#भारत की राजनीति

nav kishor aggarwal Bolkar App
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1:41
तारा का सवाल है कि चलो मान लेते हैं चाय बेचना कोई मजबूरी नहीं होगी लेकिन देश बेचना कौन सी मजबूरी है आपकी क्या राय है दोस्त बहुत अच्छा सवाल है आपका और मैं आपकी राय से बहुत सहमत हूं कहते हैं कि चलो मान लेते हैं चाय बेचना कोई मजबूरी नहीं होगी तो चाय बेचता था उसे अपनी और अपने परिवार की चिंता थी सिर्फ उसकी ख्वाहिश है छोटी थी कम ठीक हो ऐसे लेकिन जैसे ही मैं नाम तो खैर नहीं लूंगा आज आपके जैसा आपने कोड वर्ड का पूछा कि मैं भी आपको कोड में जवाब दूंगा कि अब वह शख्स एक बहुत ऊंचे ओहदे पर पहुंच गया है और जैसे कि आपने कहा है कि वह इस समय देश भी भेज रहा है तो वाक्य में देश बेच रहा है और इस समय उसकी जो ख्वाहिश है वह बहुत बड़े लेवल पर है जिस पर चाय बेचता था उस वक्त उसे सिर्फ अपना और अपने परिवार का पेट पालना था लेकिन अब वह देश बेच रहा है और एक ऊंचे ओहदे पर है तो अब वह अपनी आने वाली 14 पीढ़ियों को सुरक्षित करना चाहता है का जो लालच है वह बढ़ गया है उसका जो लक्ष्य है वह बढ़ गया है जैसे-जैसे यह कसूर है जिंदगी का जैसे जैसे आप जीवन में जवाब छोटे लेवल पर कार्य करते हैं कम पैसा कमाते हैं कम आमदनी करते तो आप के खर्चे भी उसी प्रकार होते हैं लेकिन जैसे-जैसे आप अपने जीवन में आगे बढ़ते जाएंगे मुझे वह दे पर आएंगे बढ़िया कार्य करेंगे अच्छा काम करने लग जाएंगे आमदनी बढ़ जाएगी तो हिसाब से आपके खर्चे भी बढ़ जाएंगे तो यह तो जिंदगी का एक असूल है दोस्त और वही असूल वह आदमी अपना रहा है कि उसका आर्डर बड़ा है और उसकी आमदनी बढ़ी है तो जाहिर बातों से खर्चे भी बड़े होंगे तो उस हिसाब से कुछ चल रहा है इसीलिए को देश बेच रहा है धन्यवाद

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Abhishek Kumar Bolkar App
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आपके सवालो का जवाब देना ही मेरा काम है..👩‍💻😊🙂😊🙂😊🙂
0:05
इसको भी मानी दीजिए कोई मजबूरी होगी तो देश को बेच रहा है मोदी धन्यवाद

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  • desh ko kaun bech rha hai, kin karano se desh ko bechne ki baat saamne aai hai
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