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घड़ियों के अविष्कार से पूर्व भारतीय लोक समय का पता कैसे लगाते थे?

Ghadiyon Ke Avishkar Se Purv Bhartiya Lok Samay Ka Pata Kaise Lagate The
Er.Awadhesh kumar Bolkar App
Top Speaker,Level 66
सुनिए Er.Awadhesh जी का जवाब
Unknown
2:54
1 गाड़ियों के अविष्कार से पूर्व भारतीय लोग समय का पता कैसे लगाते थे बड़ा ही सुनने में अजीब अलार्म घड़ी नहीं रही होगी लुक कैसे अपनी जिंदगी को जी रहे होंगे क्योंकि आज के समय देखा जाए तो हम घड़ी पूरे दिन देखते रहते हैं और उसी के हिसाब से सोना उठना बैठना कहीं जाना हर एक जो हम हमारे वर्क होते हैं जो भी सिचुएशन होते घड़ी के हिसाब से होती है कि हां मुझे ही करना इतनी देर तक पढ़ना इतने घंटे पढ़ना है यह चीजें करनी है तो इतना इतनी दूरी तय करना है तो इतने घंटे में जाएंगे मुझे कितने पहले निकलना पड़ेगा कितने बाद निकलेंगे यह सब के होते हैं घड़ी को देख कर ही पता लगाया जा सकता है लेकिन जब गाड़ी नहीं थी तो हमें लम्हा या लगातार हास्य फिसलते जा रहा हूं जा रहा है गरम घड़ी नहीं देख पाते हैं तो क्या होता है कि तब हमें एहसास होता है कि जब लोग इतिहास में मलिक पूर्व में जब घड़ी नहीं थी तो उल्लू कैसे अपने समय को देखते थे उस समय को हर के नाम से जाना जाता था और उसी के हिसाब से एक मानक गणना की जाती थी कि इतना पहर हो गया है और इस हिसाब से हमारा समय हो रहा है तू पहले जो पौराणिक कथाएं हैं उसमें इस समय का जिक्र मिलता है क्योंकि ईसा पूर्व में हजारों साल पहले अगर भारत में समय की बात करें देखा जाए तो सूर्य की स्थिति से आंका जाता था कि सूर्य इतना हो गया है शीतलहर चल रहा है और सुबह का पर है दोपहर का है फिर दोपहर शायद छह सात आठ पहर होते हैं उसके हिसाब से लोग अपने मानक तैयार किए थे और इसी आंकड़े से लोग जानते थे कि हां इस हिसाब से यह टाइम हो गया उसके बाद सूर्य की एक घड़ी बनाया गया सूर्यगढ़ सूर्य घड़ी का इस्तेमाल प्राचीन मिस्र की सभ्यता से मान जाता है और सूर्य के हिसाब से यह क्या हुआ था किसका आविष्कार हुआ था इस हिसाब से यह टाइम बता दी थी लोग अपना एक समय निर्धारित कर देते सूर्य जितना ज्यादा था उसके हिसाब से समय किस नाम से जाना जाता था लेकिन जब सूर्यनगरी टाइम नहीं दे पा रहे तो उसके बाद डर रही है तो घड़ी आविष्कार किया गया और यह अविष्कार क्या हुआ था तो 15 में जहाज का आविष्कार वह उसी कांच में क्या हुआ खैरियत डाल दी जाती थी और धीरे-धीरे जब दूसरी खाने में चली जाती थी उसके हिसाब से वह अपना माना कि तैयार किए थे अगर देखा जाए उसके बाद जल घड़ी आई जल घड़ी के बाद आपका 18वीं शताब्दी में एक घड़ी का आविष्कार किया गया था तो इस तरीके से लोग आज के समय में देखा जाए तो घड़ी तो हर एक हाथ में हो गई है कि मोबाइल में गाड़ी हो गई आपकी कलाई में खड़ी हो बहुत सारे मौत हो गई है जो आप हर एक इंसान छोटे से लेकर बड़े तब तक कि लोग गाड़ी लगाते
1 gaadiyon ke avishkaar se poorv bhaarateey log samay ka pata kaise lagaate the bada hee sunane mein ajeeb alaarm ghadee nahin rahee hogee luk kaise apanee jindagee ko jee rahe honge kyonki aaj ke samay dekha jae to ham ghadee poore din dekhate rahate hain aur usee ke hisaab se sona uthana baithana kaheen jaana har ek jo ham hamaare vark hote hain jo bhee sichueshan hote ghadee ke hisaab se hotee hai ki haan mujhe hee karana itanee der tak padhana itane ghante padhana hai yah cheejen karanee hai to itana itanee dooree tay karana hai to itane ghante mein jaenge mujhe kitane pahale nikalana padega kitane baad nikalenge yah sab ke hote hain ghadee ko dekh kar hee pata lagaaya ja sakata hai lekin jab gaadee nahin thee to hamen lamha ya lagaataar haasy phisalate ja raha hoon ja raha hai garam ghadee nahin dekh paate hain to kya hota hai ki tab hamen ehasaas hota hai ki jab log itihaas mein malik poorv mein jab ghadee nahin thee to ulloo kaise apane samay ko dekhate the us samay ko har ke naam se jaana jaata tha aur usee ke hisaab se ek maanak ganana kee jaatee thee ki itana pahar ho gaya hai aur is hisaab se hamaara samay ho raha hai too pahale jo pauraanik kathaen hain usamen is samay ka jikr milata hai kyonki eesa poorv mein hajaaron saal pahale agar bhaarat mein samay kee baat karen dekha jae to soory kee sthiti se aanka jaata tha ki soory itana ho gaya hai sheetalahar chal raha hai aur subah ka par hai dopahar ka hai phir dopahar shaayad chhah saat aath pahar hote hain usake hisaab se log apane maanak taiyaar kie the aur isee aankade se log jaanate the ki haan is hisaab se yah taim ho gaya usake baad soory kee ek ghadee banaaya gaya sooryagadh soory ghadee ka istemaal praacheen misr kee sabhyata se maan jaata hai aur soory ke hisaab se yah kya hua tha kisaka aavishkaar hua tha is hisaab se yah taim bata dee thee log apana ek samay nirdhaarit kar dete soory jitana jyaada tha usake hisaab se samay kis naam se jaana jaata tha lekin jab sooryanagaree taim nahin de pa rahe to usake baad dar rahee hai to ghadee aavishkaar kiya gaya aur yah avishkaar kya hua tha to 15 mein jahaaj ka aavishkaar vah usee kaanch mein kya hua khairiyat daal dee jaatee thee aur dheere-dheere jab doosaree khaane mein chalee jaatee thee usake hisaab se vah apana maana ki taiyaar kie the agar dekha jae usake baad jal ghadee aaee jal ghadee ke baad aapaka 18veen shataabdee mein ek ghadee ka aavishkaar kiya gaya tha to is tareeke se log aaj ke samay mein dekha jae to ghadee to har ek haath mein ho gaee hai ki mobail mein gaadee ho gaee aapakee kalaee mein khadee ho bahut saare maut ho gaee hai jo aap har ek insaan chhote se lekar bade tab tak ki log gaadee lagaate

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घड़ियों के अविष्कार से पूर्व भारतीय लोक समय का पता कैसे लगाते थे?Ghadiyon Ke Avishkar Se Purv Bhartiya Lok Samay Ka Pata Kaise Lagate The
Meghsinghchouhan Bolkar App
Top Speaker,Level 33
सुनिए Meghsinghchouhan जी का जवाब
student
0:38
जी आप का सवाल है कि गाड़ियों के अविष्कार से पूर्व भारतीय लोग समय का पता कैसे लगाते थे तो पहले समय में लोग किसी की छाया छाया देख कर ही बता देते थे कि इतने टाइम हुआ है क्या इतनी घड़ी हुई है और उससे पहले घड़ी की जगह से भरा हुआ एक दोनों साइड से हुआ था और जीजाजी जैसे रेत की सेक्सी नीचे आती जाती देवास में का पता इस प्रकार भी लगाया करते थे
Jee aap ka savaal hai ki gaadiyon ke avishkaar se poorv bhaarateey log samay ka pata kaise lagaate the to pahale samay mein log kisee kee chhaaya chhaaya dekh kar hee bata dete the ki itane taim hua hai kya itanee ghadee huee hai aur usase pahale ghadee kee jagah se bhara hua ek donon said se hua tha aur jeejaajee jaise ret kee seksee neeche aatee jaatee devaas mein ka pata is prakaar bhee lagaaya karate the

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घड़ियों के अविष्कार से पूर्व भारतीय लोक समय का पता कैसे लगाते थे?Ghadiyon Ke Avishkar Se Purv Bhartiya Lok Samay Ka Pata Kaise Lagate The
Saloni vishwkarma   Bolkar App
Top Speaker,Level 11
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Unknown
0:33
अपनी फ्रेंड का क्वेश्चन है की घड़ियों के अविष्कार से पूर्व भारतीय लोग समय का पता कैसे लगाते थे तो दुनिया के पहले ब्लॉक सूरजमल समय का पता लगा दिल से कभी कोई प्रॉब्लम होती थी तो चांद से या फिर मतलब ऐसे ही अनुमान लगा लिया करते थे अनुमान ही लगाते थे
Apanee phrend ka kveshchan hai kee ghadiyon ke avishkaar se poorv bhaarateey log samay ka pata kaise lagaate the to duniya ke pahale blok soorajamal samay ka pata laga dil se kabhee koee problam hotee thee to chaand se ya phir matalab aise hee anumaan laga liya karate the anumaan hee lagaate the

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घड़ियों के अविष्कार से पूर्व भारतीय लोक समय का पता कैसे लगाते थे?Ghadiyon Ke Avishkar Se Purv Bhartiya Lok Samay Ka Pata Kaise Lagate The
Shruti Yadav Bolkar App
Top Speaker,Level 33
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Student
0:23
सवालिया की घड़ियों के आविष्कार से पूर्व भारतीय लोग समय का पता कैसे पता लगाते थे तो पहले के लोग पूरे को देखकर समय का पता लगाते थे लेकिन यह तरीका उस समय काम नहीं आ पाता था जिसका मा आसमान में बादल छाए रहते थे लोग समय का पता लगाने के लिए कभी सूर्य कभी चांद तो कभी सिर्फ अनुमान लगाकर ही भरोसा कर लिया करते थे
Savaaliya kee ghadiyon ke aavishkaar se poorv bhaarateey log samay ka pata kaise pata lagaate the to pahale ke log poore ko dekhakar samay ka pata lagaate the lekin yah tareeka us samay kaam nahin aa paata tha jisaka ma aasamaan mein baadal chhae rahate the log samay ka pata lagaane ke lie kabhee soory kabhee chaand to kabhee sirph anumaan lagaakar hee bharosa kar liya karate the

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घड़ियों के अविष्कार से पूर्व भारतीय लोक समय का पता कैसे लगाते थे?Ghadiyon Ke Avishkar Se Purv Bhartiya Lok Samay Ka Pata Kaise Lagate The
Dr.Nitin Pawar, D.M S.(Management) Bolkar App
Top Speaker,Level 33
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Kisan,Journalist,Marathi Writer, Social Worker,Political Leader.
7:00
घड़ियों के अविष्कार से पूर्व भारतीय लोग समय का पता कैसे लगाते हैं एक इंटरेस्टिंग सवाल है और जिज्ञासा मॉडर्न बढ़ाने वाला सवाल है तो कई किस्से मैं बचपन से सुनता रहा हूं और कहीं पर पड़ा हूं कहीं पर कहीं पर फोटोस में देखो उसको में देखा ज्यादा करके लोग समय के बारे में निसर्ग के ऊपर अवलंबून थे एंड पेंट सेट 2 से लेकर 7 तक जो बदलाव दिनभर होती थी उनके उनको आदत भी हो गई छावनी का बस स्टैंड देखना पक्का था और ज्यादा करके बुजुर्ग लोगों का अनुभव तो समय की समय क्या और बहुत सारी चीजें वह बता देती थी सुबह कुछ पक्षियों की आवाज देसी मुर्गा जो है वह आवाज करता है सुबह वाह-वाह उनके पास नहीं हो पालतू जानवर से गाय भैंस से उनके सुबह-सुबह विशेषता आवाज हलचल देखने के बाद उनको पता चलता था कि इनका समय यार इतना समय अब हुआ है सुबह जब सूरज निकलता था तो आपस में कहां पर स्थित रहता था स्वीटी तूने कैसे पड़ती थी स्टोन की सैंडल जी चीफ सैंडल्स जूते रहती थी कितनी लंबी पढ़ती थी इसके हिसाब से भी टाइम का अंदाजा लगा लगा लेते थे पिक्चरों का एक जिसमें मन की बेटी एकांत वस्तु में रखते थे और उसमें से जो जो नीचे नीचे नीचे भेज दीजिए उसने एक छोटा सा चित्र नीचे वाणिज्य वर्ग के कर्मचारी के कारण जो समुद्र समुद्र के किनारे रहती हो होली के गीत चाहिए और कितनी दूरी है उसके हिसाब से टाइम लगाते थे और वही आजकल युगांडा था वो खत्म होने जाने के बाद वही उठा कर देख ज्योति नीचे गिरने लगती है उसके हिसाब से टाइम विंटेज जैसे बड़े लोगों के राजाओं के दिलों में रहती थी जब सूरज नहीं रहता था तो भी दिन भर के रोटी के सबसे टाइम का अंदाजा लगा डीजे बारिश कब आने वाली है कब नहीं आने वाली है इसका अंदाजा लगाते थे कुछ फल होता था उसके नजदीक आकर कोई कोई बादल दिखाई दिया तो लोग कहते थे या बस बारिश होने वाली है आज उस दिन बाद हमेशा होती थी हमारे गांव में ऐसा एक व्यक्ति था अभी बता चाचा बाड़मेर की समय सरनी रूम पर निर्भर थे और समय बताएं
Ghadiyon ke avishkaar se poorv bhaarateey log samay ka pata kaise lagaate hain ek intaresting savaal hai aur jigyaasa modarn badhaane vaala savaal hai to kaee kisse main bachapan se sunata raha hoon aur kaheen par pada hoon kaheen par kaheen par photos mein dekho usako mein dekha jyaada karake log samay ke baare mein nisarg ke oopar avalamboon the end pent set 2 se lekar 7 tak jo badalaav dinabhar hotee thee unake unako aadat bhee ho gaee chhaavanee ka bas staind dekhana pakka tha aur jyaada karake bujurg logon ka anubhav to samay kee samay kya aur bahut saaree cheejen vah bata detee thee subah kuchh pakshiyon kee aavaaj desee murga jo hai vah aavaaj karata hai subah vaah-vaah unake paas nahin ho paalatoo jaanavar se gaay bhains se unake subah-subah visheshata aavaaj halachal dekhane ke baad unako pata chalata tha ki inaka samay yaar itana samay ab hua hai subah jab sooraj nikalata tha to aapas mein kahaan par sthit rahata tha sveetee toone kaise padatee thee ston kee saindal jee cheeph saindals joote rahatee thee kitanee lambee padhatee thee isake hisaab se bhee taim ka andaaja laga laga lete the pikcharon ka ek jisamen man kee betee ekaant vastu mein rakhate the aur usamen se jo jo neeche neeche neeche bhej deejie usane ek chhota sa chitr neeche vaanijy varg ke karmachaaree ke kaaran jo samudr samudr ke kinaare rahatee ho holee ke geet chaahie aur kitanee dooree hai usake hisaab se taim lagaate the aur vahee aajakal yugaanda tha vo khatm hone jaane ke baad vahee utha kar dekh jyoti neeche girane lagatee hai usake hisaab se taim vintej jaise bade logon ke raajaon ke dilon mein rahatee thee jab sooraj nahin rahata tha to bhee din bhar ke rotee ke sabase taim ka andaaja laga deeje baarish kab aane vaalee hai kab nahin aane vaalee hai isaka andaaja lagaate the kuchh phal hota tha usake najadeek aakar koee koee baadal dikhaee diya to log kahate the ya bas baarish hone vaalee hai aaj us din baad hamesha hotee thee hamaare gaanv mein aisa ek vyakti tha abhee bata chaacha baadamer kee samay saranee room par nirbhar the aur samay bataen

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घड़ियों के अविष्कार से पूर्व भारतीय लोक समय का पता कैसे लगाते थे?Ghadiyon Ke Avishkar Se Purv Bhartiya Lok Samay Ka Pata Kaise Lagate The
Sandeep Goyal Chandigarh  Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए Sandeep जी का जवाब
Tabla player artist and music home tutor
1:30
नमस्कार आपका सवाल है गाड़ियों से पहले पूर्व भारत के लोग जो है वह समय का पता कैसे लगा कर तो देखो जी मैंने अपनी दादी से सुना था तो मैंने जो उनसे पूछा तो उठाते थे कि मतलब पहले क्या होता था कि सूर्य देव के निकलने जामुन के अस्त होने के उदय होने अस्त होने के मजाक जगदीश्वर यदि वस्तु होते थे या उदय होते थे यह तो उसका टाइप से अंदाजा लगा कर के समय का अमितरुकी पता लगा लेते थे जो इस तरीके का मतलब कि हमने सुना था पहले क्योंकि एक बार हम ऐसे ही बातचीत कर रहे थे तो उन्होंने बताया था कि यहां पहले मतलब कि अगर सूर्य निकलता है तो लोग समय का अंदाज लगा करके पता लगा ले तू कितना समय हुआ है और स्त्री की स्त्री की स्थिति में होना चाहिए तो उन सब को पहले पता लग जाता था इन सब का मतलब की मौसम का मिजाज देख कर के टिकट मदद की जिस तरीके से मथुरा वैसे अभी सूरज निकला है तो कितना समय होना चाहिए तो यह अंदाजा लगा है ज्यादा से ज्यादा लाइक जरूर करें धन्यवाद
Namaskaar aapaka savaal hai gaadiyon se pahale poorv bhaarat ke log jo hai vah samay ka pata kaise laga kar to dekho jee mainne apanee daadee se suna tha to mainne jo unase poochha to uthaate the ki matalab pahale kya hota tha ki soory dev ke nikalane jaamun ke ast hone ke uday hone ast hone ke majaak jagadeeshvar yadi vastu hote the ya uday hote the yah to usaka taip se andaaja laga kar ke samay ka amitarukee pata laga lete the jo is tareeke ka matalab ki hamane suna tha pahale kyonki ek baar ham aise hee baatacheet kar rahe the to unhonne bataaya tha ki yahaan pahale matalab ki agar soory nikalata hai to log samay ka andaaj laga karake pata laga le too kitana samay hua hai aur stree kee stree kee sthiti mein hona chaahie to un sab ko pahale pata lag jaata tha in sab ka matalab kee mausam ka mijaaj dekh kar ke tikat madad kee jis tareeke se mathura vaise abhee sooraj nikala hai to kitana samay hona chaahie to yah andaaja laga hai jyaada se jyaada laik jaroor karen dhanyavaad

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घड़ियों के अविष्कार से पूर्व भारतीय लोक समय का पता कैसे लगाते थे?Ghadiyon Ke Avishkar Se Purv Bhartiya Lok Samay Ka Pata Kaise Lagate The
Meghsinghchouhan Bolkar App
Top Speaker,Level 33
सुनिए Meghsinghchouhan जी का जवाब
student
0:38
जी आप का सवाल है कि गाड़ियों के अविष्कार से पूर्व भारतीय लोग समय का पता कैसे लगाते थे तो पहले समय में लोग किसी की छाया छाया देख कर ही बता देते थे कि इतने टाइम हुआ है क्या इतनी घड़ी हुई है और उससे पहले घड़ी की जगह से भरा हुआ एक दोनों साइड से हुआ था और जीजाजी जैसे रेत की सेक्सी नीचे आती जाती देवास में का पता इस प्रकार भी लगाया करते थे
Jee aap ka savaal hai ki gaadiyon ke avishkaar se poorv bhaarateey log samay ka pata kaise lagaate the to pahale samay mein log kisee kee chhaaya chhaaya dekh kar hee bata dete the ki itane taim hua hai kya itanee ghadee huee hai aur usase pahale ghadee kee jagah se bhara hua ek donon said se hua tha aur jeejaajee jaise ret kee seksee neeche aatee jaatee devaas mein ka pata is prakaar bhee lagaaya karate the

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घड़ियों के अविष्कार से पूर्व भारतीय लोक समय का पता कैसे लगाते थे?Ghadiyon Ke Avishkar Se Purv Bhartiya Lok Samay Ka Pata Kaise Lagate The
Manish Bhati Bolkar App
Top Speaker,Level 22
सुनिए Manish जी का जवाब
Life coach, professional counsellor & Relationship expert. Fitness & Motivational Coach
1:10
नमस्कार जैसे कि अपर क्वेश्चन इन गाड़ियों के अविष्कार से पूर्व भारतीय लोग समय का पता कैसे लगाए थे जहां तक इस क्वेश्चन का जवाब आपको देना चाहता हूं जैसे कि आपका क्वेश्चन है जैसे कि मेरी दादी जी की दादी जी बता देंगे जब दादी जी और नानी सा नानी बताती थी जो घड़ी का आविष्कार नहीं हुआ था तो वह बादलों को देखकर सूरज को देख कर इंसान मान लगा देते कितना टाइम हुआ है क्योंकि आप एक परसेंट से ध्यान रखना गांव में कभी भी जो सूरज ही होते हैं इनसे ही टाइम का पता लगता है या कोई गांव में या कोई आपकी फैमिली मेंबर या कोई मनपसंद चुनाव इस बारे में डिस्कस करेंगे तो आपको शार्ट जरूर बताएंगे क्योंकि सूरत से ही है ना जो गाड़ी के समय का पता लगता है पुराने टाइम है अभी फिलहाल मैं मानता हूं वह सो टाइम लगता लेकिन काफी जो ओल्ड हैं और काफी जो गांव में रेगुलर है वह भी भी उसी चीज से पता लगा कि मैं सजेस्ट धन्यवाद
Namaskaar jaise ki apar kveshchan in gaadiyon ke avishkaar se poorv bhaarateey log samay ka pata kaise lagae the jahaan tak is kveshchan ka javaab aapako dena chaahata hoon jaise ki aapaka kveshchan hai jaise ki meree daadee jee kee daadee jee bata denge jab daadee jee aur naanee sa naanee bataatee thee jo ghadee ka aavishkaar nahin hua tha to vah baadalon ko dekhakar sooraj ko dekh kar insaan maan laga dete kitana taim hua hai kyonki aap ek parasent se dhyaan rakhana gaanv mein kabhee bhee jo sooraj hee hote hain inase hee taim ka pata lagata hai ya koee gaanv mein ya koee aapakee phaimilee membar ya koee manapasand chunaav is baare mein diskas karenge to aapako shaart jaroor bataenge kyonki soorat se hee hai na jo gaadee ke samay ka pata lagata hai puraane taim hai abhee philahaal main maanata hoon vah so taim lagata lekin kaaphee jo old hain aur kaaphee jo gaanv mein regular hai vah bhee bhee usee cheej se pata laga ki main sajest dhanyavaad

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घड़ियों के अविष्कार से पूर्व भारतीय लोक समय का पता कैसे लगाते थे?Ghadiyon Ke Avishkar Se Purv Bhartiya Lok Samay Ka Pata Kaise Lagate The
Umesh Upaadyay Bolkar App
Top Speaker,Level 33
सुनिए Umesh जी का जवाब
Life Coach | Motivational Speaker
2:42
पुराने जमाने में जब घड़ियां वगैरह नहीं होती थी हीरो एनालॉग डिजिटल यह सारी नहीं होती थी तो उस समय आप लोग लोगों ने आप हमारे यहां पंचांग होता था तो एक तो पंचांग से यह पता चलता था कि भाई यह महीना कौन सा है साल का कौन सा दिन है तारीख तो बन जाती थी उसके बाद यह भी पता चलता था कि भाई यह वाले दिन बड़े होते हैं छोटे होते हैं ऋतु में कौन सी होती है यह पता होता था ओके यह महीना 30 दिन का 31 दिन का यह पता होता था ठीक है उसके बाद जब आज दिन की बात होती थी दिन को दिन को प्रहर में बांटा गया था ठीक है यह यह एक पर है यह दोपहर है ऐसे ऐसे करके ठीक है उसका दिन का भी डिवीजन था क्योंकि अभी इतना एग्जैक्ट एकदम सही एप्रोप्रियेट नहीं होता था कि डेट नहीं होता था जितना घड़ी बता दी थी लेकिन हां उनको पता था यह दिन का लव प्रपोजल रहा है यह दूसरा है ऐसे करके ओके टाइमिंग का सवाल है तो वहीं 24 घंटे तो तब भी थे उनको पता था 24 घंटे हैं तो उस समय कैसे देखते थे वह यह देखते थे जिसे 12:00 बज गया तो कैसे जैसे आपने जंतर मंतर में देखा होगा घर का कभी आप गए होंगे या ऐसे और भी कई जगह हैं और वहां पर छाया नहीं आती है वह उसको ऐसे बनाए गए हैं कि भाई जब 12:00 बजेंगे तो आपको उसका छाया नहीं दिखेगा ठीक है इसी तरीके से मान लो उन्होंने कहीं पर कोई बात डाल रखा है तो उनको 12:00 बजे उस बात की छाया नहीं दिखेगी या बहुत कम छाए दिखेगी तो उनको पता लग जाएगा अच्छा 12:00 बज गए हैं जिनके फिर धीरे-धीरे छाया दूसरी तरफ जाती चली जाएगी तुमको पता चलेगा अच्छा अब 1:00 बज गया 2:00 बज गया 3:00 बज गया 4:00 बज गए ऐसे करके तू ही भैया दिन में तो यह समझ आ जाता है अब रात को कैसे समझ आएगा भाई रात को अंदाज हमसे जहां तक मुझे अंदाजे से लोग जनरल में जनरल पब्लिक की बात कर रहा हूं तो एक जनरल तरीके से निकालते थे कि चलो भाई अब इतना समय हो गया है और इतना हो गया है और कुछ लोग का तो यह भी होता होगा कि मैं उनकी नींद अपने आप इस समय खुल जाती थी और उनको पता होता था बोर हो गई है कुछ थोड़ा प्राकृतिक भी होता था कि वह चिड़िया का शहजादा मुर्गे का बोलना है मोदी सिंह से यह सारी चीजें होती हैं और अगर आप देखेंगे और तो पहचान बगैरा में यह सब था कि भाई सूर्योदय कब होगा वगैरह कुछ कुछ आईडिया उसमें जरूर मिलता था तो इस तरीके से लोग समय का पता चला लगाते थे
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घड़ियों के अविष्कार से पूर्व भारतीय लोक समय का पता कैसे लगाते थे?Ghadiyon Ke Avishkar Se Purv Bhartiya Lok Samay Ka Pata Kaise Lagate The
TechVR ( Vikas RanA) Bolkar App
Top Speaker,Level 22
सुनिए TechVR जी का जवाब
IT Professional
2:39
नमस्कार दोस्तों योजना पूछा है घड़ियों के आविष्कार से पूर्व भारतीय लोग समय का पता कैसे लगाते थे यह बताना चाहता हूं कि आजकल के युवा हमारा पूरा दिन घड़ी देखकर ही चलता है सोते बिगड़ी देख रहे हो और उठते भी लेकिन जब घड़ियों का अविष्कार नहीं हुआ था तब लोगों का जीवन कैसा था लम्हा यह वक्त लगातार हाथ से फिसलता जा रहा है लेकिन इसका ऐसा समय घड़ी से ही हमसे हमें घड़ी से ही पता चलता है तो पहले का जो था पहले भारत के पुराने ग्रंथों के समय का जिक्र मिलता है ऐसा पूर्व से भी हजारों साल पहले भारत के समय को थोड़ी दूरी की स्थिति से आंका जाता था तब प्रहार के मालिक बना कर ही गणना की जाती थी क्योंकि सूर्य की घड़ी का इस्तेमाल जो है प्राचीन सभ्यता ने किया था माना जाता है कि सूर्य वैज्ञानिक रूप से समय की गणना गणना गणना करने वाला पहला आविष्कार था आज भी सूर्य घड़ी देखकर ही समय का मोट अंदाजा लग जाता है लेकिन बादल लगे हो तो सूर्य घड़ी काम नहीं करती है इसी के दौरान पहले रेल खड़ी ब्रिटिश घड़ी का आविष्कार कब हुआ यह कहना मुश्किल है लेकिन माना जाता है कि रेत की घड़ी अरब में खोज हुई थी अध्ययन के दौरान देश के कांच बनाने की कला विकसित हुई थी कांच को खास बनावट में डालकर उसके भीतर रेत भरी जाते थे पूरे को एक खाने से दूसरे खाने में जाने के समय मुताबिक वक्त का अंदाजा लगाया जाता था और उसी दौरान बहुत से देशों ने बहुत अलग-अलग सभ्यता के लोगों ने अपने हिसाब से घड़ी का टाइम देखने के लिए अविष्कार किए थे जिसे रेट का घड़ा फिर पानी का ऐसे करके बहुत सी चीजें बनाई थी जिसके द्वारा बहुत मतलब उसका अविष्कार करके ही आपने टाइम कहां चल करते थे फिर उसको धूप के जैसे चलती है धरती के ऊपर कुछ निशान रहते हो धूप परसाई के हिसाब से ही उनका जो है टाइम का अंदाजा लगाया जाता था और अगर हम अपने भारतीय सभ्यता का अगर बात करें सन टेंपल जोकि इंडिया के सबकॉन्टिनेंटल जो है उसमें सूर्य के नाम से पहले से ही जो कोणार्क सुन टेंपल नाम का एक मंदिर है जो कि कल ले समय के लिए बताता था जो कि वह भी धूप से ही समय ज्यादा जगह जो कि वह अपने साथ उसके बारे में पढ़ा हूं जो कि गुजरात में है तो इस तरह से चीजों का अंदाजा लगाने के लिए अलग-अलग तरह के खोजे करी थी उसके बाद घड़ी आगे से लोग जेब में घड़ी रखने लगी छोटी सी पहले अपने मूवीस में भी देखा होगा वही पुराना इतिहास है आशा करता हूं आपका आपके सवाल का जवाब मिल गया होगा लाइक और सब्सक्राइब करें धन्यवाद
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घड़ियों के अविष्कार से पूर्व भारतीय लोक समय का पता कैसे लगाते थे?Ghadiyon Ke Avishkar Se Purv Bhartiya Lok Samay Ka Pata Kaise Lagate The
Ram Kumawat  Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए Ram जी का जवाब
Unknown
0:33
दोस्तों आप का सवाल एक गरीब का आविष्कार से पूरे भारतीय लोग समय का बैठक पता कैसे लगा था जब महाराजा और राजाओं का टाइम था तब गाड़ियों की सेल नहीं थी वहां तब कविता गाड़ियों का आविष्कार भी नहीं हुआ था उससे पहले लोग क्या करते थे एक के जल घड़ी बनाते थे जिसके अंदर सुराग बनाई होते थे छोटे छोटे छोटे छोटे उसके अंदर जल भर दिया जाता था और उसके हिसाब से उस पर टाइमिंग सेट होती थी उसे घड़ी का पता टाइम का पता लगाते थे भारतीय धन्यवाद दोस्तों
Doston aap ka savaal ek gareeb ka aavishkaar se poore bhaarateey log samay ka baithak pata kaise laga tha jab mahaaraaja aur raajaon ka taim tha tab gaadiyon kee sel nahin thee vahaan tab kavita gaadiyon ka aavishkaar bhee nahin hua tha usase pahale log kya karate the ek ke jal ghadee banaate the jisake andar suraag banaee hote the chhote chhote chhote chhote usake andar jal bhar diya jaata tha aur usake hisaab se us par taiming set hotee thee use ghadee ka pata taim ka pata lagaate the bhaarateey dhanyavaad doston

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घड़ियों के अविष्कार से पूर्व भारतीय लोक समय का पता कैसे लगाते थे?Ghadiyon Ke Avishkar Se Purv Bhartiya Lok Samay Ka Pata Kaise Lagate The
Archana Mishra Bolkar App
Top Speaker,Level 22
सुनिए Archana जी का जवाब
Housewife
0:22
हेलो फ्रेंड स्वागत है आपका आपका प्रश्न गाड़ियों के अविष्कार में पूर्व भारतीय लोग समय का पता कैसे लगाते थे जो फ्रेंड्स लकड़ियों का अविष्कार नहीं हुआ था उसके पहले लोग सूरज से ही समय का पता लगाते थे सूर्य जब निकलता था सुबह का दोपहर का और उसी हिसाब से वह समय का पता लगाते रहते थे धन्यवाद
Helo phrend svaagat hai aapaka aapaka prashn gaadiyon ke avishkaar mein poorv bhaarateey log samay ka pata kaise lagaate the jo phrends lakadiyon ka avishkaar nahin hua tha usake pahale log sooraj se hee samay ka pata lagaate the soory jab nikalata tha subah ka dopahar ka aur usee hisaab se vah samay ka pata lagaate rahate the dhanyavaad

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