#भारत की राजनीति

Archana Mishra Bolkar App
Top Speaker,Level 22
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Housewife
0:27
हेलो फ्रेंड स्वागत है आपका नंबर दे सकता है तो नहीं सकता लेकिन वह प्रेस एजेंसी में जाकर में जरूर बता सकता है कि यह खबर झूठी है आप इसे लंबे और उस सच्चाई से अवगत कराएं किए झूठी खबर आपको नहीं छोड़ना चाहिए तो वह खबर नहीं छपी की धन्यवाद
Helo phrend svaagat hai aapaka nambar de sakata hai to nahin sakata lekin vah pres ejensee mein jaakar mein jaroor bata sakata hai ki yah khabar jhoothee hai aap ise lambe aur us sachchaee se avagat karaen kie jhoothee khabar aapako nahin chhodana chaahie to vah khabar nahin chhapee kee dhanyavaad

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Rahul kumar Bolkar App
Top Speaker,Level 44
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Unknown
1:17
क्या कोई व्यक्ति अपनी नकारात्मक खबर को फैलाने से रोकने के लिए कोई भी कोई भी तो बिल्कुल तो उनका तो हर कोई बात करोगी झूठों के लिए देशभर को खरीदा जा सकता है भारतीय मीडिया पर आरोप लगे हैं हमेशा जी कोई ना कोई ऐसे आरोप लगते हो यार क्यों नहीं खरीद सकता बिल्कुल खरीद सकता है
Kya koee vyakti apanee nakaaraatmak khabar ko phailaane se rokane ke lie koee bhee koee bhee to bilkul to unaka to har koee baat karogee jhoothon ke lie deshabhar ko khareeda ja sakata hai bhaarateey meediya par aarop lage hain hamesha jee koee na koee aise aarop lagate ho yaar kyon nahin khareed sakata bilkul khareed sakata hai

Trilok Sain Bolkar App
Top Speaker,Level 33
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Motivational Speaker Public Speaker Life Coach Youtuber
0:52
मंत्री जी भर के अखबारों को खरीदना एक आसान कार्य नहीं है खरीदने का मतलब है कि उनको पैसों के बल पर रोक नाम तो यह बहुत मुश्किल काम है क्योंकि सभी को पैसा देने के लिए बहुत सारा पैसा चाहिए और सभी लोगों के विचार एक जैसे नहीं हो सकती तो सभी में कोई न कोई तो ऐसा होगा जो खिलाफ चला जाएगा और दूसरी बात की दूसरी बात यह कि एक संगठनात्मक अरे कैसे मतलब रचनात्मक तरीके से एक पूरी रणनीति के साथ अगर ऐसा किया जाए तो ऐसा संभव है सभी मतलब एक संगठन बनाकर सभी अखबार वालों का दिल के एक साथ कोई निर्णय ले ले तो ऐसा हो सकता है इसके लिए भारी रकम की आवश्यकता होती है तो मुझे नहीं पता प्रश्न किसके बारे में लेकिन ऐसा बड़ा मुश्किल काम है लेकिन हो सकता है संभव है
Mantree jee bhar ke akhabaaron ko khareedana ek aasaan kaary nahin hai khareedane ka matalab hai ki unako paison ke bal par rok naam to yah bahut mushkil kaam hai kyonki sabhee ko paisa dene ke lie bahut saara paisa chaahie aur sabhee logon ke vichaar ek jaise nahin ho sakatee to sabhee mein koee na koee to aisa hoga jo khilaaph chala jaega aur doosaree baat kee doosaree baat yah ki ek sangathanaatmak are kaise matalab rachanaatmak tareeke se ek pooree rananeeti ke saath agar aisa kiya jae to aisa sambhav hai sabhee matalab ek sangathan banaakar sabhee akhabaar vaalon ka dil ke ek saath koee nirnay le le to aisa ho sakata hai isake lie bhaaree rakam kee aavashyakata hotee hai to mujhe nahin pata prashn kisake baare mein lekin aisa bada mushkil kaam hai lekin ho sakata hai sambhav hai

Harender Kumar Yadav Bolkar App
Top Speaker,Level 33
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As School administration & Principal
1:11
क्या कोई बोलता फिल्म नकारात्मक खबरों को फैलने से रोकने के लिए देश भर के अखबारों को कभी सकता है हमारी पूरी प्रिंट मीडिया को खरीद लिया गया है पुलिस तो रोज मेदार है और वह व्यक्ति समाचार देते हैं और किसी नकारात्मक को खबर को रोकने के लिए पूरे अखबार को कोई गरीब नहीं सकता पर गारमेंट भी इतनी बड़ी बेवकूफी के लिए सरकारी तंत्र की नकारात्मक खबरों को रोकने के लिए उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकता है और कोई भी व्यक्ति इतना बड़ा तो है नहीं कोई भी पूरी भक्ति गीत खिलाफ अगर कोई नकारात्मक खबर आती है तो उसके खिलाफ भी को कानूनी कार्रवाई कर सकता है तो इस तरह से अखबारों को खरीदना मुझे नहीं लगता कि ऐसा कुछ
Kya koee bolata philm nakaaraatmak khabaron ko phailane se rokane ke lie desh bhar ke akhabaaron ko kabhee sakata hai hamaaree pooree print meediya ko khareed liya gaya hai pulis to roj medaar hai aur vah vyakti samaachaar dete hain aur kisee nakaaraatmak ko khabar ko rokane ke lie poore akhabaar ko koee gareeb nahin sakata par gaarament bhee itanee badee bevakoophee ke lie sarakaaree tantr kee nakaaraatmak khabaron ko rokane ke lie usake khilaaph kaanoonee kaarravaee kar sakata hai aur koee bhee vyakti itana bada to hai nahin koee bhee pooree bhakti geet khilaaph agar koee nakaaraatmak khabar aatee hai to usake khilaaph bhee ko kaanoonee kaarravaee kar sakata hai to is tarah se akhabaaron ko khareedana mujhe nahin lagata ki aisa kuchh

Harender Kumar Yadav Bolkar App
Top Speaker,Level 33
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As School administration & Principal
1:11
क्या कोई बोलता फिल्म नकारात्मक खबरों को फैलने से रोकने के लिए देश भर के अखबारों को कभी सकता है हमारी पूरी प्रिंट मीडिया को खरीद लिया गया है पुलिस तो रोज मेदार है और वह व्यक्ति समाचार देते हैं और किसी नकारात्मक को खबर को रोकने के लिए पूरे अखबार को कोई गरीब नहीं सकता पर गारमेंट भी इतनी बड़ी बेवकूफी के लिए सरकारी तंत्र की नकारात्मक खबरों को रोकने के लिए उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकता है और कोई भी व्यक्ति इतना बड़ा तो है नहीं कोई भी पूरी भक्ति गीत खिलाफ अगर कोई नकारात्मक खबर आती है तो उसके खिलाफ भी को कानूनी कार्रवाई कर सकता है तो इस तरह से अखबारों को खरीदना मुझे नहीं लगता कि ऐसा कुछ
Kya koee bolata philm nakaaraatmak khabaron ko phailane se rokane ke lie desh bhar ke akhabaaron ko kabhee sakata hai hamaaree pooree print meediya ko khareed liya gaya hai pulis to roj medaar hai aur vah vyakti samaachaar dete hain aur kisee nakaaraatmak ko khabar ko rokane ke lie poore akhabaar ko koee gareeb nahin sakata par gaarament bhee itanee badee bevakoophee ke lie sarakaaree tantr kee nakaaraatmak khabaron ko rokane ke lie usake khilaaph kaanoonee kaarravaee kar sakata hai aur koee bhee vyakti itana bada to hai nahin koee bhee pooree bhakti geet khilaaph agar koee nakaaraatmak khabar aatee hai to usake khilaaph bhee ko kaanoonee kaarravaee kar sakata hai to is tarah se akhabaaron ko khareedana mujhe nahin lagata ki aisa kuchh

T P Singh Bolkar App
Top Speaker,Level 11
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Business
3:00
आपका प्रश्न है कि क्या कोई व्यक्ति अपनी नकारात्मक खबर को फैलने से रोकने के लिए देश भर के अखबारों को खरीद सकता है लेकिन आधुनिक युग में जहां पर सत्य के लिए व्यक्ति संघर्ष कर रहा है बहुत सारे अखबारों के मालिक बहुत सारे अखबार अगर उनको उचित राशि का प्रलोभन दिया जाए तो वह नकारात्मक खबर को छिपाने चला कि जहां तक मैं समझता हूं शायद कहीं नहीं सकते जिंदा होगा और यह संभव नहीं होगा इस देश के हर अखबार को खरीद लिया जाए और नकारात्मक खबर को न फैलने दिया मुझे यह संभव कम दिखता है शायद किसी ने किसी अखबार में कुछ लोगों में तो गैरत बची होगी कि वह पत्रकारिता अगर करना है तो सत्य को दिखाएं न कि धन के लालच में पैसे के लालच में नकारात्मक खबर को छुपाया हालांकि मीडिया आजकल एक बहुत बड़ा बिजनेस पत्रकार क्षेत्र के लिए संघर्ष कर रहे हो गिने-चुने नाम दिखते हैं ऐसे में और संभव नहीं दिखता है लेकिन फिर भी मुझे लगता है कि भारत जैसे देश में सत्य कहीं न कहीं जिंदा है और हर अखबार इसके लिए बिक जाएगा मुझे इसमें संशय है लेकिन कहीं किसी ने कहा भी है कि अगर कीमत सही लगाई जाए तो बिकने के लिए हर कोई तैयार है अगर वाकई ऐसी स्थिति है तो निसंदेह कोई व्यक्ति सारे अखबारों को खरीद सकता और अपनी खबर को नकारात्मक खबर को गलत खबर हो तो उसके लिए नुकसानदेह है उसे छिपा सकता है लेकिन मेरा मेरा अंदर से आत्मविश्वास कहिए या अंदर से विश्वास चाहिए यह कहता है कि मेरे इस देश में कुछ लोग होंगे जो पैसे के लिए अपने जमीर को नहीं देते ऐसा मुझे विश्वास है धन्यवाद

India is Great Bolkar App
Top Speaker,Level 11
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Master Chef in House
1:14
जिन्हें बिल्कुल भी ना क्योंकि वो ऐसे बहुत सारे से खबर हैं जो कि बड़े-बड़े लोग इस खबर को दबाना चाहते हैं लेकिन वह शक्ति नहीं है जैसे कि मान लीजिए रिया चक्रवर्ती को या पिंपल के लिए ले लीजिए तो क्या है कि उन्होंने भी तो बहुत कुछ करने की कोशिश की थी लेकिन कुछ ऐसी चीजें हैं जिन लोगों के सामने आ चुका था हालांकि कई सारी मीडिया को भी उसने जो है न्यूज़ रिपोर्टर को भी खरीद रखी थी और कितने पैसे खिला करके पता नहीं और क्या-क्या नहीं किया कितने सारे पुलिस वाले को दे दिया लेकिन हम तक यह कुछ ना कुछ चीजें पता चल ही चुका था और चल ही गया वह हर एक न्यूज़ पेपर वाले को रोकना मुझे नहीं लगता है कि यह किसी एक इंसान का बस का बात है अब वैसा ही अगर इंसान से है एग्जाम पर क्लियर मान लीजिए कि आप मुकेश अंबानी हो गया तो वह चाहे तो ऐसा कर सकते हैं जो वह कर सकता है बदमाशी खूब मतलब सौ परसेंट में समझ लीजिए 2:00 से 3:00 पर्सेंट लोग ऐसे कर सकते हैं उससे ज्यादा लोग ऐसा बिल्कुल भी नहीं कर सकते हैं इतनी औकात इतिहास के किसी को भी नहीं है

shabnam khatun Bolkar App
Top Speaker,Level 33
सुनिए shabnam जी का जवाब
Student
1:16
हेलो जी भांग तो आज आप का सवाल है कि क्या कोई व्यक्ति अपनी नकारात्मक खबर को फैलने से रोकने के लिए देश भर के अखबारों को खरीद सकता है तो देखी जब भी कोई अगर नेगेटिविटी और कोई भी नेगेटिव चीज या फिर कोई भी खराब चीज या फिर खराब है ऐसी खबर है जिससे सोसाइटीज इस संसार में मतलब इंसान पड़े खराब इंपैक्ट पड़ रहा है तू ऐसे समय पर हम सारे न्यूज़ पेपर और सारे चैनल को कंट्रोल में करना खरीदना यह किसी के दिवस की आवाज जनरल ही नहीं है क्योंकि बहुत बहुत सारे से चरण सबसे होते हैं क्या मेरा इतना भी खरीदने की कोशिश करें वह वैसा चैनल नहीं है और अब इतनी ज्यादा चैनल है आप सबको तो खरीद नहीं सकते हैं तो ऐसे समय पर क्या होता है वह कोई भी खराब चीज और ज्यादा प्रमोट किया जा रहा है नेगेटिविटी फैलाई जा रही है तू ऐसे समय पर जो सबसे ज्यादा जो चैनल को लोग देखते हैं जो बहुत ही प्रचलित है हम ऐसे चैनलों को बता सकते हैं समझा सके और वहां पर हम जाकर कंट्रोल कर सकते बता सकते सच्चाई क्या है सही क्या है सकारात्मक चीज क्या है क्या खजूर भी यह खबर है खराब खबर जो मतलबी में हर जगह उसकी वजह से नुकसान हो रहा है तो एक इंसान दिखाया जाए

Dr.Nitin Pawar, D.M S.(Management) Bolkar App
Top Speaker,Level 33
सुनिए Dr.Nitin जी का जवाब
Kisan,Journalist,Marathi Writer, Social Worker,Political Leader.
7:00
कोई व्यक्ति अपनी नकारात्मक खबर को फैलने से रोकने के लिए जिसके सभी अखबार खरीद सकता खरीद सकता है अगर उसके पास भूषण साजन साजन जाए उसके पास यंत्रणा है रात को 2:00 बजे लघु पेपर तैयार हो जाता है और अगर वह न्यूज़ छपी गई तो पुलिस में रिपोर्ट तैयार होने के लिए कुछ समय लगता है उसी वक्त देश के सारे अखबार वालों को अगर किसी ने ज्यादा पैसे देकर खरीद ली है तो पैसे के लालच पेपर दीप सकता है लेकिन यह कोई क्यों निकल पड़ो सकती है cbs1 तरीका यह है कि जो चलता है पहले से प्रिंट मीडिया हाउसेस होते हैं उनको मंडी करते करते हैं कई लोग अगर हमेशा फंडिंग करता है तो उसकी उसके खिलाफ की न्यूज़ जो है जो पेपर के मालिक और संपादक होते हैं कोई नहीं छुपाए हुए चकना चकना कैंसिल कर सकते हैं करते हैं ऐसा सच में यह दूसरी तरफ से दूसरे शब्दों में उप आत्मीय न्यूज़ लिखते हैं ताकि नकारात्मक खबरों की छुट्टी देकर भी रिजर्वेशन नहीं हुई है उसमें कोई आईडिया तो लगा सब बिकने वाले के लोग गांव गांव के जो भी फोटो से फोटो बहुत सारी खबरें ना छुपाने के लिए कुछ लेते हैं छुपाने के लिए उनको पगार भी नहीं होता है उन्हें को एडवर्टाइज व्यापारियों से या राजनीतिक लोगों से जुड़ने के लिए उनके पीछे भागना पड़ता है और अगर न्यूज़ मिली भी तो उसका संपादक भी पुलिस स्टेशन से आवा के संबंधित लोग उनसे फोन पर बात करता है और ऊपर क्यों पड़े पैसा लेता है और बाद में बाद में जागने भेज दी भेज दी है छुपाता नहीं बाद में कहता है कल आएगी या परसों आएगी ऐसा मेरे साथ भी मेरी कोई न कोई नहीं जाती जाती थी जब मैं पत्रकारिता करता था और ऐसी बातें संपादक के द्वारा मुझे बताइए तो ऐसी स्थिति है मीडिया की लेकिन सोशल मीडिया में इस तरह की जरूरत है क्योंकि नकारात्मक खबरों सोशल मीडिया को प्लीज अगर उस में दम है तो पैसे सीजीएचएस की

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  • नकारात्मक खबर कैसे फैलते ही है, नकारात्मक खबरों को कैसे रोका जाए
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