#कुछ अलग

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Q.सत्य एक होता है या अनेक होते है?Q.saty Ek Hota Hai Ya Anek Hote Hai
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0:38

#कुछ अलग

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Q.कल्पान्त में जब शिव भगवान् का अवतरण होता है, तो उस समय को क्या कहा जाता है?Q.kalpaant Mein Jab Shiv Bhagavaan Ka Avataran Hota Hai To Us Samay Ko Kya Kaha Jaata Hai
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0:31

#कुछ अलग

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Q .सूर्यवन्शियो में कौन से चार गुणों की प्रधानता होती है?Q .sooryavanshiyo Mein Kaun Se Chaar Gunon Kee Pradhaanata Hotee Hai
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#धर्म और ज्योतिषी

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गरुड़ और चील के बीच का क्या अंतर है?Garud Aur Chil Ke Bich Ka Kya Antar Hai
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0:45

#कुछ अलग

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Q.आज के आधुनिक शिक्षा मानव को क्या नहीं प्राप्त करा पा रही है ?Q.aaj Ke Aadhunik Shiksha Maanav Ko Kya Nahin Praapt Kara Pa Rahee Hai
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0:20

#कुछ अलग

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#कुछ अलग

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.परमपिता परमात्मा अपना दिव्या कर्तव्य कैसे पूर्ण करते है?Parampita Paramatma Apna Divya Kartavy Kaise Purn Karte Hai
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0:32

#कुछ अलग

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संसार में कौन -२ से योग प्रसिद्ध है और उन सब में श्रेष्ठ कौन सा है ?Sansaar Mein Kaun 2 Se Yog Prasiddh Hai Aur Un Sab Mein Shreshth Kaun Sa Hai
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#कुछ अलग

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कौन सदैव "स्थितप्रज्ञ" की स्टेज में रहते है?Kaun Sadaiv Sthitapragya Ki Stage Mein Rehte Hai
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#कुछ अलग

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हमे राजयोग के निरंतर अभ्यास से अपनी कैसी अवस्था बनानी है ?Hume Rajyog Ke Nirantar Abhyas Se Apni Kaisi Avastha Banani Hai
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0:16

#जीवन शैली

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सुबह से शाम तक धन अर्जित करने पर भी जीवन तनावग्रस्त क्यों है?Subah Se Sham Tak Dhan Arjit Karne Par Bhe Jeevan Tanavgrast Kyun Hai
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0:26

#धर्म और ज्योतिषी

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देव प्रवृत्ति और आसुरी प्रवृत्ति में क्या अंतर है?Dev Pravritti Aur Asuri Pravritti Mein Kya Antar Hai
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0:41

#धर्म और ज्योतिषी

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सगुण और निर्गुण भक्ति परंपरा से क्या आशय है?Sagun Aur Nirgun Bhakti Parampara Se Kya Ashya Hai
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0:55
निर्गुण भक्ति का मतलब है उसे निराकार निर्विकार ईश्वर की पूजा करना जो की जन्म और मृत्यु से भी परे हैं ज्ञान से भी परे है जिसे लोग हैं शिवलिंग के रोज रूप में भी पूछते हैं जो जो तेरी बिंदु है जो परमधाम का रहने वाला है तो जिसमें आत्मा निर्विकार हो जाती है तो निर्विकार ही लोग निरंकार निर्विकार ईश्वर को वास्ते और शगुन का अर्थ है जैसे सतोगुण ब्रह्मा और रजोगुण विष्णु और तमोगुण शंकर जो इन तीन बड़े से बड़े देवताओं की उपासना करते हैं यह सगुण भक्ति है जो कि साकार रूप में जिनके जन्म और मृत्यु होते हैं यह सगुण भक्ति है धन्यवाद

#पढ़ाई लिखाई

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यहूदी लोग किसकी पूजा करते है और ज्ञान के हिसाब से क्या अर्थ हुआ?Yahudi Log Kiski Puja Karate Hai Aur Gyan Ke Hisab Se Kya Arth Hua
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0:24
कृपया जो लोग पहले यहूदी कहलाते थे वह भी अग्नि को पूछते थे नींद भी सबसे पहले अग्नि के रूप में प्रकट हुआ था और अर्थ वेद में रुद्र को ही अग्नि कहा जाता है रुद्र सिर्फ महादेव को कहते हैं धन्यवाद

#धर्म और ज्योतिषी

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Q.कौन है जिसकी पूजा सार्वभौम रीति से की जाती है?Kaun Hai Jiski Puja Sarvabhaum Riti Se Ki Jati Hai
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0:23

#मनोरंजन

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Q.भारत का वह कौन सा समय था जब परमपिता परमात्मा इस सृष्टि पर अवतरित हुए?Bhaarat Ka Vah Kaun Sa Samay Tha Jab Paramapita Paramatma Is Srishti Par Avatarit Huye
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0:28

#टेक्नोलॉजी

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Q.शास्त्र प्रसिद्ध यादव कौन है और उन्होंने क्या किया?Shastra Prasiddh Yadav Kaun Hai Aur Unhone Kya Kiya
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#पढ़ाई लिखाई

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आइसोलेशन शब्द का हिंदी अर्थ क्या होगा?Isolation Shabd Ka Hindi Arth Kya Hoga
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#पढ़ाई लिखाई

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घोड़ा का पर्यायवाची शब्द क्या होता है?Ghoda Ka Paryayvachi Shabd Kya Hota Hai
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0:22

#धर्म और ज्योतिषी

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#धर्म और ज्योतिषी

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नास्तिक कौन हैं?Nastik Kaun Hai
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#धर्म और ज्योतिषी

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रावण का असली नाम क्या था?Ravan Ka Asli Naam Kya Tha
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0:14

#खेल कूद

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अलग -२ धर्मो में जगदम्बा और जगतपिता को किस नाम से जाना जाता है?Alag 2 Dharmo Me Jagdamba Aur Jagatpita Ko Kis Naam Se Jana Jata Hai
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#खेल कूद

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1:12

#खेल कूद

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1 करोड़ में कितने लाख होते हैं?1 Karod Mein Kitne Laakh Hote Hai
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0:25
कृष्ण पूछा गया है एक करोड़ में कितने लाख होते तो दोस्तों 100 1000 के ₹1 होते हैं और एक करो रुपया होते हैं जब हमारे पास ₹2000 हैं तो हम बोलेंगे ₹100000 और जब ₹16 हो जाएंगे हम एक करो रुपया बोलते हैं धन्यवाद

#खेल कूद

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स्वर्ग और नरक क्या होते हैं?Swarg Aur Narak Kya Hote Hain
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0:59
दोस्तों सबसे पहले हम स्वार्थ का संधि विच्छेद करते हैं स्वयं अपने चिंतन करता रहता है आत्मा में लीन रहता है जिनके आत्माओं से ही संबंध है आत्मा आत्मा भाई भाई तो वह सदा आनंद में रहता है वरना रात 9:00 होता है मनुष्य मनुष्य जो अपने एक संबंधी पाले मोह माया का संसार पाल रखा है तो दमोह के कारण क्षेत्र वस्तु की जावे उसको प्राप्ति होती है तो आनंदित होता है और जब इच्छित वस्तु की प्राप्ति नहीं होती तो दुखी रहता है तो मनुष्य स्वयं नर्क और स्वर्ग का निर्माण करता है धन्यवाद

#पढ़ाई लिखाई

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10 क्विंटल में कितने किलो होते हैं?10 Quintal Me Kitne Kilo Hote Hain
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0:13
दोस्तों 100 किलो का एक कुंटल होता है और 10 कुंटल में 1000 किलो होते हैं और 10 कुंटल का है 1 टन होता है धन्यवाद

#टेक्नोलॉजी

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आत्मबोध और तत्वबौद्ध क्या होता है?Aatmabodh Aur Tatvabauddh Kya Hota Hai
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2:56
आत्मबोध और तत्वज्ञान की दो धाराएं हिमालय से निकलने वाली पतित पावनी गंगा और तरनतारन यमुना की तरह आत्मबोध का अर्थ है अपने उद्गम स्वरूप उत्तरदायित्व एवं लक्ष्य को समझना तदनुसार दृष्टिकोण एवं क्रियाकलाप का निर्धारण करना तत्वों का अर्थ है शरीर उसको उपयोग एवं अंत के संबंध में वस्तुस्थिति से परिचित होना सांसारिक पदार्थों एवं संबंधित व्यक्तियों के साथ जुड़े हुए संबंधों में घुसी हुई भ्रांतियों का निराकरण करना तथा इनके संबंध में बरती जाने वाली नीति का नए सिरे से मूल्यांकन आत्मबोध और उसके काम आने वाले पदार्थों एवं प्राणियों के साथ उचित तालमेल 9 को तत्व कहते हैं ठीक तरह जान लिया जाए तो समझना चाहिए कि ज्ञानसाधना का उद्देश्य पूरा हो गया हर दिन हर रात नई मौत का सूत्र आज बहुत और तत्व की दोनों मात्राओं का प्रयोजन पूरा करता है प्रातः काल नींद खुलते ही हर रोज यह भावना जागृत करनी चाहिए कि आज हमारा नवीनतम जन्म हुआ है और सोते समय तक एक रोज के लिए ही है और आदर्श रीति नीति अपनाते हुए जिया जाए इसके लिए सही है त्याग से लेकर रात को सोते समय तक का कार्यक्रम बनाना चाहिए जिसमें आज के लिए तनिक भी गुंजाइश ना तू रिश्तेदार आए अजीब का उपार्जन नित्यकर्म पारिवारिक उत्तरदायित्व का निर्वाह लोक कल्याण के लिए अधिकतम योगदान उपासना स्वाध्याय आदि के लिए क्रियाकलापों का अमूल्य समय करते हुए इस प्रकार निर्धारण करना चाहिए जिसमें आलस्य प्रमाद के लिए कोई गुंजाइश नारायण विश्राम के लिए रात्रि का समय पर्याप्त है जल्दी सोने और जल्दी उठने की आदत डाली जाना चाहिए समय कहे क्षण विवाह बाद ना जाने पावे और उसका उपयोग नर्तक कामों में नहीं करना चाहिए जीवन को सार्थक बनाने वाले निर्भय की उचित आवश्यकता पूरी करने वाले कार्यों की प्रमुखता रहे मनोरंजन की थकान दूर करने के लिए बीच-बीच में थोड़ा-थोड़ा उचित अवकाश देने के लिए गुंजाइश रखी जा सकती है किंतु गुप्ता पाला घूमने में बेकार समय नाकाम आना पड़े इसकी समुचित सतर्कता बरतनी चाहिए समय ही जीवन है धर्म की संपत्ति है इस मंत्र को पूरी तरह ध्यान में रखा जाए धन्यवाद

#टेक्नोलॉजी

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कुण्डलिनी जागरण के बारे में बताइए?Kundalini Jagran Ke Bare Mei Bataiye
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7:59
कुंडलिनी चक्र सात प्रकार के होते हैं जिनमें से पहला है मूलाधार चक्र का क्या करें जो कि गोदा और लिंग के बीच चार पंखुड़ियों वाला क्या करें आधार चक्रवती तो 99% लोगों की चेतना इसी चक्र पर अटकी रहती है और वे इस चक्र में रहकर मर जाते हैं जिनके जीवन में संभोग और निंदा की प्रधानता है उनकी ऊर्जा इसी चक्र के आसपास एकत्रित रहती है वित्त मंत्री ने की विधि मनुष्य में जी रहा है इसलिए लोग निंद्रा और समरूप पर संयम रखते हुए इस चक्र पर लगातार ध्यान लगाने से एक चक्र जागृत होने लगता है इसको जागृत करने का दूसरा नियम है या मोर नियम का पालन करते हुए साथ में रहना इस चक्र के जाग्रत होने पर व्यक्ति के भीतर वीरता निर्भीकता और आनंद का भाव जागृत हो जाता है सिद्धियां प्राप्त करने के लिए वीर निर्भीकता और जागरूकता का होना आवश्यक है दूसरा है स्वाधिष्ठान चक्र चक्र है जो लिंग मूल से चार अंगुल टू परिस्थितियां हैं अगर आपकी उर्जा इस जानकारी एकत्रित है तो आपके जीवन में बहुत प्रमोद मनोरंजन घूमना फिरना और मौज मस्ती करने की प्रधानता रहेगी यह सब करती हुई आपका जीवन कब व्यतीत हो जाएगा आपको पता भी नहीं चलेगा और हाथ खाली रह जाएंगे इसका मंत्र कैसे जागृत करें जीवन में मनोरंजन भी जरूरी है लेकिन मनोरंजन मनोरंजन भी व्यक्ति की चेतना को बेहोशी में धकेल ता है फिल्म सच्ची नहीं होती लेकिन उस से जोड़कर आप जो अनुभव करते हैं मैं आपके बेहोश जीवन जीने का प्रमाण है नाटक और मनोरंजन सच नहीं होते इसके जागृत होने पर क्रूरता अग्रवाल समाज आज्ञा अविश्वास आदि दुर्गुणों का नाश होता है सिद्धियां प्राप्त करने के लिए जरूरी है कि उक्त सारे दुर्गुणों समाप्त हो तभी से आपका द्वार खटखटा चक्र चक्र चक्र के अंतर्गत मणिपुर नामक तीसरा चक्र है जो 10 कमल पंक्तियों से युक्त व्यक्ति की चेतना यहां एकत्रित है उसे काम करने की धुन सी लगी रहती है ऐसे लोगों को करनी होगी कहते हैं यह लोग दुनिया का हर कार्य करने के लिए तैयार रहते हैं इसका मंत्रम इसे कैसे जागृत करें आपके कार्य को सकारात्मक आयाम देने के लिए इस चक्र पर ध्यान लगाएंगे पेड़ से सक्रिय होने से तृष्णा ईर्ष्या चुगली लाजवाब है गुरु नाम हो या दी तथा एकल की कमी दूर हो जाते हैं यह शक्ति प्रदान करता है करने के लिए आत्मानं होना जरूरी है आसमान होने के लिए अनुरोध करना जरूरी है कि आप शरीर नहीं आत्मा आत्मा शक्ति आत्मबल और आत्म सम्मान के साथ जीवन का कोई भी लक्ष्य दुर्लभ नहीं होता है अनाहत चक्र में स्थित स्वर्ण वर्ण का द्वादश दल कमल की पंखुड़ियों से युक्त स्वर्ण अक्षरों से सुशोभित चक्र अनाहत चक्र अगर आपकी उर्जा अनाहत में सक्रिय तो आप एक सृजनशील व्यक्ति होंगे और कुछ ना कुछ नया करने की सोचते हैं आप चित्रकार कवि कहानीकार इंजीनियर आदि हो सकते इसका मंत्र है कि हम ऐसे कैसे जागृत करें और ध्यान लगाने से यह चक्र जागृत होने लगता है खासकर रात्रि को सोने से पूर्व इस चक्र पर ध्यान लगाने से यह अभ्यास जागृत होने लगता है और सुषुम्ना इस चक्र को बेचकर ऊपर घमंड करने लगती है के सक्रिय होने पर लिख दा कपाट हिंसा कुतर्क चिंता में दम बा विवेक और अहंकार समाप्त हो जाते हैं इस चक्र के जाग्रत होने से व्यक्ति के भीतर प्रेम और संवेदना का जागरण होता है इसके जागृत होने पर व्यक्ति के समय ज्ञान श्वेता ही प्रकट होने लगता है व्यक्ति अत्यंत आत्मविश्वास शारीरिक रूप से जिम्मेदार एवं भावनात्मक रूप से संतुलित व्यक्तित्व बन जाता है ऐसा व्यक्ति अत्यंत ऐसी एवं बिना किसी स्वार्थ के मानवता प्रेमी एवं सर प्रिय बन जाता है 516 पंखुड़ियों वाला है सामान्य तौर पर यदि आपकी उर्जा इस चक्र के आस पास एकत्रित है तो आप अति शक्तिशाली होने का मंत्र हम कैसे जागृत करें कंठ में संयम करने और ध्यान लगाने से चक्र जागृत होने लगता है इसके जागृत होने पर 16 कलाओं और 16 मोतियों का ज्ञान हो जाता है इसके जागृत होने से जहां भूख और प्यास को रोका जा सकता है मई मौसम के प्रभाव को भी रोका जा सकता है भूमध्य यानी कि दोनों आंखों की बीच वृकुटी में आज्ञा चक्र सामान्य तौर पर इस व्यक्ति की ऊर्जा या ज्यादा सक्रिय व्यक्ति बौद्धिक रूप से संपन्न संवेदनशील और तेज दिमाग का बन जाता है लेकिन वह सब कुछ जानने के बावजूद भी मोहन रहता है इस बहुत जिद्दी भी कहते हैं इसका मंत्र है बिल्कुल ठीक है मत ध्यान लगाते हुए साक्षी भाव में रहने से यह चक्र जागृत होने लगता है यहां अपार शक्तियां और सिद्धियां ने बात करती है इस आज्ञा चक्र का जागरण वाले से यह सभी शक्तियां जाग पड़ती है और व्यक्ति एक सिद्ध पुरुष बन जाता है 7 बार चक्र की स्थिति मस्तिष्क के मध्य भाग में जवान छोटी रखते हैं यदि व्यक्ति यम नियम का पालन करते हुए यहां तक पहुंच गया है तो वह आनंद में शरीर में स्थित हो गया है ऐसे व्यक्ति को संसार सन्यास और सिद्धियों से कोई मतलब नहीं रहता है मूलाधार से होते हुए संस्था तारक पहुंचा जा सकता है लगातार ध्यान करते रहने से यह चक्र जागृत हो जाता है और व्यक्ति परमहंस के पद को प्राप्त कर लेता है इसका प्रभाव शरीर संरचना में इस स्थान पर अनेक महत्वपूर्ण विद्युतीय और जेबी विद्युत का संग्रह है यही मोक्ष का द्वार है धन्यवाद
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