#भारत की राजनीति

Er.Awadhesh kumar Bolkar App
Top Speaker,Level 66
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Unknown
2:13
सी फ्रेंड ने प्रश्न पूछा है कि किसान बिल में ऐसी कोई बात नहीं है जो किसान के विरोध में हो प्रधानमंत्री और कृषि मंत्री ने बता चुके हैं विवरण अगर आप बता चुके हैं इसका विरोध क्यों हो रहा है मतलब आप उसकी क्या अच्छाइयां क्या बताना चाहते हैं उस दिन में क्या खास पाते हैं तब आप यह बताइए कि जब किसान को एमएसपी नहीं देंगे एक फिक्स रेट नहीं देंगे तू क्या मतलब होगा उसके औलाद को उगाने का मतलब वह आना आज अगर आप आज के समय में कर ₹4 बिक रहा कल के समय में ₹2 भेजेंगे तो उनके तो खाने की चीजें भी नहीं मिलेगी जो उसने मेहनत किया है जो उसने अपना पूरा दिन रात करके एक करके उस अनाज को बजे को गाने में जो समय लगाया उसको तो कुछ नहीं मिला है अतः आप आपकी तरफ से ही कहा जा रहा है कि जो भी किसान भी लाया बहुत अच्छा है क्या चीज है ठोकने वाली बातें क्योंकि जब हम एमएसपी की मांग करें मैं सब जो भी किसान हैं किसानों को एक मिनिमम सपोर्ट प्राइस मिलनी चाहिए जिसे क्या होता है कि बड़ी-बड़ी कंपनियां आती है और क्या करते हैं कि वह पहले ही अपने अनाज की बातें कर लेते कि मुझे यह चीज चाहिए आप यही होगा लेकिन इस कानून के तहत क्या उपयोगी वह भी डिपेंड नहीं होंगी और एक से नहीं चार से कहेंगे लेकिन लेंगी एक ही से बताइए किस का नुकसान हुआ होगा तो किसान का ही नुकसान हुआ ना तो आपको समझ में नहीं आ रहा है शायद याद उसकी सरकार को नहीं समझ में आ रहा है मतलब अगर देखा जाए हकीकत रूप में तो एक बड़े लोग जो पूंजीपति लोग हैं उन्हें कोई फायदा कृषि कानून से होगा इसमें गरीबों को जो किसान है उन्हें नहीं फायदा होगा तो इस चीज को आप भी समझे और सरकार भी समझे कि कृषि कानून का जो विरोध हो रहा है उस और उसे हटाना चाहिए किसी को जबरदस्ती स्वतंत्र भारत में ठोकने वाली बातें अडॉप्टेशन वाली कानून नहीं होने चाहिए कि जबरदस्ती हम अपने आप में उठो पर

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Ashok Bolkar App
Top Speaker,Level 44
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कृषक👳💦
3:27
कि दोस्तों के साथ बिल में ऐसी कोई बात नहीं है जो किसानों के विरोध में हो यह बात प्रधानमंत्री और कृषि मंत्री समझा भी चुकी है इसलिए मुस्कान किसानों का नहीं उन बिचौलियों का क्या आप मेरी बात से सहमत हैं कि दोस्तों हम आपकी बात से सहमत तो है परंतु किसान जिन चार मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं उनमें से दो मांगे तो किसानों की मान ली गई और शेष 2 मांगों पर कल 4 तारीख को चर्चा होना तो जिनमें से एक है यानी की एमएसपी रेट को यानी कि तय कर दिया जाए तो देखिए दोस्तों के साथ होगी यह मांग भी बिल्कुल जायज है क्योंकि सरकार जो एमएसपी रेट दे दी है तो उस पर सरकारी कर्मचारी जो किसानों का अनाज एमएसपी रेट पर खरीदी भ्रष्टाचारी करते हैं किसान जब उनके पास अनाज लेकर जाता है तो मान के चलिए गेहूं लेकर गया कैसा तो सरकारी रेट है ₹25 तो वह कहते हैं बहाने बनाते हैं कि अभी गोदाम में जगह नहीं है बाहर जाना नहीं है क्या हमारा स्टाफ पूरा हो गया है तो इससे परेशान होकर किसान और मंडियों में अपनाना ही ले जाता है तो व्यापारी बोलते हैं भाई हम तो ₹15 में खरीद रहा है ₹16 में खरीद रहे हैं तो किसान को मजबूरी बस वहां पर पंद्रह ₹16 किलो में अपना अनाज बेचना पड़ता है तो आप भी सरकारी कर्मचारी जाते हैं उन मंडियों में और बोलते हैं आपने जय कितने में खरीदा यानी 15 या 16 में तो चलिए बीच में हमें दे दीजिए तो उन्होंने ₹20 किलो में वह खरीद लिया और उनको दामों में भरवा दिया जो खाली पड़े थे किसानों को धोखा देते और सरकार को एमएसपी रेट पर भेज देती तो सीधा-सीधा ₹5 का मुनाफा सरकारी कर्मचारी कमा लेते हैं किसान को कोई फायदा नहीं मिलता यदि सरकार एमएसपी रेट पर कानून बनाने की कोई भी व्यापारी किसान का अनाज एमएसपी रेट से कम में नहीं खरीदेगा तो सरकार को भी किसान की फसलों को खरीदने का यानी कि दवाब नहीं बनेगा सरकार के ऊपर क्या आप क्योंकि जब उस कब अनाज मंडी में बिक जाएगा तो इस पर भी सरकार को गौर करना चाहिए और बाकी जो तीसरा कानून है यह तो बिल्कुल खराब कानून किसी को फायदा नहीं है सेना किसानों को है ना जनता से इसको तो सीधा व्यापारियों कोई फायदा है आवश्यक वस्तु अधिनियम क्योंकि अब इस पर सरकार ने खुली छूट दे रखी है तो अब दलहनी फसलें हैं और जो यानी सब्जी आलू प्याज ऐसी सब्जी है जो खराब नहीं होती उसका व्यापारी स्टोरेज करें तो सीधी सी बात है किसान से ₹2000 और ₹10 किलो में सी सब्जियां खरीदेंगे और इस रोजगार के और जब उसकी मांग बढ़ जाएगी तब 8090 और ₹100 के तो किसान भी खरीदने जाएगा तो उसे भी वहां पर ₹100 में खरीदना पड़ेगा और आम जनता को तो मुस्कान है तो सरकार इसमें कह रही है कि प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी तो सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि दोस्तों इस में कहां पर प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है इसमें किसानों को कौन सा लाभ है बाकी हम आपकी बातों से सहमत हैं और मैं आशा करता हूं कि कल यारी सहमति बन जाएगी धन्यवाद

Ashish Lavania Bolkar App
Top Speaker,Level 22
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Yoga Instructor
1:05
जी मैं आपकी बात से बिल्कुल अच्छी पर्सेंट सहमत हूं पर 20 परसेंट बिल में कुछ बातें बिल्कुल ऐसी है जिसका किसानों को विरोध करना चाहिए परंतु आप विश्वास नहीं मानेंगे उन बातों पर किसानों को कोई रमैया उन्होंने कि नहीं है और ना कोई मैटर उठा रहे हैं वह क्यों हो इसलिए क्योंकि दिल में ऑप्शन है स्टॉक का स्टॉक की कोई निर्धारित सीमा नहीं की गई है हो सकता है यह बात करके रखो यह मैटर परंतु अभी तक की मेट्रो उठा ही नहीं है अगर ऐसा होता है स्टॉक की कोई सीमा नहीं होती है तो नहीं कि आप भी जानते हम भी जानते किसान जब खाई थी करते हैं फिर उस खेती को भेजता है अगर उसे अच्छी रुपए मिलेंगे जो कि कांटेक्ट फार्मिंग हो या ना मानो बेचेगा वह यह तो रोकता तो है नहीं अपने पास कि नहीं मैं फसलों को रोक कर चलूंगा फिर आगे भेजूंगा वह तो नॉर्मल भेजता है आपके कटाई हुई और बेचा उसे जो पैसा मिला वह अपना उसका यूज़ करेगा परंतु चेंज कर जो कॉर्बेट फ्रॉम थे वह खरीदेंगे और वह स्काईस्टॉक कर सकते हैं तो अगर उन्हें स्टॉक करना शुरू करा तो वह तो रेट सबसे कितनी भी बड़ा घटा सकते हैं यह सबसे बड़ा मैटर है जिसके बारे में बात होनी चाहिए

पुरुषोत्तम सोनी Bolkar App
Top Speaker,Level 33
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साहित्यकार, समीक्षक, संपादक पूर्व अधिकारी विजिलेंस
1:35
कि हम आप की बात से सहमत नहीं हैं बिचौलियों की प्रथा को नहीं समाप्त किया जा सकता है किसान चाहते हैं या तो पहले इस कानून को रद्द कर दीजिए उस पर बहस हो क्योंकि रातो रात पास कर लिया गया है उसमें इसके गुण और दोषों पर कोई वर्णन नहीं किया गया विपक्ष के सामने रखा भी नहीं किया यह लॉकडाउन में संसद में इसको सब लोगों से 10 कट करा कर के आदेश जारी कर दिया गया तो लोकतंत्र के नियमों के खिलाफ है ऐसी उसमें क्या बात थी कि रातों-रात पारित करना पड़ गया और संसद के अधिवेशन का इंतजार नहीं किया गया नंबर एक नंबर दो जब किसान कह रहे हैं कि उसे हमारा फायदा नहीं है तो सरकार इतनी जिद पर क्यों गाड़ी है किस को समाप्त नहीं कर रहे हो को खत्म कर देना चाहिए जिस कानून से किसान में असंतोष व्याप्त है किसान परेशान है किसान आंदोलन के लिए बाध्य हो गया है हजारों के साथ उस पर अपने प्राणों की आहुति दे रहे हैं तो ऐसे कानून को लाने से क्या फायदा है जिससे हमारे देश के किसानों को परेशानी बड़े और जो हमारे अन्नदाता उनको भीख मांगने की स्थिति आ गया है सरकार को अपनी बात से जनता के लिए झुकना चाहिए आंदोलन कर्ताओं को समझाने के लिए तीनों ऑर्डिनेंस उनको निरस्त कर देना चाहिए था फिर 22 कराना चाहिए उनको एमएसपी की गारंटी देना चाहिए इन सब चीजों के लिए और उनको लिखे लिखा पढ़ी में देख की पूंजी पतियों के कहने से हम कोई खेती के आधार पर कोई काम नहीं करेगा हम अपने स्वच्छता से जैसे करते चले आ रहे उसी आधार पर करेंगे तब जाकर के किसान मान लेंगे वरना इसी तरह आंदोलन चलता रहेगा देश भुखमरी के कगार पर आ जाएगा
Ki ham aap kee baat se sahamat nahin hain bichauliyon kee pratha ko nahin samaapt kiya ja sakata hai kisaan chaahate hain ya to pahale is kaanoon ko radd kar deejie us par bahas ho kyonki raato raat paas kar liya gaya hai usamen isake gun aur doshon par koee varnan nahin kiya gaya vipaksh ke saamane rakha bhee nahin kiya yah lokadaun mein sansad mein isako sab logon se 10 kat kara kar ke aadesh jaaree kar diya gaya to lokatantr ke niyamon ke khilaaph hai aisee usamen kya baat thee ki raaton-raat paarit karana pad gaya aur sansad ke adhiveshan ka intajaar nahin kiya gaya nambar ek nambar do jab kisaan kah rahe hain ki use hamaara phaayada nahin hai to sarakaar itanee jid par kyon gaadee hai kis ko samaapt nahin kar rahe ho ko khatm kar dena chaahie jis kaanoon se kisaan mein asantosh vyaapt hai kisaan pareshaan hai kisaan aandolan ke lie baadhy ho gaya hai hajaaron ke saath us par apane praanon kee aahuti de rahe hain to aise kaanoon ko laane se kya phaayada hai jisase hamaare desh ke kisaanon ko pareshaanee bade aur jo hamaare annadaata unako bheekh maangane kee sthiti aa gaya hai sarakaar ko apanee baat se janata ke lie jhukana chaahie aandolan kartaon ko samajhaane ke lie teenon ordinens unako nirast kar dena chaahie tha phir 22 karaana chaahie unako emesapee kee gaarantee dena chaahie in sab cheejon ke lie aur unako likhe likha padhee mein dekh kee poonjee patiyon ke kahane se ham koee khetee ke aadhaar par koee kaam nahin karega ham apane svachchhata se jaise karate chale aa rahe usee aadhaar par karenge tab jaakar ke kisaan maan lenge varana isee tarah aandolan chalata rahega desh bhukhamaree ke kagaar par aa jaega

Rakesh Kumar Yadav Bolkar App
Top Speaker,Level 77
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👨‍🏫 Teacher.
1:44
जो भी आपने पर्सनल में बात रखा है तो मुझे कुल मिलाकर तो यही लगता है कि सरकार को या नरेंद्र मोदी जो हमारे देश के प्रधानमंत्री हैं इनको किसानों की समस्याओं पर विचार करना चाहिए देश के कई राज्यों में चल रहे किसान आंदोलन की अनदेखी नहीं की जा सकती है सरकार को किसानों की आशंका व व समस्याओं पर गंभीरता से विचार करना चाहिए 26 जनवरी की घटना के बाद सरकार व किसान की दूरी बढ़ गई है आंदोलनों की लेकर कई तरह की बातें चल रही है जो गलत है किसान आंदोलन को बल से नहीं बातों से ही खत्म किया जा सकता है और यह सही बात है कि जब तक के अन्नदाता खुशहाल नहीं होगा तब तक देश की आर्थिक स्थिति बेहतर नहीं होगी कृषि कानून को लेकर जो भी संदेह किसानों के मन में है उससे बातचीत के माध्यम से दूर करना चाहिए और साथ ही किसानों को भी छोड़ लचीला होना पड़ेगा क्योंकि जब दोनों तरफ समझा होता होगा दोनों तरफ नरमी होगी तभी यह जो है मसला सुलझ सकता है यानी कुल मिलाकर जो है इस को सुलझाने का प्रयास दोनों पक्षों करना चाहिए आंदोलन का जो असर है है कि खाद पदार्थों की मौत रोज बढ़ रही है जैसे आप प्याज के दाम आप देख रहे हैं कि वैसे ही बनी हुई है और भी खाद्य पदार्थ जो है दिन पर दिन बढ़ रहे हैं तो कहीं ना कहीं से भारत की आर्थिक स्थिति या भारत के लोगों को इसकी भर पाया कहीं ना कहीं करना पड़ रहा है तो इस समय चीजों के हित में देखते हुए सरकार को इन समस्याओं को समाधान में लगना चाहिए
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