#जीवन शैली

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तीव्र भावनाओं का मनुष्य के व्यक्तित्व पर क्या प्रभाव पड़ता है?

Teevr Bhaavnao Ka Manushya Ke Vyaktitv Par Kya Prabhav Padta Hai
 Nida Rajput       Bolkar App
Top Speaker,Level 33
सुनिए जी का जवाब
Student Computer Science Education
0:45
देखिए आप का सवाल है कि तीर वह भावनाओं का मनुष्य के व्यक्तित्व पर क्या प्रभाव पड़ता है जो तीर वह भावना रखता है व्यक्ति वह बिना सोचे समझे कोई भी निर्णय ले सकता है और उसे इस बात का अंदाजा भी नहीं होता कि जो होने वाला है वह कितना भयंकर होगा और कितना अच्छा होगा बस उसे निर्णय लेने की होती है और वह उसके मन में जो भी आता है वह उसी कर बैठा है लेकिन ऐसा नहीं करना चाहिए जब भी हम कुछ करें जहां हम खड़े हैं जहां मुझसे बात करने हैं उन्हीं लोगों को उन्हीं लोगों को मध्य नजर रखते हुए हमें अपने निर्णय सुनाने चाहिए या नहीं हमें अपनी तीर को भावना में आकर जो हमें अच्छा लगा बस हमने कर दिया तो ऐसा बिल्कुल ना करें इससे आपको नुकसान हो सकता है धन्यवाद
Dekhie aap ka savaal hai ki teer vah bhaavanaon ka manushy ke vyaktitv par kya prabhaav padata hai jo teer vah bhaavana rakhata hai vyakti vah bina soche samajhe koee bhee nirnay le sakata hai aur use is baat ka andaaja bhee nahin hota ki jo hone vaala hai vah kitana bhayankar hoga aur kitana achchha hoga bas use nirnay lene kee hotee hai aur vah usake man mein jo bhee aata hai vah usee kar baitha hai lekin aisa nahin karana chaahie jab bhee ham kuchh karen jahaan ham khade hain jahaan mujhase baat karane hain unheen logon ko unheen logon ko madhy najar rakhate hue hamen apane nirnay sunaane chaahie ya nahin hamen apanee teer ko bhaavana mein aakar jo hamen achchha laga bas hamane kar diya to aisa bilkul na karen isase aapako nukasaan ho sakata hai dhanyavaad

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तीव्र भावनाओं का मनुष्य के व्यक्तित्व पर क्या प्रभाव पड़ता है?Teevr Bhaavnao Ka Manushya Ke Vyaktitv Par Kya Prabhav Padta Hai
Dr.Nitin Pawar, D.M S.(Management) Bolkar App
Top Speaker,Level 33
सुनिए Dr.Nitin जी का जवाब
Kisan,Journalist,Marathi Writer, Social Worker,Political Leader.
7:00
तीव्र भावनाओं का मनुष्य के व्यक्तित्व पर क्या असर होता है भावनाएं मनुष्य के का वशिष्ठ है अन्य प्राणियों में भावनाएं है लेकिन इतनी विकसित नहीं हुई है लंबे समय तक नहीं चलती है मनुष्य की भावनाएं ऐसी होती है सालों साल भी चल सकती है किसी चीज के प्रति मूर्ति तक भी चल सकती है और कहते हैं कि जम्मू जम्मू तक भी रहती है वह कुछ भी हो लेकिन भावनाएं दूर होने का अनुभव मनुष्य कोई जीवन में बार-बार आता भी है लेकिन टूर टूर भावना शरीर के स्वास्थ्य के लिए अच्छी नहीं होती है मनुष्य के व्यक्तित्व और पर्सनैलिटी के लिए भी अच्छी नहीं अच्छे नहीं होते क्योंकि अगर बहुत ज्यादा कर आता है इंसान अच्छा है लेकिन क्रोध बहुत ज्यादा ज्यादा आता है तो क्रोध में वह जब रिजेक्ट करता है तो कुछ एक्स्ट्रा हो रिजेक्ट होता है और कुछ उसमें गलतियां होती है और अच्छा व्यक्तित्व होने के बावजूद भी ऐसी गलतियों के कारण लोग उसको गलत भी समझते हो समझते हैं उसकी प्रतिमा भी लोग के नजर में कितने जाती गिर जाती है कई उसके दुश्मन भी बन सकते हैं तेरी भावनाओं के आवेश में गैरकानूनी कुर्ते भी कर सकता है और कानून की कानून की कानून के शिकंजे में है और अटक सकता है तू कुछ लोग ऐसे भी होते हैं कि बहुत ज्यादा दुख की भावना अगर हो तो उसी समय देहरदा अटैक से मर जाते हैं ऐसे भी के सदस्य बेटे का निधन हुआ मां भी हार्टअटैक से गई पति का निधन हुआ पत्नी बिहार का टैक्स की भावनाओं का अपने आप में एक दोनों को संतुलित रखने का मैकेनिज्म भी रखता है चल का अपना एक मैकेनिज्म भी होता है की भावनाओं को कैसे नियंत्रित कर किया जा सकता है फिर भी कई बार यह मैकेनिज्म भी काम नहीं आता और तीव्र भावनाओं से ब्लड प्रेशर बढ़ता है ट्रेस बढ़ता है कई रसायने हमारे शरीर में एकदम से ज्यादा मात्रा में निर्माण होती है वह भी रात तक होती है चुरा भावनाओं से दुख भी बहुत मिलता है कई लोग दुखी होते हैं सालों साल दुखी होते फिर भी अपने मन को संतुलित रखने में कामयाब नहीं होते और एक बड़ी समस्या भी है और यह बड़ी दुखदायक चीज भी है अंतिम तक समाज स्वास्थ्य के लिए भी अच्छी चीज नहीं है तो ऐसे जो प्रॉब्लम से उनको जुड़वाने के लिए काउंसिल काउंसिल्लर्स जो होते हैं समाज में डॉक्टर सोते साइकेट्रिक सोते हैं उनकी मदद लेना बहुत जरूरी होता है और इसकी सलाह देना भी बहुत जरूरी होता है क्योंकि मालूम तो होना चाहिए बहुत बड़ी जनसंख्या में अनपढ़ है इसके कारण बड़ी जनसंख्या को इंफॉर्मेशन का अभाव होता है और मुझे एग्जैक्ट इसके ऊपर का इलाज होता है वह कर नहीं पाते और यहां पर गलती हो जाती है तो इसके बारे में अवेयरनेस जो है वह हमारी व्यवस्था है जो हैं उन्होंने और समाज में बढ़ाने की जरूरत व्यक्ति ने भी अपने खुद के स्वास्थ्य के बारे में और पूरा जो मानव मनुष्य का शरीर किस तरह से काम कर करता है इसका एक सामान्य नॉलेज जनरल नॉलेज इसको कहते हैं उतना कम से कम उसके पास होना ही चाहिए और पाठ्यक्रम से और अभ्यासक्रम से यह देना ही चाहिए तो बिल्कुल अनजान जो है इन चीजों से ऐसे लोग नहीं रहे पूरी पर्सनैलिटी पर इसका असर होता है कई बार लोग विक्षिप्त बर्तन करते हैं प्रवर्तन करते हैं और कई बार डिप्रेशन हॉलीडे मल्टीपल इस तरह की मानसिक समाचार बीमारियों के शिकार हो जाते हैं तो इस तरीके से एक बड़ा प्रभाव तीव्र भावना से मनुष्य के ऊपर करती है अगर यह जवाब आपको सही लगा तो कृपया इसे लाइक करें धन्यवाद
Teevr bhaavanaon ka manushy ke vyaktitv par kya asar hota hai bhaavanaen manushy ke ka vashishth hai any praaniyon mein bhaavanaen hai lekin itanee vikasit nahin huee hai lambe samay tak nahin chalatee hai manushy kee bhaavanaen aisee hotee hai saalon saal bhee chal sakatee hai kisee cheej ke prati moorti tak bhee chal sakatee hai aur kahate hain ki jammoo jammoo tak bhee rahatee hai vah kuchh bhee ho lekin bhaavanaen door hone ka anubhav manushy koee jeevan mein baar-baar aata bhee hai lekin toor toor bhaavana shareer ke svaasthy ke lie achchhee nahin hotee hai manushy ke vyaktitv aur parsanailitee ke lie bhee achchhee nahin achchhe nahin hote kyonki agar bahut jyaada kar aata hai insaan achchha hai lekin krodh bahut jyaada jyaada aata hai to krodh mein vah jab rijekt karata hai to kuchh ekstra ho rijekt hota hai aur kuchh usamen galatiyaan hotee hai aur achchha vyaktitv hone ke baavajood bhee aisee galatiyon ke kaaran log usako galat bhee samajhate ho samajhate hain usakee pratima bhee log ke najar mein kitane jaatee gir jaatee hai kaee usake dushman bhee ban sakate hain teree bhaavanaon ke aavesh mein gairakaanoonee kurte bhee kar sakata hai aur kaanoon kee kaanoon kee kaanoon ke shikanje mein hai aur atak sakata hai too kuchh log aise bhee hote hain ki bahut jyaada dukh kee bhaavana agar ho to usee samay deharada ataik se mar jaate hain aise bhee ke sadasy bete ka nidhan hua maan bhee haartataik se gaee pati ka nidhan hua patnee bihaar ka taiks kee bhaavanaon ka apane aap mein ek donon ko santulit rakhane ka maikenijm bhee rakhata hai chal ka apana ek maikenijm bhee hota hai kee bhaavanaon ko kaise niyantrit kar kiya ja sakata hai phir bhee kaee baar yah maikenijm bhee kaam nahin aata aur teevr bhaavanaon se blad preshar badhata hai tres badhata hai kaee rasaayane hamaare shareer mein ekadam se jyaada maatra mein nirmaan hotee hai vah bhee raat tak hotee hai chura bhaavanaon se dukh bhee bahut milata hai kaee log dukhee hote hain saalon saal dukhee hote phir bhee apane man ko santulit rakhane mein kaamayaab nahin hote aur ek badee samasya bhee hai aur yah badee dukhadaayak cheej bhee hai antim tak samaaj svaasthy ke lie bhee achchhee cheej nahin hai to aise jo problam se unako judavaane ke lie kaunsil kaunsillars jo hote hain samaaj mein doktar sote saiketrik sote hain unakee madad lena bahut jarooree hota hai aur isakee salaah dena bhee bahut jarooree hota hai kyonki maaloom to hona chaahie bahut badee janasankhya mein anapadh hai isake kaaran badee janasankhya ko imphormeshan ka abhaav hota hai aur mujhe egjaikt isake oopar ka ilaaj hota hai vah kar nahin paate aur yahaan par galatee ho jaatee hai to isake baare mein aveyaranes jo hai vah hamaaree vyavastha hai jo hain unhonne aur samaaj mein badhaane kee jaroorat vyakti ne bhee apane khud ke svaasthy ke baare mein aur poora jo maanav manushy ka shareer kis tarah se kaam kar karata hai isaka ek saamaany nolej janaral nolej isako kahate hain utana kam se kam usake paas hona hee chaahie aur paathyakram se aur abhyaasakram se yah dena hee chaahie to bilkul anajaan jo hai in cheejon se aise log nahin rahe pooree parsanailitee par isaka asar hota hai kaee baar log vikshipt bartan karate hain pravartan karate hain aur kaee baar dipreshan holeede malteepal is tarah kee maanasik samaachaar beemaariyon ke shikaar ho jaate hain to is tareeke se ek bada prabhaav teevr bhaavana se manushy ke oopar karatee hai agar yah javaab aapako sahee laga to krpaya ise laik karen dhanyavaad

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तीव्र भावनाओं का मनुष्य के व्यक्तित्व पर क्या प्रभाव पड़ता है?Teevr Bhaavnao Ka Manushya Ke Vyaktitv Par Kya Prabhav Padta Hai
Yogi Prashant Nath Bolkar App
Top Speaker,Level 22
सुनिए Yogi जी का जवाब
Businessman
2:26
नमस्कार तेरी भावनाओं का मनुष्य के व्यक्तित्व पर क्या प्रभाव पड़ता है मनुष्य अपने जीवन में जो भी कर्म करता है जैसा व्यवहार करता है जैसा रिजेक्ट करता है उससे उसका व्यक्तित्व बनता है जो अच्छे कर्म करते अच्छा व्यवहार करता है उसका व्यक्तित्व अच्छा बनता चला जाता है बात करें यहां भावना की तो भावनाएं हमारे कर्मों पर बहुत ज्यादा इफेक्ट करते हैं अगर हम किसी चीज को लेकर बहुत ज्यादा भावुक हो जाते हैं बहुत ज्यादा डिप्रेस्ड हो जाते हैं तो हमारा परफॉर्मेंस जो है बिगड़ सकता है हम अच्छे परफॉर्मेंस नहीं दे पाएंगे क्योंकि हमारा काबू नहीं रहता बॉडी का पर इतना तो जीवन में भावना को संतुलित रखना बहुत जरूरी है ना ज्यादा दुखी हो ना ज्यादा खुश हो सही मूवमेंट को अपना बनाए रखना चाहिए क्योंकि शास्त्रों में भी लिखा गया कि कई बार ज्यादा खुश होकर भी व्यक्ति कुछ ऐसी बातें कुछ ऐसी कह सकते हैं कि वचन दे देते हैं कि भाई आप आज हम बहुत खुश हैं आप मांगो जो मांगते हो और ए बाद में क्या होता है कि अगर कोई कुछ इस तरह की चीजें मांग लेता है जो आपके समर्थ से पा रहे हो तो अब दिक्कत में मुसीबत में फंस जाते हैं इसी प्रकार से जब डिप्रेशन होता है या हमें किसी प्रकार की समस्या में उलझे रहते हैं तो हमारे सामने इतनी अच्छी चीजें होती हैं वह भी हम नजरअंदाज कर देते हैं तो जीवन को संतुलित बनाया भावनाओं के बहाव में ना वह हर एक पल हर क्षण आता है चला जाता है हर एक पल हर क्षण के साथ अपने आप को नियंत्रित रखें नियंत्रित रखेंगे आप अपने भावनाओं पर कंट्रोल रखेंगे करेंगे तो आपका जो मूवमेंट है जो भी आप व्यवहार करेंगे बहुत ही सही व्यवहार करेंगे समाज में लोगों के साथ इस तरह से आपका व्यक्तित्व अच्छा बनेगा वह भरकर निखर कर आएगा और आप जीवन में हर एक क्षेत्र में सफल होंगे चाहे वो कोई भी क्षेत्र क्यों नहीं बेसिक है आपका सोच अप नजरिया जो है वह अगर आपका सकारात्मक है उसके ऊपर किसी भी चीज का पर्दा नहीं चढ़ा हुआ है तो फिर आप जीवन में हर चीज अचीव कर सकते हैं यह बहुत ही महत्वपूर्ण है आशा करता हूं कि पोस्ट आपके लिए काफी हेल्प लो
Namaskaar teree bhaavanaon ka manushy ke vyaktitv par kya prabhaav padata hai manushy apane jeevan mein jo bhee karm karata hai jaisa vyavahaar karata hai jaisa rijekt karata hai usase usaka vyaktitv banata hai jo achchhe karm karate achchha vyavahaar karata hai usaka vyaktitv achchha banata chala jaata hai baat karen yahaan bhaavana kee to bhaavanaen hamaare karmon par bahut jyaada iphekt karate hain agar ham kisee cheej ko lekar bahut jyaada bhaavuk ho jaate hain bahut jyaada dipresd ho jaate hain to hamaara paraphormens jo hai bigad sakata hai ham achchhe paraphormens nahin de paenge kyonki hamaara kaaboo nahin rahata bodee ka par itana to jeevan mein bhaavana ko santulit rakhana bahut jarooree hai na jyaada dukhee ho na jyaada khush ho sahee moovament ko apana banae rakhana chaahie kyonki shaastron mein bhee likha gaya ki kaee baar jyaada khush hokar bhee vyakti kuchh aisee baaten kuchh aisee kah sakate hain ki vachan de dete hain ki bhaee aap aaj ham bahut khush hain aap maango jo maangate ho aur e baad mein kya hota hai ki agar koee kuchh is tarah kee cheejen maang leta hai jo aapake samarth se pa rahe ho to ab dikkat mein museebat mein phans jaate hain isee prakaar se jab dipreshan hota hai ya hamen kisee prakaar kee samasya mein ulajhe rahate hain to hamaare saamane itanee achchhee cheejen hotee hain vah bhee ham najarandaaj kar dete hain to jeevan ko santulit banaaya bhaavanaon ke bahaav mein na vah har ek pal har kshan aata hai chala jaata hai har ek pal har kshan ke saath apane aap ko niyantrit rakhen niyantrit rakhenge aap apane bhaavanaon par kantrol rakhenge karenge to aapaka jo moovament hai jo bhee aap vyavahaar karenge bahut hee sahee vyavahaar karenge samaaj mein logon ke saath is tarah se aapaka vyaktitv achchha banega vah bharakar nikhar kar aaega aur aap jeevan mein har ek kshetr mein saphal honge chaahe vo koee bhee kshetr kyon nahin besik hai aapaka soch ap najariya jo hai vah agar aapaka sakaaraatmak hai usake oopar kisee bhee cheej ka parda nahin chadha hua hai to phir aap jeevan mein har cheej acheev kar sakate hain yah bahut hee mahatvapoorn hai aasha karata hoon ki post aapake lie kaaphee help lo

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तीव्र भावनाओं का मनुष्य के व्यक्तित्व पर क्या प्रभाव पड़ता है?Teevr Bhaavnao Ka Manushya Ke Vyaktitv Par Kya Prabhav Padta Hai
Navnit Kumar Bolkar App
Top Speaker,Level 11
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QUALITY ENGINEER
1:24
दीक्षित व भावनाओं का मनुष्य के व्यक्ति पर प्रभाव पड़ता है पॉजिटिव और नेगेटिव दोनों अगर आप बहुत ज्यादा इमोशनल है उसे t-72 छोटी-छोटी बातें आपको हर्ट करेगी हर छोटा बात आपको हर्ट करेगा या छोटी से छोटी बात आपको बहुत ज्यादा एक्साइटेड कर देगी और आप हो सकता आप ऐसा कुछ काम कर दो जो नहीं काबू करना चाहिए हु इज भावना किसी भी तरह से ठीक नहीं होती है तीव्र भावना और उसमें दिए थे वह ठीक नहीं हर आदमी कभी ना कभी तीव्र भावना में आता है लेकिन व्यक्ति होने से जजमेंटल होने से बचे किसी भी चीज से पहले सोचे विचारे तब बोले तो सोच कर कि आपका जो एक पल का जो एक्शन है वह सामने वाले की लाइफ को भी खराब कर सकता है आपने गुस्से में आकर किसी का मर्डर कर दिया अपने गुस्से में आप किसी के बारे में ऐसा शब्द बोल दिया जो स्कूल लाइफ टाइम याद दिलाएगा कि आपने ऐसा कर योगा मेडिटेशन करें जिस गाड़ी में रहते दोस्तों के बीच रहते हो डिफेंस की पिक्चर है तो यह धीरे-धीरे कंट्रोल में आ जाता है
Deekshit va bhaavanaon ka manushy ke vyakti par prabhaav padata hai pojitiv aur negetiv donon agar aap bahut jyaada imoshanal hai use t-72 chhotee-chhotee baaten aapako hart karegee har chhota baat aapako hart karega ya chhotee se chhotee baat aapako bahut jyaada eksaited kar degee aur aap ho sakata aap aisa kuchh kaam kar do jo nahin kaaboo karana chaahie hu ij bhaavana kisee bhee tarah se theek nahin hotee hai teevr bhaavana aur usamen die the vah theek nahin har aadamee kabhee na kabhee teevr bhaavana mein aata hai lekin vyakti hone se jajamental hone se bache kisee bhee cheej se pahale soche vichaare tab bole to soch kar ki aapaka jo ek pal ka jo ekshan hai vah saamane vaale kee laiph ko bhee kharaab kar sakata hai aapane gusse mein aakar kisee ka mardar kar diya apane gusse mein aap kisee ke baare mein aisa shabd bol diya jo skool laiph taim yaad dilaega ki aapane aisa kar yoga mediteshan karen jis gaadee mein rahate doston ke beech rahate ho diphens kee pikchar hai to yah dheere-dheere kantrol mein aa jaata hai

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तीव्र भावनाओं का मनुष्य के व्यक्तित्व पर क्या प्रभाव पड़ता है?Teevr Bhaavnao Ka Manushya Ke Vyaktitv Par Kya Prabhav Padta Hai
Deven  Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए Deven जी का जवाब
Valuepreneur Adventurer Life Explorer Dreamer
2:47
तीव्र भावनाओं का मनुष्य के व्यक्तित्व पर क्या प्रभाव पड़ता है देखे भावनाएं जो होती है एनर्जी का फॉर्म होती है हमें क्रोधित होते हंसते हैं किसी भी टाइप की जो भावना होती है भी वियर होने से पहले आपकी भावना पिक्चर में आती आपकी इमोशंस पिक्चर में आते हैं जब इमोशनल फीलिंग पिक्चर मैं तो उसको फीलिंग आपके उस दिव्या को बाहर निकालते जैसे कि मुझे अगर यह फीलिंग हो रही है कि मैं रोड के ऊपर मेरे किसने काटी ठोक दी मुझे गुस्सा आया तो अब गुस्से की जो फीलिंग क्रिएट हो जाती हुई गुस्सा आना और उसके फीलिंग नहीं लेना तो फिर तो गुस्सा नहीं कहलाएगा लेकिन आप लेकिन अगर उस फिलिंग की डेट हुई अब फीलिंग ग्रेट होने के बाद में वह होते गए होते कि अब इतनी एग्रावेटेड हो गई ट्रेन के ऊपर उस प्रॉपर फीलिंग ने काबू पा लिया आप नीचे उतरे एक लाफा चढ़ा दिया आगे वाली इंसान को यह पूरा भावनाएं आपकी और इस पूरे भावना की वजह से आपने बिहेवियर कर लिया वह भी अपने किया अपने मन में नहीं सोचा कि मैं जाकर मारूंगा अपनी मारा अब क्या होगा उसका प्रभाव पड़ेगा वह भी अब तुम्हारे झगड़ा पड़ेगा और कुछ भी हो सकता है कोई भी लेवल पर जा सकता है इस तरीके से जो आपकी भावनाएं होती है लास्ट डेट भावनाएं आपकी कृपा सब तो आप अट्रैक्शन रीड रीड एक भावना होते भावनाएं इमोशंस के लिए एनर्जी होती है एनर्जी से जो होती है वह घर नेगेटिव साइड किया तो आपको कहीं भी फंसा सकती है और यह आप हंसोगे क्योंकि उस समय कंट्रोलप्रिंट ऊपर नहीं होते हैं वह भावना भावना आपसे वो काम करा लेती है तो उस समय फसलों के और फंसने के बाद अन्य कई तरीके से आप की लाइफ के ऊपर उसका प्रभाव पड़ सकता है जो कि एक सही सरल लाइफ में जब आप एक शांति से बैठे हो गाना लेस करोगे तो आपको समझ में आया कि मैं नहीं क्यों किया क्यों फसा बात है मुझे नहीं लगता कि कोई ऐसी आदतें भी जगह फंसना चाहता है इसलिए उस भावनाओं का वध और कीजिए कि हम कुछ कर रहे हैं तो क्यों कर रहे बहुत पर लंबे समय तक ऐसी भावना अंदर में चलते रहते और कुछ ऐसा भी और हमारे हाथ से हो जाता है लंबे समय में आठ नौ 10 साल के 10 महीने की प्लानिंग में जहां पर हम लोग फंस जाते लास्ट में जाकर तो यह भावना ही क्यों है किस चीज के लिए हमें करना चाह रहे उसके इंक्वायरी में चाहिए क्या यह भावना एवरीवन पीवीआर है तो थोड़ा सोचिए सोचिए समझिए और तब कीजिए अगर उसमें राशनल आंसर मिलता है कि हमें सही रास्ते पर हो तो सही है अगर नहीं राशनल आंसर है भावना के वजह से यह कर रहा हूं हमें किस अट्रैक्शन करो ऐसे करो जैसे टेलीफोन से फ्रॉड कर दे तो उसने हमारा ट्रैक्शन यह भावना होती है क्या खाने ज्यादा पैसे मिलने ओपनिंग इतनी मजबूत होती हम किसी से सुनती भी नहीं हो रहा में प्लॉट के अंदर जाकर फस जाते हैं
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