#भारत की राजनीति

bolkar speaker

आज की बात किसान आंदोलन और सुप्रीम कोर्ट के बीच की.?

Aaj Ki Baat Kisaan Aandolan Aur Supreme Court Ke Beech Ki
Subhas Srivastava  Bolkar App
Top Speaker,Level 66
सुनिए Subhas जी का जवाब
Unknown
4:15
नमस्कार दोस्तों बोल कर मैं आपका एक बार फिर से स्वागत है आज के बाद किसान आंदोलन और सुप्रीम कोर्ट के बीच की मैंने पिछले पहले भी एक ऑडियो बनाया था और आप लोगों ने सुना भी था कि जो किसान यहां पर बैठे हैं वह केवल में किसान नहीं है इक्का-दुक्का किसान है बाकी सब पॉलिटिक्स करने वाले हैं और उनके फैमिली से या पैसे देकर बनाए जा रहे हैं अपने बहुत सारे और सोशल मीडिया पर वीडियो देखे होंगे और फोटो भी देखेंगे नमाज पढ़ती ढेरों ढेरों औरतें हैं 0 लोग हैं वह क्यों रहा है सबको राजनीति चमकाने सुप्रीम कोर्ट ने सेम टू सेम वही बात कही मध्यस्थता वाली के कमेटी बनेगी और उसमें रिटायर्ड से जून के कुछ किसानों के जो है तरफ के लोग होंगे कुछ सरकार के लोग होंगे कुछ ऐसे भी लोग होंगे जो समर्थन देते हैं इस बिल को तो ओवरऑल कमेटी में ही हो सका भी तो यही कर रही थी मैं अगर आज रिकॉर्ड कर रहा हूं यह ऑडियो दौर की वार्ता चर्च की कोई रिजल्ट नहीं निकला नोनी 90 हो जाएगा तब भी कोई रिजल्ट नहीं आएगा रोने वाले को जगाया जा सकता कि जग रहा है उसको कैसे लगाया जा सकता है जो मानने को मतलब मानेंगे तब ना जमीन को कोई उसमें प्रॉब्लम हो तो मेरे को सिर्फ और सिर्फ प्रॉब्लम क्रिएट करना चाह रहे थे मैं उनको चिढ़ है इस गवर्नमेंट से और 16 को जो है कुछ ऐसा करना चाह रहा है कि इनकी और छवि जो है पूरे ऑल वर्ल्ड में जो है मीडिया स्कोर कवर कवरेज दे ए लोगों को जो है वह मैच शास्त्र क्या कहता है सहानुभूति मिले तो सुप्रीम कोर्ट ने यही कहा कि अब मैं उन्होंने जो है पहली बात तो खींच देता है कि सरकार जो है यह मुद्दा चालू करने में असफल रही और बात करने के लिए कहा वही गवर्नमेंट भी तेरी थी तो बात करी जाए तो वही सुप्रीम कोर्ट ने भी वही किया जो गवर्नमेंट कर रही थी ठीक है और किसान जो है वह अपने अड्डे पर अड़े हुए हैं जिद पर अड़े हुए हैं कि हमें जो है वह वापस सरकार ले और आप लोगों ने देखा होगा बहुत सारी में ट्रैक्टर जेसीबी 26 को ऐसा कुछ करने की प्लान में है दूसरा देसी शाहीन बाग हुआ था फिर एक दिल्ली में दंगा हो गया था तो यह सब अमीर और इसमें कुछ एमपीएफआई वाले मिले हुए हैं कुछ रेगिस्तान वाले मिले हुए हैं कुछ ना कुछ जो है ऐसा करना है कि भारत की छवि धूमिल हो और उसकी जो है जो करंट गवर्नमेंट उसको उसकी जो है छवि धूमिल हो बस इसके अलावा इनको कुछ नहीं चाहिए और अपनी उनकी राय नीति है भारत की जो है भारत को यह नीचा दिखाने में इनको बहुत रोहतक पड़ता है तो मैं अगर हम अपनी जो है अब रखो तो मेरी भी यही है कि यह अब किसान आंदोलन रहा नहीं है सिर्फ और सिर्फ सीधे-सीधे अगर बात करें तो गुंडागर्दी है और इसमें जो है कोई ऐसा दिल में ऐसा कोई प्रावधान नहीं जो किसान के अगेंस्ट में जाता हूं लेकिन फिर भी यह जिद पर अड़े हुए हैं और अगर कोई गवर्नमेंट का वह जो इसको सुने अधिकारी या गवर्नमेंट में कोई हो मेंबर उसका समय तो उसे जो है कोई इस बातों को देखना चाहिए और बहुत सारी जो है मैं सोशल मीडिया जो चैनल है वह भी इस चीज को कवर कर रहे हैं कि यह सब लोग कुछ बड़ा प्लान कर रहे हैं कि कि इन लोगों के दिमाग में कुछ चला जाता कुछ लोग मरेंगे नहीं तब तक हिंदू की प्यास बुझेगी नहीं यह वामपंथ का जो इतिहास रहा है कि इन लोगों ने खून से ही पेज है प्यास बुझाई है अपनी तो यह है तो इस पर खा लिया जाए और बस मुझे यही कहना था बाकी मैं अपने लहसुन को बता दूं कि मैं मेरा यूट्यूब चैनल है सुभाष की बात तो प्लीज यूट्यूब पर जाएं शुभ आशीर्वाद सर्च करें और उसको भी सब्सक्राइब करें धन्यवाद
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आज की बात किसान आंदोलन और सुप्रीम कोर्ट के बीच की.?Aaj Ki Baat Kisaan Aandolan Aur Supreme Court Ke Beech Ki
Ashok Bolkar App
Top Speaker,Level 55
सुनिए Ashok जी का जवाब
कृषक👳💦
6:16
कुछ तो सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार की सुनवाई के दौरान किसान आंदोलन को लेकर सरकार के रवैए पर निराशा जताते हुए कड़ी फटकार लगाई थी सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा था कि आंदोलनकारी किसानों की समस्या सुनकर उन्हें दूर करने के मकसद में सरकार बिल्कुल विफल रही है कि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपनी टिप्पणियों से सरकार की खूब किरकिरी कराई मंगलवार को उसी के फैसले ने सरकार को इतनी बड़ी राहत दे दी तो आइए जानते हैं कुछ बिंदुओं में आकर कृषि कानूनों का भविष्य तय करने की जिम्मेदारी अपने हाथों में लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को राहत दी तो कैसे जूजू किसान आंदोलन अगले दिन में प्रवेश कर रहा था क्यों तो सरकार की सोच और उसके रबर यह पर संदेह गहराता जा रहा था सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इसका जिक्र किया और सरकार को आंदोलनकारी के किसानों के प्रति अपना रवैया बदलने को कहा उसने सोमवार को जो कहा उसे मंगलवार को कर भी देखा या सिर्फ अदालत ने कहा था कि अगर सरकार ने कृषि कानूनों के अमल पर रोक नहीं लगाई तो वह खुद इसे स्थगित कर देगा और यही हुआ भी अब सरकार यह कह सकती है कि जब देश में कृषि कानून लागू ही नहीं हुआ था तो किसान आंदोलन की जरूरत ही नहीं है मतलब आप किसान आंदोलन से सरकार का कोई लेना-देना नहीं रह गया उस पर आंदोलन स्थल पर शांति और सुरक्षा बनाए रखने की जिम्मेदारी जरूर है लेकिन आंदोलनकारी किसानों को मनाने समझाने की नैतिक जिम्मेदारी से उसे छुटकारा जरूर मिल गया इसमें दो राय नहीं कि किसान आंदोलन सरकार के गले की फांस बन चुकी थी जो हर दिन थोड़ी और कश्ती जा रही थी सरकार ने से मुक्ति पा ने के लिए किसान संगठनों से एक कई दौर की बात की क्योंकि किसान कानूनों की वापसी की मांग से टस से मस नहीं हुई इसलिए हर दौर की बातचीत बेनतीजा रही और हर बार यही उम्मीद जताई जा रही थी कि अगले दौर की वार्ता में कुछ न कुछ रास्ता जरूर निकल जाएगा लेकिन अब सरकार को इस सब से छुटकारा मिल गया आप उस पर किसानों से बातचीत करने की जिम्मेदारी नहीं रही इसलिए अब उसे अगले दौर की बातचीत के लिए किसानों को मनाने फिर बातचीत के प्रस्तावों की रूपरेखा तय करने और इस तरह तमाम तरह की माथापच्ची से सरकार मुक्त हो गई आंदोलनकारी किसानों के शब्दों में कहें तो सरकार को कृषि कानूनों के प्रति समर्थन जुटाने का भी एक लंबे लाना पड़ रहा था अलग-अलग किसान संगठन केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से मिल रहे थे और उसे कृषि कानूनों को वापस नहीं लेने की अपील कर रहे थे अब इसे सरकार की तरह से सोचे तो उसके लिए दुविधा की स्थिति थी कि वह आकर किसान संगठनों से कौन से समूह की बात माने किसकी ना एक समूह के डी कानूनों को रद्द करने की मांग से देख नहीं रहा था तो दूसरा समूह कानूनों को निरस्त करने की स्थिति में देशव्यापी आंदोलन की धमकी दे रहा था ऐसे में सरकार जरूर सांसत में फंसी थी उसके लिए कानूनों को वापस लेना भी इतना आसान नहीं रहा था विपक्षी दल किसान आंदोलन के बहाने सरकार को घुटने के बल आने की हर संभव कोशिश में जुटे थे सोमवार को जब सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की क्लास ली तो मानो विपक्षी खेमे में खुशी की लहर दौड़ गई सभी ने सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों में अपने लिए बड़ा मौका देखा और आगे की रणनीति में जुट गए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने तो कई विपक्षी नेताओं से बात भी कर डाली और उन से अनुरोध किया कि सभी विपक्षी दल किसान आंदोलन के मुद्दे पर एकजुट हो जाएं लेकिन सुप्रीम कोर्ट की ओर से कमेटी गठित होते ही सरकार की भूमिका सिमट गई ऐसे में सवाल उठता है कि विपक्ष आप रणनीति बनाए तो किसके खिलाफ अगर विपक्ष ने किसान आंदोलन को हवा देने की कोशिश की तो सीधा-सीधा संदेश जाएगा कि सुप्रीम कोर्ट का रास्ता नहीं है और वह सरकार के खिलाफ नहीं सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ अभियान चला रहा है आंदोलन में शामिल किसान आत्महत्या कर आए भी सुन रहे थे कई किसानों ने आंदोलन स्थल पर जान देने की कोशिश की और उसमें कामयाबी हो गए तो कई अन्य किसानों की ठंड और दूसरे स्वास्थ्य कारणों से मौत भी हो गई अरे किसान की मृत्यु से किसान पर सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा था और उसकी छवि खराब हो रही थी अब किसानों की मौत तो दो सुप्रीम कोर्ट पर जाएगा और यह पूछा जाएगा सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी को रिपोर्ट देने के लिए 2 महीने की मियाद तय की है इस बीच किसानों ने जान दी या देने की कोशिश की तो इसके लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराना थोड़ा मुश्किल हो जाएगा सुप्रीम कोर्ट के हंसते अपने सरकार को किसान आंदोलन को लेकर आम जनता की नाराजगी से बचा लिया आंदोलन के दिन बढ़ने के साथ-साथ सरकार की छवि को धीरे-धीरे ही सही बटर लगने जा रहा था यह बात अलग है कि एक बार ऐसा भी है जो किसान आंदोलन को साजिश के नजरिए से देखता है और उससे कड़ाई से निपटने का पक्षधर है लेकिन एक बड़े वर्ग में सरकार के रवैए से नाराजगी भी पनप रही थी अब जब के सुप्रीम कोर्ट के पाले में चला गया है तो आप लोग भी कमेटी की गतिविधियों की चर्चा करेंगे ना कि सरकार की राबेय की यानी आम जनता के बीच होने वाली चर्चा के केंद्र में आप सुप्रीम कोर्ट उसकी कमेटी आ गई किसान संगठनों के रुको अभी जांचा परखा जाएगा लेकिन सरकार चीन से हट गई धन्यवाद
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