#खेल कूद

shabnam khatun Bolkar App
Top Speaker,Level 33
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Student
1:52
अरे अभी तो आज आपका सवाल है कि आजकल के बच्चे बच्चियों ने गुड्डे गुड़ियों और खिलौने से खेलना बंद क्यों कर दिया है कि हम अपने आसपास जो भी चीज देखते हैं जिस तरह से भी माहौल होता है उसी तरह से हमारे दिमाग पर भी इसका असर पड़ता है पहले क्या था कि आपको नए-नए डॉल्स और फिर जो भी टॉय खिलौना वह सब देखने के लिए मिलता था तो बच्चे उसी से ही खेलते थे लेकिन अभी आप देखिए फोन आ गया है कंप्यूटर लैपटॉप इतने सारे वीडियो गेम सारे लोग यूज़ करते हैं और खेलते सबकी मदद दिमाग में सिर्फ यही चलता है पब्जी फ्री फायर बहुत सारे वीडियो गेम तो अब लोग जितना सुनते हैं जितना देखते हैं उसे चीज का असर पड़ता है तो लोग सब चीजों में ज्यादा इंगेज हो चुके हैं यह सब गेम उन्हें ज्यादा पसंद है गुड्डे गुड़ियों का खेल अब उन्हें मतलब हंसी आती है अच्छा नहीं लगता है ऐसा लगता ही नहीं अब हमारे जमाने में ऐसा हो गया कैसा हो गया जिस तरह से माहौल होता है इंसान उसी तरह से हर चीजों को पसंद करता है अगर आपके सामने दिखे वीडियो गेम्स रहेगा और $1 आएगा तो हर एक इंसान वीडियो गेम से खेलना पसंद करके बहुत एक्टिव अच्छा बहुत ही अच्छा लगता है कि आप मार रहे हैं किसी को छूट कर रहे जंगल जा रहे खेलना पहले के लोग उसे बहुत पसंद करते थे हिसाब से वह सब का असर है जिस वजह से लोग आफ डॉल्स और खिलौने को पसंद नहीं करते
Are abhee to aaj aapaka savaal hai ki aajakal ke bachche bachchiyon ne gudde gudiyon aur khilaune se khelana band kyon kar diya hai ki ham apane aasapaas jo bhee cheej dekhate hain jis tarah se bhee maahaul hota hai usee tarah se hamaare dimaag par bhee isaka asar padata hai pahale kya tha ki aapako nae-nae dols aur phir jo bhee toy khilauna vah sab dekhane ke lie milata tha to bachche usee se hee khelate the lekin abhee aap dekhie phon aa gaya hai kampyootar laipatop itane saare veediyo gem saare log yooz karate hain aur khelate sabakee madad dimaag mein sirph yahee chalata hai pabjee phree phaayar bahut saare veediyo gem to ab log jitana sunate hain jitana dekhate hain use cheej ka asar padata hai to log sab cheejon mein jyaada ingej ho chuke hain yah sab gem unhen jyaada pasand hai gudde gudiyon ka khel ab unhen matalab hansee aatee hai achchha nahin lagata hai aisa lagata hee nahin ab hamaare jamaane mein aisa ho gaya kaisa ho gaya jis tarah se maahaul hota hai insaan usee tarah se har cheejon ko pasand karata hai agar aapake saamane dikhe veediyo gems rahega aur $1 aaega to har ek insaan veediyo gem se khelana pasand karake bahut ektiv achchha bahut hee achchha lagata hai ki aap maar rahe hain kisee ko chhoot kar rahe jangal ja rahe khelana pahale ke log use bahut pasand karate the hisaab se vah sab ka asar hai jis vajah se log aaph dols aur khilaune ko pasand nahin karate

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पुरुषोत्तम सोनी Bolkar App
Top Speaker,Level 33
सुनिए पुरुषोत्तम जी का जवाब
साहित्यकार, समीक्षक, संपादक पूर्व अधिकारी विजिलेंस
1:49
पहले के समय में बच्चों को इतना बड़ा हो जाने देते ताकि उस में समझ आ जाए उनके ऊपर पढ़ाई का वर्णन नहीं लादा जाता था और अब तो जो मां बाप ने नौकरी करने वाली हूं चाहे तो कितनी जल्दी-जल्दी बच्चा जो है बल्कि स्कूल चला जाए वहां से जब तक रहेगी तब तक वह अपने ऑफिस से आ जाएंगे इसलिए वह अपने बदन को जान छुड़ाने के लिए बच्चे को स्कूल भेज देते हैं और वह बच्चा छोटा 3 साल के बच्चे को देवरा पढ़ाते हैं तो उसका मन कितना पढ़ने में लगेगा एक कच्चे घड़े में जबरदस्ती का पॉटी करके तो पहले के जमाने में क्या होता था कि बच्चे हम हम लोग जब पड़े हैं तो पांच-छह साल की जब आओगे तब हमने पट्टी हड्डी लेकर कि स्कूल जाना शुरू किया था लेकिन अब 3 साल के बच्चे को कॉपी किताब सिखाती उसको सोचा भी नहीं डाला जाता है तो इस तरह से बच्चे को पर यह अनावश्यक रूप से जो प्रसाद शुरू से में डाला जाता है इसे बहुत से बचे डिप्रेशन में आ जाते हैं वह पढ़ाई के मतलब आजकल पढ़ाई की खेल खेल की पढ़ाई होती है इस तरह के इस तरह की पढ़ाई के हाथों में नहीं हो पाते लेकिन बच्चे कम उम्र में और स्कूल जाना शुरु कर देते हैं और उनके ऊपर दिमाग में ज्यादा शिक्षक डालने लग बच्चों को मारना पीटना शुरू कर दे दो बच्चे भाई भी सोने लगते हैं बच्चे जिद्दी हो जाते हो कि पढ़ाई से उनका मोहभंग हो जाता है इसलिए बच्चे को कम से कम 5 साल की अवस्था तक बिल्कुल स्वतंत्र रहने देना चाहिए उनके ऊपर पढ़ाई लड़ाई का कोई भी बॉर्डर नहीं डालना चाहिए माता-पिता को इतना स्वार्थी नहीं बनना चाहिए और इस कारण से जब उनके पास टाइम ही नहीं हो तो बच्चे खिलौने से खेलना बंद ही कर देंगे बच्चे खिलौने से तब खेले कि जब उनके पास समय होगा तो समय ही नहीं होगा स्कूल से पड़ गया तो मां-बाप पढ़ाने लगते हो घर में बैठो ले बेटा एबीसीडी पढ़ो खिलौनों से खेलने का टाइम ही नहीं खिलौना जानते हैं सब कुछ
Pahale ke samay mein bachchon ko itana bada ho jaane dete taaki us mein samajh aa jae unake oopar padhaee ka varnan nahin laada jaata tha aur ab to jo maan baap ne naukaree karane vaalee hoon chaahe to kitanee jaldee-jaldee bachcha jo hai balki skool chala jae vahaan se jab tak rahegee tab tak vah apane ophis se aa jaenge isalie vah apane badan ko jaan chhudaane ke lie bachche ko skool bhej dete hain aur vah bachcha chhota 3 saal ke bachche ko devara padhaate hain to usaka man kitana padhane mein lagega ek kachche ghade mein jabaradastee ka potee karake to pahale ke jamaane mein kya hota tha ki bachche ham ham log jab pade hain to paanch-chhah saal kee jab aaoge tab hamane pattee haddee lekar ki skool jaana shuroo kiya tha lekin ab 3 saal ke bachche ko kopee kitaab sikhaatee usako socha bhee nahin daala jaata hai to is tarah se bachche ko par yah anaavashyak roop se jo prasaad shuroo se mein daala jaata hai ise bahut se bache dipreshan mein aa jaate hain vah padhaee ke matalab aajakal padhaee kee khel khel kee padhaee hotee hai is tarah ke is tarah kee padhaee ke haathon mein nahin ho paate lekin bachche kam umr mein aur skool jaana shuru kar dete hain aur unake oopar dimaag mein jyaada shikshak daalane lag bachchon ko maarana peetana shuroo kar de do bachche bhaee bhee sone lagate hain bachche jiddee ho jaate ho ki padhaee se unaka mohabhang ho jaata hai isalie bachche ko kam se kam 5 saal kee avastha tak bilkul svatantr rahane dena chaahie unake oopar padhaee ladaee ka koee bhee bordar nahin daalana chaahie maata-pita ko itana svaarthee nahin banana chaahie aur is kaaran se jab unake paas taim hee nahin ho to bachche khilaune se khelana band hee kar denge bachche khilaune se tab khele ki jab unake paas samay hoga to samay hee nahin hoga skool se pad gaya to maan-baap padhaane lagate ho ghar mein baitho le beta ebeeseedee padho khilaunon se khelane ka taim hee nahin khilauna jaanate hain sab kuchh

Archana Mishra Bolkar App
Top Speaker,Level 22
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Housewife
0:41
स्वागत है आपका आपका पेट में आजकल के बच्चों ने गुड्डी गुड़िया और खिलौने से खेलना क्यों बंद कर दिया है तो फ्रेंड साथ कल जिस तरह से मोबाइल का जमाना आ गया है मोबाइल कंप्यूटर लैपटॉप बस पच्चीसी में लगे रहते हैं और गेम वगैरा जो है वह मोबाइल में खेल लेते हैं तथा गुड्डू कुछ नहीं खेलते हैं उनके लाइफ इंटरनेट पर बिल्कुल बिजी हो गई है इस तरह के खेल नहीं खेलते हैं बल्कि इस तरह के खेल खेलना चाहिए पर बच्चे आजकल मोबाइल लैपटॉप में ही लगे रहते हैं बस उसी में खेलते हैं इसलिए और कुछ बच्चे टीवी भी देखते हैं उसमें लगे रहते हैं तो वे गुड्डू करो
Svaagat hai aapaka aapaka pet mein aajakal ke bachchon ne guddee gudiya aur khilaune se khelana kyon band kar diya hai to phrend saath kal jis tarah se mobail ka jamaana aa gaya hai mobail kampyootar laipatop bas pachcheesee mein lage rahate hain aur gem vagaira jo hai vah mobail mein khel lete hain tatha guddoo kuchh nahin khelate hain unake laiph intaranet par bilkul bijee ho gaee hai is tarah ke khel nahin khelate hain balki is tarah ke khel khelana chaahie par bachche aajakal mobail laipatop mein hee lage rahate hain bas usee mein khelate hain isalie aur kuchh bachche teevee bhee dekhate hain usamen lage rahate hain to ve guddoo karo

Naayank Bolkar App
Top Speaker,Level 33
सुनिए Naayank जी का जवाब
College
0:44
नमस्कार बताओ आजकल के बच्चे बच्चे होने गुड्डे गुड़िया और खिलौने से खेलना बंद क्यों कर दिया तुम गुड्डे गुड़िया का तो कम इस्तेमाल होता लेकिन खिलौने तो आप भी खेले जाते हैं खिलौना में ज्यादातर बच्चे डॉक्टर डॉक्टर की जरूरत होती है या ऐसी छोटे-मोटे जो खिलौने होता है स्टॉप पर होते उनका तब इस्तेमाल होता है समय के साथ टेक्नोलॉजी के बदलाव के साथ खिलौना में भी फर्क आता ही है जैसे पहले लकड़ी के खिलौनों से खेला जाता था यह मिट्टी के खिलौने होते थे अब वह प्लास्टिक के खिलौने बन गए थे बाद में और अब वह डिजिटल पुराने हो चुके गेम खेलना मोबाइल में गेम खेलना है वीडियो गेम खेलना है और टेक्नोलॉजी के परिवर्तन के कारण यह सब हो रहा है धन्यवाद
Namaskaar batao aajakal ke bachche bachche hone gudde gudiya aur khilaune se khelana band kyon kar diya tum gudde gudiya ka to kam istemaal hota lekin khilaune to aap bhee khele jaate hain khilauna mein jyaadaatar bachche doktar doktar kee jaroorat hotee hai ya aisee chhote-mote jo khilaune hota hai stop par hote unaka tab istemaal hota hai samay ke saath teknolojee ke badalaav ke saath khilauna mein bhee phark aata hee hai jaise pahale lakadee ke khilaunon se khela jaata tha yah mittee ke khilaune hote the ab vah plaastik ke khilaune ban gae the baad mein aur ab vah dijital puraane ho chuke gem khelana mobail mein gem khelana hai veediyo gem khelana hai aur teknolojee ke parivartan ke kaaran yah sab ho raha hai dhanyavaad

anuj gothwal Bolkar App
Top Speaker,Level 22
सुनिए anuj जी का जवाब
9828597645
1:22
आजकल के बच्चे बच्चियों ने गुड्डा गुड्डी खेल ना इसलिए बंद कर दिया कि जो लोग मतलब है कि मतलब जिसने भी जो भी गर्भवती हाजी से बच्चे को जन्म देती है जो पाली ज्यादा मोबाइल वाले के समय में ज्यादा कुछ कार्य करते थे घर का कार्यकर्ता करके सांप का जो भी मतलब कुछ करती थी तो उसी आधार पर वह बच्चे पर भी प्रभाव पड़ता था तथा आज के समय में वह मोबाइल ज्यादा चलाती है तो इसी कारण से जो प्रभाव व अपने बच्चों पर भी पड़ेगा तो बच्चों पर पड़ने के कारण वह बच्चा बोल नहीं पाता इस को मोबाइल देने पर बात जल्दी ही खुश हो जाता है यह कहीं देखने को मिला है मुझे जगह अच्छा देखा कि कई लोग ऐसे हैं जो मोबाइल चलाते थे इसके बड़े होने के बाद जब बच्चा एक डेढ़ साल होता तो मोबाइल लेने लग जाता है जब उसे लेने के बाद ही वह खुश हो पाता था ना कि और कोई चीज दे तो उसको भगा देगा यह सब अपने घर की परवरिश के अनुसार हो रीति रिवाज के अनुसार घरेलू कार्य के अनुसार ही होता है
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itishree Bolkar App
Top Speaker,Level 33
सुनिए itishree जी का जवाब
Unknown
1:18
आजकल के बच्चे बच्चों ने गुड्डे गुड़ियों का और खिलौने से खेलना बंद क्यों कर दिया है देख जमाना आगे बढ़ रहा है उस समय बचपना था जो कि हम गुड्डू को टीम से खेलते हैं उनकी शादी कराते हैं बहुत सारे बच्चे मिलकर हम फ्रेंड्स के साथ हम बहुत सारे खेल खेलते हैं बहुत सारे खिलौना थे हमारे पर अभी जो बच्चे हैं जिसे बड़े होते खिलौना तो उनको होते ही खेलना तो होती है पर पढ़ाई ज्यादा उनके मा स्टार्ट कर देना जब वह 2 साल का हो जाता है तो उनको सब सिखाते हैं पढ़ाई कैसे उसको डाल देते हैं तो गुड्डी का खेल से बंद हो गया और मोबाइल का जो है तो अगर हम अभी टाइम मिलता है तो हम मोबाइल से गेम खेलते हैं या कुछ यूट्यूब वगैरह या फेसबुक सोशल मीडिया में एक्टिव रहते हैं हमारा बच्चा हमको ही देखता है तो उन्हें मोबाइल का एक शौक हो जाता है मोबाइल में यूट्यूब में कार्टून देखना गलत हो गया है बच्चों का तो इसीलिए यह सब उनके आदत छूट जाते हैं गुड्डी वीडियो को खेलना चाहिए
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Dr.Nitin Pawar, D.M S.(Management) Bolkar App
Top Speaker,Level 33
सुनिए Dr.Nitin जी का जवाब
Kisan,Journalist,Marathi Writer, Social Worker,Political Leader.
4:32
आजकल के बच्चे बच्चे आने बच्चों ने गुड्डे गुड़िया और खिलौने से खेलना बंद बंद क्यों कर दिया है इसका कारण है कि उनके हाथ में अब मोबाइल आ गए हैं गया है जब पिछले जनरेशन के जो माता-पिता थे उनके सामने उनके पास मोबाइल जैसी चीज और उसे कुछ खिलौने नहीं थे इसलिए वह ने पारंपरिक खिलौने जो थे वह बच्चों को दे दी थी अब जैसी टेक्नोलॉजी बदलती है वैसे सामाजिक स्थिति अभी बदलती है आर्थिक स्थिति अभी बदलती है और वस्तुओं के निर्माण में डेवलपमेंट होता है तो नई-नई उसके निर्माण की जाती है अब वह छोटे-छोटे चीनी बनावट के उसूलों पहले हम बूढ़े घुमाया करते थे तो उस तरीके का वह एक छोटा खिलौना ची नहीं होता है उससे थोड़ा सा अपने वोटों से घुमाया तो घूमने लगता है उस पर कई अलग-अलग चित्र ड्रैगन के चित्र आदि रहते हैं तो ऐसे कुछ नए खिलौने आए हैं इसके साथ-साथ कुछ चीजें खरीदने के बाद जैसे कोई स्टिकर मिलता है कोई खाने की चीज भी अगर दुकान से लेते हैं तो उसके साथ कोई स्टिकर जैसी चीज भी मिलती है तो बच्चे जाकर वह उस चीज के लिए वह वस्तु खाने को लिए खाने के लिए लेती है और उनसे खेलती है तो यह उसका कारण यह है कि समाज में परिवर्तन निश्चित होता है हर चीज में परिवर्तन होता है परिवर्तन एक बहुत मूलभूत नियम है इसे भगवान गौतम बुद्ध ने पहले बताया था और आज वैज्ञानिक रूप से सोचो रहा है कि हर चीज हर सेकंड के हजार हुए हिस्से मैं बस में भी बदल रही है इसलिए ऐसे बदला होते रहेंगे और भी जब टेक्नोलॉजी बढ़ जाएगी तो और भी दूसरे खिलौने आ जाएंगे और इस तरह की गने इंसान अपने आपको ज्यादा से ज्यादा सुरक्षित और संपन्ना बनाने का प्रयास करेगा और ज्यादा से ज्यादा उम्र इंसान की कैसे बनी रहेगी इसका भी प्रयास करेगा तो आयुर मान भी जा से ज्यादा से ज्यादा करने करने का विज्ञान का प्रयास रहेगा तो इसे आयुर मन भी बड़ा है आधुनिक मेडिकल साइंस के डेवलपमेंट के बाद धन्यवाद
Aajakal ke bachche bachche aane bachchon ne gudde gudiya aur khilaune se khelana band band kyon kar diya hai isaka kaaran hai ki unake haath mein ab mobail aa gae hain gaya hai jab pichhale janareshan ke jo maata-pita the unake saamane unake paas mobail jaisee cheej aur use kuchh khilaune nahin the isalie vah ne paaramparik khilaune jo the vah bachchon ko de dee thee ab jaisee teknolojee badalatee hai vaise saamaajik sthiti abhee badalatee hai aarthik sthiti abhee badalatee hai aur vastuon ke nirmaan mein devalapament hota hai to naee-naee usake nirmaan kee jaatee hai ab vah chhote-chhote cheenee banaavat ke usoolon pahale ham boodhe ghumaaya karate the to us tareeke ka vah ek chhota khilauna chee nahin hota hai usase thoda sa apane voton se ghumaaya to ghoomane lagata hai us par kaee alag-alag chitr draigan ke chitr aadi rahate hain to aise kuchh nae khilaune aae hain isake saath-saath kuchh cheejen khareedane ke baad jaise koee stikar milata hai koee khaane kee cheej bhee agar dukaan se lete hain to usake saath koee stikar jaisee cheej bhee milatee hai to bachche jaakar vah us cheej ke lie vah vastu khaane ko lie khaane ke lie letee hai aur unase khelatee hai to yah usaka kaaran yah hai ki samaaj mein parivartan nishchit hota hai har cheej mein parivartan hota hai parivartan ek bahut moolabhoot niyam hai ise bhagavaan gautam buddh ne pahale bataaya tha aur aaj vaigyaanik roop se socho raha hai ki har cheej har sekand ke hajaar hue hisse main bas mein bhee badal rahee hai isalie aise badala hote rahenge aur bhee jab teknolojee badh jaegee to aur bhee doosare khilaune aa jaenge aur is tarah kee gane insaan apane aapako jyaada se jyaada surakshit aur sampanna banaane ka prayaas karega aur jyaada se jyaada umr insaan kee kaise banee rahegee isaka bhee prayaas karega to aayur maan bhee ja se jyaada se jyaada karane karane ka vigyaan ka prayaas rahega to ise aayur man bhee bada hai aadhunik medikal sains ke devalapament ke baad dhanyavaad

Meghsinghchouhan Bolkar App
Top Speaker,Level 33
सुनिए Meghsinghchouhan जी का जवाब
student
0:41
पाने की आजकल के बच्चे बच्चियों ने उड़े वीडियो और खिलौनों से खेलना बंद क्यों कर दी है तू आजकल हर किसी के पास स्मार्टफोन है तू आजकल ज्यादातर ज्यादातर बच्चे अपने अधिक समय मोबाइल फोन पर भी चाहते हैं अगर उससे टाइम मिलता है तो टीवी पर डोरेमोन नोबिता ऐसे जो भी है वह देखने में टाइम पास कर देते हैं और इसको खेलने का टाइम ही नहीं मिलता गुड्डा गुड्डी वीडियो के साथ धन्यवाद
Paane kee aajakal ke bachche bachchiyon ne ude veediyo aur khilaunon se khelana band kyon kar dee hai too aajakal har kisee ke paas smaartaphon hai too aajakal jyaadaatar jyaadaatar bachche apane adhik samay mobail phon par bhee chaahate hain agar usase taim milata hai to teevee par doremon nobita aise jo bhee hai vah dekhane mein taim paas kar dete hain aur isako khelane ka taim hee nahin milata gudda guddee veediyo ke saath dhanyavaad

Dinesh Ji Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए Dinesh जी का जवाब
Ji
2:27
सवाल पूछा गया है कि आजकल के बच्चे बच्चों ने गुड्डे गुड़ियों और खिलौनों से खेलना क्यों बंद कर दिया है बहुत ही अच्छा प्रश्न है तो अभी का वक्त पूर्ण रूप से बदल चुका है पहले जितने भी लोग थे अमीर हो या गरीब हो वह लोग अपने बच्चों को हमेशा खिलौने ही देते थे और गुड्डे गुड़िया ही देते थे और जो उनको मिल जाता था जो हमको मिल जाता था उनसे वह लोग रस पैदा कर देते थे या उसका इंटरेस्ट जो होता है उन सब में वह लग जाता था पर आज वक्त ऐसा आ गया है कि जो अमीर लोग हैं वह अपने बच्चों को ज्यादा होशियार बनाने के चक्कर में उनको आईपैड उनको मोबाइल देते हैं और उसमें उनका इंटरेस्ट बढ़ जाता है और जो बच्चे होते हैं वह बिल्कुल ही मासूम कली की तरह होते हैं वह देखा देखी मैं ज्यादा देखते हैं कि दूसरे के पास जो दूसरा इंटरेस्ट ले रहा है जिस चीज में वह भी उसी चीज में ही पूछ लेंगे अगर उनके माता-पिता या उनके आस पड़ोस में जो बच्चे हैं वह पूजा-पाठ में इंटरेस्ट लेंगे तो वह भी पूजा पाठ में इंटरेस्ट लेंगे अगर आईपैड मोबाइल में इंटरेस्ट ले रहे हैं उनके आसपास में लोग तो वह भी अपना इंटरनेट और मोबाइल में ही लगाएंगे तो बच्चे जो होते हैं बिल्कुल नाजुक मोम की तरह होते हैं जिनको जिसमें उनको डालना चाहते हैं हम लोग डाल सकते हैं तो हो सके तो ऐसा एनवायरमेंट पैदा होना चाहिए कि हम लोग उनको अच्छे संस्कार दें और आजू बाजू के जो लोग हैं उनको भी अच्छी चीजों में लगा है ना कि मोबाइलों में लगाएं परंतु थोड़ा वक्त अभी बदल चुका है और उनके गुड्डे गुड़ियों का जो रस है वह पूर्ण रुप से आजकल देखा जा रहा है कि वह पूर्ण रूप से समाप्त हो चुका है और अब उनका जो रस है जो इंटरेस्ट है वह दूसरों की देखा देखी में ही मोबाइल में और आधुनिक उपकरण जितने भी हैं गैजेट्स होते हैं जिनको कहा जाता है उन सब में लग गया है एक छोटा सा रीजन यह भी है कि उनके मुझे माता-पिता हैं घर के जो बड़े बुजुर्ग हैं और जो बाकी सदस्य हैं वह भी अपना जो ध्यान है अपने मोबाइल में ही लगाए रहते हैं इसलिए थोड़ा सा चेंज करने की जरूरत है खुद को बदलने की जरूरत है एनवायरमेंट नहीं बदलेगा पर कम से कम अपने घर को हम लोग बदल सकते हैं उम्मीद करता हूं यह सवाल का जवाब आपको संतुष्टि देगा अगर हां तो अगले साल के साथ मुझसे जरूर जुड़े धन्यवाद
Savaal poochha gaya hai ki aajakal ke bachche bachchon ne gudde gudiyon aur khilaunon se khelana kyon band kar diya hai bahut hee achchha prashn hai to abhee ka vakt poorn roop se badal chuka hai pahale jitane bhee log the ameer ho ya gareeb ho vah log apane bachchon ko hamesha khilaune hee dete the aur gudde gudiya hee dete the aur jo unako mil jaata tha jo hamako mil jaata tha unase vah log ras paida kar dete the ya usaka intarest jo hota hai un sab mein vah lag jaata tha par aaj vakt aisa aa gaya hai ki jo ameer log hain vah apane bachchon ko jyaada hoshiyaar banaane ke chakkar mein unako aaeepaid unako mobail dete hain aur usamen unaka intarest badh jaata hai aur jo bachche hote hain vah bilkul hee maasoom kalee kee tarah hote hain vah dekha dekhee main jyaada dekhate hain ki doosare ke paas jo doosara intarest le raha hai jis cheej mein vah bhee usee cheej mein hee poochh lenge agar unake maata-pita ya unake aas pados mein jo bachche hain vah pooja-paath mein intarest lenge to vah bhee pooja paath mein intarest lenge agar aaeepaid mobail mein intarest le rahe hain unake aasapaas mein log to vah bhee apana intaranet aur mobail mein hee lagaenge to bachche jo hote hain bilkul naajuk mom kee tarah hote hain jinako jisamen unako daalana chaahate hain ham log daal sakate hain to ho sake to aisa enavaayarament paida hona chaahie ki ham log unako achchhe sanskaar den aur aajoo baajoo ke jo log hain unako bhee achchhee cheejon mein laga hai na ki mobailon mein lagaen parantu thoda vakt abhee badal chuka hai aur unake gudde gudiyon ka jo ras hai vah poorn rup se aajakal dekha ja raha hai ki vah poorn roop se samaapt ho chuka hai aur ab unaka jo ras hai jo intarest hai vah doosaron kee dekha dekhee mein hee mobail mein aur aadhunik upakaran jitane bhee hain gaijets hote hain jinako kaha jaata hai un sab mein lag gaya hai ek chhota sa reejan yah bhee hai ki unake mujhe maata-pita hain ghar ke jo bade bujurg hain aur jo baakee sadasy hain vah bhee apana jo dhyaan hai apane mobail mein hee lagae rahate hain isalie thoda sa chenj karane kee jaroorat hai khud ko badalane kee jaroorat hai enavaayarament nahin badalega par kam se kam apane ghar ko ham log badal sakate hain ummeed karata hoon yah savaal ka javaab aapako santushti dega agar haan to agale saal ke saath mujhase jaroor jude dhanyavaad

Anand Patel Bolkar App
Top Speaker,Level 44
सुनिए Anand जी का जवाब
Mathematics Teacher
0:40
आजकल के बच्चे बच्चे हैं गुड्डे गुड़ियों और खिलौनों से खेलना बंद क्यों कर दिया है तुझे कि आजकल का जमाना है दोस्तों योग है यह बहुत मॉडर्न है तकनीकी का जमाना ना कि पुरातन जमाना जैस्मिन पहले बच्चे गुड़िया और खिलौने से खेलते थे लेकिन आजकल के लोग बच्चे बच्चे हैं बहुत ज्यादा तकनीकी एवं सकते हैं पर समझते हैं उन्हीं चीजों में अपना दिमाग लगाते हैं इसलिए मोबाइल फोन के चलते लोगों ने किया बच्चों ने बच्चों के खिलौनों से खेलने कर दी जाए
Aajakal ke bachche bachche hain gudde gudiyon aur khilaunon se khelana band kyon kar diya hai tujhe ki aajakal ka jamaana hai doston yog hai yah bahut modarn hai takaneekee ka jamaana na ki puraatan jamaana jaismin pahale bachche gudiya aur khilaune se khelate the lekin aajakal ke log bachche bachche hain bahut jyaada takaneekee evan sakate hain par samajhate hain unheen cheejon mein apana dimaag lagaate hain isalie mobail phon ke chalate logon ne kiya bachchon ne bachchon ke khilaunon se khelane kar dee jae

Daulat Ram sharma Shastri Bolkar App
Top Speaker,Level 22
सुनिए Daulat जी का जवाब
Retrieved sr tea . social activist,
1:08
कंप्यूटर जीव है उस जमाने में जिस जमाने में बच्चे गुड्डे गुड़ियों खिलौने खेलते थे वह जमाने में संचार क्रांति नहीं थी कंप्यूटर नहीं आए थे इतनी कलर टीवी वगैरह नहीं थी उस समय में मैक्सिमम जो मनोरंजन के साधन होते थे वह या तो रेडियो थे या फिर पिक्चर शादी पिक्चर शादी भी हर कोई नहीं देख पाता था पिक्चर्स देखने के जब जाते थे तो समाज में बाई याद कहते थे भैया यह तो पिक्चर बहुत देखता है यह भाई याद हो गया जबकि आज का दौर कंप्यूटर का युग एक घर घर में कंप्यूटर हैं घर पर वह में वीडियो गेम से हैं घर-घर में आपको टेलीविजन हैं इसलिए यह किसी सदी के बच्चे होने के कारण से बुद्धि में विकसित नहीं है इसलिए आज के बच्चे गुड्डे गुड़ियों खिलौनों से खेला पसंद नहीं करते हैं छोटे-छोटे बच्चे ही वीडियो प्रेम जानते हैं मोबाइल के बारे में जानते हैं मोबाइल चलाना जानते हैं
Kampyootar jeev hai us jamaane mein jis jamaane mein bachche gudde gudiyon khilaune khelate the vah jamaane mein sanchaar kraanti nahin thee kampyootar nahin aae the itanee kalar teevee vagairah nahin thee us samay mein maiksimam jo manoranjan ke saadhan hote the vah ya to rediyo the ya phir pikchar shaadee pikchar shaadee bhee har koee nahin dekh paata tha pikchars dekhane ke jab jaate the to samaaj mein baee yaad kahate the bhaiya yah to pikchar bahut dekhata hai yah bhaee yaad ho gaya jabaki aaj ka daur kampyootar ka yug ek ghar ghar mein kampyootar hain ghar par vah mein veediyo gem se hain ghar-ghar mein aapako teleevijan hain isalie yah kisee sadee ke bachche hone ke kaaran se buddhi mein vikasit nahin hai isalie aaj ke bachche gudde gudiyon khilaunon se khela pasand nahin karate hain chhote-chhote bachche hee veediyo prem jaanate hain mobail ke baare mein jaanate hain mobail chalaana jaanate hain

रितेश कुमार  Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए रितेश जी का जवाब
Marketing and management
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आपका सवाल पढ़ कर मुझे बहुत ज्यादा खुशी भी हुई कि कम से कम आपने सोचा तो सही आजकल के बच्चे गुड्डे गुड़ियों और खिलौनों से खेलना बंद क्यों कर दिया है क्योंकि आज के समय में मोबाइल आने की वजह से बहुत सारे कार्टून और गेम मोबाइल में आ गए हैं जिस कारण बच्चों ने खिलौनों से खेलना बंद कर दिया है और सिर्फ मोबाइल दिन भर लगे रहते हैं जो कि बेहद दुखद है
Aapaka savaal padh kar mujhe bahut jyaada khushee bhee huee ki kam se kam aapane socha to sahee aajakal ke bachche gudde gudiyon aur khilaunon se khelana band kyon kar diya hai kyonki aaj ke samay mein mobail aane kee vajah se bahut saare kaartoon aur gem mobail mein aa gae hain jis kaaran bachchon ne khilaunon se khelana band kar diya hai aur sirph mobail din bhar lage rahate hain jo ki behad dukhad hai

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  • आजकल के बच्चे बच्चियों ने गुड्डे गुड़ियों और खिलौनों से खेलना बंद क्यों कर दिया है, बच्चे बच्चियों ने गुड्डे गुड़ियों और खिलौनों से खेलना बंद क्यों कर दिया
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