#मनोरंजन

bolkar speaker
उत्तर भारतीयों को 'दक्षिण भारत'की फिल्में ज्यादा पसंद क्यों है?Uttar Bhaarateeyon Ko Dakshin Bhaaratakee Philmen Jyaada Pasand Kyon Hai
Rahul kumar Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए Rahul जी का जवाब
Unknown
0:53

#मनोरंजन

bolkar speaker
कौन से फिल्म में मिथक है, जो देखने में सच लगते हैं, लेकिन वास्तव में पूरी तरह से गलत होते हैं?Kaun Se Philm Mein Mithak Hai Jo Dekhane Mein Sach Lagate Hain Lekin Vaastav Mein Pooree Tarah Se Galat Hote Hain
Rahul kumar Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए Rahul जी का जवाब
Unknown
0:39

#मनोरंजन

Rahul kumar Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए Rahul जी का जवाब
Unknown
1:08

#मनोरंजन

bolkar speaker
a:b=3:5 to(2a+b):(3a-2b) =?<!doctype Html> <html Lang=en> <meta
Er.Surya Narayan Upadhyay Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए Er.Surya जी का जवाब
Private job
2:34

#मनोरंजन

bolkar speaker
वर्ल्ड फेमस लवर मूवी का सुपरहिट होने का क्या कारण था?Varld Phemas Lavar Moovee Ka Suparahit Hone Ka Kya Kaaran Tha
Abhishek Shukla ji Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए Abhishek जी का जवाब
Motivational speaker
3:16

#मनोरंजन

bolkar speaker
बॉलिवूड के आज दे दौर के सबसे प्रतिभाशाली ॲक्टर कौन हैं ?Bollywood Ke Aaj De Daur Ke Sabse Pratibhashali Actor Kaun Hain
मनीष कुमार Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए मनीष जी का जवाब
किसान
0:41

#मनोरंजन

bolkar speaker
भारतीय फिल्म उद्योग का नाम बॉलीवुड क्यों पड़ा?Bharateey Film Udyog Ka Naam Bollywood Kyun Pada
Vaishnavi Pandey Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए Vaishnavi जी का जवाब
Student / Artist
1:37

#मनोरंजन

bolkar speaker
56 और 82 का वर्गमूल?56 Aur 82 Ka Vargmool
Er.Surya Narayan Upadhyay Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए Er.Surya जी का जवाब
Private job
0:36
नमस्कार दोस्तों एक मित्र का सवाल है 56 और 82 का वर्गमूल दोस्तों मैं बताना चाहूंगा 56 का वर्गमूल 7.48 होगा और 82 का वर्गमूल 9.05 होगा दोस्तों जो भी इस सवाल को किए हैं आशा करता हूं उन्हें पसंद आया होगा धन्यवाद दोस्तों
Namaskaar doston ek mitr ka savaal hai 56 aur 82 ka vargamool doston main bataana chaahoonga 56 ka vargamool 7.48 hoga aur 82 ka vargamool 9.05 hoga doston jo bhee is savaal ko kie hain aasha karata hoon unhen pasand aaya hoga dhanyavaad doston

#मनोरंजन

bolkar speaker
बच्चों का नाम रखना एक चुनौती जैसा क्यों प्रतीत होता है?Bacho Ka Naam Rakhna Ek Chunati Jaisa Kyo Pratit Hota Hai
Daulat Ram sharma Shastri Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए Daulat जी का जवाब
Retrieved sr tea . social activist,
3:01
प्रणब भारतीयों की मानसिकता जो है वह दोगली की स्कूल की हो गई है पहले हमारे भारतीय पूर्वजन्म चौथे व बच्चों के नाम इसलिए भगवान के नाम पर भेजें जिससे कि वे स्वयं भोजन करें या ना करें लेकिन बच्चों के नाम जब हम बोलते रहेंगे तो उनसे हमारे भगवान का नाम भी स्मरण होता रहेगा और बच्चों का नाम भी अच्छा लगता है जैसे राम कृष्ण गोविंद श्याम सुंदर महेश आदि ऐसे नाम रखा लेकिन आज के जो वर्ग आज के जो भारतीय हैं वह नाम के भारतीय बाकी इनमें अधिकांश में वह वेस्टर्न कल्चर का कॉलिंग करते हैं वेस्टर्न कल्चर जो है वह ईट विद ए ड्रिंक बीमारी वाले स्थान पर आधारित खाओ पियो ऐश करो वह वाली प्रवृत्ति के हैं इसलिए बच्चों का नाम हम डंपी पिंकू पिंकू इस प्रकार के नाम रखते हैं जिन नामों का ना कोई अर्थ होता है ना कोई यह लाभकारी जबकि पहले ही तो पूर्वजों ने जो रखते थे उनका एक उद्देश्य होता था कि भगवान का स्मरण होता रहे भगवान का जाप होता रहे क्योंकि पुराने हिंदू शास्त्रों के अंतर्गत 1000 मील की आती है जिसने अपनी सीधे प्रेरणा से या साधु-संतों की प्रेरणा से अपने पुत्र का नाम उसने नारायण रख दिया था जबकि हकीकत में बुक अजामिल नाम का जो था वह डाकू सा अपराधी था बाकी था कुकर्मी था लेकिन अब जब उसकी मृत्यु आई तो उसने अपने पुत्र को पुकारा जो कि उसे दर्द होने लगे पीड़ा होने लगी तो उसने अपने पुत्र नारायण को आवाज दीप नारायण आओ मेरी रक्षा करो नारायण आओ मेरी रक्षा करो लेकिन उस नारायण कहने से भगवान विष्णु के भक्तों ने आकर के यमदूत ओं को रोक दिया और कहा कि नहीं अब इसकी मृत्यु हो चुकी क्योंकि इसने मरते समय भगवान विष्णु का नाम लिया है नारायण नारायण का जाप किया है इसलिए इसे मुक्ति दी जाएगी तो इस प्रकार की यह कथाएं प्रेरक कथाएं कथाएं हमको प्रेरित करती हैं कि हम उन्हें भारतीय संस्कृति की ओर लौटें और अपने बच्चों के नाम इस सब के नाम पर डाले हैं भगवती गौरी कृष्णा राधा सीता आदि या फिर महेश गणेश दिनेश श्री रमेश कृष्णा राम गोविंद गोपाल आदि विभिन्न ऐसी ईश्वर के नाम पर आधारित नाम
Pranab bhaarateeyon kee maanasikata jo hai vah dogalee kee skool kee ho gaee hai pahale hamaare bhaarateey poorvajanm chauthe va bachchon ke naam isalie bhagavaan ke naam par bhejen jisase ki ve svayan bhojan karen ya na karen lekin bachchon ke naam jab ham bolate rahenge to unase hamaare bhagavaan ka naam bhee smaran hota rahega aur bachchon ka naam bhee achchha lagata hai jaise raam krshn govind shyaam sundar mahesh aadi aise naam rakha lekin aaj ke jo varg aaj ke jo bhaarateey hain vah naam ke bhaarateey baakee inamen adhikaansh mein vah vestarn kalchar ka koling karate hain vestarn kalchar jo hai vah eet vid e drink beemaaree vaale sthaan par aadhaarit khao piyo aish karo vah vaalee pravrtti ke hain isalie bachchon ka naam ham dampee pinkoo pinkoo is prakaar ke naam rakhate hain jin naamon ka na koee arth hota hai na koee yah laabhakaaree jabaki pahale hee to poorvajon ne jo rakhate the unaka ek uddeshy hota tha ki bhagavaan ka smaran hota rahe bhagavaan ka jaap hota rahe kyonki puraane hindoo shaastron ke antargat 1000 meel kee aatee hai jisane apanee seedhe prerana se ya saadhu-santon kee prerana se apane putr ka naam usane naaraayan rakh diya tha jabaki hakeekat mein buk ajaamil naam ka jo tha vah daakoo sa aparaadhee tha baakee tha kukarmee tha lekin ab jab usakee mrtyu aaee to usane apane putr ko pukaara jo ki use dard hone lage peeda hone lagee to usane apane putr naaraayan ko aavaaj deep naaraayan aao meree raksha karo naaraayan aao meree raksha karo lekin us naaraayan kahane se bhagavaan vishnu ke bhakton ne aakar ke yamadoot on ko rok diya aur kaha ki nahin ab isakee mrtyu ho chukee kyonki isane marate samay bhagavaan vishnu ka naam liya hai naaraayan naaraayan ka jaap kiya hai isalie ise mukti dee jaegee to is prakaar kee yah kathaen prerak kathaen kathaen hamako prerit karatee hain ki ham unhen bhaarateey sanskrti kee or lauten aur apane bachchon ke naam is sab ke naam par daale hain bhagavatee gauree krshna raadha seeta aadi ya phir mahesh ganesh dinesh shree ramesh krshna raam govind gopaal aadi vibhinn aisee eeshvar ke naam par aadhaarit naam

#मनोरंजन

bolkar speaker
फिल्म gangubai kthiyavadi चर्चा में कही है कौन थी gangubai kthiyavadi?Film Gangubai Kathyawadi Charcha Mein Kahe Hai Kaun Thi Gangubai Kthyawadi
Vaishnavi Pandey Bolkar App
Top Speaker,Level 11
सुनिए Vaishnavi जी का जवाब
Student / Artist
3:33
नमस्कार मेरा नाम है वैष्णवी और आप मुझे सुन रहे हैं भारत के नंबर एक सवाल और जवाब करने वाले आप बोलकर पर सवाल किया है फिल्म गंगूबाई काठियावाड़ी चर्चा में क्यों है और कौन सी गंगूबाई काठियावाड़ी फिल्म गंगूबाई काठियावाड़ी चर्चा में है क्योंकि इसका टीचर आ चुका है इस फिल्म को डायरेक्ट किया है संजय लीला भंसाली ने फिल्म में गंगूबाई के किरदार को निभाया है आलिया भट्ट ने गंगूबाई की कहानी शुरू होती है 1960 के दशक में फिल्म जो है वह माफिया क्वींस ऑफ मुंबई नाम की एक किताब पर आधारित है जिसे एफ हुसैन जैदी और ग्रीन बोर्ड का स्नेह लिखा है इनका असली नाम गंगा जीवनदास काठियावाड़ी था इनका जन्म गुजरात के काठियावाड़ में हुआ था किताब के मुताबिक गंगूबाई कोठा चलाती थी और उन्हें धोखे में लाया गया था रखती थी और उनके घर के सदस्य पेशे से वकील हुआ करते थे रमणीक लाल नाम के अकाउंट से प्यार हो गया पता चला कि उनका परिवार इस रिश्ते से नाखुश हैं और वह इस रिश्ते को लेकर आज ही नहीं होंगे इसलिए मैं मुंबई आ गई लेकिन वहां शख्स ने जिसके लिए वे सब कुछ छोड़ कर उसके साथ मुंबई आ गई थी उसने धोखा दिया और मुंबई का कमाठीपुरा सेक्स वर्कर काम करना शुरू किया गंगूबाई ने कमाठीपुरा में हुए चुनाव में नस्ल की और 1970 के दशक में गंगूबाई का कमाठीपुरा में काफी नाम रहा है बाकी सेक्स वर्कर्स के लिए एक माह की तरह थी उन्हें सोने का काफी शौक था सुनहरी की नानी वाली साड़ी के साथ सुनहरा ब्लाउज पहना करती थी उन्होंने कितनी लड़कियों की मदद से और जबरदस्त शक्ति करण और महिला अधिकारों को लेकर उनका भाषण जो है वह काफी चर्चा में रहा था गंगूबाई को अपनी बहन माना था जब गंगूबाई की मृत्यु हुई तो वैसे उनकी तस्वीर और उनकी मूर्ति भी लगवाई गई उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से भी मुलाकात की थी मुंबई में ऐसो सेंट मैरी ने लिखा है कि इस मुलाकात में गंगूबाई की सजगता और स्पष्ट विचारों से नेहरू भी हैरान है कि नेहरू ने उनसे जवाब उनसे सवाल किया था कि वो इस धंधे में क्यों आए जब क्यों नहीं अच्छी नौकरी और अच्छा पति मिल सकता था तो उन्होंने नेहरू के जवाब में इस प्रश्न में जवाब देते हुए कहा अबे आप मुझे अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार कर लेते हैं तो मैं यह धंधा हमेशा के लिए छोड़ दूंगी नेहरू ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया तो गंगूबाई ने कहा कि प्रधानमंत्री जी नाराज मत होइए मैं सिर्फ अपनी बात साबित करना चाहती थी सलाह देना आसान है लेकिन उसे खुद अपनाना बेहद मुश्किल नेहरू के पास इसका कोई जवाब नहीं गंगूबाई की हर संभव मदद की उम्मीद है कि अब आपको पता चल गया होगा कि गंगूबाई कौन थी धन्यवाद
Namaskaar mera naam hai vaishnavee aur aap mujhe sun rahe hain bhaarat ke nambar ek savaal aur javaab karane vaale aap bolakar par savaal kiya hai philm gangoobaee kaathiyaavaadee charcha mein kyon hai aur kaun see gangoobaee kaathiyaavaadee philm gangoobaee kaathiyaavaadee charcha mein hai kyonki isaka teechar aa chuka hai is philm ko daayarekt kiya hai sanjay leela bhansaalee ne philm mein gangoobaee ke kiradaar ko nibhaaya hai aaliya bhatt ne gangoobaee kee kahaanee shuroo hotee hai 1960 ke dashak mein philm jo hai vah maaphiya kveens oph mumbee naam kee ek kitaab par aadhaarit hai jise eph husain jaidee aur green bord ka sneh likha hai inaka asalee naam ganga jeevanadaas kaathiyaavaadee tha inaka janm gujaraat ke kaathiyaavaad mein hua tha kitaab ke mutaabik gangoobaee kotha chalaatee thee aur unhen dhokhe mein laaya gaya tha rakhatee thee aur unake ghar ke sadasy peshe se vakeel hua karate the ramaneek laal naam ke akaunt se pyaar ho gaya pata chala ki unaka parivaar is rishte se naakhush hain aur vah is rishte ko lekar aaj hee nahin honge isalie main mumbee aa gaee lekin vahaan shakhs ne jisake lie ve sab kuchh chhod kar usake saath mumbee aa gaee thee usane dhokha diya aur mumbee ka kamaatheepura seks varkar kaam karana shuroo kiya gangoobaee ne kamaatheepura mein hue chunaav mein nasl kee aur 1970 ke dashak mein gangoobaee ka kamaatheepura mein kaaphee naam raha hai baakee seks varkars ke lie ek maah kee tarah thee unhen sone ka kaaphee shauk tha sunaharee kee naanee vaalee sari ke saath sunahara blauj pahana karatee thee unhonne kitanee ladakiyon kee madad se aur jabaradast shakti karan aur mahila adhikaaron ko lekar unaka bhaashan jo hai vah kaaphee charcha mein raha tha gangoobaee ko apanee bahan maana tha jab gangoobaee kee mrtyu huee to vaise unakee tasveer aur unakee moorti bhee lagavaee gaee unhonne tatkaaleen pradhaanamantree javaaharalaal neharoo se bhee mulaakaat kee thee mumbee mein aiso sent mairee ne likha hai ki is mulaakaat mein gangoobaee kee sajagata aur spasht vichaaron se neharoo bhee hairaan hai ki neharoo ne unase javaab unase savaal kiya tha ki vo is dhandhe mein kyon aae jab kyon nahin achchhee naukaree aur achchha pati mil sakata tha to unhonne neharoo ke javaab mein is prashn mein javaab dete hue kaha abe aap mujhe apanee patnee ke roop mein sveekaar kar lete hain to main yah dhandha hamesha ke lie chhod doongee neharoo ne is prastaav ko asveekaar kar diya to gangoobaee ne kaha ki pradhaanamantree jee naaraaj mat hoie main sirph apanee baat saabit karana chaahatee thee salaah dena aasaan hai lekin use khud apanaana behad mushkil neharoo ke paas isaka koee javaab nahin gangoobaee kee har sambhav madad kee ummeed hai ki ab aapako pata chal gaya hoga ki gangoobaee kaun thee dhanyavaad
URL copied to clipboard