#कुछ अलग

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कुछ लोगों को अंग्रेजी और गणित सीखते वक्त सर में दर्द क्यों होता है?Kuchh Logon Ko Angrejee Aur Ganit Seekhate Vakt Sar Mein Dard Kyon Hota Hai
अशोक वशिष्ठ  Bolkar App
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कहानी लेखक, समीक्षक, अनुवादक, रिटायर्ड प्रिंसीपल
3:04

#कुछ अलग

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समय का सदुपयोग कैसे करें कोरोनावायरस के चलते घर से बाहर भी नहीं निकल सकते?Samay Ka Sadupayog Kaise Karen Koronaavaayaras Ke Chalate Ghar Se Baahar Bhee Nahin Nikal Sakate
अशोक वशिष्ठ  Bolkar App
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कहानी लेखक, समीक्षक, अनुवादक, रिटायर्ड प्रिंसीपल
5:00

#कुछ अलग

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कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के पीछे आपको किसकी गलती लगती है?Corona Virus Ke Badhte Mamalon Ke Piche Apko Kiski Galti Lagti Hai
अशोक वशिष्ठ  Bolkar App
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कहानी लेखक, समीक्षक, अनुवादक, रिटायर्ड प्रिंसीपल
5:00

#भारत की राजनीति

अशोक वशिष्ठ  Bolkar App
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4:58
नमस्कार दोस्तों की क्या टिकट इतने बड़े नेता बन गए हैं कि वे मोदी सरकार को उखाड़ने की बात करने लगे हैं देखिए आप आइए जो राकेश टिकैत हैं इसमें तो कोई शक नहीं है कि यह किसान नेता हैं इनके पिता महेंद्र सिंह टिकैत बहुत बड़े नेता थे इस जिस जमाने में वह नेता हुआ करते थे चौधरी चरण सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हुआ करते थे और उस समय एक का शरद जोशी और किसान नेता हुए महाराष्ट्र यह दो लेता पूरे देश में किसानों का प्रतिनिधित्व किया करते थे सरकारों को बदलने की नहीं लेकिन हां हां कुछ तो ताकत ही वोट बैंक में हुआ करते थे मैं मानता हूं राकेश टिकैत तो अपने पिता की धरोहर यानी किसान नेतृत्व करने की उसको लेकर आगे चल रहे हैं और उसमें सफल हो रहे हैं कि कोई भी व्यक्ति तब सुर्खियों में आता है तब बोल नेता बनता है या अगुआ बनता है जब उसको जन समर्थन मिलता है यह चाहे किसान ने पहुंचाई मजदूर नेता हो चाहे राजनीतिक नेता को उनकी पहचान और उनका दबदबा या कहीं उनकी बात में दम तभी लगता है जब उनके साथ जन समर्थन जुड़ा हुआ हो किसानों की मांगे कितनी सही है कितनी गलत है यह तो एक व्याख्या और उसकी अपनी मंशा करने पर ही पता चल सकता है लेकिन कुछ तो दम होगा ना उनकी मांगों में मैं मैं यह मान कर चलता हूं कि कोई भी सरकार कोई भी कानून बनाती है जिनके लिए कानून बनाती है उनको समझाया क्यों नहीं चाहता अगर यह कानून किसानों के लिए बना था बने थे तीन कानून तो इतनी जल्दी क्या थी कि ऑर्डिनेंस लेकर आओ उसको पास कराया जाए यानि कानून बनाने का तरीका जो होता है पहले वह संसद में पेश किया जाता है उस पर चर्चा होती है दोनों शब्दों में जाकर वह कहीं का और इसको कानून बना दिया गायक ऑर्डिनेंस लाकर अध्यादेश लाकर बाद में उस पर चर्चा यहां संदेह पैदा करता है कि आखिर कॉल में जबकि पूरा देश अन्य चीजों से जूझ रहा था ऐसे में आनन-फानन में यह कृषि संबंधित इन कानून लाए गए और वह ऑर्डिनेंस के माध्यम से अध्यादेश पारित कराकर या नहीं अध्यादेश पर राष्ट्रपति के साइन करा कर उसको लागू कर दिया गया या उसको भले ही बाद में कोर्ट ने उस पर रोक लगा दी है हमारे कोर्ट इतने सक्षम हैं नेता और टिकट तो आज जो बने हुए हैं इसलिए बने उनके पीछे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में यह आज पंजाब का यह हरियाणा कहिए और बाकी अन्य भाइयों के राज्यों की शान है उनका समर्थन है मैं मानता हूं कि यह इस तरह के जितने भी आंदोलन होते हैं वह कहीं ना कहीं राजनीति से प्रेरित हैं कोई भी आप आप आप राजनीति को तो आज कहीं अलग कर नहीं सकते साहब जो सरकार रामपुर का कानून चला रही है या राज्य चला रही है वह भी तो राजनीति की देन है ना तो मोदी को मोदी सरकार को उखाड़ने की बातें करने लगे हैं तो मैं नहीं समझता हूं कि मोदी सरकार आज की तारीख में इतनी कमजोर है कि उसको कोई एक व्यक्ति उखाड़ सके किसी भी सरकार को उखाड़ने का अवसर आता है पास सब जन समुदाय के पास आय का वोटर के पास आएगा जब भी सरकार यानी जब भी आम चुनाव होंगे तो मतदाता जो फैसला करेगा वह कोई भी नेता अपने दम पर बड़ा नहीं बनता है मोदी ही क्यों न हो क्या मोती जब मुख्यमंत्री हुआ करते थे गुजरात के तंबू इतने बड़े नेता थे कि राष्ट्रीय पटल पर आ सकें लेकिन उन्होंने कुछ मुद्दे अपने उठाएं कुछ बनाए चाहे वह पाखंड आ रहा हूं बहुत से लोगों की नजरों में उनकी बातें बहुत सारी आप और पेट अंदर ही यह बहुत सी बातें नहीं लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने अपने अपने साथ जनों से और जनता को राम मंदिर कश्मीर का मुद्दा और भी ऐसी चीजें मुस्लिम महिलाओं पर जो तलाक का मामला था इस तरह की चीजों को लिया जो जनता के मन को से जुड़ी हुई मुद्दे थे और इस पर जनसमर्थन मिला उनको तो आज वह इतने बड़े नेता बने हैं कोई नेता किसी एक व्यक्ति के द्वारा यह चुनौती दिया जाना कि वह सरकार को उखाड़ फेंकने का यह बेईमानी बातें हैं ऐसा संभव नहीं है हां बातें यह दोनों तरफ से होती हैं अगर राकेश बौखलाहट में ऐसी बातें बोलते हैं तो यह परिस्थिति वर्ष भी हो सकता है सरकार की ओर से भी तो कोई प्रयास कहां हो रहा है बताइए सरकार की ओर से भी ऐसे कोई प्रयास नहीं हो रहे कि इस आंदोलन को हुई है इंतजार कर रहे हैं कि जैसे एनआरसी का बुद्धा धीरे-धीरे यह पड़ जाए और विषय है इसकी मीमांसा की जानी चाहिए
Namaskaar doston kee kya tikat itane bade neta ban gae hain ki ve modee sarakaar ko ukhaadane kee baat karane lage hain dekhie aap aaie jo raakesh tikait hain isamen to koee shak nahin hai ki yah kisaan neta hain inake pita mahendr sinh tikait bahut bade neta the is jis jamaane mein vah neta hua karate the chaudharee charan sinh uttar pradesh ke mukhyamantree hua karate the aur us samay ek ka sharad joshee aur kisaan neta hue mahaaraashtr yah do leta poore desh mein kisaanon ka pratinidhitv kiya karate the sarakaaron ko badalane kee nahin lekin haan haan kuchh to taakat hee vot baink mein hua karate the main maanata hoon raakesh tikait to apane pita kee dharohar yaanee kisaan netrtv karane kee usako lekar aage chal rahe hain aur usamen saphal ho rahe hain ki koee bhee vyakti tab surkhiyon mein aata hai tab bol neta banata hai ya agua banata hai jab usako jan samarthan milata hai yah chaahe kisaan ne pahunchaee majadoor neta ho chaahe raajaneetik neta ko unakee pahachaan aur unaka dabadaba ya kaheen unakee baat mein dam tabhee lagata hai jab unake saath jan samarthan juda hua ho kisaanon kee maange kitanee sahee hai kitanee galat hai yah to ek vyaakhya aur usakee apanee mansha karane par hee pata chal sakata hai lekin kuchh to dam hoga na unakee maangon mein main main yah maan kar chalata hoon ki koee bhee sarakaar koee bhee kaanoon banaatee hai jinake lie kaanoon banaatee hai unako samajhaaya kyon nahin chaahata agar yah kaanoon kisaanon ke lie bana tha bane the teen kaanoon to itanee jaldee kya thee ki ordinens lekar aao usako paas karaaya jae yaani kaanoon banaane ka tareeka jo hota hai pahale vah sansad mein pesh kiya jaata hai us par charcha hotee hai donon shabdon mein jaakar vah kaheen ka aur isako kaanoon bana diya gaayak ordinens laakar adhyaadesh laakar baad mein us par charcha yahaan sandeh paida karata hai ki aakhir kol mein jabaki poora desh any cheejon se joojh raha tha aise mein aanan-phaanan mein yah krshi sambandhit in kaanoon lae gae aur vah ordinens ke maadhyam se adhyaadesh paarit karaakar ya nahin adhyaadesh par raashtrapati ke sain kara kar usako laagoo kar diya gaya ya usako bhale hee baad mein kort ne us par rok laga dee hai hamaare kort itane saksham hain neta aur tikat to aaj jo bane hue hain isalie bane unake peechhe pashchimee uttar pradesh mein yah aaj panjaab ka yah hariyaana kahie aur baakee any bhaiyon ke raajyon kee shaan hai unaka samarthan hai main maanata hoon ki yah is tarah ke jitane bhee aandolan hote hain vah kaheen na kaheen raajaneeti se prerit hain koee bhee aap aap aap raajaneeti ko to aaj kaheen alag kar nahin sakate saahab jo sarakaar raamapur ka kaanoon chala rahee hai ya raajy chala rahee hai vah bhee to raajaneeti kee den hai na to modee ko modee sarakaar ko ukhaadane kee baaten karane lage hain to main nahin samajhata hoon ki modee sarakaar aaj kee taareekh mein itanee kamajor hai ki usako koee ek vyakti ukhaad sake kisee bhee sarakaar ko ukhaadane ka avasar aata hai paas sab jan samudaay ke paas aay ka votar ke paas aaega jab bhee sarakaar yaanee jab bhee aam chunaav honge to matadaata jo phaisala karega vah koee bhee neta apane dam par bada nahin banata hai modee hee kyon na ho kya motee jab mukhyamantree hua karate the gujaraat ke tamboo itane bade neta the ki raashtreey patal par aa saken lekin unhonne kuchh mudde apane uthaen kuchh banae chaahe vah paakhand aa raha hoon bahut se logon kee najaron mein unakee baaten bahut saaree aap aur pet andar hee yah bahut see baaten nahin lekin dheere-dheere unhonne apane apane saath janon se aur janata ko raam mandir kashmeer ka mudda aur bhee aisee cheejen muslim mahilaon par jo talaak ka maamala tha is tarah kee cheejon ko liya jo janata ke man ko se judee huee mudde the aur is par janasamarthan mila unako to aaj vah itane bade neta bane hain koee neta kisee ek vyakti ke dvaara yah chunautee diya jaana ki vah sarakaar ko ukhaad phenkane ka yah beeemaanee baaten hain aisa sambhav nahin hai haan baaten yah donon taraph se hotee hain agar raakesh baukhalaahat mein aisee baaten bolate hain to yah paristhiti varsh bhee ho sakata hai sarakaar kee or se bhee to koee prayaas kahaan ho raha hai bataie sarakaar kee or se bhee aise koee prayaas nahin ho rahe ki is aandolan ko huee hai intajaar kar rahe hain ki jaise enaarasee ka buddha dheere-dheere yah pad jae aur vishay hai isakee meemaansa kee jaanee chaahie

#भारत की राजनीति

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क्या अब कोरोना काल के बाद जिंदगी सामान्य हुई है या नहीं?Kya Ab Corona Kaal Ke Baad Jindagi Samany Hui Hai Ya Nahi
अशोक वशिष्ठ  Bolkar App
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कहानी लेखक, समीक्षक, अनुवादक, रिटायर्ड प्रिंसीपल
4:59
नमस्कार मैं अशोक वशिष्ठ यह प्रश्न मुझे सांवरा जी ने दिया है आशापुरा जी आप ने यह प्रश्न कि क्या अब करुणा काल के बाद जिंदगी सामान्य हुई है या नहीं यह पूछा है इसको मैं अब आयामों में देख रहा हूं एक तो यह सर्व सामान्य प्रश्न हो सकता है और एक इसे मैं अपने निजी जीवन से भी जोड़ सकता हूं इसके उत्तर को क्योंकि मैं आपको रोना से प्रभावित होकर निकला हूं आने की कोरोनावायरस में आए हुए 1 वर्ष का समय पूरा हो चुका है अब फरवरी अपने अंत की तरह है और फरवरी में केस आना शुरू हो गए थे मार्च में भले ही लोग शुरू हुआ वह एक अलग बात है लेकिन फरवरी में कैसा आना शुरू हो गए तौर पर बढ़िया बाप ने अंतिम पर एक साल पूरा हो गया है और हमने इसका भी वक्त जरूर देखा है मैंने मुंबई महानगर के एक पॉश इलाके में रहता हूं नवी मुंबई में नई मुंबई न्यू मुंबई जिसको कहते हैं आप मैंने ऐसा समय भी देखा है कि घर से यानी आस पास केवल चिड़ियों की चहक कुत्तों की भौंकने की आवाज और कभी-कभी आज इसको कहेंगे हम और पुलिस की गाड़ी का सायरन और एंबुलेंस इसकी आ जाओ आवाज होती है वह सुनाई देती थी और कुछ भी नहीं सकता अगर किसी कारण से मेडिकल चोर जाना भी पड़े तो लगता था कि आज दिन में हम जैसे किसी श्मशान भूमि से होकर गुजर ऐसा समय भी देखा और आप यद्यपि लॉकडाउन खोल दिया गया है पूरी तरह से पब्लिक आपका गतिविधियां शुरू हो गई है ट्रांसपोर्टर शुरू हो गया भले ही मुंबई में भी लोकल ट्रेन पूरी तरह से शुरू नहीं हुई है लेकिन बाकी सारी गतिविधियां खास करके व्यावसायिक दृष्टि से गतिविधियां शुरू हो गई हैं अभी तक स्कूल और कॉलेज नहीं खुले और अभी वह स्थिति नहीं है मुंबई खास करके अगर मुंबई की बात करो मैं कभी अपने गांव पश्चिमी उत्तर प्रदेश में फोन करता हूं तो वह कहते हैं तो सब कुछ ठीक-ठाक है या खांसी भी होती है सब कुछ होता है अब उनको मैं कैसे कहूं कि अगर आप क्या करो ना नहीं आया है तो अच्छी बात है ना और ना आपके यहां घर आ जाता तो सोचे गांव में अगर कोरोनावायरस ई के द्वारा तो क्या हालत होगी वहां तो सुविधाएं भी नहीं है तो मुंबई जैसे शहर में अब कैसे फिर से बढ़ने लगे हैं जो 330uf 270 केस प्रति दिन हो गए थे अब वह 700 तक जा पहुंचे हैं फिर से इसका कारण है कि लोकल शुरू हो यह बहुत सारी मात्रा में और भले ही पूरी तरह से नहीं शुरू हुई है और लोगों की गतिविधियां शुरू हुई और लापरवाह हो गए यह सोच कर कि अब तो वैक्सीन आ गई है अरे भैया वैक्सीन भी अभी आपसे बहुत खुश हूं दूर है अभी तो मेडिकल वालों को ही पूरी तरह से भी अच्छी नहीं लग पाई जो फर्स्ट जवा फ्रंटलाइनर से उनको भी नहीं लग पाई है बेबी आप माया तो ले नहीं पा रहे हैं या जो भी करना हो तो अभी मैं नहीं समझता हूं कि जीवन आम हुआ है जीवन आम तब होता है जब आदमी आम जीवन की तरह आम आदमी का बिल्कुल निश्चिंत होकर खुलकर जा सके मैं ठीक है मस्त लगा लगा कर सकते हैं लेकिन अभी मैं नहीं मानता हूं कि मुंबई जैसे शहर में जहां मैं रहता हूं वहां अभी जीवन सामान्य पूरी तरह से नहीं हुआ है मेरे पास लाइब्रेरी से ली हुई पुस्तकें हैं मैं वह देने जन नहीं जा पा रहा हूं और ना लेने जा पा रहा हूं मैं कोई रिश्तेदार आना बंद हो गया था मेरे आस-पास मेरे एक सगे भाई और एक मेरे मौसेरे भाई रहते हैं हम केवल एक दिन एक दूसरे के आ गए हुए कई कोई आता जाता नहीं है अब मैं आता हूं अपने निजी बात पर हमने सारी एहतियात बरती जितनी सावधानियां हो सकती हैं मास्क लगाने से लेकर सैनिटाइज करना और दिन में 10 बार 50 बार हाथ धोना साबुन से और दस्ताने पहनना हैंड ग्रुप पन्ना जितनी सावधानियां रख सकते थे घर में 24 घंटे की हवाई आती थी उसकी छुट्टी हमने मार्च में ही कर दी थी लेकिन फिर भी न जाने कहां से मेरे बेटे को कोरोना वह और उसके द्वारा मुझे और मेरी पत्नी को हम दोनों सीनियर सिटीजन से हमको कोरोनावायरस 10 दिन अस्पताल में रह कर आए हैं एक महीना आज मुझे पूरा हुआ है वहां पर होना को यानी में 19 तारीख को 19 जनवरी को एडमिट हुआ था और आज 19 फरवरी है एक महीना हुआ है मुझे और अभी भी वह शरीर में वह छुट्टी नहीं है वह छुट्टी नहीं है जो होनी चाहिए थी जो अभी आप आप अब एक तरह का डर बैठ गया है मैं बाहर निकलने को मन कम करता है क्योंकि यही कह देना कि जो जिस पर भी जाने तो करो ना आप भयावह है इसमें कोई शक नहीं है लेकिन अभी मुंबई जैसे शहर में स्थिति सामान्य नहीं हुई है आने वाला समय बताएगा कि इसमें इतना कितना समय और लगना है ईश्वर से प्रार्थना है कि अब सब कुछ जल्दी ठीक हूं ताकि आम आदमी अपनी सामान्य जिंदगी जी सकें धन्यवाद
Namaskaar main ashok vashishth yah prashn mujhe saanvara jee ne diya hai aashaapura jee aap ne yah prashn ki kya ab karuna kaal ke baad jindagee saamaany huee hai ya nahin yah poochha hai isako main ab aayaamon mein dekh raha hoon ek to yah sarv saamaany prashn ho sakata hai aur ek ise main apane nijee jeevan se bhee jod sakata hoon isake uttar ko kyonki main aapako rona se prabhaavit hokar nikala hoon aane kee koronaavaayaras mein aae hue 1 varsh ka samay poora ho chuka hai ab pharavaree apane ant kee tarah hai aur pharavaree mein kes aana shuroo ho gae the maarch mein bhale hee log shuroo hua vah ek alag baat hai lekin pharavaree mein kaisa aana shuroo ho gae taur par badhiya baap ne antim par ek saal poora ho gaya hai aur hamane isaka bhee vakt jaroor dekha hai mainne mumbee mahaanagar ke ek posh ilaake mein rahata hoon navee mumbee mein naee mumbee nyoo mumbee jisako kahate hain aap mainne aisa samay bhee dekha hai ki ghar se yaanee aas paas keval chidiyon kee chahak kutton kee bhaunkane kee aavaaj aur kabhee-kabhee aaj isako kahenge ham aur pulis kee gaadee ka saayaran aur embulens isakee aa jao aavaaj hotee hai vah sunaee detee thee aur kuchh bhee nahin sakata agar kisee kaaran se medikal chor jaana bhee pade to lagata tha ki aaj din mein ham jaise kisee shmashaan bhoomi se hokar gujar aisa samay bhee dekha aur aap yadyapi lokadaun khol diya gaya hai pooree tarah se pablik aapaka gatividhiyaan shuroo ho gaee hai traansaportar shuroo ho gaya bhale hee mumbee mein bhee lokal tren pooree tarah se shuroo nahin huee hai lekin baakee saaree gatividhiyaan khaas karake vyaavasaayik drshti se gatividhiyaan shuroo ho gaee hain abhee tak skool aur kolej nahin khule aur abhee vah sthiti nahin hai mumbee khaas karake agar mumbee kee baat karo main kabhee apane gaanv pashchimee uttar pradesh mein phon karata hoon to vah kahate hain to sab kuchh theek-thaak hai ya khaansee bhee hotee hai sab kuchh hota hai ab unako main kaise kahoon ki agar aap kya karo na nahin aaya hai to achchhee baat hai na aur na aapake yahaan ghar aa jaata to soche gaanv mein agar koronaavaayaras ee ke dvaara to kya haalat hogee vahaan to suvidhaen bhee nahin hai to mumbee jaise shahar mein ab kaise phir se badhane lage hain jo 330uf 270 kes prati din ho gae the ab vah 700 tak ja pahunche hain phir se isaka kaaran hai ki lokal shuroo ho yah bahut saaree maatra mein aur bhale hee pooree tarah se nahin shuroo huee hai aur logon kee gatividhiyaan shuroo huee aur laaparavaah ho gae yah soch kar ki ab to vaikseen aa gaee hai are bhaiya vaikseen bhee abhee aapase bahut khush hoon door hai abhee to medikal vaalon ko hee pooree tarah se bhee achchhee nahin lag paee jo pharst java phrantalainar se unako bhee nahin lag paee hai bebee aap maaya to le nahin pa rahe hain ya jo bhee karana ho to abhee main nahin samajhata hoon ki jeevan aam hua hai jeevan aam tab hota hai jab aadamee aam jeevan kee tarah aam aadamee ka bilkul nishchint hokar khulakar ja sake main theek hai mast laga laga kar sakate hain lekin abhee main nahin maanata hoon ki mumbee jaise shahar mein jahaan main rahata hoon vahaan abhee jeevan saamaany pooree tarah se nahin hua hai mere paas laibreree se lee huee pustaken hain main vah dene jan nahin ja pa raha hoon aur na lene ja pa raha hoon main koee rishtedaar aana band ho gaya tha mere aas-paas mere ek sage bhaee aur ek mere mausere bhaee rahate hain ham keval ek din ek doosare ke aa gae hue kaee koee aata jaata nahin hai ab main aata hoon apane nijee baat par hamane saaree ehatiyaat baratee jitanee saavadhaaniyaan ho sakatee hain maask lagaane se lekar sainitaij karana aur din mein 10 baar 50 baar haath dhona saabun se aur dastaane pahanana haind grup panna jitanee saavadhaaniyaan rakh sakate the ghar mein 24 ghante kee havaee aatee thee usakee chhuttee hamane maarch mein hee kar dee thee lekin phir bhee na jaane kahaan se mere bete ko korona vah aur usake dvaara mujhe aur meree patnee ko ham donon seeniyar siteejan se hamako koronaavaayaras 10 din aspataal mein rah kar aae hain ek maheena aaj mujhe poora hua hai vahaan par hona ko yaanee mein 19 taareekh ko 19 janavaree ko edamit hua tha aur aaj 19 pharavaree hai ek maheena hua hai mujhe aur abhee bhee vah shareer mein vah chhuttee nahin hai vah chhuttee nahin hai jo honee chaahie thee jo abhee aap aap ab ek tarah ka dar baith gaya hai main baahar nikalane ko man kam karata hai kyonki yahee kah dena ki jo jis par bhee jaane to karo na aap bhayaavah hai isamen koee shak nahin hai lekin abhee mumbee jaise shahar mein sthiti saamaany nahin huee hai aane vaala samay bataega ki isamen itana kitana samay aur lagana hai eeshvar se praarthana hai ki ab sab kuchh jaldee theek hoon taaki aam aadamee apanee saamaany jindagee jee saken dhanyavaad

#जीवन शैली

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आपको यह कब एहसास हुआ कि आप जो भी आज कर रहे हैं, यही आपके जीवन का लक्ष्य था?Aapako Yah Kab Ehasaas Hua Ki Aap Jo Bhee Aaj Kar Rahe Hain Yahee Aapake Jeevan Ka Lakshy Tha
अशोक वशिष्ठ  Bolkar App
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सुनिए अशोक जी का जवाब
कहानी लेखक, समीक्षक, अनुवादक, रिटायर्ड प्रिंसीपल
4:59
नमस्कार मैं अशोक वशिष्ठ आप मुझसे यह प्रश्न हर्ष कुशवाहा जी ने पूछा है मुझे खेद है कि मैं बहुत दिनों के बाद उत्तर दीपाराम क्योंकि मैं पिछले कई महीनों से पटल पर सक्रिय नहीं प्रश्न कि आपको यह कब एहसास हुआ कि आप जो भी आज कर रहे हैं यही आपके जीवन का लक्ष्य देखिए आप संभवत यही प्रश्न मेरे पास जो आया है मेरे पास नहीं आना चाहिए था लेकिन आया है तो मैं उसका उत्तर दूंगा मैं इस समय रिटायर्ड पर्सन हूं और मैं जिस पेशे से रिटायर हुआ हूं वह शिक्षक का पेशा मैं एक शिक्षक रहा हूं प्रिंसिपल होकर रिटायर हुआ हूं और रिटायर होकर भी 860 साल हो चुके हैं मुझे मैं आ शिक्षक रहा लेकिन मैं आपको बड़ी ईमानदारी से यह बताना चाहूंगा कि मैं वाकई में शिक्षक बनना नहीं चाहता था जिन परिस्थितियों में पला बढ़ा था या शिक्षा मेरी हुई थी उस समय जीवन मरण का प्रश्न था रोजी रोटी का प्रश्न था कुछ ऐसा करना ही था जिससे गुजारा हो परिवार चले भाइयों में बड़ा होने के नाते जिम्मेदारी थी बी ए करने के बाद मन में विचार आया कि क्या किया जा सकता है तो लगा कि शिक्षक बनकर अगर जीवन यापन किया जाए तो सबसे अच्छा पैसा हो सकता क्योंकि शिक्षकों का समाज में सम्मान है वेतन बहुत कम हुआ करता था मेरे चाचा जी मुंबई में शिक्षक अमित मलिक पोस्टकार्ड उनको गांव से दिखा में उत्तर प्रदेश पश्चिम उत्तर प्रदेश के गांव का रहने वाला मूल रूप से और उनको मैंने अपनी इच्छा जताई कि मैंने b.a. पास किया है मैं आपको मुझे अगर B.Ed में एडमिशन मुंबई में दिलवा दें तो मैं शिक्षक बन सकता हूं गुजारा हो जाएगा अच्छी तरह से और यह मेरा सौभाग्य था मैं तो इसे सौभाग्य कहूंगा आज कि उनका सकारात्मक उत्तर आया और मैं मुंबई में B.Ed करने आ गया और यहीं पर फिर भी ऐड करने के बाद में शिक्षक हो गया और मैं सही बता रहा हूं कि यह 11 का जीवन क्रम जिसको कहते हैं कभी-कभी कि आपको जिधर वक्त वह आकर ले जाए और उसमें चले जाएं और फिर अगर आप उस पर ढल जाए फिर मैं जब एक बार शिक्षक हुआ तो मुझे लगा कि जो भी काम करो वह दिल से करो उसके योग्य अपने आप को बनाइए ठीक है शिक्षा के रूप में मैं बन चुका था b.a. B.Ed हो गए m.a. B.Ed टीचर होते होते में m.a. B.Ed था तो अब मुझे लगने लगा कि अब मैं इस पेशे के योग्य बन वाकई में विशेष संयोग यह था कि मैं इंग्लिश टीचर था बाद में पॉलिटिकल साइंस का लेक्चरर हुआ फिर मैं अपने आप को उसके योग्य बनाया योग्य इसको कहते हैं कि 1 शिक्षक में जो गुण होने चाहिए कक्षा पता होना चाहिए शिक्षक एक अच्छा अध्ययन करने वाला होना चाहिए शिक्षक एक अच्छा रिटर्न होना चाहिए यदि अपनी बात को संप्रेषित कर सके विद्यार्थियों तक समाज तक पेरेंट्स तक अपनी बात पहुंचा सके और मैंने अपने आप को उस कसौटी पर धीरे धीरे धीरे धीरे कसना शुरू कर दिया और मैं फिर के साथ कह सकता हूं कि मैं एक सफल शिक्षक बना न केवल कि मैं कॉलेज में जूनियर कॉलेज जिसको इंटर कॉलेज कहा जाता है उसमें लेक्चरर हुआ और यहां पर उसी कॉलेज में में प्रिंसिपल को रिटायर हुआ आज मैं एक रिटायर्ड प्रिंसिपल हूं लेकिन जो सम्मान शिक्षक होने पर मिला तो संतुष्टि मिली आज भी संतुष्टि देती है मेरे हजारों पूर्व विद्यार्थी पूरी दुनिया में फैले हुए हैं मेरे संपर्क में हैं संयुक्त में उन पूर्व विद्यार्थियों के एक संगठन का मुंबई में रजिस्टर्ड संगठन है उसका मैं अध्यक्ष हूं चेयरमैन हूं और लगातार विद्यार्थियों के साथ संपर्क में हूं बहुत सारी विद्यार्थी आज भी मुझसे गाइडेंस लेते हैं तो पता है मैं वाकई में बनना नहीं चाहता था लेकिन जब बना तो अपने आप को उस में ऐसा डाला कि मैं ऐसा लग रहा है कि मैं शिक्षक होने के लिए पैदा हुआ था और आज तक मेरे से प्रेरणा पाकर न जाने कितने विद्यार्थियों को मैंने शिक्षक लेक्चरर और प्रोफेसर आज तक बनने के लिए प्रेरित किया है आप उसमें अपने आप को उठा लिए अपने लाइक उसको बनाइए और अपने अपने को उसके योग्य बना दीजिए ताकि आपको कोई पश्चाताप ना रहे और आप आनंद ले सके मैंने आनंद लिया जीवन में
Namaskaar main ashok vashishth aap mujhase yah prashn harsh kushavaaha jee ne poochha hai mujhe khed hai ki main bahut dinon ke baad uttar deepaaraam kyonki main pichhale kaee maheenon se patal par sakriy nahin prashn ki aapako yah kab ehasaas hua ki aap jo bhee aaj kar rahe hain yahee aapake jeevan ka lakshy dekhie aap sambhavat yahee prashn mere paas jo aaya hai mere paas nahin aana chaahie tha lekin aaya hai to main usaka uttar doonga main is samay ritaayard parsan hoon aur main jis peshe se ritaayar hua hoon vah shikshak ka pesha main ek shikshak raha hoon prinsipal hokar ritaayar hua hoon aur ritaayar hokar bhee 860 saal ho chuke hain mujhe main aa shikshak raha lekin main aapako badee eemaanadaaree se yah bataana chaahoonga ki main vaakee mein shikshak banana nahin chaahata tha jin paristhitiyon mein pala badha tha ya shiksha meree huee thee us samay jeevan maran ka prashn tha rojee rotee ka prashn tha kuchh aisa karana hee tha jisase gujaara ho parivaar chale bhaiyon mein bada hone ke naate jimmedaaree thee bee e karane ke baad man mein vichaar aaya ki kya kiya ja sakata hai to laga ki shikshak banakar agar jeevan yaapan kiya jae to sabase achchha paisa ho sakata kyonki shikshakon ka samaaj mein sammaan hai vetan bahut kam hua karata tha mere chaacha jee mumbee mein shikshak amit malik postakaard unako gaanv se dikha mein uttar pradesh pashchim uttar pradesh ke gaanv ka rahane vaala mool roop se aur unako mainne apanee ichchha jataee ki mainne b.a. paas kiya hai main aapako mujhe agar b.aid mein edamishan mumbee mein dilava den to main shikshak ban sakata hoon gujaara ho jaega achchhee tarah se aur yah mera saubhaagy tha main to ise saubhaagy kahoonga aaj ki unaka sakaaraatmak uttar aaya aur main mumbee mein b.aid karane aa gaya aur yaheen par phir bhee aid karane ke baad mein shikshak ho gaya aur main sahee bata raha hoon ki yah 11 ka jeevan kram jisako kahate hain kabhee-kabhee ki aapako jidhar vakt vah aakar le jae aur usamen chale jaen aur phir agar aap us par dhal jae phir main jab ek baar shikshak hua to mujhe laga ki jo bhee kaam karo vah dil se karo usake yogy apane aap ko banaie theek hai shiksha ke roop mein main ban chuka tha b.a. b.aid ho gae m.a. b.aid teechar hote hote mein m.a. b.aid tha to ab mujhe lagane laga ki ab main is peshe ke yogy ban vaakee mein vishesh sanyog yah tha ki main inglish teechar tha baad mein politikal sains ka lekcharar hua phir main apane aap ko usake yogy banaaya yogy isako kahate hain ki 1 shikshak mein jo gun hone chaahie kaksha pata hona chaahie shikshak ek achchha adhyayan karane vaala hona chaahie shikshak ek achchha ritarn hona chaahie yadi apanee baat ko sampreshit kar sake vidyaarthiyon tak samaaj tak perents tak apanee baat pahuncha sake aur mainne apane aap ko us kasautee par dheere dheere dheere dheere kasana shuroo kar diya aur main phir ke saath kah sakata hoon ki main ek saphal shikshak bana na keval ki main kolej mein jooniyar kolej jisako intar kolej kaha jaata hai usamen lekcharar hua aur yahaan par usee kolej mein mein prinsipal ko ritaayar hua aaj main ek ritaayard prinsipal hoon lekin jo sammaan shikshak hone par mila to santushti milee aaj bhee santushti detee hai mere hajaaron poorv vidyaarthee pooree duniya mein phaile hue hain mere sampark mein hain sanyukt mein un poorv vidyaarthiyon ke ek sangathan ka mumbee mein rajistard sangathan hai usaka main adhyaksh hoon cheyaramain hoon aur lagaataar vidyaarthiyon ke saath sampark mein hoon bahut saaree vidyaarthee aaj bhee mujhase gaidens lete hain to pata hai main vaakee mein banana nahin chaahata tha lekin jab bana to apane aap ko us mein aisa daala ki main aisa lag raha hai ki main shikshak hone ke lie paida hua tha aur aaj tak mere se prerana paakar na jaane kitane vidyaarthiyon ko mainne shikshak lekcharar aur prophesar aaj tak banane ke lie prerit kiya hai aap usamen apane aap ko utha lie apane laik usako banaie aur apane apane ko usake yogy bana deejie taaki aapako koee pashchaataap na rahe aur aap aanand le sake mainne aanand liya jeevan mein

#पढ़ाई लिखाई

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विज्ञान विषय बहुत कमजोर है और शिक्षक बनना चाहती हु कैसे बनु?Vigyan Vishay Bahut Kamjor Hai Aur Shikshak Banna Chahti Hu Kaise Banu
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4:40

#पढ़ाई लिखाई

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"ओल्ड इज गोल्ड" इस बात से जितने भी लोग सहमत हैं वह एक गाना सुनाएं☺?Old Is Gold Is Baat Se Jitne Bhe Log Sehmat Hain Vah Ek Gaana Sunaye
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5:00

#पढ़ाई लिखाई

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कम बोलना किस वक्त अच्छा होता है?Kam Bolna Kis Vakt Acha Hota Hai
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4:20

#जीवन शैली

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अपने बुरे समय को अच्छे समय में कैसे बदलें?apane bure samay ko achchhe samay mein kaise badalen
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#टेक्नोलॉजी

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रेल की पटरी पर गिट्टी क्यों होती है?rel kee pataree par gittee kyon hotee hai
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4:59

#जीवन शैली

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आपके जीवन की प्राथमिकता क्या है और क्यों?aapake jeevan kee praathamikata kya hai aur kyon
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4:59

#जीवन शैली

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आपके जीवन का ऐसा कौन सा पल था, जिसने आपकी जिंदगी बदल दी?aapake jeevan ka aisa kaun sa pal tha jisane aapakee jindagee badal dee
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4:58

#धर्म और ज्योतिषी

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कलयुग में हनुमान चालीसा सबसे ज्यादा प्रभावी है?kalayug mein hanumaan chaaleesa sabase jyaada prabhaavee hai
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3:46

#मनोरंजन

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आखिर हॉलीवुड की फिल्मों में ऐसा क्या खास है जो बॉलीवुड में नहीं मिलता?aakhir holeevud kee philmon mein aisa kya khaas hai jo boleevud mein nahin milata
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4:56

#जीवन शैली

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सबसे पहले धरती पर मुर्गी आयी या अंडा?sabase pahale dharatee par murgee aayee ya anda
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4:57

#रिश्ते और संबंध

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एक खुशहाल परिवार कैसा होता है?ek khushahaal parivaar kaisa hota hai
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#मनोरंजन

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बॉलीवुड के बारे में आपकी क्या राय है?boleevud ke baare mein aapakee kya raay hai
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#पढ़ाई लिखाई

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बोलकर के प्रतिभाशाली स्पीकर, यश जी हमारे बीच नही रहे, भावपूर्ण श्रधांजलि 🙏?bolakar ke pratibhaashaalee speekar yash jee hamaare beech nahee rahe bhaavapoorn shradhaanjali
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#जीवन शैली

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ज़िन्दगी में खुशियाँ कैसे लाये ?zindagee mein khushiyaan kaise laaye
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#जीवन शैली

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यदि कोई अपना खो जाता है तो डर रहता है उस डर को कैसे दूर करें?yadi koee apana kho jaata hai to dar rahata hai us dar ko kaise door karen
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#पढ़ाई लिखाई

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आपको कौन से विषय अच्छे लगते हैं और क्यों?aapako kaun se vishay achchhe lagate hain aur kyon
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#जीवन शैली

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इंसान को सपने क्यों आते हैं?insaan ko sapane kyon aate hain
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#जीवन शैली

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गांव के लोग क्या गंवार होते हैं?gaanv ke log kya ganvaar hote hain
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अच्छे लोग हमेशा पहले क्यों मरते हैं?achchhe log hamesha pahale kyon marate hain
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किन व्यवस्थाओं में अनुभव का होना बहुत जरूरी है?Kin Vyavsthaon Mein Anubhav Ka Hona Bahut Jaruri Hai
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किस प्रकार के आदमी को आप एक अच्छा इंसान मानते हैं?kis prakaar ke aadamee ko aap ek achchha insaan maanate hain
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आप अपने जीवन के कुछ संघर्षों की कहानियां बताएं?aap apane jeevan ke kuchh sangharshon kee kahaaniyaan bataen
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मै क्या करू, जब कोई मेरे पैसे वापस न दे?Mai Kya Karu Jab Kou Mere Paise Wapas Na De
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