#भारत की राजनीति

Rahul kumar Bolkar App
Top Speaker,Level 44
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Unknown
1:12
क्या मोदी सरकार द्वारा पीएसयू बैंकों का निजीकरण किया जाने का विचार है कि जो भी सरकार के द्वारा प्राइवेट सेक्टर यानी कि निजी करण जिस चीज का भी किया जा रहा है निजी हाथों में सौंपा द्वारा हर एक शब्द तो मोदी के प्रभावित करेगा और अच्छा विचार तो मिस को बिल्कुल भी नहीं कहेंगे क्योंकि यदि किसी चीज का राष्ट्रीयकरण होता है वह सरकार के अंडर में वह चीज आ जाती है सरकार के ऊपर देश की जनता अमूल्य उठा सकती है सरकार के ऊपर किसी भी चीज को लेकर जवाब जो है सरकार से जनता ले सकती है परंतु जब से निजी करण होता हुआ जा रहे प्राइवेट सेक्टर के अंदर जो चीजें को जा रही है तो यह अच्छा बिल्कुल भी नहीं है हमारे देश की प्रधानमंत्री रह चुके हैं श्रीमती इंदिरा गांधी ने अपने समय में 19 बैंकों का राष्ट्रीयकरण कर दिया था और वहीं नरेंद्र मोदी जी बैंकों का निजीकरण करने में लगे हैं यदि निजीकरण करने का मतलब है कि आप सरकारी नौकरी की तलाश छोड़ दीजिए आप को रोजगार से प्राइवेट सेक्टर में मिलेगा जाकर ना तो रिजर्वेशन होगा और ना आपकी मेहनत पावर नेपोटिज्म को सिस्टम चलेगा और ऐसे सिस्टम को ना तो देश की जनता स्वीकार करती है और ना ही कोई अन्य लोग तो मैं इसके बिल्कुल भी कल आपको जो भी कर रहे हैं वह गलत कर रहे हैं निरीक्षण को लेकर
Kya modee sarakaar dvaara peeesayoo bainkon ka nijeekaran kiya jaane ka vichaar hai ki jo bhee sarakaar ke dvaara praivet sektar yaanee ki nijee karan jis cheej ka bhee kiya ja raha hai nijee haathon mein saumpa dvaara har ek shabd to modee ke prabhaavit karega aur achchha vichaar to mis ko bilkul bhee nahin kahenge kyonki yadi kisee cheej ka raashtreeyakaran hota hai vah sarakaar ke andar mein vah cheej aa jaatee hai sarakaar ke oopar desh kee janata amooly utha sakatee hai sarakaar ke oopar kisee bhee cheej ko lekar javaab jo hai sarakaar se janata le sakatee hai parantu jab se nijee karan hota hua ja rahe praivet sektar ke andar jo cheejen ko ja rahee hai to yah achchha bilkul bhee nahin hai hamaare desh kee pradhaanamantree rah chuke hain shreematee indira gaandhee ne apane samay mein 19 bainkon ka raashtreeyakaran kar diya tha aur vaheen narendr modee jee bainkon ka nijeekaran karane mein lage hain yadi nijeekaran karane ka matalab hai ki aap sarakaaree naukaree kee talaash chhod deejie aap ko rojagaar se praivet sektar mein milega jaakar na to rijarveshan hoga aur na aapakee mehanat paavar nepotijm ko sistam chalega aur aise sistam ko na to desh kee janata sveekaar karatee hai aur na hee koee any log to main isake bilkul bhee kal aapako jo bhee kar rahe hain vah galat kar rahe hain nireekshan ko lekar

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Er.Awadhesh kumar Bolkar App
Top Speaker,Level 66
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Unknown
1:36
अपने क्या मोदी सरकार द्वारा पीएसयू बैंकों का निजीकरण किया जाना एक अच्छा विचार है तो देखिए कहीं ना कहीं अगर देखा जाए तो जब से सरकार आई है तो जो भी पब्लिक सेक्टर यूपी गवर्नमेंट सेक्टर है उसमें बहुत तेजी से गिरावट दर्ज की जा रही है जिसकी वजह से क्या है इन्हें एक ऐसा समय मिल गया कि निजी करण करना पीएसी जो कंपनियां है उनको निजीकरण करना रेलवे जैसे बड़े स्तर पर अगर देखा जाए तो एम्पलाई को रखता है और बेरोजगारी को दूर करता है इसे प्राइवेट सेक्टर में बदला गया है पर मैं आपको बता दूं कि सरकार एक अच्छे कदम ना उठाकर बेरोजगारी को और बढ़ा रही है तुझसे क्या है कि लोग रोजगार थे अब बताइए कि प्राइवेट जो भी बैंक टीम को भी ले कर दिया गया जो भी बैंक है उनका भिलाई कर दिया जाए तू सारे यह क्या है कि उनमें कुछ ना कुछ लोग बेरोजगार भी हो रहे हैं उन्हें अच्छा कदम नहीं कहा जा सकता है अगर गलतियां तो गलतियां सुधारने का मौका देना चाहिए ना कि विलय करना चाहिए और के साथ साथ जो भी पब्लिक सेक्टर है उसको निजीकरण किया जा रहा है इससे क्या बेरोजगारी दूर हो सकती है इसे क्या भारत का विकास होगा मैं कहूंगा कि जो भी आप कुछ ऐसे काम करिए इसे की बड़ी-बड़ी कंपनियां सके बेरोजगारी को दूर किया जा सकता जा सके और भारत की आर्थिक व्यवस्था है जो आर्थिक स्थिति है उसे सुधारा जा सके तो मैं कहता हूं कि इस तरह के घर जो सरकार कर रही है तो मुझे लगता है कि ऐसा कुछ भी अच्छा विचार नहीं है इससे हमारी स्थिति हमारे देश की स्थिति सुधरेगी
Apane kya modee sarakaar dvaara peeesayoo bainkon ka nijeekaran kiya jaana ek achchha vichaar hai to dekhie kaheen na kaheen agar dekha jae to jab se sarakaar aaee hai to jo bhee pablik sektar yoopee gavarnament sektar hai usamen bahut tejee se giraavat darj kee ja rahee hai jisakee vajah se kya hai inhen ek aisa samay mil gaya ki nijee karan karana peeesee jo kampaniyaan hai unako nijeekaran karana relave jaise bade star par agar dekha jae to empalaee ko rakhata hai aur berojagaaree ko door karata hai ise praivet sektar mein badala gaya hai par main aapako bata doon ki sarakaar ek achchhe kadam na uthaakar berojagaaree ko aur badha rahee hai tujhase kya hai ki log rojagaar the ab bataie ki praivet jo bhee baink teem ko bhee le kar diya gaya jo bhee baink hai unaka bhilaee kar diya jae too saare yah kya hai ki unamen kuchh na kuchh log berojagaar bhee ho rahe hain unhen achchha kadam nahin kaha ja sakata hai agar galatiyaan to galatiyaan sudhaarane ka mauka dena chaahie na ki vilay karana chaahie aur ke saath saath jo bhee pablik sektar hai usako nijeekaran kiya ja raha hai isase kya berojagaaree door ho sakatee hai ise kya bhaarat ka vikaas hoga main kahoonga ki jo bhee aap kuchh aise kaam karie ise kee badee-badee kampaniyaan sake berojagaaree ko door kiya ja sakata ja sake aur bhaarat kee aarthik vyavastha hai jo aarthik sthiti hai use sudhaara ja sake to main kahata hoon ki is tarah ke ghar jo sarakaar kar rahee hai to mujhe lagata hai ki aisa kuchh bhee achchha vichaar nahin hai isase hamaaree sthiti hamaare desh kee sthiti sudharegee

पुरुषोत्तम सोनी Bolkar App
Top Speaker,Level 33
सुनिए पुरुषोत्तम जी का जवाब
साहित्यकार, समीक्षक, संपादक पूर्व अधिकारी विजिलेंस
0:54
मोदी सरकार पीएसयू बैंकों का निजीकरण करके जो स्थिति उत्पन्न कर रही है कोई न कोई बात तो उसमें है ही है क्योंकि सरकारी आती हैं वह पीएसयू बैंकों का राष्ट्रीयकरण करके उन को स्थायित्व प्रदान करते हैं लेकिन सरकार ने बैंकों को घाटे में स्वयं डाला है क्योंकि जो उन उनका गुर्जर फंड लोन दिलवा कर के जो उसूल नहीं हो रहा है इसके कारण सारे बैंक घाटे में है और वह बैंक सरकारी नीतियों की असफलता के कारण हुआ है अब वह आपको सफलता को छिपाकर क्योंकि बहुत सारे बैंक घाटे में जा रहे इसलिए सारे बैंकों को समाप्त करके क्योंकि एक ही बैंक उसको बनाकर के पीएसयू बैंक बनाकर मतलब कुछ ना कुछ सहायता प्रदान करेंगे लेकिन यह स्थिति अच्छी नहीं हर चीज का निजीकरण करके निश्चित उत्पन्न की जा रही है और राष्ट्र हित में नहीं है
Modee sarakaar peeesayoo bainkon ka nijeekaran karake jo sthiti utpann kar rahee hai koee na koee baat to usamen hai hee hai kyonki sarakaaree aatee hain vah peeesayoo bainkon ka raashtreeyakaran karake un ko sthaayitv pradaan karate hain lekin sarakaar ne bainkon ko ghaate mein svayan daala hai kyonki jo un unaka gurjar phand lon dilava kar ke jo usool nahin ho raha hai isake kaaran saare baink ghaate mein hai aur vah baink sarakaaree neetiyon kee asaphalata ke kaaran hua hai ab vah aapako saphalata ko chhipaakar kyonki bahut saare baink ghaate mein ja rahe isalie saare bainkon ko samaapt karake kyonki ek hee baink usako banaakar ke peeesayoo baink banaakar matalab kuchh na kuchh sahaayata pradaan karenge lekin yah sthiti achchhee nahin har cheej ka nijeekaran karake nishchit utpann kee ja rahee hai aur raashtr hit mein nahin hai

Shruti Yadav Bolkar App
Top Speaker,Level 33
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Student
4:24
सवाल है कि क्या मोदी सरकार द्वारा पीएसयू बैंकों का निजीकरण किया जाना एक अच्छा विचार है तो समय इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण अंग होता है और अलग-अलग विचारधाराओं का महत्व अलग-अलग समय में भिन्न-भिन्न होता है एक समय में अपरिहार्य लगने वाली चीज समय के साथ-साथ नासिक महत्वहीन हो जाती है बल्कि आगे चलकर उनको त्यागना समय की सबसे बड़ी जरूरत नजर आने लगती है एक समय था जब समाजवाद की अवधारणा के चलते अधिकतर महत्वपूर्ण तंत्र सरकारी थे या उनको सरकारी बना लिया गया था 1969 को चाहे और लोग भूल जाएं लेकिन ना तो भूल बैंकर भूल पाएंगे और ना ही समाज का वह तबका जिसके लिए बैंगन सुविधा इस समय के बाद ही उपलब्ध हो पाई थी समय के साथ-साथ बैंकिंग उद्योग में दिन दूनी और रात चौगुनी तरक्की का कि अभी सिर्फ बड़े शहरों में रहने वाले बैंक विशाखा सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में फैल गई थी जैसे-जैसे बैंकों का क्षेत्र बढ़ता गया सरकार ने अपनी सारी कल्याणी का कल्याणकारी योजनाएं इन सरकारी बैंकों के माध्यम से लगा लागू करना शुरू कर दिया ना सिर्फ अत्यंत छोटे और बड़े मझोले कृषकों को बैंकों से जोड़ा गया बल्कि इनके लिए आसान ऋण भी इन्हीं बैंकों के द्वारा उपलब्ध कराए गए दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों के लोग अपनी छोटी-छोटी बचत बचत इन्हीं बैंकों के माध्यम से सुरक्षित रखना शुरू करें कि यह सबसे बड़ा फर्क है देखने को मिला कि इन बैंकों के लिए समाज की मदद और लोक कल्याणकारी कार्यक्रम लागू करना पहली प्राथमिकता हो गई और लाभ कमाना द्वितीय प्राथमिकता समय आया जब देश की अर्थव्यवस्था में खुले खुलापन आया और दुनिया के तमाम विदेशी बैंक और प्राइवेट बैंक अपने देश में अपने एजेंडा लेकर आए नए बैंकों के लिए लाभ कमाना सबसे बड़ी प्राथमिकता थी और समाज सेवा के लिए नाम मात्र का दिखावा करने की करके यही संतुष्ट थे क्योंकि सरकार का कोई नियंत्रण पर नहीं था इसलिए इनको तो कोई दिक्कत भी नहीं थी पर सरकार की नीतियां भी बदली और उसने भी बैंकों को लाभ कमाने के लिए जोर देना शुरू किया आप लोग लाइजेशन के जमाने में बिना मुनाफा कमाए आप बाजार में भला कैसे ठीक करते हैं तो बैंकों ने भी अपनी रणनीति में बदलाव लाना शुरू कर दिया जो सरकारी उपक्रम किसी जमाने में सरकार और देश की शान हुआ करते थे वहीं इस नए दौर में भोजन बेकार लगने लगे सरकार ने भी उन को निजी हाथों में भेजने की कवायद शुरू की है इसके दो फायदे हैं तो सरकार को पैसा मिलना शुरू हो गया और दूसरा इनके देखभाल की भी मुक्ति मिल गई बड़े बड़े पूंजीपति जो सरकार के लिए चुनावी चंदे के सबसे बड़े स्रोत हैं उनके दबाव में अनेक नीतियां बदली गई इसी सिलसिले में बैंकों को भी निजी हाथों में बेचने की आंख वही जोर पकड़ने लगी जो ठीक भी है जो ठीक ही लग रही थी लेकिन बैंकों को निजी हाथों में बेचने का सबसे नकारात्मक पहलू जो सरकार के सामने आया था वह यह था कि वह अपने तमाम दिखावटी कार्यक्रम कैसे लागू कर आएगी ना तो कोई देवी विदेशी बैंक और ना ही कोई निजी बैंक सरकारी योजनाओं को लागू करने के लिए तैयार होगा अब इस समय में जब सारे काम बैंकों के माध्यम से ही करवाने हैं चाहे वह पेंशन बांटना हो कृषि को करण देना हो विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं को लागू करवाना हो या चार जन धन योजना में खा सकते खाता खुलवाना हो अब इन कामों में सरकारी सहकारी है ग्रामीण बैंकों के अलावा और कोई बैंक के सामने आएगा नहीं तो सरकार की मजबूरी है कि मैं इन बैंकों का अस्तित्व बनाए रखें इनके अलावा एक और बात है कि वह है कि बड़े उद्योग घरानों कारण डलवाना और वह भी सरकारी नी सरकारी बैंकों के द्वारा ही कर सकती है निजी बैंक भला क्यों सरकार के कहने पर इनको रन देंगे इसलिए भले ही कुछ सरकारी बैंकों का मर्जर हो रहा हो लेकिन इन बैंकों को निजी हाथों में बेचने का खतरा उठा पाना सरकार के लिए संभव नहीं लगता इस मर्जर से लोगों को नौकरियों पर जरूर खतरा आएगा पुराने लोगों को जबरन रिटायर किया जाएगा और नई भर्तियां बंद हो जाएंगी
Savaal hai ki kya modee sarakaar dvaara peeesayoo bainkon ka nijeekaran kiya jaana ek achchha vichaar hai to samay itihaas ka sabase mahatvapoorn ang hota hai aur alag-alag vichaaradhaaraon ka mahatv alag-alag samay mein bhinn-bhinn hota hai ek samay mein aparihaary lagane vaalee cheej samay ke saath-saath naasik mahatvaheen ho jaatee hai balki aage chalakar unako tyaagana samay kee sabase badee jaroorat najar aane lagatee hai ek samay tha jab samaajavaad kee avadhaarana ke chalate adhikatar mahatvapoorn tantr sarakaaree the ya unako sarakaaree bana liya gaya tha 1969 ko chaahe aur log bhool jaen lekin na to bhool bainkar bhool paenge aur na hee samaaj ka vah tabaka jisake lie baingan suvidha is samay ke baad hee upalabdh ho paee thee samay ke saath-saath bainking udyog mein din doonee aur raat chaugunee tarakkee ka ki abhee sirph bade shaharon mein rahane vaale baink vishaakha sudoor graameen kshetron mein phail gaee thee jaise-jaise bainkon ka kshetr badhata gaya sarakaar ne apanee saaree kalyaanee ka kalyaanakaaree yojanaen in sarakaaree bainkon ke maadhyam se laga laagoo karana shuroo kar diya na sirph atyant chhote aur bade majhole krshakon ko bainkon se joda gaya balki inake lie aasaan rn bhee inheen bainkon ke dvaara upalabdh karae gae dooradaraaj ke graameen kshetron ke log apanee chhotee-chhotee bachat bachat inheen bainkon ke maadhyam se surakshit rakhana shuroo karen ki yah sabase bada phark hai dekhane ko mila ki in bainkon ke lie samaaj kee madad aur lok kalyaanakaaree kaaryakram laagoo karana pahalee praathamikata ho gaee aur laabh kamaana dviteey praathamikata samay aaya jab desh kee arthavyavastha mein khule khulaapan aaya aur duniya ke tamaam videshee baink aur praivet baink apane desh mein apane ejenda lekar aae nae bainkon ke lie laabh kamaana sabase badee praathamikata thee aur samaaj seva ke lie naam maatr ka dikhaava karane kee karake yahee santusht the kyonki sarakaar ka koee niyantran par nahin tha isalie inako to koee dikkat bhee nahin thee par sarakaar kee neetiyaan bhee badalee aur usane bhee bainkon ko laabh kamaane ke lie jor dena shuroo kiya aap log laijeshan ke jamaane mein bina munaapha kamae aap baajaar mein bhala kaise theek karate hain to bainkon ne bhee apanee rananeeti mein badalaav laana shuroo kar diya jo sarakaaree upakram kisee jamaane mein sarakaar aur desh kee shaan hua karate the vaheen is nae daur mein bhojan bekaar lagane lage sarakaar ne bhee un ko nijee haathon mein bhejane kee kavaayad shuroo kee hai isake do phaayade hain to sarakaar ko paisa milana shuroo ho gaya aur doosara inake dekhabhaal kee bhee mukti mil gaee bade bade poonjeepati jo sarakaar ke lie chunaavee chande ke sabase bade srot hain unake dabaav mein anek neetiyaan badalee gaee isee silasile mein bainkon ko bhee nijee haathon mein bechane kee aankh vahee jor pakadane lagee jo theek bhee hai jo theek hee lag rahee thee lekin bainkon ko nijee haathon mein bechane ka sabase nakaaraatmak pahaloo jo sarakaar ke saamane aaya tha vah yah tha ki vah apane tamaam dikhaavatee kaaryakram kaise laagoo kar aaegee na to koee devee videshee baink aur na hee koee nijee baink sarakaaree yojanaon ko laagoo karane ke lie taiyaar hoga ab is samay mein jab saare kaam bainkon ke maadhyam se hee karavaane hain chaahe vah penshan baantana ho krshi ko karan dena ho vibhinn sarakaaree kalyaanakaaree yojanaon ko laagoo karavaana ho ya chaar jan dhan yojana mein kha sakate khaata khulavaana ho ab in kaamon mein sarakaaree sahakaaree hai graameen bainkon ke alaava aur koee baink ke saamane aaega nahin to sarakaar kee majabooree hai ki main in bainkon ka astitv banae rakhen inake alaava ek aur baat hai ki vah hai ki bade udyog gharaanon kaaran dalavaana aur vah bhee sarakaaree nee sarakaaree bainkon ke dvaara hee kar sakatee hai nijee baink bhala kyon sarakaar ke kahane par inako ran denge isalie bhale hee kuchh sarakaaree bainkon ka marjar ho raha ho lekin in bainkon ko nijee haathon mein bechane ka khatara utha paana sarakaar ke lie sambhav nahin lagata is marjar se logon ko naukariyon par jaroor khatara aaega puraane logon ko jabaran ritaayar kiya jaega aur naee bhartiyaan band ho jaengee

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