#भारत की राजनीति

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तो सवाल है क्या किसान बिल की वजह से आगामी चुनाव में मोदी सरकार को बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा आगामी चुनाव की बात करें तो लोकसभा चुनाव अभी काफी दूर है 3 साल बाद यानी कि 2024 में है अगर हम सबसे नजदीकी चुनाव को देखें तो बंगाल का चुनाव है उसके बाद तमिलनाडु का चुनाव है तमिलनाडु के चुनाव में बीजेपी अपने आप को देश से बाहर ही मानकर चलती है और इस बार भी लगभग बाहर ईमान के चल रही है असली गेम जो वो खेल रही है वह वेस्ट बंगाल में खेल रही है तो जी नहीं मोदी सरकार को बिल्कुल भी इससे कोई नुकसान नहीं होने वाला है उल्टा सरकार को इससे काफी फायदा बीजेपी को होने वाला है तभी तो आप सोचो तभी तो वह इतने शांति से चीजों को होने दे रहे हैं नहीं तो वह जिस दिन चाहते इसे खत्म कर देते हैं जिस दिन वह चाहते इस मूवमेंट को खत्म कर देते हैं वह लोगों को देख रहे दे रहे कि भाई तुम देखो कि हां यह जो विपक्ष की पार्टी का है यह कितना सत्ता यह कितना लोगों के विरोध में है यह कितना देश के विरोध में काम करती है वह बोलोगे सर आप यह कैसे बोल रहे हो अगर आप फार्म लो जो भी किसान बिल है इस के बराबर में जाओगे तो उसके जन्म है मिनिमम सपोर्ट प्राइस मिनिमम सपोर्ट प्राइस वह ग्रेट होता है जिस दिन रेट पर सरकार जिस रेट पर सरकार कोई भी फसल किसानों से खरीदी है यानी कि अगर बात करें तो गेहूं का एमएसपी जो है वह लगभग और ₹950 है मक्के मक्के की एमएसपी ₹24 के आसपास है धान धान की एमएसपी ₹2000 के आसपास है आप अक्सर सुनते होंगे कि अक्सर क्या यह फैक्ट है कि एमएसपी पर जो सरकार फसल खरीद ती है चाहे गेहूं हो या फिर ध्यान हो वह पंजाब से ही करती है या हरियाणा से करती है आजकल कुछ पांच-छह सालों से मध्य प्रदेश से भी खरीदने लगी है बाकी स्टेट में वह कुछ नहीं खरीदते हैं सरकार कुछ नहीं खरीदना है सरकार के लोग कुछ नहीं खरीदते हैं जैसे कि मैं बिहार के बात करूं बिहार यह जो एमएसपी है वह पूरे देश में लागू होता है बिहार में बिहार में भी 1950 रुपए में छुपी है लेकिन बिहार में जो है कहीं भी आप चले जाओ आपको एमएसपी से नीचे की हूं मक्के की बात करें ₹24 में छुपी है लेकिन आप बिहार में कहीं भी देखो 11 से 12 से मिल जाएगा बाजरे की एमएसपी 2000 है लेकिन कहीं भी 1120 जाएगा यानी कि हम जाने कि पंजाब और हरियाणा को छोड़कर के बाकी सब 26 राज्य में किसी राज्य को इस बिल से एस एम एस पी से कोई फर्क नहीं पड़ता है क्योंकि उसे इससे कोई फायदा नहीं होता है फायदा उनको होगा यह लो आने से यह पर ग्लो आने से क्योंकि जो एमएसपी के नीचे इनके फसल जो बिक रही है बाकी स्टेट के किसानों की अब वह प्राइवेट व्यापारी को महंगे दामों में बेच सकते हैं जैसे की हम मक्के की बात करें तो अपने देश में मक्के की खपत कम होती है मुर्गे को खाने में ही यूज होता है ज्यादातर इसलिए उसको बहुत सस्ता बिकता है लेकिन अमेरिका में इसका डिमांड काफी ज्यादा है तो लेकिन यह अभी अब नहीं सकते दूसरे देश में लेकिन यह फार्म लो के आने के बाद आप अमेरिका को भी भेज सकते तो सोच लो कितना ज्यादा बाकी स्टेट के किसानों को होने वाला है इससे तो डेफिनेटली बीजेपी को है यह फायदा करेगा
To savaal hai kya kisaan bil kee vajah se aagaamee chunaav mein modee sarakaar ko bada nukasaan uthaana padega aagaamee chunaav kee baat karen to lokasabha chunaav abhee kaaphee door hai 3 saal baad yaanee ki 2024 mein hai agar ham sabase najadeekee chunaav ko dekhen to bangaal ka chunaav hai usake baad tamilanaadu ka chunaav hai tamilanaadu ke chunaav mein beejepee apane aap ko desh se baahar hee maanakar chalatee hai aur is baar bhee lagabhag baahar eemaan ke chal rahee hai asalee gem jo vo khel rahee hai vah vest bangaal mein khel rahee hai to jee nahin modee sarakaar ko bilkul bhee isase koee nukasaan nahin hone vaala hai ulta sarakaar ko isase kaaphee phaayada beejepee ko hone vaala hai tabhee to aap socho tabhee to vah itane shaanti se cheejon ko hone de rahe hain nahin to vah jis din chaahate ise khatm kar dete hain jis din vah chaahate is moovament ko khatm kar dete hain vah logon ko dekh rahe de rahe ki bhaee tum dekho ki haan yah jo vipaksh kee paartee ka hai yah kitana satta yah kitana logon ke virodh mein hai yah kitana desh ke virodh mein kaam karatee hai vah bologe sar aap yah kaise bol rahe ho agar aap phaarm lo jo bhee kisaan bil hai is ke baraabar mein jaoge to usake janm hai minimam saport prais minimam saport prais vah gret hota hai jis din ret par sarakaar jis ret par sarakaar koee bhee phasal kisaanon se khareedee hai yaanee ki agar baat karen to gehoon ka emesapee jo hai vah lagabhag aur ₹950 hai makke makke kee emesapee ₹24 ke aasapaas hai dhaan dhaan kee emesapee ₹2000 ke aasapaas hai aap aksar sunate honge ki aksar kya yah phaikt hai ki emesapee par jo sarakaar phasal khareed tee hai chaahe gehoon ho ya phir dhyaan ho vah panjaab se hee karatee hai ya hariyaana se karatee hai aajakal kuchh paanch-chhah saalon se madhy pradesh se bhee khareedane lagee hai baakee stet mein vah kuchh nahin khareedate hain sarakaar kuchh nahin khareedana hai sarakaar ke log kuchh nahin khareedate hain jaise ki main bihaar ke baat karoon bihaar yah jo emesapee hai vah poore desh mein laagoo hota hai bihaar mein bihaar mein bhee 1950 rupe mein chhupee hai lekin bihaar mein jo hai kaheen bhee aap chale jao aapako emesapee se neeche kee hoon makke kee baat karen ₹24 mein chhupee hai lekin aap bihaar mein kaheen bhee dekho 11 se 12 se mil jaega baajare kee emesapee 2000 hai lekin kaheen bhee 1120 jaega yaanee ki ham jaane ki panjaab aur hariyaana ko chhodakar ke baakee sab 26 raajy mein kisee raajy ko is bil se es em es pee se koee phark nahin padata hai kyonki use isase koee phaayada nahin hota hai phaayada unako hoga yah lo aane se yah par glo aane se kyonki jo emesapee ke neeche inake phasal jo bik rahee hai baakee stet ke kisaanon kee ab vah praivet vyaapaaree ko mahange daamon mein bech sakate hain jaise kee ham makke kee baat karen to apane desh mein makke kee khapat kam hotee hai murge ko khaane mein hee yooj hota hai jyaadaatar isalie usako bahut sasta bikata hai lekin amerika mein isaka dimaand kaaphee jyaada hai to lekin yah abhee ab nahin sakate doosare desh mein lekin yah phaarm lo ke aane ke baad aap amerika ko bhee bhej sakate to soch lo kitana jyaada baakee stet ke kisaanon ko hone vaala hai isase to dephinetalee beejepee ko hai yah phaayada karega

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यह भारत के भारत सरकार के डीएफसीसी प्रोजेक्ट का एक पार्ट है डीएफसीसी यानी डेडिकेटेड फ्रेट कोरिडोर कॉरपोरेशन इसके तहत भारत सरकार दो कॉरिडोर बना रही है एक है एक है डब्लू डी एफ सी सी डेट मींस वेस्टर्न डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर आपको दिल्ली के पास सटे दादरी से मुंबई तक जाएगा मुंबई के पोर्ट तक जाएगा यानी कि दिल्ली टू मुंबई मेन बिटवीन कनेक्ट नोट 2 वेस्ट और एक और पार्टी टीएमसी ईस्टर्न डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर को कनेक्ट करने वाला है आपको लुधियाना पंजाब के लुधियाना से पंजाब के लुधियाना से कोलकाता तक यह भारत से इस रूट पर सिर्फ माल गाड़ी चलेगी इस पर सिर्फ गुड्स वाले गाड़ी चलेगी जो असल में दिक्कत क्या होती है कि अगर हम भारत सरकार के इंडियन रेलवेज के रिवेन्यू की बात करे कमाई की बात करें तो जो पैसेंजर ट्रेन होती है उनसे उन्हें घाटा लगता है आप रेलवे टिकट पर देखोगे तो यह बताते हैं सरकार के ऑडिट में यह रिपोर्ट में आता भी पैसेंजर ट्रेन से गवर्नमेंट को लॉस लगता है असली जो कमाई होती है जो भी कमाई उनको होती वह मालगाड़ी से ही होती है लेकिन बेचारा मालगाड़ी सबसे ज्यादा कष्ट होता है अब देखते होगे एक पैसेंजर ट्रेन की गुजरती है तो माल गाड़ी को रोक दिया जाता है एक-एक दिन बैठा देते हैं किसी स्टेशन पर दो 2 दिन बैठा देते हैं इस कारण से क्या होता है कि कोई भी सामान को जाने का मैं समय ज्यादा लगता है जिसके कारण से उसका कॉस्ट पर जाता है लॉजिस्टिक कॉस्ट जिसको हम कहते हैं एक क्षमा किसी भी सामान को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में जो खर्चा आता है उसमें लॉजिस्टिक कॉस्ट कहते हैं आपको पता है अपने देश भारत में यह लॉजिस्टिक पोस्ट बहुत ही ज्यादा है यहां तक कि बांग्लादेश से भी ज्यादा लॉजिस्टिक कॉस्ट अपने देश में है यानी अब देखते हुए कि ₹15 का नारियल जो कि नारियल पानी तमिलनाडु में 10 या ₹15 का होता है वह बिहार आते-आते 80 के ₹90 का हो जाता है एक क्यों ऐसा होता है बिकॉज़ लॉजिस्टिक कॉस्ट में बहुत ज्यादा है अब यह इस रूट के आने से डीएफसीसी के आने से ईडीएफसी हो जो समान है मालगाड़ी को कम समय लगेगा एक जगह से दूसरी जगह जाने में इस कारण से लॉजिस्टिक कॉस्ट घटेगा और सामान का दाम भी घटेगा और लोग इसको पेपर करेंगे अभी आप ज्यादातर सामान जो है वह ट्रक से जाता है लेकिन जो सस्ता माल गाड़ी में सामान बहुत ही सस्ता पड़ता है ट्रक के मुकाबले 10 गुना सस्ता पड़ता है माल गाड़ी से सामान भेजना लेकिन जो दुकानदार होते हैं जो दुकानदार होते हैं यह जो बिजनेसमैन होते हैं उनको पता होता है कि यार इसमें कोई गारंटी नहीं है कि कब सामान पहुंचेगा इसीलिए वह लोग ट्रक से मंगाते हैं लेकिन इस डीएफसीसी के आ जाने के बाद लोग मालगाड़ी को फटाफट करेंगे बिकॉज स्पीड जो है वह लगभग 4 गुना तक बढ़ जाएगा यानी कि अगर पहले कोई भी सामान 20 दिन में पहुंचा था तो वह 5 दिन में ही पहुंच जाएगा यह मोदी सरकार के आने के बाद मोदी सरकार ने इस पर काफी ज्यादा ध्यान दिया है बिकॉज़ आप लोग जानते हैं कि मोदी सरकार जो है इंफ्रास्ट्रक्चर पर काफी ध्यान दे रही है यह एक game-changing सबसे बड़ा प्रोजेक्ट आप कह सकते हो कि इंडियन गवर्नमेंट
Yah bhaarat ke bhaarat sarakaar ke deeephaseesee projekt ka ek paart hai deeephaseesee yaanee dediketed phret koridor koraporeshan isake tahat bhaarat sarakaar do koridor bana rahee hai ek hai ek hai dabloo dee eph see see det meens vestarn dedeeketed phret koridor aapako dillee ke paas sate daadaree se mumbee tak jaega mumbee ke port tak jaega yaanee ki dillee too mumbee men bitaveen kanekt not 2 vest aur ek aur paartee teeemasee eestarn dedeeketed phret koridor ko kanekt karane vaala hai aapako ludhiyaana panjaab ke ludhiyaana se panjaab ke ludhiyaana se kolakaata tak yah bhaarat se is root par sirph maal gaadee chalegee is par sirph guds vaale gaadee chalegee jo asal mein dikkat kya hotee hai ki agar ham bhaarat sarakaar ke indiyan relavej ke rivenyoo kee baat kare kamaee kee baat karen to jo paisenjar tren hotee hai unase unhen ghaata lagata hai aap relave tikat par dekhoge to yah bataate hain sarakaar ke odit mein yah riport mein aata bhee paisenjar tren se gavarnament ko los lagata hai asalee jo kamaee hotee hai jo bhee kamaee unako hotee vah maalagaadee se hee hotee hai lekin bechaara maalagaadee sabase jyaada kasht hota hai ab dekhate hoge ek paisenjar tren kee gujaratee hai to maal gaadee ko rok diya jaata hai ek-ek din baitha dete hain kisee steshan par do 2 din baitha dete hain is kaaran se kya hota hai ki koee bhee saamaan ko jaane ka main samay jyaada lagata hai jisake kaaran se usaka kost par jaata hai lojistik kost jisako ham kahate hain ek kshama kisee bhee saamaan ko ek jagah se doosaree jagah le jaane mein jo kharcha aata hai usamen lojistik kost kahate hain aapako pata hai apane desh bhaarat mein yah lojistik post bahut hee jyaada hai yahaan tak ki baanglaadesh se bhee jyaada lojistik kost apane desh mein hai yaanee ab dekhate hue ki ₹15 ka naariyal jo ki naariyal paanee tamilanaadu mein 10 ya ₹15 ka hota hai vah bihaar aate-aate 80 ke ₹90 ka ho jaata hai ek kyon aisa hota hai bikoz lojistik kost mein bahut jyaada hai ab yah is root ke aane se deeephaseesee ke aane se eedeeephasee ho jo samaan hai maalagaadee ko kam samay lagega ek jagah se doosaree jagah jaane mein is kaaran se lojistik kost ghatega aur saamaan ka daam bhee ghatega aur log isako pepar karenge abhee aap jyaadaatar saamaan jo hai vah trak se jaata hai lekin jo sasta maal gaadee mein saamaan bahut hee sasta padata hai trak ke mukaabale 10 guna sasta padata hai maal gaadee se saamaan bhejana lekin jo dukaanadaar hote hain jo dukaanadaar hote hain yah jo bijanesamain hote hain unako pata hota hai ki yaar isamen koee gaarantee nahin hai ki kab saamaan pahunchega iseelie vah log trak se mangaate hain lekin is deeephaseesee ke aa jaane ke baad log maalagaadee ko phataaphat karenge bikoj speed jo hai vah lagabhag 4 guna tak badh jaega yaanee ki agar pahale koee bhee saamaan 20 din mein pahuncha tha to vah 5 din mein hee pahunch jaega yah modee sarakaar ke aane ke baad modee sarakaar ne is par kaaphee jyaada dhyaan diya hai bikoz aap log jaanate hain ki modee sarakaar jo hai imphraastrakchar par kaaphee dhyaan de rahee hai yah ek gamai-chhanging sabase bada projekt aap kah sakate ho ki indiyan gavarnament

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किसानों की कृषि कानूनों को सरकार से वापस लेने की जिद को आप कैसे समझते हैं?Kishano Ki Krishi Kanunon Ko Sarkar Se Vapas Lene Ki Jid Ko Aap Kaise Samajhte Hain
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2:58
देखें सबसे पहले तो अगर हम पॉलिटिकल एंगल से इसे देखें तो 2014 में जब मोदी गवर्नमेंट आई थी उसके बाद बाद से लेकर 6 साल तक उन्होंने कई सारे विवादित बिल को पास की हर दिल के बाद काफी प्रदर्शन हुआ लेकिन उन्होंने कभी भी बैक आउट नहीं किया आप जैसे सीए वाला देखो 370 वाला देखो हर्बल के बाद ऐसा हुआ था लेकिन यह जो है अब आप यह कह सकते हो कि कम से कम 5 लोगों में तो इन्होंने डेढ़ साल तक का अपने आखिर उन्होंने कहा कि ठीक है हम डेढ़ साल तक हम लोग को हम रख देते स्टैंड बाय पर पहला कारण तो यह हो गया है कि हां मोदी गवर्नमेंट के पास फुल मेजॉरिटी है और वह एरोगेंस है इस चीज पर वह डिस्कशन नहीं करना चाहती है वह खुद ही सब लोगों पास करती है दूसरी बात है कि गवर्नमेंट को पता है कि अगर मैं अगर गवर्नमेंट इस बिल को नहीं जाती है तो जो कृषि क्षेत्र है जो एग्रीकल्चर सेक्टर है वह बहुत ही लॉस में जाते रहेगा वह देश की इकोनॉमी को और भी दूं तू आ सकता है अब आप जैसे कि देखो गेहूं की जिम में बात की पंजाब में होता है कि गेहूं और वहां पर चावल होते हैं तो ठीक है उन्हें तो एमएसपी मिल जाता है क्योंकि सरकार उनसे सारे उपज को खरीद लेती है क्योंकि सरकार को बांटना होता है गरीबों में अब अपने सुनाओ का फूड सिक्योरिटी एक्ट के तहत गेंहू चावल फ्री में बैठना होता है तो सरकार पंजाब हरियाणा और मध्य प्रदेश जैसे स्टेट से खरीद लेती है बाकी स्टेट की बात करें जैसे कि बिहार बिहार में आप देखोगे तो एम एस पी पर बहुत ही कम फसल बिकता है क्योंकि गवर्नमेंट यहां पर प्रोक्योर्ड नहीं करती है जैसे कि मैं बात करता हूं मक्के की मक्के की एमएसपी जो है वह ₹24 है बट आप पूरे बिहार में घूम लो तो कहीं भी मक्का बारह सौ से 13 साल से ज्यादा नहीं बिकता है अब बात कर लो बाजरे की उसकी एमएसपी है ₹2000 इक्कीस सौ के आसपास लेकिन कहीं भी पूरे बिहार या फिर कहीं पर भी ज्ञान नहीं बिकता है यह फारवर्ड को बहुत ही ज्यादा लॉस कर रहा है अब इस फिल्म में जैसे कि है कि मैं फॉर एग्जांपल मक्के को ही लेता हूं इस बिल के तहत आप जो है दूसरे पर मेरे को अपना सामान भेज सकते हैं मक्के अभी जो मक्का है अपने देश में काफी होता है बिहार में खास करके लेकिन मक्के की जो खपत है अपने देश में वह कम है एस कंपेयर्ड टो अमेरिका एंड वेस्टर्न कंट्रीज अपने देश में मक्के की खपत होती है जिसे मुर्गा को मुर्गा होता है या फिर वह छोटे-छोटे जो होते हैं उनके लिए चारा बनता है उसमें काम आता है तो इसलिए इसका रेट बहुत कम होता है लेकिन इसका डिमांड मेडिकल जैसे देश में बहुत ज्यादा होता है जहां पर आपने सुना होगा कौन हो गए सब लोग बहुत खाते हैं तो आप ही बताओ इस बिल से क्या फायदा होगा कि नहीं होगा तो गवर्नमेंट कल से तो सही है अब और भी बात कर लो सिर्फ कहीं से होते हैं काम होते हैं कहीं कुछ भी होता है तो यह अभी गवर्नमेंट के प्रेशर में रहते हैं अब आप आप ही एक बात बताओ जो किसानों की इस जिद है कि सरकार एमएसपी पर खरीद ले अगर एमएसपी पर फसल ऐसे हैं इससे फसल है जिसके की एमएसपी सरकार तय करती है तो क्या सभी फसल को सरकार खरीद सकती है इतना पैसा है सरकार पर और
Dekhen sabase pahale to agar ham politikal engal se ise dekhen to 2014 mein jab modee gavarnament aaee thee usake baad baad se lekar 6 saal tak unhonne kaee saare vivaadit bil ko paas kee har dil ke baad kaaphee pradarshan hua lekin unhonne kabhee bhee baik aaut nahin kiya aap jaise seee vaala dekho 370 vaala dekho harbal ke baad aisa hua tha lekin yah jo hai ab aap yah kah sakate ho ki kam se kam 5 logon mein to inhonne dedh saal tak ka apane aakhir unhonne kaha ki theek hai ham dedh saal tak ham log ko ham rakh dete staind baay par pahala kaaran to yah ho gaya hai ki haan modee gavarnament ke paas phul mejoritee hai aur vah erogens hai is cheej par vah diskashan nahin karana chaahatee hai vah khud hee sab logon paas karatee hai doosaree baat hai ki gavarnament ko pata hai ki agar main agar gavarnament is bil ko nahin jaatee hai to jo krshi kshetr hai jo egreekalchar sektar hai vah bahut hee los mein jaate rahega vah desh kee ikonomee ko aur bhee doon too aa sakata hai ab aap jaise ki dekho gehoon kee jim mein baat kee panjaab mein hota hai ki gehoon aur vahaan par chaaval hote hain to theek hai unhen to emesapee mil jaata hai kyonki sarakaar unase saare upaj ko khareed letee hai kyonki sarakaar ko baantana hota hai gareebon mein ab apane sunao ka phood sikyoritee ekt ke tahat genhoo chaaval phree mein baithana hota hai to sarakaar panjaab hariyaana aur madhy pradesh jaise stet se khareed letee hai baakee stet kee baat karen jaise ki bihaar bihaar mein aap dekhoge to em es pee par bahut hee kam phasal bikata hai kyonki gavarnament yahaan par prokyord nahin karatee hai jaise ki main baat karata hoon makke kee makke kee emesapee jo hai vah ₹24 hai bat aap poore bihaar mein ghoom lo to kaheen bhee makka baarah sau se 13 saal se jyaada nahin bikata hai ab baat kar lo baajare kee usakee emesapee hai ₹2000 ikkees sau ke aasapaas lekin kaheen bhee poore bihaar ya phir kaheen par bhee gyaan nahin bikata hai yah phaaravard ko bahut hee jyaada los kar raha hai ab is philm mein jaise ki hai ki main phor egjaampal makke ko hee leta hoon is bil ke tahat aap jo hai doosare par mere ko apana saamaan bhej sakate hain makke abhee jo makka hai apane desh mein kaaphee hota hai bihaar mein khaas karake lekin makke kee jo khapat hai apane desh mein vah kam hai es kampeyard to amerika end vestarn kantreej apane desh mein makke kee khapat hotee hai jise murga ko murga hota hai ya phir vah chhote-chhote jo hote hain unake lie chaara banata hai usamen kaam aata hai to isalie isaka ret bahut kam hota hai lekin isaka dimaand medikal jaise desh mein bahut jyaada hota hai jahaan par aapane suna hoga kaun ho gae sab log bahut khaate hain to aap hee batao is bil se kya phaayada hoga ki nahin hoga to gavarnament kal se to sahee hai ab aur bhee baat kar lo sirph kaheen se hote hain kaam hote hain kaheen kuchh bhee hota hai to yah abhee gavarnament ke preshar mein rahate hain ab aap aap hee ek baat batao jo kisaanon kee is jid hai ki sarakaar emesapee par khareed le agar emesapee par phasal aise hain isase phasal hai jisake kee emesapee sarakaar tay karatee hai to kya sabhee phasal ko sarakaar khareed sakatee hai itana paisa hai sarakaar par aur

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अंग्रेजी में किसी के साथ वार्तालाप करने के लिए सबसे बढ़िया ऐप?Angreji Mein Kisi Ke Saath Vartalap Karne Ke Lie Saase Badiya App
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आपने बिल्कुल ही बहुत अच्छा क्वेश्चन पूछा है सरकार हमारे देश के किसानों के लिए क्यों अच्छी सुविधा नहीं अपना रही है सबसे पहले मैं आपके साथ एक डाटा शेयर करना चाहूंगा अगर हम देखें तो देश के अगरम डाटा के हिसाब से बात करें सरकारी आंकड़ों के हिसाब से देश के साथ पर्सेंट लोग जो है वह एग्रीकल्चर से जुड़े की खेती से जुड़े हुए हैं और अगर हम जीडीपी की बात करें तो एग्रीकल्चर का योगदान यानी कृषि का योगदान 15% है कितना है 15% है 8% जनता इस काम में जुटी हुई है और जीडीपी में इसका योगदान 15 परसेंट है यानी कि जितना योगदान इकोनामिक को है उस से 4 गुना ज्यादा लोग इसमें है अगर आप देखेंगे मैं इसमें यह एक्सप्लेन आपको करना चाह रहा हूं कि 4 गुना जीडीपी से 4 गुना पॉलिटिकल स्ट्रैंथ इसका है पॉलिटिकल मजबूती इसकी है यानी कि यह सरकार के राजनीति को बहुत ज्यादा इफेक्ट करता है इसलिए सरकार इस जैसे संवेदनशील स्थिति पर अपना हाथ नहीं डालना चाहता है अब मैं आपको बताना चाहता हूं आप जानते होंगे कि एमएसपी की बात करें फॉर एग्जांपल में गेहूं रहता हूं मिनिमम सपोर्ट प्राइस कि हम बोलते हैं बात करते हैं गेहूं की एमएसपी जो है वह 1980 से 2000 के देने में रहती है इस बार शायद 1950 या 2000 के आसपास में थी अब सरकार इसे उन्नीस सौ ₹50 प्रति क्विंटल या फिर ₹2000 प्रति क्विंटल लेती है अब उसे पैक करती है सब कुछ करते हैं सब कुछ करने के बाद एफसीआई अप सुनने आपने सुना होगा फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया वहां पर वह भेजते हैं वहां पर स्टोर करते हैं यानी कुल मिलाकर के सरकार को अठाईस सौ से ₹29 प्रति क्विंटल खर्च हो जाता है 18 ईश्वर से ₹29 प्रति क्विंटल सरकार को खर्च हो जाता है और आप जानते होंगे हमारे देश में फूड सिक्योरिटी है यानी कि सरकार जो है इसे फ्री में बांट रही है 3 किलो प्रति आदमी 5 किलो टोटल देते हैं जिसमें तीन क्यों लिया तो हटाया तो चावल होता है यानी कि कितना बड़ा लॉस आपको लग रहा है कि आप सोचो लेकिन सरकार जो है एफसीआई जो है तीन लाख करोड़ का कर्जा है उस पर फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया पे तीन लाख करोड़ का कर्जा है सरकार कैसे कुछ कर सकती है और सरकार ऐसे इशू पर जब हाथ डालती है फार्म डोला के इतने अच्छे-अच्छे लल्ला के तो लोग सड़क पर उतर आते हैं अब सरकार क्या करें उसे तो पहले अपनी कुर्सी पसंद है अगर उसे अपनी कुर्सी ही नहीं बचेगी तो वह इकनोमिक फायदा या किसान को सुविधा कैसे दे पाएगा इसलिए जो सरकार है वह ग्रसित है वह मजबूर है वह कुछ नहीं कर सकता है और कोई भी गवर्नमेंट कुछ नहीं कर सकता हमारे देश की स्थिति यही है धन्यवाद समय खत्म हो रहा है
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