#भारत की राजनीति

bolkar speaker

क्या खुद को स्वीकार करना ही खुशी का पहला कदम है?

Kya Khud Ko Sveekaar Karana Hee Khushee Ka Pahala Kadam Hai
Harender Kumar Yadav Bolkar App
Top Speaker,Level 33
सुनिए Harender जी का जवाब
As School administration & Principal
1:11
खुद को स्वीकार करना ही खुशी का पहला कदम है बिल्कुल है वह कहते हैं कि जो आपके अंदर सेल्फ सेटिस्फेक्शन होते अपने आप को संतुष्ट कर लो अपने कर्तव्यों से गाड़ियों से अपने वजन से खान की तैयारी के लिए करते हैं मिशन चलती रही लेकिन हम थोड़ा सा खा कर के भी अपने आपको सब कुछ कर सकते हैं तो निश्चित तौर खुदी को बुलंद करने और इसी पर भेजना है कि जो हम कर रहे हैं बेहतर है तुम्हें समझ सकता हूं कुछ हो ही नहीं सकता और उसी को मिलेगी और हम को पहचान ले उसकी दुकान करते हैं इस तरह मिल जाती

और जवाब सुनें

bolkar speaker
क्या खुद को स्वीकार करना ही खुशी का पहला कदम है?Kya Khud Ko Sveekaar Karana Hee Khushee Ka Pahala Kadam Hai
DR.OM PRAKASH SHARMA Bolkar App
Top Speaker,Level 33
सुनिए DR.OM जी का जवाब
Principal, RSRD COLLEGE OF COMMERCE AND ARTS
0:54
खुद को स्वीकार करना ही सफलता का यह उसी का सबसे पहला कदम है जिसे कोई हिंदी में सबसे पहले इंसान को अपनी व्यक्ति की अपनी कार्यकुशलता की अपनी क्षमता कितने गुणों की अपनी योग्यता का परिचय करना चाहिए अपनी पहचान करनी अपनी प्रेक्टिस को जानना चाहिए तभी आप दूसरों पर अपनी बाहों नाथ का प्रभाव अपने कान का प्रभाव अपने गुणों का प्रभाव छोड़ती से अपने व्यक्ति की पहचान हो जाती है उस इंसान के लिए उससे अच्छा और सर कोई नहीं हो सकता यह मेरा मानना है लेकिन यह सबसे बड़ी खुशी नहीं बल्कि जिंदगी की सफलता का और विकास का आधार भी है

bolkar speaker
क्या खुद को स्वीकार करना ही खुशी का पहला कदम है?Kya Khud Ko Sveekaar Karana Hee Khushee Ka Pahala Kadam Hai
Rahul kumar Bolkar App
Top Speaker,Level 44
सुनिए Rahul जी का जवाब
Unknown
0:45
को स्वीकार करना ही खुशी का पहला कदम है दोस्तों खुद को स्वीकार करना खुशी का पहला कदम हो सकता है परंतु खुद के द्वारा की आरती स्वीकार की जा रही है यह मायने रखता है मान लीजिए कोई गलत काम कर रहे हैं वह काम पूरा हो गया क्या कुछ काम को स्वीकार नहीं सकते क्योंकि हम गलत किया है यदि आदमी कोई अच्छा काम कर रहे हैं और यदि बात करें कि उसको खुशी को ज्वाइन की जो आपने अच्छा काम किया है उस काम को दूसरे भी स्वीकार करेंगे क्योंकि जो काम किया है वह सही किया है तो इससे आप कुछ भी होंगे तो खुशी जवाब दोस्तों आपके जीवन के अंदर कहीं ज्यादा इंपोर्टेंट है और कदम है

bolkar speaker
क्या खुद को स्वीकार करना ही खुशी का पहला कदम है?Kya Khud Ko Sveekaar Karana Hee Khushee Ka Pahala Kadam Hai
Shipra Bolkar App
Top Speaker,Level 44
सुनिए Shipra जी का जवाब
Self Employed
0:29
आपका सवाल है क्या खुद को स्वीकार करना ही खुशी का पहला कदम है निश्चित तौर पर यह बात फोन पर सही है जब तक आप खुद से खुद को स्वीकार नहीं करेंगे तब तक आप खुद ही नहीं रह पाएंगे बहुत जरूरी है कि आप को तो स्वीकार करें अपने मैं जो आप काम कर रहे हैं प्रयास कर रहे हैं जितनी भी आती और नहीं था जितने भी आपके पास रुक संसाधन है उन सब चीजों में जब आप चैटिंग कर लेना सीखेंगे संतो चाइना सीखेंगे निश्चित तौर पर आप भी खुश रहेंगे आपका दिन शुभ रहे थे निकाल

bolkar speaker
क्या खुद को स्वीकार करना ही खुशी का पहला कदम है?Kya Khud Ko Sveekaar Karana Hee Khushee Ka Pahala Kadam Hai
Rohit Soni Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए Rohit जी का जवाब
Journalism
1:07
यह बात बिल्कुल सत्य है कि खुद को स्वीकार करना ही खुशी का पहला कदम है आज के समय में क्या होता है कोई लोग मोटे होते हैं वह लोग पतले होते हैं कोई लो नाटे होते हैं तो कोई लोग बहुत लंबे होते हैं इसके चलते कहा था कि समाज में लोगों को बढ़िया तरीके से देखते हैं से चलती आ गए वह लोग होते हैं वह अपने आप से डिप्रेशन जैसी चीजों में शिकार होते क्योंकि वह अपने आप को इंजॉय में आते नहीं है यदि आपने अभी आप जैसे भी है लेकिन अपने मां-बाप के लिए बहुत प्यार है तो इस चीज को लेकर कोई भी गलत कदम उठाने से पहले अपने वहां पर आप जरूर सोचेगा और आपने अपने आप लोग अपना लेकर आऊंगा मोटा हूं हमें पटेलों की मैं छोटा हूं दुनिया वाले जो भी बोलते हम से मतलब नहीं है देखी दुनिया तब भी बोलेगी जब आप कोई अच्छा काम करेंगे यहां इसमें कोई गलत रहा है तो दुनिया वालों की बातों पर बिल्कुल ध्यान ना दें अपने पर पूर्ण विश्वास रखें और हमेशा यू कोशिश करते रहे कि मैं अपना को कैसे खुश रखूंगा अपने मां-बाप को कैसे खुश रहूं दुनिया को कोई फर्क नहीं पड़ता आपको कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए दुनिया वाले क्या करें अपनी मां को खुश रखें खुद खुश रहिए अपने आप के बारे में जितने अच्छा विचार रखेंगे आप इतनी जल्दी सर से 16 आदमी बन जाएंगे

bolkar speaker
क्या खुद को स्वीकार करना ही खुशी का पहला कदम है?Kya Khud Ko Sveekaar Karana Hee Khushee Ka Pahala Kadam Hai
Trilok Sain Bolkar App
Top Speaker,Level 33
सुनिए Trilok जी का जवाब
Motivational Speaker Public Speaker Life Coach Youtuber
0:50
जी हां बिल्कुल यह बात मुझे भी लगती है कि अगर हम खुद को स्वीकार कर लेंगे तो हम खुश रहेंगे यह खुश रहने के लिए सबसे पहला कदम है स्वीकार करने का मतलब यह कि जो भी मेरे पास है वह अच्छा है और मैं जो भी कर रहा हूं वह सही कर रहा हूं मेरी तुलना मुझसे ही है दूसरों से नहीं है यह बात तुम स्वीकार करनी होगी दूसरी बात यह मत सोचिए कि मेरे साथ वाले ने क्या किया वह आगे चला गया बल्कि यह सोचिए कि मैं आज कैसा हूं और कल कैसा हूं यानी मैं कल की तुलना में अगर आज बेहतर हूं तो मैं अच्छा कर रहा हूं और अगर हमेशा सोच रहे हैं लेकिन ये तो हमारे जीवन में खुशियां आने लगेगी और हम बहुत अच्छा परफॉर्म कर पाएंगे इसलिए आ हम जैसे भी हैं वह स्वीकार करना बिल्कुल खुश रहने के लिए पहला कदम था
Jee haan bilkul yah baat mujhe bhee lagatee hai ki agar ham khud ko sveekaar kar lenge to ham khush rahenge yah khush rahane ke lie sabase pahala kadam hai sveekaar karane ka matalab yah ki jo bhee mere paas hai vah achchha hai aur main jo bhee kar raha hoon vah sahee kar raha hoon meree tulana mujhase hee hai doosaron se nahin hai yah baat tum sveekaar karanee hogee doosaree baat yah mat sochie ki mere saath vaale ne kya kiya vah aage chala gaya balki yah sochie ki main aaj kaisa hoon aur kal kaisa hoon yaanee main kal kee tulana mein agar aaj behatar hoon to main achchha kar raha hoon aur agar hamesha soch rahe hain lekin ye to hamaare jeevan mein khushiyaan aane lagegee aur ham bahut achchha paraphorm kar paenge isalie aa ham jaise bhee hain vah sveekaar karana bilkul khush rahane ke lie pahala kadam tha

bolkar speaker
क्या खुद को स्वीकार करना ही खुशी का पहला कदम है?Kya Khud Ko Sveekaar Karana Hee Khushee Ka Pahala Kadam Hai
Navnit Kumar Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए Navnit जी का जवाब
QUALITY ENGINEER
0:58
खुद को शिकार कीजिए इतनी खुशी का पहला कदम नहीं है खुद में बदलाव लाना और एक पॉजिटिव दिशा में बदलाव लाना यह खुशी का पहला अपनी आपको गलती कर रहे तुझ को स्वीकार कीजिए वह बहुत अच्छा बात है गलती को स्वीकार करके एक सही रास्ते में चली है वह बहुत अच्छा बात है लेकिन खुद को गलत रूप में स्वीकार मत कीजिए आपको लग रहा है कि कहीं आप गलत है तो आप अपने आप को कैसे सही करोगे वह सोचो किस को आप गुरु बना कर अपने आप को सही कर सकते हैं फिर उस दिशा में आगे बढ़ो मेडिटेशन कोरोनावायरस या कोई भी एक्टिविटी से आपकी खुशी से खुदकुशी कार करके क्या हां मैं गलत कर रहा हूं सही दिशा में आगे बढ़ना फिर वह खुशी का पहला कदम थैंक यू
Khud ko shikaar keejie itanee khushee ka pahala kadam nahin hai khud mein badalaav laana aur ek pojitiv disha mein badalaav laana yah khushee ka pahala apanee aapako galatee kar rahe tujh ko sveekaar keejie vah bahut achchha baat hai galatee ko sveekaar karake ek sahee raaste mein chalee hai vah bahut achchha baat hai lekin khud ko galat roop mein sveekaar mat keejie aapako lag raha hai ki kaheen aap galat hai to aap apane aap ko kaise sahee karoge vah socho kis ko aap guru bana kar apane aap ko sahee kar sakate hain phir us disha mein aage badho mediteshan koronaavaayaras ya koee bhee ektivitee se aapakee khushee se khudakushee kaar karake kya haan main galat kar raha hoon sahee disha mein aage badhana phir vah khushee ka pahala kadam thaink yoo

bolkar speaker
क्या खुद को स्वीकार करना ही खुशी का पहला कदम है?Kya Khud Ko Sveekaar Karana Hee Khushee Ka Pahala Kadam Hai
Divya Singh  Bolkar App
Top Speaker,Level 22
सुनिए Divya जी का जवाब
Mentor teacher at DoE, Delhi
5:00
नमस्कार प्रश्न है क्या खुद को स्वीकार करना ही खुशी का पहला कदम है जी हां बिल्कुल खुद को स्वीकार करना या हम जैसे हैं वैसे ही खुश रहना और खुद से जिसने हमें बनाया उससे कोई शिकायत ना होना और शिकायत मुक्त होना यही तो खुशी की पहली शर्त है हम बहुत सारी शिकायतों से घिरी रहती हैं और यह बात केवल खुद की हो रही है तो मैं केवल खुद से शिकायत होगी बात तो यदि हम कद में छोटे हैं बहुत दुबले या बहुत मोटे हैं हमारा रंग जैसा हम चाहते हैं अगर वैसा नहीं है और भी किसी प्रकार की कोई कमी हम अपने बारे में महसूस करते हैं हमें खुद से अपने बनाने वाले से ही शिकायत होती है तू यही है खुद को स्वीकार करना कि हम जैसे हैं जैसा कब है जैसा रंग है जैसा शरीर है उसके साथ खुश रहना और खुद को ही स्वीकार नहीं कर पाते हैं तो दूसरे भी मजाक बनाते हैं यानी उन्हें भी मौका देते हैं हम उन्हें भी हम खुद पर हंसने का अवसर दें और फिर उस उनकी उस हंसी और मजाक से ही हम परेशान होते रहते हैं जबकि हमें यह नहीं पता होता कि हमने अपनी कोई शिकार नहीं किया है तो दूसरे क्यों हमेशा करेंगे कुछ लोगों को मजा ही आता है दूसरों को दुखी देखने में तो अगर हम दुखी दिखाई पड़ते हैं तो ऐसे लोगों को और ज्यादा अवसर देते हैं एग्जांपल ही ले लेते हैं जैसे कुछ मूवीस आई हैं जैसे कि कुछ गंजेपन के ऊपर कोई मूवी आई थी उस व्यक्ति को अपने गंजेपन से शर्म आती थी हम खुद ही शर्म आता रहता था फ्रस्ट्रेटेड रहता था विद लगाता था अलग-अलग तरीके अपनाता था और जब उसकी वह बिग लगाना या कुछ इस तरह की हरकतें जो चीजें छुपाने की कोशिश करता था गंजेपन को या कुछ प्रोडक्ट यूज करता था कि बाल आ जाए सर पर उस वजह से और दूसरे लोगों को या उसको खुद को दूसरों के सामने शर्मिंदा होना पड़े अंत में यह बात समझ में आई कि मैं जैसा हूं वैसा ही अच्छा हूं तो उसने अपनी बेटी ही हटा दी और एक मुस्कुराहट के साथ कॉन्फिडेंस के साथ को प्रेसिडेंट की आंखों के सामने यह फिल्म भी कुछ इस तरह की उदाहरण होती है जो हमें जीवन के परिचय करा देती हैं और हम अपने आसपास फिल्में ही क्यों हम रियल लाइफ में ऐसे बहुत से उदाहरण देखते हैं कि कोई व्यक्ति अपने जैसा वह है वैसे ही वह बहुत खुश रहता है तो उसके आसपास वाले भी वह भी वह खुश रख पाता है और कोई उसको थोड़ा बहुत पीठ पीछे लोग के उत्तरांचल उनको नहीं मिल पाता हूं तो मजाक उड़ाने का क्योंकि उसको कोई फर्क ही नहीं पड़ता है क्योंकि मजाक उड़ाने वाले को भी मजा तो तभी आता है ना जब तक सामने वाले को कोई फर्क पड़ता हूं यही है क्या इसका जो मूल मंत्र है खुद को स्वीकार करना ही खुशी का पहला कदम है क्योंकि हमने खुद के लिए स्वीकार्यता यदि हमारे मन में है तो हम जो आत्मविश्वास की बात करते वह हमें जानता है और आत्मविश्वास होने पर हम कोई भी काम करने में सफल हो पाते हैं खुद ब खुद हम सॉल्यूशन ढूंढ लेते हैं अलग-अलग चुनौतियों उसको हम जीत पाते हैं उनसे जीतने के लिए उससे आगे चुनौती को स्वीकार करने के लिए हम सक्षम हो पाते हैं और फिर तो जब हम सक्षम हैं और हम एक आशावादी विचारधारा के साथ हो जाते हैं तो हम जीवन के किसी भी क्षेत्र में सफलता पाते हैं क्योंकि निराशा तो हमें छू भी नहीं सकती ना असफल होने पर भी हम निराश नहीं होते हैं तो जब हम कभी निराश नहीं होते हैं आशा बांध बने रहते हैं वही खुशी होती है तो बिल्कुल सही है कि खुद को शिकार करना खुशी का पहला कदम है बाकी सारी घटनाएं तो फिर अपने आप ही एक पॉजिटिव डायरेक्शन देती है और भी ऐसी बहुत सी फिल्में बनी है जिसमें व्यक्ति जब तक खुद से परेशान हैं कुछ लोग अपने साथ अपने साथी को देखकर उसको शिकार नहीं कर पाते और शर्मिंदा महसूस करते हैं जबकि कुछ लोग खुद बहुत सुंदर होने के साथ ही उस प्रकार से जिसे हम सुंदर चेहरे की सुंदरता जो रूट किस ने माता कहते हैं ना होने पर भी वह उसके लिए स्वीकार्यता की स्थिति में है तो वह जिसे ऐसा महसूस नहीं करता ही खराब है इसे दम लगा के हईशा मूवी में भी कुछ ऐसा ही दिखाई जाए
Namaskaar prashn hai kya khud ko sveekaar karana hee khushee ka pahala kadam hai jee haan bilkul khud ko sveekaar karana ya ham jaise hain vaise hee khush rahana aur khud se jisane hamen banaaya usase koee shikaayat na hona aur shikaayat mukt hona yahee to khushee kee pahalee shart hai ham bahut saaree shikaayaton se ghiree rahatee hain aur yah baat keval khud kee ho rahee hai to main keval khud se shikaayat hogee baat to yadi ham kad mein chhote hain bahut dubale ya bahut mote hain hamaara rang jaisa ham chaahate hain agar vaisa nahin hai aur bhee kisee prakaar kee koee kamee ham apane baare mein mahasoos karate hain hamen khud se apane banaane vaale se hee shikaayat hotee hai too yahee hai khud ko sveekaar karana ki ham jaise hain jaisa kab hai jaisa rang hai jaisa shareer hai usake saath khush rahana aur khud ko hee sveekaar nahin kar paate hain to doosare bhee majaak banaate hain yaanee unhen bhee mauka dete hain ham unhen bhee ham khud par hansane ka avasar den aur phir us unakee us hansee aur majaak se hee ham pareshaan hote rahate hain jabaki hamen yah nahin pata hota ki hamane apanee koee shikaar nahin kiya hai to doosare kyon hamesha karenge kuchh logon ko maja hee aata hai doosaron ko dukhee dekhane mein to agar ham dukhee dikhaee padate hain to aise logon ko aur jyaada avasar dete hain egjaampal hee le lete hain jaise kuchh moovees aaee hain jaise ki kuchh ganjepan ke oopar koee moovee aaee thee us vyakti ko apane ganjepan se sharm aatee thee ham khud hee sharm aata rahata tha phrastreted rahata tha vid lagaata tha alag-alag tareeke apanaata tha aur jab usakee vah big lagaana ya kuchh is tarah kee harakaten jo cheejen chhupaane kee koshish karata tha ganjepan ko ya kuchh prodakt yooj karata tha ki baal aa jae sar par us vajah se aur doosare logon ko ya usako khud ko doosaron ke saamane sharminda hona pade ant mein yah baat samajh mein aaee ki main jaisa hoon vaisa hee achchha hoon to usane apanee betee hee hata dee aur ek muskuraahat ke saath konphidens ke saath ko president kee aankhon ke saamane yah philm bhee kuchh is tarah kee udaaharan hotee hai jo hamen jeevan ke parichay kara detee hain aur ham apane aasapaas philmen hee kyon ham riyal laiph mein aise bahut se udaaharan dekhate hain ki koee vyakti apane jaisa vah hai vaise hee vah bahut khush rahata hai to usake aasapaas vaale bhee vah bhee vah khush rakh paata hai aur koee usako thoda bahut peeth peechhe log ke uttaraanchal unako nahin mil paata hoon to majaak udaane ka kyonki usako koee phark hee nahin padata hai kyonki majaak udaane vaale ko bhee maja to tabhee aata hai na jab tak saamane vaale ko koee phark padata hoon yahee hai kya isaka jo mool mantr hai khud ko sveekaar karana hee khushee ka pahala kadam hai kyonki hamane khud ke lie sveekaaryata yadi hamaare man mein hai to ham jo aatmavishvaas kee baat karate vah hamen jaanata hai aur aatmavishvaas hone par ham koee bhee kaam karane mein saphal ho paate hain khud ba khud ham solyooshan dhoondh lete hain alag-alag chunautiyon usako ham jeet paate hain unase jeetane ke lie usase aage chunautee ko sveekaar karane ke lie ham saksham ho paate hain aur phir to jab ham saksham hain aur ham ek aashaavaadee vichaaradhaara ke saath ho jaate hain to ham jeevan ke kisee bhee kshetr mein saphalata paate hain kyonki niraasha to hamen chhoo bhee nahin sakatee na asaphal hone par bhee ham niraash nahin hote hain to jab ham kabhee niraash nahin hote hain aasha baandh bane rahate hain vahee khushee hotee hai to bilkul sahee hai ki khud ko shikaar karana khushee ka pahala kadam hai baakee saaree ghatanaen to phir apane aap hee ek pojitiv daayarekshan detee hai aur bhee aisee bahut see philmen banee hai jisamen vyakti jab tak khud se pareshaan hain kuchh log apane saath apane saathee ko dekhakar usako shikaar nahin kar paate aur sharminda mahasoos karate hain jabaki kuchh log khud bahut sundar hone ke saath hee us prakaar se jise ham sundar chehare kee sundarata jo root kis ne maata kahate hain na hone par bhee vah usake lie sveekaaryata kee sthiti mein hai to vah jise aisa mahasoos nahin karata hee kharaab hai ise dam laga ke haeesha moovee mein bhee kuchh aisa hee dikhaee jae

अन्य लोकप्रिय सवाल जवाब

URL copied to clipboard