#जीवन शैली

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सब कुछ पा लेने के बाद भी इंसान संतुष्ट क्यों नहीं है?

Sab Kuch Pa Lene Ke Bad Bhe Insaan Santusht Kyun Nahin Hai
DR.OM PRAKASH SHARMA Bolkar App
Top Speaker,Level 33
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Principal, RSRD COLLEGE OF COMMERCE AND ARTS
1:21
कुछ पानी नहीं कि इंसान फ्रेंडशिप क्यों नहीं है आपने कहा कि सब कुछ पा लेने के बाद दुनिया में कोई भी व्यक्ति ऐसा नहीं है जिसको सब कुछ प्राप्त हो गया होगा संसार में सात सुख में 50 और सुखों की प्राप्ति किसी को भी नहीं होती है मानव को सुख कभी नहीं होती है क्योंकि जो लोग भौतिकवाद का शिकार होते हैं उनको अध्यात्मिक उनको मानवी उनको श्रद्धांजलि और संस्कारों का ज्ञान नहीं होता / 5 के पीछे दौड़ते हैं इसलिए हमेशा दुख पाते हैं और अपने आप को असंतुष्ट अर्जुन अशोक संतुष्ट को अपने जीवन का आधार मानते हैं कर्म को कर्तव्य को माननीय अध्यात्मिकता कुत्तों को अपने जीवन की सफलता का आधार मानते हैं वह सदैव संतुष्ट रहते हैं उन्हें किसी प्रकार की भौतिक सुखों की लालसा नहीं होती क्योंकि गोदन गधी दिन बाद ही धन और रतन धन खान जब आवे संतोष धन सब धन धूरि समान
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सब कुछ पा लेने के बाद भी इंसान संतुष्ट क्यों नहीं है?Sab Kuch Pa Lene Ke Bad Bhe Insaan Santusht Kyun Nahin Hai
Jyoti Malik Bolkar App
Top Speaker,Level 77
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Student
1:11
प्रश्न है सब कुछ पा लेने के बाद भी इंसान संतुष्ट क्यों नहीं है क्योंकि उसके पास मन में संतोष जगाने वाली शक्ति का अभाव है जब तक वह से प्रार्थना कर ले या प्राप्त करने की कोशिश ना करें तब तक वह असंतुष्ट ही रहेगा लेकिन कलयुग में नकारात्मकता बहुत है दूसरी तरफ दुनिया इतनी तेज हो गई है कि मनुष्य के पास फुर्सत भी नहीं होती क्यों अपने आप को संतुष्ट रख सके इंसान जन्म से ही जिज्ञासु होता है जो प्राप्त होता है उससे उसे खुशी नहीं मिलती इंसान के अंदर एक अधूरापन होता है जिसको वह पैसे शिक्षा शक्ति भौतिक साधनों से भरने की कोशिश करता है उसका अधूरापन इसलिए है कि मन चंचल है और वह सब पाने के बाद भी मानसिक शांति को प्राप्त नहीं हो पाता और आपको पता ही होगा जो इंसान का नेचर है वह ऐसा बना हुआ है कि वह कभी खुशी नहीं रहना चाहता बल्कि उसे तकलीफ में रहना ज्यादा अच्छा लगता है तू कितना भी खुश हो कितने ही के लिए कुछ ना हो उन पलों में भी कुछ ऐसा सोच लेता है यह ढूंढ लेता है जिसके बाद फिर से उसे कुछ ना कुछ पाने की इच्छा हो जाती है धन्यवाद

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सब कुछ पा लेने के बाद भी इंसान संतुष्ट क्यों नहीं है?Sab Kuch Pa Lene Ke Bad Bhe Insaan Santusht Kyun Nahin Hai
TechVR ( Vikas RanA) Bolkar App
Top Speaker,Level 11
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IT Professional
2:09
नमस्कार दोस्तों यूज़र ने पूछा है सब कुछ पा लेने के बाद भी इंसान संतुष्ट क्यों नहीं होता है देखिए इंसान की प्रवृत्ति ऐसी है कि वह कभी भी किसी की सजा सेटिस्फाइड नहीं हो पाता है अगर उसको ₹10 मांगोगे कहीं से उससे मिलते हैं तो वह यह सोचेगा कि फास्ट 10 की जगह होते हैं और एग्जांपल आपको शायद आपने बहुत बढ़िया चीज होगी कि राह चलते हुए साइकिल वाले पैदल-पैदल व्यक्ति ने साइकिल वाले को देखो तो उसने मन में मैंने सोचा कि हे भगवान कास्ट मुझे यह सेटिंग मिले तो मेरा पहले से समय बचा था लेकिन वही साइकिल वाले किसी बाइक वाले को देखता है तो होता है काश मेरे को बाइक मिल जाती तो मेरा और समय पर जाता मेरी मेहनत नहीं लगती है और वही बाइक वाला जो है किसी गाड़ी वाले को देखते कि काश तू गाड़ी मुझे मिल जाती तो मुझे मौसम की मार में मौसम की मार बारिश में आराम से अपने साथ चलाया था और जब उस गाड़ी का था उसको बढ़ेगा इच्छा होती है इंसान कभी संतुष्ट नहीं हो पाता है चाहे इंसान को चाहिए क्योंकि जीवन का मूलमंत्र अगर आपको संतुष्टि किसी चीज से मिल गई आपकी इच्छा शक्ति स्ट्रांग है अगर आप के सदस्य चीजों के अंदर से तो सहना सीख गए तो आपके लिए जिंदगी जीना बहुत आसान हो जाएगा तो कभी भी आपके जीवन में तकलीफ नहीं आएगी तो यही रीजन है कि इंसान हमेशा मुंह माया के प्रति ज्यादा लगाव रखता है उसे कुछ भी मिल जाए उसके लिए कम ही होता है तो बिल्कुल जो है इसी वजह से इंसान हो कभी संतुष्ट नहीं हो पाता और जो संतुष्ट हो जाते हैं कि वह काफी सफल हो जाता है ग्राम 4 ग्राम पर ले ले हमारे बहुत से साधु संत महात्मा है जो इन चीजों से अभी के समय में कुछ ऐसे हैं जो सब कुछ त्याग चुके हैं वह अच्छे से जीवन जीते मिले खाना तो खाएंगे नहीं मिलेगा तो लेकर कुछ चीज से नाम तो परिवार की तो चिंता है ना उनको कि से अश्व राम को जिताना कपड़ों की चिंता है ना की किसी और की भी चिंता है इसी वजह से खुश रहते हैं मुस्कुराते हुए जीते हैं आशा करता हूं आप मेरी बात को समझ पाए होंगे आपके सवाल का सही जवाब मिल गया होगा आशा करता हूं कि आपको पसंद आया हो तो लाइक और सब्सक्राइब करें धन्यवाद

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सब कुछ पा लेने के बाद भी इंसान संतुष्ट क्यों नहीं है?Sab Kuch Pa Lene Ke Bad Bhe Insaan Santusht Kyun Nahin Hai
Harender Kumar Yadav Bolkar App
Top Speaker,Level 33
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As School administration & Principal
2:30
पुष्पा लेने के बाद में इंसान संतोष क्यों नहीं है कोई मरता है तो दूसरे को और उनका जवाब देख लीजिए आप तो ऐसे भी सुधर भी होते हैं आप की छांव में आगे बढ़ो करेंगे ना कोई बात नहीं यार इससे हमारी रोजी-रोटी वार करता है तो मनुष्य चाहे जो है वह दिन पर दिन बढ़ती चली जाए जो लोग उसको रोक लेते हैं वह लोग संतुष्ट होते हैं और खुशी रखें मितवा बिजली बिल की मजदूर के दिन भर मेहनत करता है और शाम को खाना खा कर सो जाता है और सुकून मिलता इंसान को सब पता है यार कुछ बना रहे हैं हल्कोटी आया बिल्डिंग है यार जो इंडस्ट्रीज अब हमारी कोई मतलब नहीं है छोड़कर चला जाए प्यार करता चलिए ठीक है और हजरत की अपनी खबर सिरोही तलवार होंगी उनका रीवा में होंगी उल्लू को संतुष्ट हो जाता है लेकिन बाकी लोग ऐसे चलते

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सब कुछ पा लेने के बाद भी इंसान संतुष्ट क्यों नहीं है?Sab Kuch Pa Lene Ke Bad Bhe Insaan Santusht Kyun Nahin Hai
Rahul kumar Bolkar App
Top Speaker,Level 44
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Unknown
1:15
संभाल ले सब कुछ पा लेने के बाद भी इंसान संतुष्ट क्यों नहीं है दोस्तों आज के दौर के अंदर आंसर की 2 दिन की है वह भाग दौड़ भरी जिंदगी है हर कोई व्यक्ति अपना सुख सुविधाएं देखना चाहता है अपने परिवार के सुख सुविधाएं देखना चाहते हैं यही कारण है कि इंसान क्यों है उसे बहुत कुछ मिलने के बावजूद भी वह और कुछ पाने की लालसा रखते हैं दोस्तों इस के कारण कई जा सकते हैं कोई व्यक्ति मान लीजिए आईएएस ऑफिसर बन गया उसकी जिंदगी में और आगे बढ़ाना चाहते हैं और इसीलिए वह जो है राज्य के अंदर उस देश का प्रधानमंत्री बनना चाहेगा और कुछ भी मुकाम हासिल करना चाहता है

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सब कुछ पा लेने के बाद भी इंसान संतुष्ट क्यों नहीं है?Sab Kuch Pa Lene Ke Bad Bhe Insaan Santusht Kyun Nahin Hai
Shipra Bolkar App
Top Speaker,Level 44
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Self Employed
0:31
बस वाले की सब कुछ पा लेने के बाद भी इंसान संदेश तो क्यों नहीं है इंसान के सब कुछ बनाने के बावजूद भी संतोष ना होने का सबसे बड़ा कारण होता है कि उसकी और पाने की चाहत है जो लाल साहेब खत्म नहीं होती है इंसान हमेशा दूसरों के जैसा बनना चाहता है दूसरों की तरह से ही अपना जीवन यापन करना चाहता है वह चाहे खुद कितना भी क्यों ना कमाले कितने भिक्षुक तुम साधन क्यों नहीं उठा ले लेकिन फिर भी उसने सुपर कोई ना कोई व्यक्ति जरूर दिख जाता है और उसके जैसा बनने के चक्कर है मेरे को फिर से खुद को असंतुष्ट ही पाता है आपका दिन शुभ रहे थे

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सब कुछ पा लेने के बाद भी इंसान संतुष्ट क्यों नहीं है?Sab Kuch Pa Lene Ke Bad Bhe Insaan Santusht Kyun Nahin Hai
अमित सिंह बघेल Bolkar App
Top Speaker,Level 55
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सामाजिक कार्यकर्ता, मोटिवेशनल स्पीकर 
0:50
उसने पूछा गया सब कुछ पा लेने के बाद भी इंसान संतुष्ट क्यों नहीं है देखिए इंसान की इच्छाएं उसे देखे कभी भी संतुष्ट नहीं होने देती अगर यह है तो कल को यह भी होना चाहिए यह कुछ नया आया है यह भी खरीद लो यह मेरी जिंदगी को आरामदायक बना देगा यह भी ले लूं तो दिखे इच्छा ही बहुत है रोज कोई ना कोई नई चा जन्म लेती है तो संतुष्ट कहां से होगा बाहर की तरफ ज्यादा ध्यान है बाहर की दुनिया से बहुत लगाव है अंदर कभी झांका ही नहीं है यह मैं यह कहूंगा कि अगर आप समझते हैं कि आप संतुष्ट हैं तो यह देखिए आपका केवल एक भ्रम मात्र है आपके मन में कभी ना कभी देखिए यह सवाल जरूर आता है कि मुझे वह करना है मुझे वह लेना है इसी कारण देखे कोई भी संतुष्ट नहीं होता जय हिंद जय भारत

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सब कुछ पा लेने के बाद भी इंसान संतुष्ट क्यों नहीं है?Sab Kuch Pa Lene Ke Bad Bhe Insaan Santusht Kyun Nahin Hai
Pradumn kumar Vajpayee Bolkar App
Top Speaker,Level 44
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Bijneas9369174848
1:14
सब कुछ पा लेने के बाद भी इंसान संतुष्ट क्यों नहीं है तो दोस्तों मन की इच्छाओं का अंत कभी नहीं होता मन्ने निरंतर कई इच्छाएं होती रहती हैं और उन्हें छांव में संतुष्ट नहीं हो पाता यही कारण उसके संतुष्ट ना होने की वजह है क्योंकि जिस व्यक्ति में असंतोष उत्पन्न नहीं होता यानी कि कहने का मतलब यह है कि कोई कोई व्यक्तियों की आत्मा में संतोष उत्पन्न नहीं होता इस प्रकार के व्यक्ति होंगे जैसे हम कहीं भोजन करने गए तो वह कहेंगे और सब्जी इसमें डाल दीजिए और पूरी रख दीजिए और सब्जी डाल दीजिए कि उनको संतोष नहीं है तुमको डर रहता है कहीं पूरी न खत्म हो जाएंगे तब जीने खत्म हो जाए कुछ व्यक्ति ऐसे होते हैं जो अपने फ्लैट का सामान दूसरे को दे देते हैं दुनिया हर प्रकार के व्यक्ति कुछ व्यक्तियों में संतोष होता है कुछ में उत्पन्न ही नहीं होता और ऐसे ही व्यक्ति संतुष्ट नहीं हो पाते भोजन करने के बाद भी वह भूखे रह जाती धन्यवाद मित्र

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सब कुछ पा लेने के बाद भी इंसान संतुष्ट क्यों नहीं है?Sab Kuch Pa Lene Ke Bad Bhe Insaan Santusht Kyun Nahin Hai
Abhishek Kumar Bolkar App
Top Speaker,Level 11
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Student
1:14
सब कुछ पा लेने के बाद भी इंसान संतुष्ट नहीं है क्योंकि मानव का स्वाभाव आनंद पाने का है जो उसके जन्म से ही शुरू हो जाती तार में सभी आनंद की खोज में घूम रहे हैं वह बस आनंद पाना चाहते हैं अगर किसी चीज की लालसा है तो वह उसको पानी में दिन-रात लगा देते हैं पर जब वह मिल जाती है कुछ दिन बाद एक आनंद महसूस होता है उसके बाद वह बस तू ही बेकार लगने लगती है और फिर वह निकल पड़ता है मैं आनंद की खोज में यह सिलसिला जन्म से लेकर मरण तक चलते रहे इसलिए उस को तकलीफ होती वस्तु मिलने के बाद भी संतुष्ट नहीं हो पाता इनको जो सुख चाहिए वह तो कहीं और है जिसने उसको पा लिया गो पुत्र नानक और कबीर बन गया इसलिए मन में शांति का भाव पैदा करना है तो आत्मिक मेडिटेशन जरूरी है धन्यवाद
Sab kuchh pa lene ke baad bhee insaan santusht nahin hai kyonki maanav ka svaabhaav aanand paane ka hai jo usake janm se hee shuroo ho jaatee taar mein sabhee aanand kee khoj mein ghoom rahe hain vah bas aanand paana chaahate hain agar kisee cheej kee laalasa hai to vah usako paanee mein din-raat laga dete hain par jab vah mil jaatee hai kuchh din baad ek aanand mahasoos hota hai usake baad vah bas too hee bekaar lagane lagatee hai aur phir vah nikal padata hai main aanand kee khoj mein yah silasila janm se lekar maran tak chalate rahe isalie us ko takaleeph hotee vastu milane ke baad bhee santusht nahin ho paata inako jo sukh chaahie vah to kaheen aur hai jisane usako pa liya go putr naanak aur kabeer ban gaya isalie man mein shaanti ka bhaav paida karana hai to aatmik mediteshan jarooree hai dhanyavaad

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सब कुछ पा लेने के बाद भी इंसान संतुष्ट क्यों नहीं है?Sab Kuch Pa Lene Ke Bad Bhe Insaan Santusht Kyun Nahin Hai
Nikhil Ranjan Bolkar App
Top Speaker,Level 44
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Programme Coordinator at National Institute of Electronics & Information Technology (NIELIT)
0:40
मुस्करा का प्रश्न सब कुछ पा लेने के बाद भी इंसान संतुष्ट क्यों नहीं है तो आपको बताना चाहेंगे कि इंसान के अंदर की जो भूख है वह खत्म नहीं हो रही है वह एक चीज मिल जाने के बाद दूसरी चीजों से मिलने के बाद चौथी जिस तरह से वह आगे ही बढ़ता जा रहा है उस की लालसा समाप्त नहीं हो रही है और यकीन मानिए लालसा का कोई अंतर नहीं होता है तो यहां पर जब तक आप संतुष्टि का अनुभव नहीं करेंगे तब तक इस तरह की भूखा पर कभी खत्म होगी नहीं और आप कभी भी अपने जीवन में संतुष्ट नहीं रह पाएंगे सुखी नहीं बताएंगे आप ही कह रहा है इस बारे में करेक्शन अपनी राय जरुर व्यक्त करें शुभकामनाएं आपके साथ हैं धन्यवाद
Muskara ka prashn sab kuchh pa lene ke baad bhee insaan santusht kyon nahin hai to aapako bataana chaahenge ki insaan ke andar kee jo bhookh hai vah khatm nahin ho rahee hai vah ek cheej mil jaane ke baad doosaree cheejon se milane ke baad chauthee jis tarah se vah aage hee badhata ja raha hai us kee laalasa samaapt nahin ho rahee hai aur yakeen maanie laalasa ka koee antar nahin hota hai to yahaan par jab tak aap santushti ka anubhav nahin karenge tab tak is tarah kee bhookha par kabhee khatm hogee nahin aur aap kabhee bhee apane jeevan mein santusht nahin rah paenge sukhee nahin bataenge aap hee kah raha hai is baare mein karekshan apanee raay jarur vyakt karen shubhakaamanaen aapake saath hain dhanyavaad

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सब कुछ पा लेने के बाद भी इंसान संतुष्ट क्यों नहीं है?Sab Kuch Pa Lene Ke Bad Bhe Insaan Santusht Kyun Nahin Hai
Deepak Sharma Bolkar App
Top Speaker,Level 22
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संस्कृतप्रचारक, संस्कृतभारती जयपुरमहानगर प्रचारप्रमुख और सन्देशप्रमुख
2:55
नमस्कार मित्र आप ने प्रश्न किया है सब कुछ पा लेने के बाद भी इंसान संतुष्ट क्यों नहीं होता है मित्र जब भी कोई व्यक्ति जैसे कुछ चाहता है और वह से मिल जाता है मान लीजिए किसी व्यक्ति ने कोई वस्तु मांगी भगवान से तो अब उसे वह मिल भी गई फिर उसका मन क्या करेगा यह तो मिल गई है अब मुझे वह चीज भी चाहिए वह भी मिल जाएगा अच्छा होगा फिर दूसरी चीज के पीछे पड़ जाएगा उदाहरण के लिए से समझ गए कि एक व्यक्ति का जन्म होता है ठीक है बड़ा हुआ धीरे-धीरे बड़ा हुआ वह इस सांसारिक मोह माया में फस चुका है अब जब इस मोह माया में फस आएगा 12वीं क्लास हो गई उसके बाद हो जाएगा कि पापा पापा मोबाइल चाहिए ठीक है मोबाइल भी उसे मिल गया फिर उसका मन करेगा धीरे-धीरे बाद में बाइक चाहिए बाइक भी मिल गई फिर करेगा जब शादी हो जाएगी सब बेकार लग जॉब जॉब करनी है जॉब करनी है गवर्नमेंट प्राइवेट जो भी उसे मिले जो भी जिसमें वह जाना चाहता है वह अगर गवर्नमेंट चाहिए तो गवर्नमेंट की लालसा करेगा गवर्नमेंट भी मिल गई उसके बाद में फिर सोचेगा आपकी अब गाड़ी ले लूं फिर गाड़ी ले लेगा गाड़ी लेने के बाद में फिर मन करेगा कि अब यह यह चीज भी हो अब महंगे मोबाइल रख भाई फोन रखो पूरी होती जाती है ना तो वह फिर अगले इच्छा की तरफ बढ़ जाता है इसलिए व्यक्ति जब भी ज्यादा भी अगर पा लेगा तो भी वह संतुष्ट नहीं होता है क्यों क्योंकि यह स्वाभाविक है जब आप इस दुनिया में है इस मोह माया में फस चुके हैं तो आप की लालसा जो है वह हमेशा बढ़ती जाती है आपको प्राप्त हो जाएगा पर फिर भी आप चाहेंगे कि मुझे और चाहिए जैसे कोई व्यक्ति या महीने के लाख रुपए कमा रहा है फिर चाहे सोचेगा उसकी इच्छा शक्ति बढ़ेगी कि मुझे और ज्यादा कमाना है तो वो और ज्यादा कमाने के लिए मेहनत करेगा मतलब जितना मिल रहा है उससे भी ज्यादा पाने के लिए हर कोई मेहनत करने लग जाता है तो व्यक्ति जब अगर छोटी से छोटी चीज भी हो पा लेगा जो उसे ज्यादा चाहिए बल्कि उसके मन की इच्छा है तो फिर भी वह संतोष नहीं होगा प्रसन्ना नहीं होगा कि नहीं यार इसमें मजा नहीं आ रहा और भी चाहिए यह चीज चाहिए वह चाहिए तो यह क्यों है क्योंकि व्यक्ति मोह माया में फस चुका है अब जब मोह माया में फस जाएगा कोई भी तो वह अपने मन की छांव पर कंट्रोल नहीं कर पाएगा और उसे हमेशा कुछ न कुछ जो है वह चाहता है वह से वह मिलता रहे इसलिए ही हर कोई व्यक्ति जब भी कुछ पा लेता है तो वह संतुष्ट नहीं हो पाता है धन्यवाद
Namaskaar mitr aap ne prashn kiya hai sab kuchh pa lene ke baad bhee insaan santusht kyon nahin hota hai mitr jab bhee koee vyakti jaise kuchh chaahata hai aur vah se mil jaata hai maan leejie kisee vyakti ne koee vastu maangee bhagavaan se to ab use vah mil bhee gaee phir usaka man kya karega yah to mil gaee hai ab mujhe vah cheej bhee chaahie vah bhee mil jaega achchha hoga phir doosaree cheej ke peechhe pad jaega udaaharan ke lie se samajh gae ki ek vyakti ka janm hota hai theek hai bada hua dheere-dheere bada hua vah is saansaarik moh maaya mein phas chuka hai ab jab is moh maaya mein phas aaega 12veen klaas ho gaee usake baad ho jaega ki paapa paapa mobail chaahie theek hai mobail bhee use mil gaya phir usaka man karega dheere-dheere baad mein baik chaahie baik bhee mil gaee phir karega jab shaadee ho jaegee sab bekaar lag job job karanee hai job karanee hai gavarnament praivet jo bhee use mile jo bhee jisamen vah jaana chaahata hai vah agar gavarnament chaahie to gavarnament kee laalasa karega gavarnament bhee mil gaee usake baad mein phir sochega aapakee ab gaadee le loon phir gaadee le lega gaadee lene ke baad mein phir man karega ki ab yah yah cheej bhee ho ab mahange mobail rakh bhaee phon rakho pooree hotee jaatee hai na to vah phir agale ichchha kee taraph badh jaata hai isalie vyakti jab bhee jyaada bhee agar pa lega to bhee vah santusht nahin hota hai kyon kyonki yah svaabhaavik hai jab aap is duniya mein hai is moh maaya mein phas chuke hain to aap kee laalasa jo hai vah hamesha badhatee jaatee hai aapako praapt ho jaega par phir bhee aap chaahenge ki mujhe aur chaahie jaise koee vyakti ya maheene ke laakh rupe kama raha hai phir chaahe sochega usakee ichchha shakti badhegee ki mujhe aur jyaada kamaana hai to vo aur jyaada kamaane ke lie mehanat karega matalab jitana mil raha hai usase bhee jyaada paane ke lie har koee mehanat karane lag jaata hai to vyakti jab agar chhotee se chhotee cheej bhee ho pa lega jo use jyaada chaahie balki usake man kee ichchha hai to phir bhee vah santosh nahin hoga prasanna nahin hoga ki nahin yaar isamen maja nahin aa raha aur bhee chaahie yah cheej chaahie vah chaahie to yah kyon hai kyonki vyakti moh maaya mein phas chuka hai ab jab moh maaya mein phas jaega koee bhee to vah apane man kee chhaanv par kantrol nahin kar paega aur use hamesha kuchh na kuchh jo hai vah chaahata hai vah se vah milata rahe isalie hee har koee vyakti jab bhee kuchh pa leta hai to vah santusht nahin ho paata hai dhanyavaad

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सब कुछ पा लेने के बाद भी इंसान संतुष्ट क्यों नहीं है?Sab Kuch Pa Lene Ke Bad Bhe Insaan Santusht Kyun Nahin Hai
Dukh kaise mite Bolkar App
Top Speaker,Level 11
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Unknown
1:38
श्री कृष्णा आपने पूछा कि सब कुछ पाने के बाद भी इंसान संतुष्ट क्यों नहीं होता है इसका मुख्य कारण है जैसे भूख तो है पेट में और हम राखी बांधते हैं पीठ के पीछे वह मैं खाना नहीं खाते हैं तो फिर वह कैसे मिटेगी इस तरह जीवात्मा को भूख तो है इससे साफ करने की सहायता देने की इस धाम जाने की हवास में यह ग्रुप के लिए संसार वस्तु के पीछे भागते हैं तो फिर कैसे मिलेगी जब आप ईश्वर प्राप्ति लक्ष्य बनाने पूर्ण रूप से प्राप्त हो जाएगी और राजधानियां चले जाएंगे तो यह हमेशा के लिए बुक मिल जाएगी 1 साल सरकार की भक्ति करने से क्या होता है क्या रोटी मिलती है तो संत ने कहा कि मेरे भक्ति करने से जन्म जन्म की भूख मिट जाएगी क्या एकदम जाएंगे दुआ में बिजली गिरने ना सर्दी लगी नहीं है गर्मी लगेगी ना कोई वहां अपमान करेगा हमारी उपस्थित रहेंगे तो सुखी होंगी होंगी दूसरों की समस्या मरुधर एक्सप्रेस मुजफ्फरपुर से कौन का नाम रेनू कैसी मीटिंग आ जाइए आपसे कुछ भी सोचे उस पूछे इस दिल के पास में उसके पतंगा प्रतिभागी भरतरी भरतरी भरतरी
Shree krshna aapane poochha ki sab kuchh paane ke baad bhee insaan santusht kyon nahin hota hai isaka mukhy kaaran hai jaise bhookh to hai pet mein aur ham raakhee baandhate hain peeth ke peechhe vah main khaana nahin khaate hain to phir vah kaise mitegee is tarah jeevaatma ko bhookh to hai isase saaph karane kee sahaayata dene kee is dhaam jaane kee havaas mein yah grup ke lie sansaar vastu ke peechhe bhaagate hain to phir kaise milegee jab aap eeshvar praapti lakshy banaane poorn roop se praapt ho jaegee aur raajadhaaniyaan chale jaenge to yah hamesha ke lie buk mil jaegee 1 saal sarakaar kee bhakti karane se kya hota hai kya rotee milatee hai to sant ne kaha ki mere bhakti karane se janm janm kee bhookh mit jaegee kya ekadam jaenge dua mein bijalee girane na sardee lagee nahin hai garmee lagegee na koee vahaan apamaan karega hamaaree upasthit rahenge to sukhee hongee hongee doosaron kee samasya marudhar eksapres mujaphpharapur se kaun ka naam renoo kaisee meeting aa jaie aapase kuchh bhee soche us poochhe is dil ke paas mein usake patanga pratibhaagee bharataree bharataree bharataree

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