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क्या पौधे भी मनुष्य की भावनाओं को समझते हैं?

Kya Paudhe Bhi Manushya Ki Bhavnao Ko Samajhte Hain
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Master Chef in House
1:16
दक्षिण मुझे तो वैसे खैर नहीं लगता है किस पौधे जो है मनुष्य का भावनाओं को समझ सकता है मेरे ख्याल से लेकिन जिस पौधे से आपको प्यार होता है जैसे कि हमने अपने पहले से बहुत सारे पौधे लगा रखी तो हमें खुद को ही ऐसा लगता है कि नहीं अब रोज पानी देना चाहिए तो दे नहीं चाहिए इसको इतना ख्याल रखना चाहिए साफ सफाई करना चाहिए आस-पास मतलब जो भी चीजें उसका सेवा बर्दाश्त अच्छी तरह से करना चाहिए तो करता हूं इससे में पेड़ क्या हमारी भावनाओं को समझ सकता है यह तो मुझे नहीं पता लेकिन जैसे कोई जानवर होता है जानवर को अगर यदि आप कुछ भी करके हम तो बिल्कुल अपना भांजा भावनाओं को समझ सकता है और समझता भी है उसमें से कई तो जानवर है साले बहुत ज्यादा समझता है तो ऐसे में क्या है कि और हम उसको पालते हैं और अच्छा से देखभाल करते हैं पर पौधे जो है हमारी तनाव को कैसे समझे यह बात तो है मुझे नहीं लगता है कि ऐसा होना चाहिए लेकिन हां इतना वह शायद जरूर समझ सकता है कि हर इंसान हर बार जो है मतलब पानी आ कर देता है तो कुछ कुछ अंडे क्वेश्चन में से एक परसेंट हो सकता हमारे भावनाओं को समझ सकता हूं

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क्या पौधे भी मनुष्य की भावनाओं को समझते हैं?Kya Paudhe Bhi Manushya Ki Bhavnao Ko Samajhte Hain
Rahul kumar Bolkar App
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Unknown
0:46
तो सवाल के पौधे भी मनुष्य की भावनाओं को समझते हैं दो तो यह दिन में मानवता की बात करूं तो मैं यह कह सकता हूं कि हां बिल्कुल पौधे भी मनुष्य की भावना को समझते हैं और यही कारण है कि मनुष्य की भावनाओं को समझने के कारण से चाहे पौधों को मनुष्य काटता हूं उनका कुछ भी इस्तेमाल करता हूं पौधे जो है मनुष्य के उपयोग के लिए बने हैं पौधे अपनी भावनाओं को यह समझते हैं इनसे हमें ऑक्सीजन प्राप्त करते हैं इन्हीं से हम लकड़ी इत्यादि फर्नीचर हो घर में जलाने के लिए कुछ भी चीज हो हम इन्हें प्राप्त करते हैं मनुष्य की भावनाओं को यानी की कुल मिला ही पूजा समझते हैं

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क्या पौधे भी मनुष्य की भावनाओं को समझते हैं?Kya Paudhe Bhi Manushya Ki Bhavnao Ko Samajhte Hain
shabnam khatun Bolkar App
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Student
1:42
हेलो एवरीवन तो आज आप का सवाल है कि क्या बहुत ही भी मनुष्य की भावनाओं को समझते हैं तो देखिए अगर हम भावनाओं से हित की बात करें तो इतना तो अभी तक पता नहीं लगा है क्या इतना नहीं पता है तू मेरे हिसाब से जब तो पता नहीं लगाया गया है नहीं बताया गया है ऐसा कहीं हमने पढ़ा नहीं है तो इस चीज को तो नहीं मानूंगी और नहीं बोलूंगी लेकिन बहुत सारे ऐसे चीजें हैं मतलब जो मन में और पेड़-पौधों में कॉमन देखा गया है जैसे कि हम सांस लेते हैं हम अपना खाना बनाते हैं उस तरह से पेड़ पौधे भी सांस लेते हैं जैसे कि कार्बन डाइऑक्साइड हो लेते हैं खाना अपना बनाते हैं मुंह में उसे हम करते एक जगह से दूसरी जगह जाते हैं पेड़ पौधे का जो मोमेंट होता प्लीज चेंज नहीं करते लेकिन सनलाइट जिधर पड़ता जैसे सनफ्लावर सूरजमुखी वह करता है जिधर सनलाइट पड़ता है जो touch-me-not है जैसे हम बस कर कोई ज्यादा वह भी एक तरह कर क्या सकते हैं कि मोमेंट है तो इसको देखकर कुछ कमेंट कैरेक्टर्स है मतलब कहते हैं कि हमें भी है और उसमें भी है लेकिन फीलिंग अभी तक पता नहीं किया गया कि हां मुझे अगर कोई मार रहा है या फिर मुझे कोई टॉर्चर कर रहा है या मैं कोई परेशानी में हूं कोई मुझे मतलब परेशान कर रहा हूं मैं पेड़ की जगह अगर आ गई तो फिर वह मतलब मुझे बचा ले या फिर कोई फीलिंग को इमोशंस जग रहे हैं अभी तक देखा नहीं क्या जो में देखा जाता है जनरल तो मेरे हिसाब से अभी मैं बात करूं जितना पता है उसे साथ से मुझे नहीं लगता है कि पौधे में भी मनुष्य की जड़ से भागना है

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Meghsinghchouhan Bolkar App
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student
3:00
आकाशवाणी की पौधे भी मनुष्य की भावना को समझते हैं तो जीव जंतुओं की तरह पेड़ पौधे भी प्राण चेतना विद्यमान होते हुए चलते फिरते बनाने ऊपर इनके अंदर भाव भाव भाव यार बाबू सविधाना मेरे मरते हैं अपनी स्कूल बोर्ड सुनता के कांड में से बैलेंस की मुख्य फसल को नहीं समझ सके परंतु पौधे में अपनी भावनाओं का आदर करते हुए माननीय क्लॉक को या तक कि उनके विचारों और पतिदेव से भी करवा चौथ में प्रश्नकाल में भाजपा श्री सी मेहरबानी अपने स्वयं शीलता संचेतना सकती दोबारा से अवगत थे आज का अभी के नीचे कुछ भी अपने प्रयोग परीक्षण द्वारा इस तथ्य को पोस्ट कर रहे हैं सकता है अमेरिका की एक संस्था के पूर्व पूछताछ में पुलिस प्रशासन की विधि अपने कई प्रयोगों में यह निष्कर्ष पाया कि पौधे में उसी की ही तरह सरधना व्यक्त करते हैं एक प्रयोग के अंतर्गत उन्होंने एक ड्रैगन आपको देख के पत्तों को पॉलीग्राम में लेफ्ट कोट लगाएं इसका उद्देश्य पौधे की जड़ों में पत्ते से बढ़ने वाली पानी की गति का मापन करना है प्लीज आप दोबारा मिश्र की भावनाओं में परिवर्तन के कारण सिर्फ एकता नब्ज गति आदि में होने वाले बदलाव का मापन किया जाता है वैसे स्क्रीन एएसआई साइक्लो प्लेलिस्ट के नाम से भी नाम से भी नापा जाता है विश्व की विभूतियों के रूप पॉलीग्राफ के चार्ट पेपर पर एक बहन शेखर अंकित होती है नियम के अनुसार जब पानी पद के पत्तों में कम हो जाते हैं और अनुरोध अनुरोध सुपर हो जाता है लेकिन प्रयोग के स्तर पर नए नियम के ऊपर चोदते दिखाएं चैट मानवीय भावनाओं में उदय मन में एनिमेशन दे रहा था उसको सहरसा ईश्वर विश्वास नहीं हो पाई के पौधे कैसे भावना तू जवाब दे रहे उन्होंने अपनी त्रिवेदी जिज्ञासा के समाधान के लिए प्रयोग को आगे बढ़ाएं चयन प्रपत्र को आग लगाकर डराया जाना था अध्यक्ष ने जैसे ही माचिस जलाने की बात सोची जीपीआरएस के अद्भुत प्रवचन आ गए पौधे के कई खूबसूरत और माचिस जलाई जाती थी परंतु पॉलीग्राफ चार्ट पर मोदी की

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क्या पौधे भी मनुष्य की भावनाओं को समझते हैं?Kya Paudhe Bhi Manushya Ki Bhavnao Ko Samajhte Hain
Harender Kumar Yadav Bolkar App
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As School administration & Principal
3:50
चंदेरी मनोज की भावनाओं को समझते हैं परंतु मेरा नाम का है यही रहता है और उससे लगता है कि हम इस तरह का है और किस काम की है यार हमारे हिंदुस्तान क्या है इसका और बात कर ली है आपने कभी कल्पना क्या होगा देखा होगा किसानों की जमीन पौधे अपने घरों में लगाते हैं यह ड्यूटी जाते हैं पेड़ लगाते हैं काटते हैं अगर हम पेड़ लगाए हैं और हम और आप तो फसलों को भी लेकर भी किसान जिसको पानी देता है उसी का है उसमें लगा होता है और कई वैज्ञानिकों ने इस प्रभाव को अध्ययन किया हुआ है बॉडी के अंदर या उनके सेल के अंदर जमा है या उनका फोटो क्लास में जो होता है उसे देखा गया है उसे अनुमान लगाया गया था छोटी सी घटना है कर रहा था साइंटिस्ट के नाम देने आता है तो इसकी और लड़की पॉजिटिवली करें कहां पर है कौन से पूछा से प्यारी कहानी बॉडीगार्ड में काम करती हो मित्र की कटाई करती है कहीं दूसरी जगह करती लेकिन फौजियों का निर्माण तो कहना मुश्किल है लेकिन वैज्ञानिकों ने ट्रॉपिक मूवमेंट दिखाओ दे पानी की तरफ लाइट की तरफ ग्रेविटी की तरफ मुंह करते हैं तो बनती है उसे हम कैसे लेते हैं योगी जी का पौधा है जिस को टच करने से कहीं नहीं पैदा होता है भावनाओं को समझने की ऐसा कुछ तो ज्यादा है नहीं फिर भी अभी भी जारी है औरत और कुछ आता है तो हम लोग बता सकते हैं अभी भी कुछ अल्ट्रासोनिक क्लीनिंग करके दिखा दिया है कि संस्थाओं के सदस्य भी है तो लेकिन अभी तक ऐसा कोई है नहीं तो कहना

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क्या पौधे भी मनुष्य की भावनाओं को समझते हैं?Kya Paudhe Bhi Manushya Ki Bhavnao Ko Samajhte Hain
Navnit Kumar Bolkar App
Top Speaker,Level 11
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QUALITY ENGINEER
0:58
आर्ट ऑफ लिविंग एक बार से सोचा उन्हीं को गले लगाने का प्रतिनिधि जीवन होता यह बात तो आपको ही पता है ना वास्तु में भी उपचार होता पौधे को गले लगाने का जब एक पौधे को आप उनको उससे बात करना शुरू करते हो उससे अपनी फीलिंग शेयर करते हो उस को गले लगाते हो तो बदले में वह भी आपको भी देता वह भी आप को अपनाता है वह भी आपको प्यार देता है बस अंतर इतना है कि उसका हाथ पैर नहीं है उसके मुख नहीं है उसके पास के अपनी टीम को वह व्यक्त कर सकें लेकिन उसके अंदर की ख़ुशी का एहसास होता है कि उसमें भी जान में प्राण है तो पौधे भी मनुष्य की भावनाओं को समझते आप हम को प्यार दीजिएगा तो वह भी मुस्कुराते हैं वह भी हंसते हैं वह भी आपको खुशी देते हैं उसके बाद में बस हम लोगों को देखना आना चाहिए प्लीज
Aart oph living ek baar se socha unheen ko gale lagaane ka pratinidhi jeevan hota yah baat to aapako hee pata hai na vaastu mein bhee upachaar hota paudhe ko gale lagaane ka jab ek paudhe ko aap unako usase baat karana shuroo karate ho usase apanee pheeling sheyar karate ho us ko gale lagaate ho to badale mein vah bhee aapako bhee deta vah bhee aap ko apanaata hai vah bhee aapako pyaar deta hai bas antar itana hai ki usaka haath pair nahin hai usake mukh nahin hai usake paas ke apanee teem ko vah vyakt kar saken lekin usake andar kee khushee ka ehasaas hota hai ki usamen bhee jaan mein praan hai to paudhe bhee manushy kee bhaavanaon ko samajhate aap ham ko pyaar deejiega to vah bhee muskuraate hain vah bhee hansate hain vah bhee aapako khushee dete hain usake baad mein bas ham logon ko dekhana aana chaahie pleej

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