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क्या आज भी कुछ महिलाएं अपनी इच्छाओं का गला घोट कर जीते हैं?

Kya Aaj Bhee Kuchh Mahilaye Apni Ichhao Ka Gala Ghot Kar Jiti Hai
Rohit Rathore Bolkar App
Top Speaker,Level 11
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Student
0:42
स्वागत है आपका मेरी बोला मेरे प्रोफाइल पर आप सो रहे हैं रोहित राठौर को हां यह बिल्कुल सच है कि आज भी कुछ महिलाएं अपने गांव का गला घोटकर जीती है यह हमारी सोसाइटी का एक काला सच है क्योंकि कई बार महिलाओं को सिर्फ धड़कनों को जगाया जाता है कि किचन तक बाकी और उनकी भी कुछ इच्छाएं होती है उन्हें भी दुनिया घूमने का सिर्फ घूमने का शौक हो तो जिंदगी कितनी भी कई बार हमारे घर की महिलाओं को बाहर घुमाने ले जाना चाहिए हर वह चीज प्रोवाइड करनी चाहिए थी उनकी इच्छा हो क्योंकि आजकल वो कहती नहीं है पर अपनी इच्छाओं का गला कुर्ती जरूर है कि मुझे ज्यादा दीजिए मिलते आपसे अगले साल में जब तक के लिए ट्रिक

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क्या आज भी कुछ महिलाएं अपनी इच्छाओं का गला घोट कर जीते हैं?Kya Aaj Bhee Kuchh Mahilaye Apni Ichhao Ka Gala Ghot Kar Jiti Hai
Harender Kumar Yadav Bolkar App
Top Speaker,Level 33
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As School administration & Principal
2:36
क्या आज भी कुछ महिलाएं अपने गांव का गला घोट कर देते हैं ठीक है भाई कुछ महिलाएं नहीं हमारे देश के 80% महिलाएं जो आज अपनी परंपराओं के नाम पर और अपनी मान्यताओं के नाम पर अपने धर्म के नाम पर परिवार के नाम को यह जीवन शैली जी रही तरह रह रहे हैं महिलाओं के लोग कहते हैं कि पहले मटके पहुंच चुकी है लेकिन ग्राम पंचायत के सदस्यों के दल के रूप में बैठती है कुछ महिलाएं स्वतंत्र रूप से काम करते हैं लेकिन अधिकतर भी मैं देखा है कि पारिवारिक जिम्मेदारियों और पति और उन्हें मिलती है फुर्सत नहीं है और ऐसे कंप्रोमाइज करके देती हैं बहुत हिंदुस्तान की 70 से 80% महिलाएं होती है मेरे पास करती हैं उनका इरादा होता और कुछ करने का और बेहतर करने का कुछ आगे बढ़ने का लेकिन नहीं होता हमने देखा है उसको लेवल पर लड़कियां पारी में 19 और फिर नेट 6 क्वेश्चन मेडिकल हो गया उसका लिखाई करना चाहती लेकिन बैलेंस कर देना नहीं रहने दो पैसे ज्यादा रंगीली के दर्शन करने के लिए बाहर जाना चाहते नहीं जाने दीजिए आपको तोहीन मन पड़ेगा दोस्त हिंदुस्तान कितना भी आगे निकल गया हो कि तहरीर बेहतर रही है ऐसी महिलाओं की हड्डी की रोजी-रोटी घरेलू हिंसा अगर ऐसा नहीं होता कि घरेलू हिंसा हिंसा में हजारों की संख्या में

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Shipra Bolkar App
Top Speaker,Level 44
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Self Employed
0:34
ऐसा मैंने क्या आज भी कुछ महिलाएं अपनी इच्छाओं को गला घोटकर बिजी थी हैं जी हां निश्चित तौर पर बहुत सारी ऐसी महिलाएं हैं जो आज भी अपनी इच्छाओं को गला घोट कर ही जी रही हैं चाहे जब मैं हूं चाहे वह हाउसवाइफ हूं बहुत सारी अपेक्षाएं होती हैं बहुत सारी ऐसी चीजें होती हैं जो फीमेल सपने ले करना चाहती हैं पर किसी न किसी दायरे की वजह से दबाव की वजह से यह जिम्मेदारी के वजह से ऐसा नहीं कर पाती हैं और अपनी इच्छाओं का गला खुद ब खुद ही गुड लेती हैं आपने शुभ रहे थे निषाद

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Rahul kumar Bolkar App
Top Speaker,Level 44
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Unknown
0:48
आज भी कुछ महिलाएं अपनी इच्छाओं का गला घोट कर देते हैं दोस्तों पहली बात तो यह जो महिला अपनी इच्छा का गला घोटकर चाहिए वह मूरख को क्यों क्योंकि इसलिए किस संविधान ने महिलाओं की आजादी को उनके स्वतंत्रता को लेकर में काफी ज्यादा अधिकार दिए गए हैं उसके बावजूद भी अपनी इच्छाओं को गला घोटकर जी रही है तो उनसे बड़ा मूर्ख कोई हो नहीं सकता दोस्तों फिर भी बात करें क्या महिला की गला घोटकर के अभी बिजी रहो तो जी हां बिलकुल बिहार के अंदर चले जाइए कर्मचारी महिलाएं अपनी इच्छाओं का जो है वह गला घोट कर के जी रही है इनको आज भी पर्दा के पीछे रखा जाता है

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क्या आज भी कुछ महिलाएं अपनी इच्छाओं का गला घोट कर जीते हैं?Kya Aaj Bhee Kuchh Mahilaye Apni Ichhao Ka Gala Ghot Kar Jiti Hai
Trilok Sain Bolkar App
Top Speaker,Level 33
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Motivational Speaker Public Speaker Life Coach Youtuber
0:51
जी हां बिल्कुल आज के समय में भी बहुत सारी स्त्रियां परीक्षाओं का गला घोटकर जीती है और इसके पीछे कारण है सामाजिक रीति रिवाज समाज की आर्थिक स्थिति और उनके घर का माहौल वैसे गांव में मान लो किसी औरत है उसका पति की आर्थिक स्थिति सही नहीं है वह कमा तो ज्यादा नहीं है तो वह औरत क्या करेगी उसको इच्छा है कि वह महंगे कपड़े पहने तो उसको दमन करना पड़ेगा उसके चाहिए वह घूमने जाए नहीं जा पाएगी तो ऐसा अक्सर हर जगह होता है और महिलाओं के साथ पुरुषों के साथ भी होता है क्योंकि पूर्व यानी व्यक्ति सोचता है कि मैं एसएससी खर्चे करूं इस प्रकार की जीवन जी लेकिन अगर उसके जीवन में ऐसा संभव नहीं है उसको दमन करना ही पड़ेगा धन्यवाद
Jee haan bilkul aaj ke samay mein bhee bahut saaree striyaan pareekshaon ka gala ghotakar jeetee hai aur isake peechhe kaaran hai saamaajik reeti rivaaj samaaj kee aarthik sthiti aur unake ghar ka maahaul vaise gaanv mein maan lo kisee aurat hai usaka pati kee aarthik sthiti sahee nahin hai vah kama to jyaada nahin hai to vah aurat kya karegee usako ichchha hai ki vah mahange kapade pahane to usako daman karana padega usake chaahie vah ghoomane jae nahin ja paegee to aisa aksar har jagah hota hai aur mahilaon ke saath purushon ke saath bhee hota hai kyonki poorv yaanee vyakti sochata hai ki main esesasee kharche karoon is prakaar kee jeevan jee lekin agar usake jeevan mein aisa sambhav nahin hai usako daman karana hee padega dhanyavaad

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क्या आज भी कुछ महिलाएं अपनी इच्छाओं का गला घोट कर जीते हैं?Kya Aaj Bhee Kuchh Mahilaye Apni Ichhao Ka Gala Ghot Kar Jiti Hai
souramita Deb Bolkar App
Top Speaker,Level 11
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Unknown
1:15
क्या आज भी कुछ महिलाएं अपनी इच्छाओं का गला घोट कर जीते हैं शायद हां क्योंकि हम जैसे मॉडर्न समाज में रहते हैं ऐसे बहुत सारे गांव में हमारे देश में जहां पर हमारी जो मॉडल संस्कृति है वह ठीक नहीं पहुंच पाई है वहां पर महिलाओं को वैसे ही हमारे इतिहास में जैसे उनके साथ बर्ताव किया जाता है अभी भी उनके साथ वैसे ही बर्ताव किया जाता है उनके लिए पहले अपने परिवार पहले होते हैं और फिर अपनी तो जैसे उनको जरूरत है ही नहीं कि खुद के बारे में कुछ सोचा खुद का काम करें ऐसा शायद उनके लिए कुछ है ही नहीं ऐसे बहुत सारी जगह पर महिलाओं के साथ ऐसा होता है पर हमारी मॉडर्न से कभी हमारी सोसाइटी पर सिटी स्वीट हाउस पर ऐसा शायद नहीं होता आज हर महिला अपनी इच्छाओं को अपने सामने रखी अपेक्षाओं के साथ चलती है पर कुछ कुछ जगह में अभी भी जो महिला है वह अपनी इच्छाओं का गला घोट कर अपने परिवार को पहले चलाती है अपनी बीवी अपने बच्चों को अपने पति को पहले अपना उनके बारे में ज्यादा सोचती है फिर अपने बारे में सोचती भी है या नहीं वह भी अब नहीं कह सकते हैं
Kya aaj bhee kuchh mahilaen apanee ichchhaon ka gala ghot kar jeete hain shaayad haan kyonki ham jaise modarn samaaj mein rahate hain aise bahut saare gaanv mein hamaare desh mein jahaan par hamaaree jo modal sanskrti hai vah theek nahin pahunch paee hai vahaan par mahilaon ko vaise hee hamaare itihaas mein jaise unake saath bartaav kiya jaata hai abhee bhee unake saath vaise hee bartaav kiya jaata hai unake lie pahale apane parivaar pahale hote hain aur phir apanee to jaise unako jaroorat hai hee nahin ki khud ke baare mein kuchh socha khud ka kaam karen aisa shaayad unake lie kuchh hai hee nahin aise bahut saaree jagah par mahilaon ke saath aisa hota hai par hamaaree modarn se kabhee hamaaree sosaitee par sitee sveet haus par aisa shaayad nahin hota aaj har mahila apanee ichchhaon ko apane saamane rakhee apekshaon ke saath chalatee hai par kuchh kuchh jagah mein abhee bhee jo mahila hai vah apanee ichchhaon ka gala ghot kar apane parivaar ko pahale chalaatee hai apanee beevee apane bachchon ko apane pati ko pahale apana unake baare mein jyaada sochatee hai phir apane baare mein sochatee bhee hai ya nahin vah bhee ab nahin kah sakate hain

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