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 Neeraj Kumar  Bolkar App
Top Speaker,Level 33
सुनिए जी का जवाब
Unknown
6:59
दोस्तों मैंने सवाल है भारत की आलोचना सरकार की आलोचना करने वालों को राष्ट्रीय मीडिया और सरकार देशद्रोही 50 कर भारत को किस दिशा की ओर ले जा रही है तो हमारे भारत में हर किसी को बोलने का अधिकार है और कोई भी कुछ भी बोल सकता है जो उसको लगता है कि यह बिल्कुल मिले जरूरी है जैसे कि अभी जो नंबर वन ट्रेनिंग चल रहा है ट्विटर पर हुआ है मोदी जी रोज मोदी रोजगार दो तो लोग इस तरीके से ग्रस्त हो चुके हैं कि अब वह चाहते हैं कि उन्हें नौकरियां मिली जो कि सरकारी नौकरियां कम होती जा रही हैं जिसको बढ़ना चाहिए तो नौकरी मिला कि पहले बैंक की नौकरी 100000 आती थी अब वह सिर्फ 10000 आती हैं तो उनकी होती तो हर किसी को नौकरी मिल जाती है जो स्टूडेंट को लगता नहीं था कि मुझे नौकरी मिल सकती उसको भी नौकरी मिल जाती क्योंकि वह उस ना कटऑफ ले आता है लेकिन आजकल तो दोस्तों में से 200 नंबर भी आ रहे हैं उनको भी नौकरी नहीं मिलेगी यानी कि कोई पेपर 200 नंबर का है तो 199 नंबर लाता जब भी उसको नौकरी नहीं मिल रही ऐसा आजकल चल रहा है क्योंकि हर कोई एक 100 200 में 200 नंबर आ जाते हैं आजकल तू तो यह सब प्रॉब्लम चल रही है तू और सबसे बड़ी है घूमने गया प्राइवेटाइजेशन हो रहा है यानी कि रेलवे का प्राइवेट टेशन हो रहा है और बाकी इंस्टिट्यूट है पीएसयू हैं और बैंकों का भी हो रहा है इसका मतलब यह है कि आप सरकारी नौकरी तो दशहरा तिथि अबू 500 600 रह जाएगी तू तो लोग की फ्रेंड है उनको तो सरकारी नौकरी का सोचना ही बेकार है यानी बहुत पढ़ तो रहे हैं लेकिन नौकरी मिलेगी इसका कोई गारंटी नहीं है कितनी प्राइवेट में पर हो जाएगी हर रेलवे प्राइवेट हो जाएगा और बाकी कंपनियां प्राइवेट हो जाए कि फेसबुक तो एग्जाम कौन निकालेगा आप देखते हो कि प्राइवेट में जो नौकरी होती है आपको पता भी नहीं चलेगा किसी भी नौकरी लग जाती है उसमें शिवलिंग चाहिए पड़ता है यानी कि आप अगर आप के सिद्धांत कोई प्राइवेट नौकरी में है तो वह अपने रिश्तेदार को वश में लगवा देते ऐसा अभी भी मैं देखा मेरे दोस्त है वह मेरे साथ पढ़े हैं लेकिन उसके कोई रिश्तेदार अच्छी कंपनी में थे तुम उसको भी उसने उसे लगवा दिया नहीं कि वह कर दो पैसा कमाना और मैं अभी बेरोजगार हूं इस तरह का माहौल भी रहता हूं प्राइवेट सेक्टर में और अगर इंडिया में हर चीज प्राइवेट हो जाएगी तो हर कोई रोजगार के लिए धन की ठोकरें खाएगा उसको रोजगार नहीं मिलेगा क्योंकि अगर सरकारी रहेगा तो उसको लगेगा यह सरकारी दे कम से कम फोन तो निकलता है मैं इसकी तैयारी करके इसको जॉब को पा सकता हूं जैसे अभी तेजस प्राइवेट 10 हुई थी तू उस में जो भर्ती हुई थी आपको पता नहीं चला था कब भर्ती निकली कब हुई और वहां पर स्टॉप पहले से था यानी कि अब ठेकेदारी के उपप्रधान है संविदा की वह बहुत खराब है क्योंकि उसमें भी इसी तरह का होता है आज अपने जानने वालों को ही चयन होता है और किसी का नहीं होता है तो अगर देश को उन्नत करने दो स्टूडेंट को रोजगार मिलना चाहिए और हमें तो संस्था है उसको और आगे कमेंट करना चाहिए ना कि अपने जो संस्था बनाई गारमेंट को बेचना है नहीं चाहिए अगर अब अगर आपको वह संस्था समझती नहीं तो फिर सरकार चलाने का कोई मतलब नहीं ठीक है अगर आप से सरकार ऐसी होना चाहिए कि जो हमारी संस्था जो एक पशु है हमारे जो जितने भी प्रश्न है सो है दोस्तो हमारे और विश्व में पीएसयू में बढ़ाना चाहिए यानी कि जो ऑल वर्ल्ड कि जो कंपनियां हैं उनमें हमारी कंपनियां जो पैसे हैं वह प्रोडक्ट बनाएं और बोलो हमसे कहीं देहानी भी मैं सरकारी जो भी ऐसे उससे सामान खरीदें इस तरह का पीएसओ बनाना चाहिए तो अभी जो बना रहे हैं वह भी पैसे अभी काम करते हैं और कई तरह के आर्डर बस उनको मिलते हैं और वह बिक जायेंगे लग जाएंगे तो फिर कोई मतलब ही रह जाएगा तो प्राइवेट सेक्टर के हाथों में चला जाएगा और लोग बहुत परेशान हैं आएंगे अभी तो खेत के स्कूल पर अभी हम जॉब मिल जाती इंजीनियर को भी ऐसे में अब बोलेंगे तो फिर गेट का कोई मतलब नहीं रह जाएगा सब m-tech का एडमिशन के लिए ही रह जाएगा दो हमें ज्यादा ज्यादा जो मैं संस्थान स्कूल प्राइवेट होने से बचाना है नहीं तो हमें ही उससे परेशानी होगी और किसी को नहीं होगी कल कोई भी स्टूडेंट हुआ वह सरकारी नौकरी तैयारी करेगा ही नहीं कि उसको पता है कि हम इतना पढ़ लिख कर भी हो राजस्थान में सरकारी नौकरी नहीं मिलती है तो क्या क्या क्या करेगा वह देख लीजिएगा क्या करेगा उतना ही पड़ेगा जितना उसके लिए जीवन के लिए जरूरी होता है नॉलेज और उससे ज्यादा कोई डिग्री कोई कहेगा ही नहीं तो यह सब चीजें रहती हैं इसलिए लोग यूट्यूब पर अब आप सर्च करेंगे तो अभी ट्रेनिंग में चल रहा होगा तुम्हारे एग्जाम होते हैं वह बिल्कुल शहडोल से नहीं होते हैं अगर कोई एग्जाम होता तो उसको समय पेपर नहीं था उसमें गलत क्वेश्चन आ जाते हैं नॉर्मलाइजेशन हो जाता है किसी को ठेके पर आ जाता किसी को सरल पर पाया जाता है तू हर किसी थोड़ा नया नहीं हो रहा है और अगर एक साथ एक पेपर हो तो सभी को नंबर समान है और सभी का फाइट करने का तरीका वह सिम रहेगा तो किस को बोल रही होगी और सब ऑनलाइन है तो ऑनलाइन तो और जल्दी चल जाना चाहिए ऑफलाइन में तो 1 महीने 1 महीने में चला जाता लेकिन ऑनलाइन है तो चार चार महीने छह समय थोड़ा जल्दी आता है तुम्हें मतलब क्या है हमारे इंडिया को ऑनलाइन डीजल होने का मतलब निकलते ही नहीं है ना ऑफलाइन से ज्यादा आप रिजल्ट देने में देरी करते हैं जो आने में देरी होती है बस ओके ठीक है तो पेपर आप फॉर्म डाल देते हम आप हम को पता नहीं चलता है कि इसका एग्जाम कब है जब मैसेज आता है कि एक अगले साल हमारा इसका पेपर है 1 साल बाद जब हमें पता चलता है इसका फॉर्म भी डाला था तू यह सब चीजें रहती हैं यह सब ध्यान में हमें रखना है और हमें अपनी संस्था को गारमेंट्स संस्था को बचाना है
Doston mainne savaal hai bhaarat kee aalochana sarakaar kee aalochana karane vaalon ko raashtreey meediya aur sarakaar deshadrohee 50 kar bhaarat ko kis disha kee or le ja rahee hai to hamaare bhaarat mein har kisee ko bolane ka adhikaar hai aur koee bhee kuchh bhee bol sakata hai jo usako lagata hai ki yah bilkul mile jarooree hai jaise ki abhee jo nambar van trening chal raha hai tvitar par hua hai modee jee roj modee rojagaar do to log is tareeke se grast ho chuke hain ki ab vah chaahate hain ki unhen naukariyaan milee jo ki sarakaaree naukariyaan kam hotee ja rahee hain jisako badhana chaahie to naukaree mila ki pahale baink kee naukaree 100000 aatee thee ab vah sirph 10000 aatee hain to unakee hotee to har kisee ko naukaree mil jaatee hai jo stoodent ko lagata nahin tha ki mujhe naukaree mil sakatee usako bhee naukaree mil jaatee kyonki vah us na katoph le aata hai lekin aajakal to doston mein se 200 nambar bhee aa rahe hain unako bhee naukaree nahin milegee yaanee ki koee pepar 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