#भारत की राजनीति

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क्या कारण है कि राहुल गांधी पीएम नहीं बन सकते?Kya Kaaran Hai Ki Rahul Gandhi Pm Nahin Ban Sakte
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0:44
भारतीय शास्त्र परंपरा कहती है कालू चंद्रपति विपुला चप्पल की काल की कोई अवधि नथनी का कोई चुरा नहीं है वास्तव में आप भूतकाल पर चर्चा कर सकते हैं भविष्य के लिए संभावनाएं तलाश वास्तव में अब तक राहुल गांधी पीएम इसलिए नहीं बनता बात की जनता ने वोट नहीं है वह बहुमत हासिल करते पर लोकतंत्र और लोकसभा में अपना बना कर सकते हैं आगे आने वाले समय में यदि लोग वोट देंगे तो प्रधानमंत्री बन पाएंगे अन्यथा नहीं बन पाएंगे यह केवल प्रतिभा और क्षमता का मामला नहीं है नियति प्रारंभ का भी मामला है जिस पर राजनीतिक कृपा दृष्टि से राजनेता बन जाता
Bhaarateey shaastr parampara kahatee hai kaaloo chandrapati vipula chappal kee kaal kee koee avadhi nathanee ka koee chura nahin hai vaastav mein aap bhootakaal par charcha kar sakate hain bhavishy ke lie sambhaavanaen talaash vaastav mein ab tak raahul gaandhee peeem isalie nahin banata baat kee janata ne vot nahin hai vah bahumat haasil karate par lokatantr aur lokasabha mein apana bana kar sakate hain aage aane vaale samay mein yadi log vot denge to pradhaanamantree ban paenge anyatha nahin ban paenge yah keval pratibha aur kshamata ka maamala nahin hai niyati praarambh ka bhee maamala hai jis par raajaneetik krpa drshti se raajaneta ban jaata

#भारत की राजनीति

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भारत में जब भी भाजपा की सरकार बनती है तो दंगे क्यों होते हैं?Bharat Mein Jab Bhe Bjp Ki Sarkaar Banti Hai To Dange Kyun Hote Hain
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Unknown
1:50
धंधे तब भी होते थे जब भाजपा की सरकार नहीं कि 1984 के सिख दंगे 1992 के देशव्यापी हिंदू मुसलमान के दंगे वास्तव में दंगे इस देश की व्यवस्था पर एक कलंक है पार्टी किसी की भी हो आपसी सौहार्द जुगाड़ कर हिंसा का सहारा लेकर एक दूसरे को कुचलना एक दूसरे को दबाने की प्रक्रिया ही देश के विकास में बाधक है संकीर्ण मानसिकता संप्रदायवाद क्षेत्रवाद जातिवाद के नाम पर लड़ने वाले हम लोग जब तक पार्टी के नाम पर दंगों को जस्टिफाई करते रहेंगे देश आगे नहीं बढ़ पाएगा आवश्यकता इस बात की है कि 1 बटा 125 करोल भारत होने के नाते आप अपनी भूमिका पहचाने हम अपनी भूमिका पहचाने और आपकी तालमेल सामंजस्य सौहार्द की बात करके विकास के पथ पर अग्रसर हो हमारे मूल कर्तव्य कहते हैं एवं संविधान में आस्था रखना जरूरी नहीं है संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकार और कर्तव्यों के बीच सामंजस्य स्थापित करके देश को आगे बढ़ाना आप क्यों हमारी जिम्मेदारी है कि किस प्रकार पर दंगों का ठीकरा फोड़ना यह अच्छी बात नहीं है क्योंकि एकता और संप्रदायवाद एक साथ साथ चलने वाली प्रक्रिया है जिसे आप 1905 के स्वदेशी आंदोलन के समय देश में एकता बढ़ती है संप्रदायवाद अपने पैर पसारता है जरूरत है और संप्रदायवाद जिसमें आप और हमारी भूमिका सहयोगी हो सकती है आप राजनीतिक इच्छाशक्ति और राजनीतिक शिक्षा के माध्यम से जागरूक होंगे तो कोई आपको भरमा नहीं सकेगा सरकार किसी की भी होंगी आप इस दंगे की प्रक्रिया से वाकिफ होंगे कि यह क्यों किए जाते हैं वास्तव में यह सब राजनीतिक सत्ता प्राप्त करने के लिए लोगों के इमोशंस को भड़काने की प्रक्रिया है क्योंकि लोकतंत्र मनोवैज्ञानिक का फायदा उठाते हैं
Dhandhe tab bhee hote the jab bhaajapa kee sarakaar nahin ki 1984 ke sikh dange 1992 ke deshavyaapee hindoo musalamaan ke dange vaastav mein dange is desh kee vyavastha par ek kalank hai paartee kisee kee bhee ho aapasee sauhaard jugaad kar hinsa ka sahaara lekar ek doosare ko kuchalana ek doosare ko dabaane kee prakriya hee desh ke vikaas mein baadhak hai sankeern maanasikata sampradaayavaad kshetravaad jaativaad ke naam par ladane vaale ham log jab tak paartee ke naam par dangon ko jastiphaee karate rahenge desh aage nahin badh paega aavashyakata is baat kee hai ki 1 bata 125 karol bhaarat hone ke naate aap apanee bhoomika pahachaane ham apanee bhoomika pahachaane aur aapakee taalamel saamanjasy sauhaard kee baat karake vikaas ke path par agrasar ho hamaare mool kartavy kahate hain evan sanvidhaan mein aastha rakhana jarooree nahin hai sanvidhaan dvaara pradatt adhikaar aur kartavyon ke beech saamanjasy sthaapit karake desh ko aage badhaana aap kyon hamaaree jimmedaaree hai ki kis prakaar par dangon ka theekara phodana yah achchhee baat nahin hai kyonki ekata aur sampradaayavaad ek saath saath chalane vaalee prakriya hai jise aap 1905 ke svadeshee aandolan ke samay desh mein ekata badhatee hai sampradaayavaad apane pair pasaarata hai jaroorat hai aur sampradaayavaad jisamen aap aur hamaaree bhoomika sahayogee ho sakatee hai aap raajaneetik ichchhaashakti aur raajaneetik shiksha ke maadhyam se jaagarook honge to koee aapako bharama nahin sakega sarakaar kisee kee bhee hongee aap is dange kee prakriya se vaakiph honge ki yah kyon kie jaate hain vaastav mein yah sab raajaneetik satta praapt karane ke lie logon ke imoshans ko bhadakaane kee prakriya hai kyonki lokatantr manovaigyaanik ka phaayada uthaate hain

#भारत की राजनीति

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क्या नरेंद्र मोदी को अपनी खुद की पार्टी बना लेनी चाहिए?Kya Narendra Modi Ko Apni Khud Ki Party Bana Leni Chaiye
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Unknown
2:14
उदार लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक दल सत्ता प्राप्त करने का माध्यम होते हैं वे अपने उद्देश्य अपने मित्र अपने लक्ष्यों की पूर्ति के लिए चुनाव लड़ते हैं और नरेंद्र मोदी इस समय राजनीतिक सत्ता प्राप्त किए हुए हैं उनके हितों की पूर्ति चुनाव जीत कर रही इसलिए उन्हें किसी बॉडी बनाने की कोई आवश्यकता नहीं है वास्तव में कोई व्यक्ति नहीं पार्टी तब बनाता है जब वह किसी पार्टी में उपेक्षित हैं किसी पार्टी की लोकप्रियता को नकारा जाता हूं उसकी प्रतिभा को दरकिनार करने के लिए गुटबाजी की जाती है ऐसी कोई भी स्थिति नरेंद्र मोदी के साथ नहीं उनकी लोकप्रियता उनकी पार्टी में और वर्तमान देश में जगजाहिर कोई इसमें संदेह नहीं है इसलिए नई पार्टी बनाने की कोई आवश्यकता है हालांकि ऐसे उदाहरण भारतीय राजनीति जगत की गुटबाजी के चलते एक नई पार्टी बना लेते हैं या अपने राजनीतिक तुच्छ स्वार्थों के कारण एक पार्टी से दूसरी पार्टी में चले जाते हैं आजादी के बाद से लेकर अब तक सैकड़ों हजारों की संख्या में मौजूद वास्तव में यह कोई व्यवस्था नहीं है जिसमें व्यक्ति एक पार्टी से दूसरी पार्टी में एक राजनीतिक पद के लिए जाता है हम आशा करते हैं कि पार्टियां अपने लोकतांत्रिक व्यवस्था में थोड़ा ससुरा जलाएंगे और ऐसे नेताओं को आगे बढ़ाएंगे यू योग्य उनकी योग्यता और प्रतिभा इस देश को उत्थान के मार्ग प्रशस्त करें हालांकि वर्तमान समय में 40 से 50% अपराधिक प्रवृत्ति के हैं जिन पर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं ऐसे में यह जिंदगी जहां तक बात नरेंद्र मोदी के तूने नई पार्टी बनाने की कोई आवश्यकता नहीं है वर्ष पार्टी को नदी की तरह एक आत्ममंथन और आप स्वच्छता की जरूरत है जिससे पार्टी में जाने की पूर्ति की जाती
Udaar lokataantrik vyavastha mein raajaneetik dal satta praapt karane ka maadhyam hote hain ve apane uddeshy apane mitr apane lakshyon kee poorti ke lie chunaav ladate hain aur narendr modee is samay raajaneetik satta praapt kie hue hain unake hiton kee poorti chunaav jeet kar rahee isalie unhen kisee bodee banaane kee koee aavashyakata nahin hai vaastav mein koee vyakti nahin paartee tab banaata hai jab vah kisee paartee mein upekshit hain kisee paartee kee lokapriyata ko nakaara jaata hoon usakee pratibha ko darakinaar karane ke lie gutabaajee kee jaatee hai aisee koee bhee sthiti narendr modee ke saath nahin unakee lokapriyata unakee paartee mein aur vartamaan desh mein jagajaahir koee isamen sandeh nahin hai isalie naee paartee banaane kee koee aavashyakata hai haalaanki aise udaaharan bhaarateey raajaneeti jagat kee gutabaajee ke chalate ek naee paartee bana lete hain ya apane raajaneetik tuchchh svaarthon ke kaaran ek paartee se doosaree paartee mein chale jaate hain aajaadee ke baad se lekar ab tak saikadon hajaaron kee sankhya mein maujood vaastav mein yah koee vyavastha nahin hai jisamen vyakti ek paartee se doosaree paartee mein ek raajaneetik pad ke lie jaata hai ham aasha karate hain ki paartiyaan apane lokataantrik vyavastha mein thoda sasura jalaenge aur aise netaon ko aage badhaenge yoo yogy unakee yogyata aur pratibha is desh ko utthaan ke maarg prashast karen haalaanki vartamaan samay mein 40 se 50% aparaadhik pravrtti ke hain jin par aaparaadhik mukadame darj hain aise mein yah jindagee jahaan tak baat narendr modee ke toone naee paartee banaane kee koee aavashyakata nahin hai varsh paartee ko nadee kee tarah ek aatmamanthan aur aap svachchhata kee jaroorat hai jisase paartee mein jaane kee poorti kee jaatee

#टेक्नोलॉजी

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h2 so4 क्या है?
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0:13
h2 so4 एक तीव्र कार्बनिक गंधक अम्ल है जिसे सल्फ्यूरिक एसिड के नाम से भी जाना जाता है यह एक रंग हिना गंध ही नाम होता है इसका प्रयोग किसी भी देश के औद्योगिक करण सूचक माना जाता है
H2 so4 ek teevr kaarbanik gandhak aml hai jise salphyoorik esid ke naam se bhee jaana jaata hai yah ek rang hina gandh hee naam hota hai isaka prayog kisee bhee desh ke audyogik karan soochak maana jaata hai

#भारत की राजनीति

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रहने के लिए सबसे अच्छी जगह क्या है शहर या गांव?Rehne Ke Lie Sabse Achi Jagah Kya Hai Shahar Ya Gao
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1:59

#भारत की राजनीति

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2:03
भारतीय संविधान एक जीवंत दस्तावेज है जिसके माध्यम से भारत ने अपना शासन चलाते हैं भारतीय संविधान के कुछ प्रमुख मूल्य जैसे न्याय स्वतंत्रता समानता और बंधुत्व एकता और अखंडता हैं जो भारतीयों और भारत के संविधान का मार्गदर्शन करने के बाद उन्हें एक राह प्रदान करते हैं जिस पर भारत का सांगठनिक ढांचा खड़ा होता है और व्यावहारिक रूप प्रदान किया जाता है सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक स्तर पर कोई भेदभाव नहीं है वास्तव में न्याय समानता आपस में जुड़े हुए हैं स्वतंत्रता और समानता वास्तव में एक सिक्के के दो पहलू था और स्वतंत्रता के बीच का सामंजस्य स्थापित करके न्याय प्रदान करना यह भारतीय संविधान की एक अनोखी व्यवस्था है पर हम निरंतर कार्यरत हैं भारतीय लोक कल्याणकारी राज्य की अवधारणा पर कार्यरत है जिसमें न्याय स्वतंत्रता और समानता का महत्व बढ़ जाता है बंद था इसलिए जरूरी है क्योंकि 1947 में जब हमें आजादी मिली अनेक गंभीर आंतरिक और बाह्य समस्याओं से जूझ रहा था बंद था यदि मजबूत होती है तो देश की एकता मजबूत अखंडता इसलिए जरूरी है क्योंकि हम गांधार से लेकर वर्मा तक थे और खंड खंड बढ़ चुके हैं और इस बंटवारे को रोकना है तो हमें अखंडता भी जरूरी है और एकता इस न्याय स्वतंत्रता समानता और बंधुत्व के एकीकरण को मजबूती देने के लिए हमारे संविधान ने हमें मूल अधिकार दिए हैं परंतु जरूरत इस बात की है कि हम अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्य की और जागरूक हो हमारी राजनीतिक शिक्षा में वृद्धि हो ताकि हम एक सच्चे लोकतांत्रिक व्यवस्था की परंपरा को समझ के अनुसार
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