#भारत की राजनीति

Rohit Soni Bolkar App
Top Speaker,Level 11
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Journalism
1:47
किसानों का आंदोलन कितने समय से दिल्ली के बॉर्डर पर चल रहा है इसके बाद भी लोगे बस सोचने की सरकार किसी कानून को वापस नहीं ले रही है उनकी कोई उनको कोई दबाव है या कोई मजबूरी है या वह वापस लेना नहीं चाहती है कि मैं यहां तक बिल्कुल लगता है ज्यादा मैंने चाहिए पैनलिस्ट किया है कि उसके पीछे एक कारण यह है कि बीजेपी सरकार ने भारतीय जनता पार्टी सरकार ने बहुत से ऐसे कानून लागू कराए हैं करें हैं जो अभी पारित होना बाकी है जैसे कि मैं आपको बताऊं वन रैंक वन पेंशन वाला कानून है या एनआईसीसीए वाला कान में अब मैं यह नहीं कह रहा हूं कि यह वाला सही है गलत है सही है गलत है किसी पार्टी को लेकर किसी के साथ एक स्कूल में बैठे हैं जिसके अंदर 10 छात्र हैं और प्रिंसिपल हो गया हमारे देश की सरकार क्यों गेट पर खड़ी है अब कोई बच्चा बिना पीरियड ऑफ़ के बाहर जाना चाहता है लेकिन वो बंसी वालों से बाहर जाने नहीं दे रहे हैं बार उसको उसी जाने नहीं दे रहा है कि अगर उसने एक बच्चे को बाहर जा नहीं तो बाकी 9 बच्चे उस प्रिंसिपल पर उंगली उठाएंगे और बोलेंगे तुमने उस एक बच्चे को बाहर जाने दे हमें क्यों नहीं दे रहा है कि आप बीएफ सूची अब सरकार करेगी सका इसलिए इस कानून को वापस लेने की अगर लोगों के धरना प्रदर्शन करने के बाद हालांकि अगर वह लोगों के लिए कानून गलत है सही वह बात की बात है अगर उन लोगों के धरना प्रदर्शन करने के बाद अगर सरकार कानून वापस ले लेगी तो ऐसे ही cga.nic वाले कानून हो गया वन रैंक वन पेंशन वाले कानून है तो सरकार को लोगों की बात मानकर या उनके आगे घुटने टेक कानूनी वापस देने पड़ेंगे सरकारी कारण वापस नहीं ले रही है किसान कानून में क्या बदलाव सरकार करती है या फिर से वापस लेती है
Kisaanon ka aandolan kitane samay se dillee ke bordar par chal raha hai isake baad bhee loge bas sochane kee sarakaar kisee kaanoon ko vaapas nahin le rahee hai unakee koee unako koee dabaav hai ya koee majabooree hai ya vah vaapas lena nahin chaahatee hai ki main yahaan tak bilkul lagata hai jyaada mainne chaahie painalist kiya hai ki usake peechhe ek kaaran yah hai ki beejepee sarakaar ne bhaarateey janata paartee sarakaar ne bahut se aise kaanoon laagoo karae hain karen hain jo abhee paarit hona baakee hai jaise ki main aapako bataoon van raink van penshan vaala kaanoon hai ya enaeeseeseee vaala kaan mein ab main yah nahin kah raha hoon ki yah vaala sahee hai galat hai sahee hai galat hai kisee paartee ko lekar kisee ke saath ek skool mein baithe hain jisake andar 10 chhaatr hain aur prinsipal ho gaya hamaare desh kee sarakaar kyon get par khadee hai ab koee bachcha bina peeriyad of ke baahar jaana chaahata hai lekin vo bansee vaalon se baahar jaane nahin de rahe hain baar usako usee jaane nahin de raha hai ki agar usane ek bachche ko baahar ja nahin to baakee 9 bachche us prinsipal par ungalee uthaenge aur bolenge tumane us ek bachche ko baahar jaane de hamen kyon nahin de raha hai ki aap beeeph soochee ab sarakaar karegee saka isalie is kaanoon ko vaapas lene kee agar logon ke dharana pradarshan karane ke baad haalaanki agar vah logon ke lie kaanoon galat hai sahee vah baat kee baat hai agar un logon ke dharana pradarshan karane ke baad agar sarakaar kaanoon vaapas le legee to aise hee chg.nich vaale kaanoon ho gaya van raink van penshan vaale kaanoon hai to sarakaar ko logon kee baat maanakar ya unake aage ghutane tek kaanoonee vaapas dene padenge sarakaaree kaaran vaapas nahin le rahee hai kisaan kaanoon mein kya badalaav sarakaar karatee hai ya phir se vaapas letee hai

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Umesh Upaadyay Bolkar App
Top Speaker,Level 33
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Life Coach | Motivational Speaker
5:02
जी देखेंगे सरकार को अगर कोई भी नया कानून लाना होता है बनाना होता है तो ऐसे नहीं होता कि वह पार्टी पावर में है सेंटर में है तो पार्टी ने कुछ भी जो भी चाहा वह कर दिया ऐसा नहीं होता है पार्टी पहले लोग राम चौकी लोकसभा होते हैं उसके बाद राज्यसभा इन दोनों से पारित होते हैं उसके बाद जाकर कोई चीज का कानून बनता है तो जब कृषि सुधार बिल की बात करते हैं तो डेफिनेटली यह भी सदन से पारित हुआ है हां किस संस्था में किस तरीके से पारित हुआ है वह थोड़ा सा आगे जो पूछा उसे डिबेटेबल हो सकता है बड़ी सदनों से पारित हुआ है और यह ऐसा नहीं है कि नए नए है पिछले साल सरकार ने सोचा वैसा कर दिया यह कई सालों से यह चर्चा में था बीच में थोड़ा बंद हो गया था रुक गया था लेकिन काफी पुराना है उसमें बहुत सारी पार्टियां इसके समर्थन में थी आप क्योंकि बीजेपी ए करवाना चाहती है लाना चाहती है तो इसीलिए बाकी सारी हां बढ़िया बीजेपी के विरोध में है ओके आप का सवाल है कि सरकार कृषि कानूनों को वापस नहीं ले रही है कोई जवाब है या कोई मजबूरी है यह दबाव या मजबूरी नहीं है लेकिन एक तरीके से यह बात जरूर है कि जिस तरीके से प्रदर्शन हो रहा है जिस तरीके से किसान सामने आए हैं उस टॉपिक के ऊपर उस चीज को लेकर के जिसको सर्जनों ने और मंत्रियों ने पारित किया है और यह बहुमत से पारित हो चुका है उसको अगर इस तरीके से पाकिस्तान आंदोलन करके बोलते हैं सरकार को इस को वापस ले लो तो कल को तो कोई और भी किसी और चीज को लेकर आ जाएगा कल को भाई कोई और चांद कोई और वर्ग कोई और ट्रैक्टर कोई और राज्य कोई चीज उठा कर आ जाएगा और बोलेगा हमारी बातें मानो तो फिर मजा बुश बुश बात की अहमियत क्या रहेगी उस बात क्या रहेगा भाई अगर मंत्रियों ने और मंत्री के पीछे ब्यूरो खास होते हैं ऑफिस होते हैं सब ने मिलकर अगर सोचा कि एक किसान के खेत में होगा यह वाला बैल फिर यह बिल पारित हुआ है उसके बारे में किसान आते हैं और इस तरीके आते आते हैं और वह भी उनकी जो मांगे हैं वह मांगे थोड़ी अजीबोगरीब मांगे हैं और अगर वह बोलते हैं कि मेरी बात मान लो और ऐसा कर लो नहीं तो हम धरना करेंगे नहीं तो हम यह करेंगे ट्रेक्टर रैली करेंगे विनु गणतंत्र दिवस पर यह करेंगे वह करेंगे तो ही बात सही नहीं है अब ऐसे में सरकार बिछड़ जाती है तू कल को कुछ और कोई और कोई और नई चीज या बात लेकर खड़ा हो जाएगा और सरकार को झुकना पड़ेगा तो फिर सरकार की अहमियत कहां रह जाएगी तो मजबूरी अगर बोले तो यह मजबूरी हो सकती हैं वह करना नहीं चाहती आदेश बड़ा सिंबले ठीक है आपको नहीं चाहिए मतलब खत्म कहानी वहीं पर अगर आप देखा जाए तो चाहे वह दिल्ली सरकार हो या और भी सारे प्रदेशों में उगता है कि वहां पर तू अलग हिसाब किताब है इसको लेकर भी तो राज है कहां से कोई ऐसी आवाज आ रही है नहीं आ रही ना तो बहुत सारी कहानी होती इनके पीछे हमें जो कई बार देखता हूं तो ऐसा नहीं होता तो एनीवेज तो कहने का मतलब यह है कि सरकार इसको इस तरीके से नहीं लेना चाहती कि भाई लोग यह सब से सरकार दबाव में आगे और सरकार यह कदम उठा रही है साथ ही यह इस कदम से डेफिनटली किसानों का फायदा होगा फायदा है तभी तो सारे राज्य के किसान उठकर नहीं आए हैं और एक और रहा सवाल दबाकर तो सरकार दबाव में नहीं आ रही है अगर दवा में आना होता तो वहीं सरकार ने अभी तक के बिल को रोक दिया होता अगर आप देखेंगे सुप्रीम कोर्ट भी बोल रही है कि नहीं इसका कोई रास्ता निकालो वह यह नहीं बोला कि यह बिल खारिज कर दो यह कर दो वह कर दो सुप्रीम कोर्ट नहीं है एक पैनल बनाया है बनवाया है और बोला है कि यह चैनल डिसाइड करेगा यह पैनल बात करेगा लेकिन किसानों को वह भी मंजूर नहीं है तो यह कहानी है और यहां पर बाद आठ के अटक जाती है अब सूरज कैसे सकती है भाई अगर किसान समझे जाने किस में खेत क्या है आखिर क्या है वह किसी के बहकावे में ना आए साथ ही सरकार अगर उसने उनसे बात कर रही हैं तो देखें से जाने क्या है क्या नहीं है और इसमें कुछ अल्टरेशन डेफिनेटली किया जा सकता है तो मेरे हिसाब से सरकार को इस तरीके से देखना भी चाहिए क्योंकि कुछ गुंजाइश है कुछ कर सकते हैं तो वह डेफिनेटली कर देना चाहिए ऐसा रिजल्ट नहीं होना चाहिए कि हम बिल्कुल ही इसको नहीं सोएंगे ना लेवल लेवल की बातचीत हो गई है इतनी सारी मीटिंग हो गई पिछले डेढ़ 2 महीने के अंदर लेकिन अगर इसका समाधान नहीं निकाला तो यह सही बात है यह सही संकेत नहीं है सरकार को शोषण से समाधान पर आना चाहिए
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Er.Awadhesh kumar Bolkar App
Top Speaker,Level 66
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Unknown
1:30
उसने सरकार कृषि कानून को वापस नहीं दे रही है कोई दबाव है कोई मजबूरी है या फिर लेना नहीं चाहती या फिर सरकार अनदेखा कर रही है इसमें कई कारण हो सकते हैं जो राजनीतिक मुद्दा है और देखा जाए तो सरकार पर दबाव भी है क्योंकि एक किसान का आंदोलन में यह मुद्दा उठा था कि कुछ पूजी पति को फायदा पहुंचाने के लिए सरकार ऐसे कानून को लाई है और इसका इसको पूरी तरह से लागू कर रही है जो हम इसका विरोध कर रहे हैं यह दबाव पूजी पतियों का हो सकता है और कहा भी जाता है कि जो सरकार बीजेपी सरकार है वह क्या है कि बड़े-बड़े पूजी पतियों के हाथ में इसकी पूरी तरह से बागडोर रहती है उसका दबाव भी है और मजबूरी भी है फिर कर लेना चाहती है या फिर अनदेखा कर रही है तू अब सोच रही है कि दबाव भी है मजबूरी है उसकी किधर लेगी तो कहीं ना कहीं जो पूंजीपति उनकी हाथ में बीजेपी की बागडोर है और बीजेपी द्वारा चलाई जाती है और तू बीजेपी को चलाई जाती है उनके द्वारा पूरी पतियों के हाथ में क्योंकि पूंजीपति ही ने फंड करते हैं उस फंड से बीजेपी का जो भी होता है तू यह क्या होगा कि सरकार इसलिए लेना नहीं चाहती है कि कहीं न कहीं उन्हें नुकसान होगा तो उनकी द्वारा हमें पार्टी को भी नुकसान होगा शायद इस वजह से भी सरकार इस बिल की अनदेखी करी है और इसे वापस नहीं लेना चाहती है धन
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Rahul kumar Bolkar App
Top Speaker,Level 44
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Unknown
1:27
अगर कृषि कानूनों को वापस नहीं ले रही है कोई दबाव है कोई मजबूरी है या फिर लेना नहीं चाहती या फिर सरकार अनदेखी करना चाहती है दोस्तों पर सिब्बल के बारे में आपको बता दें कि यह जो बिल पारित हुआ है यह किसानों के हित के लिए पारित किया गया परंतु इसके अंदर कई कमियां है साथ ही साथ एमएसपी की जो बातें मिनिमम सपोर्ट प्राइस की चीज को लेकर के साथ जुड़े हुए हैं और इसके अंदर कमियां निकाल लेंगे और इसकी अच्छाइयां निकालेंगे और फिर इसके बाद निष्कर्ष पर पहुंचेंगे तो दोस्तों हो सकता है कि आपको यह बिल है यह अच्छा भी लगे और बुरा भी लगी परंतु फ्यूचर में यह जो बिल है तो काफी नुकसानदायक हो सकता है दूसरी बात एमएसपी किसान ऐड हुए हैं कि मिनिमम अमेजॉन प्राइस है वह मिलनी चाहिए दोस्तों के साथ जो है वह अपने हित के लिए खड़े हुए सरकार कह रही है कि इस बिल से किसानों का हित है परंतु सरकार जो दोस्तों कृषि कानून जो इसको वापस लेना नहीं चाहती है हो सकता है कुछ बड़े उद्योगपतियों के इसके ऊपर दबाव बन रही हो सकता है कि जो जिस पद पर आज पूरा मंत्रिमंडल और प्रधानमंत्री जी बैठे हैं एक बड़ा समूह यह कह रहा हूं कि इस बिल को लागू कीजिए अन्यथा आने वाले चुनाव में आपको इसका पंजाब भुगतना पड़ेगा तो दोनों ही कई प्रकार की बातें यहां पर हो सकती है सरकार बिल्कुल इस चीज़ की अनदेखी कर रही है कि किसान आंदोलन कर रहे हैं और दबाव बना रहे हैं तो किसानों की बातें यहां पर नहीं सुनी जा रही इतना तो तय है
Agar krshi kaanoonon ko vaapas nahin le rahee hai koee dabaav hai koee majabooree hai ya phir lena nahin chaahatee ya phir sarakaar anadekhee karana chaahatee hai doston par sibbal ke baare mein aapako bata den ki yah jo bil paarit hua hai yah kisaanon ke hit ke lie paarit kiya gaya parantu isake andar kaee kamiyaan hai saath hee saath emesapee kee jo baaten minimam saport prais kee cheej ko lekar ke saath jude hue hain aur isake andar kamiyaan nikaal lenge aur isakee achchhaiyaan nikaalenge aur phir isake baad nishkarsh par pahunchenge to doston ho sakata hai ki aapako yah bil hai yah achchha bhee lage aur bura bhee lagee parantu phyoochar mein yah jo bil hai to kaaphee nukasaanadaayak ho sakata hai doosaree baat emesapee kisaan aid hue hain ki minimam amejon prais hai vah milanee chaahie doston ke saath jo hai vah apane hit ke lie khade hue sarakaar kah rahee hai ki is bil se kisaanon ka hit hai parantu sarakaar jo doston krshi kaanoon jo isako vaapas lena nahin chaahatee hai ho sakata hai kuchh bade udyogapatiyon ke isake oopar dabaav ban rahee ho sakata hai ki jo jis pad par aaj poora mantrimandal aur pradhaanamantree jee baithe hain ek bada samooh yah kah raha hoon ki is bil ko laagoo keejie anyatha aane vaale chunaav mein aapako isaka panjaab bhugatana padega to donon hee kaee prakaar kee baaten yahaan par ho sakatee hai sarakaar bilkul is cheez kee anadekhee kar rahee hai ki kisaan aandolan kar rahe hain aur dabaav bana rahe hain to kisaanon kee baaten yahaan par nahin sunee ja rahee itana to tay hai

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