#रिश्ते और संबंध

bolkar speaker

एक ही आदमी बचपन जवानी और वृद्धि में अलग अलग सोच क्यों रखता है?

Ek He Aadmi Bachpan Javani Aur Vriddhi Mein Alag Alag Soch Kyun Rakhta Hai
Rohit Rathore Bolkar App
Top Speaker,Level 11
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Student
1:09
वेलकम बैक स्वागत है आप सबका बोल कर एक प्रोफाइल पर और आप सुन रहे हैं रोहित राठौर को एक आदमी और मतलब अपने बचपन में वृद्ध अवस्था में और जवानी में तीनों स्टेज पर अपने अलग-अलग पूछा क्यों रखता है जबकि मेरी जिंदगी में तुझे उसके एक्सपीरियंस के कारण होता है क्योंकि बचपन में जब होता है तो हमें जानते हैं प्रिंस नहीं होता नॉलेज नहीं होता मैं दुनिया का कोई भी मतलब एक एक्सप्रेस बोले क्यों नहीं होता है हम धीरे-धीरे सब चीजें सीखते हैं तो हमारे नजरिए चीजों को लेकर बदलते हैं और हम जैसे जैसे ज्यादा एक्सपीरियंस आते-आते वृद्ध अवस्था में होते होते तो वह अंदर एक्सप्रेस बदलते हैं हम जिंदगी के कुछ अच्छा ही है पता लगती है इस बचपन में अभिषेक सपने देखने मिलता है जब यह कर सकते हैं वह करेंगे पहले वाली में आते तो मैं पता चलता है क्या हम इन चीजों की लिस्ट कॉल करना होता है फिर वही हमसे ब्रदर ताकि आतिथ्य में पता चलता है कि और हमें करना कुछ नहीं था कुछ समय इस पृथ्वी पर हम सभी टेंपरेरी टेंपरेरी चले गए टेंपरेरी है सब ही लोग जो भी है सब खैरियत हिंदी पिक्चर अपने जीवन को इंजॉय करने की वजह है उसमें दूसरी चीजों में ही लगा दिया था धन्यवाद मुझे इजाजत दीजिए मिलते हैं आपसे अखिलेश आवाज में

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एक ही आदमी बचपन जवानी और वृद्धि में अलग अलग सोच क्यों रखता है?Ek He Aadmi Bachpan Javani Aur Vriddhi Mein Alag Alag Soch Kyun Rakhta Hai
shabnam khatun Bolkar App
Top Speaker,Level 33
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Student
2:48
हेलो शिवांशु आज आपका सवाल है कि एक ही आदमी बचपन जवानी और वृद्धि में अलग-अलग सोच क्यों रखता है वह सोचते हैं जो हमारे आस पास हो रहा होता है जो हमारे दिमाग में चल रहा होता जिस तरह से हमारा ही होता है उसी तरह के विचार भी हमारे मन में आते हैं अगर कोई बहुत ही छोटा बच्चा है तो उसके मन में यही चलता है कि मुझे भी भूख लगी है मैं क्या करूं किस रेंज में रहो ताकि पता चले आसपास वाले को और मुझे खाना मिल सके घूमना फिरना खाना-पीना बस इतनी तकलीफ में अच्छा लगता है कि कैसे मतलब खेले कूदे आज किसके साथ खेलना कूदना है क्या सेटिंग बनाना है कौन मुझे खिलाएगा या नहीं सोचते हैं उसके बाद जब यंग एज की बात आती है तब आप क्या कंपटीशन बहुत ज्यादा हो जाता है तब आपके मन में आप भी चलता है कि लाइफ में कुछ करना तब समझदारी भी आ जाती है तब आप थोड़ा क्या मतलब बच्चों की तरह सोचते हैं अपने आसपास ही देख रहे आपके जो भी दोस्त आपकी फ्रेंड से वह भी लाइफ में कैसे स्टेबल रहे कैसे आगे बढ़े कहां-कहां कैसे क्या करें वह सब सोचते आप भी उन्हीं के सराउंडिंग में रहता तो आप भी वैसा ही चीज सोचते हैं अभी आपको लाइफ में स्टेबल होना है आपको कुछ करना है आपको मतलब कैसे आगे बढ़ना है जिंदगी चीज आपके मन में चलता रात के आसपास भी आप के जितने भी फ्रेंड सर्कल है जितने भी आपके आंसर जिनके साथ आपका बोलचाल है यही सोचते हैं और जब हमें चले जाते हैं जो तुम बोली हो जाते हैं लाइफ में कॉन्पिटिशन जैसा कुछ नहीं कि अभी भी हमें जॉब करना है क्योंकि हम उठ नेट चल नहीं पा रहे हैं अच्छे से तो हम जो आपके बारे में तो सोच ही नहीं पाते क्योंकि सबकी एक जैसी नहीं होती है और ज्यादा से ज्यादा लोग मिल जाते हैं मतलब और चलना फिरना इधर-उधर उठने में प्रॉब्लम होता है में कितने फुर्ती लेते हैं और कैसे मतलब दिव्यांशु आप तुरंत डिस्टेंस तक है मतलब फास्ट इधर उधर चले जाते थे इतना जल्दी और फिर आप जो बीच में आ जाए तो आप सोचते कि कभी भी शायद हमारी मौत या फिर मतलब इस दुनिया से हम चले जाएंगे यह सब तरह की भी मन में ख्याल आता है इतनी सारी बीमारी जो इंसान को हो जाती है उस बारे में इंसान सोचता है कितना कुछ खर्च हो रहा है और फिर भी हम घर में कुछ नहीं कर पा रहे ना ही कमाल है यह सब मन में चलता है जैसे जैसे हमारे जाते हैं कॉलेज हो गया यंग बचपन का जो एज हो जाता है तो हमारे आसपास जिस तरह से जिस तरह से हमारे दिमाग में जिस चीज का असर पड़ता है उसी तरह की सोचते हैं और वही चीज हम करते हैं

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एक ही आदमी बचपन जवानी और वृद्धि में अलग अलग सोच क्यों रखता है?Ek He Aadmi Bachpan Javani Aur Vriddhi Mein Alag Alag Soch Kyun Rakhta Hai
Rahul kumar Bolkar App
Top Speaker,Level 44
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Unknown
1:06
क्योंकि बचपन जवानी और वृद्धि में अलग-अलग सोच रखता है इसका मेन कारण मौजूद था बचपन के अंदर तो बचपन में तो हर कोई बालक होता है बचपन के अंदर उसको नजरअंदाज कर दिया उसको सारे अनुभव याद आते हैं अपना बचपन याद आता है जवानी के अंदर चौधरी कविता परेशानियों से और अपने लोगों को समझाने की कोशिश करते हैं कि जवानी में पढ़ाई करें क्या शर्म करें जिसे के अंदर तो हमारे विचारों को लगाते जवानी में अलग हो जाते हैं अच्छे जान से करता हूं

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एक ही आदमी बचपन जवानी और वृद्धि में अलग अलग सोच क्यों रखता है?Ek He Aadmi Bachpan Javani Aur Vriddhi Mein Alag Alag Soch Kyun Rakhta Hai
अमित सिंह बघेल Bolkar App
Top Speaker,Level 55
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सामाजिक कार्यकर्ता, मोटिवेशनल स्पीकर 
3:31
प्रश्न पूछा गया कि एक ही आदमी बचपन जवानी और वृद्धि में अलग-अलग सोच के बता दे कि इसके पीछे अगर मैं कारण बताओ कोफ्ते की जब हम लोग बचपन में छोटे रहते हैं समझ थोड़ी कम रहती है धीरे-धीरे बचपन में हम लोग खेलते कुड़ते पढ़ाई करते आगे बढ़ते हैं जवानी में गाते हैं तो खुला और उसकी क्या है सोच अलग होती है कि आपने कभी भी सोचोगे तो हमारे माता-पिता हैं हमको शौक हम को समझाते हैं कहते हैं कि बेटा ऐसा नहीं ऐसा किया करो यह नहीं वह किया करो कि दुनिया देखती है तो बच्चे भी नाराज हो जाते हो जिसको समझना होता है वह दिखे समझ जाता है हमेशा देखिए बचपन में जो सोच होती है वह अलग होती क्योंकि देखिए हमारी जो सोच है उसको और निखारने के लिए जवानी तक आना पड़ता है हमें जवानी में आए सोच अलग बड़ी और लोगों से मिला दो कि दिखे बचपन से लेकर जवानी में आने में टाइम लगता है हम लोग पतन कितने लोगों से सुख दुख का सामना करना पड़ता जवानी में आ गई वृद्धि आगे तो वृद्धि में क्या है कि हम लोग में दुनिया देखे होती है हमारी जो दादा परदादा जो हमारे बाबा हैं उन्होंने क्या है बचपन गुजारा जवानी गुजारे उसके बाद वह बुड्ढे हुए उन्होंने दुनिया देखे होती है तो क्या है किस सोच में बहुत अंतर हो कि उन्होंने पूरी जिंदगी कहीं ना कहीं कुछ ना बदलाव कुछ महसूस हर तरीके से क्या होता है वह हमें समझाते हैं पढ़ाते हैं दिखाते हैं बहुत कुछ हमें शिक्षा देते हैं तो सोच में फर्क इसीलिए पड़ता है क्योंकि देखिए हम लोग उस स्थिति से आगे निकलते हैं बचपन में कुछ और सिचुएशन था हम लोग खेलते कूदते खिलौने से खेलते हुए साइकिल में चढ़ते हुए गाड़ी में आते हुए औरत भी एक टाइम जाता है कि हमारे खुद बच्चे दादा दादा परदादा क्या बोलते हैं कि हमारे जो बच्चे होते हो उनको शादी करते हैं अपने बच्चों की सब कुछ मतलब वह दुनिया देखकर ही वह बुड्ढे होते हैं क्योंकि उन्होंने पूरी जिंदगी कहीं ना कहीं सुख दुख में कटी हुई होती है तो सोच में तो बदलाव आ नहीं आना है बचपन में कल जवानी में आओगे उसकी सोच अलग बढ़ेगी क्योंकि हम लोग जवानी से लेकर वृद्ध बहुत कुछ देख नहीं होते तो हमारे जो बुजुर्ग हैं और हर सिचुएशन से रेल के आगे बढ़ते अपने छोटे बच्चों को अपने साथियों को हर तरीके की टीम को बताते रहते हैं तो बहुत कुछ बदलाव आता है खुद ही सोचिए आपको कुछ अच्छी सी पसंद आई आपको सोचा कि यह मुझे लेना है तो आपको लेने के लिए प्रयास करते होगा पैसे है तो आप ले लो क्या कर नहीं है तो मेहनत करके आगे बढ़ो गे लोगे अगर नहीं ले पाओगे तो आप यह सोचो कि मेरे पास पैसे नहीं है सोच एक जैसी सोच होती है यह सोच इंसान को आगे बढ़ा भी सकती है और बिगड़ भी सकती तो जीवन में हमेशा सोच हमेशा अच्छी रखो और आगे बढ़ो बचपन आई है अपना मैंने अपनी जवानी हो एक दिन हम लोग बुड्ढे भी होंगे और हर इंसान देखकर को नकारा नहीं जा सकता कि हर इंसान लेकिन जीवन में कहीं ना कहीं कुछ गलतियां करता है कुछ ना कुछ अच्छा काम करता है तो सोचे जीवन बचपन से ही लिखी एक कुदरती देन कहेंगे आप भगवान की देन कहेंगे कुछ भी कहिए फर्क पड़ने पड़ने जैसे जैसे इंसान बड़ा होगा वैसे वैसे उसकी सोच में भी काफी कुछ बदलाव आएगा देखने को मिलेगा बहुत कुछ समझने को मिलेगा जय हिंद जय भारत

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एक ही आदमी बचपन जवानी और वृद्धि में अलग अलग सोच क्यों रखता है?Ek He Aadmi Bachpan Javani Aur Vriddhi Mein Alag Alag Soch Kyun Rakhta Hai
Archana Mishra Bolkar App
Top Speaker,Level 22
सुनिए Archana जी का जवाब
Housewife
0:43
हेलो दोस्तों स्वागत है आपका आपका प्रश्न एक ही आदमी बचपन जवानी और यदि मैं अलग अलग सोच क्यों रखता है तो फ्रेंड जब एक आदमी जवानी में होता है तो उसकी उम्र कुछ और होती है और जब वह बचपन में होता है तो उसकी उम्र कुछ और होती है जैसे जैसे धीरे धीरे उम्र बढ़ती जाती है तो उसकी सोच भी बदल दी जाती है जैसे हम बचपन में होते हैं तो हमें ज्यादा अक्ल नहीं होती है शैतानियां करते हैं और जैसे जैसे हम बड़े होते जाते हैं तो धीरे-धीरे हमें समाज की घर की परिवार की सब की बात करने की रहने की अकड़ धीरे-धीरे आ जाती है हर काम करने का हम सलीका भी धीरे-धीरे सीख जाते हैं इसलिए सोच में भी फर्क आ जाता है धन्यवाद

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एक ही आदमी बचपन जवानी और वृद्धि में अलग अलग सोच क्यों रखता है?Ek He Aadmi Bachpan Javani Aur Vriddhi Mein Alag Alag Soch Kyun Rakhta Hai
Trilok Sain Bolkar App
Top Speaker,Level 33
सुनिए Trilok जी का जवाब
Motivational Speaker Public Speaker Life Coach Youtuber
0:53
एक ही आदमी बचपन जवानी और वृद्धावस्था में अलग-अलग सोच क्यों रखता है इसका कारण यह है कि मनुष्य का दिमाग परिस्थितियों के अनुसार काम करता है जब बचपन में होता है तो उसको उसकी सोच एक ही नियम लिमिटेड एरिया में होती है उसको जितना ज्ञान होता है उतनी होती है लेकिन जो है उसको नई-नई चीजें पता चलती है उसकी सोच बदलती जाती है तो ऐसा सबके साथ होता है मेरे साथ भी होता है मैं पहले जो सोचता था आजकल विचार नहीं सोचता हूं तो यह निर्भर करता है कि उज्जवल जीवन आगे बढ़ता है जीवन में कठिनाइयां आती है जीवन में सफलता ही आती है सपने थे तो उस अनुसार मनुष्य की सोचने की जा सकती है वह अलग हो जाती है उसके विचार अलग जाते हैं उसके विचार बदल जाते हैं तो यह कारण है उसके अनुभव का उसने जीवन में जो जो देखा जो जनसंख्या उसके आधार पर वह सोच को बदलता रहता है धन्यवाद
Ek hee aadamee bachapan javaanee aur vrddhaavastha mein alag-alag soch kyon rakhata hai isaka kaaran yah hai ki manushy ka dimaag paristhitiyon ke anusaar kaam karata hai jab bachapan mein hota hai to usako usakee soch ek hee niyam limited eriya mein hotee hai usako jitana gyaan hota hai utanee hotee hai lekin jo hai usako naee-naee cheejen pata chalatee hai usakee soch badalatee jaatee hai to aisa sabake saath hota hai mere saath bhee hota hai main pahale jo sochata tha aajakal vichaar nahin sochata hoon to yah nirbhar karata hai ki ujjaval jeevan aage badhata hai jeevan mein kathinaiyaan aatee hai jeevan mein saphalata hee aatee hai sapane the to us anusaar manushy kee sochane kee ja sakatee hai vah alag ho jaatee hai usake vichaar alag jaate hain usake vichaar badal jaate hain to yah kaaran hai usake anubhav ka usane jeevan mein jo jo dekha jo janasankhya usake aadhaar par vah soch ko badalata rahata hai dhanyavaad

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एक ही आदमी बचपन जवानी और वृद्धि में अलग अलग सोच क्यों रखता है?Ek He Aadmi Bachpan Javani Aur Vriddhi Mein Alag Alag Soch Kyun Rakhta Hai
Nikhil Ranjan Bolkar App
Top Speaker,Level 44
सुनिए Nikhil जी का जवाब
Programme Coordinator at National Institute of Electronics & Information Technology (NIELIT)
1:00
तारा का प्रश्न है कि आदमी बचपन जवानी और वृद्धावस्था में अलग सोच क्यों रखता है तो आपको बता देंगे देखिए और उलटफेर में व्यक्ति के जीवन में अलग रिक्वायरमेंट होती है अलग उसके चाहते होती हैं जब व्यक्ति बचपन में होता है तो उसकी अपनी अलग ख्वाहिश होती है आपसे अलग अपनी एक सपनों की दुनिया होती है जब रे जवानी में आता है तो उसका हकीकत से सामना होता है उसको अपने पैरों पर खड़ा होना होता है अपना परिवार चलाना होता है वह सारी चीजें उसके रिक्वायरमेंट बन जाती हैं और जब व्रत हो जाता है तब उसकी अपनी रिक्वायरमेंट चेंज हो जाती है तो उस प्रकार जीवन के हर एक पड़ाव में व्यक्ति अपने जिंदगी के जो उसके सराउंडिंग से उसके अनुसार जो उसके डिसीजन से वह देने पड़ते हैं इसलिए उसकी सोच फर्क हो जाती है आपकी करें इस बारे में कमेंट सेक्शन अपनी राय जरुर व्यक्त करें मैं शुभकामनाएं आपके साथ हैं धन्यवाद
Taara ka prashn hai ki aadamee bachapan javaanee aur vrddhaavastha mein alag soch kyon rakhata hai to aapako bata denge dekhie aur ulatapher mein vyakti ke jeevan mein alag rikvaayarament hotee hai alag usake chaahate hotee hain jab vyakti bachapan mein hota hai to usakee apanee alag khvaahish hotee hai aapase alag apanee ek sapanon kee duniya hotee hai jab re javaanee mein aata hai to usaka hakeekat se saamana hota hai usako apane pairon par khada hona hota hai apana parivaar chalaana hota hai vah saaree cheejen usake rikvaayarament ban jaatee hain aur jab vrat ho jaata hai tab usakee apanee rikvaayarament chenj ho jaatee hai to us prakaar jeevan ke har ek padaav mein vyakti apane jindagee ke jo usake saraunding se usake anusaar jo usake diseejan se vah dene padate hain isalie usakee soch phark ho jaatee hai aapakee karen is baare mein kament sekshan apanee raay jarur vyakt karen main shubhakaamanaen aapake saath hain dhanyavaad

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