#धर्म और ज्योतिषी

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जब हमारे अंतरण में भगवान और कण-कण में भगवान है तो फिर हम मंदिरों में क्या करने जाते हैं?

Jab Hamare Antaran Mein Bhagwan Aur Kan Kan Mein Bhagwan Hai To Phir Hum Mandiron Mein Kya Karne Jate Hain
charu seth Bolkar App
Top Speaker,Level 88
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Think and speak
3:02
आपने प्रश्न पूछा जो हमारे अंतरंग में भगवान कण-कण में भगवान तो फिर हम मंदिर में क्या करने जाते हैं देखिए हम मंदिर में पहले तो मैं आपको बता दूं कि 60% लोग घूमने जाते हैं वह मंदिर में भगवान के दर्शन करने की नहीं जाते हैं वह सिर्फ घूमने जाते हैं मान लीजिए अगर हम वैष्णो देवी जा रहे हैं तो 40% ऐसे लोग होंगे जो वाकई में वैष्णो देवी माता के दरबार में उनकी प्रतिमा को देखने गया उनको महसूस करने जाते होंगे अपने आत्म संतुष्टि के लिए जाते होंगे लेकिन 60% लोग सिर्फ घूमने के लिए जाते हैं वहां से माता का रास्ता नापने के लिए जाते हैं क्योंकि देखे हमारे जब हम इतनी दूर कहीं से वैष्णो देवी पहुंचते तो हम जितना समय हम अपना लेकर जाते हैं ना उसमें से एक परसेंट भी हम वैष्णो देवी में जो हमारी माता है उनके सामने हमें बताने का समय ही नहीं मिलता हम इतना भी हमारे हमें समय नहीं दिया जाता कि हम जी भर के आंख खोल कर उनको देख पाए तो हम सिर्फ अपने आदमी संतुष्टि के लिए जाते हैं हम यह जानते हैं कि हमारे अंदर ईश्वर की भक्ति है ईश्वर हमारे कण-कण में समाया है उसके बाद में निकल जा रहे हैं तो वह सिर्फ और सिर्फ संतुष्टि के लिए जा रहे हैं क्योंकि वहां हम कितना उनको देख पाते सब जानते हैं और 4 एग्जांपल आफ शिरडी बाबा को ले लीजिए शिर्डी लोग कितने लोग शिर्डी जाते हैं आप इतनी दूर जाते हैं और वहां पर कितनी लाइने लगती है कितना घूम घूम के घूम घूम के जाना पड़ता है तब जाकर आप उसमें धीमा के सामने पहुंचते हैं जिसको देखने के लिए आपने इतनी दूरी पार की है लेकिन आपको चंद सेकेंड दिए जाते हैं और आपका प्रसाद लेकर फेंक दिया जाता है तो आप मुझे बताइए फिर आप क्या देखने के लिए आपसे दूर करने के लिए गए पहले इतनी दूरी पार करके एक आपका घूमना घूमना यह सब हो गया और दूसरी आपके आत्म संतुष्टि आपको इस बात की संतुष्टि मिल जाती है कि हां मैं ईश्वर के चरणों में अपनी हाजिरी लगाया हूं और मैंने उसको साक्षात देख लिया है चाहे मैंने उसको एक सेकेंड के लिए तूने देखा और तीसरी मैं आपको एक एग्जांपल बताती हूं कि लोग केदारनाथ बद्रीनाथ जाते हैं आप मुझे बताइए केदारनाथ बद्रीनाथ क्या आप जो भी मेरा आंसर सुन रहा होगा वह खुद से दिल से बताइएगा कि जब हम सोचते हैं कि जन्म केदारनाथ बद्रीनाथ चले जाते हैं भगना बाबा के दर्शन करके आते हैं लोगों के दिल में ही आता होगा वहां पर बर्फ गिरती है वहां पर कितना अच्छा व्यूज है हम फोटो खींच आएंगे वहां पे तो बड़ा अच्छा लगता है तो अब आप अपने मन में यह सोच कर बताइए कि क्या वाकई भगवान के दर्शन करने के लिए जा रहे हैं आप 40% ओके आप भगवान के दर्शन करने के लिए अपने आत्म संतुष्टि के लिए जा रहे हैं और 60% आप वहां घूमने जा रहे हैं अपनी फोटो खिंचवाने जा रहे हैं उस भी उसको महसूस करने जा रहे हैं उसी जगह पर अपना एक स्थान बदलने जा रहे हैं हो सकता है मेरी इन बातों को सुनते जो ब्लॉक बहुत ज्यादा भक्तिन वाले होते हैं इसमें उनको लगेगी मैं गलत बोल रही हूं लेकिन जैसा मुझे फील होता है ना उसी का आंसर उस तरीके से देते हैं एग्जांपल देखकर अगर आपको लगे कि मैंने कुछ गलत बोला है तो प्लीज मुझे माफ कर दीजिएगा और मेरे ख्याल से तो हम लोग मंदिर में सिर्फ और सिर्फ आत्म संतुष्टि के लिए जाते हैं बाकी हम सब जानते हैं कि भगवान हर कण में बसा है और मेरे ख्याल से तो आप जितनी ज्यादा दूसरों की सहायता करेंगे उतना ज्यादा भगवान खुद खुश हो जाते हैं उनको एक बिल्कुल भी इस बात की आवश्यकता नहीं होती कि आप इतनी दूर मत्था टेकने के लिए चरणों में 2 मिनट की हाजिरी लगा थैंक यू
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bolkar speaker
जब हमारे अंतरण में भगवान और कण-कण में भगवान है तो फिर हम मंदिरों में क्या करने जाते हैं?Jab Hamare Antaran Mein Bhagwan Aur Kan Kan Mein Bhagwan Hai To Phir Hum Mandiron Mein Kya Karne Jate Hain
anuj gothwal Bolkar App
Top Speaker,Level 22
सुनिए anuj जी का जवाब
9828597645
0:54
भगवान कण-कण में विराजमान है यह बात वह दिखता है किंतु परमात्मा को पर प्रगट करना हार्दिक ता है रतन के लिए जीतना भोजन आवश्यक है ठीक उसी प्रकार मन के लिए भजन भी उतर आया उसी का जैसा बिना भूख के समय होने पर भोजन कर लेते हैं वैसे ही मन पर ना लगने पर समय से भजन करना चाहिए अर्थात जसूद हो या कोई भी चीज में सुख शांति नहीं मिली है ना कहीं घूमने का मन नहीं करा तो एक बार मंदिर जब जाते हैं तो मंदिर में प्रवेश करते हैं तो हमें संतुष्ट नहीं आनंद प्राप्त होता है इसलिए हम मंदिर में जाते हैं और भगवान को प्रसाद चढ़ाते हैं
Bhagavaan kan-kan mein viraajamaan hai yah baat vah dikhata hai kintu paramaatma ko par pragat karana haardik ta hai ratan ke lie jeetana bhojan aavashyak hai theek usee prakaar man ke lie bhajan bhee utar aaya usee ka jaisa bina bhookh ke samay hone par bhojan kar lete hain vaise hee man par na lagane par samay se bhajan karana chaahie arthaat jasood ho ya koee bhee cheej mein sukh shaanti nahin milee hai na kaheen ghoomane ka man nahin kara to ek baar mandir jab jaate hain to mandir mein pravesh karate hain to hamen santusht nahin aanand praapt hota hai isalie ham mandir mein jaate hain aur bhagavaan ko prasaad chadhaate hain

bolkar speaker
जब हमारे अंतरण में भगवान और कण-कण में भगवान है तो फिर हम मंदिरों में क्या करने जाते हैं?Jab Hamare Antaran Mein Bhagwan Aur Kan Kan Mein Bhagwan Hai To Phir Hum Mandiron Mein Kya Karne Jate Hain
Umesh Upaadyay Bolkar App
Top Speaker,Level 33
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Life Coach | Motivational Speaker
6:56
जी आपने बहुत ही अच्छा सवाल किया और बहुत सारे लोगों के मन में यह ख्याल रहता है कि भाई हम मंदिर क्यों जाएं जब भगवान हमारे भीतर ही हैं तो तुझे अच्छी बात है आप अगर नहीं जाना चाहती तो मत जाइए कोई दिक्कत वाली बात नहीं है लेकिन भगवान को ढूंढने अगर आप मान दे जाते हैं तो वह भी सही वाली बात नहीं है लेटर जानते हैं ओके और आप बोलते हैं कि भगवान वहां मिलते नहीं है मेरा काम बनता नहीं है तो मंदिर क्यों जाओ भगवान तो मेरे अंदर है वगैरह वगैरह तो एक एक और बात तो सही है ना जो भगवान लोगों के अंदर है तो लोग गलत काम क्यों करते हैं मैं भगवान अगर हैं अंदर तो उनसे गलत काम काम क्यों करवा रहे हैं लेकिन को रहे हैं गलत था क्योंकि उनको उनकी मौजूदगी का एहसास ही नहीं है अब क्यों नहीं है ऐसा क्योंकि पता ही नहीं है अब पता क्यों नहीं है पता है इसलिए नहीं है क्योंकि भगवान साक्षात रहो आपने एक अप्रत्यक्ष रूप में या किसी भी तरीके से अंदर नहीं है जो हां भाई मैं हूं भाई गया ऐसा मत करो वैसा मत करो यह मत करो वह मत करो ऐसा कुछ भी नहीं है फिर बड़ी सिंपल सी बात है क्रिएचर ने सुप्रीम पावर नहीं जिसे हम ईश्वर भगवान बोलते हैं उन्होंने सृष्टि का निर्माण किया और उससे सही में हम भी आ गए और हमारी उत्पत्ति हुई और हमें एक फिजिकल फॉर्म दे दिया शरीर दे दिया जो कि बहुत ही सोफिस्टिकेटेड इंस्ट्रूमेंट के लिए डिवाइस के दीजिए मशीन के लिए वह है जो कि बहुत ही सोफिस्टिकेटेड यंत्र लगे हैं और बहुत सारे तो ऐसे हैं जिनके बारे में हमें खुद ही पता नहीं है और हम लगे अपने शरीर को चलाने और कोई ऐसे चलाते हैं कोई वैसे चलाता है लेकिन s2p किसी भी नहीं इतने भी नहीं पढ़ा हुआ यूजर मैनुअल इस बॉडी का किसी ने भी नहीं पढ़ा हुआ दिक्कत है यूजर मैनुअल है क्या हां है हमारे वेद हैं हमारे उपनिषद है हमारे रामचरितमानस वर्मा पिता बगैरा तो बाद में आए हैं और कहानी के गरीबों लिस्ट को बताने की कोशिश की गई है ओके बाय सवाल पर आते हैं जो आप बोल रहे थे हमारे अंतःकरण में भगवान है कि भगवान हमें इस तरीके से तो दिखते नहीं है समझ तो आते नहीं है फिजिकल फॉर्म में हम जो फिजिकल फॉर्म में देखते हैं तो हमारे शरीर में हालांकि देखा तो मैंने भी नहीं है हमारे शरीर में क्या है हमारे शरीर है जिसके अंदर आत्मा है बहुत ही दुख में सुख शांति स्तूप मिशन कहते हैं शरीर कई पदों का होता है सीट कैसे हैं उसे नियर कहते हैं वगैरा-वगैरा हमारे अंदर सुविधाएं हैं हमारे अंदर मन है आचार्य जब आप बोलते हैं तो रहते हैं आपका यह लेफ्ट साइड में बॉडी के हॉट व्यापम परिमार्जन इसको अफरीदी मत बोलिए खरीदे हैं सर में शरीर के दाहिने तरफ में होता है और यह भी सुख में होता है ऑपरेशन करके यारों शरीर को काटकर आप खरीदे को नहीं देख सकते हैं इसी तरीके से मन होता है मन भी सुख में होता है और बाकि आदमी परिजनों हमारी इमोशंस रही है वह वाला कहानी और इन सब को हमारे शरीर को आत्मा को बांधे रखती है वह होती है प्राण ओके जब किसी के प्रति होती है तो प्राण चले जाते हैं मन चला जाता है आत्मा चली जाती है मन जो है वह आत्मा का स्वरुप है और इसी तरह आत्मा जो है वह परमात्मा का स्वरुप है प्रतिबिंब है अंश है जो भी आप समझ लीजिए वह सब कुछ है और वह हमारे भीतर है अब होता यह है कि मन के कारण हम उस तक पहुंच नहीं सकते कोई रास्ता भी नहीं बताता कहीं पर अगर कहीं कुछ समझ भी आता है कि यहां यहां कुछ होता है तो हमारा मन पानी डालता है मन चंचल होता है ना तो बहुत सारी कहानी होती है और नेट से लिए होता है कि भाई डेफिनेटली परमात्मा के रूप में आत्मा है हमारे अंदर और हम कुछ और नहीं है हम वह आत्मा है जो कि इस शरीर में है शरीर एक वस्त्र जैसा है इस भजन में हमें यह वाला वस्त्र मिला है जब समय पूरा हो जाएगा जब से पुराने हो जाएंगे फटे पुराने हो जाएंगे हम यह वस्त्र छोड़ कर हम मतलब आत्मा यह वचन छोड़कर अपने लोग चली जाएगी फिर कर्मानुसार उसको एक और जीवन मिलेगा और उसको एक नया वस्त्र मिलेगा तो जी अब आप बोलते हैं मंदिर क्यों चाहते हैं या जाना चाहिए नहीं जाना चाहिए जी देखिए परमात्मा का अंश हमारे अंदर है जवान नमस्ते बोलते हैं इसका मतलब क्या होता है आई एक्नॉलेज द प्रेजेंट ऑफ डिवाइन विद न्यू बहुत हुई हो आपके अंदर जो जो देवी शक्ति है उसको मैं प्रणाम करता हूं और एवं अंतर यह होता है नमस्ते करने का मतलब जो हम बहुत पहले से जानते हैं बहुत पहले से करते हैं उसके उसका सिग्निफिकेंट हम भूल गए हैं और तुझे ऐसा है मंदिर वगैरह लोग इसलिए जाते थे या पहले समय में जो मंदिर बनते हुए भगवान को देखकर हां भगवान को मिलने जाना है ऐसा नहीं होता था वह मंदिर बनते थे स्पेसिफिक बनते थे जो मैट्रिक के लिए बहुत है लाइन होते थे इसलिए ताकि उसमें उन देवी देवताओं की या भगवान की एनर्जी इस स्थापित की जाए ओके प्राण प्रतिष्ठा होती थी मूर्तियों की वहां पर एक तरीके की स्पेसिफिक एनर्जी मिलती थी आपको और लोग सुबह काम पर जाने से पहले मंदिर होते हुए काम पर जाते थे या जहां भी जाना होता था ताकि पूरे अच्छा जब मैं उस एनर्जी से जिस एनर्जी में सराबोर होकर जा रहे हैं उस समय लोग मंदिर जाते थे बैठे थे ताकि जैसे उसने मोबाइल चार्जिंग पर लगा दो थोड़ा चाचा को जाता है बैठते थे थोड़ा चार्जिंग में जाता था और अपने आप को कनेक्टेड महसूस करते थे भगवान से और फिर या उस एनर्जी सोर्स और फिर जाते थे आज भी ऐसे बहुत सारे ऐसे मंदिर हैं आज तभी तो नहीं लेकिन बहुत सारे जहां पर आप ऐसा महसूस करेंगे मंदिर जाने को मैं मना नहीं करता आपको जाना चाहिए अगर आपको जाना अच्छा लगता है लेकिन वास्तव में देखा जाए तो आगे आप अपने आत्मा की तरफ अगर आप अपने अंदर जाने का प्रयास करेंगे अपने आपको जानने का प्रयास करेंगे तो वह ज्यादा बेहतर होता है जब आप ऐसा सोचते हैं थोड़ा व्यस्त ज्यादा रहते हैं गलत कर्म नहीं करते हैं धर्म के रास्ते पर चलते हैं तो आप डेफिनिटी परमात्मा के नजदीक चाहते हैं
Jee aapane bahut hee achchha savaal kiya aur bahut saare logon ke man mein yah khyaal rahata hai ki bhaee ham mandir kyon jaen jab bhagavaan hamaare bheetar hee hain to tujhe achchhee baat hai aap agar nahin jaana chaahatee to mat jaie koee dikkat vaalee baat nahin hai lekin bhagavaan ko dhoondhane agar aap maan de jaate hain to vah bhee sahee vaalee baat nahin hai letar jaanate hain oke aur aap bolate hain ki bhagavaan vahaan milate nahin hai mera kaam banata nahin hai to mandir kyon jao bhagavaan to mere andar hai vagairah vagairah to ek ek aur baat to sahee hai na jo bhagavaan logon ke andar hai to log galat kaam kyon karate hain main bhagavaan agar hain andar to unase galat kaam kaam kyon karava rahe hain lekin ko rahe hain galat tha kyonki unako unakee maujoodagee ka ehasaas hee nahin hai ab kyon nahin hai aisa kyonki pata hee nahin hai ab pata kyon nahin hai pata hai isalie nahin hai kyonki bhagavaan saakshaat raho aapane ek apratyaksh roop mein ya kisee bhee tareeke se andar 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moortiyon kee vahaan par ek tareeke kee spesiphik enarjee milatee thee aapako aur log subah kaam par jaane se pahale mandir hote hue kaam par jaate the ya jahaan bhee jaana hota tha taaki poore achchha jab main us enarjee se jis enarjee mein saraabor hokar ja rahe hain us samay log mandir jaate the baithe the taaki jaise usane mobail chaarjing par laga do thoda chaacha ko jaata hai baithate the thoda chaarjing mein jaata tha aur apane aap ko kanekted mahasoos karate the bhagavaan se aur phir ya us enarjee sors aur phir jaate the aaj bhee aise bahut saare aise mandir hain aaj tabhee to nahin lekin bahut saare jahaan par aap aisa mahasoos karenge mandir jaane ko main mana nahin karata aapako jaana chaahie agar aapako jaana achchha lagata hai lekin vaastav mein dekha jae to aage aap apane aatma kee taraph agar aap apane andar jaane ka prayaas karenge apane aapako jaanane ka prayaas karenge to vah jyaada behatar hota hai jab aap aisa sochate hain thoda vyast jyaada rahate hain galat karm nahin karate hain dharm ke raaste par chalate hain to aap dephinitee paramaatma ke najadeek chaahate hain

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जब हमारे अंतरण में भगवान और कण-कण में भगवान है तो फिर हम मंदिरों में क्या करने जाते हैं?Jab Hamare Antaran Mein Bhagwan Aur Kan Kan Mein Bhagwan Hai To Phir Hum Mandiron Mein Kya Karne Jate Hain
Harender Kumar Yadav Bolkar App
Top Speaker,Level 33
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As School administration & Principal
2:21
जब हमारे अंतरण में भगवान और कण कण में भगवान है तो फिर हम मंदिरों में क्या करने जाते हैं आपकी मर्जी है आप क्यों जाते हैं कैसे जाते हैं क्या कारण है विक्की जो मंदिर है उसका अस्तित्व अलग है उसका वास्तु शास्त्र उसका बनावट उस स्थान की उपयोगिता और कहीं ना कहीं हमारी पौराणिक ग्रंथों से पौराणिक कथाओं से वह कहीं नहीं जुड़े जो बड़े पुराने मंदिर और बाकी जो दूसरे मंदिर हैं वह कहीं नहीं गए हैं इस प्रतीक के रूप में बनाए गए हैं एक प्रतीक के रूप में की ताकि हम वहां बैठे शांति और सुकून से भगवान इस पूरे पार्क में भगवान क्या आप शांति सुकून से बैठ पाएंगे क्या अपने आप को मन को एकाग्र चित्त कर पाएंगे तो कहीं ना कहीं वह तो प्राण प्रतिष्ठा बैठाई जाती है उसमें कोई मूर्ति का प्रतिष्ठा की जाती है या कहीं न कहीं इस तरह से तो वहां पर हमें एक शांति सुकून उसका वास्तु शास्त्र और एक शांति का प्रतीक होता है और उसमें कहीं गई भगवान के स्वरूप को देखकर संबंध में मन को शांत सुकून करते हैं और कहते हैं कि हमारे अंदर जो बुराइयां हैं वह दूर हो जाएं जो भी कुछ है वह हमसे दूर हो शायद ही कारण है पर दोस्त भगवान मंदिरों के लिए नहीं होता का मंदिर में जाएंगे थे अगर आप सदाचारी हैं करते योगी हैं नैतिकता का पालन करने वाले हैं अपने कार्यों के प्रति जिम्मेदार हैं तो निश्चित तौर पर कहीं पर मंदिर में अब मैं जाने की जरूरत है आप अपने करता परायण रहिए देखिए आप सुकून से सही ढंग से अपनी जिंदगी जीते उसमें कुछ बनावट की जरूरत होती है
Jab hamaare antaran mein bhagavaan aur kan kan mein bhagavaan hai to phir ham mandiron mein kya karane jaate hain aapakee marjee hai aap kyon jaate hain kaise jaate hain kya kaaran hai vikkee jo mandir hai usaka astitv alag hai usaka vaastu shaastr usaka banaavat us sthaan kee upayogita aur kaheen na kaheen hamaaree pauraanik granthon se pauraanik kathaon se vah kaheen nahin jude jo bade puraane mandir aur baakee jo doosare mandir hain vah kaheen nahin gae hain is prateek ke roop mein banae gae hain ek prateek ke roop mein kee taaki ham vahaan baithe shaanti aur sukoon se bhagavaan is poore paark mein bhagavaan kya aap shaanti sukoon se baith paenge kya apane aap ko man ko ekaagr chitt kar paenge to kaheen na kaheen vah to praan pratishtha baithaee jaatee hai usamen koee moorti ka pratishtha kee jaatee hai ya kaheen na kaheen is tarah se to vahaan par hamen ek shaanti sukoon usaka vaastu shaastr aur ek shaanti ka prateek hota hai aur usamen kaheen gaee bhagavaan ke svaroop ko dekhakar sambandh mein man ko shaant sukoon karate hain aur kahate hain ki hamaare andar jo buraiyaan hain vah door ho jaen jo bhee kuchh hai vah hamase door ho shaayad hee kaaran hai par dost bhagavaan mandiron ke lie nahin hota ka mandir mein jaenge the agar aap sadaachaaree hain karate yogee hain naitikata ka paalan karane vaale hain apane kaaryon ke prati jimmedaar hain to nishchit taur par kaheen par mandir mein ab main jaane kee jaroorat hai aap apane karata paraayan rahie dekhie aap sukoon se sahee dhang se apanee jindagee jeete usamen kuchh banaavat kee jaroorat hotee hai

bolkar speaker
जब हमारे अंतरण में भगवान और कण-कण में भगवान है तो फिर हम मंदिरों में क्या करने जाते हैं?Jab Hamare Antaran Mein Bhagwan Aur Kan Kan Mein Bhagwan Hai To Phir Hum Mandiron Mein Kya Karne Jate Hain
पुरुषोत्तम सोनी Bolkar App
Top Speaker,Level 33
सुनिए पुरुषोत्तम जी का जवाब
साहित्यकार, समीक्षक, संपादक पूर्व अधिकारी विजिलेंस
3:54
जब हमारे अंतर्मन में भगवान हैं और कण-कण में भगवान है तो फिर हम मंदिरों में क्या करने के लिए जाते हैं आप यह बताइए जब किताब में सब कुछ लिखा है तो आप स्कूल क्यों जाते हैं घर में आपके माता-पिता रहते हैं और जवाब नौकरी करने के लिए बाहर चले जाते तो बार बार अपने माता-पिता के दर्शन करने कमाते हैं अब बिना विश्वास ना हरि कथा आते ही भीना मोहना भाग गए बिना राम पद हो यह नदरई अनुराग अनुराग को बनाए रखना है तो दे वाले में उनके दर्शन करने के लिए जाना है वह भगवान उसे श्रद्धा भक्ति की परख करता है आपके अंतर्मन में कण-कण में भगवान स्थित है भगवान इसकी परीक्षा लेता है कि आपको लिखना जानते बने उस कण कण में आपने कभी मुझको ढूंढने की तलाशने की कोशिश भी की है आपने सुन लिया कि कण-कण में भगवान है वहां के कण-कण में भगवान है क्योंकि रावण के पास जब सीता जी थी तो उन्होंने क्या की किरण घास चौधरी और कहा तो बाय देहि यशो मेरे आवादकृपा रामसनेही उन्होंने तुरंत इसी प्रकार से मैं आपको बताऊं शंकर भगवान के 2 पुत्र थे एक कार्तिकेय जी और दूसरे गणेश जी अभी यह हुआ कि भाई प्रथम पूज्य के कैसे माना जाए कि मैं बड़ा हूं मैं बड़ा हूं प्रथम पूज्य मुझको चाहिए तो लगा नहीं भाई शंकर जी ने कहा भाई मैं परीक्षा लेता हूं मैं परीक्षा लेने के लिए उन्होंने कहा जो ब्रह्मांड के चक्कर लगा लेगा वह प्रथम पूज्य होगा अब गणेश जी के तो सवारी थी चूहा और कार्तिकेय की सवारी थी मोर मोर ताकतवर भी होता है उड़ना भी जानता है उत्तर कार्तिकेय जी बैठे हो ब्रह्मांड के चक्कर लगाने के लिए खुशी-खुशी घर में भरे हुए लेकिन गणेश जी तो विद्वान है उनका माता पिता के अंदर ही ब्रह्मांड समाया हुआ है जल्दी से उन्होंने अपने चूहे को पकड़ आपको चूहे के साथ साझा कर के माता-पिता के चक्कर लगाकर जाकर बैठ गए उन्होंने उनकी परीक्षा दी उनका भाई गणेश जी ने जो किया है अंतर्मन में अगर उनके भगवान नहीं होते अंतर्मन में अगर उनकी शक्ति नहीं होती तो इतना विचार करने के बाद वही ब्रह्मांड का पूरा चक्कर लगाने के लिए 24 घंटे के लिए चले जाते तो अंतर्मन जब आप इतनी शक्तिशाली अपने अंतर्मन को बना लेंगे कि आप कंकड़ में भगवान को मानने के लिए तैयार हो जाए भगवान के दर्शन करने के लिए तैयार है आपके अंदर एक आत्मा है आत्मा की तो आप बात मानते नहीं हैं वह कहता है कि भाई देखो कर्म कर्म प्रभाव विश्व रचि राखा जो जस करहिं सो तस फल चाक है अगर आप कर्म करना पर भरोसा रखते हैं तो सत्कर्म कीजिए सेट करना चाहिए आपको ईश्वर की प्राप्ति हो जाएगी लिखा तो यह भी कहा कि वर्क इस वरशिप कार ही पूजा है तो कितनी पूजा भगवान की करते हैं इन सब चीजों को देखते हुए यह तर्क और कुतर्क सुनना पढ़ करके क्योंकि गोस्वामी तुलसीदास जी ने कहा है कि जे श्रद्धा संभल रहित नहीं संतन कर 7 दिन का हो मानसी अगम्य तुझे नहीं ना प्रिय रघुनाथ बोलो जरा में चंद्र की जय किस लिए भगवान कण-कण में है आप इसको भरोसा मानिए लेकिन भगवान दिवाली में रहे दर्शक खंड के दर्शन आप कर लो दर्शन करने के लिए तो आपको दे वाले में ही जाना पड़ेगा माता पिता के दर्शन करने के लिए आपको दिल्ली से घर नहीं आना पड़ेगा कल माता-पिता को घर ले जाएगी आप मंदिर से अगर घर में उठा के लिए भगवान बुला सकते माता पिता गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागू पाय बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो बताए इसलिए कण-कण में भगवान है लेकिन देवालय में अगर उनकी पूजा करते हैं तो भगवान के अंत की श्रेष्ठता को है उसकी उनके जो आध्यात्मिक तार जो हैं वह आपको जरूर प्रभावित करते हैं
Jab hamaare antarman mein bhagavaan hain aur kan-kan mein bhagavaan hai to phir ham mandiron mein kya karane ke lie jaate hain aap yah bataie jab kitaab mein sab kuchh likha hai to aap skool kyon jaate hain ghar mein aapake maata-pita rahate hain aur javaab naukaree karane ke lie baahar chale jaate to baar baar apane maata-pita ke darshan karane kamaate hain ab bina vishvaas na hari katha aate hee bheena mohana bhaag gae bina raam pad ho yah nadaree anuraag anuraag ko banae rakhana hai to de vaale mein unake darshan karane ke lie jaana hai vah bhagavaan use shraddha bhakti kee parakh karata hai aapake antarman mein kan-kan mein bhagavaan sthit hai bhagavaan isakee pareeksha leta hai ki aapako likhana jaanate bane us kan kan mein aapane kabhee mujhako dhoondhane kee talaashane kee koshish bhee kee hai aapane sun liya ki kan-kan mein bhagavaan hai vahaan ke kan-kan mein bhagavaan hai kyonki raavan ke paas jab seeta jee thee to unhonne kya kee kiran ghaas chaudharee aur kaha to baay dehi yasho mere aavaadakrpa raamasanehee unhonne turant isee prakaar se main aapako bataoon shankar bhagavaan ke 2 putr the ek kaartikey jee aur doosare ganesh jee abhee yah hua ki bhaee pratham poojy ke kaise maana jae ki main bada hoon main bada hoon pratham poojy mujhako chaahie to laga nahin bhaee shankar jee ne kaha bhaee main pareeksha leta hoon main pareeksha lene ke lie unhonne kaha jo brahmaand ke chakkar laga lega vah pratham poojy hoga ab ganesh jee ke to savaaree thee chooha aur kaartikey kee savaaree thee mor mor taakatavar bhee hota hai udana bhee jaanata hai uttar kaartikey jee baithe ho brahmaand ke chakkar lagaane ke lie khushee-khushee ghar mein bhare hue lekin ganesh jee to vidvaan hai unaka maata pita ke andar hee brahmaand samaaya hua hai jaldee se unhonne apane choohe ko pakad aapako choohe ke saath saajha kar ke maata-pita ke chakkar lagaakar jaakar baith gae unhonne unakee pareeksha dee unaka bhaee ganesh jee ne jo kiya hai antarman mein agar unake bhagavaan nahin hote antarman mein agar unakee shakti nahin hotee to itana vichaar karane ke baad vahee brahmaand ka poora chakkar lagaane ke lie 24 ghante ke lie chale jaate to antarman jab aap itanee shaktishaalee apane antarman ko bana lenge ki aap kankad mein bhagavaan ko maanane ke lie taiyaar ho jae bhagavaan ke darshan karane ke lie taiyaar hai aapake andar ek aatma hai aatma kee to aap baat maanate nahin hain vah kahata hai ki bhaee dekho karm karm prabhaav vishv rachi raakha jo jas karahin so tas phal chaak hai agar aap karm karana par bharosa rakhate hain to satkarm keejie set karana chaahie aapako eeshvar kee praapti ho jaegee likha to yah bhee kaha ki vark is varaship kaar hee pooja hai to kitanee pooja bhagavaan kee karate hain in sab cheejon ko dekhate hue yah tark aur kutark sunana padh karake kyonki gosvaamee tulaseedaas jee ne kaha hai ki je shraddha sambhal rahit nahin santan kar 7 din ka ho maanasee agamy tujhe nahin na priy raghunaath bolo jara mein chandr kee jay kis lie bhagavaan kan-kan mein hai aap isako bharosa maanie lekin bhagavaan divaalee mein rahe darshak khand ke darshan aap kar lo darshan karane ke lie to aapako de vaale mein hee jaana padega maata pita ke darshan karane ke lie aapako dillee se ghar nahin aana padega kal maata-pita ko ghar le jaegee aap mandir se agar ghar mein utha ke lie bhagavaan bula sakate maata pita guru govind dooo khade kaake laagoo paay balihaaree guru aapane govind diyo batae isalie kan-kan mein bhagavaan hai lekin devaalay mein agar unakee pooja karate hain to bhagavaan ke ant kee shreshthata ko hai usakee unake jo aadhyaatmik taar jo hain vah aapako jaroor prabhaavit karate hain

bolkar speaker
जब हमारे अंतरण में भगवान और कण-कण में भगवान है तो फिर हम मंदिरों में क्या करने जाते हैं?Jab Hamare Antaran Mein Bhagwan Aur Kan Kan Mein Bhagwan Hai To Phir Hum Mandiron Mein Kya Karne Jate Hain
Dr.Nitin Pawar, D.M S.(Management) Bolkar App
Top Speaker,Level 33
सुनिए Dr.Nitin जी का जवाब
Kisan,Journalist,Marathi Writer, Social Worker,Political Leader.
4:33
जब हम हमारे अंतरंग में भगवान और कन कन में भगवान है तो तेरा मंदिरों में क्यों जाते हैं फिर भी हम मन मंदिर में इसलिए जाते हैं कि हमें इस पर विश्वास नहीं है कि कन कन में भगवान है हर चीज में भगवान है हर व्यक्ति में भगवान है और वह हम पचा नहीं पाते इसलिए हमको ही पैक शॉर्टकट का मार्ग ढूंढते अरुण आप अपने मन को बुलाते हैं लेकिन भवन तक पहुंचना इस मार्ग से नहीं होता है इसके लिए बड़ी करना कि जब भी होती है वह करो ना जागृत करने के लिए बहुत बड़े त्याग की जरूरत पड़ती है और इंसान तो उन्हें सर्विस रूप से स्वार्थी है और कृत्रिम रूप से भी उसको स्वास्थ्य बनाया गया है तो अपने स्वार्थ को छोड़ कर क्या करना वह नहीं चाहता है उसको वह सुरक्षित नहीं समझता है और उनसे दिल लगा हुआ है वह तोड़ नहीं पा रहा है और अपने आप को ही फसा रहे हैं और दूसरों को भी पता नहीं है कि कुछ कर रहा है लेकिन ऐसा नहीं होता है कोई फर्क नहीं रहा है यह एक अपने मन की मक्कारी है क्योंकि हम कण-कण में भगवान है तो हमें बहुत सारे लोगों को तो लोगों से गले लगाना पड़ेगा लगना पड़ेगा अभी हम नहीं चाहते हैं बहुत कुछ करना पड़ेगा अरे हमारा मन नहीं चाहता है हमारी परंपरा नहीं चाहती हमारे संस्कार नहीं चाहते इसलिए जानबूझकर भी आदमी मंदिरों में जाता है और इसलिए किसी को भी कोई रिजल्ट नहीं मिला हुआ पाते वैसे अच्छी स्थिति बनी हुई रहती है और वह चलती रहती भगवान भी कोई जी शादी चीज नहीं है वह सब जानती है और उसके नियमों के अनुसार सब चलता है तो मंदिर में जाकर भी कुछ नहीं होगा एक तरफ अगर सैकड़ों लोगों को लूटते हो और दूसरी तरफ भगवान के मंदिर में कुछ सोने की चीज दान देते हो या कुछ खाने के लिए जेट हो गरीबों को भगवान संतुष्ट नहीं कर पाए उसका कर्म जो है उसका जो उसके जो बात है वह इससे भी नहीं होते लेकिन इंसान को ऐसा लगता है कि इसको भगवान माफ करेगा लेकिन भगवान अगर है तो इससे मां से बात नहीं करता है पिछले कुछ दिन पहले श्री कृष्ण जी जो है उन्होंने यह बात बताई थी यार वह पति क्यों ध्यान देते हैं करोड़ों में उससे भी उनका फायदा नहीं होगा अगर उन्होंने तो से बात किए हुए धन्यवाद
Jab ham hamaare antarang mein bhagavaan aur kan kan mein bhagavaan hai to tera mandiron mein kyon jaate hain phir bhee ham man mandir mein isalie jaate hain ki hamen is par vishvaas nahin hai ki kan kan mein bhagavaan hai har cheej mein bhagavaan hai har vyakti mein bhagavaan hai aur vah ham pacha nahin paate isalie hamako hee paik shortakat ka maarg dhoondhate arun aap apane man ko bulaate hain lekin bhavan tak pahunchana is maarg se nahin hota hai isake lie badee karana ki jab bhee hotee hai vah karo na jaagrt karane ke lie bahut bade tyaag kee jaroorat padatee hai aur insaan to unhen sarvis roop se svaarthee hai aur krtrim roop se bhee usako svaasthy banaaya gaya hai to apane svaarth ko chhod kar kya karana vah nahin chaahata hai usako vah surakshit nahin samajhata hai aur unase dil laga hua hai vah tod nahin pa raha hai aur apane aap ko hee phasa rahe hain aur doosaron ko bhee pata nahin hai ki kuchh kar raha hai lekin aisa nahin hota hai koee phark nahin raha hai yah ek apane man kee makkaaree hai kyonki ham kan-kan mein bhagavaan hai to hamen bahut saare logon ko to logon se gale lagaana padega lagana padega abhee ham nahin chaahate hain bahut kuchh karana padega are hamaara man nahin chaahata hai hamaaree parampara nahin chaahatee hamaare sanskaar nahin chaahate isalie jaanaboojhakar bhee aadamee mandiron mein jaata hai aur isalie kisee ko bhee koee rijalt nahin mila hua paate vaise achchhee sthiti banee huee rahatee hai aur vah chalatee rahatee bhagavaan bhee koee jee shaadee cheej nahin hai vah sab jaanatee hai aur usake niyamon ke anusaar sab chalata hai to mandir mein jaakar bhee kuchh nahin hoga ek taraph agar saikadon logon ko lootate ho aur doosaree taraph bhagavaan ke mandir mein kuchh sone kee cheej daan dete ho ya kuchh khaane ke lie jet ho gareebon ko bhagavaan santusht nahin kar pae usaka karm jo hai usaka jo usake jo baat hai vah isase bhee nahin hote lekin insaan ko aisa lagata hai ki isako bhagavaan maaph karega lekin bhagavaan agar hai to isase maan se baat nahin karata hai pichhale kuchh din pahale shree krshn jee jo hai unhonne yah baat bataee thee yaar vah pati kyon dhyaan dete hain karodon mein usase bhee unaka phaayada nahin hoga agar unhonne to se baat kie hue dhanyavaad

bolkar speaker
जब हमारे अंतरण में भगवान और कण-कण में भगवान है तो फिर हम मंदिरों में क्या करने जाते हैं?Jab Hamare Antaran Mein Bhagwan Aur Kan Kan Mein Bhagwan Hai To Phir Hum Mandiron Mein Kya Karne Jate Hain
pushpanjali patel Bolkar App
Top Speaker,Level 33
सुनिए pushpanjali जी का जवाब
Student with micro finance bank employee
2:06
साले जब हमारे अंतर्मन में भगवान हर कण-कण में भगवान है तो फिर मंदिरों में क्या करने जाते हैं लेकिन झूठी आशा की किरण है जो भी हमारी मातृभाषा को हटाकर आशा की किरण चलाता है कोई तो कोई माध्यम होना चाहिए उसी प्रकार से हर कण में भगवान है लेकिन उसे पहचान कराने वाला और उस पर ध्यान लगाने वाला भी तो चाहिए मंदिर में जाते हैं तो हमें ऐसा लगता है कि हमारे मन में ऐसा लगता है कि होते हैं लेकिन हमें यह नहीं हो सकता है आदत होती है उसको देख कर के हमारे मन में यह भावना है कि भगवान है जिसकी वजह से हमारा ध्यान ठीक प्रकार से होता था भगवान की प्रतिमा को देखेंगे कि बिना वह कहीं भी जफर तप करने लगते हैं अंतर्मन में ही भगवान है लेकिन तू जगाने वाला उनसे पहचान बनाने वाला कोई न कोई माध्यम होता है जैसे कि एक व्यक्ति है और फिर से पढ़ना और कितना पड़ता है करते हम पढ़ नहीं पाते तो कोई ना कोई माध्यम होता है जिसकी वजह से हम सलाम करते हैं ठीक है भगवान की भक्ति करने जाते हैं मंदिर आप लोग खुश रहिए देखो
Saale jab hamaare antarman mein bhagavaan har kan-kan mein bhagavaan hai to phir mandiron mein kya karane jaate hain lekin jhoothee aasha kee kiran hai jo bhee hamaaree maatrbhaasha ko hataakar aasha kee kiran chalaata hai koee to koee maadhyam hona chaahie usee prakaar se har kan mein bhagavaan hai lekin use pahachaan karaane vaala aur us par dhyaan lagaane vaala bhee to chaahie mandir mein jaate hain to hamen aisa lagata hai ki hamaare man mein aisa lagata hai ki hote hain lekin hamen yah nahin ho sakata hai aadat hotee hai usako dekh kar ke hamaare man mein yah bhaavana hai ki bhagavaan hai jisakee vajah se hamaara dhyaan theek prakaar se hota tha bhagavaan kee pratima ko dekhenge ki bina vah kaheen bhee japhar tap karane lagate hain antarman mein hee bhagavaan hai lekin too jagaane vaala unase pahachaan banaane vaala koee na koee maadhyam hota hai jaise ki ek vyakti hai aur phir se padhana aur kitana padata hai karate ham padh nahin paate to koee na koee maadhyam hota hai jisakee vajah se ham salaam karate hain theek hai bhagavaan kee bhakti karane jaate hain mandir aap log khush rahie dekho

bolkar speaker
जब हमारे अंतरण में भगवान और कण-कण में भगवान है तो फिर हम मंदिरों में क्या करने जाते हैं?Jab Hamare Antaran Mein Bhagwan Aur Kan Kan Mein Bhagwan Hai To Phir Hum Mandiron Mein Kya Karne Jate Hain
Nikhil Arora Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए Nikhil जी का जवाब
Unknown
2:28
जो अंतरण में भगवान है कण-कण में भगवान हैं तो मंदिरों में जाने की क्या जरूरत है क्यों बनाया के मंदिर देखिए यह प्रश्न इसी प्रकार का हो गया कि जब कण-कण में ऑक्सीजन है पूरे वायुमंडल में ऑक्सीजन है तो उस मरीज बेड पर लेटा है उसे सिलेंडर के माध्यम से तारों के माध्यम से पाइपों के माध्यम से ऑक्सीजन देने की क्या जरूरत हो तो खुद ले सकता है पूरे वायुमंडल में ऑक्सीजन है क्यों नहीं लेता या फिर पानी किस से बनता है हाइड्रोजन से और ऑक्सीजन हाइड्रोजन और ऑक्सीजन दोनों वायुमंडल पर विद्यमान है उन्हें गिलास भर की जग में पानी डाल के कुंए से पानी निकालकर तुम्हें उसे पीने की क्या जरूरत है इसी प्रकार से जब संतुष्टि की भूख होती है जब परमात्मा की भूख होती है तो मंदिर ट्रुथ का काम करता है जान को बैठाने के लिए वह पूरी तरह से कौन सी क्रीटेड होता है पुरानी जो मंदिर होते थे उनके अंदर एक ऊर्जा का प्रभाव होता है पवित्र वातावरण होता है वह तो कहीं भी हो सकता है लेकिन एक तरह के साधन की तरह काम करते हैं जो हमारे और परमात्मा के मिलन के बीच में एक पुल का काम करो परमात्मा और आपके बीच में एक पुल का काम करते हैं जोड़ने का तो उत्तर वैसे इस प्रश्न की कोई नया प्रश्न नहीं है इसमें हिंदू धर्म में ही कई हजारों सालों से लड़ाई तो नहीं कहूंगा लेकिन हां बातचीत होती चली आ रही है जो वैद्वादी होते हैं आतंकवादी होते हैं वैद्वादी या आर्य समाज वाले यह मंदिर नहीं जाते मंदिर नहीं पूछते हैं खुद के अंदर भगवान होने का विश्वास रखते हैं दूसरी तरफ जो भक्ति योग के हैं वह अपने कृष्ण की राम की मूरत बनाकर उनकी पूजा करते हैं वह समझते हैं कि वह कृष्णा की मूरत नहीं वह कृष्ण और और जो भक्त है उसे जोड़ने का एक माध्यम है यह मैसेज नया प्रश्न नहीं था लेकिन हां इसके उत्तर कहीं विद्वानों ने दिए हैं मैंने अपने उत्तर देने का प्रयास किया यदि उत्तर पसंद आया हो तो चैनल को जरूर सब्सक्राइब कीजिए गा मेरे और मैं आपके सवालों का जवाब नहीं देता रहूंगा धन्यवाद
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bolkar speaker
जब हमारे अंतरण में भगवान और कण-कण में भगवान है तो फिर हम मंदिरों में क्या करने जाते हैं?Jab Hamare Antaran Mein Bhagwan Aur Kan Kan Mein Bhagwan Hai To Phir Hum Mandiron Mein Kya Karne Jate Hain
Manish Kumar  Bolkar App
Top Speaker,Level 22
सुनिए Manish जी का जवाब
Unknown
2:58
प्रश्न है जब हमारे अंतरण में भगवान और कण-कण में भगवान है तो फिर हम मंदिर में क्या करने जाते हैं बिल्कुल सही बात है भगवान जो है हर जगह हैं और एक फेमस भजन भी है मेरे मन में राम मेरे तन में राम रोम रोम में राम हरे राम सुमिर ले ध्यान लगा ले छोड़ जगत के काम में जय श्री राम लिखें इस पृथ्वी पर जो है मंदिरों की स्थापना काफी प्राचीन समय से चली आ रही है तो मंदिर क्या है मंदिर वह पवित्र स्थान है जहां पर भगवान को स्थापित किया गया अर्थात वह जगह को पवित्र स्थल के रूप में निर्माण किया गया है क्योंकि हम जानते हैं कि भगवान का क्या आकार है क्या रंग है क्या रूप है हमने देखा नहीं है रामायण में महाभारत में जो मनुष्य रोल निभाते हैं हम उन्हीं को समझते हैं या हमारे घरों में मंदिरों में जो मूर्तियां जो पोस्टर लगे हुए हैं हम उनको दे करके यह समझते हैं कि यह भगवान है एक वानर का रूप को हम भगवान हनुमान मानते हैं और इसी प्रकार मनुष्य जब सुसज्जित रूप में जो है भगवान का एक काल्पनिक दृश्य को हमारे सामने प्रकट करता है तो हम यह समझते हैं कि यहां रामायण में जो रोल किया गया जो नायक ने रोल किया है वह भगवान श्रीराम के जैसा ही है तो इस प्रकार से मंदिर की स्थापना इसलिए की गई कि वह दृश्य रूप में हमें दिखाई दे और हम सभी जानते हैं कि हर एक चीज का जो है इस पृथ्वी पर एक निश्चित जगह बनाया गया है जैसे रहने के लिए तो हम कहीं भी सो सकते हैं लेकिन हम घर का निर्माण इसलिए किए हैं हर जो है हमें हर एक प्रकार के मौसम वातावरण से बचाएगा हमें चोर डाकुओं से बचाएगा एक सुरक्षित माहौल का विकास होगा इसलिए हम घर का स्थापना किए थे ठीक वैसे ही जो है मंदिर की स्थापना किया क्या मेरे समझ से तो यही इसका उत्तर होना चाहिए धन्यवाद
Prashn hai jab hamaare antaran mein bhagavaan aur kan-kan mein bhagavaan hai to phir ham mandir mein kya karane jaate hain bilkul sahee baat hai bhagavaan jo hai har jagah hain aur ek phemas bhajan bhee hai mere man mein raam mere tan mein raam rom rom mein raam hare raam sumir le dhyaan laga le chhod jagat ke kaam mein jay shree raam likhen is prthvee par jo hai mandiron kee sthaapana kaaphee praacheen samay se chalee aa rahee hai to mandir kya hai mandir vah pavitr sthaan hai jahaan par bhagavaan ko sthaapit kiya gaya arthaat vah jagah ko pavitr sthal ke roop mein nirmaan kiya gaya hai kyonki ham jaanate hain ki bhagavaan ka kya aakaar hai kya rang hai kya roop hai hamane dekha nahin hai raamaayan mein mahaabhaarat mein jo manushy rol nibhaate hain ham unheen ko samajhate hain ya hamaare gharon mein mandiron mein jo moortiyaan jo postar lage hue hain ham unako de karake yah samajhate hain ki yah bhagavaan hai ek vaanar ka roop ko ham bhagavaan hanumaan maanate hain aur isee prakaar manushy jab susajjit roop mein jo hai bhagavaan ka ek kaalpanik drshy ko hamaare saamane prakat karata hai to ham yah samajhate hain ki yahaan raamaayan mein jo rol kiya gaya jo naayak ne rol kiya hai vah bhagavaan shreeraam ke jaisa hee hai to is prakaar se mandir kee sthaapana isalie kee gaee ki vah drshy roop mein hamen dikhaee de aur ham sabhee jaanate hain ki har ek cheej ka jo hai is prthvee par ek nishchit jagah banaaya gaya hai jaise rahane ke lie to ham kaheen bhee so sakate hain lekin ham ghar ka nirmaan isalie kie hain har jo hai hamen har ek prakaar ke mausam vaataavaran se bachaega hamen chor daakuon se bachaega ek surakshit maahaul ka vikaas hoga isalie ham ghar ka sthaapana kie the theek vaise hee jo hai mandir kee sthaapana kiya kya mere samajh se to yahee isaka uttar hona chaahie dhanyavaad

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