#रिश्ते और संबंध

bolkar speaker

आपके अनुसार एक आदर्श प्राथमिक विद्यालय कैसा होना चाहिए?

Aapke Anusaar Ek Aadarsh Prathamik Vidyalaya Kaisa Hona Chaiye
Rahul kumar Bolkar App
Top Speaker,Level 44
सुनिए Rahul जी का जवाब
Unknown
0:19
के अनुसार एक आदर्श प्राथमिक विद्यालय कैसा होना चाहिए लेकिन शिक्षा से भरपूर होना चाहिए चलना चाहिए चलना चाहिए और एक दूसरे के प्रति भावनाओं को देखते हुए आदर्श विद्यालय जो उसमें टीचर और स्टूडेंट के मध्य सामंजस्य स्थापित होना चाहिए
Ke anusaar ek aadarsh praathamik vidyaalay kaisa hona chaahie lekin shiksha se bharapoor hona chaahie chalana chaahie chalana chaahie aur ek doosare ke prati bhaavanaon ko dekhate hue aadarsh vidyaalay jo usamen teechar aur stoodent ke madhy saamanjasy sthaapit hona chaahie

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bolkar speaker
आपके अनुसार एक आदर्श प्राथमिक विद्यालय कैसा होना चाहिए?Aapke Anusaar Ek Aadarsh Prathamik Vidyalaya Kaisa Hona Chaiye
डा. इन्दु प्रकाश सिंह  Bolkar App
Top Speaker,Level 33
सुनिए डा. जी का जवाब
शिक्षण-कार्य, कालेज शिक्षा में प्राचार्य हूँ
4:18
का के अनुसार एक आदर्श प्राथमिक विद्यालय कैसा होना चाहिए देखी पहली बात तो यह है कि आदर्श प्राथमिक विद्यालय जो हो वह खुले हुए में हो जहां वातावरण साफ सुथरा हो आस पास जो है वह पर्यावरण प्रदूषण की विसंगतियां ना हो सड़क आदि के शोर में हो ट्रेन का शोर ना हो सभी आपने और उसमें फिर जो बच्चे हैं बच्चों के बैठने के लिए मैंने अच्छे क्लासरूम हूं और उनको सोच तथा पानी दो की सुविधाएं क्योंकि मैं भी ऐसे ही विद्यालय चला रहा हूं तो देखता हूं कुछ छोटे बच्चे जो है उनके अंदर जो संस्कार डाले जाते हैं उस संस्कार भविष्य में हमारे ली चैन सिस्टम का काम करते हो जैसे किसी बच्चे को हम कहते हैं ना छोटा आया कि बेटा हाथ धुल करके खाना खाओ पेशाब करने जाओ तो छुट्टी मांग कर जाओ इस तरह से पे आप करवाओ तो हाथ धो लो प्लेट बात की जरूरत है तो इस तरह से रहो तो बाद में क्या होता है कि दूसरे बच्चों को जब अगली क्लास में चला जाता है या उसके जो साथी होते हैं उनको उसके लिए विवश करता हम को प्रेरित करता है कि नहीं आप ऐसा करिए तो एक चीज भी होनी चाहिए और मैं यह महसूस करता हूं कि वह अध्यापक खून खुशमिजाज होने चाहिए समझे ना जरा सा कष्ट और जो शिक्षक होता है वह बच्चों पर दुष्प्रभाव डालता है हां एक आदत जरूर होना चाहिए वहां ही टीचर यादव टीचर जो कठोर होने चाहिए थोड़े से अलग क्यों कट होता है उनका दिखावे की ज्यादा हो तो ज्यादा अच्छा है क्योंकि इससे एक फायदा यह होता है कि जब हम टीचरों के सामने बच्चों को लाते हैं तो घबरा जाते हैं थोड़ा सा कुछ टीचर प्यार करने वाले होने चाहिए इसके बाद के की सुविधा बहुत अच्छी होनी चाहिए समझे आपने खेल-खेल में बच्चा ज्यादा सीखता मैं तो नेशनल लेवल पर रोवर स्काउट इस देश का फिगर बड़ा भक्त है उसका ट्रेलर हो तो हां देखा है कि जो तन डोले होते हैं काव्या बुलबुल होते हैं उन्हें खेल के माध्यम से बहुत कुछ सिखा देते हैं यह बिल की बड़ी जो क्लासें चलती है साथ 65 साल के लोगों को भी ट्रेनिंग दी जाती है तो क्यों हर क्लास के बाद वहां गाना खेलकूद के जीवन का एक अंग होता है तो थोड़ी सी अच्छी सोच होनी चाहिए कि हम उनका भरपूर मनोरंजन करें ठीक है ना और एक आदर्श यूनिफॉर्म बच्चों का होना चाहिए जो खून के लिए सूटेबल हो ऐसे ना जात पात की मानसिकता नहीं होनी चाहिए यह बच्ची पर और लड़के और लड़की का अंतर भी नहीं होना चाहिए हालांकि बच्चों को एहसास शुरू में ही करा दिया जाए बच्चों को भी कि नहीं इस तरह से रहे तो इसका रचनात्मक प्रभाव पड़ता है कुल मिला के संक्षेप में कहूं एक आदर्श पर्यावरण सब ने भरपूर बिल्डिंग खेलकूद के लिए पर्याप्त अवसर अच्छे अध्यापक संघ ने अपना और साथ में संस्कारवान शिक्षा है जो योजनाबद्ध रूप से उन्हें दी जाए और खेल खेल के माध्यम से पढ़ाने की कोशिश की जाए तो ज्यादा अच्छा है क्लास रूम में भी अगर अब ऑडियो वीडियो सिस्टम थोड़ा सा लग जाए तो उसका भी अच्छा प्रभाव पड़ सकता है समझे आपने अगर थोड़ा सा कैमरे आदि का प्रयोग करके उनको दिखाया जाए तो बच्चे बहुत अच्छे ढंग से सीखते हैं और उनके खानपान पर भी नजर रखनी चाहिए सकता है लीची से गांव के बच्चे बहुत लाते हैं माता-पिता तो इसमें भी ध्यान रखा जाए थोड़ा सा क्योंकि स्टाइलिश पिक्चर दो नुकसान होता है बच्चों का जो बैग होता है समझे ना गांव में उतने अच्छे टिफिन नहीं ला पाते शहरों में भी बहुत तेज से बच्चे होंगे एकादशी श्री होनी चाहिए उसका संचालन जो करे तो ऐसा व्यक्ति करे जो केवल पैसे का ही चाहता ना हो मात्र पैसे के लिए अगर विद्यालय चलाया जाता है तो वहां भी गरीबों के बच्चे जो है वहीं पर गाड़ी कहां फ्लेक्स के शिकार होते जिनके मां बाप की जाएगी बस स्टैंड
Ka ke anusaar ek aadarsh praathamik vidyaalay kaisa hona chaahie dekhee pahalee baat to yah hai ki aadarsh praathamik vidyaalay jo ho vah khule hue mein ho jahaan vaataavaran saaph suthara ho aas paas jo hai vah paryaavaran pradooshan kee visangatiyaan na ho sadak aadi ke shor mein ho tren ka shor na ho sabhee aapane aur usamen phir jo bachche hain bachchon ke baithane ke lie mainne achchhe klaasaroom hoon aur unako soch tatha paanee do kee suvidhaen kyonki main bhee aise hee vidyaalay chala raha hoon to dekhata hoon kuchh chhote bachche jo hai unake andar jo sanskaar daale jaate hain us sanskaar bhavishy mein hamaare lee chain sistam ka kaam karate ho jaise kisee bachche ko ham kahate hain na chhota aaya ki beta haath dhul karake khaana khao peshaab karane jao to chhuttee maang kar jao is tarah se pe aap karavao to haath dho lo plet baat kee jaroorat hai to is tarah se raho to baad mein kya hota hai ki doosare bachchon ko jab agalee klaas mein chala jaata hai ya usake jo saathee hote hain unako usake lie vivash karata ham ko prerit karata hai ki nahin aap aisa karie to ek cheej bhee honee chaahie aur main yah mahasoos karata hoon ki vah adhyaapak khoon khushamijaaj hone chaahie samajhe na jara sa kasht aur jo shikshak hota hai vah bachchon par dushprabhaav daalata hai haan ek aadat jaroor hona chaahie vahaan hee teechar yaadav teechar jo kathor hone chaahie thode se alag kyon kat hota hai unaka dikhaave kee jyaada ho to jyaada achchha hai kyonki isase ek phaayada yah hota hai ki jab ham teecharon ke saamane bachchon ko laate hain to ghabara jaate hain thoda sa kuchh teechar pyaar karane vaale hone chaahie isake baad ke kee suvidha bahut achchhee honee chaahie samajhe aapane khel-khel mein bachcha jyaada seekhata main to neshanal leval par rovar skaut is desh ka phigar bada bhakt hai usaka trelar ho to haan dekha hai ki jo tan dole hote hain kaavya bulabul hote hain unhen khel ke maadhyam se bahut kuchh sikha dete hain yah bil kee badee jo klaasen chalatee hai saath 65 saal ke logon ko bhee trening dee jaatee hai to kyon har klaas ke baad vahaan gaana khelakood ke jeevan ka ek ang hota hai to thodee see achchhee soch honee chaahie ki ham unaka bharapoor manoranjan karen theek hai na aur ek aadarsh yooniphorm bachchon ka hona chaahie jo khoon ke lie sootebal ho aise na jaat paat kee maanasikata nahin honee chaahie yah bachchee par aur ladake aur ladakee ka antar bhee nahin hona chaahie haalaanki bachchon ko ehasaas shuroo mein hee kara diya jae bachchon ko bhee ki nahin is tarah se rahe to isaka rachanaatmak prabhaav padata hai kul mila ke sankshep mein kahoon ek aadarsh paryaavaran sab ne bharapoor bilding khelakood ke lie paryaapt avasar achchhe adhyaapak sangh ne apana aur saath mein sanskaaravaan shiksha hai jo yojanaabaddh roop se unhen dee jae aur khel khel ke maadhyam se padhaane kee koshish kee jae to jyaada achchha hai klaas room mein bhee agar ab odiyo veediyo sistam thoda sa lag jae to usaka bhee achchha prabhaav pad sakata hai samajhe aapane agar thoda sa kaimare aadi ka prayog karake unako dikhaaya jae to bachche bahut achchhe dhang se seekhate hain aur unake khaanapaan par bhee najar rakhanee chaahie sakata hai leechee se gaanv ke bachche bahut laate hain maata-pita to isamen bhee dhyaan rakha jae thoda sa kyonki stailish pikchar do nukasaan hota hai bachchon ka jo baig hota hai samajhe na gaanv mein utane achchhe tiphin nahin la paate shaharon mein bhee bahut tej se bachche honge ekaadashee shree honee chaahie usaka sanchaalan jo kare to aisa vyakti kare jo keval paise ka hee chaahata na ho maatr paise ke lie agar vidyaalay chalaaya jaata hai to vahaan bhee gareebon ke bachche jo hai vaheen par gaadee kahaan phleks ke shikaar hote jinake maan baap kee jaegee bas staind

bolkar speaker
आपके अनुसार एक आदर्श प्राथमिक विद्यालय कैसा होना चाहिए?Aapke Anusaar Ek Aadarsh Prathamik Vidyalaya Kaisa Hona Chaiye
डा. इन्दु प्रकाश सिंह  Bolkar App
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शिक्षण-कार्य, कालेज शिक्षा में प्राचार्य हूँ
4:18
का के अनुसार एक आदर्श प्राथमिक विद्यालय कैसा होना चाहिए देखी पहली बात तो यह है कि आदर्श प्राथमिक विद्यालय जो हो वह खुले हुए में हो जहां वातावरण साफ सुथरा हो आस पास जो है वह पर्यावरण प्रदूषण की विसंगतियां ना हो सड़क आदि के शोर में हो ट्रेन का शोर ना हो सभी आपने और उसमें फिर जो बच्चे हैं बच्चों के बैठने के लिए मैंने अच्छे क्लासरूम हूं और उनको सोच तथा पानी दो की सुविधाएं क्योंकि मैं भी ऐसे ही विद्यालय चला रहा हूं तो देखता हूं कुछ छोटे बच्चे जो है उनके अंदर जो संस्कार डाले जाते हैं उस संस्कार भविष्य में हमारे ली चैन सिस्टम का काम करते हो जैसे किसी बच्चे को हम कहते हैं ना छोटा आया कि बेटा हाथ धुल करके खाना खाओ पेशाब करने जाओ तो छुट्टी मांग कर जाओ इस तरह से पे आप करवाओ तो हाथ धो लो प्लेट बात की जरूरत है तो इस तरह से रहो तो बाद में क्या होता है कि दूसरे बच्चों को जब अगली क्लास में चला जाता है या उसके जो साथी होते हैं उनको उसके लिए विवश करता हम को प्रेरित करता है कि नहीं आप ऐसा करिए तो एक चीज भी होनी चाहिए और मैं यह महसूस करता हूं कि वह अध्यापक खून खुशमिजाज होने चाहिए समझे ना जरा सा कष्ट और जो शिक्षक होता है वह बच्चों पर दुष्प्रभाव डालता है हां एक आदत जरूर होना चाहिए वहां ही टीचर यादव टीचर जो कठोर होने चाहिए थोड़े से अलग क्यों कट होता है उनका दिखावे की ज्यादा हो तो ज्यादा अच्छा है क्योंकि इससे एक फायदा यह होता है कि जब हम टीचरों के सामने बच्चों को लाते हैं तो घबरा जाते हैं थोड़ा सा कुछ टीचर प्यार करने वाले होने चाहिए इसके बाद के की सुविधा बहुत अच्छी होनी चाहिए समझे आपने खेल-खेल में बच्चा ज्यादा सीखता मैं तो नेशनल लेवल पर रोवर स्काउट इस देश का फिगर बड़ा भक्त है उसका ट्रेलर हो तो हां देखा है कि जो तन डोले होते हैं काव्या बुलबुल होते हैं उन्हें खेल के माध्यम से बहुत कुछ सिखा देते हैं यह बिल की बड़ी जो क्लासें चलती है साथ 65 साल के लोगों को भी ट्रेनिंग दी जाती है तो क्यों हर क्लास के बाद वहां गाना खेलकूद के जीवन का एक अंग होता है तो थोड़ी सी अच्छी सोच होनी चाहिए कि हम उनका भरपूर मनोरंजन करें ठीक है ना और एक आदर्श यूनिफॉर्म बच्चों का होना चाहिए जो खून के लिए सूटेबल हो ऐसे ना जात पात की मानसिकता नहीं होनी चाहिए यह बच्ची पर और लड़के और लड़की का अंतर भी नहीं होना चाहिए हालांकि बच्चों को एहसास शुरू में ही करा दिया जाए बच्चों को भी कि नहीं इस तरह से रहे तो इसका रचनात्मक प्रभाव पड़ता है कुल मिला के संक्षेप में कहूं एक आदर्श पर्यावरण सब ने भरपूर बिल्डिंग खेलकूद के लिए पर्याप्त अवसर अच्छे अध्यापक संघ ने अपना और साथ में संस्कारवान शिक्षा है जो योजनाबद्ध रूप से उन्हें दी जाए और खेल खेल के माध्यम से पढ़ाने की कोशिश की जाए तो ज्यादा अच्छा है क्लास रूम में भी अगर अब ऑडियो वीडियो सिस्टम थोड़ा सा लग जाए तो उसका भी अच्छा प्रभाव पड़ सकता है समझे आपने अगर थोड़ा सा कैमरे आदि का प्रयोग करके उनको दिखाया जाए तो बच्चे बहुत अच्छे ढंग से सीखते हैं और उनके खानपान पर भी नजर रखनी चाहिए सकता है लीची से गांव के बच्चे बहुत लाते हैं माता-पिता तो इसमें भी ध्यान रखा जाए थोड़ा सा क्योंकि स्टाइलिश पिक्चर दो नुकसान होता है बच्चों का जो बैग होता है समझे ना गांव में उतने अच्छे टिफिन नहीं ला पाते शहरों में भी बहुत तेज से बच्चे होंगे एकादशी श्री होनी चाहिए उसका संचालन जो करे तो ऐसा व्यक्ति करे जो केवल पैसे का ही चाहता ना हो मात्र पैसे के लिए अगर विद्यालय चलाया जाता है तो वहां भी गरीबों के बच्चे जो है वहीं पर गाड़ी कहां फ्लेक्स के शिकार होते जिनके मां बाप की जाएगी बस स्टैंड
Ka ke anusaar ek aadarsh praathamik vidyaalay kaisa hona chaahie dekhee pahalee baat to yah hai ki aadarsh praathamik vidyaalay jo ho vah khule hue mein ho jahaan vaataavaran saaph suthara ho aas paas jo hai vah paryaavaran pradooshan kee visangatiyaan na ho sadak aadi ke shor mein ho tren ka shor na ho sabhee aapane aur usamen phir jo bachche hain bachchon ke baithane ke lie mainne achchhe klaasaroom hoon aur unako soch tatha paanee do kee suvidhaen kyonki main bhee aise hee vidyaalay chala raha hoon to dekhata hoon kuchh chhote bachche jo hai unake andar jo sanskaar daale jaate hain us sanskaar bhavishy mein hamaare lee chain sistam ka kaam karate ho jaise kisee bachche ko ham kahate hain na chhota aaya ki beta haath dhul karake khaana khao peshaab karane jao to chhuttee maang kar jao is tarah se pe aap karavao to haath dho lo plet baat kee jaroorat hai to is tarah se raho to baad mein kya hota hai ki doosare bachchon ko jab agalee klaas mein chala jaata hai ya usake jo saathee hote hain unako usake lie vivash karata ham ko prerit karata hai ki nahin aap aisa karie to ek cheej bhee honee chaahie aur main yah mahasoos karata hoon ki vah adhyaapak khoon khushamijaaj hone chaahie samajhe na jara sa kasht aur jo shikshak hota hai vah bachchon par dushprabhaav daalata hai haan ek aadat jaroor hona chaahie vahaan hee teechar yaadav teechar jo kathor hone chaahie thode se alag kyon kat hota hai unaka dikhaave kee jyaada ho to jyaada achchha hai kyonki isase ek phaayada yah hota hai ki jab ham teecharon ke saamane bachchon ko laate hain to ghabara jaate hain thoda sa kuchh teechar pyaar karane vaale hone chaahie isake baad ke kee suvidha bahut achchhee honee chaahie samajhe aapane khel-khel mein bachcha jyaada seekhata main to neshanal leval par rovar skaut is desh ka phigar bada bhakt hai usaka trelar ho to haan dekha hai ki jo tan dole hote hain kaavya bulabul hote hain unhen khel ke maadhyam se bahut kuchh sikha dete hain yah bil kee badee jo klaasen chalatee hai saath 65 saal ke logon ko bhee trening dee jaatee hai to kyon har klaas ke baad vahaan gaana khelakood ke jeevan ka ek ang hota hai to thodee see achchhee soch honee chaahie ki ham unaka bharapoor manoranjan karen theek hai na aur ek aadarsh yooniphorm bachchon ka hona chaahie jo khoon ke lie sootebal ho aise na jaat paat kee maanasikata nahin honee chaahie yah bachchee par aur ladake aur ladakee ka antar bhee nahin hona chaahie haalaanki bachchon ko ehasaas shuroo mein hee kara diya jae bachchon ko bhee ki nahin is tarah se rahe to isaka rachanaatmak prabhaav padata hai kul mila ke sankshep mein kahoon ek aadarsh paryaavaran sab ne bharapoor bilding khelakood ke lie paryaapt avasar achchhe adhyaapak sangh ne apana aur saath mein sanskaaravaan shiksha hai jo yojanaabaddh roop se unhen dee jae aur khel khel ke maadhyam se padhaane kee koshish kee jae to jyaada achchha hai klaas room mein bhee agar ab odiyo veediyo sistam thoda sa lag jae to usaka bhee achchha prabhaav pad sakata hai samajhe aapane agar thoda sa kaimare aadi ka prayog karake unako dikhaaya jae to bachche bahut achchhe dhang se seekhate hain aur unake khaanapaan par bhee najar rakhanee chaahie sakata hai leechee se gaanv ke bachche bahut laate hain maata-pita to isamen bhee dhyaan rakha jae thoda sa kyonki stailish pikchar do nukasaan hota hai bachchon ka jo baig hota hai samajhe na gaanv mein utane achchhe tiphin nahin la paate shaharon mein bhee bahut tej se bachche honge ekaadashee shree honee chaahie usaka sanchaalan jo kare to aisa vyakti kare jo keval paise ka hee chaahata na ho maatr paise ke lie agar vidyaalay chalaaya jaata hai to vahaan bhee gareebon ke bachche jo hai vaheen par gaadee kahaan phleks ke shikaar hote jinake maan baap kee jaegee bas staind

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आपके अनुसार एक आदर्श प्राथमिक विद्यालय कैसा होना चाहिए?Aapke Anusaar Ek Aadarsh Prathamik Vidyalaya Kaisa Hona Chaiye
Archana Mishra Bolkar App
Top Speaker,Level 22
सुनिए Archana जी का जवाब
Housewife
0:51
हेलो फ्रेंड स्वागत है आपका आपका प्रश्न है आपके अनुसार इन आदर्श प्राथमिक विद्यालय कैसा होना चाहिए फ्रेंड्स एक प्राथमिक विद्यालय ऐसा होना चाहिए जो समय पर लगे और उसमें टीचर की संख्या अधिक हो पढ़ाने के लिए उसमें सारे विषय के टीचरों पढ़ाई हो और बदनाम सुथरा होना चाहिए विद्यालय और ऐसी जगह पर होना चाहिए जहां शोरगुल ना हो बिल्कुल शांति हो ऐसी जगह पर विद्यालय होना चाहिए और शब्दों की पढ़ाई अच्छे से हो सके उसमें और विद्यालय में स्वच्छ एक बाथरूम होना चाहिए और बाथरूम की वैष्णव होना चाहिए साफ सुथरा होना चाहिए विद्यालय पीने के पानी की व्यवस्था होना चाहिए और छोटा सा है मालूम होना चाहिए कभी किसी बच्चे को चोट लगे तो डॉक्टर की सुविधा भी होना चाहिए धन्यवाद
Helo phrend svaagat hai aapaka aapaka prashn hai aapake anusaar in aadarsh praathamik vidyaalay kaisa hona chaahie phrends ek praathamik vidyaalay aisa hona chaahie jo samay par lage aur usamen teechar kee sankhya adhik ho padhaane ke lie usamen saare vishay ke teecharon padhaee ho aur badanaam suthara hona chaahie vidyaalay aur aisee jagah par hona chaahie jahaan shoragul na ho bilkul shaanti ho aisee jagah par vidyaalay hona chaahie aur shabdon kee padhaee achchhe se ho sake usamen aur vidyaalay mein svachchh ek baatharoom hona chaahie aur baatharoom kee vaishnav hona chaahie saaph suthara hona chaahie vidyaalay peene ke paanee kee vyavastha hona chaahie aur chhota sa hai maaloom hona chaahie kabhee kisee bachche ko chot lage to doktar kee suvidha bhee hona chaahie dhanyavaad

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आपके अनुसार एक आदर्श प्राथमिक विद्यालय कैसा होना चाहिए?Aapke Anusaar Ek Aadarsh Prathamik Vidyalaya Kaisa Hona Chaiye
G Dewasi Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए G जी का जवाब
Unknown
3:04
विकी मैंने अपनी स्कूल लाइफ में क्या चीज है मिस की थी मैं आपको यह बताने वाला हूं जो सबसे पहले ही चीज मैंने मिस की थी वह यह है कि हमें जब हम ट्वेल्थ में आते हैं या इस से भी ऊपर जब हम कॉलेज में आता था वह मैं पता चलता है कि हम किस चीज के अंदर ज्यादा इंटेलिजेंट है यह कौन सी ऐसी स्कूल है जो हमें बहुत ज्यादा अच्छे से आती है अगर यह चीजें आप सोच कर देखिए बच्चों को फिर से क्लास में ही पता चल जाए कि वह किस फील्ड में ज्यादा इंटेलिजेंट है और उसके बाद बच्चों का अलग से कैसा लेक्चर दे दिया जाए जिसमें उन बच्चों को सिर्फ वही चीजें दिखाई जाए जिसमें वह इंटेलिजेंट है तू इस तरह सोच कर देखिए उन बच्चों का उस फील्ड में नॉलेज कितना ज्यादा बढ़ जाएगी बच्चों की फ्यूचर के लिए काफी मुश्किल हो सकता है इसलिए मैं मानता हूं किसी भी स्कूल को बच्चों का फर्स्ट क्लास में या इससे भी ऊपर वाली जो क्लास होती है उन्हें किस-किस फाइंडिंग टेस्ट कराना चाहिए जिससे स्कूल को भी पता चल पाएगा कि कौन बच्चा किस फील्ड में अच्छा है वह फिर देखिए सिर्फ यह जो सब्जेक्ट होती है वह नहीं होगी इसके अलावा और भी चीजें हो सकती है जैसे म्यूजिक हो सकता है डांसिंग हो सकती है प्रोग्राम में गोश्त यह जो बाकी सब्जेक्ट होती है फिजिक्स केमिस्ट्री है उनमें इंक्लूड हो सकती है तो यह स्कूल को पता लगाना चाहिए कि कौन बच्चा किस में अच्छा है इसके बाद बच्चों के लिए अलग से ऐसा लेक्चरर लौट कर देना चाहिए जिसमें बच्चों को सिर्फ वही चीजें दिखाई जाए जिसमें वह इंटरेस्टेड है जिन चीजों में उनका पहले से काफी इंटरेस्ट है इसे देखिए एक तो क्या होगा कि आपको पता है स्कूल जो लाइफ होती है उसमें बहुत सारे ओलंपियाड होते रहते हैं स्कूल का लेवल पर या स्टेट लेवल पर भी होते हैं तो ऐसे ओलंपियाड में अगर कोई स्कूल ऐसे बच्चों को भेजता है जो बच्चे उस चीज के अंदर इंटेलिजेंट हो सपोज अगर कोई फिजिक्स का ओलंपियाड है किसी भी सब्जेक्ट का ओलंपियाड अगर उसमें सिर्फ उन बच्चों को भेजा जाए जो सब्जेक्ट में काफी इंटेलिजेंट है तो हर बार वह स्कूल टॉप करेगा यह स्कूल स्कूल के लिए भी काफी बेनिफिशियल होगा प्लस बच्चों के लिए भी होगा और वही इसके अलावा देखी मैं दूसरी चीज क्या मिस करता हूं वह है डिसिप्लिन आप सोच कर देखिए हाथ के समय बच्चे डिसिप्लिन भूलते जा रहे हैं आज के समय बच्चे अपनी टीचर की रिस्पेक्ट नहीं करते हैं मतलब कि जब बच्चे 10th क्लास में आ जाते हैं कि बच्चों को पता नहीं क्या लगने लग जाता है वह अपनी टीचर के साथ बहस करने लग जाते हैं और उसके बाद भी स्कूल होता है वह बच्चों को सस्पेंड भी नहीं करता है ना उन्हें स्कूल से बाहर निकालते जबकि ऐसा होना चाहिए मतलब अगर कोई भी स्टूडेंट अपने टीचर से रिस्पेक्टफुल रिस्पेक्टफुल बात करता है तो उस बच्चे को पनिशमेंट मिलनी चाहिए उसके पेरेंट्स को बुलाना चाहिए उनसे बात करनी चाहिए प्लस उस बच्चे को पूरी असेंबली में यानी कि मॉर्निंग में जब पूरी स्कूल के बच्चे खड़े होते हैं ग्राउंड में वहां पर उस बच्चे को बोलना चाहिए उस टीचर से वह कान पकड़कर सॉरी मांगे इससे सभी बच्चों के माइंड में 1 तरीके से डिसिप्लिन की भावना है कि कि किसी भी टीचर के साथ अंडी रिस्पेक्टफुल बात नहीं कर सकते आप यह देखिए यह चीज मैं मानता हूं होनी चाहिए इसके अलावा जो बच्चे उनके ऊपर जो प्रैक्टिकल नॉलेज है वह ज्यादा उन्हें बताना चाहिए मतलब आपको भी पता है कि स्कूल लाइफ में क्या होता है बच्चों को एक जो रावत होता होता है ना उस तरीके से सिखाया जाता है ऐसा नहीं होना चाहिए बच्चों को प्रैक्टिकल तरीके से बताना चाहिए ताकि बच्चों को भी काफी इंटरेस्ट है धन्यवाद
Vikee mainne apanee skool laiph mein kya cheej hai mis kee thee main aapako yah bataane vaala hoon jo sabase pahale hee cheej mainne mis kee thee vah yah hai ki hamen jab ham tvelth mein aate hain ya is se bhee oopar jab ham kolej mein aata tha vah main pata chalata hai ki ham kis cheej ke andar jyaada intelijent hai yah kaun see aisee skool hai jo hamen bahut jyaada achchhe se aatee hai agar yah cheejen aap soch kar dekhie bachchon ko phir se klaas mein hee pata chal jae ki vah kis pheeld mein jyaada intelijent hai aur usake baad bachchon ka alag se kaisa lekchar de diya jae jisamen un bachchon ko sirph vahee cheejen dikhaee jae jisamen vah intelijent hai too is tarah soch kar dekhie un bachchon ka us pheeld mein nolej kitana jyaada badh jaegee bachchon kee phyoochar ke lie kaaphee mushkil ho sakata hai isalie main maanata hoon kisee bhee skool ko bachchon ka pharst klaas mein ya isase bhee oopar vaalee jo klaas hotee hai unhen kis-kis phainding test karaana chaahie jisase skool ko bhee pata chal paega ki kaun bachcha kis pheeld mein achchha hai vah phir dekhie sirph yah jo sabjekt hotee hai vah nahin hogee isake alaava aur bhee cheejen ho sakatee hai jaise myoojik ho sakata hai daansing ho sakatee hai prograam mein gosht yah jo baakee sabjekt hotee hai phijiks kemistree hai unamen inklood ho sakatee hai to yah skool ko pata lagaana chaahie ki kaun bachcha kis mein achchha hai isake baad bachchon ke lie alag se aisa lekcharar laut kar dena chaahie jisamen bachchon ko sirph vahee cheejen dikhaee jae jisamen vah intarested hai jin cheejon mein unaka pahale se kaaphee intarest hai ise dekhie ek to kya hoga ki aapako pata hai skool jo laiph hotee hai usamen bahut saare olampiyaad hote rahate hain skool ka leval par ya stet leval par bhee hote hain to aise olampiyaad mein agar koee skool aise bachchon ko bhejata hai jo bachche us cheej ke andar intelijent ho sapoj agar koee phijiks ka olampiyaad hai kisee bhee sabjekt ka olampiyaad agar usamen sirph un bachchon ko bheja jae jo sabjekt mein kaaphee intelijent hai to har baar vah skool top karega yah skool skool ke lie bhee kaaphee beniphishiyal hoga plas bachchon ke lie bhee hoga aur vahee isake alaava dekhee main doosaree cheej kya mis karata hoon vah hai disiplin aap soch kar dekhie haath ke samay bachche disiplin bhoolate ja rahe hain aaj ke samay bachche apanee teechar kee rispekt nahin karate hain matalab ki jab bachche 10th klaas mein aa jaate hain ki bachchon ko pata nahin kya lagane lag jaata hai vah apanee teechar ke saath bahas karane lag jaate hain aur usake baad bhee skool hota hai vah bachchon ko saspend bhee nahin karata hai na unhen skool se baahar nikaalate jabaki aisa hona chaahie matalab agar koee bhee stoodent apane teechar se rispektaphul rispektaphul baat karata hai to us bachche ko panishament milanee chaahie usake perents ko bulaana chaahie unase baat karanee chaahie plas us bachche ko pooree asembalee mein yaanee ki morning mein jab pooree skool ke bachche khade hote hain graund mein vahaan par us bachche ko bolana chaahie us teechar se vah kaan pakadakar soree maange isase sabhee bachchon ke maind mein 1 tareeke se disiplin kee bhaavana hai ki ki kisee bhee teechar ke saath andee rispektaphul baat nahin kar sakate aap yah dekhie yah cheej main maanata hoon honee chaahie isake alaava jo bachche unake oopar jo praiktikal nolej hai vah jyaada unhen bataana chaahie matalab aapako bhee pata hai ki skool laiph mein kya hota hai bachchon ko ek jo raavat hota hota hai na us tareeke se sikhaaya jaata hai aisa nahin hona chaahie bachchon ko praiktikal tareeke se bataana chaahie taaki bachchon ko bhee kaaphee intarest hai dhanyavaad

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vijay singh Bolkar App
Top Speaker,Level 22
सुनिए vijay जी का जवाब
Social worker in india
0:46
कर दो आपका सवाल आपके अनुसार एक आदर्श प्राथमिक विद्यालय कैसा होना चाहिए तो दोस्तों आपके सवाल का उत्तर इस प्रकार हमारे अनुसार एक आदर्श प्राथमिक विद्यालय जो एक विशाल खेल का मैदान होना जरूरी है और हवादार कक्षाओं और बच्चों के खेलने के लिए बना होना जरूरी है वहां बच्चों का खेल सके एक आदर्श विद्यालय में बड़ी कक्षाएं भी होनी चाहिए एक आदर्श विद्यालय में प्रयोगशाला भी होनी चाहिए जहां बच्चे अच्छे तरीके से प्रैक्टिकल कर सके और कंप्यूटर और इंटरनेट की व्यवस्था होनी चाहिए ताकि बच्चे नहीं रही बात सीख सकें धन्यवाद साथियों खुश रहो
Kar do aapaka savaal aapake anusaar ek aadarsh praathamik vidyaalay kaisa hona chaahie to doston aapake savaal ka uttar is prakaar hamaare anusaar ek aadarsh praathamik vidyaalay jo ek vishaal khel ka maidaan hona jarooree hai aur havaadaar kakshaon aur bachchon ke khelane ke lie bana hona jarooree hai vahaan bachchon ka khel sake ek aadarsh vidyaalay mein badee kakshaen bhee honee chaahie ek aadarsh vidyaalay mein prayogashaala bhee honee chaahie jahaan bachche achchhe tareeke se praiktikal kar sake aur kampyootar aur intaranet kee vyavastha honee chaahie taaki bachche nahin rahee baat seekh saken dhanyavaad saathiyon khush raho

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आपके अनुसार एक आदर्श प्राथमिक विद्यालय कैसा होना चाहिए?Aapke Anusaar Ek Aadarsh Prathamik Vidyalaya Kaisa Hona Chaiye
Rajesh Kumar swami Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए Rajesh जी का जवाब
Student
1:24
हमारी अनुसार एक आदर्श प्राथमिक विद्यालय ऐसा होना चाहिए जिसके अंदर व्यवस्थित ढंग से क्लास से साफ सफाई के आसपास गंदगी ना हो सब बाद में पोस्ट लगाया कि 200 मीटर के अंदर कोई तंबाकू गुटका का सेवन ना करें हरियाली बढ़िया सा स्पाई 8 क्लास के पास बहुत सारी सुविधाएं हैं वह सारे से काम है जो हमारी स्कूल में आदर्श हम हम शायद उसके बाद अपना सकते हैं तो अभी स्कूल के अंदर बहुत सारे सिस्टम होना चाहिए और जो भी रहती है खाने का व्यवस्था है उसको बढ़िया था उसे रखना चाहिए उसको भी साफ रखना चाहिए साफ सफाई पीने का पानी का फिल्टर पानी पेड़ पौधे और हरियाली गेट के बाहर हरियाली गेट के अंदर वाली छात्रा बदल जाएगी तो मौसम भी सुहाना रहेगा साथ में हॉल और सब क्लास के अंदर डस्टबिन अरे साफ सफाई से पूछना जरूरी है अगर सभी के साथ साथ में रहेगी तो अच्छा रहेगा और शासन रिजल्ट निकालना जरूरी है अच्छी पढ़ाई अच्छा ज्ञान इमानदारी से वार सब पुराना हुए का दुश्मन होता है
Hamaaree anusaar ek aadarsh praathamik vidyaalay aisa hona chaahie jisake andar vyavasthit dhang se klaas se saaph saphaee ke aasapaas gandagee na ho sab baad mein post lagaaya ki 200 meetar ke andar koee tambaakoo gutaka ka sevan na karen hariyaalee badhiya sa spaee 8 klaas ke paas bahut saaree suvidhaen hain vah saare se kaam hai jo hamaaree skool mein aadarsh ham ham shaayad usake baad apana sakate hain to abhee skool ke andar bahut saare sistam hona chaahie aur jo bhee rahatee hai khaane ka vyavastha hai usako badhiya tha use rakhana chaahie usako bhee saaph rakhana chaahie saaph saphaee peene ka paanee ka philtar paanee ped paudhe aur hariyaalee get ke baahar hariyaalee get ke andar vaalee chhaatra badal jaegee to mausam bhee suhaana rahega saath mein hol aur sab klaas ke andar dastabin are saaph saphaee se poochhana jarooree hai agar sabhee ke saath saath mein rahegee to achchha rahega aur shaasan rijalt nikaalana jarooree hai achchhee padhaee achchha gyaan imaanadaaree se vaar sab puraana hue ka dushman hota hai

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