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भारत में मानसिक बीमारी को गंभीरता से क्यों नहीं लिया जाता है?

Bharat Mein Maansik Beemari Ko Gambheerta Se Kyun Nahin Liya Jata Hai
Vikas Sharma Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए Vikas जी का जवाब
Student
1:30
कि भारत में मानसिक बीमारी को गंभीरता से नहीं लिया जाता पेंट्स भारतवासियों को गणतंत्र स्टैंड यह सारी बीमारी सेंट्स तो नहीं होती मतलब जो प्रश्न है जिसके मानसिक बीमारी रखिए पेंट क्यों किसी को बताता नहीं कि मैं टेंशन में हूं मैं डिप्रेशन में हूं मेरे साथी हो गया फ्रेंड के पास कितना नृत्य बीमारी हो जाती मानसिक बीमारी कारण उसको सुसाइड करना पड़ता है टेलीकॉम तो फ्रेंडशिप रोशन की हुई हो रखी डिप्रेशन टेंशन हो किसी को बताता नहीं है ठीक है फ्रेंड्स और दूसरी बात तो है अगर फ्रेंडशिप बता देते कि भाई मैं इतना टेंशन में में डिप्रेशन में तो फ्रेंड शाम वाला बंदा बोलता है पागल हो गया वैसे टेंशन नेतृत्व से डिप्रेशन लिखता है कोई सर्च ट्री कोई भी बात नहीं समझता था और उसे अटेंड उसको साइकोलॉजी डॉक्टर के पास जाना पड़ता है वह थोड़ी सी बात समझता है और वह भी अगर डिलीट के पास जाएगा पागल समझ के केस को रफा-दफा रसायन के लिए भेजता है इसलिए फ्रेंड्स ace123 बजे कारण पेंट्स बांटने मानसिक बीमारी को गंभीरता से नहीं ले जरा सरकार को थोड़ा सा गुड बेहतरीन प्रोग्राम बनाना चाहिए मतलब हर स्टेट में स्कैच 56 सेंटर क्यों नीचे फ्रेंड्स मानसिक रोगियों के लिए उधर जाएं अपनी सारी बात बताएं ताकि उनका थोड़ा दुख अलका याग्निक मानसिक रोग से सेंट हर साल फ्रेंड्स अपने लाखों प्रशंसकों में मानसिक रोग से फ्रेंडशिप फ्रेंडशिप मानसिक रोग को पूरे देश से निपुर दुनिया से भगाने फ्रेंड्स ठीक है अगर आपको भी चला दो प्लीज लाइक करें जय हिंद जय भारत
Ki bhaarat mein maanasik beemaaree ko gambheerata se nahin liya jaata pents bhaaratavaasiyon ko ganatantr staind yah saaree beemaaree sents to nahin hotee matalab jo prashn hai jisake maanasik beemaaree rakhie pent kyon kisee ko bataata nahin ki main tenshan mein hoon main dipreshan mein hoon mere saathee ho gaya phrend ke paas kitana nrty beemaaree ho jaatee maanasik beemaaree kaaran usako susaid karana padata hai teleekom to phrendaship roshan kee huee ho rakhee dipreshan tenshan ho kisee ko bataata nahin hai theek hai phrends aur doosaree baat to hai agar phrendaship bata dete ki bhaee main itana tenshan mein mein dipreshan mein to phrend shaam vaala banda bolata hai paagal ho gaya vaise tenshan netrtv se dipreshan likhata hai koee sarch tree koee bhee baat nahin samajhata tha aur use atend usako saikolojee doktar ke paas jaana padata hai vah thodee see baat samajhata hai aur vah bhee agar dileet ke paas jaega paagal samajh ke kes ko rapha-dapha rasaayan ke lie bhejata hai isalie phrends achai123 baje kaaran pents baantane maanasik beemaaree ko gambheerata se nahin le jara sarakaar ko thoda sa gud behatareen prograam banaana chaahie matalab har stet mein skaich 56 sentar kyon neeche phrends maanasik rogiyon ke lie udhar jaen apanee saaree baat bataen taaki unaka thoda dukh alaka yaagnik maanasik rog se sent har saal phrends apane laakhon prashansakon mein maanasik rog se phrendaship phrendaship maanasik rog ko poore desh se nipur duniya se bhagaane phrends theek hai agar aapako bhee chala do pleej laik karen jay hind jay bhaarat

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भारत में मानसिक बीमारी को गंभीरता से क्यों नहीं लिया जाता है?Bharat Mein Maansik Beemari Ko Gambheerta Se Kyun Nahin Liya Jata Hai
NEHAA P MISHRA  Bolkar App
Top Speaker,Level 22
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Teacher, Soul Healer
2:51
अधिक भारत में हम सभी रहते हैं और कहीं ना कहीं हम एक दूसरे से जुड़े रहते हैं चाहे जाने या ना पहचाने पर एक आज जो हमारा एक थिंकिंग है या एक एक दूसरे को एक दूसरे की थिंकिंग को समझने की जो समझ है जो अंडरस्टैंडिंग है वह हम सभी जानते हैं तो आपका जो सवाल है उसी के हिसाब से मैं जवाब देना चाहूंगी भारत में मानसिक बीमारियों को गंभीरता से क्यों नहीं लिया जाता क्योंकि अधिकतर लोगों की थिंकिंग यह है कि हम सब जानते हैं दूसरे को ज्यादा मालूम नहीं है अगर वह कुछ बोल रहा है तो हम यह समझते हैं कि इसको तो कुछ पता नहीं ऐसी कुछ भी बोल रहा है सीरियसली नहीं लेती कि उसे कोई परेशानी हो सकती है या उसे सुने सबसे बड़ी चीज है कि हम एक दूसरे को सुनने की कोशिश नहीं करते टाइम नहीं निकालना जाते एक दूसरे के लिए एक दूसरे के पास बैठी है उनसे बात कीजिए और अगर वह नहीं सुनना चाह रहे हैं तो आप बिल्कुल अलग हो जाइए कोई सुन नहीं होता है ऐसा कई बार फैमिलीज में भी के हम अगर किसी को समझाने की कोशिश करना है तो उसको अपनी बात ही आगे रखनी है कि नहीं ऐसा नहीं ऐसा ही है तो फिर आप उसको नहीं समझा सकते लेकिन मानसिक बीमारी अक्सर अगर किसी को रहती है तो लोग उसे और ब्लेम करते हैं या लुक डाउन अपऑन करते हैं कि आज तुम तो ज्यादा स्ट्रेस ले रहे हो और ऐसा कुछ नहीं होता और टेंशन लेने से कुछ नहीं होगा लेकिन अगर वह अपनी कुछ पीड़ा बताना चाह रहा तो सुनने की कोशिश नहीं की जाती सबसे पहले टाइम नहीं दिया जाता जब हम सबको अपने जैसा समझने लगेंगे की हादसा हमारे पास फीलिंग से हमारे इमोशंस हॉट होते हैं उसी तरह उस सामने वाले का भी है तो हम उसे सजेशन नहीं देंगे जिसे सजेशन दी जाती है अरे तुम टेंशन मत लो सब ठीक हो जाएगा ऐसा नहीं होता अगर उसे जरा सी भी टेंशन है तो उसको समझना पड़ेगा हां अगर ओवरथिंकिंग कर रहा है तो आप उसकी पूरी बात सुनकर फिर उसे समझा सकते हैं तो यह तो मैंने आपको सजेशन दे डाली बटली स्पीकिंग कि हम एक दूसरे को सुनना समझना पसंद नहीं करते और हमें लगता है कि सिर्फ हम ही सही है बस यही सोच है जिसकी वजह से मानसिक बीमारी को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है लोगों को यह सोच कर छोड़ दिया जाता है कि इनके पास कोई काम नहीं है तो फालतू की टेंशन ले रहा है बल्कि हमें उनके पास बैठकर उनकी बात उनकी प्रॉब्लम सुनना और समझना चाहिए और एक दूसरे का मेंटल एंड इमोशनल सपोर्ट करना चाहिए
Adhik bhaarat mein ham sabhee rahate hain aur kaheen na kaheen ham ek doosare se jude rahate hain chaahe jaane ya na pahachaane par ek aaj jo hamaara ek thinking hai ya ek ek doosare ko ek doosare kee thinking ko samajhane kee jo samajh hai jo andarastainding hai vah ham sabhee jaanate hain to aapaka jo savaal hai usee ke hisaab se main javaab dena chaahoongee bhaarat mein maanasik beemaariyon ko gambheerata se kyon nahin liya jaata kyonki adhikatar logon kee thinking yah hai ki ham sab jaanate hain doosare ko jyaada maaloom nahin hai agar vah kuchh bol raha hai to ham yah samajhate hain ki isako to kuchh pata nahin aisee kuchh bhee bol raha hai seeriyasalee nahin letee ki use koee pareshaanee ho sakatee hai ya use sune sabase badee cheej hai ki ham ek doosare ko sunane kee koshish nahin karate taim nahin nikaalana jaate ek doosare ke lie ek doosare ke paas baithee hai unase baat keejie aur agar vah nahin sunana chaah rahe hain to aap bilkul alag ho jaie koee sun nahin hota hai aisa kaee baar phaimileej mein bhee ke ham agar kisee ko samajhaane kee koshish karana hai to usako apanee baat hee aage rakhanee hai ki nahin aisa nahin aisa hee hai to phir aap usako nahin samajha sakate lekin maanasik beemaaree aksar agar kisee ko rahatee hai to log use aur blem karate hain ya luk daun apon karate hain ki aaj tum to jyaada stres le rahe ho aur aisa kuchh nahin hota aur tenshan lene se kuchh nahin hoga lekin agar vah apanee kuchh peeda bataana chaah raha to sunane kee koshish nahin kee jaatee sabase pahale taim nahin diya jaata jab ham sabako apane jaisa samajhane lagenge kee haadasa hamaare paas pheeling se hamaare imoshans hot hote hain usee tarah us saamane vaale ka bhee hai to ham use sajeshan nahin denge jise sajeshan dee jaatee hai are tum tenshan mat lo sab theek ho jaega aisa nahin hota agar use jara see bhee tenshan hai to usako samajhana padega haan agar ovarathinking kar raha hai to aap usakee pooree baat sunakar phir use samajha sakate hain to yah to mainne aapako sajeshan de daalee batalee speeking ki ham ek doosare ko sunana samajhana pasand nahin karate aur hamen lagata hai ki sirph ham hee sahee hai bas yahee soch hai jisakee vajah se maanasik beemaaree ko gambheerata se nahin liya ja raha hai logon ko yah soch kar chhod diya jaata hai ki inake paas koee kaam nahin hai to phaalatoo kee tenshan le raha hai balki hamen unake paas baithakar unakee baat unakee problam sunana aur samajhana chaahie aur ek doosare ka mental end imoshanal saport karana chaahie

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भारत में मानसिक बीमारी को गंभीरता से क्यों नहीं लिया जाता है?Bharat Mein Maansik Beemari Ko Gambheerta Se Kyun Nahin Liya Jata Hai
Dr.Nitin Pawar, D.M S.(Management) Bolkar App
Top Speaker,Level 33
सुनिए Dr.Nitin जी का जवाब
Kisan,Journalist,Marathi Writer, Social Worker,Political Leader.
3:46
भारत में मानसिक बीमारी को गंभीरता से क्यों नहीं लिया जाता है इसका एक सरल सरल कारण है कि मैं इसकी मेजॉरिटी है जाकर मेजॉरिटी हो तो यह मान्य भी नहीं हो जाता कि हो वहां कोई प्रॉब्लम है बहुत सारे लोगों को यह मानसिक बीमारी दिखाई देती है लेकिन उनको पता है ना उनके घर वालों को पता है ना समाज को पता होता है क्योंकि एजुकेशन का बहुत बड़ा यहां पर गैप है और अनपढ़ों की संख्या या 68 पदों की संख्या जो है वह बहुत ज्यादा है उनको साइकोलॉजी और मेडिकल साइकोलॉजी की बातें समझना तो बहुत दूर की बात है फिर भी कई डॉक्टर जो है वह पेशेंट को कहते हैं सेकंड ऑपिनियन के लिए लेकिन कुछ लोग जाते हैं कुछ लोग जाते नहीं है और कुछ लोग जो है वह उस तरह का जो एक शिखा पड़ जाता है या नाम बंजारों जाता है कि इसको यह बीमारी है तो समाज उसको और बीमार करने की कोशिश करते करता है जिसकी छोटी सी शुरुआत अगर हो गई तो पूरा उसको पागल ही कर देंगे और घर में भी लूंगा ऐसा ही होगा और होता है हम देखते हैं जरा दो बाजू में तो ऐसी सामाजिक मानसिकता है और इस के संदर्भ में बहुत ज्यादा ज्ञान है मेडिकल अवेयरनेस की बहुत बड़ी मात्रा में कमी है और ज्यादा करके हमारे नेता भी नेता ही मानसिक रूप से बीमार दिखाई देते हैं इनकी अगर अच्छी तरह से उनके उनको चेक किया अब्दुर वेशन में रखा तो इनमें से 50% जो इस बीमारी के कुछ शिकार है तो वह क्या इससे इसके बारे में कुछ भी नहीं है ऐसे कैसे कुछ कारण है कारण है लेकिन गंभीर रूप धारण हो रहा है क्या हो रहा है और यह एक लौंडा उनके पास जाओ और गंभीर हो गया है लेकिन इसके बारे में अवेयरनेस समाज में बढ़ाना बहुत जरूरी चीज हो गई है तो देखेंगे आगे क्या-क्या होता है धन्यवाद
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भारत में मानसिक बीमारी को गंभीरता से क्यों नहीं लिया जाता है?Bharat Mein Maansik Beemari Ko Gambheerta Se Kyun Nahin Liya Jata Hai
ᴊᴀt raj me Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए ᴊᴀt जी का जवाब
𝓝𝓾𝓻𝓼𝓲𝓷𝓰 𝓼𝓪𝓯𝓮 𝓶𝓮 𝔀𝓸𝓻𝓴𝓲𝓷𝓰
0:43
भारत में मानसिक बीमारियों को गंभीरता से क्यों नहीं ले इसका यही कारण है कि हमारे लोगों के साथ साथ में ऐसे दोस्त और ऐसी हमारी ट्रेन चली आती है जिसके कारण जो मानसिक बीमारियों से ग्रसित होते हैं उन व्यक्तियों के इलाज के लिए भरपूर पैसे और उनके लिए खर्चा उठाने के लिए हर व्यक्ति की आय ठीक नहीं होती इसीलिए सभी व्यक्ति अपनी आए और व्यक्ति प्रति व्यक्ति के हिसाब से उन बीमारियों के प्रति को गंभीर नहीं होते देने के लिए उनका कर्तव्य होता है क्यों करती है वादा नहीं कर पाते इसीलिए हमारे भारत में ज्यादातर बीमारियों के प्रति गंभीरता नहीं ली
Bhaarat mein maanasik beemaariyon ko gambheerata se kyon nahin le isaka yahee kaaran hai ki hamaare logon ke saath saath mein aise dost aur aisee hamaaree tren chalee aatee hai jisake kaaran jo maanasik beemaariyon se grasit hote hain un vyaktiyon ke ilaaj ke lie bharapoor paise aur unake lie kharcha uthaane ke lie har vyakti kee aay theek nahin hotee iseelie sabhee vyakti apanee aae aur vyakti prati vyakti ke hisaab se un beemaariyon ke prati ko gambheer nahin hote dene ke lie unaka kartavy hota hai kyon karatee hai vaada nahin kar paate iseelie hamaare bhaarat mein jyaadaatar beemaariyon ke prati gambheerata nahin lee

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