#धर्म और ज्योतिषी

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केमिस्ट्री किसे कहते हैं?Kemistree Kise Kahate Hain
pooja Bolkar App
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1:35
नमस्कार ट्रस्ट है केमिस्ट्री किसे कहते हैं तो देखी केमिस्ट्री में हम मॉलिक्यूल मॉलिक्यूल क्या होते हैं जिनको मिलकर कोई भी एक चीज बन रही है मान लीजिए बॉल है उनको मिलकर मॉलिक्यूल बनाएंगे मॉलिक्यूल मिलकर वह एक बॉल बना रहे हैं तो वह बेसिक उसका स्ट्रक्चर ऑफ एटम हुआ तो उनके बारे में हम जो पढ़ते हैं वह हम केमिस्ट्री में पढ़ते हैं ठीक है इसके अलावा क्या मैं कल कितने बजे में चल रहा हूं सोते हैं जितने भी हमें शाम को पता है हमको साबुन पता है हमको पता है या और भी बहुत सारी चीजें हैं जिनको हम रोजाना इस्तेमाल करते हैं तो वह तब कहीं ना कहीं केमिकल रिएक्शन का ही रिजल्ट है उसी की मदद से जो है हम बना पाते हैं तो यह सब किस में हम पढ़ते हैं यह सब हम केमिस्ट्री में पढ़ते हैं इसी तरह से अगर हम बात करें फॉलो किया समितियों की तो उसके लिए पूर्ण क्या मजबूरी होती है तो उसमें जैसे मान लीजिए अगर आप एक कैब को काटकर हवा में रख देते वह ब्राउन हो जाता है तो वह क्यों होता है और के पीछे क्या वजह है अब यह तब हम तो है फूड केमिस्ट्री में केमिकल रिएक्शंस टो हैव होते हैं वह ऑक्सीजन जो है एनवायरनमेंट में उसके साथ वह आकर नालिया कर जाते हैं उसके लोग क्विनौनेज होते हैं आप उसमें वह याद करते हैं उसकी वजह तो 152 लहरा जाती है इसी तरह से सफलता बढ़ जाती है वह से उतर जाती है उसके पीछे क्या-क्या में चल रहा है यह सब जो है में पढ़ते हैं ताकि ब्रांच होती है कि मैं कल केमिस्ट्री है गणपति की केमिस्ट्री है ठंडी हवा पीरियोडिक केमिस्ट्री के अलावा फूट केमिस्ट्री है तो इस तरीके की स्थापना जो है वह वाला बंद है शुक्रिया

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प्रत्यास्थता किसे कहते हैं?Pratyaasthata Kise Kahate Hain
ekta Bolkar App
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Unknown
0:44
कल पूछा गया है प्रत्यास्थता किसे कहते हैं तो देखे प्रत्यास्थता जो इसको इंग्लिश में लास्ट इसे ही कहते हैं अब जब मैं इसका इंग्लिश नहीं समझते इलास्टिसिटी तो यह डिलीट करते इलास्टिक से इलास्टिक की प्रॉपर्टी होती क्या प्लास्टिक को खींचो और छोड़ दो प्लास्टिक अपनी पुरानी स्थिति में आ जाता है और यही गुण किसी भी वस्तु का यह * कि अगर आपने उसको किसी भी तरीके से उसकी एक्चुअल पोजीशन से विकृत कर दिया है उसको उसको खींच दिया उसको मरोड़ दिया या कुछ भी कर दिया और उसके बाद वह अपनी स्थिति में पुनः वापस हो जाता है तो उस वस्तु का यह गुण प्रत्यास्थता कहलाता है उम्मीद करती हूं आपको मेरा जवाब पसंद आया होगा धन्यवाद

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धार्मिक मान्यतानुसार,कौन सी कथा कल्याण करनेवाली और कलियुग के पापों को हरनेवाली है ?Dhaarmik Maanyataanusaarakaun See Katha Kalyaan Karanevaalee Aur Kaliyug Ke Paapon Ko Haranevaalee Hai
Vicky Kumar Bolkar App
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अभी हम पढ़ाई करते हैं
0:32
नमस्कार दोस्तों ने की बताएं बात कर रहा हूं मैं बताना चाहूंगा धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हमें रामायण कथा का रामायण हिंदी कैसे झुमका जानकारी साइन कोलीवाड़ा में हिसाब से काम करना है
Namaskaar doston ne kee bataen baat kar raha hoon main bataana chaahoonga dhaarmik maanyataon ke anusaar hamen raamaayan katha ka raamaayan hindee kaise jhumaka jaanakaaree sain koleevaada mein hisaab se kaam karana hai

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pooja Bolkar App
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Student
0:40
नमस्कार पृष्ठ है वह वास्तु शास्त्र के अनुसार रात को जिस कमरे में आप सोते हैं अगर दीपक को जलाकर टॉय तो से क्या फायदे होते हैं यदि आपको पता है तो कृपया बताएं तो दिखे वास्तु शास्त्र के अनुसार अगर हम अपने घर में दीपक जलाते हैं सुबह शाम जिस भी समय दीपक जलाते हैं तो हमारे घर में जो ऊर्जा है उसका प्रभाव जो है उस नकारात्मक होता है या नकारात्मक उर्जा जो है हमारे घर में आती है साथ-साथ नकारात्मक ऊर्जा जो है उसको भी दूर रखता है साथ ही इससे घर में सुख शांति व समृद्धि बनी रहती है शुक्रिया

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एक ही बात के दो मतलब के उदाहरण क्या है?Ek Hi Baat Ke Do Matlab Ke Udahran Kya Hai
Jyoti Malik Bolkar App
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Student
0:59
प्रश्न है एक ही बात के दो मतलब के उदाहरण क्या है एक ही बात के कई मतलब जैसे कि कहां पर सेंटेंस है कि क्या बात है यह कई प्रकार की इस्तेमाल होता है जिससे कि बात करते हैं कि प्रोत्साहन जैसे कि हम कहते हैं कि बेटा शाबाश तुमने तो परीक्षा में कमाल ही कर दिया अब अगर उसके अच्छे अंक नहीं आए हैं तो समझ लीजिए कि उसके पिता श्री उसको ताना मार रहे हैं या फिर अगर उसके सचमुच अंक बहुत अच्छे आए हैं तो समझ लीजिए कि उसके जो पिताश्री है उसको प्रोत्साहन करने के लिए ऐसा कर रहे हैं हम तो एक ही बात को कहने की कॉपी तरीके होते हैं जैसे की बात कर लीजिए बोली बोलना क्या बात है आजकल भाव नहीं दे रही हो यानी कि वह अपने भावनाओं को व्यक्त कर रहा है समझने वाले इसको किसी भी तरह से समझ सकते हैं धन्यवाद
Prashn hai ek hee baat ke do matalab ke udaaharan kya hai ek hee baat ke kaee matalab jaise ki kahaan par sentens hai ki kya baat hai yah kaee prakaar kee istemaal hota hai jisase ki baat karate hain ki protsaahan jaise ki ham kahate hain ki beta shaabaash tumane to pareeksha mein kamaal hee kar diya ab agar usake achchhe ank nahin aae hain to samajh leejie ki usake pita shree usako taana maar rahe hain ya phir agar usake sachamuch ank bahut achchhe aae hain to samajh leejie ki usake jo pitaashree hai usako protsaahan karane ke lie aisa kar rahe hain ham to ek hee baat ko kahane kee kopee tareeke hote hain jaise kee baat kar leejie bolee bolana kya baat hai aajakal bhaav nahin de rahee ho yaanee ki vah apane bhaavanaon ko vyakt kar raha hai samajhane vaale isako kisee bhee tarah se samajh sakate hain dhanyavaad

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Bhavesh Yadav Bolkar App
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West Bengal India is Great
1:14
ज्यादा तो मैं कुछ जानता नहीं हूं लेकिन इतना अवश्य ही जानता हूं कि कोई भी व्यक्ति अगर यदि आपके दरवाजे पर आ जाता है तो आपको कभी भी अगर कैदी के समय वह आपका दुश्मन भी था तो मुझे भी भूखे प्यासे लोड करना चाहते हैं अगर हो सके तो कल की खा लेंगे यह करने से आपको जरूर है कि पुण्य मिलेगा क्योंकि अभी का समय में ऐसे लोग नहीं करते हैं लेकिन हमेशा ऐसा मानता हूं और इतने ही नहीं बल्कि हमारे घर वाली का भी यही स्वभाव है ऐसे ही करते हो जो मैं बोलूंगा तो सुना है यार क्या पता नहीं है बल्कि आप और भी ज्यादा बढ़ जाता है द्वार से भूखा ना जाने दें
Jyaada to main kuchh jaanata nahin hoon lekin itana avashy hee jaanata hoon ki koee bhee vyakti agar yadi aapake daravaaje par aa jaata hai to aapako kabhee bhee agar kaidee ke samay vah aapaka dushman bhee tha to mujhe bhee bhookhe pyaase lod karana chaahate hain agar ho sake to kal kee kha lenge yah karane se aapako jaroor hai ki puny milega kyonki abhee ka samay mein aise log nahin karate hain lekin hamesha aisa maanata hoon aur itane hee nahin balki hamaare ghar vaalee ka bhee yahee svabhaav hai aise hee karate ho jo main boloonga to suna hai yaar kya pata nahin hai balki aap aur bhee jyaada badh jaata hai dvaar se bhookha na jaane den

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KamalKishorAwasthi Bolkar App
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घर पर ही रहता हूं बैटरी बनाने का कार्य करता हूं और मोबाइल रिचार्ज इत्यादि
1:56
सवाल ही धार्मिक मान्यता अनुसार मृतक प्राणी का सब पिंडी करण क्यों किया जाता है धार्मिक ग्रंथों में मृत्यु के बाद आत्मा की स्थिति का बड़ा सुंदर और वैज्ञानिक विवेचन भी मिलता है मृत्यु के बाद दशगात्र और 16 प्रकार जब तक मृत व्यक्ति की प्रेत संज्ञा रहती है पुराण के अनुसार वास्तु स्वस्थ शरीर आत्मा भौतिक शरीर छोड़ने पर धारण करती है प्रेत होती है प्रिय के अतिरेक की अवस्था यानी प्रेत है क्योंकि आत्मा जो सूट शरीर धारण करती है तब भी उसके अंदर मुंह माया भूख और प्यास का अतिरेक होता है सब पिंडन के बाद मित्रों में सम्मिलित हो जाता है तत्पश्चात पित्र श्राद्ध कर्म आरंभ होते हैं अतुल कृष्ण प्रतिपदा से लेकर अब तक ब्रह्मांड की ऊर्जा तथा उच्च ऊर्जा के साथ पृथ्वी पर व्याप्त रहते हैं इसलिए हिंदू धर्म शास्त्रों का उद्धार करने के लिए पुत्र की अनिवार्यता मानी गई है जन्मदाता माता पिता को मृत्यु उपरांत लोग विस्मृत न कर दी इसलिए उनका श्राद्ध करने का विशेष विधान भी बताया गया है भाद्रपद पूर्णिमा से अतुल कृष्ण पक्ष अमावस्या तक के 16 दिनों को पितृपक्ष कहते हैं जिसमें हम अपने पूर्वजों की सेवा भी करते हैं धन्यवाद
Savaal hee dhaarmik maanyata anusaar mrtak praanee ka sab pindee karan kyon kiya jaata hai dhaarmik granthon mein mrtyu ke baad aatma kee sthiti ka bada sundar aur vaigyaanik vivechan bhee milata hai mrtyu ke baad dashagaatr aur 16 prakaar jab tak mrt vyakti kee pret sangya rahatee hai puraan ke anusaar vaastu svasth shareer aatma bhautik shareer chhodane par dhaaran karatee hai pret hotee hai priy ke atirek kee avastha yaanee pret hai kyonki aatma jo soot shareer dhaaran karatee hai tab bhee usake andar munh maaya bhookh aur pyaas ka atirek hota hai sab pindan ke baad mitron mein sammilit ho jaata hai tatpashchaat pitr shraaddh karm aarambh hote hain atul krshn pratipada se lekar ab tak brahmaand kee oorja tatha uchch oorja ke saath prthvee par vyaapt rahate hain isalie hindoo dharm shaastron ka uddhaar karane ke lie putr kee anivaaryata maanee gaee hai janmadaata maata pita ko mrtyu uparaant log vismrt na kar dee isalie unaka shraaddh karane ka vishesh vidhaan bhee bataaya gaya hai bhaadrapad poornima se atul krshn paksh amaavasya tak ke 16 dinon ko pitrpaksh kahate hain jisamen ham apane poorvajon kee seva bhee karate hain dhanyavaad

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'परमहंसो की संहिता' किस धार्मिक ग्रंथ को कहा जाता है?Paramahanso Kee Sanhita Kis Dhaarmik Granth Ko Kaha Jaata Hai
सचिन पाठक Bolkar App
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Unknown
0:41
नमस्कार मित्रों मैं सचिन पाठक फिर से उपस्थित हूं आपके समक्ष एक नए प्रश्न के उत्तर के साथ जैसा कि आपका प्रश्न है कि परमहंस हो कि संहिता किस धार्मिक ग्रंथ को कहा जाता है तुझे कि मैं आपकी जानकारी के लिए बता दूं श्रीमद्भागवत गीता को परमहंस यकीन संहिता कहा जाता है ठीक है और देखिए क्योंकि जो आपकी परमहंस ओं की संहिता है वह जो भी आपके वैष्णव संत है उनका परम धन है क्योंकि जैसा कि कहा गया है जो कि आपकी परमहंस हो कि संहिता है या ना तो विरक्त संहिता है और ना ही यह गृहस्थ संहिता है
Namaskaar mitron main sachin paathak phir se upasthit hoon aapake samaksh ek nae prashn ke uttar ke saath jaisa ki aapaka prashn hai ki paramahans ho ki sanhita kis dhaarmik granth ko kaha jaata hai tujhe ki main aapakee jaanakaaree ke lie bata doon shreemadbhaagavat geeta ko paramahans yakeen sanhita kaha jaata hai theek hai aur dekhie kyonki jo aapakee paramahans on kee sanhita hai vah jo bhee aapake vaishnav sant hai unaka param dhan hai kyonki jaisa ki kaha gaya hai jo ki aapakee paramahans ho ki sanhita hai ya na to virakt sanhita hai aur na hee yah grhasth sanhita hai

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प्रलय के चार प्रकार कौन से हैं?Pralay Ke Chaar Prakar Kaun Se Hainl
Shruti Yadav Bolkar App
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3:18
सवाल ये है कि प्रलय के चार प्रकार कौन से हैं प्रलय के चार प्रकार हैं पहला किसी भी धरती पर से जीवन का समाप्त हो जाना दूसरा धरती का नष्ट होकर भक्तों बन जाना तीसरा सूर्य सहित ग्रह नक्षत्रों का नष्ट होकर वशीभूत हो जाना और चौथा धमाका ब्रह्म में लीन हो जाना अर्थात परिभाषा भी नहीं रहे हो नेशन अवस्था में हो जाना हिंदू शास्त्रों में मूल रूप से प्रलय के चार प्रकार हैं नित्य नैमित्तिक दोहे पाठ और प्राकृतिक अन्य पौराणिक गणना के अनुसार यह क्रम है नृत्य आत्यंतिक और प्राकृतिक प्रक्रिया प्रलय अनित्य प्रलयम वेदांत के अनुसार जीवो की मृत्यु होने रहने वाली मृत्यु को नित्य प्रलय कहते हैं जो जन्म लेते हैं उनकी प्रतिदिन की मृत्यु अर्थात प्रतिपल सृष्टि में जन्म और मृत्यु का चक्कर चलता रहता है आत्यंतिक प्रलय अत्यंत उपयोगी जनों के ज्ञान के द्वारा ब्रह्म में लीन हो जाने को कहते हैं अर्थात मोक्ष प्राप्त कर उत्पत्ति और प्रलय चक्र से बाहर निकल जाना ही आत्यंतिक प्रलय है ना नृत्य कला वेदांत के अनुसार प्रत्येक कल्प के अंत में होने वाला तीनों लोगों का चाहिए या पूर्ण विनाश हो जाना नाम रितिक सलाई कहलाता है पुराणों के अनुसार जब ब्रह्मा का 1 दिन समाप्त हो जाता है तब विश्व का नाश हो जाता है एक कल्प को ब्रह्मा का 1 दिन माना जाता है इसी प्रलय में धरती या अन्य ग्रहों से जीवन नष्ट हो जाता है नैतिक प्रलय काल के दौरान कल्प के अंत में आकाश से सूर्य की आग बरसती है इनकी भयंकर तपन से संपूर्ण जल राशि सूख जाती है समस्त जगत जलकर नष्ट हो जाता है इसके बाद और संवत अपना नाम काम एक अन्य लोगों के साथ सौ सौ वर्षो तक बरसता है वायु अत्यंत तेज गति से 100 वर्ष तक चलती है उसके बाद धीरे-धीरे सब कुछ शांत होने लगता है तब फिर से जीवन की शुरू होती है प्राकृत पल-पल ब्रह्मांड के सभी भूखंड या ब्रह्मांड को का मिट जाना नष्ट हो जाना याद स्वरूप हो जाना प्राकृत प्रलय कहलाता है वेदांत के अनुसार प्राकृतिक अवस्था प्रलय का वह उग्र रूप जिसमें तीनों लोगों सहित महत्व अर्थात प्रकृति के पहले और मूल्य कार तक का विनाश हो जाता है प्रकृति भी ब्रह्म में लीन हो जाती है अर्थात संपूर्ण ब्रह्मांड 0 अवस्था में हो जाता है ना जल होता है ना वायु ना अग्नि और ना ही आकाश शर्मा को सिर्फ अंधकार है जाता है पुराणों के अनुसार प्राकृतिक प्रलय ब्रह्मा के 100 वर्ष बीत जाने पर अर्थात ब्रह्मा की आयु पूर्ण होते ही जब जल में सब जल में लाए हो जाता है कुछ भी शेष नहीं रहता जीवो का आधार देने वाली है धरती भी प्रकाश जल राशि में डूबकर जल रूप हो जाती है उस समय जल अग्नि में अग्नि वायु में आकाश में और आकाश महत्व में प्रविष्ट हो जाता है नेतृत्व प्रकृति में प्रकृति पोले पुरुष विलीन हो जाती है उक्त चारों में से नामक एवं प्राकृतिक महाप्रलय ब्रह्मांड से संबंधित होते हैं तथा शेष दो पहले दे धारियों से संबंधित होते हैं
Savaal ye hai ki pralay ke chaar prakaar kaun se hain pralay ke chaar prakaar hain pahala kisee bhee dharatee par se jeevan ka samaapt ho jaana doosara dharatee ka nasht hokar bhakton ban jaana teesara soory sahit grah nakshatron ka nasht hokar vasheebhoot ho jaana aur chautha dhamaaka brahm mein leen ho jaana arthaat paribhaasha bhee nahin rahe ho neshan avastha mein ho jaana hindoo shaastron mein mool roop se pralay ke chaar prakaar hain nity naimittik dohe paath aur praakrtik any pauraanik ganana ke anusaar yah kram hai nrty aatyantik aur praakrtik prakriya pralay anity pralayam vedaant ke anusaar jeevo kee mrtyu hone rahane vaalee mrtyu ko nity pralay kahate hain jo janm lete hain unakee pratidin kee mrtyu arthaat pratipal srshti mein janm aur mrtyu ka chakkar chalata rahata hai aatyantik pralay atyant upayogee janon ke gyaan ke dvaara brahm mein leen ho jaane ko kahate hain arthaat moksh praapt kar utpatti aur pralay chakr se baahar nikal jaana hee aatyantik pralay hai na nrty kala vedaant ke anusaar pratyek kalp ke ant mein hone vaala teenon logon ka chaahie ya poorn vinaash ho jaana naam ritik salaee kahalaata hai puraanon ke anusaar jab brahma ka 1 din samaapt ho jaata hai tab vishv ka naash ho jaata hai ek kalp ko brahma ka 1 din maana jaata hai isee pralay mein dharatee ya any grahon se jeevan nasht ho jaata hai naitik pralay kaal ke dauraan kalp ke ant mein aakaash se soory kee aag barasatee hai inakee bhayankar tapan se sampoorn jal raashi sookh jaatee hai samast jagat jalakar nasht ho jaata hai isake baad aur sanvat apana naam kaam ek any logon ke saath sau sau varsho tak barasata hai vaayu atyant tej gati se 100 varsh tak chalatee hai usake baad dheere-dheere sab kuchh shaant hone lagata hai tab phir se jeevan kee shuroo hotee hai praakrt pal-pal brahmaand ke sabhee bhookhand ya brahmaand ko ka mit jaana nasht ho jaana yaad svaroop ho jaana praakrt pralay kahalaata hai vedaant ke anusaar praakrtik avastha pralay ka vah ugr roop jisamen teenon logon sahit mahatv arthaat prakrti ke pahale aur mooly kaar tak ka vinaash ho jaata hai prakrti bhee brahm mein leen ho jaatee hai arthaat sampoorn brahmaand 0 avastha mein ho jaata hai na jal hota hai na vaayu na agni aur na hee aakaash sharma ko sirph andhakaar hai jaata hai puraanon ke anusaar praakrtik pralay brahma ke 100 varsh beet jaane par arthaat brahma kee aayu poorn hote hee jab jal mein sab jal mein lae ho jaata hai kuchh bhee shesh nahin rahata jeevo ka aadhaar dene vaalee hai dharatee bhee prakaash jal raashi mein doobakar jal roop ho jaatee hai us samay jal agni mein agni vaayu mein aakaash mein aur aakaash mahatv mein pravisht ho jaata hai netrtv prakrti mein prakrti pole purush vileen ho jaatee hai ukt chaaron mein se naamak evan praakrtik mahaapralay brahmaand se sambandhit hote hain tatha shesh do pahale de dhaariyon se sambandhit hote hain

#धर्म और ज्योतिषी

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जुड़वा बच्चे पैदा होने के पीछे क्या वैज्ञानिक कारण?Judva Bachhe Paida Hone Ke Pichhe Kya Vaigyanik Karan
Deepak Perwani7017127373 Bolkar App
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सुनिए Deepak जी का जवाब
Job
2:28
रोशनी है जुड़वा बच्चे पैदा होने के लिए क्या वैज्ञानिक कारण है कि दोस्तों जुड़वा प्रेगनेंसी 2 तरीके की होती है एक होती है मोनू साहिब और दूसरी होती है डांस हाई कोर्ट हाईकोर्ट में आपकी जो है ऊपरी संडे को रिलीज करती है पहले वह जो है फैलोपियन ट्यूब में होता है पहले उसके बाद जवाब रिलेशन को मेंटेन करते हैं तो मेल कंफर्म हो संडे को फॉर डायल करता है और धीरे-धीरे करके अपनी आ जाओ फैलोपियन ट्यूब है वह दो हिस्सों में बांटा जाता है और फिर यह फैलोपियन ट्यूब से निकलकर एंड डोमिनियम की एंड मीडियम की लाइन में जाकर चिपक जाते हैं और वहीं पर प्लेसेंटा के अंदर इनका विकास होता है यह प्लेसेंटा कोशिश करते हैं उन्हें ढाई हाई कोर्ट में क्या होता है कि आपकी एवरी ही 2 घंटे में प्रोटींस करती और वह दोनों अंडे फैलोपियन ट्यूब में आते ही और यहां पर मैथ के दोष बा मैया दोनों शुभम को अलग-अलग फॉर डायल करते हैं और उसके बाद यह दोनों अंडे फैलोपियन ट्यूब से निकलकर एंडोमेट्रियम की लाइन में जाकर चिपक जाते हैं इनका अलग-अलग प्लेसेंटा बनता है और अलग अलग ही डेवलपमेंट होता है इसी वजह से जम्मू नो डायरो रायगढ़ प्रेगनेंसी होती है बच्चे दोनों एक जैसे जुड़वा लगते हैं वहीं ट्राई साइकिल टायर जाएगा उसमें बच्चे अलग अलग दिखाई देते हैं यह तो बात हुई कि मोनू जाएगा और ड्राइवर ड्राइवर एजेंसी की लेकिन दोस्तों अभी मैं आपको ही बताऊंगा उन दोनों के पीछे के दो प्रमुख कारण है वह है जो है शाकाहारी है सर्व हारी व्यक्ति का होना क्योंकि ना कारी सरकारी होने से उसको जो है जो लेडी हो चेक मेल हो सकती मेलो वह जो है जो डेहरी उद्योग डेहरी प्रोडक्ट होते हैं जैसे दूध दही पनीर मगर प्रोटीन वाले उसको सबसे ज्यादा हाईलाइट करते हैं और वही सबसे ज्यादा लेते हैं जो लोग जिसका शरीर में जरूरत से ज्यादा जो मेल फ्रीक्वेंसी होती है उनमें यह सारे जो है डेवलपमेंट होते हैं वह स्थान ज्यादा डेवलपर होता है और वह स्थान जो है मोनू हाइड्रोटिक नामक जुड़वा हारमोंस को जो है कारण बनता है बनने में जय माता की जय हिंदुस्तान
Roshanee hai judava bachche paida hone ke lie kya vaigyaanik kaaran hai ki doston judava preganensee 2 tareeke kee hotee hai ek hotee hai monoo saahib aur doosaree hotee hai daans haee kort haeekort mein aapakee jo hai ooparee sande ko rileej karatee hai pahale vah jo hai phailopiyan tyoob mein hota hai pahale usake baad javaab rileshan ko menten karate hain to mel kampharm ho sande ko phor daayal karata hai aur dheere-dheere karake apanee aa jao phailopiyan tyoob hai vah do hisson mein baanta jaata hai aur phir yah phailopiyan tyoob se nikalakar end dominiyam kee end meediyam kee lain mein jaakar chipak jaate hain aur vaheen par plesenta ke andar inaka vikaas hota hai yah plesenta koshish karate hain unhen dhaee haee kort mein kya hota hai ki aapakee evaree hee 2 ghante mein proteens karatee aur vah donon ande phailopiyan tyoob mein aate hee aur yahaan par maith ke dosh ba maiya donon shubham ko alag-alag phor daayal karate hain aur usake baad yah donon ande phailopiyan tyoob se nikalakar endometriyam kee lain mein jaakar chipak jaate hain inaka alag-alag plesenta banata hai aur alag alag hee devalapament hota hai isee vajah se jammoo no daayaro raayagadh preganensee hotee hai bachche donon ek jaise judava lagate hain vaheen traee saikil taayar jaega usamen bachche alag alag dikhaee dete hain yah to baat huee ki monoo jaega aur draivar draivar ejensee kee lekin doston abhee main aapako hee bataoonga un donon ke peechhe ke do pramukh kaaran hai vah hai jo hai shaakaahaaree hai sarv haaree vyakti ka hona kyonki na kaaree sarakaaree hone se usako jo hai jo ledee ho chek mel ho sakatee melo vah jo hai jo deharee udyog deharee prodakt hote hain jaise doodh dahee paneer magar proteen vaale usako sabase jyaada haeelait karate hain aur vahee sabase jyaada lete hain jo log jisaka shareer mein jaroorat se jyaada jo mel phreekvensee hotee hai unamen yah saare jo hai devalapament hote hain vah sthaan jyaada devalapar hota hai aur vah sthaan jo hai monoo haidrotik naamak judava haaramons ko jo hai kaaran banata hai banane mein jay maata kee jay hindustaan
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