#रिश्ते और संबंध

bolkar speaker

बुद्धिमान व्यक्ति का स्वभाव अक्सर रुक्ष क्यों होता है?

Buddhiman Vyakti Ka Svabhav Aksar Ruksh Kyun Hota Hai
shabnam khatun Bolkar App
Top Speaker,Level 33
सुनिए shabnam जी का जवाब
Student
2:19
हेलो शिवांशु आज आप का सवाल है कि बुद्धिमान व्यक्ति का स्वभाव अक्सर रुक क्यों होता है तो देखिए जो बुद्धिमान व्यक्ति जो होते हैं वह दूसरों की एक बहुत ही स्थान स्वभाव कम से कम बात करते हैं और किसी से लेना देना नहीं होता है आ मतलब सिंपल तरीके से ऐसा नहीं कि बहुत ही एडवांस भी जो है टैलेंट कभी भी अभी नहीं तो कभी इस चीज का घमंड नहीं होता है लेकिन कुछ व्यक्ति होते हैं कि जिनके मन में यह भावना होती कि नहीं मैं बहुत ही ज्यादा टैलेंटेड में बहुत ज्यादा बुद्धिमान हूं मैं औरों से अलग हूं मेरा कर यार मेरा फ्यूचर बहुत ही ब्राइट है इन लोगों के कैटेगरी तो नहीं है तो बहुत सारे लोगों के मन में यह भावना आ जाती है इसके वजह से वो लोग सो जाते हैं बहुत सारे लोग क्या किस चीज को मतलब यह सोचते हैं कि नहीं मैं भी सही हूं अगर मुझे कुछ अलग आता है मुझे कुछ ज्यादा अच्छे से समझा जा रहा है कि किसी की मदद करूं या फिर किसी और को भी मैं घर से अब वैसे नहीं जितना हो सके हेल्प करूं तो मैंने भी देखा है कि अगस्त में भी बहुत सारे लोग मतलब पढ़े-लिखे अच्छे समझदार होते अब जितना बार भी उसे डाउट क्लियर करवाने के लिए जाएंगे वह आराम से आपका क्लियर कर देंगे या नहीं सोचेंगे कि कहीं वह इंसान भी इंटेलिजेंट तो नहीं बन जाएगा जितना हो सके वह मदद करते हैं दूसरे की दो-चार बार अच्छे मार्क्स क्या किसी के आ जाते हैं मतलब मोदी पिक्चर्स बहुत ही तारीफ करने लगते हैं इंटेलिजेंट समझते हैं टीचर तो बहुत सारे लोगों के मन में घमंड आ जाता है वह सोचते हैं कि टीचर्स हर जगह से मुझे सेट कर रहे हैं तो उस चीज को समझना चाहिए कि हां मतलब आज मैं भी उभर रहा हूं लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि घमंड कर रहा है क्योंकि घमंड ऊपर वाली किसी का नहीं चाहते हैं अगर आपके अंदर घमंड हो जाता है तो आप हर चीज के बारे में सोचते कि मैं हर चीज कर सकता हूं या कर सकती हूं तो फिर आप किसी चीज में ज्यादा ध्यान नहीं देते और औरों की तरह मेहनत भी नहीं करते तो ऑपरेशन जब आपको किया जाता है जब आप इंटेलिजेंट आपके अंदर इतना टाइम गॉड ने आपको इतना छोटा लैंड दिया उसके लिए कभी कुछ खराब नहीं सोचना चाहिए और खराब नहीं करना चाहिए जो भी हमारे अंतर है उसको और भी ज्यादा बढ़ाना चाहिए जितना हो सके दूसरों की मदद करनी चाहिए ना कि घमंड सोच कर और मेरे अंदर बहुत ज्यादा टैलेंट है की सोच कर दूसरों को नीचा और घमंड अपने अंदर लाना चाहिए
Helo shivaanshu aaj aap ka savaal hai ki buddhimaan vyakti ka svabhaav aksar ruk kyon hota hai to dekhie jo buddhimaan vyakti jo hote hain vah doosaron kee ek bahut hee sthaan svabhaav kam se kam baat karate hain aur kisee se lena dena nahin hota hai aa matalab simpal tareeke se aisa nahin ki bahut hee edavaans bhee jo hai tailent kabhee bhee abhee nahin to kabhee is cheej ka ghamand nahin hota hai lekin kuchh vyakti hote hain ki jinake man mein yah bhaavana hotee ki nahin main bahut hee jyaada tailented mein bahut jyaada buddhimaan hoon main auron se alag hoon mera kar yaar mera phyoochar bahut hee brait hai in logon ke kaitegaree to nahin hai to bahut saare logon ke man mein yah bhaavana aa jaatee hai isake vajah se vo log so jaate hain bahut saare log kya kis cheej ko matalab yah sochate hain ki nahin main bhee sahee hoon agar mujhe kuchh alag aata hai mujhe kuchh jyaada achchhe se samajha ja raha hai ki kisee kee madad karoon ya phir kisee aur ko bhee main ghar se ab vaise nahin jitana ho sake help karoon to mainne bhee dekha hai ki agast mein bhee bahut saare log matalab padhe-likhe achchhe samajhadaar hote ab jitana baar bhee use daut kliyar karavaane ke lie jaenge vah aaraam se aapaka kliyar kar denge ya nahin sochenge ki kaheen vah insaan bhee intelijent to nahin ban jaega jitana ho sake vah madad karate hain doosare kee do-chaar baar achchhe maarks kya kisee ke aa jaate hain matalab modee pikchars bahut hee taareeph karane lagate hain intelijent samajhate hain teechar to bahut saare logon ke man mein ghamand aa jaata hai vah sochate hain ki teechars har jagah se mujhe set kar rahe hain to us cheej ko samajhana chaahie ki haan matalab aaj main bhee ubhar raha hoon lekin isaka matalab yah nahin ki ghamand kar raha hai kyonki ghamand oopar vaalee kisee ka nahin chaahate hain agar aapake andar ghamand ho jaata hai to aap har cheej ke baare mein sochate ki main har cheej kar sakata hoon ya kar sakatee hoon to phir aap kisee cheej mein jyaada dhyaan nahin dete aur auron kee tarah mehanat bhee nahin karate to opareshan jab aapako kiya jaata hai jab aap intelijent aapake andar itana taim god ne aapako itana chhota laind diya usake lie kabhee kuchh kharaab nahin sochana chaahie aur kharaab nahin karana chaahie jo bhee hamaare antar hai usako aur bhee jyaada badhaana chaahie jitana ho sake doosaron kee madad karanee chaahie na ki ghamand soch kar aur mere andar bahut jyaada tailent hai kee soch kar doosaron ko neecha aur ghamand apane andar laana chaahie

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बुद्धिमान व्यक्ति का स्वभाव अक्सर रुक्ष क्यों होता है?Buddhiman Vyakti Ka Svabhav Aksar Ruksh Kyun Hota Hai
पुरुषोत्तम सोनी Bolkar App
Top Speaker,Level 33
सुनिए पुरुषोत्तम जी का जवाब
साहित्यकार, समीक्षक, संपादक पूर्व अधिकारी विजिलेंस
0:58
आपको पटना टू बुद्धिमान व्यक्ति का स्वभाव अक्सर क्षेत्र में जातिगत जो बुद्धिमान होता है वह सच्चाई ईमानदारी वास्तविकता नैतिकता विनम्रता सहेजता और परलोक कुत्ता इन सब से उसके सानिध्य में रहता है और जब उसके सामने कोई अनाचार वाली कोई बात हो जाता है उसे अनाचार करने के लिए कोई बात कह दिया जाए जब कोई ऐसी बात जो सत्य है उसे कहा जाए कि वह हर भाषा को हर भाव को समझता है उस भाषा से अलग लाइन पर चलने के लिए कहा जाएगा और विश्वास दृढ़ निश्चय करने का सोच समझने के बाद ही निर्णय लेते हैं आपके विचार धारा जो उसके निर्णय करती है नाराज हो जाएगा
Aapako patana too buddhimaan vyakti ka svabhaav aksar kshetr mein jaatigat jo buddhimaan hota hai vah sachchaee eemaanadaaree vaastavikata naitikata vinamrata sahejata aur paralok kutta in sab se usake saanidhy mein rahata hai aur jab usake saamane koee anaachaar vaalee koee baat ho jaata hai use anaachaar karane ke lie koee baat kah diya jae jab koee aisee baat jo saty hai use kaha jae ki vah har bhaasha ko har bhaav ko samajhata hai us bhaasha se alag lain par chalane ke lie kaha jaega aur vishvaas drdh nishchay karane ka soch samajhane ke baad hee nirnay lete hain aapake vichaar dhaara jo usake nirnay karatee hai naaraaj ho jaega

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बुद्धिमान व्यक्ति का स्वभाव अक्सर रुक्ष क्यों होता है?Buddhiman Vyakti Ka Svabhav Aksar Ruksh Kyun Hota Hai
Manish Bhati Bolkar App
Top Speaker,Level 22
सुनिए Manish जी का जवाब
Life coach, professional counsellor & Relationship expert. Fitness & Motivational Coach
1:35
नमस्कार जैसा कि आपका क्वेश्चन बुद्धिमान व्यक्ति का स्वभाव अक्सर रोग क्यों होता है देखो अगर कहा जाए कि बुद्धिमान व्यक्ति का स्वभाव रूप सुल्तान ऐसा नहीं होता काफी बुद्धिमान होने के साथ-साथ धवन करते हैं तो उस से सन में ऐसा ही होता है मैं काफी मैंने आपको ऐसा बता दूं जो बिल्कुल बुद्धिमान है और इन नेचुरल इतना अच्छा फील करते हैं और अच्छी बात करते हैं बहुत अच्छा लेकिन खान के जाने के कमेंट कमेंट और गुरूर में इज्जत और ग्रुप में एक धागे भर का फर्क होता टिप्पणी करता है कि आप जहां इज्जत कमा रहे हो ग्रुप में अगर आप गुरुर भी कमा रहे हो कब शादी बुरा हुआ यह बुद्धिमान व्यक्ति के लिए बहुत मैन पॉइंट होता है काफी दिन है क्या करते हैं अपने ग्रुप गुरुर में इज्जत भी कमा लेते हैं लेकिन उनको ग्रुप भी साथ आता है तो यह बहुत लाइक करता माइनस पॉइंट रह जाता है इस वजह से उनका स्वभाव काफी चेंज हो जाए सुनील दत्त सलमान खान सर की मूवी एचडी सुल्तान उन्होंने इज्जत तो बहुत कमाई लोंग टाइम तक कितने वोट से जीते इंटरनेशनल नेशनल फिर उन्होंने एक छत के साथ गुरुर भी काम आया तो इस वजह से उन्होंने ड्रॉप यानी नीचे चले गया है फिर एकदम से फिर आगे बढ़े जीवन में भी यह प्रक्रिया लागू होती है तो हमें इसके अकॉर्डिंग चलना मैसेजेस धन्यवाद
Namaskaar jaisa ki aapaka kveshchan buddhimaan vyakti ka svabhaav aksar rog kyon hota hai dekho agar kaha jae ki buddhimaan vyakti ka svabhaav roop sultaan aisa nahin hota kaaphee buddhimaan hone ke saath-saath dhavan karate hain to us se san mein aisa hee hota hai main kaaphee mainne aapako aisa bata doon jo bilkul buddhimaan hai aur in nechural itana achchha pheel karate hain aur achchhee baat karate hain bahut achchha lekin khaan ke jaane ke kament kament aur guroor mein ijjat aur grup mein ek dhaage bhar ka phark hota tippanee karata hai ki aap jahaan ijjat kama rahe ho grup mein agar aap gurur bhee kama rahe ho kab shaadee bura hua yah buddhimaan vyakti ke lie bahut main point hota hai kaaphee din hai kya karate hain apane grup gurur mein ijjat bhee kama lete hain lekin unako grup bhee saath aata hai to yah bahut laik karata mainas point rah jaata hai is vajah se unaka svabhaav kaaphee chenj ho jae suneel datt salamaan khaan sar kee moovee echadee sultaan unhonne ijjat to bahut kamaee long taim tak kitane vot se jeete intaraneshanal neshanal phir unhonne ek chhat ke saath gurur bhee kaam aaya to is vajah se unhonne drop yaanee neeche chale gaya hai phir ekadam se phir aage badhe jeevan mein bhee yah prakriya laagoo hotee hai to hamen isake akording chalana maisejes dhanyavaad

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बुद्धिमान व्यक्ति का स्वभाव अक्सर रुक्ष क्यों होता है?Buddhiman Vyakti Ka Svabhav Aksar Ruksh Kyun Hota Hai
Shruti Yadav Bolkar App
Top Speaker,Level 33
सुनिए Shruti जी का जवाब
Student
1:09
सवाल है कि बुद्धिमान व्यक्ति का स्वभाव वक्तव्य क्यों होता है तू हर बार ऐसा नहीं होता है कुछ बुद्धिमान व्यक्ति सरल स्वभाव के भी होते हैं लेकिन कुछ बुद्धिमान व्यक्ति अपने बुद्धिमानी पर जब अभिमान करने लगे तो उनका स्वभाव रूप से होने लगता है कुछ इंटेलिजेंट लोग ऐसे होते जो अपने द्वारा की जाने वाली गलतियों को बिल्कुल भी ध्यान नहीं देते क्या ध्यान देते भैया तो बहुत कम ऐसा व्यक्ति इसलिए करते हैं क्योंकि उन्होंने अपने मन में अपनी है कि मैं एक ऐसे इंटेलिजेंट परसन की बनाई हुई होती है जो कभी गलती कर ही नहीं सकता जब तक जबकि रियालिटी यह है कि जब भी कोई इंसान सक्सेस की ओर बढ़ता है तो उसे मिस्टेक्स भी होती हैं एक सक्सेसफुल इंटेलिजेंट परसन अपनी गलतियों को स्वीकार करता है और उनसे कुछ सीख लेकर उन्हें दोबारा ना करने की मन में ठान कर आगे बढ़ता है जबकि पहले रिटायर्ड पर्सन अपनी गलतियों पर ध्यान ना दे कर आगे बढ़ता है एक ही गलती को बार-बार करके फेरिया बन जाता है अपनी गलतियों को नहीं देखना चाहता और किसी के सामने वाले की नहीं सुनना चाहता है क्योंकि वह सिर्फ अपने आप को ही बुद्धिमान मानता है ऐसे में उसका स्वभाव रुक क्यों जाता है
Savaal hai ki buddhimaan vyakti ka svabhaav vaktavy kyon hota hai too har baar aisa nahin hota hai kuchh buddhimaan vyakti saral svabhaav ke bhee hote hain lekin kuchh buddhimaan vyakti apane buddhimaanee par jab abhimaan karane lage to unaka svabhaav roop se hone lagata hai kuchh intelijent log aise hote jo apane dvaara kee jaane vaalee galatiyon ko bilkul bhee dhyaan nahin dete kya dhyaan dete bhaiya to bahut kam aisa vyakti isalie karate hain kyonki unhonne apane man mein apanee hai ki main ek aise intelijent parasan kee banaee huee hotee hai jo kabhee galatee kar hee nahin sakata jab tak jabaki riyaalitee yah hai ki jab bhee koee insaan sakses kee or badhata hai to use misteks bhee hotee hain ek saksesaphul intelijent parasan apanee galatiyon ko sveekaar karata hai aur unase kuchh seekh lekar unhen dobaara na karane kee man mein thaan kar aage badhata hai jabaki pahale ritaayard parsan apanee galatiyon par dhyaan na de kar aage badhata hai ek hee galatee ko baar-baar karake pheriya ban jaata hai apanee galatiyon ko nahin dekhana chaahata aur kisee ke saamane vaale kee nahin sunana chaahata hai kyonki vah sirph apane aap ko hee buddhimaan maanata hai aise mein usaka svabhaav ruk kyon jaata hai

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बुद्धिमान व्यक्ति का स्वभाव अक्सर रुक्ष क्यों होता है?Buddhiman Vyakti Ka Svabhav Aksar Ruksh Kyun Hota Hai
Sanjay Kumar Bolkar App
Top Speaker,Level 33
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𝔖𝔱𝔲𝔡𝔢𝔫𝔱 | 𝔈𝔡𝔲𝔠𝔞𝔱𝔦𝔬𝔫𝔦𝔰𝔱
0:25
आमतौर पर तो दिखा गया है कि जो बुद्धिमान व्यक्ति होते हैं वह काफी साल ही होते हैं काफी शांत होते हैं थोड़े हंसमुख स्वभाव के होते हैं और किसी भी बात को बहुत ज्यादा गंभीरता से नहीं लेते हैं लेकिन अगर आप ऐसा कह रहे हैं कि आमतौर पर ऐसा देखा गया है कि कुछ होता है और उस इसलिए हो सकता है कि वह जो उसका मेंटल लेवल है थोड़ा ज्यादा होता है और उसके आसपास के जो लोग होते हैं वह स्पष्ट कर देते होंगे इस वजह से होता होगा धन्यवाद
Aamataur par to dikha gaya hai ki jo buddhimaan vyakti hote hain vah kaaphee saal hee hote hain kaaphee shaant hote hain thode hansamukh svabhaav ke hote hain aur kisee bhee baat ko bahut jyaada gambheerata se nahin lete hain lekin agar aap aisa kah rahe hain ki aamataur par aisa dekha gaya hai ki kuchh hota hai aur us isalie ho sakata hai ki vah jo usaka mental leval hai thoda jyaada hota hai aur usake aasapaas ke jo log hote hain vah spasht kar dete honge is vajah se hota hoga dhanyavaad

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बुद्धिमान व्यक्ति का स्वभाव अक्सर रुक्ष क्यों होता है?Buddhiman Vyakti Ka Svabhav Aksar Ruksh Kyun Hota Hai
Ram Kumawat  Bolkar App
Top Speaker,Level 11
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Unknown
2:38
वाले बुद्धिमान व्यक्ति स्वभाव अक्सर रुक क्यों हो जाता है तो आखिर बात होती है कि बुद्धिमान लोगों में खुशी सबसे दुर्बल चीज होती है यह बात पहले ही आपको अजीब लगे लेकिन हमारे समाज में अक्सर दादा बिटिया की ओर बढ़ने की दबाव बनाए जाते हैं बढ़िया जॉब बढ़िया कार बढ़िया घर और क्या नहीं सभी बढ़िया होना चाहिए बुद्धिमान लोगों पर इस बढ़िया-बढ़िया का दबाव पैदा होता है वाकई में भी एक दिशा में सबसे तेजी में बढ़ते भी नहीं है लेकिन यह लोग सबसे ज्यादा दुखी होते हैं इन्हें समझदार लोगों के दुखी के थे संभावित कारण होते हैं ऐसे लोग ज्यादा सोचते हैं जो लोग ज्यादा समझदार होते हैं वह ज्यादा सोचते हैं और उसकी समस्याओं को भी स्थिति के बारे में साधारण लोगों के जायदा बातें सोच सकते थे इसके चलते हैं दिमाग में बहुत सारी बातें होती होते का चाल बनता है दूसरा वह हमेशा जीवन में एक बड़े उद्देश्य की तलाश में रहते हैं जो लोग बुद्धिमान होते वह जीवन से संतुष्ट नहीं हो हमेशा बेहतर की तलाश में इतने चाहिए संभावना जीवन में जुड़े हो या रोजगार से हो या खास सावधान चीजों की बातों से उन्हें बोरियत होती है क्योंकि उन्हें कुछ नया जानने करने की समझ होती है ना वह हमेशा काम की बात करते हैं वह किसी ऐसे ऐसे इंसान की मुश्किल से अपने आसपास बातें जो उन्हें अच्छे से सुने और समझे क्योंकि वह ऐसे खुद होते हैं तो वह ऐसा दूसरों के साथ करते हैं जब दूसरे उनके साथ ऐसा नहीं करते तुमको बुरा लगता है इसीलिए दुखी हो जाते हैं उन्हें भी स्टेशन और गहराई की रात जो सबके बस की बात नहीं है सभी ने उन्हें बहुत ज्यादा अपेक्षा करते हैं जो बुद्धिमान लोग होते हैं उनकी उनसे ज्यादा अपेक्षा करते हैं लोग और खुद को भी बड़ी कुत्ता समझदारी से इतना ज्यादा लगा होता है कि वह अपना मूल्यांकन करते हुए भी खुद को बहुत ज्यादा है मानते साथ ही खुद के बारे में सोचते हो जाए दा वक्त भी खर्च करते हैं जाहिर सी बात है कि जितना कायदा अपने बारे में सोचते हैं उतनी ही जायदा उन्हें अपने व्यक्तित्व के बारे में बुरा महसूस होने लगता है और उनके दुख भी बड़ी वजह बन सकते समझदार लोग मानसिक बीमारी की संभावना ज्यादा रहती है एक स्टडी के मुताबिक समझदार लोगों को मनोवैज्ञानिक बीमारी खतरा होता है अक्सर पाया गया बाइपोलर डिसऑर्डर लोगों ने होने वाले के प्लाट या फिर कोई दूसरा ऐसी दिमागी डिसऑर्डर समझदार लोगों के साथ बहुत ज्यादा पाए जाते दोस्तों धन्यवाद
Vaale buddhimaan vyakti svabhaav aksar ruk kyon ho jaata hai to aakhir baat hotee hai ki buddhimaan logon mein khushee sabase durbal cheej hotee hai yah baat pahale hee aapako ajeeb lage lekin hamaare samaaj mein aksar daada bitiya kee or badhane kee dabaav banae jaate hain badhiya job badhiya kaar badhiya ghar aur kya nahin sabhee badhiya hona chaahie buddhimaan logon par is badhiya-badhiya ka dabaav paida hota hai vaakee mein bhee ek disha mein sabase tejee mein badhate bhee nahin hai lekin yah log sabase jyaada dukhee hote hain inhen samajhadaar logon ke dukhee ke the sambhaavit kaaran hote hain aise log jyaada sochate hain jo log jyaada samajhadaar hote hain vah jyaada sochate hain aur usakee samasyaon ko bhee sthiti ke baare mein saadhaaran logon ke jaayada baaten soch sakate the isake chalate hain dimaag mein bahut saaree baaten hotee hote ka chaal banata hai doosara vah hamesha jeevan mein ek bade uddeshy kee talaash mein rahate hain jo log buddhimaan hote vah jeevan se santusht nahin ho hamesha behatar kee talaash mein itane chaahie sambhaavana jeevan mein jude ho ya rojagaar se ho ya khaas saavadhaan cheejon kee baaton se unhen boriyat hotee hai kyonki unhen kuchh naya jaanane karane kee samajh hotee hai na vah hamesha kaam kee baat karate hain vah kisee aise aise insaan kee mushkil se apane aasapaas baaten jo unhen achchhe se sune aur samajhe kyonki vah aise khud hote hain to vah aisa doosaron ke saath karate hain jab doosare unake saath aisa nahin karate tumako bura lagata hai iseelie dukhee ho jaate hain unhen bhee steshan aur gaharaee kee raat jo sabake bas kee baat nahin hai sabhee ne unhen bahut jyaada apeksha karate hain jo buddhimaan log hote hain unakee unase jyaada apeksha karate hain log aur khud ko bhee badee kutta samajhadaaree se itana jyaada laga hota hai ki vah apana moolyaankan karate hue bhee khud ko bahut jyaada hai maanate saath hee khud ke baare mein sochate ho jae da vakt bhee kharch karate hain jaahir see baat hai ki jitana kaayada apane baare mein sochate hain utanee hee jaayada unhen apane vyaktitv ke baare mein bura mahasoos hone lagata hai aur unake dukh bhee badee vajah ban sakate samajhadaar log maanasik beemaaree kee sambhaavana jyaada rahatee hai ek stadee ke mutaabik samajhadaar logon ko manovaigyaanik beemaaree khatara hota hai aksar paaya gaya baipolar disordar logon ne hone vaale ke plaat ya phir koee doosara aisee dimaagee disordar samajhadaar logon ke saath bahut jyaada pae jaate doston dhanyavaad

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