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shabnam khatun Bolkar App
Top Speaker,Level 33
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Student
2:43
हेलो जी बाजा बाजी कि भारत में अंग्रेजी प्रयोग बढ़ने के क्या कारण हैं क्या यह समस्या है समस्या है तो समाधान क्या है अब हमारे भारत में भी भारतीयों की कंपनी से बोलोगे आ कर डिलीट करते हैं वह आपको जब यहां से पढ़ते हैं तो अगर आपको बाहर का भी ऑफर आता है जॉब करने का तो बाहर कंट्री की जाते तो वहां पर आपको कमीनी केशन के लिए इंग्लिश आना चाहिए बहुत जरूरी होता है क्योंकि उन लोगों को इंग्लिश में ट्रैक्टर के साथ करना होगा बातचीत करना होता तो आपके लिए इंग्लिश बहुत जरूरी होता है इंडिया में भी देखिए बहुत सारे ऐसे बड़े-बड़े कंपनी में जहां पर बाहर के कमरे में से डील करना पड़ता आपको उनसे बातचीत करना पड़ता आपको जाना पड़ता है या फिर वह लोग आते हैं तो क्या से कंपनी के कितने नाम को दिया जाता हूं तो समझ में आ जाना होता है तो इंग्लिश में आपको बातचीत करना इसलिए इतना ज्यादा प्रयोग बड़ी गया है क्योंकि इंग्लिश जो है वर्क इंटरनेशनल लैंग्वेज दुनिया के किसी भी कोने में अगर काम करना चाहते तो आप ले आना चाहिए अपने बातचीत करने के लिए बताना चाहिए यह समस्या तो मुझे नहीं लगती है क्योंकि जितना ज्यादा मतलब इंटरेस्ट बढ़ाते हैं जितना आपको लैंग्वेज इतनी ज्यादा चाहते हो तो ज्यादा अच्छा होता कई अलग-अलग जगह हुई मतलब जाकर रहना जैसे कि मैं उड़ीसा की नहीं हूं लेकिन उड़ीसा में मतलब बहुत सालों से हम लोग मतलब यहां पर रहते हैं तो उड़िया जाना थोड़ा उड़िया में हर जगह छुप जाते तो हर जगह आपको हिंदी में या फिर और कोई लैंग्वेज में से नहीं मिलता है तो यार बहुत जरूरी होता तो घर में भी अगर सीख ले रहे थे मेरे लिए कोई नुकसान तो नहीं अच्छा और फायदेमंद तरह तरह की लैंग्वेज सीखना है इंग्लिश हिंदी और बाकी लोकल लैंग्वेज खराब और कोई बात देखना चाहिए तो मेरे साथ से समस्या नहीं है लेकिन को इंग्लिश आता है वही बहुत ज्यादा इंटेलिजेंट है पढ़ाई लिखाई और इंटेलिजेंट को बोलूंगी लैंग्वेज से जांच करते अगर एक इंसान हिंदी में बोल रहा है लेकिन उनके पास बहुत नॉलेज है लेकिन लोग उनकी बात नहीं सुनते लेकिन कोई इंग्लिश मैं बोल रहा है तू सोच ले यह ज्यादा तेज है भाई उनको को इतना नॉलेज नहीं हो बनने लायक में जाता लोगों को समझना चाहिए कि यह सब एक भाषा है भाषा समझ नहीं कर सकते कि किसी के पास कितना लोन कितना नहीं तो यह थोड़ा ध्यान देने की जरूरत है यहां पर अगर यह थोड़ी बहुत मुझे समस्या लगते ही लोगों से जल्द करते हैं नहीं चौक पर सोचते हैं कि जिन इंग्लिश आती है वह हो जाता है और जिन हिंदी आती वह इतना कुछ नहीं है तो यह थोड़ी बहुत समस्या दो इसे ठीक करने के लिए लोगों की सोच को बदलने की जरूरी है मनसा से हम जज नहीं कर सकते भाषा सब के अलग-अलग होते अपने-अपने भाषा होते हैं तो हां सब पूरी तरह से अलग होता जो बोलचाल करते और जो मारा नॉलेज है जो जितना हम जानते जानकारियां हम किसी भी भाषा मेरे प्रदान कर सकते हैं

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Bhavesh Yadav Bolkar App
Top Speaker,Level 44
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West Bengal India is Great
1:49
देखिए जो भारत में इंग्लिश लैंग्वेज का ज्यादा जो चारण हो गया समस्या कुछ नहीं कह सकते आज की डेट में अंदर इतना सब कुछ क्या हो रहा है सब कुछ हो रहा है कि हमारे बच्चों को हम सब को हिंदी जानना बहुत जरूरी है हिंदी समझ आती हमारी जितने सारे धार्मिक चीजें वह सबको हमें जाना बहुत ज्यादा जरूरी है औरतों और बच्चों को हिंदी बोलना आना चाहिए और हिंदी का काउंटिंग भी करना आना चाहिए एक से लेकर सौ तक के बच्चे पढ़ भी उठना होता है तू जल्दी से निकल पाएगा तो यह सब प्रॉब्लम होता है क्योंकि यह इसका खुलासा हम लोगों को ध्यान देना चाहिए टीचर को ध्यान देना चाहिए और यह हमको हमें बोलना चाहिए टीचर को अगर ऐसा नहीं है अपने बच्चे में क्या प्रश्न पूछ लिया वह जवाब नहीं दे पाया वह 5 से 10 क्लास में पढ़ रहा है कि बहुत गलत चीज है शादी हमारी जो धर्म है उसे जाना बहुत ज्यादा जरूरी है तो यह सारी चीजों को आपको खुद को दादा को दादी को नाना को नानी को भैया को भाभी को जो भी आपके घर में सोचती हूं सबको ध्यान देना चाहिए मम्मी पापा को तो खास करके तुम क्योंकि मम्मी पापा चाहेंगे तो स्कूल में भी कंप्लेन कर सकते इस तरह से तो कर सकते तो उसका समस्या का समाधान यही है कि आप उसका ध्यान रखना चाहिए बाकी अंग्रेजी अगर बड़ा प्रॉब्लम मुझे नहीं लगता कि कहीं कोई दिक्कत नहीं है आप को ध्यान से किस बात का रखना क्या प्लेटफुल प्रेमिका को ना भूल जाए अपनी खुद की जो एक हम सब की जो मतलब हिंदू धर्म की जितनी सारी चीजें हैं वह सब नाम पूजा भगवान को ना पूछे कुछ ऐसे ना कोशिका में खड़ी रखना चाहिए
Dekhie jo bhaarat mein inglish laingvej ka jyaada jo chaaran ho gaya samasya kuchh nahin kah sakate aaj kee det mein andar itana sab kuchh kya ho raha hai sab kuchh ho raha hai ki hamaare bachchon ko ham sab ko hindee jaanana bahut jarooree hai hindee samajh aatee hamaaree jitane saare dhaarmik cheejen vah sabako hamen jaana bahut jyaada jarooree hai auraton aur bachchon ko hindee bolana aana chaahie aur hindee ka kaunting bhee karana aana chaahie ek se lekar sau tak ke bachche padh bhee uthana hota hai too jaldee se nikal paega to yah sab problam hota hai kyonki yah isaka khulaasa ham logon ko dhyaan dena chaahie teechar ko dhyaan dena chaahie aur yah hamako hamen bolana chaahie teechar ko agar aisa nahin hai apane bachche mein kya prashn poochh liya vah javaab nahin de paaya vah 5 se 10 klaas mein padh raha hai ki bahut galat cheej hai shaadee hamaaree jo dharm hai use jaana bahut jyaada jarooree hai to yah saaree cheejon ko aapako khud ko daada ko daadee ko naana ko naanee ko bhaiya ko bhaabhee ko jo bhee aapake ghar mein sochatee hoon sabako dhyaan dena chaahie mammee paapa ko to khaas karake tum kyonki mammee paapa chaahenge to skool mein bhee kamplen kar sakate is tarah se to kar sakate to usaka samasya ka samaadhaan yahee hai ki aap usaka dhyaan rakhana chaahie baakee angrejee agar bada problam mujhe nahin lagata ki kaheen koee dikkat nahin hai aap ko dhyaan se kis baat ka rakhana kya pletaphul premika ko na bhool jae apanee khud kee jo ek ham sab kee jo matalab hindoo dharm kee jitanee saaree cheejen hain vah sab naam pooja bhagavaan ko na poochhe kuchh aise na koshika mein khadee rakhana chaahie

DR.OM PRAKASH SHARMA Bolkar App
Top Speaker,Level 44
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Principal, RSRD COLLEGE OF COMMERCE AND ARTS
1:24
मिलते ही प्रयोग करने की क्या कहानी के समस्याओं पर चर्चा तो समाधान किया है क्या अंग्रेजी इंटरनेशनल अंतर्राष्ट्रीय भाषा है हर देश में अंग्रेजी भाषा का प्रयोग होता है चाहे वह कोई भी देश के किसी भी प्रकार का यहां पर यह मान कर चलिए भारत में जब सिंह विश्वविद्यालय शिक्षा का प्रसार हुआ है और इंग्लिश मीडियम स्कूलों का प्रसाद हुआ है तब से इंग्लिश का तेजी से विस्तार हुआ और साथ-साथ में आज बच्चे को इंग्लिश पढ़ना पसंद करते हैं बजाय हिंदी भाषा के क्योंकि इंग्लिश स्टेटस सिंबल बन गया सफलता का कारण बन गया है नौकरी परसों के लिए इंग्लिश एक तरह से अनिवार्य है और वास्तव में समस्या नहीं है इंग्लिश का ज्ञान हमारी लाभदायक है कुछ कमजोर लोग इसे समस्या मानते हैं और उसकी समस्या का समाधान ढूंढते हैं समाधान यह है कि हमें इंग्लिश का ज्ञान सीखना चाहिए उसे भाषा समझती में उसके ज्ञान सीखने से हमारे अंदर आत्मविश्वास बढ़ता है कि हम विदेशी भाषा को भी अच्छी तरह से अनुपालन कर सकते हैं
Milate hee prayog karane kee kya kahaanee ke samasyaon par charcha to samaadhaan kiya hai kya angrejee intaraneshanal antarraashtreey bhaasha hai har desh mein angrejee bhaasha ka prayog hota hai chaahe vah koee bhee desh ke kisee bhee prakaar ka yahaan par yah maan kar chalie bhaarat mein jab sinh vishvavidyaalay shiksha ka prasaar hua hai aur inglish meediyam skoolon ka prasaad hua hai tab se inglish ka tejee se vistaar hua aur saath-saath mein aaj bachche ko inglish padhana pasand karate hain bajaay hindee bhaasha ke kyonki inglish stetas simbal ban gaya saphalata ka kaaran ban gaya hai naukaree parason ke lie inglish ek tarah se anivaary hai aur vaastav mein samasya nahin hai inglish ka gyaan hamaaree laabhadaayak hai kuchh kamajor log ise samasya maanate hain aur usakee samasya ka samaadhaan dhoondhate hain samaadhaan yah hai ki hamen inglish ka gyaan seekhana chaahie use bhaasha samajhatee mein usake gyaan seekhane se hamaare andar aatmavishvaas badhata hai ki ham videshee bhaasha ko bhee achchhee tarah se anupaalan kar sakate hain

Ankit Singh Rajput Bolkar App
Top Speaker,Level 11
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Student
1:11
हनुमत का क्वेश्चन बाद में मेरी परेशानी में जानना है और क्या समस्या है अगर समस्या का समाधान कर चलो इंग्लिश लैंग्वेज हमारे भारत में ही नहीं पूरे वर्ल्ड वाइड कलेक्शन लैंग्वेज है यह इसलिए भी है क्योंकि हम हर एक फील्ड में इंग्लिश टीम ने भारत की ओर स्थापित करते हैं यह कैसा लगा सकते हम किए थे सिमिलरिटी की ओर बढ़ते हैं एक वर्ल्ड जो है एक यूनिटी की ओर बढ़ी है जहां एक ही लैंग्वेज का प्रभाव पूरे विश्व पर देखने को मिल रहा है लेकिन ऐसा भी नहीं है कि जो लोग का लैंग्वेज है उनका जो दबदबा है वह भी कम नहीं होते वह भी उतने इंपॉर्टेंट सकती है जितना यह है तो मेरे हिसाब से अंग्रेज अंग्रेज हिंदी का प्रयोग का वर्णन यह कोई समस्या नहीं है अच्छी आदत है अगर यह लोग के द्वारा की जा रही है इसमें कोई नई बात नहीं है
Hanumat ka kveshchan baad mein meree pareshaanee mein jaanana hai aur kya samasya hai agar samasya ka samaadhaan kar chalo inglish laingvej hamaare bhaarat mein hee nahin poore varld vaid kalekshan laingvej hai yah isalie bhee hai kyonki ham har ek pheeld mein inglish teem ne bhaarat kee or sthaapit karate hain yah kaisa laga sakate ham kie the similaritee kee or badhate hain ek varld jo hai ek yoonitee kee or badhee hai jahaan ek hee laingvej ka prabhaav poore vishv par dekhane ko mil raha hai lekin aisa bhee nahin hai ki jo log ka laingvej hai unaka jo dabadaba hai vah bhee kam nahin hote vah bhee utane importent sakatee hai jitana yah hai to mere hisaab se angrej angrej hindee ka prayog ka varnan yah koee samasya nahin hai achchhee aadat hai agar yah log ke dvaara kee ja rahee hai isamen koee naee baat nahin hai

TechVR ( Vikas RanA) Bolkar App
Top Speaker,Level 22
सुनिए TechVR जी का जवाब
IT Professional
4:35
हेलो एवरीवन आई होप आप सब ठीक होंगे प्रश्न पूछा गया भारत में अंग्रेजी प्रयोग बढ़ने के क्या कारण है क्या यह समस्या के समस्या को समाधान क्या है देखिए अंग्रेजी के बढ़ते हुए बृजेश बृजेश उसे कुछ दशकों में ही सभी भारतीय भाषाओं की दुर्गति करके रख दी गया हमारी अपनी भाषाओं के शब्दों को सूत्र मूल्य आदि के मूल मूल अर्थ होते जा रहे हैं उन अर्थों का अनुवाद नहीं किया जा सकता जो समाज में सदियों से अनुभव को उपलब्ध करा गया उन्हें अंग्रेजी में वितरित किए जाकर पुणे भारतीय भाषाओं में बलपूर्वक थोपा गया है आज यहां पड़े पढ़ाए जाने वाले सामाजिक ज्ञान का सिनेमा सीरियल नंबर 20 की दुर्गति के बहुत सारे जहां दुखद निधन देखे जा सकते हैं इससे हमारे कल्पना शक्ति और विचार शक्ति बहुत ज्यादा प्रसन्न हुई है पर हाल यह सभी बिंदु समाकलन मस्त लुक था उसमें किसी भी लक्ष्य का साधन यह किसी गड़बड़ी को रोकने जैसी चेतना नहीं दिखती है जब तक भारतीय भाषाओं को प्राथमिक शिक्षा का माध्यम नहीं बल्कि अपनी भाषा पर अधिकार कर ले शिक्षा का प्रथम युद्ध से नहीं बनाया जाएगा तब तक सेक्सी को जो है और सांस्कृतिक में गिरावट को रोकना बहुत ज्यादा मुश्किल है क्योंकि अपनी भाषा साहित्य और शिक्षा के लिए साइज कार्य यूरोप की छुट्टी विदेश में भी 100 साल तक करते आ रहे हैं वैसे ही इस कार्य को कोई विकल्प नहीं आया था जैसे तरीका और मित्र जैसी जो है वही सभ्यता लुप्त हो गई वह किसी रूप में भारतीय सभ्यता के साथ हो सकता है बल्कि ऐसे भी हो सकता है कि पता भी ना चले कि यह कब खत्म होगी भाषा अपने समाज और संस्कृति की अनूठी अभियुक्ति देती है ऐसे में यदि भाषा कमजोर होगी तो उसका असर हमारी संस्कृति में भी पड़ेगा जैसे ही आपने देखे हमने श्रेष्ठ आज तक अपने घरों से निकाल दे दिया यहां तक महान भारतीय साहित्य और साहित्यकार रचना एवं जो है आसानी से उपलब्ध नहीं है जो भी अधिकांश क्रिटिप्रो गंदे अपेक्षित अब रूप से छापी गई है जो बुरी तरीके से छापे गए हैं जबकि ने सुंदर रूप में देश कोने कोने सबके लिए सुलभ कराने का समाज दिया सरकार के पास धन की कमी नहीं है जी तब आपको उदाहरण देता हूं गीता प्रेस के उदाहरण लेकर देकर देश महान सड़के मात्र एक व्यक्ति ने कर दिखाया तब अपने संपूर्ण साहित्य की किताब को घर-घर पहुंचाया जा सकता था बस इस महत्व और आवश्यकता नहीं समझी गए और इससे होने वाले लाभ और ना करने के सभी को हानि की गई और गीता जो गीता का एड्रेस जो थी उसके बाद उनकी जो है एकदम से विलुप्त होती जा रही है भाषा केवल पाठ्यपुस्तक अखबार पढ़ने गपशप से नहीं होती असली भाषा साहित्य की भाषा होती है इस जीवंत संबंध रखने के काम आती है इसके बिना अच्छी भाषा और बुद्धि की चाह छोड़कर अपनी भाषा पर भरोसा और लगाव के कोई भी भाषा नहीं देगी सफल होने वाले ने ब्रिटेन अमेरिका से भी सीखना चाहिए कि इस तरह उन्होंने अपनी भाषा को ही अपना ही अपना ही नहीं बल्कि संपूर्ण विश्व का अंग बना दिया और बहुत-बहुत बहुत सारे देशों का अलग-अलग भाषाओं में जो है विद्युत संस्करणों में सुलभ कराई यह कोई सरकार का काम नहीं है अगर लेखकों और प्रकाशकों के संस्थाओं आदि सहित धर्म के रूप में अपनी इच्छा के अनुसार इनको किया है उसे तुलना में स्वतंत्र भारत में हम अपनी भाषाओं के साथ क्या किया है हम अपनी भाषा को भूलते जा रहे हैं और अंग्रेजी का प्रयोग किस तरह से किया जा रहा है कि हमारे आपने जो हमारी जो भाषा है उनके जो है आज तक हम अपने बोलते जा रहे हैं राजनीति और करियर के नाम पर यह शिक्षा को जैसे नष्ट किया गया है उसे समझाना बहुत ही ज्यादा मुश्किल है अंग्रेजों के बढ़ते अधिकार में कई मामले में एकाधिकार के कारण भारतीय भाषा दुर्बर दुर्लभ होकर लुप्त होती जा रही हैं हम भूल चुके हैं कि अपनी भाषा माता के समान होती है और उसके बिना पालन-पोषण राम भरोसे ही हो रहेगा आज हमारे अनेक राष्ट्रीय दिलबर दुर्बलता और समस्या का मूल कारण इसी में है यदि यह सरकार का ही नहीं बल्कि हमारी खुद किस्मत से बच्चों को पहली कक्षा में अंग्रेजी पढ़ाना पागलपन अत्याचार और अपराध है इस पर रविंद्र नाथ टैगोर के सभासद पहले ही करेंगे एक बात आज भी जो है बिल्कुल सत्य है जैसे मिट्टी के अंकुरित होते समय रहते पर्याप्त जल और प्रकाश और वायु अनिवार्य आवश्यकता थी वैसे दुनिया को समझना एक बालक को अपनी भाषा के सर्वोत्तम साहित्य परिचित कराना बहुत ज्यादा जरूरी है क्योंकि हम अपने साहित्य के बारे में अपने लोगों को अपने बच्चों को नहीं पढ़ा पाएंगे तो हम आने वाले समय में बिल्कुल लोग होते जाएंगे परीक्षा में आएगा कि सर अंग्रेजों के हमारी संस्कृत हमारे बहुत सारे साहित्य जो हम लुप्त हो जाएंगे यह बहुत बड़ी समस्या को समय रहते हमें खुद अपने हाथों से ही करना पड़ेगा नहीं तो वह दिन दूर नहीं कि जब हिंदू सभ्यता और भारतीय संस्कृति जो है बिल्कुल लुप्त हो जाएगी आशा करता हूं आपको आपके सवाल का जवाब मिल गया होगा लाइक और सब्सक्राइब करें धन्यवाद
Helo evareevan aaee hop aap sab theek honge prashn poochha gaya bhaarat mein angrejee prayog badhane ke kya kaaran hai kya yah samasya ke samasya ko samaadhaan kya hai dekhie angrejee ke badhate hue brjesh brjesh use kuchh dashakon mein hee sabhee bhaarateey bhaashaon kee durgati karake rakh dee gaya hamaaree apanee bhaashaon ke shabdon ko sootr mooly aadi ke mool mool arth hote ja rahe hain un arthon ka anuvaad nahin kiya ja sakata jo samaaj mein sadiyon se anubhav ko upalabdh kara gaya unhen angrejee mein vitarit kie jaakar pune bhaarateey bhaashaon mein balapoorvak thopa gaya hai aaj yahaan pade padhae jaane vaale saamaajik gyaan ka sinema seeriyal nambar 20 kee durgati ke bahut saare jahaan dukhad nidhan dekhe ja sakate hain isase hamaare kalpana shakti aur vichaar shakti bahut jyaada prasann huee hai par haal yah sabhee bindu samaakalan mast luk tha usamen kisee bhee lakshy ka saadhan yah kisee gadabadee ko rokane jaisee chetana nahin dikhatee hai jab tak bhaarateey bhaashaon ko 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mil gaya hoga laik aur sabsakraib karen dhanyavaad

DR.OM PRAKASH SHARMA Bolkar App
Top Speaker,Level 44
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Principal, RSRD COLLEGE OF COMMERCE AND ARTS
1:24
मिलते ही प्रयोग करने की क्या कहानी के समस्याओं पर चर्चा तो समाधान किया है क्या अंग्रेजी इंटरनेशनल अंतर्राष्ट्रीय भाषा है हर देश में अंग्रेजी भाषा का प्रयोग होता है चाहे वह कोई भी देश के किसी भी प्रकार का यहां पर यह मान कर चलिए भारत में जब सिंह विश्वविद्यालय शिक्षा का प्रसार हुआ है और इंग्लिश मीडियम स्कूलों का प्रसाद हुआ है तब से इंग्लिश का तेजी से विस्तार हुआ और साथ-साथ में आज बच्चे को इंग्लिश पढ़ना पसंद करते हैं बजाय हिंदी भाषा के क्योंकि इंग्लिश स्टेटस सिंबल बन गया सफलता का कारण बन गया है नौकरी परसों के लिए इंग्लिश एक तरह से अनिवार्य है और वास्तव में समस्या नहीं है इंग्लिश का ज्ञान हमारी लाभदायक है कुछ कमजोर लोग इसे समस्या मानते हैं और उसकी समस्या का समाधान ढूंढते हैं समाधान यह है कि हमें इंग्लिश का ज्ञान सीखना चाहिए उसे भाषा समझती में उसके ज्ञान सीखने से हमारे अंदर आत्मविश्वास बढ़ता है कि हम विदेशी भाषा को भी अच्छी तरह से अनुपालन कर सकते हैं
Milate hee prayog karane kee kya kahaanee ke samasyaon par charcha to samaadhaan kiya hai kya angrejee intaraneshanal antarraashtreey bhaasha hai har desh mein angrejee bhaasha ka prayog hota hai chaahe vah koee bhee desh ke kisee bhee prakaar ka yahaan par yah maan kar chalie bhaarat mein jab sinh vishvavidyaalay shiksha ka prasaar hua hai aur inglish meediyam skoolon ka prasaad hua hai tab se inglish ka tejee se vistaar hua aur saath-saath mein aaj bachche ko inglish padhana pasand karate hain bajaay hindee bhaasha ke kyonki inglish stetas simbal ban gaya saphalata ka kaaran ban gaya hai naukaree parason ke lie inglish ek tarah se anivaary hai aur vaastav mein samasya nahin hai inglish ka gyaan hamaaree laabhadaayak hai kuchh kamajor log ise samasya maanate hain aur usakee samasya ka samaadhaan dhoondhate hain samaadhaan yah hai ki hamen inglish ka gyaan seekhana chaahie use bhaasha samajhatee mein usake gyaan seekhane se hamaare andar aatmavishvaas badhata hai ki ham videshee bhaasha ko bhee achchhee tarah se anupaalan kar sakate hain

 Neeraj Kumar  Bolkar App
Top Speaker,Level 33
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Unknown
1:05
अरे दोस्तों मैंने यह सवाल है हाथ में अंग्रेज प्रयोग बढ़ने के क्या कारण है क्या यह समस्या है अगर समस्या है तो समाधान किया है तो अंग्रेजी कोई समस्या नहीं है जी हमारे जीवन के लिए बहुत जरूरी है अगर हम कहीं विदेश जाते हैं तो हमें अंग्रेजी भाषा में थोड़ी बहुत जानकारी तो हम उससे उनसे बात कर सकते हैं वह हमारे इशारे या अपने हमारी टूटी फूटी इंग्लिश भी समझ सकते हैं तो अगर कहीं भी हम जाते हैं जहां पर इंग्लिश का उपयोग होता है तो उसके लिए हमें इंग्लिश चोर पड़ती है आप इंग्लिश प्रबल बोलना भी इंसान थे तब भी आप गूगल फ्लाइंग जट्ट की वजह से आप इंग्लिश कोर्ट आदेश कर सकते हैं कई लोग विदेश में जाते हैं और उनकी फल लैंग्वेज तक नहीं आती है कई इसकी अलग लैंग्वेज होती तो वह गूगल ट्रांसलेट चौधरी चलिए मुझसे बात करते हैं और आजकल जो किताब हैं ज्यादा लोग इंग्लिश मीडियम में पढ़ते स्टूडेंट इसलिए अंग्रेज का चलन ज्यादा चलने लगा है और लोग हिंदी के साथ साल इंग्लिश वर्ड का भी बीच-बीच में उपयोग करने लगे हैं
Are doston mainne yah savaal hai haath mein angrej prayog badhane ke kya kaaran hai kya yah samasya hai agar samasya hai to samaadhaan kiya hai to angrejee koee samasya nahin hai jee hamaare jeevan ke lie bahut jarooree hai agar ham kaheen videsh jaate hain to hamen angrejee bhaasha mein thodee bahut jaanakaaree to ham usase unase baat kar sakate hain vah hamaare ishaare ya apane hamaaree tootee phootee inglish bhee samajh sakate hain to agar kaheen bhee ham jaate hain jahaan par inglish ka upayog hota hai to usake lie hamen inglish chor padatee hai aap inglish prabal bolana bhee insaan the tab bhee aap googal phlaing jatt kee vajah se aap inglish kort aadesh kar sakate hain kaee log videsh mein jaate hain aur unakee phal laingvej tak nahin aatee hai kaee isakee alag laingvej hotee to vah googal traansalet chaudharee chalie mujhase baat karate hain aur aajakal jo kitaab hain jyaada log inglish meediyam mein padhate stoodent isalie angrej ka chalan jyaada chalane laga hai aur log hindee ke saath saal inglish vard ka bhee beech-beech mein upayog karane lage hain

Porshia Chawla Ban Bolkar App
Top Speaker,Level 44
सुनिए Porshia जी का जवाब
मनोवैज्ञानिक, हैप्पीनेस कोच, ट्रेनर (सॉफ्ट स्किल्स/कॉर्पोरेट)
3:57
भारत में अंग्रेजी प्रयोग बढ़ने के क्या कारण हैं क्या यह समस्या है अगर समस्या है तो समाधान क्या है तो एक-एक करके प्रश्नों का उत्तर देते हैं पहला प्रश्न है कि कारण क्या है इसके प्रयोग के बढ़ने के कारण यह है कि अंग्रेजी एक ऐसी भाषा है जो पूरे विश्व भर में बोली जाती है और भारत जैसे जैसे अपनी व्यापकता दिखा रहा है जिस तरह से ग्लोबल विलेज में हम एक बहुत महत्वपूर्ण रोल प्ले कर रहे हैं अंग्रेजी का काफी उसमें महत्व हो जाता है क्योंकि इस्तेमाल की जाने वाली या बहुत अधिक मात्रा में बोली जाने वाली भाषा बन चुकी है और आप देखोगे कि आप किसी दूसरे स्टेट में जाते हो भारत के ही जहां कि आपको भाषा नहीं आती है लेकिन अगर अंग्रेजी आती है तो आप सरवाइव कर लेते हो जैसे साउथ इंडिया में अगर आप हिंदी का इस्तेमाल करेंगे तो बहुत से लोग आपको नहीं समझ पाएंगे लेकिन अगर अंग्रेजी में आप बात कर पाते हैं तो आप सरवाइव कर लेते हैं ऐसे ही हम देखते हैं कि जब हम किसी जॉब में हैं एक हम पॉप कल्चर है तो वह भी अंग्रेजी को प्रमोट कर रहा है मीडिया प्रमोट कर रहा है और यहां तक कि जो सरकारी दफ्तर है वहां पर भी बहुत ज्यादा अंग्रेजी का उपयोग होता है डॉक्यूमेंटेशन में और आप देखो कोर्ट के अंदर यूज होता है तो एक इंग्लिश को ऐसी लैंग्वेज समझ समझा जा रहा है कि जो सबको समझ में आती है वास्तविकता से कहीं दूर है आज भी बहुत बड़ी जनसंख्या है भारत की जो अंग्रेजी से उतनी ही ज्यादा अच्छे तो उसको नहीं आती है उतना वैल्यू नहीं है और यही कारण है कि उनको यह समस्या लगती है क्योंकि समस्या तभी लग रही है क्योंकि वह उसको अच्छे से कम नहीं कर पा रहे हैं अच्छे से उसको उस अपनी महारत हासिल कर पा रहे और उसका कारण यह है कि आप बहुत सारे सरकारी स्कूलों में या संगठनों में शुरुआत से ही बचपन से ही अंग्रेजी नहीं पढ़ाई जाती है छुट्टी के बाद पढ़ाई जाती है कोई भी भाषा जो है वह मुश्किल नहीं है और समस्या नहीं है अगर उसको बहुत ही बेसिक तरीके से और बहुत ही शुरुआती दौर से पढ़ाई जाए जिन बच्चों को बिल्कुल नर्सरी से इंग्लिश पढ़ाई जा रही है आप देखोगे कि उनको अंग्रेजी अच्छी आती है और इतना प्रॉब्लम नहीं आता है प्रॉब्लम उन्हीं लोगों को हिंदी मीडियम में भाषा सिर्फ अपने विचारों को व्यक्त करने का एक माध्यम है और अगर कोई कॉन्फिडेंट है और यह काबिलियत रखता है कि वह अलग-अलग भाषाएं सीख पाए तो फिर अंग्रेजी क्या किसी भी भाषा को सकता है और इंडियंस के अंदर यह काबिलियत देखी गई है कि वह मल्टीलेंग्वेज बोलने के जिसको पॉलिग्लॉट्स कहते हैं बहुत ज्यादा पाए जाते हैं और बहुत जल्दी एडजस्ट नहीं कर लेते नहीं लैंग्वेज में मुश्किल नहीं है आसान है अगर हमने सही दिशा में सही प्रयत्न किया तो और कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती है तो समाधान यही है कि समझने की कोशिश करें कि किस तरह से अंग्रेजी का इस्तेमाल जो है वह बहुत ज्यादा है इसीलिए उसका आना बहुत जरूरी है और ज्यादा इसीलिए तू खुद को अगर आप एक विश्व का प्राणी समझते हैं सिर्फ एक गांव का या सिर्फ एक शहर का यह देश का नहीं समझते हैं तो आप इस बात को जरूर समर्थन करेंगे कि हमको भाषा को किसी एक पार्टिकुलर रीजन तक सीमित नहीं रखना चाहिए क्षेत्र तक सीमित नहीं रखना चाहिए और उसको हमें लिखने में कोई पर एक भी नहीं होना चाहिए जैसे अभी मेरा पूरा दोबारा से ही सुनेंगे अगर ऑडियो तो मैं खुद पूरी तरह से हिंदी में नहीं बात कर पा रही हूं मैंने बहुत सारे अंग्रेजी शब्दों का प्रयोग किया शब्द घुल मिल गए हैं और हम उसको यूज कर लेते हैं आ गए हैं हमको समझ में आ गए हैं पेपर पढ़ा क्या तो पेपर अंग्रेजी का शब्द है हिंदी का नहीं हम इसको हिंदी में ऐसे सवाल करते हैं जैसे कि हिंदी का ही हूं जितना आप अपना लेंगे किसी को इतना वह आपका अपना हो जाता है धन्यवाद
Bhaarat mein angrejee prayog badhane ke kya kaaran hain kya yah samasya hai agar samasya hai to samaadhaan kya hai to ek-ek karake prashnon ka uttar dete hain pahala prashn hai ki kaaran kya hai isake prayog ke badhane ke kaaran yah hai ki angrejee ek aisee bhaasha hai jo poore vishv bhar mein bolee jaatee hai aur bhaarat jaise jaise apanee vyaapakata dikha raha hai jis tarah se global vilej mein ham ek bahut mahatvapoorn rol ple kar rahe hain angrejee ka kaaphee usamen mahatv ho jaata hai kyonki istemaal kee jaane vaalee ya bahut adhik maatra mein bolee jaane vaalee bhaasha ban chukee hai aur aap dekhoge ki aap kisee doosare stet mein jaate ho bhaarat ke hee jahaan ki aapako bhaasha nahin aatee hai lekin agar angrejee aatee hai to aap saravaiv kar lete ho jaise sauth indiya mein agar aap hindee ka istemaal karenge to bahut se log aapako nahin samajh paenge lekin agar angrejee mein aap baat kar paate hain to aap saravaiv kar lete hain aise hee ham dekhate hain ki jab ham kisee job mein hain ek ham pop kalchar hai to vah bhee angrejee ko pramot kar raha hai meediya pramot kar raha hai aur yahaan tak ki jo sarakaaree daphtar hai vahaan par bhee bahut jyaada angrejee ka upayog hota hai dokyoomenteshan mein aur aap dekho kort ke andar yooj hota hai to ek inglish ko aisee laingvej samajh samajha ja raha hai ki jo sabako samajh mein aatee hai vaastavikata se kaheen door hai aaj bhee bahut badee janasankhya hai bhaarat kee jo angrejee se utanee hee jyaada achchhe to usako nahin aatee hai utana vailyoo nahin hai aur yahee kaaran hai ki unako yah samasya lagatee hai kyonki samasya tabhee lag rahee hai kyonki vah usako achchhe se kam nahin kar pa rahe hain achchhe se usako us apanee mahaarat haasil kar pa rahe aur usaka kaaran yah hai ki aap bahut saare sarakaaree skoolon mein ya sangathanon mein shuruaat se hee bachapan se hee angrejee nahin padhaee jaatee hai chhuttee ke baad padhaee jaatee hai koee bhee bhaasha jo hai vah mushkil nahin hai aur samasya nahin hai agar usako bahut hee besik tareeke se aur bahut hee shuruaatee daur se padhaee jae jin bachchon ko bilkul narsaree se inglish padhaee ja rahee hai aap dekhoge ki unako angrejee achchhee aatee hai aur itana problam nahin aata hai problam unheen logon ko hindee meediyam mein bhaasha sirph apane vichaaron ko vyakt karane ka ek maadhyam hai aur agar koee konphident hai aur yah kaabiliyat rakhata hai ki vah alag-alag bhaashaen seekh pae to phir angrejee kya kisee bhee bhaasha ko sakata hai aur indiyans ke andar yah kaabiliyat dekhee gaee hai ki vah malteelengvej bolane ke jisako poliglots kahate hain bahut jyaada pae jaate hain aur bahut jaldee edajast nahin kar lete nahin laingvej mein mushkil nahin hai aasaan hai agar hamane sahee disha mein sahee prayatn kiya to aur koshish karane vaalon kee kabhee haar nahin hotee hai to samaadhaan yahee hai ki samajhane kee koshish karen ki kis tarah se angrejee ka istemaal jo hai vah bahut jyaada hai iseelie usaka aana bahut jarooree hai aur jyaada iseelie too khud ko agar aap ek vishv ka praanee samajhate hain sirph ek gaanv ka ya sirph ek shahar ka yah desh ka nahin samajhate hain to aap is baat ko jaroor samarthan karenge ki hamako bhaasha ko kisee ek paartikular reejan tak seemit nahin rakhana chaahie kshetr tak seemit nahin rakhana chaahie aur usako hamen likhane mein koee par ek bhee nahin hona chaahie jaise abhee mera poora dobaara se hee sunenge agar odiyo to main khud pooree tarah se hindee mein nahin baat kar pa rahee hoon mainne bahut saare angrejee shabdon ka prayog kiya shabd ghul mil gae hain aur ham usako yooj kar lete hain aa gae hain hamako samajh mein aa gae hain pepar padha kya to pepar angrejee ka shabd hai hindee ka nahin ham isako hindee mein aise savaal karate hain jaise ki hindee ka hee hoon jitana aap apana lenge kisee ko itana vah aapaka apana ho jaata hai dhanyavaad

Ganga Asati Bolkar App
Top Speaker,Level 11
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Unknown
0:33
की भर्ती भेजी प्रयोग करने के क्या कारण है क्या यह समस्या के समस्या के समाधान के बारे में अंग्रेजी प्रयोग चलेगी जाए क्योंकि लोग भारत से ज्यादा देश में रहना पसंद करते रहना पसंद नहीं करते हो चाहते हैं पूरी जिंदगी में एक ही डूबा तो घूमने का मौका मिले तो सब लोग ट्राई करके घूम कर ऐसे लोग अपना पासवर्ड भी बनवाते हैं इसी कारण लोग अंग्रेजों से सबसे पहले समझ से तो कभी जरूरत भी नहीं है जरूरत है इसका समाधान नहीं होता है
Kee bhartee bhejee prayog karane ke kya kaaran hai kya yah samasya ke samasya ke samaadhaan ke baare mein angrejee prayog chalegee jae kyonki log bhaarat se jyaada desh mein rahana pasand karate rahana pasand nahin karate ho chaahate hain pooree jindagee mein ek hee dooba to ghoomane ka mauka mile to sab log traee karake ghoom kar aise log apana paasavard bhee banavaate hain isee kaaran log angrejon se sabase pahale samajh se to kabhee jaroorat bhee nahin hai jaroorat hai isaka samaadhaan nahin hota hai

Chandan Kumar bharati Bolkar App
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Teacher
2:10
नमस्कार आपका प्रश्न है भारत में अंग्रेजी प्रयोग बढ़ने के क्या कारण क्या समस्या है अगर समस्या के समाधान के लिए भारत में अंग्रेजी बढ़ने के प्रमुख कारण है जैसे कि हां जो भी हमारे देश में राज किया वह कुछ न कुछ हमें देखा ही नहीं आए उसे अंग्रेज ने राज किया तो मैं अंग्रेजी में अंग्रेजी देख कर दिया तो बड़ी समस्या उत्पन्न हो जाती है क्यों अंग्रेजी तो पहले क्या होता है कि वह चाहिए अंग्रेजी के नाम से डर जाते हैं आज भी बच्चे गिरी जी के नाम से डर जाते हैं कई प्रकार की उनके जो दिमाग होते हैं उसके में बेचैनियां से उत्पन्न होने लगती है क्वेश्चन और उठने लगते हैं या रिलेशन कैसे पाएं क्या करना पड़ेगा कैसे सवाल है जिसका करेंगे बाकी आपकी अगर समस्या है तो समाधान के लिए आपको अधिक से अधिक वोट बनियान करें याद करने के बाद बाद आपको फोटो स्पीच ट्रांसलेशन सब का ज्ञान होना चाहिए और फिर बाराखडी क का कि इसके आंसर ऑफ क्वेश्चन है पहले वह खा लिया नाश्ता और भी का इंग्लिश बताइए और धीरे-धीरे उसको पढ़ते-पढ़ते क्या होगा कोई भी भेजो कि जहां से वह आपको नहीं समझ में आता यह संवाद को लिखिए और मोबाइल से सर्च मोबाइल सर्च बढ़ने से क्या फायदा होता है कि हमको यह जो वोट नहीं मालूम होता है वह हमको मालूम हो जाता है जिससे लोग हमको सेल्फिश वालों के सरे पता है क्योंकि तेल बेचता था जिस एल बी कोर्स कहां थे तुमको नहीं पता है जो सर्च मारेंगे तुमको पता हो जाएगी प्लीज तेल्ल में क्या होता है तो कौन सा होता है इसी के बाद अपने वार्ड को
Namaskaar aapaka prashn hai bhaarat mein angrejee prayog badhane ke kya kaaran kya samasya hai agar samasya ke samaadhaan ke lie bhaarat mein angrejee badhane ke pramukh kaaran hai jaise ki haan jo bhee hamaare desh mein raaj kiya vah kuchh na kuchh hamen dekha hee nahin aae use angrej ne raaj kiya to main angrejee mein angrejee dekh kar diya to badee samasya utpann ho jaatee hai kyon angrejee to pahale kya hota hai ki vah chaahie angrejee ke naam se dar jaate hain aaj bhee bachche giree jee ke naam se dar jaate hain kaee prakaar kee unake jo dimaag hote hain usake mein bechainiyaan se utpann hone lagatee hai kveshchan aur uthane lagate hain ya rileshan kaise paen kya karana padega kaise savaal hai jisaka karenge baakee aapakee agar samasya hai to samaadhaan ke lie aapako adhik se adhik vot baniyaan karen yaad karane ke baad baad aapako photo speech traansaleshan sab ka gyaan hona chaahie aur phir baaraakhadee ka ka ki isake aansar oph kveshchan hai pahale vah kha liya naashta aur bhee ka inglish bataie aur dheere-dheere usako padhate-padhate kya hoga koee bhee bhejo ki jahaan se vah aapako nahin samajh mein aata yah sanvaad ko likhie aur mobail se sarch mobail sarch badhane se kya phaayada hota hai ki hamako yah jo vot nahin maaloom hota hai vah hamako maaloom ho jaata hai jisase log hamako selphish vaalon ke sare pata hai kyonki tel bechata tha jis el bee kors kahaan the tumako nahin pata hai jo sarch maarenge tumako pata ho jaegee pleej tell mein kya hota hai to kaun sa hota hai isee ke baad apane vaard ko

Harender Kumar Yadav Bolkar App
Top Speaker,Level 33
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As School administration & Principal
4:10
भारत में अंग्रेजी प्रयोग बढ़ने के क्या कारण है क्या यह समस्या है अगर समस्या है तो समाधान किया कोई समस्या नहीं यह आपके मन का एक फितूर बाहर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उभर कर आ रहा है चाहे शिक्षा हो मेडिकल हो या कोई भी चित्र हो मल्टीनेशनल कंपनी आना ही है और उसी के अनुरूप कहीं न कहीं हमारा यूजीसी हमारा शिक्षा मंत्रालय संघर्ष बना रहा था कि हमारे बच्चे क्या कर लो और आपके बच्चों को इंग्लिश की अपनी फ्रेंड से ज्यादा दी जा रही है जबकि वह चीजें बच्चा मातृभाषा में भी सीख सकता है इंग्लिश भाषा का इस्तेमाल किया जाए लेकिन थोड़ा सा दुर्भाग्य है कि शहरी अर्बन एरिया जिसको कह सकते हैं या सेमी अर्बन एरिया है खास करके जो छोटी-छोटी स्कूल है कुकुर मतों के प्रमोटर को कर रहे हैं इनका कोई सिर पैर नहीं होता है या कुछ इंसर्टियों प्राइवेट सेक्टर में आ रहे हैं उन लोगों ने इस तरह का एक फ्रेंड बना दिया और वो ट्रेंड कम्युनिकेशन के लिए नहीं बल्कि सोसाइटी में एक डेस्टिनेशन पैदा कर दिया हम कभी देखी ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे आते हैं इन अस्थियों कालेजों से पढ़कर दिल्ली जैसे महानगरों में आते हैं तो बेचारे क्षेत्रों से वह बड़ा अंतर हो जाता है कि हम आपका जवाब देते हैं और लोगों को लगता है हिंदी क्या होगी इस तरह का हो जाता है समस्या है इस समस्या नहीं कर सकता यह कहीं न कहीं हमारी शिक्षा पद्धति की एक बहुत बड़ी कमी है जिसको राज्य सरकारों को या केंद्र सरकारों को एक सही गाइडलाइन की जरूरत भाषा को भाषा की तरह पढ़ा है और उसे हमारी कल्चर से ना जोड़ा जाए तो ज्यादा अच्छा साइंस हो गई मैं थोड़ी जितने भी ऐसा बेस्ट इंग्लिश मीडियम शुरू कर दें कोविड-19 रहा है गूगल सीमेंट हो रही है शहरों में चले जाइए तो यही भाई इसमें बहुत सारी चीजें मुझे लग रहा है कि सुधारा जा सकता है लेकिन क्या यह लोग जो बड़ी-बड़ी दुकानें चला रहे हैं यह लोग सुधारने देंगे उस पॉलिसी को सही पेमेंट करने देंगे किसी भी भाषा के खिलाफ अंग्रेजी भाषा है अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बोली जाती है हमारे देश में बहुत सारे डिक्शनरी सीमेंट है मंडी लेकिन कंपनियां हैं आप बहुत सारी उनको जरूरत है हमारे बच्चों को फिट करने के लिए उसमें काम करने के लिए लेकिन इसका मतलब नहीं पूरी तरह से हमारा कहीं पर न्यूज़ को कहीं पर जो है हॉस्पिटल में हो कॉलेज में हो इन हस्तियों में मोती कंपल्शन है वह थोड़ा सा भी खतरनाक है इसके समाधान यही है कि अगर सही और सटीक पॉलिसी बनाया जाए भाषा को बढ़ाया जाए तो शायद इस समस्या का निदान किया जा सकता है
Bhaarat mein angrejee prayog badhane ke kya kaaran hai kya yah samasya hai agar samasya hai to samaadhaan kiya koee samasya nahin yah aapake man ka ek phitoor baahar antararaashtreey star par ubhar kar aa raha hai chaahe shiksha ho medikal ho ya koee bhee chitr ho malteeneshanal kampanee aana hee hai aur usee ke anuroop kaheen na kaheen hamaara yoojeesee hamaara shiksha mantraalay sangharsh bana raha tha ki hamaare bachche kya kar lo aur aapake bachchon ko inglish kee apanee phrend se jyaada dee ja rahee hai jabaki vah cheejen bachcha maatrbhaasha mein bhee seekh sakata hai inglish bhaasha ka istemaal kiya jae lekin thoda sa durbhaagy hai ki shaharee arban eriya jisako kah sakate hain ya semee arban eriya hai khaas karake jo chhotee-chhotee skool hai kukur maton ke pramotar ko kar rahe hain inaka koee sir pair nahin hota hai ya kuchh insartiyon praivet sektar mein aa rahe hain un logon ne is tarah ka ek phrend bana diya aur vo trend kamyunikeshan ke lie nahin balki sosaitee mein ek destineshan paida kar diya ham kabhee dekhee graameen kshetr ke bachche aate hain in asthiyon kaalejon se padhakar dillee jaise mahaanagaron mein aate hain to bechaare kshetron se vah bada antar ho jaata hai ki ham aapaka javaab dete hain aur logon ko lagata hai hindee kya hogee is tarah ka ho jaata hai samasya hai is samasya nahin kar sakata yah kaheen na kaheen hamaaree shiksha paddhati kee ek bahut badee kamee hai jisako raajy sarakaaron ko ya kendr sarakaaron ko ek sahee gaidalain kee jaroorat bhaasha ko bhaasha kee tarah padha hai aur use hamaaree kalchar se na joda jae to jyaada achchha sains ho gaee main thodee jitane bhee aisa best inglish meediyam shuroo kar den kovid-19 raha hai googal seement ho rahee hai shaharon mein chale jaie to yahee bhaee isamen bahut saaree cheejen mujhe lag raha hai ki sudhaara ja sakata hai lekin kya yah log jo badee-badee dukaanen chala rahe hain yah log sudhaarane denge us polisee ko sahee pement karane denge kisee bhee bhaasha ke khilaaph angrejee bhaasha hai antararaashtreey star par bolee jaatee hai hamaare desh mein bahut saare dikshanaree seement hai mandee lekin kampaniyaan hain aap bahut saaree unako jaroorat hai hamaare bachchon ko phit karane ke lie usamen kaam karane ke lie lekin isaka matalab nahin pooree tarah se hamaara kaheen par nyooz ko kaheen par jo hai hospital mein ho kolej mein ho in hastiyon mein motee kampalshan hai vah thoda sa bhee khataranaak hai isake samaadhaan yahee hai ki agar sahee aur sateek polisee banaaya jae bhaasha ko badhaaya jae to shaayad is samasya ka nidaan kiya ja sakata hai

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