#खेल कूद

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क्या हमारे बच्चे उन खेलों को नहीं खेल पाएंगे जो हम सभी बचपन में खेलते थे?

Kya Hamare Bache Un Khelon Ko Nahi Khel Paenge Jo Hum Sabne Bachpan Mei Khelte The
shabnam khatun Bolkar App
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Student
1:35
हेलो शिवांशु आज आप का सवाल है कि क्या हमारे बचने में खेलों को नहीं खेल पाएंगे जो हम सभी बचपन में खेलते थे बचपन में ऐसे बहुत सारे गेम हुआ करते थे वह लड़का किस किस हो गया या फिर आपके अंदर बहुत सारे खींचकर मतलब हम लोगों ऐसे अच्छे-अच्छे गेम जिसमें सच में बहुत मजा आता था वह सब गेम को अभी ना बच्चे सच में भूल गए हैं या फिर नहीं भी जानते अभी अभी जो बच्चे पैदा होते तो जान भी नहीं पाते वह तो मतलब पैदा होते ही जैसे बड़े होते पब्जी फ्री फायर जो भी वीडियो गेम जैसी इंडोर गेम्स बैडमिंटन टेबल टेनिस यह सब के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानते हैं जाहिर सी बात है कि चीज अपडेट होती है अब नई नई चीज आती तो लोग ज्यादा एडिक्टेड होते हैं लेकिन मेरे हिसाब से बाहर का गेम जो भी खेलना जो हम अपने बचपन में खेलते थे और जो हमारे मम्मी अपने बचपन के दिन हमें भी मुझे नहीं पता होता तो वह सब चीजों को अभी भी अगर आप चाहते हैं कि वह चीज रहे तो आप अपने बच्चों को वह सब सिखा सकते हैं बाहर अगर आप ले जाते हैं तो उनको यह सब चीजें गेम खेलने के लिए बोलकर सिखाइए अगर वह अपने फोन में या लैपटॉप कंप्यूटर में वीडियो गेम खेलते तो उनको बताइए कि बाहर का गेम कितना अच्छा और मेरे साथ तो करो एक बार वह सब गेम खेलेंगे तुमको बहुत ज्यादा इन लगेगा अगर आप चाहते हैं कि वह सच अभी भी खेले तुम्हारे पेरेंट्स को मतलब अपने बच्चे के जैसे बचपन की जिंदगी स्टोरी बताते हैं तो गेम भी बताना चाहिए खिलाना भी चाहिए
Helo shivaanshu aaj aap ka savaal hai ki kya hamaare bachane mein khelon ko nahin khel paenge jo ham sabhee bachapan mein khelate the bachapan mein aise bahut saare gem hua karate the vah ladaka kis kis ho gaya ya phir aapake andar bahut saare kheenchakar matalab ham logon aise achchhe-achchhe gem jisamen sach mein bahut maja aata tha vah sab gem ko abhee na bachche sach mein bhool gae hain ya phir nahin bhee jaanate abhee abhee jo bachche paida hote to jaan bhee nahin paate vah to matalab paida hote hee jaise bade hote pabjee phree phaayar jo bhee veediyo gem jaisee indor gems baidamintan tebal tenis yah sab ke baare mein jyaada se jyaada jaanate hain jaahir see baat hai ki cheej apadet hotee hai ab naee naee cheej aatee to log jyaada edikted hote hain lekin mere hisaab se baahar ka gem jo bhee khelana jo ham apane bachapan mein khelate the aur jo hamaare mammee apane bachapan ke din hamen bhee mujhe nahin pata hota to vah sab cheejon ko abhee bhee agar aap chaahate hain ki vah cheej rahe to aap apane bachchon ko vah sab sikha sakate hain baahar agar aap le jaate hain to unako yah sab cheejen gem khelane ke lie bolakar sikhaie agar vah apane phon mein ya laipatop kampyootar mein veediyo gem khelate to unako bataie ki baahar ka gem kitana achchha aur mere saath to karo ek baar vah sab gem khelenge tumako bahut jyaada in lagega agar aap chaahate hain ki vah sach abhee bhee khele tumhaare perents ko matalab apane bachche ke jaise bachapan kee jindagee storee bataate hain to gem bhee bataana chaahie khilaana bhee chaahie

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क्या हमारे बच्चे उन खेलों को नहीं खेल पाएंगे जो हम सभी बचपन में खेलते थे?Kya Hamare Bache Un Khelon Ko Nahi Khel Paenge Jo Hum Sabne Bachpan Mei Khelte The
Rahul kumar Bolkar App
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Unknown
1:19
हमारे बच्चों को खेलों को नहीं खेल पाएंगे जो हम सभी बचपन में खेलते थे हमारे बचपन को लेकर के तो हमारे बचपन के अंदर की जोड़ी चलने वाला जो खेल खेलते थे घर से बाहर खेल खेलने नहीं जाते एक साल के अंदर केवल पब्जी क्रिकेट लूडो मेरे हिसाब से इन खेलों से बिल्कुल दूर चले जाएंगे जब तक आप किस खेल का महत्व लोगों को या अपने बच्चों को नहीं बताएंगे तो सब खेल है इसका महत्व आप अपने बच्चों को बताइए जो स्कूल के अंदर भी एक चैप्टर 2 इन खेलों के बारे में डालना चाहिए या फिर कहीं जाकर के एक और खेलो
Hamaare bachchon ko khelon ko nahin khel paenge jo ham sabhee bachapan mein khelate the hamaare bachapan ko lekar ke to hamaare bachapan ke andar kee jodee chalane vaala jo khel khelate the ghar se baahar khel khelane nahin jaate ek saal ke andar keval pabjee kriket loodo mere hisaab se in khelon se bilkul door chale jaenge jab tak aap kis khel ka mahatv logon ko ya apane bachchon ko nahin bataenge to sab khel hai isaka mahatv aap apane bachchon ko bataie jo skool ke andar bhee ek chaiptar 2 in khelon ke baare mein daalana chaahie ya phir kaheen jaakar ke ek aur khelo

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क्या हमारे बच्चे उन खेलों को नहीं खेल पाएंगे जो हम सभी बचपन में खेलते थे?Kya Hamare Bache Un Khelon Ko Nahi Khel Paenge Jo Hum Sabne Bachpan Mei Khelte The
Meghsinghchouhan Bolkar App
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student
0:31
आपका सवाल है कि क्या हमारे बच्चे की फिल्म को नहीं खेल पाएंगे जो हम सभी बचपन में खेलते तो मेरे ख्याल से वेस्ट नहीं खेल पाएंगे क्योंकि आजकल प्रत्येक बच्चा अपने मोबाइल पर जो हम बचपन में असल में गेम खेल देते हुए आजकल मोबाइल पर खेलते हैं जो हकीकत में तू नहीं खेल पाएंगे पर मोबाइल में जरूर खेल पाएंगे
Aapaka savaal hai ki kya hamaare bachche kee philm ko nahin khel paenge jo ham sabhee bachapan mein khelate to mere khyaal se vest nahin khel paenge kyonki aajakal pratyek bachcha apane mobail par jo ham bachapan mein asal mein gem khel dete hue aajakal mobail par khelate hain jo hakeekat mein too nahin khel paenge par mobail mein jaroor khel paenge

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क्या हमारे बच्चे उन खेलों को नहीं खेल पाएंगे जो हम सभी बचपन में खेलते थे?Kya Hamare Bache Un Khelon Ko Nahi Khel Paenge Jo Hum Sabne Bachpan Mei Khelte The
Mohitrajput Bolkar App
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Unknown
0:44
तो आपने पूछा कि हमारे बच्चों को खेलों को नहीं खेल पाएंगे जो हमें खेलते थे तो हम बहुत चीज मिस करते हैं जैसे आगे बढ़ते जा रहे टेक्नोलॉजी में ऐसी चीजें छोड़ते जा रहे हैं अपना बचपन बोलते जा रहे बच्चा पैदा होता है तो बच्चे को अकेला छोड़ देते होममेड के पास तुमने बचपन से ही ध्यान नहीं देते कुछ गलती है बैलेंस की करते हैं
To aapane poochha ki hamaare bachchon ko khelon ko nahin khel paenge jo hamen khelate the to ham bahut cheej mis karate hain jaise aage badhate ja rahe teknolojee mein aisee cheejen chhodate ja rahe hain apana bachapan bolate ja rahe bachcha paida hota hai to bachche ko akela chhod dete homamed ke paas tumane bachapan se hee dhyaan nahin dete kuchh galatee hai bailens kee karate hain

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क्या हमारे बच्चे उन खेलों को नहीं खेल पाएंगे जो हम सभी बचपन में खेलते थे?Kya Hamare Bache Un Khelon Ko Nahi Khel Paenge Jo Hum Sabne Bachpan Mei Khelte The
Dr.Nitin Pawar, D.M S.(Management) Bolkar App
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Kisan,Journalist,Marathi Writer, Social Worker,Political Leader.
6:58
क्या हमारे बच्चे उन खेलों को नहीं खेल पाएंगे जो हम सभी बचपन में खेलते थे तो यह सब परिवर्तन निसर्ग का अनिवार्य नियम है यह हमें जान लेना चाहिए इंसान के पूरी प्रवास में खेल भी बदलते हुए और अब हम जब उन खेलों खेलों को खेलते थे तो वह खेल लगभग हमारे बच्चे जो है नहीं खेलेंगे लेकिन खेल तो जरूरी है और फिर जो हर वक्त समय मनुष्य को जरूरी लगा है क्योंकि खेल से आनंद मिलता कैल्शियम होता है फिर से सद्भावना की निर्मिती होती है खेल से शिफ्ट की निर्मिती होती है फिर से खिलाड़ी खिलाड़ी खिलाड़ियों का अनुभव होता है रहता है तो खेल तो जरूर रहेंगे लेकिन अब खिलौना तरह के होंगे वर्चुअल खेल वैसे तो शुरू भी हो गए हैं और ये आ गया और भी बढ़ेंगे पहले वस्तुओं की बहुत कमी थी एक शादी बेड जो है वह जो कंपनी की रहती है और बोल भी होता था वह कभी प्लास्टिक का भी होता था कभी पंच का बोलो तथा लेदर का बॉल खेलने के लिए उसके लिए जो बैठ लगती है खेलने के लिए गांव में इतना खर्चा करने की और बच्चों को इतना पैसा देने की उस वक्त के माता-पिता उनके पास कमेटी फिर भी खेल खेलते थे क्रिकेट खेल हर तरह के खेल छोटे बच्चे खेलते हैं एक तो फिर मैंने ऐसा देखा है कि क्या करना होता है क्या और खेला भी हो तो क्या करना होता था उसमें की एक लोखंड की कोई चीज होती थी कटी जैसी छोटे करके तारों की तार की तो जब बारिश हो जाती थी तो ज़मीन गीली हो जाती थी तोहरे का एक अपराध होता था जब उसका नाम आता था तो वह उस जो जिसको ऐसे से जमीन पर मारता था कि वह जमीन में घुस कर रही है और जब तक उसके बॉस उसमें सफल होता था तब तक वह सफल खिलाड़ी होता था और जब वह तार ज्योति उन जमीन में नहीं घुसने दिया और गिर जाती थी तब उसका नाम खत्म होता था दूसरे का दौर शुरू होता था इसे आगे आगे आगे चलती थी इतना ही नहीं सिगरेट के जो पाकिट होते थे उनका भी खेल होता था उसमें एक अकेला ऐसा था किसी का रेट की जो हो तो ब्रिस्टल औरतों की तरह के कंपनियों की शिकायत होती थी उसका पार्किंग रिकॉर्डिंग पर मारने का और उसके बाद तो पलट कर नीचे गिर जाता था प्रेस नीचे गिरे हुए कहा कि छोटे थे और अगर हम भिन्न पर दीवार पर दूसरा पैसा फेंक देते थे और जब वह किसी पाकिट पर पड़ जाता था तो बाकी सब पढ़े हुए उसके हो जाती थी बाकी और ऐसा जीतना और हर ना होता था ज्यादा क्रिकेट प्लेयर क्या करता था कि अपने जो पत्ते हैं वह जरा बिखर कर नीचे के गिरे ताकि उस पर शहद रूप से वह दूसरा जो इस पर दिए वह उसका पता ना पढ़ सके उसका पाकिट ना पढ़ सके तो ऐसे अनेक खेलते हैं लेकिन वह वह नहीं क्या-क्या जाएंगे कुछ समय में भारत को परिवर्तन होने में भारत को कभी भी देरी से परिवर्तन होता है उसमें यह थोड़ा सा कुछ और लाभदायक लगता है लेकिन परिवर्तन तो हो गए और नए खिलाएंगे जो बुद्धि के भी होंगे और शरीर के ताकत के मरूंगी धन्यवाद
Kya hamaare bachche un khelon ko nahin khel paenge jo ham sabhee bachapan mein khelate the to yah sab parivartan nisarg ka anivaary niyam hai yah hamen jaan lena chaahie insaan ke pooree pravaas mein khel bhee badalate hue aur ab ham jab un khelon khelon ko khelate the to vah khel lagabhag hamaare bachche jo hai nahin khelenge lekin khel to jarooree hai aur phir jo har vakt samay manushy ko jarooree laga hai kyonki khel se aanand milata kailshiyam hota hai phir se sadbhaavana kee nirmitee hotee hai khel se shipht kee nirmitee hotee hai phir se khilaadee khilaadee khilaadiyon ka anubhav hota hai rahata hai to khel to jaroor rahenge lekin ab khilauna tarah ke honge varchual khel vaise to shuroo bhee ho gae hain aur ye aa gaya aur bhee badhenge pahale vastuon kee bahut kamee thee ek shaadee bed jo hai vah jo kampanee kee rahatee hai aur bol bhee hota tha vah kabhee plaastik ka bhee hota tha kabhee panch ka bolo tatha ledar ka bol khelane ke lie usake lie jo baith lagatee hai khelane ke lie gaanv mein itana kharcha karane kee aur bachchon ko itana paisa dene kee us vakt ke maata-pita unake paas kametee phir bhee khel khelate the kriket khel har tarah ke khel chhote bachche khelate hain ek to phir mainne aisa dekha hai ki kya karana hota hai kya aur khela bhee ho to kya karana hota tha usamen kee ek lokhand kee koee cheej hotee thee katee jaisee chhote karake taaron kee taar kee to jab baarish ho jaatee thee to zameen geelee ho jaatee thee tohare ka ek aparaadh hota tha jab usaka naam aata tha to vah us jo jisako aise se jameen par maarata tha ki vah jameen mein ghus kar rahee hai aur jab tak usake bos usamen saphal hota tha tab tak vah saphal khilaadee hota tha aur jab vah taar jyoti un jameen mein nahin ghusane diya aur gir jaatee thee tab usaka naam khatm hota tha doosare ka daur shuroo hota tha ise aage aage aage chalatee thee itana hee nahin sigaret ke jo paakit hote the unaka bhee khel hota tha usamen ek akela aisa tha kisee ka ret kee jo ho to bristal auraton kee tarah ke kampaniyon kee shikaayat hotee thee usaka paarking rikording par maarane ka aur usake baad to palat kar neeche gir jaata tha pres neeche gire hue kaha ki chhote the aur agar ham bhinn par deevaar par doosara paisa phenk dete the aur jab vah kisee paakit par pad jaata tha to baakee sab padhe hue usake ho jaatee thee baakee aur aisa jeetana aur har na hota tha jyaada kriket pleyar kya karata tha ki apane jo patte hain vah jara bikhar kar neeche ke gire taaki us par shahad roop se vah doosara jo is par die vah usaka pata na padh sake usaka paakit na padh sake to aise anek khelate hain lekin vah vah nahin kya-kya jaenge kuchh samay mein bhaarat ko parivartan hone mein bhaarat ko kabhee bhee deree se parivartan hota hai usamen yah thoda sa kuchh aur laabhadaayak lagata hai lekin parivartan to ho gae aur nae khilaenge jo buddhi ke bhee honge aur shareer ke taakat ke maroongee dhanyavaad

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क्या हमारे बच्चे उन खेलों को नहीं खेल पाएंगे जो हम सभी बचपन में खेलते थे?Kya Hamare Bache Un Khelon Ko Nahi Khel Paenge Jo Hum Sabne Bachpan Mei Khelte The
guru ji Bolkar App
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0:25

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Archana Mishra Bolkar App
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Housewife
1:09
हेलो एवरीवन आपका प्रश्न क्या हमारे बच्चे उन सभी खेलों को नहीं खेल पाएंगे जो हम सभी बचपन में खेलते थे तो फ्रेंडशिप अगर आप बच्चों को भी सब खेल सिखाएंगे तो जरूर खेल पाएंगे और बताएंगे कि हमारे समय में ऐसे क्यों होते थे ऐसे हम लोग खेल खेलते थे जब आप हमको मनोरंजक तरीके से बताएंगे खेल का समझाएंगे तो वह जरूर समझ जाएंगे और हमें सिखाना भी चाहिए अपने बच्चों को बताना चाहिए कि पहले के जमाने में कौन-कौन से खेल होते थे और कैसे हैं सब लोग खेलते थे उस समय तो मोबाइल नहीं था तो लोग खेल खेल कर ही अपना मन बहला देती और खेल खेलने से शरीर की बहुत सारी अच्छी भी हो जाती है तो इसलिए खेल खेलना बहुत जरूरी है उसे शारीरिक परिश्रम के लिए भी खेल खेलना चाहिए उसे हमारा शरीर उस उस उस तंदुरुस्त हो जाता है शरीर चुस्त दुरुस्त हो जाता है इसलिए खेल हिंदी रहना चाहिए बच्चों को समझाएं बताएं कि कैसे खेल अच्छे होते हैं तो बच्चे भी जरूर खेलेंगे धन्यवाद
Helo evareevan aapaka prashn kya hamaare bachche un sabhee khelon ko nahin khel paenge jo ham sabhee bachapan mein khelate the to phrendaship agar aap bachchon ko bhee sab khel sikhaenge to jaroor khel paenge aur bataenge ki hamaare samay mein aise kyon hote the aise ham log khel khelate the jab aap hamako manoranjak tareeke se bataenge khel ka samajhaenge to vah jaroor samajh jaenge aur hamen sikhaana bhee chaahie apane bachchon ko bataana chaahie ki pahale ke jamaane mein kaun-kaun se khel hote the aur kaise hain sab log khelate the us samay to mobail nahin tha to log khel khel kar hee apana man bahala detee aur khel khelane se shareer kee bahut saaree achchhee bhee ho jaatee hai to isalie khel khelana bahut jarooree hai use shaareerik parishram ke lie bhee khel khelana chaahie use hamaara shareer us us us tandurust ho jaata hai shareer chust durust ho jaata hai isalie khel hindee rahana chaahie bachchon ko samajhaen bataen ki kaise khel achchhe hote hain to bachche bhee jaroor khelenge dhanyavaad

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क्या हमारे बच्चे उन खेलों को नहीं खेल पाएंगे जो हम सभी बचपन में खेलते थे?Kya Hamare Bache Un Khelon Ko Nahi Khel Paenge Jo Hum Sabne Bachpan Mei Khelte The
umashankar Bolkar App
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Farmer
0:47
आपका सवाल सही है क्या हमारे बच्चे जो हम खेल खेलते थे बचपन में नहीं खेल पाएंगे कहां से खेलेंगे जो हम आप ही मुश्किल ध्यान नहीं देते तो बच्चे कहां से खेलेंगे बच्चों के लिए नए नए खेल हम ढूंढ कर लाते हैं खुद खिलाने के लिए तो पुराने खेलों को कैसे खेल पाएंगे हुक्मरानों के लोकेशन हम बताते हैं नहीं सिखाना चाहिए हमें पुराने खेलों को तभी तो देखेंगे तभी तो खेल खेलेंगे हम खुद व्यस्त रहते हैं बच्चों को समय नहीं दे पाते गुड नाइट खिलौने लाकर कर दे देते हैं वह समस्त रखते हैं वह शिक्षकों को खेलते हैं
Aapaka savaal sahee hai kya hamaare bachche jo ham khel khelate the bachapan mein nahin khel paenge kahaan se khelenge jo ham aap hee mushkil dhyaan nahin dete to bachche kahaan se khelenge bachchon ke lie nae nae khel ham dhoondh kar laate hain khud khilaane ke lie to puraane khelon ko kaise khel paenge hukmaraanon ke lokeshan ham bataate hain nahin sikhaana chaahie hamen puraane khelon ko tabhee to dekhenge tabhee to khel khelenge ham khud vyast rahate hain bachchon ko samay nahin de paate gud nait khilaune laakar kar de dete hain vah samast rakhate hain vah shikshakon ko khelate hain

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क्या हमारे बच्चे उन खेलों को नहीं खेल पाएंगे जो हम सभी बचपन में खेलते थे?Kya Hamare Bache Un Khelon Ko Nahi Khel Paenge Jo Hum Sabne Bachpan Mei Khelte The
SONU VERMA Bolkar App
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Student
0:53
हमारे बच्चे जो आज का मोबाइल आ गए हैं नीचे बच्चे दिन भर उसी मोबाइल में खिला करते हैं जिससे वो आज की नई दुनिया के बारे में देखते रहते हैं और जो अपने बचपन का आनंद है वह मोबाइल से ही लेते रहते हैं इससे हमारे बचपन में जो खेले जाते थे वह अब नहीं खेले जाते हैं या एक बहुत ही हानिकारक आदत है इसको हमें बच्चों से दूर रखना चाहिए जिससे कि वह अपने गांव के या शहर के जो भी खेल हैं उनको खेलना सिखाना चाहिए ना कि उनको मोबाइल पर इससे हमारे बच्चे भी रहेंगे और मानसिक रूप से सही भी रहेंगे थैंक यू
Hamaare bachche jo aaj ka mobail aa gae hain neeche bachche din bhar usee mobail mein khila karate hain jisase vo aaj kee naee duniya ke baare mein dekhate rahate hain aur jo apane bachapan ka aanand hai vah mobail se hee lete rahate hain isase hamaare bachapan mein jo khele jaate the vah ab nahin khele jaate hain ya ek bahut hee haanikaarak aadat hai isako hamen bachchon se door rakhana chaahie jisase ki vah apane gaanv ke ya shahar ke jo bhee khel hain unako khelana sikhaana chaahie na ki unako mobail par isase hamaare bachche bhee rahenge aur maanasik roop se sahee bhee rahenge thaink yoo

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क्या हमारे बच्चे उन खेलों को नहीं खेल पाएंगे जो हम सभी बचपन में खेलते थे?Kya Hamare Bache Un Khelon Ko Nahi Khel Paenge Jo Hum Sabne Bachpan Mei Khelte The
J.P. Y👌g i Bolkar App
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सुनिए J.P. जी का जवाब
Unknown
2:58
प्रसन्न है क्या हमारे बच्चे उनके लोग को नहीं खेल पाएंगे जो हम सभी बचपन में खेलते हैं यह तो वास्तव में बात है कि जो चीज हम अपने उम्र है और उस दौर के हिसाब से बर्ताव में जो खेलकूद किए हुए हैं वह वर्तमान में उस टाइम का नहीं खेल पाएंगे लेकिन फिर भी कुछ ना कुछ में विकास की अगर सत्ता में नए रूप से खेलो को धारण कर सकते हैं और वह खेलते हैं फिलहाल मजेदार इस जीवन के उस दौर की होती है जो हम किसी रूप में भी आनंद ले लेते हैं तो कुछ हुआ क्या ऐसे होते हैं जो हमें याद जीवन इस प्लान में आती रहती हैं तो इसमें यही फिलहाल है कि किबा मुश्किल हो सकता है क्योंकि यह आनंद की गोष्ठी में अगर देखा जाए तो जो जिस चीज में भी लुफ्त उठा लेता है वह उसमें खुश रहता है तो सब प्रक्रिया वह नहीं रह गई जमीन पर खेलने की कभी प्रक्रिया ते गड्ढे खोदकर कंचे बागड़ा होते थे दिल्ली डंडा होते थे और और भी कई तरह के हैं हमारे तैरने के या कुछ ऐसी संसाधन हम सिम अपनी इच्छा से प्रकृति की ओर जा कर के उल्लू का पट्ठा लेते थे अब आजादी थे और जिस तरह की छूट रहती है उस दिन से हम अपने उस पुराने समय में जोखिम व्यवहार करते हैं वह अपने लिए यादगार बन जाता है लेकिन आने वाले बच्चों को अगर समझ जाएं उनकी जो वातावरण है वहां की भौगोलिक परिस्थितियां है उसके अनुरूप हो जॉब वर्तमान की स्थिति में खेलते कुत्ते हैं लेकिन अगर उन्होंने कुछ आनंद और कुछ चीज संग्रह कर लिया है तो वह वास्तविक जीवन की अरदास के रूप में स्थित हो जाती है और कभी लगता है कि कहने में सुनाने में वह वाक्य एक आनंद देती है उस स्मरण में हमेशा प्रतीक्षा विद्वान के रूप में बहती रहती है यादों को सलाह दी है कि आज के दौर में जो बच्चे हैं उनका हिसाब किताब और जॉन का रास्ता है जो जो चीजें प्रस्तुत हो रही है वह उसमें निर्वाह करने लगता है और वह भी उनको आनंददायक सुख दे सकता है लेकिन फिलहाल यही कहा जा सकता है जो चीज हम अपने पुराने परिस्थिति में के दौरान खेल चुके हैं हम हो इस चीजों में अंतर आज
Prasann hai kya hamaare bachche unake log ko nahin khel paenge jo ham sabhee bachapan mein khelate hain yah to vaastav mein baat hai ki jo cheej ham apane umr hai aur us daur ke hisaab se bartaav mein jo khelakood kie hue hain vah vartamaan mein us taim ka nahin khel paenge lekin phir bhee kuchh na kuchh mein vikaas kee agar satta mein nae roop se khelo ko dhaaran kar sakate hain aur vah khelate hain philahaal majedaar is jeevan ke us daur kee hotee hai jo ham kisee roop mein bhee aanand le lete hain to kuchh hua kya aise hote hain jo hamen yaad jeevan is plaan mein aatee rahatee hain to isamen yahee philahaal hai ki kiba mushkil ho sakata hai kyonki yah aanand kee goshthee mein agar dekha jae to jo jis cheej mein bhee lupht utha leta hai vah usamen khush rahata hai to sab prakriya vah nahin rah gaee jameen par khelane kee kabhee prakriya te gaddhe khodakar kanche baagada hote the dillee danda hote the aur aur bhee kaee tarah ke hain hamaare tairane ke ya kuchh aisee sansaadhan ham sim apanee ichchha se prakrti kee or ja kar ke ulloo ka pattha lete the ab aajaadee the aur jis tarah kee chhoot rahatee hai us din se ham apane us puraane samay mein jokhim vyavahaar karate hain vah apane lie yaadagaar ban jaata hai lekin aane vaale bachchon ko agar samajh jaen unakee jo vaataavaran hai vahaan kee bhaugolik paristhitiyaan hai usake anuroop ho job vartamaan kee sthiti mein khelate kutte hain lekin agar unhonne kuchh aanand aur kuchh cheej sangrah kar liya hai to vah vaastavik jeevan kee aradaas ke roop mein sthit ho jaatee hai aur kabhee lagata hai ki kahane mein sunaane mein vah vaaky ek aanand detee hai us smaran mein hamesha prateeksha vidvaan ke roop mein bahatee rahatee hai yaadon ko salaah dee hai ki aaj ke daur mein jo bachche hain unaka hisaab kitaab aur jon ka raasta hai jo jo cheejen prastut ho rahee hai vah usamen nirvaah karane lagata hai aur vah bhee unako aanandadaayak sukh de sakata hai lekin philahaal yahee kaha ja sakata hai jo cheej ham apane puraane paristhiti mein ke dauraan khel chuke hain ham ho is cheejon mein antar aaj

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क्या हमारे बच्चे उन खेलों को नहीं खेल पाएंगे जो हम सभी बचपन में खेलते थे?Kya Hamare Bache Un Khelon Ko Nahi Khel Paenge Jo Hum Sabne Bachpan Mei Khelte The
Nikhil Ranjan Bolkar App
Top Speaker,Level 44
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Programme Coordinator at National Institute of Electronics & Information Technology (NIELIT)
0:40
मुस्कारा का प्रश्न है कि हमारे बच्चों को खेलों को नहीं खेल पाएंगे जो हम सभी बचपन में खेलते थे तो आपको बता दें कड़वा है पर सच है यह की जितनी मस्ती हम लोगों ने अपने बचपन में करी है हमारे बच्चे उसके 10% भी नहीं कर पाते हैं उनके पास खेलने के लिए एक से एक गेम है आपके प्लेस्टेशन से वीडियो गेम से सब कुछ है लेकिन जो आनंद आपको आउटडोर एक्टिविटी में दोस्तों के साथ मौज करने में आता था वह चीज जो हमारे आगे आने वाली जनरेशन है वह कहीं ना कहीं उस चीज को मिस करती है आपकी क्या राय इस बारे में कमेंट सेक्शन में अपनी राय जरुर व्यक्त करें मैं शुभकामनाएं आपके साथ है धन्यवाद
Muskaara ka prashn hai ki hamaare bachchon ko khelon ko nahin khel paenge jo ham sabhee bachapan mein khelate the to aapako bata den kadava hai par sach hai yah kee jitanee mastee ham logon ne apane bachapan mein karee hai hamaare bachche usake 10% bhee nahin kar paate hain unake paas khelane ke lie ek se ek gem hai aapake plesteshan se veediyo gem se sab kuchh hai lekin jo aanand aapako aautador ektivitee mein doston ke saath mauj karane mein aata tha vah cheej jo hamaare aage aane vaalee janareshan hai vah kaheen na kaheen us cheej ko mis karatee hai aapakee kya raay is baare mein kament sekshan mein apanee raay jarur vyakt karen main shubhakaamanaen aapake saath hai dhanyavaad

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Daulat Ram sharma Shastri Bolkar App
Top Speaker,Level 22
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Retrieved sr tea . social activist,
1:10
आज के बच्चे उन खेलों के बारे में जानती ही नहीं नंबर 1 उन तीनों का प्रचलन भी बंद हो गया है अब लोग बच्चे उन्हें पसंद भी नहीं करते हैं जैसे खो खो का गम है कबड्डी है गिल्ली डंडा है गोलियों का खेल था ऐसे खेल वॉलीबॉल है फिर कौन है इनका परचून एकदम ही कम होता जा रहा है आज के बच्चे या तो क्रिकेट खेलते हैं या फिर कंप्यूटर पर गेम शादी थी फायर आदि गेम वीडियो पब्जी बगैरा गेम चाहिए इन कैंपों को कितना पसंद करते हैं उन्हें विशेष तौर से कंप्यूटर की गेम ज्यादा पसंद आते हैं अब वह बचपन का हमारा समय तो यहां वापस नहीं आ सकता है और आज बच्चों के उनके बारे में बातें करते तो बच्चे कहते हैं कि कैसे चले जाते थे घटा समंदर है वह सब अकेले ऐसे थे जो बचपन में हम खेला करते थे आंख मिचौली का खेल विश्व खेल एकदम अब ना तो बच्चों के पास उन्हें सीखने का टाइम है ना कोई उनको सिखाने वाला है वह प्रचलन में भी नहीं है
Aaj ke bachche un khelon ke baare mein jaanatee hee nahin nambar 1 un teenon ka prachalan bhee band ho gaya hai ab log bachche unhen pasand bhee nahin karate hain jaise kho kho ka gam hai kabaddee hai gillee danda hai goliyon ka khel tha aise khel voleebol hai phir kaun hai inaka parachoon ekadam hee kam hota ja raha hai aaj ke bachche ya to kriket khelate hain ya phir kampyootar par gem shaadee thee phaayar aadi gem veediyo pabjee bagaira gem chaahie in kaimpon ko kitana pasand karate hain unhen vishesh taur se kampyootar kee gem jyaada pasand aate hain ab vah bachapan ka hamaara samay to yahaan vaapas nahin aa sakata hai aur aaj bachchon ke unake baare mein baaten karate to bachche kahate hain ki kaise chale jaate the ghata samandar hai vah sab akele aise the jo bachapan mein ham khela karate the aankh michaulee ka khel vishv khel ekadam ab na to bachchon ke paas unhen seekhane ka taim hai na koee unako sikhaane vaala hai vah prachalan mein bhee nahin hai

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क्या हमारे बच्चे उन खेलों को नहीं खेल पाएंगे जो हम सभी बचपन में खेलते थे?Kya Hamare Bache Un Khelon Ko Nahi Khel Paenge Jo Hum Sabne Bachpan Mei Khelte The
Ashvani Patel Bolkar App
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2:36

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