#जीवन शैली

ekta Bolkar App
Top Speaker,Level 33
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Unknown
1:49
पूछा गया है लड़कियों के लिए आत्मनिर्भर होने के बावजूद भी कौन सी चीजें आज भी उनके लिए नहीं बदल पाए तो हमारा कल्चर है जो हमारा यहां परियों से चला आ रहा तुम्हारे हमेशा यही बताया जाता है कि लड़कियों को एडजस्ट करना चाहिए लड़कियों को सहनशील होना चाहिए सामने वाला आप पर गुस्सा भी कर रहा है तो आप को शांत रहना चाहिए क्योंकि आप लड़की हो आप को बच्चों का घर का देखभाल करना पड़ेगा क्योंकि आप लड़कियों भले ही आप इतने रूप से आत्मनिर्भर हो भले ही आप जॉब कर रहे हो भले ही आप कितना भी पैसा कमाए घर संभालना बच्चे संभालना रिश्ते सामान्य सारी जिम्मेदारी की लड़की की शादी होती है तो यह चीज आज भी और जो है हमारे समाज में नहीं बदली है हम आज भी यह नहीं सिखाते कि अगर आप लड़के भी है तो आपको भी घर के कामों में हाथ बटाना चाहिए क्योंकि आज किसी भी चीज में लड़कियां पीछे नहीं आप एक ऐसी लड़की के ऐसे समाज में जी रहे थे पर लड़कियां और लड़के बराबर की पढ़ाई जॉब बराबर होती है सैलरी बराबर होती है तो फिर आपको घर का काम करने में कोई झिझक नहीं होनी चाहिए कि हम अपने लड़कों को नहीं सिखाते और यही जो है उनके दिमाग में बचपन से ही चीज रहती कि लड़की को ही यह सब करना है और यही कारण है कि फिर लड़कियों को बहुत सारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है जैसे जॉब करो घर आकर घर संभालो बच्चों को देखभाल करो बड़ों बड़ों की देखभाल करो एक लड़की के लिए काफी ज्यादा मुश्किल हो जाता है और आज भी हमारे समाज में नहीं बदली है कुछ कुछ हद तक मैंने देखा है कि लोग थोड़े लिबरल हो रहे लोग इस चीज को समझ रहे हैं तो यह काफी पॉजिटिव रिस्पांस भी उसका मिल रहा है पर अभी भी हम काफी पीछे हैं उम्मीद करती हूं आपको मेरा जवाब पसंद आया होगा धन्यवाद
Poochha gaya hai ladakiyon ke lie aatmanirbhar hone ke baavajood bhee kaun see cheejen aaj bhee unake lie nahin badal pae to hamaara kalchar hai jo hamaara yahaan pariyon se chala aa raha tumhaare hamesha yahee bataaya jaata hai ki ladakiyon ko edajast karana chaahie ladakiyon ko sahanasheel hona chaahie saamane vaala aap par gussa bhee kar raha hai to aap ko shaant rahana chaahie kyonki aap ladakee ho aap ko bachchon ka ghar ka dekhabhaal karana padega kyonki aap ladakiyon bhale hee aap itane roop se aatmanirbhar ho bhale hee aap job kar rahe ho bhale hee aap kitana bhee paisa kamae ghar sambhaalana bachche sambhaalana rishte saamaany saaree jimmedaaree kee ladakee kee shaadee hotee hai to yah cheej aaj bhee aur jo hai hamaare samaaj mein nahin badalee hai ham aaj bhee yah nahin sikhaate ki agar aap ladake bhee hai to aapako bhee ghar ke kaamon mein haath bataana chaahie kyonki aaj kisee bhee cheej mein ladakiyaan peechhe nahin aap ek aisee ladakee ke aise samaaj mein jee rahe the par ladakiyaan aur ladake baraabar kee padhaee job baraabar hotee hai sailaree baraabar hotee hai to phir aapako ghar ka kaam karane mein koee jhijhak nahin honee chaahie ki ham apane ladakon ko nahin sikhaate aur yahee jo hai unake dimaag mein bachapan se hee cheej rahatee ki ladakee ko hee yah sab karana hai aur yahee kaaran hai ki phir ladakiyon ko bahut saaree pareshaaniyon ka saamana karana padata hai jaise job karo ghar aakar ghar sambhaalo bachchon ko dekhabhaal karo badon badon kee dekhabhaal karo ek ladakee ke lie kaaphee jyaada mushkil ho jaata hai aur aaj bhee hamaare samaaj mein nahin badalee hai kuchh kuchh had tak mainne dekha hai ki log thode libaral ho rahe log is cheej ko samajh rahe hain to yah kaaphee pojitiv rispaans bhee usaka mil raha hai par abhee bhee ham kaaphee peechhe hain ummeed karatee hoon aapako mera javaab pasand aaya hoga dhanyavaad

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Shipra Bolkar App
Top Speaker,Level 44
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Self Employed
0:44
कसम है कि लड़कियों के लिए होने के बावजूद भी कौन सी चीज है आज भी उनके लिए नहीं बदल पाए हैं बहुत सारी ऐसी चीजें हैं जो आप मेरे पर होने के बावजूद भी लड़कियों के लिए समाज का नजरिया नहीं बदल पा रहा है जो हम लेट करने वाली चीज कभी भी नहीं चल पाती है समाज का हर एक व्यक्ति बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ इस तरीके से बहुत सारे स्लोगंस बोलते रहते हैं और दूसरों के घरों में फीमेल से उनको आगे बढ़ाने के लिए नए-नए तरीके से छोड़ देते रहते हैं लेकिन अपने घर की बहू बेटियों की जब बात आती है तो वह खुद ही उन्हें 2 मिनट करना शुरू कर देते हैं यह सब चीज अपने घर से ही छुड़ाना शुरू करें तो निश्चित तौर पर समाज में एक बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा आपका दिन शुभ रहे थे निकाल
Kasam hai ki ladakiyon ke lie hone ke baavajood bhee kaun see cheej hai aaj bhee unake lie nahin badal pae hain bahut saaree aisee cheejen hain jo aap mere par hone ke baavajood bhee ladakiyon ke lie samaaj ka najariya nahin badal pa raha hai jo ham let karane vaalee cheej kabhee bhee nahin chal paatee hai samaaj ka har ek vyakti betee padhao betee bachao is tareeke se bahut saare slogans bolate rahate hain aur doosaron ke gharon mein pheemel se unako aage badhaane ke lie nae-nae tareeke se chhod dete rahate hain lekin apane ghar kee bahoo betiyon kee jab baat aatee hai to vah khud hee unhen 2 minat karana shuroo kar dete hain yah sab cheej apane ghar se hee chhudaana shuroo karen to nishchit taur par samaaj mein ek bahut bada badalaav dekhane ko milega aapaka din shubh rahe the nikaal

shabnam khatun Bolkar App
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Student
0:56
हेलो विभाग तो आज आप का सवाल है कि लड़कियों के लिए आत्मनिर्भर होने के बावजूद भी कौन सी चीजें आज भी उनको यह नहीं बदल पाई है तो लिखिए और लड़कियों को आजकल पढ़ने लिखने के लिए दिया जाता है नौकरी करने के लिए दिया जाता है दूर-दूर तक मतलब सुनने के लिए एजुकेशन लेने के लिए उन्हें भी अपॉर्चुनिटी मिली है लेकिन उनके प्रति जो सोच अभी तक नहीं बदला है अभी भी लोग यही सोचते हैं कि नहीं आ मतलब है लड़कियों को मतलब अभी भी अगर पे रहना चाहिए या फिर अगर उनकी सागर बातचीत करती है तो कुछ गलत ही कर रही है उनके अगर वह किसी लड़के से बात कर रही है तो उनके रिलेशन है आखिर वह अच्छी लड़की नहीं है अगर वह देर रात तक कहीं से काम करके या फिर कुछ नहीं आ रही है फिर घूम रही है तो वह लोगों को लगता है कि या नहीं मतलब वो अच्छी कैरेक्टर की नहीं है उन लोगों के प्रति जो सोच है अभी तक लड़कियों को लेकर वह नहीं बदला
Helo vibhaag to aaj aap ka savaal hai ki ladakiyon ke lie aatmanirbhar hone ke baavajood bhee kaun see cheejen aaj bhee unako yah nahin badal paee hai to likhie aur ladakiyon ko aajakal padhane likhane ke lie diya jaata hai naukaree karane ke lie diya jaata hai door-door tak matalab sunane ke lie ejukeshan lene ke lie unhen bhee aporchunitee milee hai lekin unake prati jo soch abhee tak nahin badala hai abhee bhee log yahee sochate hain ki nahin aa matalab hai ladakiyon ko matalab abhee bhee agar pe rahana chaahie ya phir agar unakee saagar baatacheet karatee hai to kuchh galat hee kar rahee hai unake agar vah kisee ladake se baat kar rahee hai to unake rileshan hai aakhir vah achchhee ladakee nahin hai agar vah der raat tak kaheen se kaam karake ya phir kuchh nahin aa rahee hai phir ghoom rahee hai to vah logon ko lagata hai ki ya nahin matalab vo achchhee kairektar kee nahin hai un logon ke prati jo soch hai abhee tak ladakiyon ko lekar vah nahin badala

Porshia Chawla Ban Bolkar App
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मनोवैज्ञानिक, हैप्पीनेस कोच, ट्रेनर (सॉफ्ट स्किल्स/कॉर्पोरेट)
2:44
निर्भर होने के बावजूद भी यह अपेक्षा की जाती है कि स्त्रियों को ही घर संभालना है उन्हें कोई घर के काम करने में कोई खाना बनाना है यह चीज आदमी नहीं बदली है तो अगर वह पढ़ना चाहती हैं आगे बढ़ना चाहती है काम करना चाहती है तो उनकी निजी मामला है और उसमें लोग दखल अब नहीं दे रहे हैं उनको करने दे रहे हैं लेकिन वह अपेक्षा कहीं नहीं गई है कि बाकी के काम जो है जो स्त्री के हिस्से में आते थे वह आज भी उसको करनी है तो बहुत बार परिवारों में ऐसा देखा गया है कि उसकी मदद नहीं की जाती है उसको ताने दिए जाते हैं और यह अपेक्षा की जाती है कि भाई तुमको जो करना है वह तुम देखते बैठे हो तुम करो हम ने मना नहीं किया लेकिन हमारे यह जो काम है यह जो घर के काम है चाहे वह साफ सफाई के हूं खाना बनाने को है यह तुमको करनी पड़ेगी या समाज में बनाके रखनी है और मेहमानों की मेहमान नवाजी करनी है या बाकी के हमारे कल्चर फॉलो करने हैं जो बाकी के 1050 ती है वह तुमको करते रह नहीं पड़ेगी काफी बदलाव आए हैं बहुत हद तक बाय पास नहीं है जिसे लेकिन फिर भी एक जो मिडल क्लास फैमिली है जो एक जिसमें अपेक्षाएं भी हैं बहुत महत्वकांक्षी भी हैं और बहुत सपने भी है सब के लड़कों की भी है लड़कियों के भी हैं परिवार वालों की भी उसके चलते कभी कभी फिर स्ट्रेस आता है टेंशन क्रिएट होती है ऐसी सिचुएशन क्रिएट होती है जहां पर शिक्षा जाता है तो वह भी चीजें हैं जिनको हम नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं और कहीं ना कहीं वो जब बेसिक सोच है उसमें बदलाव लाने की जरूरत है कि एक इंसान को इंसान के जब से देखी थी उसके क्या भावनाएं हैं क्या उसके टैलेंट है क्या उसको करना है मैं तो कांक्षा है तो एक बालन क्रिएट करना बहुत जरूरी है कि बाकी की एक्टिविटीज भी इंपोर्टेंट है और हमारे सर्वाइकल के लिए वह चीजें भी करनी जरूरी है लेकिन सिर्फ एक ही पक्ष या एक ही व्यक्ति से उसकी अपेक्षा रखना यह गलत है तो सभी को मिलजुलकर सभी काम करने चाहिए जिससे अगर फाइनेंसियल एक लेडी प्रोवाइड कर रही है फैमिली को तो बाकी की फैमिली को भी बाकी के घर के कामों में उसका हाथ बढ़ाना चाहिए उसमें हिस्सा लेना चाहिए और यह नहीं सोचना चाहिए कि यह मेरा काम नहीं है तो लेडीस का काम है यह सोच कहीं ना कहीं बदलाव लाने की जरूरत है मूलभूत और 1 दिन में एक इंसान से तो नहीं होगा लेकिन हम शुरुआत कर सकते हैं कहीं ना कहीं अपने स्तर पर कि हम सहयोग लेना शुरू करें बहुत बार हम ही सहयोग नहीं ले रहे हैं हमें अकेले करते जा रहे हैं तो दूसरों का सहयोग ले उनकी मदद नहीं हम से काम करवाना सीखे और एक बैलेंस मेंटेन करना सीखे कभी-कभी हमको नीति भी इस्तेमाल करनी पड़ती है धन्यवाद
Nirbhar hone ke baavajood bhee yah apeksha kee jaatee hai ki striyon ko hee ghar sambhaalana hai unhen koee ghar ke kaam karane mein koee khaana banaana hai yah cheej aadamee nahin badalee hai to agar vah padhana chaahatee hain aage badhana chaahatee hai kaam karana chaahatee hai to unakee nijee maamala hai aur usamen log dakhal ab nahin de rahe hain unako karane de rahe hain lekin vah apeksha kaheen nahin gaee hai ki baakee ke kaam jo hai jo stree ke hisse mein aate the vah aaj bhee usako karanee hai to bahut baar parivaaron mein aisa dekha gaya hai ki usakee madad nahin kee jaatee hai usako taane die jaate hain aur yah apeksha kee jaatee hai ki bhaee tumako jo karana hai vah tum dekhate baithe ho tum karo ham ne mana nahin kiya lekin hamaare yah jo kaam hai yah jo ghar ke kaam hai chaahe vah saaph saphaee ke hoon khaana banaane ko hai yah tumako karanee padegee ya samaaj mein banaake rakhanee hai aur mehamaanon kee mehamaan navaajee karanee hai ya baakee ke hamaare kalchar pholo karane hain jo baakee ke 1050 tee hai vah tumako karate rah nahin padegee kaaphee badalaav aae hain bahut had tak baay paas nahin hai jise lekin phir bhee ek jo midal klaas phaimilee hai jo ek jisamen apekshaen bhee hain bahut mahatvakaankshee bhee hain aur bahut sapane bhee hai sab ke ladakon kee bhee hai ladakiyon ke bhee hain parivaar vaalon kee bhee usake chalate kabhee kabhee phir stres aata hai tenshan kriet hotee hai aisee sichueshan kriet hotee hai jahaan par shiksha jaata hai to vah bhee cheejen hain jinako ham najarandaaj nahin kar sakate hain aur kaheen na kaheen vo jab besik soch hai usamen badalaav laane kee jaroorat hai ki ek insaan ko insaan ke jab se dekhee thee usake kya bhaavanaen hain kya usake tailent hai kya usako karana hai main to kaanksha hai to ek baalan kriet karana bahut jarooree hai ki baakee kee ektiviteej bhee importent hai aur hamaare sarvaikal ke lie vah cheejen bhee karanee jarooree hai lekin sirph ek hee paksh ya ek hee vyakti se usakee apeksha rakhana yah galat hai to sabhee ko milajulakar sabhee kaam karane chaahie jisase agar phainensiyal ek ledee provaid kar rahee hai phaimilee ko to baakee kee phaimilee ko bhee baakee ke ghar ke kaamon mein usaka haath badhaana chaahie usamen hissa lena chaahie aur yah nahin sochana chaahie ki yah mera kaam nahin hai to ledees ka kaam hai yah soch kaheen na kaheen badalaav laane kee jaroorat hai moolabhoot aur 1 din mein ek insaan se to nahin hoga lekin ham shuruaat kar sakate hain kaheen na kaheen apane star par ki ham sahayog lena shuroo karen bahut baar ham hee sahayog nahin le rahe hain hamen akele karate ja rahe hain to doosaron ka sahayog le unakee madad nahin ham se kaam karavaana seekhe aur ek bailens menten karana seekhe kabhee-kabhee hamako neeti bhee istemaal karanee padatee hai dhanyavaad

Harender Kumar Yadav Bolkar App
Top Speaker,Level 33
सुनिए Harender जी का जवाब
As School administration & Principal
2:36
लड़कियों के लिए हाथ निर्भर होने के बावजूद भी कौन सी चीजें हैं आज भी उनके लिए नहीं बदल पाए बात आपकी सही है आज लिंगभेद हम कह सकते हैं जेंडर डिस्क्रिमिनेशन आज भी उपलब्ध है कार्यक्षेत्र में जहां जिस कार्य क्षेत्र में वह काम कर रही है और दूसरा है कि कितने भी लड़कियां आत्मनिर्भर हो गई है अभी उनको फ्रीडम आजादी नहीं मिली अपने कार्यक्षेत्र नंबर वन शिफ्ट में डे नाइट में डिफरेंस है बहुत सारे लोग हैं जो शिफ्ट में लड़कियों के लिए कंफर्टेबल नहीं होते हैं दूसरा कार्यक्षेत्र नजदीकी या दूर की हो तीसरा है आपने कि कहीं न कहीं अपने पार्टनर से उनके प्रति सकारात्मक पहलू नहीं ठीक ही बार डिस्क्रिमिनेशन पाया गया है क्या क्षेत्र में महिला और पुरुष की जबकि दोनों एक जगह काम करते हैं और अभी हमारी समाज की मानसिकता भी थोड़ी तरह से नहीं कर पाई और कुछ सेक्सुअल वायलेंस पाए गए हैं खासकर के लड़कियों या महिलाओं के प्रति जो दुर्भाग्यपूर्ण है कि तौर पर इस तरह का बैलेंस तो है ही नहीं दर्शाता है कि सामाजिक रुप से किसी तरह से हुई और इस तरह का बैलेंस कर पाया जाता है तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है और होना तो नहीं चाहिए लेकिन है इनके साथ तो कभी कभी इनका जो कदम है वह पीछे खींच ले तो निश्चित तौर पर जिस कार्य क्षेत्र में काम कर रहे हैं चाहे वह एक बिजनेसमैन के रूप में काम कर रही हूं या छोटे छोटे हैं उनको एक स्वतंत्रता और आजादी मिलनी चाहिए अगर काम कर रही हैं जॉब अपॉर्चुनिटी है उनके निश्चित तौर पर झंडा डिस्टर्ब नहीं होना चाहिए जहां पर दूसरे की अपने कलीग्स द्वारा यहां बड़े ऑफिसर के द्वारा करीबी सेक्सुअल वायलेंस किया सेक्सुअल एब्यूज एसईसी स्कूल में हो तो शायद बेहतरीन कर सकती है लड़कियां इन सारी चीजों के दबाव में वह काम कर रहे हैं निश्चित तौर पर
Ladakiyon ke lie haath nirbhar hone ke baavajood bhee kaun see cheejen hain aaj bhee unake lie nahin badal pae baat aapakee sahee hai aaj lingabhed ham kah sakate hain jendar diskrimineshan aaj bhee upalabdh hai kaaryakshetr mein jahaan jis kaary kshetr mein vah kaam kar rahee hai aur doosara hai ki kitane bhee ladakiyaan aatmanirbhar ho gaee hai abhee unako phreedam aajaadee nahin milee apane kaaryakshetr nambar van shipht mein de nait mein dipharens hai bahut saare log hain jo shipht mein ladakiyon ke lie kamphartebal nahin hote hain doosara kaaryakshetr najadeekee ya door kee ho teesara hai aapane ki kaheen na kaheen apane paartanar se unake prati sakaaraatmak pahaloo nahin theek hee baar diskrimineshan paaya gaya hai kya kshetr mein mahila aur purush kee jabaki donon ek jagah kaam karate hain aur abhee hamaaree samaaj kee maanasikata bhee thodee tarah se nahin kar paee aur kuchh seksual vaayalens pae gae hain khaasakar ke ladakiyon ya mahilaon ke prati jo durbhaagyapoorn hai ki taur par is tarah ka bailens to hai hee nahin darshaata hai ki saamaajik rup se kisee tarah se huee aur is tarah ka bailens kar paaya jaata hai to yah durbhaagyapoorn hai aur hona to nahin chaahie lekin hai inake saath to kabhee kabhee inaka jo kadam hai vah peechhe kheench le to nishchit taur par jis kaary kshetr mein kaam kar rahe hain chaahe vah ek bijanesamain ke roop mein kaam kar rahee hoon ya chhote chhote hain unako ek svatantrata aur aajaadee milanee chaahie agar kaam kar rahee hain job aporchunitee hai unake nishchit taur par jhanda distarb nahin hona chaahie jahaan par doosare kee apane kaleegs dvaara yahaan bade ophisar ke dvaara kareebee seksual vaayalens kiya seksual ebyooj eseesee skool mein ho to shaayad behatareen kar sakatee hai ladakiyaan in saaree cheejon ke dabaav mein vah kaam kar rahe hain nishchit taur par

Mohitrajput Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए Mohitrajput जी का जवाब
Unknown
0:39
लड़कियों के लिए हाथ में ले लो होने के बाद भी कुछ चीजें ऐसी है जो बदल लोगों की सोच पर अभी भी लोगों की खूब सोच गंदी है मतलबी बहुत ज्यादा विश्वास बहुत है वो कभी पीछे नहीं हटते बहुत ज्यादा मैं तो यह कहूंगा कि लड़कियां जो है ना वह बहुत ज्यादा हिम्मत वाली हो तुम और हम लड़के तो बहुत ज्यादा बेकार होते हैं मेरे साथ में बदलाव की सोच खराब है मेरे साथ
Ladakiyon ke lie haath mein le lo hone ke baad bhee kuchh cheejen aisee hai jo badal logon kee soch par abhee bhee logon kee khoob soch gandee hai matalabee bahut jyaada vishvaas bahut hai vo kabhee peechhe nahin hatate bahut jyaada main to yah kahoonga ki ladakiyaan jo hai na vah bahut jyaada himmat vaalee ho tum aur ham ladake to bahut jyaada bekaar hote hain mere saath mein badalaav kee soch kharaab hai mere saath

Rahul kumar Bolkar App
Top Speaker,Level 44
सुनिए Rahul जी का जवाब
Unknown
0:12
लड़कियों के लिए आत्मनिर्भर होने के बावजूद कौन सी चीजें आज भी उनके लिए नहीं बदल पाई है दोस्तों एक ही चीज है वह यह है कि वह महिलाएं वह काम कर रहे इस चीज का जो गाना है वह नहीं बदल पाया है
Ladakiyon ke lie aatmanirbhar hone ke baavajood kaun see cheejen aaj bhee unake lie nahin badal paee hai doston ek hee cheej hai vah yah hai ki vah mahilaen vah kaam kar rahe is cheej ka jo gaana hai vah nahin badal paaya hai

Navnit Kumar Bolkar App
Top Speaker,Level 11
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QUALITY ENGINEER
1:38
देखिए जहां तक मुझे लगता है लड़की आज आत्मनिर्भर हो गई है काफी हद तक आर्मी में एयरफोर्स में मेडिकल में अजय डॉक्टर इन अच्छे कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर मतलब है जहां लड़कियां नहीं है लेकिन लड़कियों के लिए एक चीज नहीं बदली है तो वह है मैं देखता हूं कि आज भी लड़के उनकी खूबसूरती का पढ़ाई करते लेकिन पता नहीं क्यों रिस्पेक्ट देना जरूरी नहीं समझते हैं मैं तो लड़के भी काम कर रहे हैं उतना ही कमा रहे हैं जितनी लड़के लेकिन उनके मन में एक वह रिस्पेक्ट वाली फीलिंग कम पाई जाती है अभी भी वह सोचने की वह लड़के हैं तो दायित्व उनके ऊपर ही सबसे ज्यादा है और वही समाज को चला लड़कों की सोच अभी भी है जबकि ऐसा सोच नहीं होना चाहिए अगर कोई लड़की कमा रही है और आपकी फैमिली को भी वैल्यू देती है समाज को वैल्यू देती तो आपको भी उसको भैलू देना चाहिए कि इसका फीलिंग रखिए यह नहीं कि यहां काम निकाल लिए और फिर बात करता हूं न्यूज इंट्रो वाला चीज नहीं होना चाहिए आप रिस्पेक्ट तो आप रिस्पेक्ट दोगे तो उधर से आपको इतना प्यार और इतना सम्मान मिलेगा कि लाइफ में आप उसको संभाल नहीं पाओगे आप एक बार दिल से किसी को रिस्पेक्ट देखो तो देखो आपको कितना प्यार मिलता खुद फील करोगे थैंक यू
Dekhie jahaan tak mujhe lagata hai ladakee aaj aatmanirbhar ho gaee hai kaaphee had tak aarmee mein eyaraphors mein medikal mein ajay doktar in achchhe kampanee mein sophtaveyar injeeniyar matalab hai jahaan ladakiyaan nahin hai lekin ladakiyon ke lie ek cheej nahin badalee hai to vah hai main dekhata hoon ki aaj bhee ladake unakee khoobasooratee ka padhaee karate lekin pata nahin kyon rispekt dena jarooree nahin samajhate hain main to ladake bhee kaam kar rahe hain utana hee kama rahe hain jitanee ladake lekin unake man mein ek vah rispekt vaalee pheeling kam paee jaatee hai abhee bhee vah sochane kee vah ladake hain to daayitv unake oopar hee sabase jyaada hai aur vahee samaaj ko chala ladakon kee soch abhee bhee hai jabaki aisa soch nahin hona chaahie agar koee ladakee kama rahee hai aur aapakee phaimilee ko bhee vailyoo detee hai samaaj ko vailyoo detee to aapako bhee usako bhailoo dena chaahie ki isaka pheeling rakhie yah nahin ki yahaan kaam nikaal lie aur phir baat karata hoon nyooj intro vaala cheej nahin hona chaahie aap rispekt to aap rispekt doge to udhar se aapako itana pyaar aur itana sammaan milega ki laiph mein aap usako sambhaal nahin paoge aap ek baar dil se kisee ko rispekt dekho to dekho aapako kitana pyaar milata khud pheel karoge thaink yoo

Archana Mishra Bolkar App
Top Speaker,Level 22
सुनिए Archana जी का जवाब
Housewife
0:53
हेलो एवरीवन आपका प्रश्न है लड़कियों के लिए आत्मनिर्भर होने के बावजूद भी कौन सी ऐसी चीजें हैं जो उनके लिए नहीं बदल पाई है तो फ्रेंड्स लड़कियां कितनी भी आत्मनिर्भर हो जाएं लेकिन उनके लिए बहुत सारी चीजें हैं जो अभी भी नहीं बदल पाई हैं जैसे की लड़कियां रात में समय बाहर काम करती हैं तो उन्हें हमेशा डर बना रहता है और समाज में लोग उन्हें बुरी दृष्टि से देखते हैं वह भी एक समस्या है और लड़कियों के लिए जैसे उनकी शादी हो जाती है उसके बाद यह घुंघट प्रथा और यह समाज में दहेज प्रथा यह बहुत सारी चीजें जो नहीं बदल पाई और लड़कियों को शादी के बाद लोगों के साथ बुरा व्यवहार किया जाता है वह भी नहीं बदल पाए हैं यह सब बातें हैं जो लड़कियों के लिए आज भी बहुत बुरी प्रथाएं चल रही हैं ऐसा नहीं होना चाहिए तो फ्रेंड्स आपको जवाब पसंद आए तो लाइक करें धन्यवाद
Helo evareevan aapaka prashn hai ladakiyon ke lie aatmanirbhar hone ke baavajood bhee kaun see aisee cheejen hain jo unake lie nahin badal paee hai to phrends ladakiyaan kitanee bhee aatmanirbhar ho jaen lekin unake lie bahut saaree cheejen hain jo abhee bhee nahin badal paee hain jaise kee ladakiyaan raat mein samay baahar kaam karatee hain to unhen hamesha dar bana rahata hai aur samaaj mein log unhen buree drshti se dekhate hain vah bhee ek samasya hai aur ladakiyon ke lie jaise unakee shaadee ho jaatee hai usake baad yah ghunghat pratha aur yah samaaj mein dahej pratha yah bahut saaree cheejen jo nahin badal paee aur ladakiyon ko shaadee ke baad logon ke saath bura vyavahaar kiya jaata hai vah bhee nahin badal pae hain yah sab baaten hain jo ladakiyon ke lie aaj bhee bahut buree prathaen chal rahee hain aisa nahin hona chaahie to phrends aapako javaab pasand aae to laik karen dhanyavaad

डा. इन्दु प्रकाश सिंह  Bolkar App
Top Speaker,Level 33
सुनिए डा. जी का जवाब
शिक्षण-कार्य, कालेज शिक्षा में प्राचार्य हूँ
2:41
लड़कियों के लिए आप निर्भर होने के बावजूद भी कौन सी चीजें आज भी उनके लिए नहीं बदल पाए थे कि कुछ तो प्राकृतिक है वह पत्नी बनेगी सबसे अपने बच्चे की मां बनेगी उसे संभाल लेगी और जो आंतरिक जिम्मेदारियों उनकी जिम्मेदारी है इससे तो वह मुक्त हो नहीं पाई और मुक्त होना संभव ही नहीं है क्योंकि कार्य का जो बंटवारा किया गया है और जो इनकी प्रकृति पर गई है उसमें यही है कि खेतों में काम करना मजदूरी करना कि पुरुषों का काम कहीं अधिक है अलग महिलाएं भी करने लगी है आपने तो और भेजो घर की आंतरिक जिम्मेदारियां भोजन बनाना घर को संभालना झाड़ू पोछा करना यह कहीं न कहीं महिलाओं की जिम्मेदारी रही है और परंपराएं बन गई है कि औरत इन कामों को करती है और साथ में आपको बताया है महिला कितनी भी बड़ी पोस्ट पर पहुंच जाएं विवाह करने के बाद में उसे ही बनना रमापति नहीं बन सकता है समझे आप और बच्चे को पालने पहुंचने की जिम्मेदारी भी उसी की होती कि बच्चा कर दूध पिएगा तो फिटिंग माही कर पाएगी मैंने उसका शरीर उस हिसाब से बना हुआ है तो कुछ प्राकृतिक और कुछ परंपरागत और यह ध्यान रखकर चलें परंपरा जो है वह क्षमता के अनुसार ढल चुकी है मैं जहां रहता हूं वह देखता हूं कि बहुत से बच्चे हैं जो कर्म लेकिन घर में अगर भैंस हैं तो उनको संभालने का उनका गोबर हटाने का काम उनका दूध निकालने का काम महिलाएं करती हैं बाकी उनके लिए चार आदि जुटाने का काम पुरुष करते हैं लेकिन गोबर हटाना बहनों को धूल ना उन्हें पानी पिलाना उनका दूध निकालना यह काम औरतें करती हैं भले ही पुरुष वहां पे कर बैठा रहे या इस उतारे लेकिन काम वही करेंगे तो कुछ प्राकृतिक संदर्भ है और कुछ परंपराएं हैं और कुछ मान्यताएं हैं तो ऐसे से पढ़ी लिखी महिलाएं जो है वह पूरी तरह मुक्त हो जाए उस संभव नहीं है समझे समझे आप और कहीं इसके लिए बहुत ज्यादा प्रयास भी नहीं हो रहा हालांकि यह जरूर है कब पुरुष मानसिकता बदली एकल परिवार आने के बाद संजय आपने गर्मी बहुत कुछ काम पुरुष भी करने लगे हैं समझे आपने जिन घरों में नौकर होते हैं और नौकर काम किया करते हैं
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