख रहा है हम घबरा जाएंगे तो सबसे पहले हमारे अंदर नेगेटिव थॉट्स यह मेरा खुद का एक्सपीरियंस है मेरा बेटा 1 दिन पार्क में गया और मैं आपसे लेने के लिए गए तो अब मुझे वह दिखाई नहीं दे रहा था हल्के वहीं पर ही हो एक मॉल के पीछे छुपा हुआ था जब वहां पर कुछ लोग थे इधर से मेरे अंदर कितना है मैं बता नहीं सकती आपको एक्सप्लेन नहीं कर सकती कि सपोटरा के लिए क्या हुआ कहां लेकर आओ भाई दिखाई नहीं दे रहा है तो कहीं बाहर गया नहीं पता नहीं क्या-क्या कितनी फोन में नहीं आती है तो हमें वह मिल तो गया लेकिन पहले बहुत सारी नकारात्मक विचार मन में आए तो किसी ना किसी चीज का डर इस जैसे हम बहुत प्यार करते हैं हम अपने बिजनस से बहुत प्यार करते हैं तुमको खोने का डर हमारे अंदर नकारात्मक विचार पैदा करता है कि किसी भी चीज को खोने का डर जिसे हम बहुत पसंद करते हैं हमारे अंदर नेगेटिव थॉट्स पैदा करता है तो मैं टेशन कीजिए मैंने भी मैं भी करती हूं तो यही इसका इलाज है नकारात्मक सोच सॉन्ग को बल्ले दूर भगाए प्लीज इस मैटर को कम करें कोशिश करें खुद पर काबू पाने के तो नेगेटिव थोड़ी बताएंगे आशावादी बनें धन्यवाद
Namaskaar aapaka prashn hai vyakti ke man mein nakaaraatmak in ektiv bhaavanaen kyon hotee hain to negetiv thots vyakti ke man mein kisee na kisee dard kee vajah se hee aate hain to bijanes mein los ho raha hai to usako paise ka daal rahe hain ya doston ka los ho raha hai to us to rishto ka dar hai ya kuchh bhee bachche ke saath bachche ka bhavishy banaana hai to usaka dar hai to sabako lekar usake andar negetiv dostee pahale aate hain achchhe thots paas mein aate hain agar hamaara bachcha sabase achchhee mil nahin raha hai har shaam ko khelane ke aaj chhota hai hamen ab baahar gae hamen dikh nahin raha hai haalaanki ho sakata hai vah apanee aur ple kar raha hoon lekin hamaare man mein na ab bacha nahin dikh raha hai ham ghabara jaenge to sabase pahale hamaare andar negetiv thots yah mera khud ka eksapeeriyans hai mera beta 1 din paark mein gaya aur main aapase lene ke lie gae to ab mujhe vah dikhaee nahin de raha tha halke vaheen par hee ho ek mol ke peechhe chhupa hua tha jab vahaan par kuchh log the idhar se mere andar kitana hai main bata nahin sakatee aapako eksaplen nahin kar sakatee ki sapotara ke lie kya hua kahaan lekar aao bhaee dikhaee nahin de raha hai to kaheen baahar gaya nahin pata nahin kya-kya kitanee phon mein nahin aatee hai to hamen vah mil to gaya lekin pahale bahut saaree nakaaraatmak vichaar man mein aae to kisee na kisee cheej ka dar is jaise ham bahut pyaar karate hain ham apane bijanas se bahut pyaar karate hain tumako khone ka dar hamaare andar nakaaraatmak vichaar paida karata hai ki kisee bhee cheej ko khone ka dar jise ham bahut pasand karate hain hamaare andar negetiv thots paida karata hai to main teshan keejie mainne bhee main bhee karatee hoon to yahee isaka ilaaj hai nakaaraatmak soch song ko balle door bhagae pleej is maitar ko kam karen koshish karen khud par kaaboo paane ke to negetiv thodee bataenge aashaavaadee banen dhanyavaad

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व्यक्ति के मन में नकारात्मक भावनाएं क्यों होती है?Vyakti Ke Man Mein Nakaratmak Bhavnaein Kyun Hoti Hai
 Nida Rajput       Bolkar App
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सुनिए जी का जवाब
Student Computer Science Education
0:39
व्यक्ति के मन में नकारात्मक भावनाएं क्यों होती हैं व्यक्ति के मन में नकारात्मक भावनाएं होती नहीं है बल्कि व्यक्ति नकारात्मक भावनाओं को ऑब्जर्व करता है वह नकारात्मक चीजों को देता है और जब जिस चीज को हमारी आंखें देखती है फिर उसी चीज को माइंड कैप्चर करता है और फिर वैसे ही हमारी थिंकिंग बन जाती है और उसी में काम करती हमारी थिंकिंग होती है वैसा ही हम काम करते हैं जो हम देखते हैं वही हमारी थिंकिंग बनती है उसी में हम काम करते हैं तो कोशिश करें नकारात्मक भावनाओं से बचने की नकारात्मक चीजों को देखने की सुनने की धन्यवाद
Vyakti ke man mein nakaaraatmak bhaavanaen kyon hotee hain vyakti ke man mein nakaaraatmak bhaavanaen hotee nahin hai balki vyakti nakaaraatmak bhaavanaon ko objarv karata hai vah nakaaraatmak cheejon ko deta hai aur jab jis cheej ko hamaaree aankhen dekhatee hai phir usee cheej ko maind kaipchar karata hai aur phir vaise hee hamaaree thinking ban jaatee hai aur usee mein kaam karatee hamaaree thinking hotee hai vaisa hee ham kaam karate hain jo ham dekhate hain vahee hamaaree thinking banatee hai usee mein ham kaam karate hain to koshish karen nakaaraatmak bhaavanaon se bachane kee nakaaraatmak cheejon ko dekhane kee sunane kee dhanyavaad

bolkar speaker
व्यक्ति के मन में नकारात्मक भावनाएं क्यों होती है?Vyakti Ke Man Mein Nakaratmak Bhavnaein Kyun Hoti Hai
er. ramphal bind Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए er. जी का जवाब
Private job
0:54
दोस्तो आप का सवाल है व्यक्ति के मन में नकारात्मक भावना क्यों आती है दोस्तों आपको बता दूं अपना एक्सपीरियंस यदि आप समझदार हैं आपके साथ अच्छे समझदार लोग मिल गए तो आप और अच्छे समझदार हो जाएंगे उस आकर तुमको सूज बढ़ती जाएगी यदि आप ना कर तु मुख सोचकर है और आपके साथ ना कर तू अब सोच वाली भी लोग हैं ताकि नकारात्मक भावनाएं बहुत बढ़ते जाएंगे अपना कर थक चुके हैं लेकिन आपके जो सलाह है जिसके सागर तेरी सोसाइटी में यदि वह सकारात्मक सुझाव जरूर आपकी धीरे-धीरे भावनाएं सकारात्मक सोच बदल जाएगी या नहीं यह आपको डिपेंड करता है आप किस समाज में आते हैं और आपकी सोच के रहते हैं अरे हम ना करते वक्त उसके हैं लेकिन सही लोगों के साथ रहते हैं ऐसा करता हूं सोच के लोगों के साथ रहते हैं तो जरूर आपकी सोच से सागर तक हो सकती है
Dosto aap ka savaal hai vyakti ke man mein nakaaraatmak bhaavana kyon aatee hai doston aapako bata doon apana eksapeeriyans yadi aap samajhadaar hain aapake saath achchhe samajhadaar log mil gae to aap aur achchhe samajhadaar ho jaenge us aakar tumako sooj badhatee jaegee yadi aap na kar tu mukh sochakar hai aur aapake saath na kar too ab soch vaalee bhee log hain taaki nakaaraatmak bhaavanaen bahut badhate jaenge apana kar thak chuke hain lekin aapake jo salaah hai jisake saagar teree sosaitee mein yadi vah sakaaraatmak sujhaav jaroor aapakee dheere-dheere bhaavanaen sakaaraatmak soch badal jaegee ya nahin yah aapako dipend karata hai aap kis samaaj mein aate hain aur aapakee soch ke rahate hain are ham na karate vakt usake hain lekin sahee logon ke saath rahate hain aisa karata hoon soch ke logon ke saath rahate hain to jaroor aapakee soch se saagar tak ho sakatee hai

bolkar speaker
व्यक्ति के मन में नकारात्मक भावनाएं क्यों होती है?Vyakti Ke Man Mein Nakaratmak Bhavnaein Kyun Hoti Hai
Laxmi devi sant Bolkar App
Top Speaker,Level 22
सुनिए Laxmi जी का जवाब
🧖‍♀️life coach,Spiritual Advisor And Motivational speaker🙏
2:58
व्यक्ति के मन में नकारात्मक भावनाएं क्यों होती है यह आपका प्रश्न है तो जैसे कि सबका सबकॉन्शियस माइंड रिकॉर्डिंग मोड में ऑन रहता है हम कुछ ड्रामा देखते हैं कुछ नेगेटिविटी चीजें देखते हैं कुछ न्यूज़ भी हमें इतना नेगेटिव वाली चीजें देखेंगे और हम जो भी इंटरटेन वाली चीज देखने हमारी क्या की हंसी मजाक तो कम है लेकिन गलत चीजें बहुत ज्यादा है कि कुछ सीख नहीं रहे हैं कुछ कुछ सीखने वाला हो तो उससे थोड़ा पॉजिटिव सकारात्मक चीजें देखने जा रहे हो हमारा जो सबकॉन्शियस माइंड रिकॉर्डिंग मूड में रहता है वह सारी चीजों को रिकॉर्ड करता है वह सारी चीजें जब रिकॉर्ड होने लगती है तो हमारे मन में नेगेटिव चीजें उत्पन्न होने लगती मतलब नकारात्मक भावना उत्पन्न होने लगती है जैसे कि छोटे बच्चे को दिखाना शुरू करो कैसी हो जाता है कि जैसे वह ग्रामर में जिस तरीके से एक्टिंग करते हैं नेगेटिव फेयर का उनका भी मन भी वैसा होना शुरू हो जाए हम देखेंगे जैसा बोलेंगे सुनेंगे तुम्हारा सब कुछ महीनों से रिकॉर्ड करता रहेगा और धीरे-धीरे क्या होगा कि हमारे मन में हावी होने लगी जब भी होने लगेगा तो सब के प्रति नेगेटिविटी आनी शुरू हो जाएगा बहुत कम समय में आप अगर ड्रामा देखना छोड़ दिए आप देख रहे हैं तो ऐसी चीज देख रहे हैं जिससे आपको सीख रहे हैं पॉजिटिव चीजों से और हंसी मजाक वाली चीजें सीख लो उसके बाद आप ड्रामा में देखना बंद कर दीजिए कुछ भी नेगेटिव चीजें देखना बंद करें न्यूज़ देख रहे हैं तो जितनी जरूरत थी उतनी ही देखिए उसके बाद हम को दे देना होगा कि धीरे-धीरे अपने आप पॉजिटिव होने लगेगा क्या होता है कि जो हमारा कौन है उसे हम पॉजिटिविटी अर्थात पॉजिटिव में रख रहे हैं पॉजिटिव वाइब्रेशन में पॉजिटिव एनवायरनमेंट रख रहे हो क्या होता है इससे क्यों नेगेटिविटी कम होती है खत्म होने लगती अब पॉजिटिविटी हमारे सबकॉन्शियस माइंड में रिकॉर्ड होने लगती है हमारी भावनाएं फिर देखिएगा कितने अच्छे से चेंज आते हैं खुद का एक्सपीरियंस है मैं बहुत ज्यादा पॉजिटिव रहती है लेकिन फिर मैंने यह ड्रामा सारी चीजें देखनी शुरू की जिससे मेरा बनाया नहीं क्या हो रहा है उसके बाद मैंने जब अपने ऊपर काम करना शुरू किया फिर सर्च करना शुरू किया था मुझे पता चला कि हम जो देखेंगे सुनेंगे बोलेंगे और गलत चीजें ही हो ज्यादा निकट एक चीज देखी तो मैंने सबकॉन्शियस माइंड से रिकॉर्ड कर कर हमारे अंदर कचरा भरेगा और हमारा बिहेवियर वैसा हो जाएगा इसलिए फिर मैंने पॉजिटिव चीजें करनी शुरू करें और यह सारी चीजें बंद
Vyakti ke man mein nakaaraatmak bhaavanaen kyon hotee hai yah aapaka prashn hai to jaise ki sabaka sabakonshiyas maind rikording mod mein on rahata hai ham kuchh draama dekhate hain kuchh negetivitee cheejen dekhate hain kuchh nyooz bhee hamen itana negetiv vaalee cheejen dekhenge aur ham jo bhee intaraten vaalee cheej dekhane hamaaree kya kee hansee majaak to kam hai lekin galat cheejen bahut jyaada hai ki kuchh seekh nahin rahe hain kuchh kuchh seekhane vaala ho to usase thoda pojitiv sakaaraatmak cheejen dekhane ja rahe ho hamaara jo sabakonshiyas maind rikording mood mein rahata hai vah saaree cheejon ko rikord karata hai vah saaree cheejen jab rikord hone lagatee hai to hamaare man mein negetiv cheejen utpann hone lagatee matalab nakaaraatmak bhaavana utpann hone lagatee hai jaise ki chhote bachche ko dikhaana shuroo karo kaisee ho jaata hai ki jaise vah graamar mein jis tareeke se ekting karate hain negetiv pheyar ka unaka bhee man bhee vaisa hona shuroo ho jae ham dekhenge jaisa bolenge sunenge tumhaara sab kuchh maheenon se rikord karata rahega aur dheere-dheere kya hoga ki hamaare man mein haavee hone lagee jab bhee hone lagega to sab ke prati negetivitee aanee shuroo ho jaega bahut kam samay mein aap agar draama dekhana chhod die aap dekh rahe hain to aisee cheej dekh rahe hain jisase aapako seekh rahe hain pojitiv cheejon se aur hansee majaak vaalee cheejen seekh lo usake baad aap draama mein dekhana band kar deejie kuchh bhee negetiv cheejen dekhana band karen nyooz dekh rahe hain to jitanee jaroorat thee utanee hee dekhie usake baad ham ko de dena hoga ki dheere-dheere apane aap pojitiv hone lagega kya hota hai ki jo hamaara kaun hai use ham pojitivitee arthaat pojitiv mein rakh rahe hain pojitiv vaibreshan mein pojitiv enavaayaranament rakh rahe ho kya hota hai isase kyon negetivitee kam hotee hai khatm hone lagatee ab pojitivitee hamaare sabakonshiyas maind mein rikord hone lagatee hai hamaaree bhaavanaen phir dekhiega kitane achchhe se chenj aate hain khud ka eksapeeriyans hai main bahut jyaada pojitiv rahatee hai lekin phir mainne yah draama saaree cheejen dekhanee shuroo kee jisase mera banaaya nahin kya ho raha hai usake baad mainne jab apane oopar kaam karana shuroo kiya phir sarch karana shuroo kiya tha mujhe pata chala ki ham jo dekhenge sunenge bolenge aur galat cheejen hee ho jyaada nikat ek cheej dekhee to mainne sabakonshiyas maind se rikord kar kar hamaare andar kachara bharega aur hamaara biheviyar vaisa ho jaega isalie phir mainne pojitiv cheejen karanee shuroo karen aur yah saaree cheejen band

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